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                <title>Judiciary - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से झटका : अदालत ने ठुकराई ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी, असम सीएम की पत्नी पर की थी आपत्तिजनक टिप्पणी</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी ठुकरा दी है। असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर विवादास्पद टिप्पणी और पासपोर्ट संबंधी आरोपों के मामले में खेड़ा को अब असम की अदालत में पेश होना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह स्थानीय अदालत की कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/shock-to-pawan-kheda-from-the-supreme-court-the-court/article-150802"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/01.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका देते हुए उनकी ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी ठुकरा दी है। यह मामला असम पुलिस द्वारा असम के मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी की शिकायत पर दर्ज की गई एक प्राथमिकी से जुड़ा है। पवन खेड़ा का आरोप था कि सीएम सरमा की पत्नी के पास अलग-अलग देशों के कई पासपोर्ट हैं।</p>
<p>पवन खेड़ा की उस अर्जी को भी अदालत ने ठुकरा दिया जिसमें उन्होंने ट्रांजिट जमानत को अगले मंगलवार तक बढ़ाने की मांग की थी ताकि वह सोमवार को असम की अदालत में पेश हो सकें। यह घटनाक्रम शीर्ष अदालत द्वारा उनकी अग्रिम जमानत पर रोक लगाने के दो दिन बाद सामने आया है। यह अग्रिम जमानत उन्हें तेलंगाना उच्च न्यायालय ने दी थी। न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और अतुल एस चांदुरकर की पीठ ने टिप्पणी की कि यदि संबंधित अदालत काम नहीं कर रही है, तो मामले की सुनवाई के लिए अनुरोध किया जा सकता है, जिस पर मौजूदा चलन के अनुसार विचार किया जा सकता है।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न तो वह और न ही तेलंगाना उच्च न्यायालय असम की उस अदालत के काम में कोई दखल देगा जो पवन खेड़ा के खिलाफ मामले की सुनवाई करेगी। गौरतलब है कि 5 अप्रैल को एक संवाददाता सम्मेलन में पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि सीएम सरमा के पास कई पासपोर्ट हैं और कई देशों में उनकी संपत्तियां हैं, जिनका जिक्र असम के मुख्यमंत्री ने अपने चुनावी हलफनामे में नहीं किया था। मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को खारिज कर दिया, जिसके बाद पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:01:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>असम CM हिमंता की पत्नी पर विवादित टिप्पणी मामला : सुप्रीम कोर्ट से पवन खेड़ा को बड़ा झटका, अंतरिम जमानत पर स्टे</title>
                                    <description><![CDATA[असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर विवादित टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अंतरिम जमानत पर रोक लगा दी है। अदालत ने उन्हें राहत के लिए असम कोर्ट जाने का निर्देश दिया है। इस फैसले से खेड़ा की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/controversial-comment-on-assam-cm-himantas-wife-case-big-blow/article-150487"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pawan-kheraa1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को ट्रांजिट अग्रिम जमानत देने के तेलंगाना उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा की एक शिकायत से संबंधित है। न्यायालय का यह आदेश असम पुलिस की एक अपील पर आया है। इसमें असम पुलिस ने कहा था कि तेलंगाना उच्च न्यायालय के पास इस मामले में सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने यह अंतरिम आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया कि श्री खेड़ा असम की उचित अदालत से राहत मांगने के लिए स्वतंत्र हैं। पीठ ने कहा कि अगर श्री खेड़ा असम की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो उच्चतम न्यायालय के इस आदेश का उस आवेदन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p>गौरतलब है कि यह पूरा मामला गत पांच अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान श्री खेड़ा के लगाए उन आरोपों से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि श्रीमती सरमा के पास कई पासपोर्ट हैं और उन्होंने विदेशी संपत्तियों का खुलासा नहीं किया है। इससे पहले 10 अप्रैल को तेलंगाना उच्च न्यायालय ने खेड़ा को एक सप्ताह की अग्रिम जमानत देते हुए गुवाहाटी उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया था। अब उच्चतम न्यायालय के इस पर रोक लगाए जाने के बाद श्री खेड़ा को असम की संबंधित अदालत से ही राहत