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                <title>International Trade - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>International Trade RSS Feed</description>
                
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                <title>रिपोर्ट्स : होर्मुज़ पर लगे संभावित शुल्क से नाराज़ तेल कंपनियां, ईरान द्वारा संभावित शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं पर जताई चिंता </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों पर $1 प्रति बैरल शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है। वैश्विक तेल कंपनियों ने व्हाइट हाउस से संपर्क कर इस 'टैक्स' का विरोध किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आने वाले हफ्तों में इस पर चर्चा करेंगे, क्योंकि यह रणनीतिक जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/reports-oil-companies-angry-over-possible-duty-on-hormuz-expressed/article-149738"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने व्हाइट हाउस से संपर्क कर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान द्वारा संभावित शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं पर चिंता जतायी है। यह जानकारी अखबार ने मामले से परिचित एक स्रोत के हवाले से दी है। रिपोर्टाें के अनुसार, तेल कंपनियों के अधिकारियों ने व्हाइट हाउस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से अपील की है कि वे शांति वार्ता की शर्त के रूप में ईरान को इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए शुल्क लेने की अनुमति देने का विरोध करें।</p>
<p>स्रोत के मुताबिक, तेल उद्योग के प्रतिनिधियों ने बुधवार सुबह अमेरिकी विदेश विभाग में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें अपनी चिंताओं से अवगत कराया। इस बीच, बुधवार को व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लीविट ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर आने वाले हफ्तों में चर्चा करेंगे।। इस बीच, फाइनेंशियल टाइम्स ने ईरान के तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पाद निर्यातकों के संघ के आधिकारिक प्रवक्ता हामिद होसैनी के हवाले से बताया कि ईरान तेल टैंकरों को प्रति बैरल एक डॉलर के शुल्क पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देने के लिए तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 17:57:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दी ईरान को चेतावनी, कहा-अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग को रोकता है, तो उस पर बीस गुना अधिक भयानक होगा हमला </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल परिवहन रोका, तो अमेरिका 20 गुना भीषण प्रहार करेगा। युद्ध के खतरे और बीमा रद्द होने से यह मार्ग ठप है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति संकट गहरा गया है। भारत अपने 36 जहाजों को सुरक्षित निकालने हेतु प्रयासरत ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-warned-iran-if-iran-blocks-the/article-145971"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान को चेतावनी दी कि यदि उसकी सेनाएं होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से होने वाले तेल के परिवहन को रोकती हैं, तो उन पर बीस गुना अधिक भयानक हमला किया जाएगा। अमेरिकी ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा, अगर ईरान ऐसा कुछ भी करता है जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य के भीतर तेल का प्रवाह रुकता है, तो अमेरिका उन पर अब तक हुए हमलों की तुलना में बीस गुना अधिक जोर से हमला करेगा। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त, अमेरिका आसानी से नष्ट होने वाले लक्ष्यों को खत्म कर देगा, जिससे ईरान के लिए एक राष्ट्र के रूप में फिर से खड़ा होना लगभग असंभव हो जाएगा।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने इस चेतावनी को अमेरिका की ओर से चीन और उन सभी देशों के लिए एक उपहार बताया जो होर्मुज जलडमरूमध्य का काफी उपयोग करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल की काफी सराहना की जाएगी। उल्लेखनीय है कि 10 मार्च तक होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग में वाणिज्यिक यातायात लगभग पूरी तरह से ठप हो गया है। हालांकि, औपचारिक रूप से इसे बंद करने की कोई घोषणा नहीं की गई है, लेकिन अत्यधिक जोखिमों के कारण बीमा कंपनियों द्वारा बीमा रद्द करने के कारण इस मार्ग पर यातायात प्रभावी रूप से बंद हो गया है।</p>
<p>मार्सक, सीएमए सीजीएम और हैपग-लॉयड जैसी प्रमुख परिवहन कंपनियों ने इस मार्ग से आवाजाही को स्थगित कर दिया है और जहाजों को केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेज रहे हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से ही ड्रोन और मिसाइल हमलों में कम से कम आठ नाविक मारे गये हैं और कई टैंकर क्षतिग्रस्त हुए हैं। छह मार्च को, संयुक्त अरब अमीरात के ध्वज वाली नौका मुसाफा-2 एक विस्फोट के बाद डूब गयी, जिससे चालक दल के तीन सदस्य लापता हो गए। सात मार्च को, माल्टा के ध्वज वाले टैंकर प्रिमा पर कथित तौर पर एक ईरानी ड्रोन द्वारा हमला किया गया था।</p>
<p>भारत वर्तमान में इस क्षेत्र में फंसे 36 भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। फ्रांस ने भी युद्ध की तीव्रता कम होने के बाद जहाजों को सुरक्षित एस्कॉर्ट करने के लिए एक मिशन की तैयारी की घोषणा की है। नाकाबंदी के परिणामस्वरूप, कच्चे तेल की कीमतें 9 मार्च को 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गईं, जो बाद में घटकर लगभग 88-90 डॉलर पर आ गईं।</p>
