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                <title>Judiciary - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Judiciary RSS Feed</description>
                
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                <title>अखिलेश का भाजपा पर तीखा हमला: शक्ति का दुरुपयोग कर बंगाल में हिंसा का माहौल बना रही सत्ताधारी पार्टी, लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का माहौल बनाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हिंसा की राजनीति लोकतंत्र के लिए घातक है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यादव ने न्यायपालिका और लोकसभा अध्यक्ष से मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/akhileshs-sharp-attack-on-bjp-accused-the-ruling-party-of/article-158645"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/akhilesh-yadav-6.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का माहौल बनाने और पुलिस के राजनीतिकरण का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी सत्ता और संस्थाओं का दुरुपयोग कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रही है, जिसका देश भर में नकारात्मक संदेश जा रहा है। यादव ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि भाजपा के इस नकारात्मक और प्रहारात्मक रवैये से पूरे देश की जनता में नाराजगी और आक्रोश है। भाजपा के अपने नेता और कार्यकर्ता भी इस तरह की हिंसक राजनीति से असहज हैं और इसके खिलाफ हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं के मन में भी यह आशंका है कि जिन राज्यों में उनकी सरकार नहीं है, वहां यदि राजनीतिक हिंसा का सिलसिला शुरू हुआ तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि भाजपा की सरकारें सत्ता से बाहर होती हैं तो उसके कार्यकर्ताओं को भी ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। भाजपा के शीर्ष नेता अपनी सुरक्षा व्यवस्था के कारण सुरक्षित रहेंगे, लेकिन आम कार्यकर्ताओं को सड़क पर जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को हिंसा की राजनीति से बचना चाहिए और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करना चाहिए। सपा अध्यक्ष ने मामले में न्यायपालिका और लोकसभा अध्यक्ष से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि भाजपा का यह रवैया लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा के मुद्दे को लेकर विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भरत तिवारी हत्याकांड: प्रशांत किशोर ने की पीड़ित परिवार से मुलाकात, बोले- कानून हाथ में लेकर पुलिस नहीं कर सकती हत्या</title>
                                    <description><![CDATA[जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने भरत तिवारी एनकाउंटर पर नीतीश-सम्राट सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि कौन अपराधी है, यह तय करने का अधिकार पुलिस को नहीं बल्कि न्यायपालिका को है। पीके ने आरोप लगाया कि गरीबों की लड़ाई लड़ने वाले युवक की प्रशासनिक निरंकुशता के कारण हत्या की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bharat-tiwari-murder-case-prashant-kishore-met-the-victims-family/article-158071"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/pk.png" alt=""></a><br /><p>पटना। जनसुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने गुरुवार को भोजपुर जिले में शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के नवजवान भरत तिवारी एनकाउंटर पर कहा कि किसी व्यक्ति के अपराध पर निर्णय लेने और उनसे सजा देने का अधिकार न्यायालय को है और पुलिस अन्यायपूर्ण ढंग से किसी की हत्या नही कर सकती है। पीके ने आज बांकीपुर विधानसभा में एक प्रबुद्ध संवाद कार्यक्रम के दौरान कहा कि मृत नवजवान के नाम के आगे भले तिवारी लिखा हुआ है, लेकिन वह बिंद समाज के विस्थापित 80 परिवारों की बदहाली दुरुस्त करने की लड़ाई लड़ रहा था। उन्होंने कहा कि वह इन गरीब परिवारों तक सड़क, बिजली तथा पानी पहुंचना चाहता था, जिसके लिए उसकी अधिकारियों से कहासुनी भी हुई थी। उन्होंने कहा कि गरीबों के लिए संघर्ष करते हुए वह प्रशासन और पुलिस की नजरों में चढ़ गया था।</p>