लेनी होगी। फिलहाल उच्चतम न्यायालय ने इस याचिका पर नोटिस जारी कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 13:03:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बड़ा झटका: ब्रिटेन हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, भारत में प्रत्यर्पण का रास्ता साफ</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिटिश हाईकोर्ट ने भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी की भारत प्रत्यर्पण रोकने वाली अपील को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने भारत सरकार के राजनयिक आश्वासनों को "विश्वसनीय और पर्याप्त" माना है। इस फैसले के साथ ही नीरव के भारत आने का रास्ता साफ हो गया है, क्योंकि कोर्ट ने असाधारण परिस्थितियों के अभाव में केस दोबारा खोलने से इनकार कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-blow-to-fugitive-diamond-trader-nirav-modi-uk-high/article-147990"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/nirav-modi.png" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली। ब्रिटेन के हाईकोर्ट ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को एक बड़ा झटका देते हुए उसके भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील पर फिर से सुनवाई की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार के ताजा आश्वासनों को पर्याप्त और विश्वसनीय मानते हुए यह फैसला सुनाया। लंदन स्थित रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस की खंडपीठ ने 25 मार्च 2026 को दिए फैसले में कहा कि अपील को दोबारा खोलने के लिए 'असाधारण परिस्थितियों' की आवश्यकता होती है, जो इस मामले में मौजूद नहीं हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानूनी मापदंडों के आधार पर अपील को फिर से शुरू करने का कोई ठोस कारण नहीं है। यह निर्णय लॉर्ड जस्टिस स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस जे ने सुनाया।</p>
<p>गौरतलब है कि नीरव मोदी की याचिका मुख्य रूप से 2025 के एक अन्य अदालती फैसले पर आधारित थी, जिसमें भारत में पूछताछ के दौरान खराब व्यवहार की आशंका जताई गई थी। ब्रिटिश अदालत ने सुनवाई करते कहा कि भारत सरकार ने सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच "व्यापक, विस्तृत और विश्वसनीय" आश्वासन दिए हैं कि प्रत्यर्पण के बाद नीरव मोदी से किसी भी प्रकार की पूछताछ नहीं की जाएगी। भारतीय राजनयिक आश्वासनों के अनुसार, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय या किसी अन्य भारतीय जांच एजेंसी को ब्रिटेन के अधिकारियों की पूर्व सहमति के बिना नीरव मोदी से पूछताछ करने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने कहा कि ये वादे राजनयिक स्तर पर बाध्यकारी हैं और यह मानने का कोई आधार नहीं है कि भारत अपनी प्रतिबद्धताओं के विपरीत कार्य करेगा।</p>
<p>जजों ने कहा कि भले ही भारत के भीतर कानून लागू करने को लेकर कुछ सैद्धांतिक सवाल बाकी हों, लेकिन दिए गए आश्वासनों का व्यावहारिक असर इतना काफी है कि इससे किसी भी तरह के प्रतिबंधित बर्ताव का कोई भी असली खतरा खत्म हो जाता है। मामले को समाप्त करते हुए, अदालत ने फैसला दिया कि अपील को दोबारा खोलना न तो ज़रूरी था और न ही सही। अदालत ने नीरव मोदी की अर्ज़ी को खारिज कर दिया है और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को पहले के आदेशों के मुताबिक आगे बढ़ाने की इजाज़त दे दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 15:48:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राहुल गांधी को बड़ी राहत: अमित शाह पर अभद्र टिप्पणी मामले में फिर टली सुनवाई, 27 मार्च को होगी अगली सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[गृहमंत्री अमित शाह पर अभद्र टिप्पणी के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ सुनवाई सोमवार को टल गई। वादी विजय मिश्रा की अनुपस्थिति के कारण न्यायालय ने अब 27 मार्च की तिथि नियत की है। वादी पक्ष ने राहुल गांधी के बयानों के ऑडियो-वीडियो साक्ष्यों का उनकी असली आवाज से मिलान कराने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-relief-to-rahul-gandhi-hearing-postponed-again-in-the/article-147592"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/rahul-gandhi1.png" alt=""></a><br /><p>सुलतानपुर। लोकसभा में विपक्ष के नेता और रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ गृहमंत्री अमित शाह पर अभद्र टिप्पणी मामले में सुनवाई सोमवार को वादी मुकदमा भाजपा नेता विजय मिश्रा के गैर हाजिर होने के कारण टल गई है। न्यायालय अब इस मामले में 27 मार्च को सुनवाई करेगी।</p>