<p>कुवैत और कतर ने कुछ ऊर्जा अनुबंधों पर फोर्स मेज्योर घोषित कर दिया है क्योंकि टैंकर सुरक्षित रूप से फारस की खाड़ी से बाहर निकलने में असमर्थ हैं। फोर्स मेज्योर एक सामान्य क्लॉज है जो अनिवार्य रूप से दोनों पक्षों को दायित्व या बाध्यता से मुक्त करता है जब पार्टियों के नियंत्रण से बाहर कोई असाधारण घटना या परिस्थिति आ जाती है। यह जलडमरूमध्य पश्चिमी देशों से जुड़े वाणिज्यिक यातायात के लिए प्रभावी रूप से बंद है। हालांकि, इसके कुछ अपवाद भी हैं। कुछ चीनी ध्वज वाले जहाजों ने स्वचालित पहचान प्रणाली (एआईएस) के माध्यम से अपनी स्थिति प्रसारित कर सफलतापूर्वक पारगमन किया है।</p>
<p>वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत (पाँचवाँ हिस्सा) इस जल क्षेत्र से होकर गुजरता है। अमेरिकी ऊर्जा प्रशासन के अनुसार, इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कच्चे तेल का लगभग 84-89 प्रतिशत और एलएनजी का 83 प्रतिशत हिस्सा एशिया के लिए होता है। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में उर्जा आपूर्ति के लिए यह जलमार्ग काफी महत्वपूर्ण है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 18:00:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी ट्रेड कोर्ट का बड़ा फैसला, कंपनियों को मिल सकता है अरबों डॉलर का टैरिफ रिफंड</title>
                                    <description><![CDATA[न्यूयॉर्क के संघीय ट्रेड कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए अवैध आयात शुल्क (टैरिफ) की वापसी का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कंपनियों से वसूली गई करीब $175 अरब की राशि लौटानी होगी। यह अमेरिकी व्यापार इतिहास का सबसे बड़ा पुनर्भुगतान मामला है, जिससे हजारों आयातकों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-decision-of-us-trade-court-companies-may-get-tariff/article-145288"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/trump-big-disi.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिकी व्यापार नीति से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में न्यूयॉर्क स्थित संघीय ट्रेड कोर्ट ने कंपनियों के पक्ष में बड़ा निर्णय सुनाया है। अदालत ने कहा है कि जिन कंपनियों ने पहले लगाए गए लेकिन बाद में अवैध घोषित किए गए आयात शुल्क (टैरिफ) का भुगतान किया था, वे अब उस रकम की वापसी की हकदार हैं। यह फैसला पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।</p>
<p>कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड के जज रिचर्ड ईटन ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले रद्द किए जा चुके टैरिफ के आधार पर वसूली गई राशि कंपनियों को लौटाई जानी चाहिए। अदालत के अनुसार यह राहत केवल कुछ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन सभी आयातकों पर लागू होगी जिन्होंने उस अवधि में यह शुल्क अदा किया था।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार यह रिफंड कुल मिलाकर लगभग 175 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो अमेरिकी व्यापार इतिहास के सबसे बड़े पुनर्भुगतान मामलों में से एक माना जा रहा है। इससे पहले पेन व्हार्टन बजट मॉडल के अनुमान के मुताबिक केंद्र सरकार ने इन टैरिफ से लगभग 130 अरब डॉलर से अधिक की राशि एकत्र की थी।</p>
<p>इस फैसले के बाद अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के सामने बड़ी प्रशासनिक चुनौती खड़ी हो गई है। एजेंसी को अब ऐसा सिस्टम तैयार करना होगा जिसके जरिए हजारों कंपनियों को भुगतान वापस किया जा सके। आमतौर पर कस्टम विभाग छोटे स्तर पर शुल्क वापसी करता है, लेकिन इतनी बड़ी रकम लौटाने की प्रक्रिया जटिल मानी जा रही है।</p>
<p>ट्रेड विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इस फैसले के खिलाफ आगे अपील कर सकती है या फिर प्रक्रिया को लागू करने के लिए अतिरिक्त समय मांग सकती है। वहीं कंपनियों के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से वे इस मुद्दे पर स्पष्टता का इंतजार कर रही थीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 10:11:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दिसंबर में वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 25.04 अरब डॉलर पर पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[निर्यात के मुकाबले आयात में 8.67% की तेज वृद्धि से दिसंबर 2025 में वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 25.04 अरब डॉलर हो गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/goods-trade-deficit-increased-to-2504-billion-dollars-in-december/article-139716"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/bussiness.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। निर्यात के मुकाबले आयात में तेज बढ़ोतरी से देश का वस्तु व्यापार घाटा दिसंबर 2025 में बढ़कर 25.04 अरब डॉलर पर पहुंच गया। पिछले साल दिसंबर में यह 20.63 अरब डॉलर रहा था। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों में बताया गया है कि दिसंबर 2025 में वस्तु निर्यात 1.88 प्रतिशत बढ़कर 38.51 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वहीं वस्तु आयात 8.67 फीसदी की वृद्धि के साथ 63.55 अरब डॉलर हो गया। </p>
<p>सेवाओं का निर्यात एक साल पहले के 36.97 अरब डॉलर से घटकर 35.50 अरब डॉलर रह गया। सेवाओं के आयात में भी कमी आयी है और यह 17.80 अरब डॉलर की तुलना में 17.38 अरब डॉलर रह गया। </p>
<p>इस प्रकार, सेवाओं और वस्तुओं को मिलाकर कुल निर्यात 74.01 अरब डॉलर और कुल आयात 80.94 अरब डॉलर रहा। इसमें सालाना आधार पर निर्यात घटा है जबकि आयात बढ़ा है। कुल व्यापार घाटा दिसंबर 2024 के 1.46 अरब डॉलर से बढ़कर 6.92 अरब डॉलर पर पहुंच गया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 17:49:09 +0530</pubDate>
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