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                <title>Territorial Integrity - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Territorial Integrity RSS Feed</description>
                
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                <title>भारत-चीन सीमा पर फिर गरमाया विवाद, ओवैसी ने पूछा-क्या PLA रोक रही भारतीय सैनिकों को पेट्रोलिंग से ?</title>
                                    <description><![CDATA[एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा पर स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पीएलए द्वारा भारतीय सेना की गश्त रोकने और अस्थायी ढांचे हटाने के आरोपों पर सरकार की चुप्पी की आलोचना की तथा देश की क्षेत्रीय अखंडता से समझौता न करने पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/controversy-heated-up-again-on-india-china-border-owaisi-asked/article-163122"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/owesi.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा पर बनी स्थिति को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि केंद्र की लगातार चुप्पी से गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। ओवैसी ने साेमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में पूछा " क्या पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने हाल ही में भारतीय सेना के गश्ती दल को उन इलाकों में जाने से रोका है जहाँ वे पहले गश्त करते थे और क्या उसने भारतीय इलाके में भारतीय सेना द्वारा बनाए गए किसी अस्थायी ढांचे को हटाया है।"</p>
<p>उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या पीएलए ने उस इलाके में टेंट लगाए हैं जहाँ भारतीय गश्ती दल पहले काम करती था और क्या सरकार सेना से कह रही है कि वह उस इलाके में 'पेट्रोलिंग' के अधिकारों के लिए ज़ोर न दे, ताकि अगले महीने दिल्ली में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित यात्रा से पहले सब कुछ सामान्य दिखे। ओवैसी ने यह सवाल भी किया कि क्या केंद्र सरकार ने चीन सीमा पर हो रही गतिविधियों के बारे में भारतीय जनता को अंधेरे में रखने का फैसला किया है। उन्होंने 2017 में डोकलाम गतिरोध और 2020 में लद्दाख सीमा पर तनाव के समय की स्थितियों का ज़िक्र करते हुए यह बात कही।</p>
<p>उन्होंने कहा, "सरकारें आती-जाती रहती हैं, प्रधानमंत्री आते-जाते रहते हैं, लेकिन भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता। यह सबसे पवित्र और अहम है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 18:28:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ग्रीनलैंड विवाद:  बढ़ते तनाव के बीच ईयू ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड न बेचने पर आयात शुल्क लगाने की धमकी के बाद ईयू ने प्रस्तावित व्यापार समझौते पर रोक लगा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/eu-bans-proposed-trade-deal-with-us-amid-rising-tension/article-139976"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump2.png" alt=""></a><br /><p>ब्रुसेल्स। ग्रीनलैंड मामले में अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईयू ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत रोक दी है। ईयू ने यह कदम डेनमार्क और संघ के कई देशों पर अमेरिका द्वारा आयात शुल्क लगाने की चेतावनी के बाद उठाया है। ईयू के नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा है कि ये आयात शुल्क संघ और अमेरिका के संबंधों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। साथ ही, उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के प्रति अपना पूर्ण समर्थन दोहराते हुए इस बात पर जोर दिया कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता ऐसे सिद्धांत हैं जिन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।</p>
<p>गौरतलब है कि, जुलाई 2025 में प्रस्तावित समझौते को आयात शुल्क कम करने और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया था। हालांकि ग्रीनलैंड पर ट्रंप के रुख और और आयात शुल्क लगाने की उनकी चेतावनी के बाद संघ ने इस प्रस्तावित समझौते के अनुमोदन को रोकने का आह्वान किया है। </p>
<p>ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में धमकी दी है कि यदि ग्रीनलैंड को'पूरी तरह' से अमेरिका को नहीं बेच दिया जाता, तो एक फरवरी 2026 से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा, जो 1 जून से बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाएगा।</p>
<p>ट्रंप ने ग्रीनलैंड के'रणनीतिक स्थान और खनिज संसाधनों को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए चेतावनी दी, एक फरवरी 2026 से, उपर्युक्त सभी देशों द्वारा अमेरिका को भेजे जाने वाले सभी सामानों पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा। एक जून 2026 को यह शुल्क बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। यह तब तक लागू रहेगा, जब तक ग्रीनलैंड को खरीदने के लिए कोई समझौता नहीं हो जाता।</p>
