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                <title>MiddleEast - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ट्रंप के सहयोगियों के हवाले से खबर, पश्चिमी एशिया में सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करने पर विचार कर रहे राष्ट्रपति</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के अड़ियल रुख और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से राष्ट्रपति ट्रंप का धैर्य जवाब दे गया है। कूटनीति विफल होने पर अमेरिका अब लक्षित बमबारी और बड़े सैन्य अभियान पर विचार कर रहा है। ट्रंप की चीन यात्रा से पहले पश्चिमी एशिया में तनाव चरम पर है, जिससे क्षेत्र में युद्ध के बादल फिर मंडराने लगे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/news-quoting-trumps-aides-president-considering-resuming-military-action-in/article-153541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पश्चिमी एशिया में फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ट्रम्प के सहयोगियों के हवाले से यह जानकारी दी। ट्रम्प ने कहा कि संघर्ष को सुलझाने के लिए हो रही बातचीत में ईरान के रुख से लगातार निराशा हाथ लगी है और अब वह बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान फिर से शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने से अमेरिकी राष्ट्रपति का धैर्य जवाब दे रहा है और उनका यह भी मानना है कि ईरानी नेतृत्व के भीतर मतभेद हैं।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन के भीतर अब कई समूह बन गए हैं, जिनमें से कुछ बल प्रयोग के पक्ष में हैं और ईरान की स्थिति को कमजोर करने के लिए उस पर लक्षित बमबारी जारी रखने का प्रस्ताव दे रहे हैं, जबकि अन्य समूह संघर्ष को सुलझाने के लिए कूटनीतिक साधनों पर जोर दे रहे हैं।</p>
<p>अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका अमेरिका के लिए एक अलग मुद्दा बनी हुई है। अमेरिकी सरकार को यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान कितनी स्पष्टता से अमेरिका का पक्ष ईरान तक पहुँचा रहा है और वह ईरान के दृष्टिकोण को कितनी निष्पक्षता से बता रहा है। पश्चिमी एशिया संघर्ष में अमेरिका क्या रुख अपनाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है और राष्ट्रपति ट्रम्प की 13 से 15 मई तक प्रस्तावित चीन यात्रा से पहले किसी फैसले की संभावना कम है।</p>
<p>गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए थे, जिसमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए थे। अमेरिका और ईरान ने सात अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की थी। इसके बाद इस्लामाबाद में हुई वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई और अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 15:28:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के साथ समझौते की उम्मीद, खामेनेई ने दी युद्ध के खिलाफ चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रंप ने ईरान से समझौते की उम्मीद जताई, जबकि खामेनेई ने अमेरिकी कार्रवाई पर क्षेत्रीय युद्ध की चेतावनी दी। दोनों पक्षों के बयानों से पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-hopes-for-agreement-with-iran-khamenei-warns/article-141679"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(7).png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ 'समझौता होने की' उम्मीद जताई है, जबकि ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका कोई भी टकराव शुरू करता है तो वह क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। ट्रंप ने फ्लोरिडा के पाम बीच पर अपने मार-आ-लागो आवास से कहा कि अमेरिका ने पश्चिमी एशिया में भले ही अपने युद्ध पोत तैनात किये हैं लेकिन वह इस समस्या का कूटनीतिक हल चाहता है। इसके आगे ट्रंप ने कहा, हमने वहां दुनिया के सबसे बड़े, सबसे ताकतवर युद्ध पोत तैनात किये हैं। उम्मीद है कि आने वाले दो दिनों में हम कोई समझौता कर लेंगे। अगर समझौता नहीं होता है तो हमें पता चल जायेगा कि वह सही थे या नहीं।</p>
<p>बता दें कि ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया जब खामेनेई ने सोशल मीडिया एक्स पर जारी कई बयानों में अमेरिका को सैन्य कार्रवाई करने के खिलाफ चेतावनी दी थी। खामेनेई ने पोस्ट किया, अमेरिका को पता होना चाहिए कि अगर वे युद्ध शुरू करते हैं तो इस बार एक क्षेत्रीय युद्ध होगा। अमेरिकी कभी-कभी युद्ध की बात करते हैं और कहते हैं कि वे युद्ध पोतों और लड़ाकू विमानों के साथ आएंगे। यह कोई नयी बात नहीं है। ईरान ऐसी बातों से डरता नहीं। उन्हें ईरानियों को ऐसी चीजों से डराने की कोशिश नहीं करनी चाहिये।</p>
