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                <title>Regional Security - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Regional Security RSS Feed</description>
                
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                <title>युद्धविराम शुरू होने के बाद से किसी भी देश पर कोई मिसाइल हमला नहीं, ड्रोन हमलों के लिए अमेरिका जिम्मेदार : आईआरजीसी</title>
                                    <description><![CDATA[IRGC ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ युद्धविराम शुरू होने के बाद से उन्होंने कोई मिसाइल हमला नहीं किया। ईरान ने हालिया ड्रोन हमलों के लिए इजरायल और अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। इस्लामाबाद वार्ता से पहले तेहरान ने शांति की प्रतिबद्धता दोहराई है, हालांकि लेबनान पर इजरायली हमलों को समझौते का उल्लंघन बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/no-missile-attack-on-any-country-since-the-ceasefire-started/article-149923"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/irgc2.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा है कि अमेरिका के साथ युद्धविराम शुरू होने के बाद से किसी भी देश पर मिसाइलें नहीं दागी गईं। अल जजीरा ने यह जानकारी दी। आईआरजीसी ने कहा कि उसकी सेनाओं ने "युद्धविराम के बाद अब तक किसी भी देश पर कोई मिसाइल नहीं दागी है।" बयान में कहा गया कि ड्रोन हमलों की जो भी खबरें आ रही हैं, वे 'निस्संदेह यहूदी दुश्मन या अमेरिका का काम हैं।'</p>
<p>मंगलवार रात को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ दो सप्ताह के द्विपक्षीय युद्धविराम की घोषणा की थी और इस बात की पुष्टि की थी कि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमत हो गया है। ईरानी सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इसके बाद संकेत दिया कि ईरान शुक्रवार को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करेगा। ईरानी उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने कहा कि तेहरान पाकिस्तान में अमेरिका के साथ बातचीत को आगे बढ़ा रहा है और उम्मीद करता है कि अमेरिका भी वैसा ही करेगा।</p>
<p>इजरायली लड़ाकू विमानों और तोपखाने ने दक्षिणी लेबनान में एक दर्जन से अधिक बस्तियों को निशाना बनाया, जिसमें टायर शहर भी शामिल था। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि लेबनान पर इजरायली हमलों को रोकना अमेरिका-ईरान युद्धविराम समझौते का हिस्सा नहीं है। ईरान ने हालांकि इन हमलों को युद्धविराम समझौते का उल्लंघन माना।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 18:16:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने की पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ से फोन पर बात: नवीनतम क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर हुई चर्चा, संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर </title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने फोन पर पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण हालात पर चर्चा की। पेजेशकियान ने मुस्लिम देशों से अपील की कि वे ईरान के खिलाफ अमेरिकी या इजरायली हमलों के लिए अपनी जमीन का उपयोग न होने दें। पाकिस्तान इस संकट में मध्यस्थ की भूमिका निभाने और क्षेत्रीय शांति बहाल करने का प्रयास कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-president-pezheshkian-spoke-to-pakistani-pm-shehbaz-sharif-over/article-147704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pakistani-pm.png" alt=""></a><br /><p>ईरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को फोन पर बातचीत पश्चिमी एशिया के ताजा घटनाक्रम पर चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत 23 मार्च को पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री इशाक डार और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद हुई है।</p>
<p>पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा, ''उन्होंने नवीनतम क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। उप प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री ने क्षेत्र और उससे बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। दोनों पक्ष बदलती स्थिति पर निकट संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए।''</p>