<p>जनसुराज के सूत्रधार ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपराध और भ्रष्टाचार मिटने की बात करते हैं और इसके लिए पुलिस को खुली छूट देने और गोली मारने की बात कहते रहे हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि पुलिस पूरी तरह से निरंकुश हो जाये और अपनी पसंद तथा नापसंद से लोगों की हत्या कर दे। उन्होंने कहा कि कौन अपराधी है या नहीं है यह तय करने का अधिकार थाना पुलिस का नहीं है और केवल शक या पसंद-नापसंद के आधार पर किसी को गोली नहीं मारी जा सकती है। उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण और अपराधियों को सजा देने की हमारे देश में एक संवैधानिक प्रक्रिया है, एक न्यायव्यवस्था है, जिसके तहत न्यायधीश फैसले लेते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस को कोई हक नहीं है कि वह अपनी मर्जी से किसी की हत्या कर दे।</p>
<p>प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकतंत्र में जनता को बैलेट या ईवीएम के माध्यम से अपनी पसंद की व्यवस्था चुनने का अधिकार होता है और यह मामला सिर्फ एक भरत तिवारी की हत्या का नहीं है, इसे ठीक करने के लिए जनता को ही आगे आना होगा और एक ऐसी सरकार चुननी होगी, जो जनता के हितों के अनुकूल काम करे। उल्लेखनीय है कि प्रशांत किशोर मंगलवार को भरत तिवारी के पीड़ित परिवार से मिलने बिलौटी गांव गए थे और वहां से लौट कर पटना में आयोजित एक कार्यक्रम में इस विषय पर बात कर रहे थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 16:44:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भरत तिवारी की संदिग्ध मौत पर कांग्रेस ने की निंदा, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस सोशल मीडिया संयोजक अंकुश सिंह ने भरत तिवारी की मृत्यु पर सरकार को घेरा। पुलिसिया विरोधाभासों और निलंबन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक जांच की मांग की। कांग्रेस यूथ विंग ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय व मुआवजा देने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-strongly-condemns-the-suspicious-death-of-bharat-tiwari-demands/article-157657"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/congress1.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कांग्रेस सोशल मीडिया के जिला संयोजक अंकुश सिंह ने कहा कि भरत तिवारी की मृत्यु से जुड़े घटनाक्रम ने पूरे प्रदेश में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस मामले में लगातार विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हों, पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया हो और हर प्रश्न का उत्तर केवल "जांच जारी है" बताया जा रहा हो, उससे जनता के मन में संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। कांग्रेस की युवा यूथ इस दुखद घटना की कड़ी निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। यदि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण किया था तो बल प्रयोग क्यों किया गया? यदि पूरी कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी तो संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित क्यों किया गया? और यदि किसी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी त्रुटि हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के अनुसार दंडित किया जाना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने का अधिकार न्यायालय को है, न कि किसी को बिना निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के जीवन से वंचित करने का। कानून का शासन तभी मजबूत होगा जब हर नागरिक को न्याय मिले और सत्ता में बैठे लोग भी जवाबदेह हों। हम राज्य सरकार से मांग करते हैं कि मामले की न्यायिक अथवा स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।मृतक परिवार को न्याय और उचित सहायता प्रदान की जाए।दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।जनता जानना चाहती है कि आखिर भरत तिवारी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। जब तक सच सामने नहीं आता, सवाल बाकी रहेंगे और न्याय की मांग जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 17:26:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पटना हाईकोर्ट का विस्तार, मुख्य न्यायाधीश ने दिलाई नवनियुक्त न्यायाधीशों को पद एवं गोपनीयता की शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[पटना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश मीनाक्षी मदन राय ने सात नवनियुक्त न्यायाधीशों को शपथ दिलाई। राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त इन जजों में तीन स्थायी और चार अतिरिक्त न्यायाधीश शामिल हैं। इस शपथ ग्रहण के बाद पटना उच्च न्यायालय में कार्यरत न्यायाधीशों की कुल संख्या 37 से बढ़कर 44 हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/expansion-of-patna-high-court-chief-justice-meenakshi-administered-the/article-157024"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/patna-high-court.png" alt=""></a><br /><p>पटना। पटना उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश मीनाक्षी मदन राय ने सोमवार को पटना हाईकोर्ट के सात नवनियुक्त न्यायाधीशों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्र, बड़ी संख्या में न्यायधीश, अधिवक्ता, विभिन्न पटना हाईकोर्ट अधिवक्ता संघों के पदाधिकारी, वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा,वरीय अधिवक्ता अमित श्रीवास्तव,सरकारी अधिवक्ता प्रशांत प्रताप तथा नवनियुक्त जजों के परिवार के सदस्य उपस्थित थे।</p>
<p>इस बाबत भारत के राष्ट्रपति ने अधिवक्ता रंजन कुमार झा, अधिवक्ता कुमार मनीष और अधिवक्ता राज कुमार को उनके पद भार ग्रहण करने की तिथि से पटना हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया है,जबकि अधिवक्ता राणा विक्रम सिंह, अधिवक्ता विकास कुमार, अधिवक्ता गिरिजेश कुमार व अधिवक्ता आलोक कुमार को पद भार ग्रहण की तिथि से दो वर्षों की अवधि के लिए पटना उच्च न्यायालय का एडीशनल जज नियुक्त किया है।</p>
<p>इन सात न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण के साथ ही पटना हाईकोर्ट में स्वीकृत कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 37 से बढ़कर 44 हो गई है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट कालेजियम ने 26 फरवरी, 2026 को पटना हाईकोर्ट नौ अधिवक्ताओं को जज बनाने की अनुशंसा की थी, जिनमे से फिलहाल कुल सात जजो की नियुक्त किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 14:39:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'कॉकरोच जनता पार्टी' पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर: सीबीआई जांच की मांग; उच्चतम न्यायालय का सुनवाई से इंकार, कहा- इतना भावुकता से न लें</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने "कॉकरोच जनता पार्टी" आंदोलन के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि इसे इतनी भावुकता से न लें। यह व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया आंदोलन अदालत की एक टिप्पणी के बाद फर्जी वकीलों और डिग्रियों के विरोध में शुरू हुआ था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/petition-filed-in-supreme-court-on-cockroach-janata-party-demand/article-154971"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cockroach1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' से जुड़े व्यक्तियों की गतिविधियों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। यह व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया आंदोलन भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की हालिया "कॉकरोच" टिप्पणी के बाद उभरा था। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता एन के गोस्वामी ने सोमवार को तर्क दिया कि "कॉकरोच जनता पार्टी" न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी एम पंचोली की पीठ ने जवाब देते हुए कहा, "इसे इतना भावुकता से न लें।"</p>
<p>एक अन्य अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिकाकर्ता फर्जी कानून की डिग्रियों के मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, साथ ही यह भी तर्क दिया कि अदालत में होने वाली बातचीत का व्यावसायिक रूप से दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। इस दलील पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "ऐसी कोई गंभीर आवश्यकता नहीं है। हम देखेंगे।" "कॉकरोच जनता पार्टी" इस महीने की शुरुआत में एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में उभरी, जिसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर, विशेष रूप से युवाओं के बीच लोकप्रियता हासिल की। इस आंदोलन की शुरुआत 15 मई को उच्चतम न्यायालय में हुई कार्यवाही से हुई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बेरोजगार युवा वकीलों के वकालत छोड़कर सोशल मीडिया और आरटीआई सक्रियता की ओर रुख करने पर चिंता व्यक्त की थी।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी, "ऐसे युवा तिलचट्टों की तरह हैं जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। कुछ सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन गये हैं।" मुख्य न्यायाधीश ने बाद में स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी फर्जी योग्यताओं और फर्जी डिग्रियों के माध्यम से पेशे में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों पर लक्षित थी, न कि सामान्य रूप से बेरोजगार युवाओं पर।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/petition-filed-in-supreme-court-on-cockroach-janata-party-demand/article-154971</link>