<p>खामेनेई ने कहा कि ईरान संघर्ष नहीं चाहता लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो ईंट का जवाब पत्थर से देगा। उन्होंने अमेरिका पर संसाधनों के लालच में ईरान पर दबाव बनाने का आरोप लगाया। खामेनेई ने कहा, हम लड़ाई शुरू करने वालों में नहीं हैं। हम किसी पर जुल्म नहीं करना चाहते। हम किसी देश पर हमला नहीं करना चाहते लेकिन अगर कोई हम पर हमला करता है या नुकसान पहुंचाता है तो उसे ईरान से करारा जवाब मिलेगा। </p>
<p>उन्होंने ईरान में अमेरिका के हस्तक्षेप के इतिहास की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान के कई आकर्षण केन्द्र हैं, जिनमें उसका तेल, उसके खनिज और उसकी भौगोलिक स्थिति दूसरे देशों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहा है। अमेरिका इस देश पर वैसा ही कब्जा चाहता है, जैसा पहले था। अमेरिका 30 साल से ज्यादा तक ईरान में रहा। ईरान के संसाधन, तेल, राजनीति और सुरक्षा उनके हाथों में थी। अब उनकी पकड़ ढीली हो गयी है तो वह उसे वापस पहले जैसा करना चाहते हैं। ईरान मजबूती से खड़ा है और उसे हर सवाल का जवाब देकर रोक रहा है। </p>
<p>इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास इराक़ची ने कहा था कि अमेरिका से उनका विश्वास उठ चुका है लेकिन वे परमाणु हथियारों पर निष्पक्ष और न्यायसंगत समझौते के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, मुझे युद्ध की चिंता नहीं है। मुझे गलत सूचना और दुष्प्रचार अभियान के कारण लिए जाने वाले सैन्य फैसलों की ङ्क्षचता है। जाहिर है कि कुछ लोग हैं जो अपने फायदे के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प को इस युद्ध में खींचना चाहते हैं। मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रम्प इतने समझदार हैं कि वह अपने फैसले खुद ले सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:18:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अरब देशों के साथ व्यापार, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग प्रगाढ बनाने को प्रतिबद्ध है भारत : पीएम मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने अरब देशों के साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक और स्वास्थ्य सहयोग मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई तथा क्षेत्रीय शांति प्रयासों में अरब लीग की भूमिका सराही।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/india-is-committed-to-deepening-cooperation-with-arab-countries-in/article-141493"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अरब देशों के साथ व्यापार और निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा तथा अन्य क्षेत्रों में सहयोग को और प्रगाढ बनाने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया है। पीएम मोदी ने शनिवार को यहां अरब देशों के विदेश मंत्रियों, अरब लीग के महासचिव तथा अरब देशों के प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात की। ये सभी प्रतिनिधि भारत-अरब विदेश मंत्रियों की द्वितीय बैठक में भाग लेने के लिए भारत यात्रा पर हैं। </p>
<p>इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने भारत और अरब जगत के लोगों के बीच गहरे और ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित किया। इससे वर्षों से परस्पर रिश्तों और सुदृढ़ हुए हैं। प्रधानमंत्री ने आने वाले वर्षों के लिए भारत-अरब साझेदारी के बारे में अपना दृष्टिकोण साझा किया और व्यापार एवं निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा तथा अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में सहयोग को और अधिक मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहरायी ताकि दोनों पक्षों के लोगों को परस्पर लाभ मिल सके।</p>
