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                <title>HumanRights - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>रिपोर्ट में दावा: हमास ने अक्टूबर 2023 में यौन उत्पीड़न को दिया अंजाम, पीड़ितों में 52 देशों के नागरिक शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[सिविल कमीशन की 300 पन्नों की रिपोर्ट "साइलेंस्ड नो मोर" ने 7 अक्टूबर के हमलों और गाजा में बंधकों के खिलाफ योजनाबद्ध यौन हिंसा का पर्दाफाश किया है। 10,000 साक्ष्यों के आधार पर इसे 'युद्ध का हथियार' और नरसंहार बताया गया है। रिपोर्ट में अपराधियों पर अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत मुकदमा चलाने की मांग की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/israeli-civil-commission-report-claims-hamas-committed-sexual-assault-in/article-153733"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/11-(630-x-400-px)1.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। आज सिविल कमीशन ने महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध की अपनी 300 पेज की जाँच रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार, इज़रायल में 7 अक्टूबर, 2023 को हुए हमले के दौरान तथा गाज़ा में बंधक बनाकर ले जाए गए लोगों के खिलाफ ‘‘योजनाबद्ध और व्यापक’’ एसजीबीवी को अंजाम दिया गया। ‘‘साइलेंस्ड नो मोरः सेक्सुअल टेरर अनवील्ड’’ नाम की इस रिपोर्ट में जाँचकर्ताओं ने व्यापक प्रमाण और रिकॉर्ड पेश किए हैं, जिनसे यह खुलासा होता है कि ये जघन्य अत्याचार हिंसा की आकस्मिक घटनाओं की बजाय युद्ध के सोचे-समझे हथियार थे।</p>
<p>ये नतीजे डॉ. कोचाव एल्कायम-लेवी के नेतृत्व में की गई दो साल की तहकीकात के बाद मिले हैं। जाँचकर्ताओं द्वारा 10,000 से अधिक फोटो, वीडियो तथा 1,800 घंटे से अधिक के विज़्युअल प्रमाणों की समीक्षा की गई। पीड़ितों, गवाहों, वापस आए बंधकों, विशेषज्ञों और उनके परिवार के सदस्यों के 430 से अधिक साक्षात्कार लिए गए, उनके बयान दर्ज किए गए तथा उनके साथ बैठकें की गईं। कमीशन के अनुसार, पीड़ितों में 52 देशों के नागरिक शामिल थे, जिससे स्पष्ट होता है कि इन अपराधों का दायरा अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक फैला था। कमीशन के मुताबिक उत्पीड़न एक पैटर्न में बार-बार दोहराया गया, जिसमें बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, यौन उत्पीड़न, अंगों को काटना, जबरदस्ती नंगा करना, यौन उत्पीड़न करना, जान से मारकर शव को अपमानित करना और आतंक फैलाने के लिए हिंसा का वीडियो बनाकर उसका प्रसार करना शामिल था।</p>
<p>इस रिपोर्ट के मुताबिक ये अपराध किनसाईडल यौन हिंसा पर केंद्रित थे। इस रिपोर्ट में आतंक के डिजिटल थिएटर का विस्तार से जिक्र किया गया है। यानी इन दुष्कृत्यों का वीडियो बनाया गया और उन्हें पीड़ितों के अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से हाथों-हाथ प्रसारित किया गया। यह रिपोर्ट यूनाईटेड नेशंस की विशेष प्रतिनिधि, प्रमिला पाटन द्वारा पहले दिए गए नतीजों की पुष्टि करती है, जिनके मुताबिक हमलों के दौरान और बाद में इस तरह की हिंसक घटनाएं हुई थीं, इस पर यकीन करने के ठोस आधार मौजूद हैं।</p>
<p>कमीशन के अनुसार ये अपराध अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार की श्रेणी में आते हैं। कमीशन ने निष्कर्ष दिया कि इन अपराधों के खिलाफ तुरंत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। सार्वभौम न्यायक्षेत्र का उपयोग करके अपराधियों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए तथा युद्ध के समय हुई यौन हिंसा के लिए विशेष ज्यूडिशियल चैंबर स्थापित किए जाने चाहिए। डॉ. एल्कायम-लेवी ने इस बात पर जोर दिया कि न्याय के लिए इन अपराधों को औपचारिक पहचान दिया जाना सबसे महत्वपूर्ण है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इन घटनाओं को स्थायी ऐतिहासिक रिकॉर्ड में सही-सही दर्ज किया जाए।</p>