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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 18:10:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कॉकरोच विवाद पर चीफ जस्टिस की सफाई,बोले- फर्जी डिग्री वालों पर की थी टिप्पणी, देश के युवाओं पर गर्व</title>
                                    <description><![CDATA[चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अपने 'कॉकरोच' वाले बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी को मीडिया ने गलत तरीके से पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे देश के युवाओं नहीं, बल्कि फर्जी डिग्री के सहारे वकालत और सोशल मीडिया में घुसे परजीवियों की आलोचना कर रहे थे। उन्हें भारतीय युवाओं पर गर्व है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/chief-justices-clarification-on-cockroach-controversy-he-had-commented-on/article-154096"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/suryakant.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कॉकरोच वाले विवाद पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अपना बयान जारी किया है। चीफ जस्टिस ने कहा है कि मुझे यह पढ़कर दुख हुआ कि मीडिया के एक हिस्से ने शुक्रवार एक तुच्छ मामले की सुनवाई के दौरान मेरी मौखिक टिप्पणियों को किस तरह गलत तरीके से पेश किया है। मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी, जिन्होंने फर्जी और नकली डिग्रियों की मदद से वकालत जैसे व्यवसायों में प्रवेश किया है। चीफ जस्टिस ने कहा है कि ऐसे ही लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य प्रतिष्ठित व्यवसायों में भी घुसपैठ कर चुके हैं, और इसलिए, वे परजीवी की तरह हैं।</p>
<p>चीफ जस्टिस ने अपने बयान में कहा है कि यह कहना पूरी तरह से बेबुनियाद है कि मैंने हमारे देश के युवाओं की आलोचना की मुझे न केवल हमारे वर्तमान और भविष्य के मानव संसाधन पर गर्व है, बल्कि भारत का हर युवा मुझे प्रेरित करता है। बता दें कि 15 मई को चीफ जस्टिस ने एक सुनवाई के दौरान कॉकरोच संबंधी बयान दिया था जिस पर काफी बवाल मचा था।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 09:36:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> बार काउंसिल ऑफ राजस्थान चुनाव : व्यवस्था और फर्जी मतदान की शिकायत, हाईकोर्ट स्थित पोलिंग बूथ में मतदान रद्द </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान बार काउंसिल के चुनावों में जयपुर हाईकोर्ट बूथ पर फर्जी वोटिंग और अव्यवस्थाओं के चलते मतदान रद्द कर दिया गया। 8 साल बाद हो रहे इन चुनावों में 234 प्रत्याशी मैदान में हैं और पहली बार महिला आरक्षण लागू किया गया है। अब जयपुर में मतदान की नई तारीख घोषित होगी, जबकि अन्य जिलों में प्रक्रिया जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/complaint-about-arrangement-and-fake-voting-election-canceled-at-high/article-151286"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)35.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के अधिवक्ताओं की नियामक संस्था बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के चुनाव आज हो रहे हैं। सुबह 8:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक प्रदेश के हर जिले में अदालतों में मतदाता बूथ बनाए गए हैं। वहीं जयपुर के हाईकोर्ट स्थित पोलिंग बूथ में व्यवस्थाओं और फर्जी वोटिंग को लेकर हंगामा हो गया। इसके बाद यहां मतदान को रद्द कर दिया गया। अब चुनाव के लिए नई तारीख घोषित की जाएगी। राजस्थान हाईकोर्ट में स्थित पोलिंग बूथ पर करीब 50 मिनट देरी से मतदान आरंभ हुआ। इस दौरान सबसे पहले 94 वर्षीय रिटायर्ड जस्टिस विजय शंकर दवे ने पहला वोट डाला।</p>