<p>मंगलवार को आई खबरों में कहा गया है कि पाकिस्तान खुद को दोनों युद्धरत पक्षों के बीच मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है और इस्लामाबाद में बातचीत की मेजबानी करने का प्रयास कर रहा है, हालांकि इन रिपोर्टों की कोई पुष्टि नहीं हुई है। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी (एमएनए) ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति पेज़ेशकियन और शहबाज शरीफ ने द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय घटनाक्रमों और अमेरिका तथा इजरायल द्वारा किये गये अवैध हमले के क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की।</p>
<p>पेज़ेशकियन ने इस्लामी देशों से आह्वान किया कि वे अमेरिका या इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ हमलों के लिए अपने क्षेत्र या संसाधनों के उपयोग की अनुमति न दें। उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्रीय देश युद्ध जारी रहने को नहीं रोक सकते, तो उन्हें कम से कम ईरान के खिलाफ निरंतर कार्रवाइयों को सुगम नहीं बनाना चाहिए। शरीफ ने तनाव कम करने और स्थायी शांति एवं स्थिरता बहाल करने के लिए क्षेत्रीय देशों, विशेष रूप से मुस्लिम देशों द्वारा सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 16:03:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>यूएई ने की इराक में अपने दूतावास पर आतंकी ड्रोन हमले की कड़ी निंदा: अंतरराष्ट्रीय मानदंडों एवं कानूनों का उल्लंघन बताया, कोई हताहत नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[यूएई ने इराक के कुर्दिस्तान में अपने महावाणिज्य दूतावास पर हुए आतंकी ड्रोन हमले की तीखी निंदा की है। वियना समझौते का उल्लंघन बताते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा करार दिया गया। हमले में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन यूएई ने दोषियों की जवाबदेही तय करने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन की मांग ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/uae-strongly-condemns-terrorist-drone-attack-on-its-embassy-in/article-145973"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/uae.png" alt=""></a><br /><p>अबू धाबी। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में अपने महावाणिज्य दूतावास को निशाना बनाकर किए गए एक आतंकी ड्रोन हमले की कड़ी निंदा की है। इस हमले में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। यूएई के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को जारी एक बयान में इस हमले को बिना उकसावे वाला आतंकवादी कृत्य बताया और जोर दिया कि राजनयिक मिशनों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानदंडों एवं कानूनों का गंभीर उल्लंघन है।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के हमले राजनयिक संबंधों पर वियना समझौते का उल्लंघन करते हैं, जो राजनयिक परिसरों और राजनयिक कर्मियों की सुरक्षा की गारंटी देता है। यह घटना क्षेत्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता के लिए खतरा पैदा करने वाली है। यूएई ने इराक सरकार और कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार से इस घटना की गहन जांच शुरू करने, जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाए।</p>
<p>कुर्दिस्तान आतंकवाद-विरोधी सेवा के अनुसार, दो ड्रोनों ने यूएई के वाणिज्य दूतावास को निशाना बनाया, जबकि तीसरे का लक्ष्य इरबिल हवाई अड्डा था, जो एक अमेरिकी सैन्य अड्डे के पास स्थित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 15:27:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इजरायली सेना का ईरान में बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर हमला करने का दावा, नए युद्धकालीन दिशा-निर्देश लागू </title>