<p>पीएम मोदी ने फिलिस्तीन के लोगों के प्रति भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया और ग़ाजा शांति योजना सहित शांति प्रयासों का स्वागत किया। उन्होंने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और संवाद को बढ़ावा देने में अरब लीग की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना भी की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 18:38:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया में बढ़ती अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के बीच ट्रंप का दावा, कहा-ईरान बातचीत के लिए तैयार </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है। अमेरिका ने अंतिम तारीख तय की है, जबकि ईरान ने रक्षा और मिसाइल कार्यक्रम पर वार्ता से इनकार किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/amid-increasing-us-military-presence-in-west-asia-trump-claims/article-141489"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिगंटन। पश्चिमी एशिया में बढ़ती अमेरिका की सैन्य उपस्थिति के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है।ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, वे समझौता करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत शुरू करने के लिए एक अंतिम तारीख तय की गयी है, हालांकि उन्होंने सही समय नहीं बताया। </p>
<p>उन्होंने ईरान के पास एक अमेरिकी नौसैनिक पोत की तैनाती का जिक्र करते हुए कहा, उम्मीद है, हम एक समझौता करेंगे। अगर हम समझौता नहीं करते हैं, तो देखेंगे क्या होता है। अमेरिका ने जहां बातचीत के लिए तैयारी दिखाई, वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरान का रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि ईरान आपसी हितों और सम्मान के आधार पर बराबरी के स्तर पर बातचीत करने को तैयार है, लेकिन उन्होंने साफ तौर पर जोर दिया कि ईरान की रक्षा और मिसाइल क्षमताओं पर कभी बातचीत नहीं होगी। फिलहाल, बातचीत फिर से शुरू करने के लिए ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच कोई बैठक तय नहीं है। </p>
<p>अराघची ने कहा, मैं साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि ईरान की रक्षा और मिसाइल क्षमताएं कभी भी बातचीत का विषय नहीं होंगी। ये बयान ट्रंप की तरफ से बार-बार दी जा रही चेतावनियों के बीच आए हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर ईरान अमेरिकी मांगों को पूरा नहीं करता है, जिसमें उसके परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल विकास पर रोक शामिल है, तो संभावित सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। ईरान ने अमेरिका के किसी भी हमले का जवाब देने की चेतावनी दी है, जबकि तुर्की ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की है।</p>
<p>ट्रंप को हाल ही में, ईरान को निशाना बनाने वाले ज्यादा बड़े और ज्यादा आक्रामक सैन्य विकल्पों के बारे में बताया गया है। इन योजनाओं का मकसद ईरान के परमाणु और मिसाइल अवसंरचना को काफ़ी नुकसान पहुंचाना या सर्वोच्च नेता के प्रशासन को कमजोर करना है, जो पहले के विचारों से एक बड़ा बदलाव है।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि नये विकल्प दो हफ़्ते पहले समीक्षा किये गये विकल्पों से बेहतर हैं, जब ध्यान ईरानी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ़ हिंसा को रोकने के ट्रंप के वादे को लागू करने पर था। इन प्रस्तावों में ऐसे हालात शामिल हैं जिनमें अमेरिकी सेना सीधे ईरानी जमीन पर हो सकती है, जिसमें अहम ठिकानों पर लक्षित रेड भी शामिल हैं। </p>
<p>इससे पहले, अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी, जिसमें अमेरिकी सेना की तैयारी और रोक लगाने की क्षमता पर जोर दिया गया। हेगसेथ ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने चाहिए। उन्होंने कहा, उन्हें परमाणु क्षमता हासिल नहीं करनी चाहिए। हम इस राष्ट्रपति की युद्ध विभाग से जो भी उम्मीदें हैं, उन्हें पूरा करने के लिए तैयार रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 18:25:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान का समुद्र में सेना उतारने का ऐलान, हरमुज में सुरक्षित रूप से अभ्यास करें ईरान, जोखिम को ने दें जन्म: अमेरिका</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी सेंटकॉम ने ईरान की आईआरजीसी से हरमुज की खाड़ी में नौसैनिक अभ्यास सुरक्षित और पेशेवर तरीके से करने को कहा, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को खतरा न हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-should-practice-safely-in-hormuz-america-should-not-give/article-141435"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)-(9)1.png" alt=""></a><br /><p>टैंपा। अमेरिका के रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाली केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने ईरान की इस्लामी रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से अनुरोध किया है कि वह रविवार से हरमुज की खाड़ी में शुरू होने वाला अपना नौसैनिक अभ्यास सुरक्षित तरीके से करे और किसी भी अनावश्यक जोखिम को जन्म न दे। </p>