<p>3 साल की देरी के बाद करीब 8 साल बाद हो रहे इन चुनाव में 23 पदों के लिए 234 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। इसके लिए कुल 258 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। जहां प्रदेश के 84,247 अधिवक्ता बतौर मतदाता के रूप में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव में इस बार पहली बार महिला वकीलों को आरक्षण दिया गया है। वहीं इस बार सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी की निगरानी में चुनाव कराए जा रहे हैं। मतदान के बाद सभी मतपेटियां जिला जज के पास जमा कराई जाएगी, जो कल पुलिस सुरक्षा में जोधपुर पहुंचेगी। जहां 29 अप्रैल से मतगणना शुरू होगी। करीब 1 महीने की लंबी प्रक्रिया के बाद चुनाव परिणाम घोषित होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:57:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से झटका : अदालत ने ठुकराई ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी, असम सीएम की पत्नी पर की थी आपत्तिजनक टिप्पणी</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी ठुकरा दी है। असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर विवादास्पद टिप्पणी और पासपोर्ट संबंधी आरोपों के मामले में खेड़ा को अब असम की अदालत में पेश होना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह स्थानीय अदालत की कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/shock-to-pawan-kheda-from-the-supreme-court-the-court/article-150802"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/01.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका देते हुए उनकी ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी ठुकरा दी है। यह मामला असम पुलिस द्वारा असम के मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी की शिकायत पर दर्ज की गई एक प्राथमिकी से जुड़ा है। पवन खेड़ा का आरोप था कि सीएम सरमा की पत्नी के पास अलग-अलग देशों के कई पासपोर्ट हैं।</p>
<p>पवन खेड़ा की उस अर्जी को भी अदालत ने ठुकरा दिया जिसमें उन्होंने ट्रांजिट जमानत को अगले मंगलवार तक बढ़ाने की मांग की थी ताकि वह सोमवार को असम की अदालत में पेश हो सकें। यह घटनाक्रम शीर्ष अदालत द्वारा उनकी अग्रिम जमानत पर रोक लगाने के दो दिन बाद सामने आया है। यह अग्रिम जमानत उन्हें तेलंगाना उच्च न्यायालय ने दी थी। न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और अतुल एस चांदुरकर की पीठ ने टिप्पणी की कि यदि संबंधित अदालत काम नहीं कर रही है, तो मामले की सुनवाई के लिए अनुरोध किया जा सकता है, जिस पर मौजूदा चलन के अनुसार विचार किया जा सकता है।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न तो वह और न ही तेलंगाना उच्च न्यायालय असम की उस अदालत के काम में कोई दखल देगा जो पवन खेड़ा के खिलाफ मामले की सुनवाई करेगी। गौरतलब है कि 5 अप्रैल को एक संवाददाता सम्मेलन में पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि सीएम सरमा के पास कई पासपोर्ट हैं और कई देशों में उनकी संपत्तियां हैं, जिनका जिक्र असम के मुख्यमंत्री ने अपने चुनावी हलफनामे में नहीं किया था। मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को खारिज कर दिया, जिसके बाद पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:01:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असम CM हिमंता की पत्नी पर विवादित टिप्पणी मामला : सुप्रीम कोर्ट से पवन खेड़ा को बड़ा झटका, अंतरिम जमानत पर स्टे</title>
                                    <description><![CDATA[असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर विवादित टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अंतरिम जमानत पर रोक लगा दी है। अदालत ने उन्हें राहत के लिए असम कोर्ट जाने का निर्देश दिया है। इस फैसले से खेड़ा की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/controversial-comment-on-assam-cm-himantas-wife-case-big-blow/article-150487"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pawan-kheraa1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को ट्रांजिट अग्रिम जमानत देने के तेलंगाना उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा की एक शिकायत से संबंधित है। न्यायालय का यह आदेश असम पुलिस की एक अपील पर आया है। इसमें असम पुलिस ने कहा था कि तेलंगाना उच्च न्यायालय के पास इस मामले में सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने यह अंतरिम आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया कि श्री खेड़ा असम की उचित अदालत से राहत मांगने के लिए स्वतंत्र हैं। पीठ ने कहा कि अगर श्री खेड़ा असम की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो उच्चतम न्यायालय के इस आदेश का उस आवेदन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p>गौरतलब है कि यह पूरा मामला गत पांच अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान श्री खेड़ा के लगाए उन आरोपों से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि श्रीमती सरमा के पास कई पासपोर्ट हैं और उन्होंने विदेशी संपत्तियों