<p>सिविल कमीशन एक स्वतंत्र, गैर-सरकारी संगठन है, जिसमें युद्ध अपराधों को दर्ज करने के लिए समर्पित कानूनी विशेषज्ञ और मानव अधिकार कार्यकर्ता शामिल हैं। इस रिपोर्ट में अंतर्राष्ट्रीय कानूनी अधिकारियों, जैसे माननीय इरविन कोटलर और प्रोफेसर डेविड क्रेन ने अपना योगदान दिया है। यह रिपोर्ट सार्वजनिक और न्यायिक समीक्षा के लिए कमीशन की आधिकारिक वेबसाईट पर उपलब्ध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 15:32:46 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका ईरान प्रतिबंध: अमेरिका ने लगाए ईरान के गृह मंत्री, शीर्ष अधिकारियों पर प्रतिबंध, हिंसक कार्रवाई के लिए बताया जिम्मेदार</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान में प्रदर्शनों पर हिंसा के आरोप में अमेरिका ने गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों और आईआरजीसी से जुड़े लोगों पर प्रतिबंध लगाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-iran-sanctions-america-imposes-sanctions-on-irans-interior-minister/article-141422"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)-(7)1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान में जारी प्रदर्शन के बाद अमेरिका ने ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा है कि राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों पर ईरानी प्रशासन पर हिंसक कार्रवाई के लिये ये सभी जिम्मेदार थे। अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा, मोमेनी ईरान इस्लामिक गणराज्य के हत्यारे कानून प्रवर्तन बल का संचालन करते हैं, जो हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या के लिये जिम्मेदार है।</p>
<p>बयान में अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) ने कहा, आज अमेरिका के वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय ने ईरानी लोगों के खिलाफ ङ्क्षहसक कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध अतिरिक्त कार्रवाई की। जिन अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए गये, उनमें ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी शामिल हैं।</p>
<p>इन प्रतिबंधों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स (आईआरजीसी) के वरिष्ठ अधिकारियों और ईरानी व्यवसायी बाबक मोर्तेजा जंजानी को भी निशाना बनाया गया है, जिन पर ईरानी लोगों से अरबों डॉलर के गबन का आरोप है। मंत्रालय ने जंजानी से जुड़े डिजिटल करेंसी विनिमय पर भी रोक लगा दी है।</p>
<p>अमेरिका के प्रतिबंधों के तहत नामित व्यक्तियों या संस्थाओं की कोई भी संपत्ति जब्त कर दी जाती है और अमेरिकी नागरिकों तथा कंपनियों को उनके साथ व्यापार करने से मना किया जाता है। वित्त मंत्रालय ने बताया कि जंजानी ने आईआरजीसी और व्यापक ईरानी शासन का समर्थन करने वाली परियोजनाओं को आर्थिक रूप से समर्थन दिया है।  </p>
<p>ओएफएसी ने पहली बार जंजानी से जुड़े दो डिजिटल संपत्ति विनिमय नामित किये। यह ईरानी अर्थव्यवस्था में काम करने वाले डिजिटल एसेट विनिमय के खिलाफ उसकी पहली कार्रवाई है। मंत्रालय के सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा, एक समृद्ध ईरान बनाने के बजाय शासन ने देश के तेल राजस्व के बचे हुए हिस्से को परमाणु हथियारों के विकास, मिसाइलों और दुनिया भर में आतंकवादी संगठन पर बर्बाद करना चुना है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के लोगों के साथ खड़े हैं और उन्होंने मंत्रालय को शासन के सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। </p>
<p>मंत्रालय ईरानी नेटवर्क और भ्रष्ट अभिजात वर्ग को निशाना बनाना जारी रखेगी जो ईरानी लोगों की कीमत पर खुद अमीरी में जीते हैं। प्रतिबंधित किये गये अन्य अधिकारियों में आईआरजीसी इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन के माजिद खादेमी, तेहरान प्रांत के आईआरजीसी सैय्यद अल-शोहादा कॉप्र्स के कमांडर ग़ोरबान मोहम्मद वलीजदेह, हमादान प्रांत के आईआरजीसी कमांडर हुसैन जारे कमाली, गिलान प्रांत के आईआरजीसी कमांडर हामिद दमघानी, और करमानशाह प्रांत के एलईएफ कमांडर मेहदी हाजियन शामिल हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 14:05:14 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका में हिंसा पर जर्मन चांसलर ने व्यक्त की चिंता, जानें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने मिनेसोटा में अमेरिकी नागरिकों की हत्या पर चिंता जताते हुए कहा कि संघीय एजेंटों की गोलीबारी की निष्पक्ष जांच जरूरी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/german-chancellor-expressed-concern-over-violence-in-america-know-the/article-140959"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(9)3.png" alt=""></a><br /><p>बर्लिन। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में संघीय एजेंटों के हाथों अमेरिका के नागरिकों की हत्या को रेखांकित करते हुए देश में हिंसा के स्तर को चिंताजनक करार दिया। उत्तरी जर्मन शहर हैम्बर्ग में मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से उन घटनाओं पर उनके विचार पूछे गये जिनमें अमेरिकी संघीय प्रवर्तन अभियानों के दौरान दो अमेरिकी नागरिकों की मौत का मामला शामिल है।</p>
