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                <title>राजकाज </title>
                                    <description><![CDATA[चर्चा में रम और गम के पटाखे : चिन्ता दूसरी पीढ़ी की : तैयारी ढाई साल की : चांस ब्रेक लगने के : दिल है कि मानता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/-draft--add-your-title/article-1735"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/rajkaj.jpg-13091.jpg" alt=""></a><br /><p><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>चर्चा में रम और गम के पटाखे</strong></span></span><br /> सूबे में इन दिनों हाथ वाले भाई लोगों में पटाखों को लेकर काफी चर्चा है। इंदिरा गांधी भवन में बने पीसीसी के ठिकाने पर ग्रीन पटाखों की नहीं बल्कि रम और गम के पटाखों की चर्चा कुछ ज्यादा ही हैं। यहां आने वाला हर कोई वर्कर बतियाता है कि कई भाई लोगों के सपने थे कि इस बार दीपावली पर तो पटाखे छोड़े बिना नहीं रहेंगे, मगर शनि को दिल्ली से छन-छनकर आई खबरों के बाद उनके मंसूबों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। ठिकाने पर सालों से आ रहे बुजुर्गवार की मानें, तो जोधपुर वाले अशोक जी भाईसाहब अपने हिसाब से दीपावली के बाद आने देवउठनी एकादश के बाद बम पटाखे छोड़ेंगे, जिनकी आवाज दूर तलक जाए बिना नहीं रहेगी। कुर्सी के लिए दिन में सपने देखने वाले भाई लोग अभी तो लम्बी सांस के साथ गम और रम के पटाखे छोड़ते नजर आ रहे हैं। अब समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी हैं।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>चिन्ता दूसरी पीढ़ी की</strong></span></span><br /> इन दिनों राज के कुछ रत्न अपनी दूसरी पीढ़ी के लिए दिन रात एक किए हुए हैं। उनके लिए वे न रात देख रहे हैं और न ही दिन। रात को काम करने के लिए भी पसीने बहा रहे हैं। उनके उलटे सीधे कामों को ढाकने के लिए खाकी वालों तक के हाथ-पैर जोड़ रहे हैं। इस मामले में पिंकसिटी से ताल्लुकात रखने वाले एक रत्न तो दो कदम आगे हैं। पुत्र मोह में फंसे भाईसाहब न आगा देख रहे हैं और न ही पीछा। पुत्र भी काफी स्याणा है, जो रात दिन जमीन से ही जुड़ा रहता है। राज का काज करने वाले लंच केबिनों में बतियाते हैं कि पुत्र मोह में फंसे भाई साहब की मजबूरी है, वरना वो भी जानते है कि यह पब्लिक है, सब जानती है और सब पहचानती है कि उसको आगे क्या करना है।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>तैयारी ढाई साल की</strong></span></span><br /> दिल्ली की सरकार के लिए जंग तो ढाई साल बाद होगी, लेकिन नेताओं ने अभी से पसीने बहाने शुरू कर दिए है। भारती भवन वालों ने तो बैठकों में चिंतन-मंथन का कलैण्डर तक बना लिया। अब देखो ना सूबे में उपचुनावों की आड़ में आगे की रणनीति पर काम भी शुरू हो गया। सरदार पटेल मार्ग पर स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर चर्चा है कि स्टार प्रचारकों की लिस्ट में मैडम का नाम देखकर ही समझ गए कि सूबे में 2023 की जंग जीतने का सेहरा किसके सिर पर बंधेगा। अब सोचने वाले तो आगे तक की भी सोच रहे हैं कि हाथ वालों की ओर से प्रियंका के आगे आने पर भगवा वाले भी अपनी रणनीति बदले बिना नहीं रहेंगे और अपनी ओर से सूबे वाली मैडम को ही आगे करेंगे, चाहे वह नंबर वन कुर्सी पर ही विराजमान हो।</p>
<p><strong><br /> </strong><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>चांस ब्रेक लगने के</strong></span></span><br /> आजकल राज का काज करने वाले भाई लोगों के दिलों में एक डर बैठा हुआ है। उनका यह डर लंच टेबिलों पर कभी कभार वह जुबान पर आ ही जाता है। मामला भी गाड़ियों से जुड़ा है। जोधपुर वाले भाईसाहब कभी भी 17 साल पहले किए अपने एक फैसले का फरमान जारी कर सकते हैं। अब बीस गुणा ज्यादा बढ़ चुकी सरकारी गाड़ियों की स्पीड पर पेट्रोल की बढ़ती कीमत और मितव्ययता की आड़ में ब्रेक लगाने के चांस कुछ ज्यादा ही हैं।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>दिल है कि मानता</strong></span></span><br /> दिल तो दिल ही होता है। मान जाए, तो ठीक है, नहीं माने तो उस पर किसी का वश नहीं होता। कमल वाली पार्टी में वल्लभनगर और धरियावद के उपचुनाव के लिए उच्च स्तर पर दिल मिलाने की लाख कोशिशें की गई। लेकिन दिल केवल टिकट बांटने तक राजी हुआ। मैदान में प्रचार-प्रसार के लिए उदयपुर वाले भाईसाहब का दिल अभी तैयार ही नहीं है। सरदार पटेल मार्ग पर स्थित बंगला नंबर 51 में चर्चा आम है कि दिलों में अभी भी दरार है। समझौता केवल दिखावटी है। दिल नहीं मिलने से वोटर भी मझदार में है। उन्होंने भी बिना दल वालों से दिल मिलाने की ठान ली है।</p>
<p> <strong>     एल एल शर्मा<br /> (यह लेखक के अपने विचार हैं) </strong></p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Mon, 18 Oct 2021 10:40:56 +0530</pubDate>
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