का खुलासा नहीं किया है। इससे पहले 10 अप्रैल को तेलंगाना उच्च न्यायालय ने खेड़ा को एक सप्ताह की अग्रिम जमानत देते हुए गुवाहाटी उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया था। अब उच्चतम न्यायालय के इस पर रोक लगाए जाने के बाद श्री खेड़ा को असम की संबंधित अदालत से ही राहत लेनी होगी। फिलहाल उच्चतम न्यायालय ने इस याचिका पर नोटिस जारी कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 13:03:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बड़ा झटका: ब्रिटेन हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, भारत में प्रत्यर्पण का रास्ता साफ</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिटिश हाईकोर्ट ने भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी की भारत प्रत्यर्पण रोकने वाली अपील को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने भारत सरकार के राजनयिक आश्वासनों को "विश्वसनीय और पर्याप्त" माना है। इस फैसले के साथ ही नीरव के भारत आने का रास्ता साफ हो गया है, क्योंकि कोर्ट ने असाधारण परिस्थितियों के अभाव में केस दोबारा खोलने से इनकार कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-blow-to-fugitive-diamond-trader-nirav-modi-uk-high/article-147990"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/nirav-modi.png" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली। ब्रिटेन के हाईकोर्ट ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को एक बड़ा झटका देते हुए उसके भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील पर फिर से सुनवाई की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार के ताजा आश्वासनों को पर्याप्त और विश्वसनीय मानते हुए यह फैसला सुनाया। लंदन स्थित रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस की खंडपीठ ने 25 मार्च 2026 को दिए फैसले में कहा कि अपील को दोबारा खोलने के लिए 'असाधारण परिस्थितियों' की आवश्यकता होती है, जो इस मामले में मौजूद नहीं हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानूनी मापदंडों के आधार पर अपील को फिर से शुरू करने का कोई ठोस कारण नहीं है। यह निर्णय लॉर्ड जस्टिस स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस जे ने सुनाया।</p>
<p>गौरतलब है कि नीरव मोदी की याचिका मुख्य रूप से 2025 के एक अन्य अदालती फैसले पर आधारित थी, जिसमें भारत में पूछताछ के दौरान खराब व्यवहार की आशंका जताई गई थी। ब्रिटिश अदालत ने सुनवाई करते कहा कि भारत सरकार ने सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच "व्यापक, विस्तृत और विश्वसनीय" आश्वासन दिए हैं कि प्रत्यर्पण के बाद नीरव मोदी से किसी भी प्रकार की पूछताछ नहीं की जाएगी। भारतीय राजनयिक आश्वासनों के अनुसार, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय या किसी अन्य भारतीय जांच एजेंसी को ब्रिटेन के अधिकारियों की पूर्व सहमति के बिना नीरव मोदी से पूछताछ करने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने कहा कि ये वादे राजनयिक स्तर पर बाध्यकारी हैं और यह मानने का कोई आधार नहीं है कि भारत अपनी प्रतिबद्धताओं के विपरीत कार्य करेगा।</p>
<p>जजों ने कहा कि भले ही भारत के भीतर कानून लागू करने को लेकर कुछ सैद्धांतिक सवाल बाकी हों, लेकिन दिए गए आश्वासनों का व्यावहारिक असर इतना काफी है कि इससे किसी भी तरह के प्रतिबंधित बर्ताव का कोई भी असली खतरा खत्म हो जाता है। मामले को समाप्त करते हुए, अदालत ने फैसला दिया कि अपील को दोबारा खोलना न तो ज़रूरी था और न ही सही। अदालत ने नीरव मोदी की अर्ज़ी को खारिज कर दिया है और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को पहले के आदेशों के मुताबिक आगे बढ़ाने की इजाज़त दे दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 15:48:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहुल गांधी को बड़ी राहत: अमित शाह पर अभद्र टिप्पणी मामले में फिर टली सुनवाई, 27 मार्च को होगी अगली सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[गृहमंत्री अमित शाह पर अभद्र टिप्पणी के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ सुनवाई सोमवार को टल गई। वादी विजय मिश्रा की अनुपस्थिति के कारण न्यायालय ने अब 27 मार्च की तिथि नियत की है। वादी पक्ष ने राहुल गांधी के बयानों के ऑडियो-वीडियो साक्ष्यों का उनकी असली आवाज से मिलान कराने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-relief-to-rahul-gandhi-hearing-postponed-again-in-the/article-147592"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/rahul-gandhi1.png" alt=""></a><br /><p>सुलतानपुर। लोकसभा में विपक्ष के नेता और रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ गृहमंत्री अमित शाह पर अभद्र टिप्पणी मामले में सुनवाई सोमवार को वादी मुकदमा भाजपा नेता विजय मिश्रा के गैर हाजिर होने के कारण टल गई है। न्यायालय अब इस मामले में 27 मार्च को सुनवाई करेगी।</p>