<p>सेंटकॉम ने अपने बयान में कहा, सेंटकॉम आईआरजीसी से आग्रह करता है कि वह घोषित नौसैनिक अभ्यास को इस तरह से करे जो सुरक्षित, पेशेवर हो और अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए नौपरिवहन की आजादी को अनावश्यक जोखिम से बचाये। हरमुज खाड़ी एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और एक जरूरी व्यापार गलियारा है, जो क्षेत्रीय आर्थिक समृद्धि में मदद करता है। किसी भी दिन, दुनिया के लगभग 100 व्यापारिक जहाज इस संकरी खाड़ी से गुजरते हैं।</p>
<p>ईरान ने गुरुवार को एलान किया था कि वह होरमुज की खाड़ी में रविवार से नौसैनिक अभियान शुरू करेगा। ईरान के प्रेस टीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की नौसेना एक और दो फरवरी को हरमुज खाड़ी में गोलीबारी के साथ अभ्यास करेगी। हरमुज खाड़ी एक रणनीतिक जलमार्ग है, जिससे दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई गुजरती है। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने पश्चिमी एशिया में अपना विमान वाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन भी तैनात किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका हवाला देते हुए ईरान से अपनी शर्ते मानने के लिये भी कहा है। ईरान का कहना है कि वह बातचीत के लिये तैयार है, लेकिन अगर अमेरिका किसी भी तरह का हमला करता है तो उसे तेज और व्यापक जवाब भी मिलेगा। </p>
<p>सेंटकॉम ने अपने बयान में कहा है कि वह ईरान के हरमुज की खाड़ी में अभ्यास करने के अधिकार का सम्मान करता है, लेकिन अमेरिकी सेना के करीब किसी भी तरह के असुरक्षित या गैर-पेशेवर रवैये को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। बयान में कहा गया, सेंटकॉम पश्चिमी एशिया में काम कर रहे अमेरिकी कर्मियों, जहाजों और विमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। हम आईआरजीसी की किसी भी असुरक्षित कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसमें फ्लाइट अभियान में लगे अमेरिकी सैन्य जहाजों के ऊपर से उड़ान भरना, जब इरादे साफ न हों तो अमेरिकी सैन्य संपत्तियों के ऊपर से कम ऊंचाई पर या हथियारों के साथ उड़ान भरना, अमेरिकी सैन्य जहाजों से टकराने की दिशा में हाई-स्पीड नावों का पास आना, या अमेरिकी सेना पर हथियार तानना शामिल है। </p>
<p>सेंटकॉम ने कहा, अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे ज्यादा प्रशिक्षित और घातक सेना है। वह उच्चतम स्तर के पेशेवर रवैये के साथ काम करना जारी रखेगी और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करेगी। ईरान के आईआरजीसी को भी ऐसा ही करना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 16:45:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>व्हाइट हाउस का बड़ा फैसला, इजरायल, सऊदी अरब को 15 अरब डॉलर के हथियारों के बिक्री को दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने इजरायल और सऊदी अरब को 15.67 अरब डॉलर की हथियार बिक्री को मंजूरी दी। इसमें अपाचे हेलीकॉप्टर और पैट्रियट मिसाइलें शामिल हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/white-houses-big-decision-israel-approves-sale-of-arms-worth/article-141434"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/trump-big-disi.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस ने ईरान में अशांति को लेकर तनाव के बीच पश्चिमी एशिया में अमेरिका के दो बड़े सहयोगी देशों, इजरायल और सऊदी अरब को कुल 15.67 अरब अमेरिकी डॉलर की बड़ी नयी हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे दी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार को एक बयान में यह जानकारी दी। </p>
