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                <title>Internal Conflict - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Internal Conflict RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिकी रिपोर्ट में खुलासा: अल-कायदा, लश्कर और जैश जैसे गुट सक्रिय, पाकिस्तान पंद्रह आतंकी संगठनों का गढ़</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की रिपोर्ट ने पाकिस्तान को लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे 15 आतंकी संगठनों का सुरक्षित ठिकाना बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में आतंकवाद से मौतें 4,001 तक पहुँच गईं। कट्टरपंथी मदरसे और सीमा पार सक्रिय विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) वैश्विक सुरक्षा के लिए अब भी गंभीर खतरा बने हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/american-report-reveals-that-groups-like-al-qaeda-lashkar-and-jaish/article-148292"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/terrorism.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिका की कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) की एक नई रिपोर्ट में पाकिस्तान को एक बार फिर विभिन्न आतंकवादी संगठनों के प्रमुख ठिकाने के रूप में चिन्हित किया गया है, जिसमें वैश्विक स्तर पर सक्रिय अल-कायदा से लेकर भारत-केंद्रित संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) शामिल हैं।   रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान 1980 के दशक से सक्रिय अनेक सशस्त्र गैर-राज्य तत्वों के लिए संचालन का आधार बना हुआ है। इन्हें व्यापक रूप से वैश्विक, अफगानिस्तान-केंद्रित, भारत और कश्मीर केंद्रित, घरेलू तथा सांप्रदायिक (एंटी-शिया) संगठन सहित पांच श्रेणियों में बांटा गया है। </p>
<p><strong>12 संगठन एफटीओ घोषित </strong></p>
<p>पहचाने गए 15 संगठनों में से 12 को अमेरिकी कानून के तहत विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) घोषित किया गया है, जिनमें अधिकांश इस्लामी उग्रवादी विचारधारा से प्रेरित हैं। सीआरएस के अनुसार, एलईटी और जेईएम जैसे कई भारत विरोधी संगठन अब भी सक्रिय हैं और पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर क्षेत्रों से संचालित होते हैं। इन संगठनों का संबंध 2008 के मुंबई आतंकी हमलों और 2001 में भारतीय संसद पर हमले जैसे बड़े हमलों से जोड़ा गया है।</p>
<p><strong>पाक खुद भी पीड़ित</strong></p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि गंभीर घरेलू आतंकवाद का सामना करने के बावजूद पाकिस्तान इन नेटवर्कों को समाप्त करने में संघर्ष कर रहा है। आतंकवाद से संबंधित मौतों की संख्या 2019 में 365 से बढ़कर 2025 में 4,001 तक पहुंच गई है, जो एक दशक में सबसे अधिक है। यह हिंसा मुख्य रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान, खासकर अफगानिस्तान सीमा के आसपास केंद्रित है।  </p>
<p><strong>मदरसों में दिया जा रहा कट्टरपंथ को बढ़ावा</strong></p>
<p>रिपोर्ट में कुछ मदरसों में दी जाने वाली शिक्षा को भी कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाला बताया गया है। वहीं, पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता रहा है और भारत पर अपने पश्चिमी प्रांतों में विद्रोही गतिविधियों को समर्थन देने का आरोप लगाता है। भारत इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 13:05:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बंगाल चुनाव: अपनों के विरोध से बेहाल तृणमूल और भाजपा, कहीं भूमिपुत्र की मांग तो कहीं चरित्र पर वार</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और टीएमसी दोनों ही आंतरिक कलह से जूझ रही हैं। टिकट न मिलने से नाराज कार्यकर्ताओं ने बांकुड़ा से हावड़ा तक सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। टीएमसी ने 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काटे हैं, जिससे बागी नेताओं के निर्दलीय चुनाव लड़ने का खतरा बढ़ गया है, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/trinamool-and-bjp-are-troubled-by-the-opposition-of-their/article-147631"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/kalyan.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनावों की रणभेरी बजते ही राज्य की दो प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पार्टियों तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के लिए बाहरी शत्रुओं से ज्यादा घर के विभीषण चुनौती बन गए हैं। टिकट बंटवारे से असंतुष्ट कार्यकर्ताओं का गुस्सा अब सड़कों पर पोस्टर, नारेबाजी और सामूहिक इस्तीफे के रूप में फूट रहा है। बांकुड़ा से लेकर हावड़ा तक, दोनों ही दल उम्मीदवार-कांटे से लहूलुहान नजर आ रहे हैं।</p>