                                    <description><![CDATA[इजरायल ने गुरुवार को ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल केंद्रों और लॉन्च पैड्स पर भीषण हवाई हमले किए। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने तेल अवीव पर मिसाइलें दागीं, जिससे मध्य इजरायल में सायरन गूंज उठे। हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इजरायल और अमेरिका के संयुक्त ऑपरेशनों ने क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/israeli-army-claims-to-attack-ballistic-missile-sites-in-iran/article-145384"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-attack.png" alt=""></a><br /><p>यरूशलम। इजरायल ने गुरुवार को कहा कि उसकी वायुसेना ने ईरानी बैलेस्टिक मिसाइल ठिकानों पर हमलों का एक दौर पूरा कर लिया है। सैन्य अधिकारियों ने एक बयान में कहा है कि लड़ाकू विमानों ने ईरान में भूमिगत बैलिस्टिक मिसाइल भंडारण केंद्र, विमानों के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली मिसाइल भंडारण केंद्र और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के लॉन्च पैड्स (प्रक्षेपण स्थलों) पर हमला किया। सेना ने लक्षित स्थलों की संख्या या उनके सटीक स्थानों के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी।</p>
<p>सुबह ईरान की ओर से मिसाइल हमले फिर से शुरू हो गये। तेल अवीव सहित मध्य इजरायल में हवाई हमले के सायरन गूंजने लगे और लाखों लोग आश्रय स्थलों की ओर भागे। यह स्थिति ठीक उसी समय बनी जब नये युद्धकालीन दिशा-निर्देश लागू हुए थे, जिनमें कुछ प्रतिबंध हटाये गये थे और इजरायलियों को उन कार्यस्थलों को फिर से खोलने की अनुमति दी गयी थी, जहां से वे जल्दी आश्रय स्थलों तक पहुंच सकें।</p>
<p>पुलिस ने बताया कि मध्य क्षेत्र में एक मिसाइल का अवशेष गिरा है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो फुटेज में दिखाया गया है कि इसके प्रभाव से एक रिहायशी घर के पिछवाड़े में बड़ा गड्ढा हो गया है। चिकित्सा कर्मियों ने किसी के घायल होने की सूचना नहीं दी है। शनिवार सुबह इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किये थे, जिसके जवाब में ईरान ने इजरायली ठिकानों और पश्चिम एशिया में अमेरिकी संपत्तियों पर जवाबी हमले किये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 18:27:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष के बीच ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी का बडा बयान: अपने सहयोगियों के हितों की रक्षा के लिए उठाएंगे कदम, ईरान के खिलाफ आवश्यक और आनुपातिक रक्षात्मक कार्रवाई के लिए तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ई-3 देशों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को उनके स्रोत पर ही नष्ट करने की चेतावनी दी है। ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर ने स्पष्ट किया कि वे केवल रक्षात्मक सैन्य कार्रवाई और सहयोगियों की सुरक्षा हेतु प्रतिबद्ध हैं, न कि किसी आक्रामक युद्ध की शुरुआत के लिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/amidst-the-ongoing-conflict-in-west-asia-britain-france-and/article-145143"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/bratin-pm.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष के बीच कहा है कि वे ईरान के खिलाफ आवश्यक और आनुपातिक रक्षात्मक कार्रवाई के लिए तैयार हैं। तीनों देशों की ओर से रविवार को जारी संयुक्त बयान में कहा गया, हम क्षेत्र में अपने और अपने सहयोगियों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाएंगे, जिसमें आवश्यक और आनुपातिक रक्षात्मक कार्रवाई सक्षम करना शामिल हो सकता है, ताकि ईरान की मिसाइल और ड्रोन दागने की क्षमता को उनके स्रोत पर नष्ट किया जा सके।</p>
<p>बयान में आगे कहा गया कि इस मुद्दे पर तीनों देश अमेरिका और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर काम करेंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा कि ब्रिटेन ने अमेरिकी अनुरोध स्वीकार करते हुए अपने ठिकानों के उपयोग की अनुमति विशिष्ट और सीमित रक्षात्मक उद्देश्य के लिए दी है। स्टारमर ने कहा, खाड़ी क्षेत्र में हमारे साझेदारों ने हमसे उनकी रक्षा के लिए और अधिक करने का आग्रह किया है। समन्वित रक्षात्मक अभियानों के तहत ब्रिटेन के जेट विमान पहले से ही हवा में हैं और उन्होंने ईरानी हमलों को सफलतापूर्वक रोका है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि खतरे को रोकने का एकमात्र तरीका मिसाइलों को उनके स्रोत पर नष्ट करना है,चाहे वे भंडारण डिपो में हों या लॉन्चर पर। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिटेन ईरान पर प्रारंभिक हमलों में शामिल नहीं था और अब भी किसी आक्रामक सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 15:36:02 +0530</pubDate>