<p>बयान के अनुसार, इजरायल को 6.67 अरब डॉलर की नयी बिक्री में चार अलग-अलग पैकेज शामिल हैं, जिसमें रॉकेट लॉन्चर और आधुनिक टारगेटिंग गियर से लैस 30 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर शामिल हैं। इसके अलावा इजरायली सेना के लिए 'संचार लाइनें बढ़ाने' के मकसद से 3,250 हल्के टेक्टिकल वाहन शामिल हैं।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि सऊदी अरब को नौ अरब डॉलर की बिक्री में 730 पैट्रियट मिसाइलें और संबंधित उपकरण शामिल हैं। इसका मकसद एक प्रमुख क्षेत्रीय गैर-नाटो सहयोगी का समर्थन करना है। विदेश विभाग ने कहा कि उसने शुक्रवार को पहले ही कांग्रेस को इन बिक्री की मंजूरी के बारे में सूचित कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 15:04:00 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका ईरान प्रतिबंध: अमेरिका ने लगाए ईरान के गृह मंत्री, शीर्ष अधिकारियों पर प्रतिबंध, हिंसक कार्रवाई के लिए बताया जिम्मेदार</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान में प्रदर्शनों पर हिंसा के आरोप में अमेरिका ने गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों और आईआरजीसी से जुड़े लोगों पर प्रतिबंध लगाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-iran-sanctions-america-imposes-sanctions-on-irans-interior-minister/article-141422"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)-(7)1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान में जारी प्रदर्शन के बाद अमेरिका ने ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा है कि राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों पर ईरानी प्रशासन पर हिंसक कार्रवाई के लिये ये सभी जिम्मेदार थे। अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा, मोमेनी ईरान इस्लामिक गणराज्य के हत्यारे कानून प्रवर्तन बल का संचालन करते हैं, जो हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या के लिये जिम्मेदार है।</p>
<p>बयान में अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) ने कहा, आज अमेरिका के वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय ने ईरानी लोगों के खिलाफ ङ्क्षहसक कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध अतिरिक्त कार्रवाई की। जिन अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए गये, उनमें ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी शामिल हैं।</p>
<p>इन प्रतिबंधों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स (आईआरजीसी) के वरिष्ठ अधिकारियों और ईरानी व्यवसायी बाबक मोर्तेजा जंजानी को भी निशाना बनाया गया है, जिन पर ईरानी लोगों से अरबों डॉलर के गबन का आरोप है। मंत्रालय ने जंजानी से जुड़े डिजिटल करेंसी विनिमय पर भी रोक लगा दी है।</p>
<p>अमेरिका के प्रतिबंधों के तहत नामित व्यक्तियों या संस्थाओं की कोई भी संपत्ति जब्त कर दी जाती है और अमेरिकी नागरिकों तथा कंपनियों को उनके साथ व्यापार करने से मना किया जाता है। वित्त मंत्रालय ने बताया कि जंजानी ने आईआरजीसी और व्यापक ईरानी शासन का समर्थन करने वाली परियोजनाओं को आर्थिक रूप से समर्थन दिया है।  </p>
<p>ओएफएसी ने पहली बार जंजानी से जुड़े दो डिजिटल संपत्ति विनिमय नामित किये। यह ईरानी अर्थव्यवस्था में काम करने वाले डिजिटल एसेट विनिमय के खिलाफ उसकी पहली कार्रवाई है। मंत्रालय के सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा, एक समृद्ध ईरान बनाने के बजाय शासन ने देश के तेल राजस्व के बचे हुए हिस्से को परमाणु हथियारों के विकास, मिसाइलों और दुनिया भर में आतंकवादी संगठन पर बर्बाद करना चुना है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के लोगों के साथ खड़े हैं और उन्होंने मंत्रालय को शासन के सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। </p>
<p>मंत्रालय ईरानी नेटवर्क और भ्रष्ट अभिजात वर्ग को निशाना बनाना जारी रखेगी जो ईरानी लोगों की कीमत पर खुद अमीरी में जीते हैं। प्रतिबंधित किये गये अन्य अधिकारियों में आईआरजीसी इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन के माजिद खादेमी, तेहरान प्रांत के आईआरजीसी सैय्यद अल-शोहादा कॉप्र्स के कमांडर ग़ोरबान मोहम्मद वलीजदेह, हमादान प्रांत के आईआरजीसी कमांडर हुसैन जारे कमाली, गिलान प्रांत के आईआरजीसी कमांडर हामिद दमघानी, और करमानशाह प्रांत के एलईएफ कमांडर मेहदी हाजियन शामिल हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 14:05:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>31 जनवरी को होगी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक, 22 अरब देशों की होगी भागीदारी, इन मुद्दों पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[भारत शनिवार को भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक की मेजबानी करेगा। 22 अरब देशों की भागीदारी से सहयोग, ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-arab-foreign-ministers-meeting-will-be-held-on-january-31/article-141149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)-(2)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत शनिवार को यहां भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक की मेजबानी करेगा जिसमें सभी 22 अरब देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को यहां बताया कि इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात करेंगे। इसमें अरब लीग के सदस्य देशों के विदेश मंत्री तथा अरब लीग के महासचिव भाग लेंगे।</p>