<p>वादी के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने आज यहां बताया कि उन्होंने पिछली पेशी पर अदालत में एक प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें मांग की गई है कि राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयानों के ऑडियो और वीडियो साक्ष्य पेश किए गए हैं, उनका मिलान राहुल गांधी की असली आवाज से कराया जाए। विजय मिश्रा की अनुपस्थिति के कारण कोर्ट ने 27 मार्च की तारीख तय की है, जहाँ मामले में बहस होगी।</p>
<p>भाजपा नेता विजय मिश्रा ने अक्टूबर 2018 में यह परिवाद दर्ज कराया था। इस मामले में 20 फरवरी 2024 को राहुल गांधी ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद विशेष मजिस्ट्रेट ने उन्हें 25-25 हजार रुपए के दो मुचलकों पर जमानत दी थी। 26 जुलाई 2024 को राहुल गांधी ने पुनः एमपी/एमएलए कोर्ट में उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया था। उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए इसे एक राजनीतिक साजिश करार दिया था। राहुल गांधी के बयान के बाद, कोर्ट ने वादी पक्ष को साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद से लगातार गवाह पेश किए जा रहे थे।</p>
<p>20 फरवरी को राहुल गांधी ने एमपी/एमएलए कोर्ट में उपस्थित होकर सीआरपीसी की धारा 313 के तहत अपना बयान दर्ज कराया था। कोर्ट ने राहुल गांधी को अपनी बेगुनाही के संबंध में सफाई और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए 9 मार्च की तिथि नियत की थी, लेकिन राहुल गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ल ने कोर्ट में कोई सफाई या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। इसके बाद कोर्ट के न्यायाधीश शुभम वर्मा ने मामले में बहस के लिए अगली तारीख 27 मार्च नियत की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:22:12 +0530</pubDate>
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                <title>संभल हिंसा मामला: ASP अनुज चौधरी को राहत, FIR के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल हिंसा केस में एएसपी अनुज चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर रोक लगाई, याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/allahabad-high-court-stays-order-for-relief-to-asp-anuj/article-142633"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(7)7.png" alt=""></a><br /><p>उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल हिंसा मामले में एएसपी अनुज चौघरी को बड़ी राहत देते हुए एफआईआर के आदेशों पर रोक लगा दी है। बता दें कि इस हादसे में आलम को 3 गोलियां मारने पर स्थानिय कोर्ट ने 9 जनवरी को करीब 22 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। जिसके बाद एएसपी अनुज चौधरी ने कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रूख किया था।</p>
<p>जिस पर आज सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एफआईआर पर रोक लगा दी हैं। इसके साथ ही बता दें इस मामले में एफआईआर का आदेश जारी करने वाले न्यायधीश पहले ही हट चुके हैं। हाईकोर्ट ने अनुज तोमर की याचिका पर सुनवाई करते हुए 14 दिन की अंतरिम राहत देते हुए शिकायत करने वाले यामीन को कोर्ट में जवाब दाखिल करने के लिए करीब 14 दिन का समय दिया है।</p>
<p>अदालत ने तत्कालीन कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर को भी राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने 9 जनवरी को पारित संभल सीजेएम न्यायालय के आदेश पर रोक लगाते हुए शिकायतकर्ता यामीन से दोनों याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि संभल के सीजेएम विभांशु सुधीर ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत एएसपी अनुज चौधधरी सहित 20 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश के विरुद्ध अनुज चौधरी और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल याचिका पर सोमवार और मंगलवार को सुनवाई हुई, जिसके बाद हाईकोर्ट ने यह अंतरिम आदेश पारित किया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 15:52:52 +0530</pubDate>
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