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                <title>&quot;ऑपरेशन गक़ाब लिल-हक़&quot; के तहत पाकिस्तान ने किया अफगानिस्तान के खिलाफ युद्ध का ऐलान: काबुल, कंधार और पक्तिया में सैन्य ठिकानों पर बरसाए बम, 55 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत </title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर किया हवाई हमला। जवाबी कार्रवाई में तालिबान ने पाकिस्तानी F-16 विमान गिराने और 55 सैनिकों को मारने का किया दावा। 130 से अधिक लड़ाकों की मौत। भारत ने की नागरिकों की मौत और संप्रभुता के उल्लंघन की कड़ी निंदा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/under-operation-gaqab-lil-haq-pakistan-declared-war-against-afghanistan-bombs/article-144803"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/pakistan1.png" alt=""></a><br /><p>पाकिस्तान। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के साथ बढ़ते टकराव के बीच पाकिस्तान ने उसके खिलाफ युद्ध घोषित करते हुए 'ऑपरेशन गक़ाब लिल-हक़ शुरू किया। रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार तड़के पाकिस्तान की सशस्त्र सेनाओं ने काबुल, कंधार और पक्तिया में महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए।</p>
<p>पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तालिबान सरकार के साथ पूर्ण टकराव की घोषणा की। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, हमारा सब्र अब खत्म हो चुका है और चेतावनी दी कि अब दोनों पक्षों के बीच खुला युद्ध है। पीएम शहबाज शरीफ ने कहा, हमारे सशस्त्र बल अफगानिस्तान के किसी भी तरह के आक्रामक मंसूबे को कुचलने की पूरी क्षमता रखते हैं। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने आज अफगानिस्तान पर जवाबी हमलों के बाद कहा कि पाकिस्तान शांति और अपनी क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने इन हमलों में 130 से अधिक तालिबान लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया है। </p>
<p>पाकिस्तान के अनुसार, ऑपरेशन गक़ाब लिल-हक़ के तहत हमले आज तड़के किए गए। यह कार्रवाई खैबर पख्तूनख्वा के चितराल, खैबर, मोहम्मद, कुर्रम और बाजौर सेक्टरों में गुरुवार शाम अफगान तालिबान की ओर से की गई। मीडिया रिपोर्टों में काबुल और कंधार में धमाकों और गोलीबारी की खबर दी गई। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि डूरंड रेखा के साथ कल की गई जवाबी कार्रवाई में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। करीब 2,500 किलोमीटर लंबी सीमा जिसे डूरंड रेखा कहा जाता है को अफगानिस्तान ने कभी मान्यता नहीं दी है।</p>
<p>इस बीच,अफगानिस्तान डिफेंस नामक एक्स हैंडल ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें जलते हुए एफ-16 विमान का मलबा दिखाया गया है। अमेरिकी आपूर्ति वाले इस एक इंजन वाले लड़ाकू विमान पर छोटा पाकिस्तानी झंडा बना हुआ है। एग्जॉस्ट के पास 85510 नंबर दिखाई दे रहा है। इस दृश्य की हालांकि स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।</p>
<p>दोहा स्थित अल जजीरा समाचार चैनल ने बताया कि अफगानिस्तान ने सीमा के विस्तृत हिस्से में कई पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर हमला शुरू किया, जिनमें तोर्खम सीमा चौकी भी शामिल है, जो अफगानिस्तान में प्रवेश का एक प्रमुख मार्ग है। चैनल ने पाकिस्तान के दावों के हवाले से कहा, हवाई हमले अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के साथ-साथ पक्तिया और कंधार प्रांत में किए गए और दावा किया गया कि सीमा पार कई तालिबान लड़ाके मारे गए।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में काबुल में दो ब्रिगेड मुख्यालय नष्ट कर दिए गए, जबकि कंधार में एक कोर मुख्यालय और एक ब्रिगेड मुख्यालय को तबाह कर दिया गया। पाकिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में बढ़ती उग्रवाद की घटनाओं के लिए अफगान तालिबान पर पाकिस्तानी तालिबान विद्रोहियों को शरण देने का आरोप लगाता रहा है। </p>
