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                <title>Power Struggle - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Power Struggle RSS Feed</description>
                
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                <title>कनार्टक सीएम विवाद : इकबाल हुसैन का दावा, डीके शिवकुमार को 15 मई तक मिल सकती है सत्ता, राजनीतिक हलकों में हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन के दावे ने कर्नाटक की राजनीति में तूफान ला दिया है। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार 15 मई तक सत्ता की कमान संभाल सकते हैं। कार्यकर्ताओं और मंत्रियों के भारी समर्थन के बीच, इस बयान को वर्तमान मुख्यमंत्री के लिए नेतृत्व परिवर्तन की गंभीर चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/karnataka-cm-controversy-iqbal-hussains-claim-that-dk-shivakumar-may/article-152064"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/dk-sshivakumarr.png" alt=""></a><br /><p>रामनगर। कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना को लेकर मंगलवार को नई अटकलें तेज हो गईं जब कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन ने दावा किया कि उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार 15 मई तक सत्ता हासिल कर सकते हैं। रामनगर में की गई इन टिप्पणियों ने कर्नाटक कांग्रेस के राजनीतिक हलकों में एक बार फिर हलचल मचा दी है जहां 2023 में पार्टी के सत्ता में लौटने के बाद से भविष्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं समय-समय पर होती रहती हैं। हुसैन ने पत्रकारों से कहा, "हम सभी चाहते हैं कि डीके शिवकुमार सत्ता में आएं। उनके नेतृत्व में हम राज्य में और अधिक विकास कार्य देखना चाहते हैं। कई विधायकों, मंत्रियों, कार्यकर्ताओं, नेताओं और आम जनता की भी यही इच्छा है।"</p>
<p>उन्होंने अपने दावे के साथ एक समयसीमा भी जोड़ दी। विधायक ने कहा कि मुझे लगता है कि उन्हें 15 मई तक सत्ता मिल जाएगा और यही मेरी इच्छा एवं कामना है। हालांकि, हुसैन ने मुख्यमंत्री पद का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया लेकिन उनके बयान को कांग्रेस के कुछ वर्गों में शिवकुमार को राज्य में एक बड़ी नेतृत्व भूमिका सौंपने के लिए बढ़ते समर्थन के प्रत्यक्ष संकेत के रूप में देखा जा रहा है। ये टिप्पणियां राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि शिवकुमार एक शक्तिशाली वोक्कालिगा नेता और 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष थे और उन्हें लंबे समय से शीर्ष पद के लिए एक प्रमुख दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>इकबाल हुसैन ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से मिले समर्थन की भी प्रशंसा की और खुद को जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध जमीनी स्तर के नेता के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, "मैं विधायक हूं, मैं मंत्री हूं और यहां के लोगों ने मुझ पर बहुत प्यार एवं विश्वास किया है। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे इस तरह से पाला-पोसा गया है। मुझे और क्या चाहिए? उनके लिए, मैं उनका मंत्री हूं, उनका मुख्यमंत्री हूं, सब कुछ हूं।" उन्होंने आगे कहा, "मैं मंत्री, विधायक और सेवक के रूप में अपने पद पर बना रहूंगा और इस सदन के पुत्र के रूप में कार्य करता रहूंगा।" श्री हुसैन की टिप्पणियों पर कांग्रेस नेतृत्व ने अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 16:36:53 +0530</pubDate>
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                <title>तालिबान में काबुल बनाम कंधार की जंग, अफगानिस्तान में हक्कानी और अखुंदजादा आमने-सामने</title>
                                    <description><![CDATA[लीक ऑडियो में सुप्रीम लीडर ने आंतरिक मतभेदों से अमीरात के ढहने की चेतावनी दी। काबुल और कंधार गुटों के बीच सत्ता संघर्ष चरम पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/kabul-vs-kandahar-war-between-taliban-haqqani-and-akhundzada-face/article-139744"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/taliban.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगानिस्तान पर काबिज तालिबान के अंदरूनी हालात ठीक नहीं हैं। तालिबान में आपसी संघर्ष चरम पर है। हाल में ही वायरल हो गए एक ऑडियो क्लिप में इस बात का खुलासा हुआ है कि तालिबान के नेता अंदरूनी खतरे से परेशान हैं। उन्हें लगता है कि हालात जल्द नहीं सुधरें तो तालिबान में सत्ता संघर्ष चरम पर पहुंच सकता है। यह संघर्ष दो धड़ों के बीच में हो रहा है, जिसमें एक का नेतृत्व सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा कर रहे हैं और दूसरे का आंतरिक मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी कर रहे हैं। तालिबान ने अगस्त 2021 में अशरफ गनी की सरकार गिरने और अमेरिकी सेना की वापसी के बाद काबुल पर कब्जा कर लिया था।</p>
