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                <title>Statehood - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अमित शाह के लद्दाख दौरे पर कांग्रेस का निशाना: ऐतिहासिक बौद्ध अवशेषों का किया जिक्र, भूमि एवं रोजगार की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गृह मंत्री अमित शाह के लद्दाख दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे बौद्ध अवशेषों के प्रदर्शन में व्यस्त हैं, लेकिन स्थानीय लोगों की राज्य का दर्जा और रोजगार की मांगों पर चुप हैं। उन्होंने नेहरू के ऐतिहासिक दौरों का जिक्र करते हुए सरकार को जनता की भावनाओं का सम्मान करने की सलाह दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-targets-amit-shahs-visit-to-ladakh-mentions-historical-buddhist/article-152322"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/jairam-ramesh-333.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस संचार विभाग प्रभारी जयराम रमेश ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लद्दाख दौरे को लेकर प्रतिक्रिया में कहा कि अमित शाह शुक्रवार को पिपरहवा के बौद्ध अवशेषों की "महिमा" में व्यस्त हैं, जबकि लद्दाख के लोगों की राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची का दर्जा और भूमि एवं रोजगार की सुरक्षा जैसी अहम मांगों पर चुप्पी साधे हुए हैं।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि लद्दाख में इस तरह के धार्मिक और ऐतिहासिक प्रदर्शनों का एक लंबा इतिहास रहा है, जिससे गृह मंत्री शायद अनभिज्ञ हैं। उन्होंने 14 जनवरी 1949 की एक ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि उस दिन भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों सारिपुत्र और महा मोग्गलान के पवित्र अवशेष, जिन्हें 1851 में विक्टोरिया और अलबर्ट संग्रहालय ले गए थे, उन्हें वापस भारत लाया गया था। इन अवशेषों को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने प्राप्त कर महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया को कोलकाता में सौंपा था।</p>
<p>कांग्रेस नेता के अनुसार, 1949 में ही नेहरू ने लद्दाख का चार दिवसीय दौरा किया था। इस दौरान प्रतिष्ठित बौद्ध नेता कुशोक बकुला रिनपोछे ने उनसे आग्रह किया था कि इन अवशेषों को लद्दाख भी लाया जाए। उन्होंने कहा कि यह पहल मई 1950 में साकार हुई, जब इन पवित्र अवशेषों को 79 दिनों तक पूरे लद्दाख में प्रदर्शित किया गया। इसके बाद इन्हें यांगून, कोलंबो और सांची में स्थापित किया गया। जयराम रमेश ने कहा कि इतिहास गवाह है कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि लोगों के साथ संवाद और उनकी भावनाओं का सम्मान भी होता था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 13:22:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका फाइन ग्रीनलैंड विधेयक: अमेरिकी सांसद ने ग्रीनलैंड के विलय और राज्य का दर्जा देने के लिए पेश किया विधेयक</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी कांग्रेस में ग्रीनलैंड को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने का विधेयक पेश किया गया। रिपब्लिकन सांसद रैंडी फाइन ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-fines-greenland-bill-us-mp-introduced-bill-for-the/article-139420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/us-on-greeland.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिगटन। रिपब्लिकन सांसद रैंडी फाइन ने ग्रीनलैंड को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने के लिए अमरीकी कांग्रेस में एक विधेयक अमेरिकी संसद में पेश किया है। सांसद फाइन के कार्यालय से जारी एक बयान के अनुसार, ग्रीनलैंड विलय और राज्य का दर्जा अधिनियम सोमवार को फ्लोरिडा के रिपब्लिकन ने पेश किया। विधेयक के बताए गए लक्ष्यों में ग्रीनलैंड के विलय और उसके बाद उसे राज्य का दर्जा देना शामिल है। </p>
<p>सांसद रैंडी फाइन ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा, आज, मुझे ग्रीनलैंड विलय और राज्य का दर्जा अधिनियम पेश करते हुए गर्व हो रहा है, यह एक ऐसा विधेयक है जो राष्ट्रपति को ग्रीनलैंड को संघ में लाने के लिए जरूरी तरीके खोजने की अनुमति देता है। उन्होंने कहा, मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं, हमारे दुश्मन आर्कटिक में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं और हम ऐसा नहीं होने दे सकते। ग्रीनलैंड को हासिल करके हम अपने दुश्मनों को आर्कटिक क्षेत्र को नियंत्रित करने से रोकेंगे और रूस और चीन से अपने उत्तरी हिस्से को सुरक्षित करेंगे।</p>
<p>सांसद रैंडी फाइन ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ग्रीनलैंड कोई दूर का इलाका नहीं है जिसे हम नजरअंदाज कर सकें, यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बहुत जरूरी संपत्ति है। जो भी ग्रीनलैंड को नियंत्रित करेगा, वह आर्कटिक के मुख्य शिङ्क्षपग रास्तों और अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था को नियंत्रित करेगा। अमेरिका उस भविष्य को ऐसे शासनों के हाथों में नहीं छोड़ सकता जो हमारे मूल्यों से नफरत करते हैं और हमारी सुरक्षा को कमजोर करना चाहते हैं।</p>
<p>विधेयक में कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ऐसे कदम उठाने का अधिकार है जो जरूरी हो सकते हैं, जिसमें डेनमार्क के साथ बातचीत करने की कोशिश करना भी शामिल है, ताकि ग्रीनलैंड को अमेरिका के क्षेत्र के रूप में मिलाया जा सके या किसी और तरह से हासिल किया जा सके। ट्रंप को अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड को हासिल करने के बाद विधेयक के तहत कांग्रेस के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए बाध्य करेगा, जिसमें उन संभावित संघीय क़ानूनों में बदलावों का विवरण होगा, जिन्हें राष्ट्रपति नए अधिग्रहित क्षेत्र को एक राज्य के रूप में शामिल करने के लिए आवश्यक समझें।</p>
<p>व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कल कहा कि अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए कोई खास समय-सीमा तय नहीं की गई है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, राष्ट्रपति ट्रम्प ने कोई समय-सीमा तय नहीं की है लेकिन यह निश्चित रूप से उनके लिए एक प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ने कल रात बहुत साफ कर दिया था। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करे क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर हम ऐसा नहीं करते हैं, तो आखिरकार इसे चीन या रूस द्वारा हासिल कर लिया जाएगा, या शायद दुश्मनी से कब्जा कर लिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 12:27:18 +0530</pubDate>
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