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                <title>CyberSecurity - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ईरान-इजराइल संघर्ष: हैकर्स ने बनाया इजरायल की 'अकादमी ऑफ द हिब्रू लैंग्वेज' वेबसाइट को निशाना, लिखा विवादित संदेश—''हिब्रू सीखने की कोई ज़रूरत नहीं, नहीं पड़ेगी इसकी आवश्यकता''</title>
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                        <![CDATA[ईरान समर्थक समूह 'हंदाला' ने इजरायल की 'अकादमी ऑफ द हिब्रू लैंग्वेज' को निशाना बनाकर सेंधमारी की है। हमलावरों ने वेबसाइट पर "हिब्रू सीखने की जरूरत नहीं" जैसे संदेश लिखे और पूर्व प्रधानमंत्रियों का डीपफेक वीडियो जारी किया। सुरक्षा फर्म के अनुसार, 12 लाख रिक्वेस्ट प्रति सेकंड की दर से सेवाओं को ठप करने का प्रयास किया गया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-israel-conflict-hackers-target-israels-academy-of-the-hebrew-language/article-146276"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-cyber-attack.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। पश्चिम एशिया में गहराते संघर्ष के बीच बुधवार को ईरान से जुड़े हैकरों ने इजरायल के 'अकादमी ऑफ द हिब्रू लैंग्वेज' की वेबसाइट को निशाना बनाया। रिपोर्ट के अनुसार, हमलावरों ने वेबसाइट के स्वरूप को बदल दिया। साइट खोलने पर अंग्रेजी में एक विचलित करने वाला संदेश दिखाई देने लगा, "अब हिब्रू सीखने की कोई ज़रूरत नहीं है। आपको बहुत जल्द इसकी आवश्यकता नहीं पड़ेगी।"</p>
<p>रिपोर्टों के मुताबिक, यह सेंधमारी फिलिस्तीन समर्थक समूह 'हंदाला' द्वारा की गई है। यह घटना हाल ही में इज़राइल भर में वेबसाइटों और वित्तीय सेवाओं को बाधित करने के उद्देश्य से किए गए एक बड़े साइबर हमले के बाद हुई है। वेबसाइट पर दिख रहा संदेश ईरान से जुड़े हैकर समूह 'हंदाला' के लोगो के साथ दिखाई दिया। हंदाला ने हमले की जिम्मेदारी ली है।</p>
<p>साइबर सुरक्षा फर्म 'इम्परवा' की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले की तीव्रता लगभग 12 लाख रिक्वेस्ट प्रति सेकंड तक पहुँच गई थी, जिसका उद्देश्य सर्वर को ठप करना और ऑनलाइन सेवाओं को बाधित करना था। वेबसाइट हैक करने के अलावा, हंदाला समूह ने कथित तौर पर इंटरनेट पर एक दुष्प्रचार वीडियो भी जारी किया। अरब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस वीडियो में वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट का एक डीपफेक वीडियो दिखाया गया है।</p>
<p>हंदाला को एक फिलिस्तीन समर्थक हैक्टिविस्ट समूह माना जाता है, जो व्यापक रूप से ईरानी हितों के साथ जुड़ा हुआ है। इसका अभियान मुख्य रूप से इज़राइली संगठनों और उनके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाता है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 18:43:25 +0530</pubDate>
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                <title>भारत के लिए पाकिस्तान ने फिर बंद किया एयरस्पेस: एक महीने और बढ़ाई पाबंदी, भारतीय एयरलाइंस को हो रहा बड़ा घाटा</title>
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                        <![CDATA[केंद्र सरकार ने एआई-जनित डीपफेक को नियंत्रित करने के लिए नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भ्रामक कंटेंट की शिकायत पर उसे 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pakistan-again-closes-airspace-for-india-for-one-more-month/article-143865"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/india-and-pakistan.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने भारत में रजिस्टर्ड विमानों के लिए अपने एयरस्पेस को बंद करने की समय सीमा एक महीने बढ़ा दी है। अब यह पाबंदी 23 मार्च 2026 तक लागू रहेगी। इस दौरान भारत में रजिस्टर्ड कोई भी नागरिक या सैन्य विमान पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का उपयोग नहीं कर सकेगा। पाकिस्तान ने यह ऐलान तब किया है, जब मई 2025 में दोनों देशों के बीच हुए सैन्य झड़प के बाद तनाव चरम पर है। भारत ने भी पाकिस्तान में रजिस्टर्ड विमानों के भारतीय हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने पर रोक लगाई हुई है। इन प्रतिबंधों के कारण दोनों देशों की एयरलाइनों को लंबी रूट से उड़ान भरना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>पाक ने नोटिस जारी कर क्या कहा?</strong></p>