<p>दोनों पक्षों की दूसरी बैठक दस वर्षों के अंतराल के बाद हो रही है। पहली बैठक 2016 में बहरीन में हुई थी। पहली बैठक के दौरान मंत्रियों ने सहयोग के पाँच प्राथमिक क्षेत्रों-अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति-की पहचान की थी तथा इन क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियों का प्रस्ताव रखा था। आगामी बैठक से मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने और भारत-अरब साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ एवं व्यापक बनाने की अपेक्षा है।</p>
<p>भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक भारत और अरब देशों के बीच साझेदारी को आगे बढ़ाने वाली सर्वोच्च संस्थागत व्यवस्था है। इस साझेदारी को मार्च 2002 में औपचारिक रूप दिया गया, जब भारत और अरब लीग के बीच संवाद प्रक्रिया को संस्थागत स्वरूप देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके बाद दिसंबर 2008 में तत्कालीन अरब लीग महासचिव अमर मूसा की भारत यात्रा के दौरान अरब-भारत सहयोग मंच की स्थापना के लिए एक सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिसे 2013 में इसकी संरचनात्मक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संशोधित किया गया। भारत, 22 सदस्य देशों वाले पैन-अरब संगठन अरब लीग में पर्यवेक्षक है।</p>
<p>यह पहली बार होगा जब भारत भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा। इस बैठक में सभी 22 अरब देशों की भागीदारी होगी, जिनका प्रतिनिधित्व विदेश मंत्रियों, अन्य मंत्रियों, राज्य मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा अरब लीग सचिवालय द्वारा किया जाएगा। बैठक से पहले शुक्रवार को भारत-अरब वरिष्ठ अधिकारियों की चौथी बैठक होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 11:43:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का किया ऐलान, इस देश के साथ मिलकर करेंगे काम</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा युद्ध और अन्य वैश्विक विवादों के समाधान के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ नामक नए अंतरराष्ट्रीय मंच की घोषणा की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-announced-board-of-peace-will-work-together-with-this/article-140518"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump-shanti.png" alt=""></a><br /><p>अमेरिका। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा युद्ध और अन्य वैश्विक विवादों के समाधान के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ नामक नए अंतरराष्ट्रीय मंच की घोषणा की है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान ट्रंप ने बताया कि इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा के पुनर्निर्माण और प्रशासन की निगरानी के साथ-साथ वैश्विक संघर्षों का समाधान करना है। </p>
<p>बोर्ड में पाकिस्तान समेत कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हैं। इसकी स्थायी सदस्यता की कीमत एक अरब डॉलर रखी गई है। ट्रंप ने कहा कि कई देश इसमें शामिल होने के इच्छुक हैं और भविष्य में यह संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करेगा। गाजा पर ट्रंप ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि हमास को हथियार डालने होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 18:04:54 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान के साथ 168 करोड़ डॉलर का है भारत का द्विपक्षीय व्यापार, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने जारी किए आंकड़े</title>
                                    <description><![CDATA[भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार 168.30 करोड़ डॉलर रहा, निर्यात आयात से अधिक, पिछले वर्षों में व्यापार स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/indias-bilateral-trade-with-iran-is-worth-168-crore-dollars/article-139480"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/india-and-russia.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ईरान के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार महज 168.30 करोड़ डॉलर है, और इसमें व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में ईरान को 124.12 करोड़ डॉलर का निर्यात किया। यह भारत के कुल निर्यात का 0.14 प्रतिशत है। दूसरी तरफ ईरान से भारत का आयात 44.18 करोड़ डॉलर रहा जो देश के कुल आयात का महज 0.06 प्रतिशत है। </p>