<p>जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा, मेरा मानना है कि अमेरिकी अधिकारी अब इस बात की पूरी तरह से जांच करेंगे कि क्या इन मामलों में गोली चलाना आवश्यक था और क्या वास्तव में इसमें शामिल अधिकारियों को कोई खतरा था। </p>
<p>जर्मन चांसलर की ये टिप्पणियां मिनेसोटा के सबसे बड़े शहर मिनियापोलिस में इस महीने हुई दो घातक घटनाओं के बाद आयी हैं। शनिवार सुबह, एलेक्स प्रेट्टी की संघीय एजेंटों ने गोली मारकर हत्या कर दी, इससे पहले सात जनवरी को भी इसी तरह की एक घटना हुई थी, जब रेनी निकोल गुड को अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन अधिकारी ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 15:31:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान का कत्लेआम पर इकरारनामा, प्रदर्शनों में 2000 लोगों की मौत, सरकार ने ​की पुष्टि</title>
                                    <description><![CDATA[ ईरान में जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को लेकर चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। एक ईरानी अधिकारी ने बताया कि बीते दो हफ्तों में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान करीब 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/government-confirms-2000-deaths-in-protests-against-irans-massacre/article-139497"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/iran.png" alt=""></a><br /><p>ईरान। ईरान में जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को लेकर चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। एक ईरानी अधिकारी ने बताया कि बीते दो हफ्तों में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान करीब 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है। रॉयटर्स से बातचीत में अधिकारी ने दावा किया कि इन मौतों के पीछे “आतंकवादी तत्व” जिम्मेदार हैं, जिन्होंने हालात को हिंसक बना दिया। मरने वालों में प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बलों के जवान दोनों शामिल हैं। यह पहली बार है जब ईरानी अधिकारियों ने इतने बड़े पैमाने पर मौतों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि मृतकों में कितने आम नागरिक थे और कितने सुरक्षाकर्मी। आर्थिक बदहाली, महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त जनता के विरोध ने बीते तीन वर्षों में सरकार के सामने सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती खड़ी कर दी है।</p>
<p>ईरान की धार्मिक सत्ता ने एक तरफ आर्थिक मुद्दों पर विरोध को जायज बताया है, वहीं दूसरी ओर सख्त सुरक्षा कार्रवाई भी की जा रही है। सरकार ने अमेरिका और इजरायल पर अशांति भड़काने के आरोप लगाए हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार सैकड़ों लोगों की मौत पहले ही हो चुकी थी और हजारों गिरफ्तार किए गए हैं।</p>
<p>इंटरनेट बंदी और संचार प्रतिबंधों के चलते सही जानकारी सामने आने में मुश्किलें आ रही हैं। बावजूद इसके, रात के समय हुई झड़पों के वीडियो सामने आए हैं, जिनमें गोलीबारी, आगजनी और हिंसक टकराव साफ दिखाई दे रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 18:50:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एक और हिंदू की मौत से थर्राया बांग्लादेश, आखिर कब होगा अल्पसंख्यकों के लिए पड़ोसी देश सुरक्षित? भारत ने की कड़ी आलोचना</title>
                                    <description><![CDATA[ बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे पड़ोसी देश की आंतरिक सुरक्षा और मानवाधिकार स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bangladesh-shaken-by-the-death-of-another-hindu-when-will/article-139472"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/bangladesh-hindu-death.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे पड़ोसी देश की आंतरिक सुरक्षा और मानवाधिकार स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीते कुछ दिनों में कई हिंदुओं की निर्मम हत्याओं ने देश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वह इन घटनाओं को “प्रोपेगंडा” बताकर टाल रही है, जबकि ज़मीनी हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। बता दें कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर ये हमले उस समय हो रहे हैं जबकि आने वाले समय में यहां चुनाव होने वाले हैं। </p>