<p><strong>लीक ऑडियो में क्या सुनाई दिया</strong></p>
<p>बीबीसी को मिली लीक हुई ऑडियो क्लिप में सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा को भाषण देते हुए सुना जा सकता है, जिसमें उन्होंने कहा कि अंदरूनी मतभेद आखिरकार उन सभी को खत्म कर सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी, इन बंटवारों के कारण, अमीरात ढह जाएगा और खत्म हो जाएगा। अखुंदजादा ने यह भाषण जनवरी 2025 में दक्षिणी शहर कंधार के एक मदरसे में तालिबान लड़ाकों के सामने दिया था। इस ऑडियो क्लिप ने पुष्टि की है कि तालिबान में सब कुछ सही नहीं है और इसके शीर्ष नेतृत्व के बीच गंभीर मतभेद हैं। हालांकि, तालिबान हमेशा इससे इनकार करता रहा है।</p>
<p><strong>तालिबान में दो गुट कौन से हैं</strong></p>
<p>तालिबान में दो प्रमुख गुट हैं। एक गुट पूरी तरह से अखुंदजादा के प्रति वफादार है, जो कंधार में अपने बेस से देश को एक सख्त इस्लामिक अमीरात के अपने विजन की ओर ले जा रहे हैं। वह अफगानिस्तान को आधुनिक दुनिया से अलग-थलग रखना चाहते हैं और उनके प्रति वफादार धार्मिक नेता समाज के हर पहलू को नियंत्रित करते हैं। वहीं दूसरा, जिसमें ज्यादातर राजधानी काबुल में रहने वाले शक्तिशाली तालिबान सदस्य शामिल हैं। ये एक ऐसे अफगानिस्तान की पैरवी करते हैं, जो कट्टर इस्लाम का पालन करते हुए बाहरी दुनिया से जुड़े, देश की अर्थव्यवस्था का निर्माण करे और लड़कियों और महिलाओं को भी ऐसी शिक्षा तक पहुंचने की अनुमति दे जो उन्हें अभी प्राइमरी स्कूल के बाद नहीं मिलती है।</p>
<p><strong>तालिबान पर किसका नियंत्रण</strong></p>
<p>तालिबान के अनुसार, अफगानिस्तान पर अखुंदजादा समूह का पूर्ण शासक है। वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जो केवल अल्लाह के प्रति जवाबदेह हैं और उन्हें चुनौती नहीं दी जा सकती। हालांकि, उनके कई फैसलों का व्यापक पैमाने पर विरोध भी हुआ है। इसी में से एक है सितंबर 2025 के आखिरी में अखुंदजादा का इंटरनेट और फोन बंद करने का आदेश। इससे अफगानिस्तान बाकी दुनिया से कट गया। तीन दिन बाद इंटरनेट को बहाल कर दिया गया, लेकिन तालिबान ने यह नहीं बताया कि ऐसा क्यों हुआ।</p>
<p><strong>तालिबान में विद्रोह</strong></p>
<p>इसे तालिबान में विद्रोह की तरह देखा जा रहा है। हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने अपने नेतृत्व की शुरूआत इस तरह नहीं की थी। सूत्रों का कहना है कि उन्हें 2016 में तालिबान के सर्वोच्च नेता के रूप में आंशिक रूप से आम सहमति बनाने के उनके दृष्टिकोण के कारण चुना गया था। खुद युद्ध के मैदान का अनुभव न होने के कारण अखुंदजादा ने सिराजुद्दीन हक्कानी को अपना सहायक बनाया जो खूंखार आतंकवादी कमांडर है। वह उस समय अमेरिका का मोस्ट वॉन्डेट भी था। उसके सिर पर अमेरिका ने 10 मिलियन डॉलर का इनाम रखा था।</p>
<p><strong>तालिबान में सितंबर में क्या हुआ था</strong></p>
<p>बीबीसी की रिपोर्ट में अंदरूनी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अफगानिस्तान में सितंबर में जो कुछ हुआ, वो काफी बड़ा था। काबुल समूह ने अखुंदजादा के आदेश के खिलाफ काम किया और इंटरनेट को बहाल कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभूतपूर्व घटना थी। तालिबान दूसरे अफगान गुटों के विपरीत अपनी एकजुटता के लिए जाना जाता है।</p>
<p>इसमें कोई फूट नहीं पड़ी है, यहां तक कि असहमतियों के बारे में भी शायद ही कभी सुना गया हो। विशेषज्ञों का भी कहना है कि तालिबान के डीएनए में अपने वरिष्ठ नेताओं और अमीर (सुप्रीम लीडर) की आज्ञा मानने का सिद्धांत शामिल है। यही वजह है कि उनके स्पष्ट आदेश के खिलाफ जाकर इंटरनेट को फिर से चालू करना अप्रत्याशित घटना मानी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 11:29:24 +0530</pubDate>
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