<p><strong>तृणमूल: भीतरघात और पुराने चेहरों पर अविश्वास</strong></p>
<p>सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी असंतोष की ज्वाला भड़क रही है। पूर्व बर्द्धमान जिले के खंडघोष और मंतेश्वर में पुराने बनाम नए की लड़ाई सड़क पर आ गई है। कई क्षेत्रों में नेताओं के करीबियों को टिकट मिलने से स्थानीय नेता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उत्तर 24 परगना और हुगली के कुछ क्षेत्रों में भी तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उम्मीदवारों के चयन पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया है। कार्यकतार्ओं का तर्क है कि जो नेता पिछले पांच वर्षों में जमीन पर सक्रिय नहीं थे, उन्हें फिर से थोपना हार को निमंत्रण देना है। </p>
<p>हालांकि, पार्टी के कद्दावर नेता कल्याण बनर्जी ने दावा किया है कि ये छोटे-मोटे मतभेद हैं और पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी। तृणमूल ने इस बार पिछले चुनाव में जीते 74 विधायकों को टिकट नहीं दिया है। वे लोग अब निर्दलीय या फिर अन्य किसी दल से चुनाव लड़ने की तैयारी में है। बांकुड़ा जिले की छातना विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान विधायक सत्यनारायण मुखोपाध्याय को दोबारा टिकट दिए जाने से स्थानीय कार्यकर्ता नाराज हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 13:11:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कांग्रेस में आंतरिक असंतोष: महेश कुमार गौड़ ने की जीवन रेड्डी से मुलाकात, इन अहम मुद्दों पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने जगतियाल में वरिष्ठ नेता टी. जीवन रेड्डी से मुलाकात कर पार्टी के आंतरिक मतभेदों को सुलझाने का प्रयास किया। असंतोष जताने वाले रेड्डी के साथ इस हाई-प्रोफाइल बैठक का उद्देश्य संगठन में एकजुटता बहाल करना है। सचिन सावंत की मौजूदगी ने इस चर्चा को राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/internal-discontent-in-congress-mahesh-kumar-gaur-meets-jeevan-reddy/article-147654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/mahesh-gour.png" alt=""></a><br /><p>जगतियाल। तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने मंगलवार को कांग्रेस सचिव सचिन सावंत और पार्टी व्हिप अदि श्रीनिवास के साथ जगतियाल पहुंचकर पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता टी. जीवन रेड्डी से मुलाकात की।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, गौड़ ने रेड्डी के आवास पर उनसे विस्तृत चर्चा की। हाल ही में, रेड्डी ने पार्टी के भीतर कुछ घटनाक्रमों को लेकर असंतोष जताते हुए पत्र लिखे थे।</p>
<p>जगतियाल नगर स्थित अपने आवास पर रेड्डी ने मुलाकात के लिए आए सभी मेहमानों का स्वागत किया। कांग्रेस पार्टी में हाल के आंतरिक घटनाक्रमों के मद्देनजर इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां पार्टी नेतृत्व वरिष्ठ नेताओं की चिंताओं को दूर करने और संगठन में एकजुटता बनाए रखने के प्रयास में जुटा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 12:02:15 +0530</pubDate>
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                <title>तालिबान में काबुल बनाम कंधार की जंग, अफगानिस्तान में हक्कानी और अखुंदजादा आमने-सामने</title>
                                    <description><![CDATA[लीक ऑडियो में सुप्रीम लीडर ने आंतरिक मतभेदों से अमीरात के ढहने की चेतावनी दी। काबुल और कंधार गुटों के बीच सत्ता संघर्ष चरम पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/kabul-vs-kandahar-war-between-taliban-haqqani-and-akhundzada-face/article-139744"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/taliban.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगानिस्तान पर काबिज तालिबान के अंदरूनी हालात ठीक नहीं हैं। तालिबान में आपसी संघर्ष चरम पर है। हाल में ही वायरल हो गए एक ऑडियो क्लिप में इस बात का खुलासा हुआ है कि तालिबान के नेता अंदरूनी खतरे से परेशान हैं। उन्हें लगता है कि हालात जल्द नहीं सुधरें तो तालिबान में सत्ता संघर्ष चरम पर पहुंच सकता है। यह संघर्ष दो धड़ों के बीच में हो रहा है, जिसमें एक का नेतृत्व सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा कर रहे हैं और दूसरे का आंतरिक मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी कर रहे हैं। तालिबान ने अगस्त 2021 में अशरफ गनी की सरकार गिरने और अमेरिकी सेना की वापसी के बाद काबुल पर कब्जा कर लिया था।</p>