<p>पिछले सप्ताह भारत ने अफगानिस्तान के क्षेत्र पर पाकिस्तान के हवाई हमलों की कड़ी निंदा की थी, जिनमें कई नागरिक हताहत हुए थे। भारत ने इन हमलों को पाकिस्तान की अपनी आंतरिक विफलताओं को बाहरी रूप देने की एक और कोशिश बताया और अफगानिस्तान की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन को दोहराया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, भारत पवित्र रमजान माह के दौरान महिलाओं और बच्चों सहित नागरिकों की मौत का कारण बने अफगानिस्तान क्षेत्र पर पाकिस्तान के हवाई हमलों की कड़ी निंदा करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 14:07:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उत्तराखंड के चौबट्टिया में 24 फरवरी से शुरू होगा भारत-जापान संयुक्त सैन्य अभ्यास धर्म गार्डियन 2026, शहरी युद्ध और आतंकवाद-रोधी अभियानों को मिलेगा बढ़ावा </title>
                                    <description><![CDATA[भारत और जापान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास 'धर्म गार्डियन' का सातवां संस्करण 24 फरवरी से उत्तराखंड के चौबट्टिया में शुरू होगा। इसका उद्देश्य शहरी युद्ध और आतंकवाद-रोधी अभियानों में तालमेल बढ़ाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-japan-joint-military-exercise-will-start-from-february-24-in/article-144222"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/india-and-japan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास धर्म गार्डियन 2026 का सातवां संस्करण 24 फरवरी से नौ मार्च तक उत्तराखंड के चौबट्टिया में आयोजित किया जाएगा। यह अभ्यास प्रतिवर्ष बारी-बारी से भारत और जापान में किया जाता है। अतिरिक्त लोक सूचना महानिदेशालय ने एक्स पर बताया कि इस अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त शहरी युद्ध और आतंकवाद-रोधी अभियानों के दौरान दोनों सेनाओं के बीच परस्पर संचालन क्षमता को बढ़ाना है।  </p>
<p>पोस्ट के अनुसार दो सप्ताह के दौरान सैनिक संयुक्त योजना निर्माण को परिष्कृत करेंगे, सामरिक अभ्यासों का समन्वय करेंगे और विशेष युद्ध कौशल का अभ्यास करेंगे। प्रमुख गतिविधियों में अस्थायी ऑपरेटिंग बेस की स्थापना, आईएसआर ग्रिड विकसित करना, मोबाइल चेक पोस्ट, घेराबंदी और तलाशी अभियान, हेलिबोर्न मिशन और हाउस इंटरवेंशन ड्रिल शामिल हैं।  </p>
<p>धर्म गार्डियन 2026 भारत-जापान रक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। अभ्यास का छठा संस्करण 2025 में जापान के ईस्ट फुजी मैनोवर ट्रेनिंग एरिया में आयोजित हुआ था। भारतीय दल में 120 कर्मी शामिल थे, जिनका प्रतिनिधित्व मुख्य रूप से मद्रास रेजिमेंट की एक बटालियन तथा अन्य हथियारों और सेवाओं के जवानों ने किया था। </p>
<p>जापानी दल समान संख्या में था और उसका प्रतिनिधित्व जापान ग्राउंड आत्मरक्षा बल की 34वीं इन्फैंट्री रेजिमेंट ने किया था। इससे पहले, पांचवां संस्करण 2024 में राजस्थान में आयोजित किया गया था। रक्षा मंत्रालय ने पहले जारी बयान में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के तहत शहरी युद्ध और आतंकवाद-रोधी अभियानों में दोनों सेनाओं की परस्पर काम करने की क्षमता बढ़ाना इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य है। </p>
<p>पिछले एक दशक में भारत-जापान रक्षा सहयोग में निरंतर मजबूती आई है, जिसे उच्चस्तरीय संवाद, रक्षा नीति संवाद, 2 2 मंत्रिस्तरीय और वार्षिक रक्षा मंत्रिस्तरीय बैठक जैसे संस्थागत तंत्रों से बल मिला है। टोक्यो घोषणा और रक्षा सहयोग एवं आदान-प्रदान पर समझौता ज्ञापन ने इस साझेदारी को रणनीतिक दिशा प्रदान की है।  </p>
<p>सितंबर 2020 में हुए पारस्परिक आपूर्ति एवं सेवाओं के प्रावधान संबंधी समझौते ने सहयोग को नयी गति दी, जिसे मिलान-2022 के दौरान लागू किया गया और इससे अभ्यासों तथा जहाजों एवं विमानों की यात्राओं के दौरान लॉजिस्टिक्स सहयोग सुगम हुआ। रक्षा उपकरण, प्रौद्योगिकी और सेवा-सेवा सहयोग में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। संयुक्त कार्य समूह अब तक सात बैठकें कर चुका है, जबकि उद्योग-से-उद्योग संपर्क भी लगातार बढ़ रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 12:44:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अफगान तालिबान ने आतंकी समूहों की सहायता वाले आरोपों को किया खारिज, कहा पड़ोसी देशों से संचालित</title>