<p>वादी के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने आज यहां बताया कि उन्होंने पिछली पेशी पर अदालत में एक प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें मांग की गई है कि राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयानों के ऑडियो और वीडियो साक्ष्य पेश किए गए हैं, उनका मिलान राहुल गांधी की असली आवाज से कराया जाए। विजय मिश्रा की अनुपस्थिति के कारण कोर्ट ने 27 मार्च की तारीख तय की है, जहाँ मामले में बहस होगी।</p>
<p>भाजपा नेता विजय मिश्रा ने अक्टूबर 2018 में यह परिवाद दर्ज कराया था। इस मामले में 20 फरवरी 2024 को राहुल गांधी ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद विशेष मजिस्ट्रेट ने उन्हें 25-25 हजार रुपए के दो मुचलकों पर जमानत दी थी। 26 जुलाई 2024 को राहुल गांधी ने पुनः एमपी/एमएलए कोर्ट में उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया था। उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए इसे एक राजनीतिक साजिश करार दिया था। राहुल गांधी के बयान के बाद, कोर्ट ने वादी पक्ष को साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद से लगातार गवाह पेश किए जा रहे थे।</p>
<p>20 फरवरी को राहुल गांधी ने एमपी/एमएलए कोर्ट में उपस्थित होकर सीआरपीसी की धारा 313 के तहत अपना बयान दर्ज कराया था। कोर्ट ने राहुल गांधी को अपनी बेगुनाही के संबंध में सफाई और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए 9 मार्च की तिथि नियत की थी, लेकिन राहुल गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ल ने कोर्ट में कोई सफाई या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। इसके बाद कोर्ट के न्यायाधीश शुभम वर्मा ने मामले में बहस के लिए अगली तारीख 27 मार्च नियत की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:22:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संभल हिंसा मामला: ASP अनुज चौधरी को राहत, FIR के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल हिंसा केस में एएसपी अनुज चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर रोक लगाई, याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/allahabad-high-court-stays-order-for-relief-to-asp-anuj/article-142633"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(7)7.png" alt=""></a><br /><p>उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल हिंसा मामले में एएसपी अनुज चौघरी को बड़ी राहत देते हुए एफआईआर के आदेशों पर रोक लगा दी है। बता दें कि इस हादसे में आलम को 3 गोलियां मारने पर स्थानिय कोर्ट ने 9 जनवरी को करीब 22 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। जिसके बाद एएसपी अनुज चौधरी ने कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रूख किया था।</p>
<p>जिस पर आज सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एफआईआर पर रोक लगा दी हैं। इसके साथ ही बता दें इस मामले में एफआईआर का आदेश जारी करने वाले न्यायधीश पहले ही हट चुके हैं। हाईकोर्ट ने अनुज तोमर की याचिका पर सुनवाई करते हुए 14 दिन की अंतरिम राहत देते हुए शिकायत करने वाले यामीन को कोर्ट में जवाब दाखिल करने के लिए करीब 14 दिन का समय दिया है।</p>
<p>अदालत ने तत्कालीन कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर को भी राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने 9 जनवरी को पारित संभल सीजेएम न्यायालय के आदेश पर रोक लगाते हुए शिकायतकर्ता यामीन से दोनों याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि संभल के सीजेएम विभांशु सुधीर ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत एएसपी अनुज चौधधरी सहित 20 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश के विरुद्ध अनुज चौधरी और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल याचिका पर सोमवार और मंगलवार को सुनवाई हुई, जिसके बाद हाईकोर्ट ने यह अंतरिम आदेश पारित किया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 15:52:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>31 साल पुराने मामले में सांसद पप्पू यादव को बड़ी राहत, एम पी एम एल ए कोर्ट ने दी जमानत? </title>
                                    <description><![CDATA[एमपीएमएलए कोर्ट ने पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को 31 साल पुराने मामले में जमानत दी। हालांकि एक अन्य केस में सुनवाई अभी बाकी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-relief-to-mp-pappu-yadav-in-31-year-old/article-142611"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(6)8.png" alt=""></a><br /><p>बिहार। एम पी एम एल ए कोर्ट ने पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को 31 साल पुराने मामले में राहत देते हुए जमानत दे दी है। बता दें कि पप्पू यादव आज कोर्ट में पेशी के लिए करीब 12 बजे ही जेल से कोर्ट आ गए थे लेकिन आज की कार्रवाई 2 बजे शुरू हुई, जिसके बाद कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पप्पू यादव को जमानत दे दी।</p>