<p>इसी बीच, मशहूर हिंदू संगीतकार और आवामी लीग के वरिष्ठ नेता प्रलय चाकी की पुलिस हिरासत में मौत ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। जानकारी के अनुसार, 60 वर्षीय प्रलय को जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया था, बता दें कि 16 दिसंबर को उन्हें पाबना स्थित उनके घर से उठाया गया और बाद में गिरफ्तारी दिखाई गई। पुलिस का दावा है कि प्रलय की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई और उन्हें पहले पाबना जनरल अस्पताल तथा बाद में राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां कार्डियक अरेस्ट से उनकी मृत्यु हो गई।</p>
<p>हालांकि, परिवार ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस के मुताबिक, हमलावरों ने पहले समीर के साथ मारपीट की, फिर चाकू मारकर हत्या कर दी और उसका ऑटो रिक्शा लूटकर फरार हो गए। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। हालिया राजनीतिक अस्थिरता और आगामी राष्ट्रीय चुनावों के बीच इन समुदायों पर हमलों में तेज़ी आई है। अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल ने सरकार की निष्क्रियता पर गहरी चिंता जताई है। इस बीच परिवार ने इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि प्रशासन ने मौत को प्राकृतिक बताया है। भारत ने भी इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। </p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 18:04:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सूडान में आरएसएफ के ड्रोन हमलों में 32 लोगों की मौत, अन्य 86 घायल</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य और दक्षिण सूडान में आरएसएफ के ड्रोन हमलों में 32 लोगों की मौत, 86 घायल। सैन्य शिविर और बाजार निशाने पर रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/32-killed-86-injured-in-rsf-drone-attacks-in-sudan/article-139408"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/sudan.png" alt=""></a><br /><p>खार्तूम। मध्य और दक्षिण सूडान में सोमवार को रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के ड्रोन हमलों में 32 लोग मारे गए एवं 86 अन्य घायल हो गए। स्थानीय सूत्रों ने यह जानकारी दी है। सिन्नार के एक सरकारी सूत्र ने बताया कि मध्य सूडान के सिन्नार राज्य के सिन्जा शहर में एक सैन्य शिविर पर आरएसएफ के ड्रोन हमले में कम से कम 27 लोग मारे गए और 73 अन्य घायल हो गए एवं चोटों की गंभीरता के कारण मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है।</p>
<p>एक चश्मदीद ने कहा कि हमले में सूडानी सेना के 17वें इन्फैंट्री डिवीजन मुख्यालय और पास की बिजली और पानी की सुविधाओं को निशाना बनाया गया था। उन्होंने कहा, शहर में एक साथ और जोरदार धमाके हुए, साथ ही सूडानी सेना के एंटी-एयरक्राफ्ट फायर की आवाज भी आई और बताया कि घायलों को राज्य के कई अस्पतालों में ले जाया गया।</p>
<p>जानकार सूत्रों ने लक्षित की गई जगह की पुष्टि की और कहा कि हमला एक उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक के दौरान हुआ, जिसमें सिन्नार, व्हाइट नाइल और ब्लू नाइल राज्यों के गवर्नर के साथ ही सैन्य और सुरक्षा अधिकारी शामिल हुए थे। हमला सीधा बैठक हॉल पर हुआ।</p>
<p>सिन्नार राज्य सरकार ने भी एक बयान जारी कर कहा कि सिजा को सोमवार दोपहर आरएसएफ के एक रणनीतिक ड्रोन ने निशाना साधा था और सूडानी सेना के वायु रक्षा प्रणाली ने ड्रोन को घेर लिया। बयान में आम लोगों के हताहत होने की बात मानी, लेकिन सही संख्या नहीं बताई।</p>
<p>इस बीच, आरएसएफ कमांडर के सलाहकार एल बाशा ताबिग ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि 17वें इन्फैंट्री डिवीजन मुख्यालय पर हमले कोई अलग घटना नहीं है। उन्होंने कहा, जो हुआ वह सैन्य नेतृत्व और युद्ध जारी रखने का समर्थन करने वालों को एक सीधा संदेश देता है, और आने वाले समय में और बढऩे की धमकी दी। </p>
<p>इस बीच, स्वयंसेवी डॉक्टरों और चश्मदीदों ने कहा कि सोमवार को सूडान के दक्षिणी कोर्डोफन राज्य के एक बाजार में ड्रोन हमले में पांच नागरिक लोग मारे गए और 13 अन्य घायल हो गए। एक स्वयंसेवी समूह, सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क ने एक बयान में कहा कि सुबह का हमला अल-जिबल अल-सिट्टा (सिक्स माउंटेन्स) इलाके में करतला बाजार को लक्ष्य करके किया गया था और इसे आरएसएफ निर्देशित ड्रोन से किया गया था।</p>