                                    <description><![CDATA[तालिबान ने विदेशी आतंकी समूहों को मदद देने के आरोप नकारे। कहा, इस्लामिक स्टेट ने पड़ोसी देशों में ठिकाने बनाए, अफगानिस्तान पूरी तरह सुरक्षित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/afghan-taliban-rejects-allegations-of-supporting-terrorist-groups-says-operated/article-142149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगान तालिबान ने अफगानिस्तान में सक्रिय विदेशी आतंकवादी समूहों को किसी भी प्रकार की सहायता देने के आरोपों को खारिज कर दिया। उसने आरोप लगाया कि इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने पड़ोसी देशों में ठिकाने स्थापित किए हैं, जो पाकिस्तान की ओर एक अप्रत्यक्ष इशारा है। तालिबान के प्रवक्ता मुजाहिद ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कई देशों द्वारा तालिबान-नियंत्रित अफगानिस्तान से कथित आतंकवादी गतिविधियों के बारे में व्यक्त की गई चिंताओं का जवाब देते हुए गुरुवार को कहा कि अफगानिस्तान सुरक्षित है और इस्लामी अमीरात में कोई विदेशी या दुष्ट समूह मौजूद नहीं है।</p>
<p>अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट की हार का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश इस आतंकी समूह ने हमारे पड़ोसी देशों में अपने ठिकाने बना लिए हैं। मुजाहिद ने देशों द्वारा उठाई गई सुरक्षा चिंताओं को बेबुनियाद करार देते हुए कहा कि ये चिंताएं संयुक्त राष्ट्र में तालिबान के प्रतिनिधित्व की कमी के कारण उत्पन्न हुई हैं।</p>
<p>हालांकि, उन्होंने किसी भी पड़ोसी देश का नाम नहीं लिया, जहां उनके अनुसार इस्लामिक स्टेट खोरासान ने कथित तौर पर शरण ली थी लेकिन तालिबान अधिकारियों ने एक से अधिक बार पाकिस्तान पर इस्लामिक स्टेट के गुर्गों को पनाह देने, सहायता करने, प्रशिक्षण देने एवं वित्तपोषण करने का आरोप लगाया है।</p>
<p>बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सत्र में, संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी, अलेक्जेंडर जुएव ने चेतावनी दी कि इस्लामिक अमीरात में आईएस-केपी क्षेत्र और उससे परे दोनों जगह सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है, जो तालिबान द्वारा बार-बार किए गए उन दावों के विपरीत है कि उसने देश के भीतर इसे हरा दिया है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट का खतरा लगातार बना हुआ है और इसके लिए तत्काल समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि यह खतरा अफगानिस्तान से परे पश्चिम और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों तक फैल रहा है और यहां तक कि अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक भी पहुंच रहा है। पाकिस्तान के प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने तालिबान पर आतंकी समूहों की सहायता करने और उन्हें बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब से इस्लामी समूह काबुल में सत्ता में वापस लौटा है, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और बलूच अलगाववादियों जैसे आतंकवादी संगठनों को नई ताकत मिली है।</p>
<p>उन्होंने काबुल पर इन समूहों को सुरक्षित पनाह देने और अफगान क्षेत्र में परिचालन की स्वतंत्रता प्रदान करने का आरोप लगाया, जिसका उपयोग उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ विभिन्न हमले करने के लिए किया। अहमद ने इस्लामाबाद के बयान को दोहराते हुए कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अग्रणी देशों में से एक रहा है और उसे कई नुकसान उठाने पड़े हैं, जिनमें 90,000 से अधिक लोगों की जान जाना और अवसंरचना एवं समग्र आर्थिक विनाश शामिल है।</p>