<p>पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ने इस संबंध में एक नया नोटिस टू एयरमेन (नोटम) भी जारी किया है। इसके अनुसार, इस दौरान सभी भारतीय-रजिस्टर्ड सिविल और मिलिट्री विमानों के पाकिस्तान के एयरस्पेस से गुजरने पर रोक रहेगी। यह बैन, जो पहली बार 23 अप्रैल, 2025 को लगाया गया था, अब लगभग 10 महीने से लागू है। पाकिस्तान ने भारतीय एयरलाइंस के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया, जिसके बाद नई दिल्ली ने 30 अप्रैल को पाकिस्तानी एयरलाइनों पर भी इसी तरह की पाबंदियां लगा दीं।</p>
<p><strong>हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध से किसे ज्यादा नुकसान?</strong></p>
<p>हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर पाबंदी लगने के कारण दोनों देशों की एयरलाइनों को ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। इस कारण उनकी ऑपरेशनल कॉस्ट और फ्लाइट रूट बढ़ गए हैं। हालांकि, इसका ज्यादा नुकसान भारत को हो रहा है। इसका प्रमुख कारण भारत में हवाई उड़ानों का बाजार पाकिस्तान से ज्यादा बड़ा होना है। पाकिस्तान भारत के मुकाबले काफी गरीब है और वहां ज्यादातर लोग महंगे किराए के कारण हवाई सफर नहीं कर पाते हैं। भारत के प्रमुख हवाई गंतव्यों में मध्य पूर्व के देश शामिल हैं। ऐसे में पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से होकर जाने में भारतीय एयरलाइंस को कम खर्च करना पड़ता है।</p>
<p><strong>एयर इंडिया को सबसे ज्यादा नुकसान</strong></p>
<p>एयर इंडिया ने पिछले साल भारत सरकार को एक चिट्ठी लिखकर आशंका जताई थी कि अगर पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध 1 साल तक जारी रहता है तो इससे लगभग 600 मिलियन डॉलर का घाटा हो सकता है। उसने भारतीय सरकार से इस नुकसान की भरपाई करने का अनुरोध किया था। एयरलाइन ने सरकार से आर्थिक नुकसान के अनुपात में सब्सिडी मॉडल की मांग की थी।</p>
<p><strong>भारत पाक तनाव अब भी जारी?</strong></p>
<p>भारत और पाकिस्तान आजादी के बाद से ही एक दूसरे के दुश्मन हैं। हालांकि, अप्रैल में पहलगाम हमले के बाद भारत की सैन्य कार्रवाई के बाद हालात और ज्यादा बिगड़ गए हैं। भारत ने न सिर्फ पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों को तहस-नहस कर दिया, बल्कि उन्हें बचाने आई पाकिस्तानी सेना को भी जबरदस्त सबक सिखाया। भारत ने सिंधु जल संधि को भी निलंबित कर दिया है और बाघा-अटारी सीमा के जरिए लोगों की आवाजाही भी प्रतिबंधित की हुई है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 11:33:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आज से एआई वीडियो पर सख्ती AI-Generated का लेबल अनिवार्य: नए आईटी एक्ट में एआई वीडियो, फर्जी और डीपफेक कंटेंट पर लगेगी लगाम, सरकार ने 10 फरवरी को जारी किए थे नए नियम</title>