<p>दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार के स्तर में पिछले कुछ समय से लगातार गिरावट आ रही है। पिछले चार वित्त वर्षों में से तीन में व्यापार घटा है। इसमें 2023-24 में 20.75 प्रतिशत और 2024-25 में 8.90 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी। इससे पहले, 2020-21 में भी यह 9.10 फीसदी घटा था जबकि 2022-23 में 21.77 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गयी थी।</p>
<p>पिछले साल जहां ईरान से आयात में 29.32 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गयी, वहीं निर्यात 0.14 प्रतिशत बढ़ा। भारत ईरान से मुख्य रूप से फलों, सूखे मेवे, खजूर आदि का आयात करता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 16:28:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी सरकार का बड़ा फैसला, अपने नागरिकों से तुंरत ईरान छोड़ने का दिया आदेश, जानें क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान में हिंसक प्रदर्शनों के बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने की अपील की, सड़क मार्ग और उड़ान प्रतिबंधों की चेतावनी जारी की, ऑनलाइन दूतावास द्वारा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-decision-of-us-government-ordered-its-citizens-to-leave/article-139451"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/220922-donald-trump-mjf-1544-99e118.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान में अमेरिका के ऑनलाइन दूतावास ने अपने नागरिकों से ईरान से तुरंत बाहर निकलने का आग्रह किया है। पूरे ईरान में इस समय विरोध प्रदर्शन बढऩे और उनके हिंसक रूप लेने पर यह चेतावनी जारी की गई हैं। ऑनलाइन दूतावास ने अपनी वेबसाइट पर जारी बयान में कहा, दूतावास ने प्रदर्शनों के कारण गिरफ्तारियां, सड़क अवरोध, परिवहन में बाधा और इंटरनेट सेवा बंद होने की आशंका जतायी है। दूतावास ने अमरीकी नागरिकों को आर्मेनिया और तुर्की के रास्ते सड़क मार्ग से ईरान छोडऩे को कहा है।</p>
<p>साथ ही बयान में यह भी कहा गया कि अमेरिकी-ईरानी दोहरी राष्ट्रीयता वाले नागरिकों को ईरानी पासपोर्ट का उपयोग करके ईरान छोडऩा होगा, क्योंकि ईरानी सरकार दोहरी नागरिकता को मान्यता नहीं देती। बयान में चेतावनी दी गई कि, अमेरिकी नागरिक ईरान में पूछताछ, गिरफ्तार और हिरासत में लिए जाने के गंभीर जोखिम में हैं। एयरलाइनों ने ईरान के लिए या वहां से आने-जाने वाली उड़ानों को सीमित या रद्द कर दिया है, और कई सेवाओं को शुक्रवार तक निलंबित कर दिया गया है। </p>
<p>अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने लंबे समय से ईरान को स्तर-4 यात्रा न करें। गंतव्य घोषित किया है। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि अमेरिकी नागरिक किसी भी कारण से वहां यात्रा न करें और जो लोग ईरान में हैं उन्हें गंभीर सुरक्षा जोखिम के कारण तुरंत देश छोड़ देना चाहिए। </p>
<p>सोमवार को व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लीविट ने कहा कि कूटनीति अमेरिका के ईरान नीति में प्राथमिक दृष्टिकोण बनी हुई है, हालांकि, ट्रम्प प्रशासन ने जरूरत पडऩे पर सैन्य विकल्पों को भी खारिज नहीं किया। लीविट ने कहा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अगला कदम क्या होगा, केवल वही जानते हैं। इसलिए दुनिया को इंतजार और अनुमान लगाना होगा और हम उन्हें निर्णय लेने देंगे।</p>
<p>इससे पहले रविवार को ट्रंप ने कहा था कि उनका प्रशासन कुछ बहुत मजबूत विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिसमें ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई शामिल है और ईरान अमेरिकी लाल रेखा पार करना शुरू कर रहा है। ईरान में कोई अमेरिकी दूतावास या कांसुलर कार्यालय नहीं है और तेहरान में स्विस दूतावास अमेरिकी हितों की रक्षा कर रहा है लेकिन उसकी सेवाएं सीमित हैं। ईरान के कई शहरों में राष्ट्रीय मुद्रा रियाल में भारी गिरावट और लंबे समय से चल रही आर्थिक कठिनाइयों के विरोध में दिसंबर के अंत से विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। अशांति में सुरक्षा बलों और नागरिकों दोनों की मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 14:31:43 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान में होने वाला है कुछ बड़ा! ट्रंप ने कहा 'कई बेहद कड़े विकल्पों' पर विचार कर रहा है अमेरिका</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कड़े विकल्पों, संभावित सैन्य कार्रवाई सहित, पर विचार कर रहा है और स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/something-big-is-going-to-happen-in-iran-trump-said/article-139356"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/trump-big-disi.