<p>चीन के प्रतिनिधि ने अफगानिस्तान में अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट और उइघुर आतंकवादियों जैसे आतंकी समूहों की मौजूदगी एवं गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की और तालिबान से कार्रवाई करने का आग्रह किया। काबुल के शहर-ए-नाव जिले में एक चीनी रेस्तरां पर आईएसआईएस के हमले का उल्लेख करते हुए, चीन के राजदूत ने कहा कि अफगान धरती पर आतंकवादी गतिविधियां बढ़ रही हैं और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 14:20:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चीन का बड़ा दावा, जापान के पास इतना प्लूटोनियम कि रातो-रात बना ले परमाणु बम </title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने एक रिपोर्ट जारी कर दावा किया कि जापान ने सैन्य महत्वाकांक्षाओं के चलते गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार विकसित किए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/chinas-big-claim-is-that-japan-has-enough-plutonium-to/article-139751"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/cbina.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर परमाणु बम गिराए थे। उसके बाद जापान ने प्रण लिया था कि वो अपनी सेना नहीं रखेगा। कई दशक बीतने के बाद अब जापान ना सिर्फ अपनी सेना बना रहा है, बल्कि चीन ने दावा किया है कि जापान, गुप्त तरीके से परमाणु बम का निर्माण कर रहा है।</p>
<p>हालांकि, परमाणु हथियारों को लेकर जापान का हमेशा से सख्त रूख रहा है और उसने फरवरी 1970 में क्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी पर साइन कर दिए थे। इसके अलावा जापान तीन नॉन-न्यूक्लियर सिद्धांतों का भी पालन करता है। ये तीन सिद्धांत हैं 1- न्यूक्लियर हथियार न रखना, 2- न्यूक्लियर हथियार ना बनाना, 3- जापानी इलाके में न्यूक्लियर हथियारों को आने की इजाजत न देना। जापान का ये सिद्धांत ऐतिहासिक था, लेकिन नये जियो-पॉलिटिकल हालातों और चीन के बढ़ते खतरों ने जापान को परमाणु हथियार बनाने के लिए मजबूर कर दिया है।</p>
<p>जापान की नई प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने पिछले दिनों कहा था कि चीन अगर ताइवान पर सशस्त्र हमला करता है, तो इससे जापान के लिए अस्तित्व का खतरा पैदा हो सकता है, जिससे ऐसे हालात में जापानी सेना की जवाबी कार्रवाई की संभावना खुल जाती है। चीन के अलावा जापान को उत्तर कोरिया के हमले की भी आशंका रहती है, जिसके पास पहले से ही परमाणु हथियार हैं। रिपोर्ट है कि जापान ने चीन, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देशों के खतरों को देखते हुए दूसरे देशों को जानलेवा हथियार एक्सपोर्ट करने पर खुद लगाई गई पाबंदियों में ढील दी है। </p>
<p>क्या जापान चोरी से बना रहा परमाणु बम?</p>
<p>चीन ने इस हफ्ते की शुरूआत में 30 पन्नों की एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें उसने इंटरनेशनल कम्युनिटी से जापान की न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं के खिलाफ ठोस और कड़े कदम उठाने की अपील की है। चीन के रिपोर्ट में कहा गया है कि जापान ने शायद पहले ही गुपचुप तरीके से हथियार बनाने लायक प्लूटोनियम बना लिया है और उसके पास कम समय में न्यूक्लियर हथियार हासिल करने की टेक्नोलॉजिकल और आर्थिक क्षमताएं हैं। इसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की एक टिप्पणी का भी जिक्र किया गया है कि जापान के पास लगभग रातों-रात न्यूक्लियर हथियार बनाने की क्षमता है। बाइडेन ने यह जानकारी सबसे पहले जून 2016 में दिए एक इंटरव्यू में दी थी।</p>
<p>शी जिनपिंग के साथ हुई बातचीत को याद करते हुए बाइडेन ने कहा था कि क्या होगा अगर जापान, जो कल न्यूक्लियर पावर बन सकता है, कल ही न्यूक्लियर हथियार बना ले? उनके पास लगभग रातों-रात ऐसा करने की क्षमता है। चीन ने जो रिपोर्ट जारी की है, उसका शीर्षक जापान के दक्षिणपंथी ताकतों की न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाएं: विश्व शांति के लिए एक गंभीर खतरा नाम से है, जो करीब 30 पन्नों का है।</p>
<p>यह रिपोर्ट चाइना आर्म्स कंट्रोल एंड डिसआमार्मेंट एसोसिएशन और न्यूक्लियर स्ट्रेटेजिक प्लानिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, जो चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉपोर्रेशन से जुड़ा एक थिंक टैंक है, उसने मिलकर तैयार किया है। इस डील में कहा गया है कि एनपीटी संधि के तहत जापान की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं हैं, कि वो परमाणु हथियारों का निर्माण नहीं करेगा, लेकिन उसने गुपचुप तरीके से न्यूक्लियर हथियारों पर रिसर्च और डवलपमेंट किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 11:39:44 +0530</pubDate>
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