<p>हालांकि, अभी एक और मामले में जमानत के लिए कोर्ट में सुनवाई बाकी है जिस पर थोड़ी देर में सुनवाई की कार्रवाई होगी। जानकारी के अनुसार, गत 8 फरवारी को पप्पू यादव को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 15:01:46 +0530</pubDate>
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                <title>पंजाबी गायक मीका सिंह ने दिखाई दरियादिली, आवारा कुत्तों के लिए दान की 10 एकड़ जमीन </title>
                                    <description><![CDATA[आवारा कुत्तों के मुद्दे पर मीका सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से मानवीय समाधान की अपील की। उन्होंने कुत्तों की देखभाल और आश्रय के लिए 10 एकड़ जमीन दान करने की घोषणा की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/punjabi-singer-mika-singh-showed-generosity-by-donating-10-acres/article-139309"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/mika-singh.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। पंजाबी गायक एवं अभिनेता मीका सिंह ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर चल रही कानूनी बहस के बीच उच्चतम न्यायालय से भावुक अपील करते हुए कहा है कि वह इन कुत्तों की देखभाल और कल्याण के लिए अपनी दस एकड़ जमीन दान करेंगे। मीका सिंह ने सोशल मीडिया एक्स पर शीर्ष अदालत से आग्रह किया है कि ऐसे किसी भी कदम से बचा जाए जिससे आवारा कुत्तों पर बुरा असर पड़े। उन्होंने लिखा, मीका सिंह उच्चतम न्यायालय से विनम्र निवेदन करता हूं कि कृपया ऐसे किसी भी काम से बचा जाए, जिससे कुत्तों की भलाई पर बुरा असर पड़े।</p>
<p>उन्होंने आवारा कुत्तों के खिलाफ कथित न्यायिक कार्रवाई को लेकर पशु प्रेमियों के बीच व्यापक चिंता को दोहराया। जानवरों के अधिकारों के लिए अपने लंबे समय से चले आ रहे समर्थन को दोहराते हुए मीका ने कुत्तों की भलाई की खातिर अपनी जमीन देने के लिए सार्वजनिक प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा, मैं सम्मानपूर्वक कहना चाहता हूं कि मेरे पास पर्याप्त जमीन है और मैं कुत्तों की देखभाल, आश्रय और भलाई के लिए विशेष रूप से 10 एकड़ जमीन दान करने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं। इसके आगे गायक मीका सिंह ने कहा, इस जमीन का इस्तेमाल उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और भलाई सुनिश्चित करने के लिए आश्रय और जरूरी सुविधाएं बनाने के लिए किया जा सकता है।</p>
<p>इसके आगे उन्होंने कुत्तों की प्रभावी ढंग से देखभाल करने के लिये पर्याप्त स्टॉफ और अवसंरचना की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि उचित कार्यान्वयन के बिना केवल जमीन ही काफी नहीं होगी। उन्होंने कहा, मेरा एकमात्र अनुरोध उचित देखभाल करने वालों के रूप में समर्थन है जो इन जानवरों की जिम्मेदारी से देखभाल कर सकें। मैं आश्रय बनाने और कुत्तों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और भलाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सभी पहलों के लिए जमीन देने को तैयार हूं।</p>
<p>गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय सुनवाई कर रहा है और इस मामले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हाल ही में, एक सुनवाई के दौरान उच्चत्तम न्यायालय ने साफ किया कि उसने आवारा कुत्तों को पूरी तरह से हटाने का आदेश नहीं दिया है। </p>
<p>न्यायाधीश विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि न्यायालय का ध्यान पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) अधिनियम 2023 को लागू करने पर है, जो आवारा कुत्तों की आबादी को प्रबंधित करने के लिए एक वैज्ञानिक, मानवीय और टिकाऊ तरीका अपनाता है। कुत्तों के काटने की घटनाओं में बढ़ोतरी और उससे लोगों की चिंता को मानते हुए पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि इसका समाधान व्यवस्थित नसबंदी और वैक्सीनेशन में है, ताकि इसके बाद कुत्तों को उनके मूल इलाकों में वापस भेज दिया जाए। </p>
<p>न्यायालय ने कहा कि यह तरीका मनुष्यों की सुरक्षा और जानवरों के कल्याण के बीच संतुलन बनाता है। न्यायाधीशों ने कहा कि मौजूदा कानूनी ढांचे को एक व्यापक और अच्छी तरह से तालमेल वाली रणनीति की जरूरत है और स्थानीय अधिकारी एबीसी नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने में काफी हद तक नाकाम रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 14:43:08 +0530</pubDate>
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