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                        <![CDATA[केंद्र सरकार ने एआई-जनित डीपफेक को नियंत्रित करने के लिए नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भ्रामक कंटेंट की शिकायत पर उसे 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/from-today-strictness-on-ai-videos-ai-generated-label-mandatory-new/article-143863"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/ai-video.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। डिजिटल दौर में तेजी से बढ़ रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित वीडियो, खासकर डीपफेक और मॉर्फ्ड कंटेंट, को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने नए आईटी नियमों के तहत सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये दिशा-निर्देश मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों और आईटी नियम 2021 में किए गए संशोधनों के आधार पर लागू किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य एआई तकनीक के दुरुपयोग, फर्जी खबरों और डीपफेक वीडियो के प्रसार पर रोक लगाना है। भारत सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डीपफेक और भ्रामक कंटेंट के बढ़ते खतरों को देखते हुए आईटी नियम 2021 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। फरवरी 2026 में जारी नई गाइडलाइंस के तहत एआई से बने वीडियो को लेकर कड़े नियम लागू किए गए हैं। </p>
<p><strong>एआई डीपफेक को लेकर सरकार के नए नियम</strong></p>
<p>केंद्र सरकार ने AI-Generated कंटेंट को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए, जिनका पालन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को करना होगा। सरकार ने 10 फरवरी को नए नियम जारी किए हैं, जो 20 फरवरी से लागू होंगे। केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन किया है। इन नियमों के तहत अब अक से बने या बदले गए कंटेंट को भारत के डिजिटल कानूनों के दायरे में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।</p>
<p><strong>3 घंटे में हटेगा फर्जी गलत अक कंटेंट</strong></p>
<p>सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को डीपफेक या भ्रामक अक कंटेंट को तीन घंटे के अंदर हटाना होगा। अब 36 घंटे की जगह, सिर्फ 3 घंटे में एक्शन लेना होगा। इसके अलावा 15 दिन की विंडो घटाकर 7 दिन कर दी गई है और  24 घंटे की डेडलाइन को घटाकर 12 घंटे किया गया है।</p>
<p><strong>किन वीडियो पर यह नियम नहीं लागू होंगे? </strong></p>
<p>सभी एआई वीडियो पर लेबल लगाना जरूरी नहीं है। कुछ मामलों में छूट दी गई है:<br />रूटीन एडिटिंग : वीडियो की क्वालिटी सुधारने, कलर एडजस्टमेंट, बैकग्राउंड नॉइज कम करने, या क्रॉप करने जैसे मामूली बदलावों पर यह नियम लागू नहीं होगा।<br />शैक्षिक/तकनीकी उद्देश्य : यदि एआई का उपयोग केवल सीखने-सिखाने के उद्देश्य, दस्तावेज बनाने या वीडियो के तकनीकी पहलुओं (जैसे सबटाइटल) को बेहतर बनाने के लिए किया गया है और उससे कोई गलतफहमी पैदा नहीं होती है।<br />गैर-भ्रामक सामान्य सुधार: जो बदलाव कंटेंट का अर्थ नहीं बदलते, उन्हें छूट है। <br />फिल्म, वेब सीरीज या मनोरंजन के लिए बनाए गए एआई इफेक्ट्स, यदि स्पष्ट रूप से काल्पनिक हों, तो उन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।<br />व्यंग्य, पैरोडी या कलात्मक प्रस्तुति, जिसमें किसी को भ्रमित करने का इरादा न हो, नियमों के दायरे से बाहर मानी जा सकती है।<br />हालांकि, यदि इन श्रेणियों के वीडियो भी किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, निजता या सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं, तो उन पर कार्रवाई संभव होगी।</p>
<p><strong>नियम न मानने पर क्या होगा?</strong></p>
<p>यदि कोई प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसे मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा (जिसके तहत प्लेटफॉर्म्स पर यूजर के कंटेंट के लिए कानूनी कार्रवाई नहीं होती) छीन ली जा सकती है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर प्लेटफॉर्म्स इन नए नियमों के तहत एआई कंटेंट पर कार्रवाई करते हैं, तो धारा 79 के तहत मिलने वाली सुरक्षा उन पर लागू रहेगी यानी वे केवल यूजर के पोस्ट के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराए जाएंगे।</p>