<p><strong>लीक ऑडियो में क्या सुनाई दिया</strong></p>
<p>बीबीसी को मिली लीक हुई ऑडियो क्लिप में सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा को भाषण देते हुए सुना जा सकता है, जिसमें उन्होंने कहा कि अंदरूनी मतभेद आखिरकार उन सभी को खत्म कर सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी, इन बंटवारों के कारण, अमीरात ढह जाएगा और खत्म हो जाएगा। अखुंदजादा ने यह भाषण जनवरी 2025 में दक्षिणी शहर कंधार के एक मदरसे में तालिबान लड़ाकों के सामने दिया था। इस ऑडियो क्लिप ने पुष्टि की है कि तालिबान में सब कुछ सही नहीं है और इसके शीर्ष नेतृत्व के बीच गंभीर मतभेद हैं। हालांकि, तालिबान हमेशा इससे इनकार करता रहा है।</p>
<p><strong>तालिबान में दो गुट कौन से हैं</strong></p>
<p>तालिबान में दो प्रमुख गुट हैं। एक गुट पूरी तरह से अखुंदजादा के प्रति वफादार है, जो कंधार में अपने बेस से देश को एक सख्त इस्लामिक अमीरात के अपने विजन की ओर ले जा रहे हैं। वह अफगानिस्तान को आधुनिक दुनिया से अलग-थलग रखना चाहते हैं और उनके प्रति वफादार धार्मिक नेता समाज के हर पहलू को नियंत्रित करते हैं। वहीं दूसरा, जिसमें ज्यादातर राजधानी काबुल में रहने वाले शक्तिशाली तालिबान सदस्य शामिल हैं। ये एक ऐसे अफगानिस्तान की पैरवी करते हैं, जो कट्टर इस्लाम का पालन करते हुए बाहरी दुनिया से जुड़े, देश की अर्थव्यवस्था का निर्माण करे और लड़कियों और महिलाओं को भी ऐसी शिक्षा तक पहुंचने की अनुमति दे जो उन्हें अभी प्राइमरी स्कूल के बाद नहीं मिलती है।</p>
<p><strong>तालिबान पर किसका नियंत्रण</strong></p>
<p>तालिबान के अनुसार, अफगानिस्तान पर अखुंदजादा समूह का पूर्ण शासक है। वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जो केवल अल्लाह के प्रति जवाबदेह हैं और उन्हें चुनौती नहीं दी जा सकती। हालांकि, उनके कई फैसलों का व्यापक पैमाने पर विरोध भी हुआ है। इसी में से एक है सितंबर 2025 के आखिरी में अखुंदजादा का इंटरनेट और फोन बंद करने का आदेश। इससे अफगानिस्तान बाकी दुनिया से कट गया। तीन दिन बाद इंटरनेट को बहाल कर दिया गया, लेकिन तालिबान ने यह नहीं बताया कि ऐसा क्यों हुआ।</p>
<p><strong>तालिबान में विद्रोह</strong></p>
<p>इसे तालिबान में विद्रोह की तरह देखा जा रहा है। हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने अपने नेतृत्व की शुरूआत इस तरह नहीं की थी। सूत्रों का कहना है कि उन्हें 2016 में तालिबान के सर्वोच्च नेता के रूप में आंशिक रूप से आम सहमति बनाने के उनके दृष्टिकोण के कारण चुना गया था। खुद युद्ध के मैदान का अनुभव न होने के कारण अखुंदजादा ने सिराजुद्दीन हक्कानी को अपना सहायक बनाया जो खूंखार आतंकवादी कमांडर है। वह उस समय अमेरिका का मोस्ट वॉन्डेट भी था। उसके सिर पर अमेरिका ने 10 मिलियन डॉलर का इनाम रखा था।</p>
<p><strong>तालिबान में सितंबर में क्या हुआ था</strong></p>
<p>बीबीसी की रिपोर्ट में अंदरूनी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अफगानिस्तान में सितंबर में जो कुछ हुआ, वो काफी बड़ा था। काबुल समूह ने अखुंदजादा के आदेश के खिलाफ काम किया और इंटरनेट को बहाल कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभूतपूर्व घटना थी। तालिबान दूसरे अफगान गुटों के विपरीत अपनी एकजुटता के लिए जाना जाता है।</p>
<p>इसमें कोई फूट नहीं पड़ी है, यहां तक कि असहमतियों के बारे में भी शायद ही कभी सुना गया हो। विशेषज्ञों का भी कहना है कि तालिबान के डीएनए में अपने वरिष्ठ नेताओं और अमीर (सुप्रीम लीडर) की आज्ञा मानने का सिद्धांत शामिल है। यही वजह है कि उनके स्पष्ट आदेश के खिलाफ जाकर इंटरनेट को फिर से चालू करना अप्रत्याशित घटना मानी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 11:29:24 +0530</pubDate>
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