<p>नेटवर्क ने आम लोगों पर सीधे हमले की निंदा की और आरएसएफ को पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया, इस हमले को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लड़ाई वाले इलाकों में आम लोगों की सुरक्षा करने की अपील की। आरएसएफ ने इस घटना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। उल्लेखनीय है कि सूडान 15 अप्रैल, 2023 से एक गृहयुद्ध में फंसा हुआ है। जहां सूडानी सेना और आरएसएफ के बीच सत्ता और नियंत्रण के संघर्ष चल रहा है। जिसमें हजारों लोग मारे गए और लाखों लोग बेघर हो गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 12:44:51 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका: न्यूयॉर्क में ट्रंप प्रशासन के खिलाफ भारी प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे हजारों लोग</title>
                                    <description><![CDATA[न्यूयॉर्क में हजारों लोगों ने रेनी गुड की ICE एजेंट द्वारा हत्या के विरोध में मार्च निकाला, ट्रंप प्रशासन, निर्वासन नीति और वेनेजुएला कार्रवाई के खिलाफ नारे लगाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/thousands-of-people-took-to-the-streets-in-huge-protest/article-139323"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/new-york1.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिका के न्यूयॉर्क में हजारों प्रदर्शनकारियों ने मिनियापोलिस में रेनी गुड नाम की महिला की 'आइस' एजेंट के हाथों हुई हत्या के खिलाफ सेंट्रल पार्क से लेकर मैनहट्टन तक मार्च निकाला और ट्रंप प्रशासन का विरोध किया। उल्लेखनीय है कि एक आव्रजन एवं सीमाशुल्क प्रवर्तन (आइस) एजेंट ने मिनेसोटा के मिनियापोलिस शहर में बुधवार को कार में बैठी 37 वर्षीय महिला पर गोली चलाई थी, जिससे उसकी जान चली गयी थी। इस घटना के बाद विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी सहित समाज के कई तबकों ने आइस और ट्रंप प्रशासन की आलोचना की है। न्यूयॉर्क में रविवार को हुए विरोध प्रदर्शन में रेनी गुड की हत्या के साथ-साथ राष्ट्रपति ट्रंप की सामूहिक निर्वासन नीतियों और वेनेजुएला में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई का भी विरोध किया गया।</p>
<p>बता दें कि रैली रविवार दोपहर को सेंट्रल पार्क के दक्षिण-पूर्वी कोने से शुरू हुई और शहर में भीड़ के आगे बढऩे के साथ शांतिपूर्ण रही। कई स्थानीय नेता प्रदर्शन में शामिल हुए और उन्होंने जवाबदेही और निर्वासन सुधार के लिए प्रदर्शनकारियों की मांगों का समर्थन किया।</p>
<p>कई प्रदर्शनकारी फिफ्थ एवेन्यू पर मार्च कर रहे थे। उन्होंने ट्रंप टावर के पास से गुजरते हुए वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई और मौजूदा संघीय नीतियों की आलोचना करने वाले पोस्टर पकड़ रखा था। न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने कोई राजा नहीं, कोई आइस नहीं, और कोई युद्ध नहीं के नारे लगाये। दोपहर 2:30 बजे तक विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था और पुलिस के दखल की कोई खबर नहीं थी।</p>
<p>ये विरोध प्रदर्शन इस महीने की शुरुआत में वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई के बाद बढ़े तनाव के बीच हो रहे हैं। अमेरिका ने तीन जनवरी को एक अभियान शुरू कर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को पकड़ लिया, जिसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क लाया गया। राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि उन पर नार्को-आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों के आरोपों में मुकदमा चलाया जाएगा।</p>
<p>वेनेजुएला के सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समय के लिए राष्ट्रपति की शक्तियां उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को हस्तांतरित कर दी, जिन्होंने 5 जनवरी को कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली। रूस, चीन और उत्तर कोरिया ने अमेरिका की कार्रवाई की निंदा की। रूस ने मादुरो और उनकी पत्नी की रिहाई की मांग की और आगे तनाव बढऩे के खिलाफ चेतावनी दी। इसी तरह के प्रदर्शन अमेरिका के दूसरे शहरों में भी हुए। लॉस एंजिल्स में शनिवार शाम को आइस के खिलाफ देश भर में हो रहे प्रदर्शनों के हिस्से के तौर पर ए​कत्र हुए। सीएनएन ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने यहां उल्टे अमेरिकी झंडे और हाथ से बने आइस विरोधी पोस्टर दिखाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 17:38:55 +0530</pubDate>
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