<p><strong>यह क्यों किया जा रहा है? </strong></p>
<p>डीपफेक पर लगाम: मशहूर हस्तियों और सामान्य लोगों के चेहरे/आवाज का इस्तेमाल कर बनाए जा रहे फर्जी वीडियो से देश में अव्यवस्था और बदनामी फैल रही थी।<br />पारदर्शिता: सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल दुनिया में यूजर को यह पता चले कि वह असली वीडियो देख रहा है या एआई से बना नकली। </p>
<p><strong>नए आईटी नियमों (एआई वीडियो के लिए गाइडलाइन) में क्या है? </strong></p>
<p>अनिवार्य लेबलिंग : एआई या किसी अन्य तकनीक से बने फोटो, वीडियो या आॅडियो (जिसे सिंथेटिक कंटेंट कहा गया है) पर अब स्पष्ट और प्रमुख रूप से AI-Generated का लेबल लगाना अनिवार्य है।<br />3 घंटे में हटाया जाएगा : कोई एआई-जनित वीडियो या डीपफेक किसी की मानहानि करता है, अश्लील या भ्रामक है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सरकार या कोर्ट के आदेश के बाद 3 घंटे के भीतर हटाना होगा।<br />यूजर की जवाबदेही: कंटेंट अपलोड करते समय यूजर को खुद बताना होगा कि क्या सामग्री एआई-जनित है। प्लेटफॉर्म्स को भी इसे चेक करना होगा।<br />अनट्रेसेबल मेटा डेटा : प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई कंटेंट में ऐसी जानकारी हो जिससे यह पता चले कि यह असली नहीं है। <br />चुनाव, दंगा, सांप्रदायिक तनाव या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में भ्रामक वीडियो को तुरंत ब्लॉक किया जाए।<br />शिकायत निवारण तंत्र: हर प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारत में नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा।<br />डीपफेक पर सख्ती: किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी छवि या आवाज का एआई से उपयोग करने पर कार्रवाई की जाएगी।<br />बच्चों से जुड़ा कंटेंट: नाबालिगों से संबंधित एआई वीडियो पर विशेष निगरानी और त्वरित हटाने की व्यवस्था लागू होगी। बच्चों के मामले में सरकार अधिक संवेदनशील और सख्त है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 11:25:35 +0530</pubDate>
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                <title>जर्मनी, इजरायल ने 'साइबरडोम' बनाने के लिए किया समझौता, साइबर और ड्रोन हमलों का लगाएगा पता</title>
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                        <![CDATA[जर्मनी और इजरायल ने संयुक्त सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। साइबर व ड्रोन हमलों से निपटने के लिए जर्मन ‘डोम’ सिस्टम विकसित किया जाएगा।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/germany-and-israel-sign-agreement-to-build-cyberdome-to-detect/article-139274"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/israel,-germany-sign.png" alt=""></a><br /><p>बर्लिन। जर्मनी और इजरायल ने संयुक्त सुरक्षा कार्य को लेकर एक समझौता किया है, जिसमें साइबर हमलों को रोकने के लिए एक जर्मन 'डोम' का निर्माण भी शामिल है। </p>
<p>जर्मनी के द हैंडेल्सब्लाट अखबार ने की रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते पर जर्मनी गृहमंत्री मंत्री अलेक्जेंडर डोबिडट और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ने हस्ताक्षर किया। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार ने स्पष्ट किया कि यह समझौता जर्मनी गृहमंत्री मंत्री अलेक्जेंडर डोबिडट के इजराइल के दो दिवसीय दौरे के दौरान हुआ। </p>
<p>अखबार ने बताया है कि यह सिस्टम स्वचालित रूप से साइबर हमलों और ड्रोन हमलों का पता लगाएगा और उन्हें रोकेगा। यह समझौता जर्मनी और इजरायल के साइबर सुरक्षा क्षमताओं के घनिष्ठ एकीकरण का प्रावधान करता है।</p>]]>
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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 14:05:36 +0530</pubDate>
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