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि उनका प्रशासन ईरान के खिलाफ कई बेहद कड़े विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिनमें संभावित सैन्य कार्रवाई भी शामिल है। राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान 'एयर फोर्स वन' में पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या ईरान ने किसी ऐसी लाल रेखा को पार कर लिया है जिससे जवाबी कार्रवाई जरूरी हो जाए, ट्रंप ने कहा, ऐसा लगता है कि वे ऐसा करना शुरू कर रहे हैं। हम इस पर बहुत गंभीरता से नजर रखे हुए हैं। सेना भी इस पर विचार कर रही है और हम कई बेहद कड़े विकल्पों पर काम कर रहे हैं। हम जल्द ही कोई फैसला करेंगे।</p>
<p>राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि उन्हें ईरान की स्थिति पर हर घंटे रिपोर्ट दी जा रही है। ट्रंप ने यह खुलासा भी किया कि ईरान के नेताओं ने उनसे संपर्क किया है और बातचीत की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा, ईरान के नेताओं ने फोन किया। वे बातचीत करना चाहते हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रविवार को अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप को ईरान में हो रही अशांति पर जवाब देने के विकल्पों के बारे में मंगलवार को जानकारी दी जाएगी।</p>
<p>रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन इस बैठक में शामिल होंगे। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार, विचार-विमर्श शुरुआती चरण में होने के कारण इस बैठक में ट्रंप के किसी अंतिम निर्णय की उम्मीद नहीं है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन के विकल्पों में ईरान में सरकार विरोधी ऑनलाइन स्रोतों को बढ़ावा देना, ईरानी सैन्य और नागरिक ठिकानों पर गुप्त साइबर हथियारों का इस्तेमाल, देश पर और अधिक प्रतिबंध लगाना तथा सैन्य हमले शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा एलन मस्क की सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा स्टारलिंक के टर्मिनल ईरान भेजने की संभावना भी शामिल है।</p>
<p>पेंटागन ने संभावित सैन्य हमलों की तैयारी में किसी भी बल की तैनाती नहीं की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमले शुरू करने के साथ-साथ क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बलों की सुरक्षा के लिए भी संसाधन जुटाने होंगे। हाल ही में अमेरिका ने अपने विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड और उसके स्ट्राइक ग्रुप को भूमध्य सागर से लैटिन अमेरिका भेज दिया है, जिसके बाद फिलहाल न तो मध्य पूर्व और न ही यूरोप में कोई अमेरिकी विमानवाहक पोत तैनात है।</p>
<p>इस बीच, ईरान की संसद के स्पीकर ने रविवार को कथित तौर पर चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने पहले कार्रवाई की, तो ईरान मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करेगा। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार को ईरान, सीरिया और अन्य मध्य पूर्वी मुद्दों को लेकर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की।</p>
<p>ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अगर ईरान इसमें शामिल होता है, तो अमेरिका वहां सेना नहीं भेजेगा। उन्होंने कहा, अगर वे पहले की तरह लोगों की हत्या शुरू करते हैं, तो हम हस्तक्षेप करेंगे। हम उन्हें वहां बहुत जोरदार तरीके से निशाना बनाएंगे, इसका मतलब है बहुत गंभीर  वार करना।</p>
<p>गौरतलब है कि रियाल की भारी गिरावट और लंबे समय से चली आ रही आर्थिक कठिनाइयों के विरोध में दिसंबर के अंत से ईरान के कई शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान मरने वालों की संख्या लगातार बढऩे की रिपोर्टें हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 18:55:27 +0530</pubDate>
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