<p>यूरोपियन पीपल्स पार्टी के उपाध्यक्ष सिगफ्राइड मूरसन और अन्य यूरोपीय अधिकारियों ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह घोषणा उस स्थिरता को कमजोर करती है, जिसे सुनिश्चित करने के लिए यह व्यापार समझौता किया गया था। मूरसन ने कहा, पिछले साल अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच हुए व्यापार समझौते से स्थिरता ही एकमात्र लाभ होता। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा कई ईयू सदस्य देशों पर नए आयात लगाने की आज की घोषणा उस स्थिरता को छीन लेती है। यही कारण है कि उस व्यापार समझौते के अनुसमर्थन को स्थगित करना उचित है।</p>
<p>मूरसन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, हमें पिछले जुलाई के ईयू-यूएस व्यापार समझौते को बहुत जल्द अनुमोदित करना था, जिससे अमेरिका से यूरोपीय संघ में होने वाले आयात पर आयात शुल्क शून्य हो जाता। हालांकि, हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए इस मंजूरी के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को हासिल करने पर आमादा हैं। हालांकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने अपने 'आत्मनिर्णय के अधिकार' पर जोर देते हुए इस विचार को खारिज कर दिया है। बढ़ते तनाव के जवाब में, डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है, जबकि जर्मनी, स्वीडन, फ्रांस, नॉर्वे और नीदरलैंड ने भी छोटी सैन्य टुकड़यिाँ भेजी हैं। यूरोपीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के किसी भी अमेरिकी प्रयास का नाटो और अटलांटिक के दोनों ओर की सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 13:35:00 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका का दावा, कहा ग्रीनलैंड को हासिल करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अतिआवश्यक</title>
                                    <description><![CDATA[व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ग्रीनलैंड के अधिग्रहण को अमेरिकी सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं और इसे हासिल करने हेतु प्रबल उत्सुक हैं। डेनमार्क के साथ हुई उच्च स्तरीय वार्ता में 'मौलिक असहमति' के बावजूद, दोनों पक्ष भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा के लिए एक कार्य समूह बनाने पर सहमत हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-claims-that-acquiring-greenland-is-essential-for-national-security/article-139781"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/220922-donald-trump-mjf-1544-99e118.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने गुरुवार को कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ग्रीनलैंड को 'राष्ट्रीय सुरक्षा' के लिए अतिआवश्यक मानते हैं और इसे हासिल करने के लिए प्रबल उत्सुक हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने संवाददाताओं से कहा, राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपनी प्राथमिकता बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। वह चाहते हैं कि अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करे। उनका मानना है कि ऐसा करना हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के सर्वोत्तम हित में है।</p>
<p>व्हाइट हाउस की यह टिप्पणी अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों के बीच हुई सीधी बातचीत के बाद आई है। यह बातचीत ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने की राष्ट्रपति ट्रम्प की महत्वाकांक्षा को लेकर हुई थी। गौरतलब है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत क्षेत्र है।</p>
<p>डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा कि बुधवार को वॉ​शिगटन में ग्रीनलैंड के उनके समकक्ष, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हुई चर्चा मुख्य मतभेदों को सुलझाए बिना समाप्त हो गई। उन्होंने कहा कि'एक मौलिक असहमति बनी हुई है।</p>
<p>रासमुसेन ने कहा कि'हम अमेरिका की स्थिति को बदलने में कामयाब नहीं हुए'। उन्होंने हालांकि यह भी रेखांकित किया कि यह अप्रत्याशित भी नहीं था। ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री ने कहा कि मतभेदों के बावजूद डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका एक उच्च स्तरीय कार्य समूह गठित करने पर सहमत हुए हैं ताकि 'यह पता लगाया जा सके कि क्या हम आगे बढऩे का कोई साझा रास्ता खोज सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस समूह की पहली बैठक'कुछ हफ्तों के भीतर होने की उम्मीद है।</p>
<p>रासमुसेन के अनुसार, इस समूह का ध्यान डेनमार्क की 'रेड लाइन्स' की रक्षा करते हुए अमेरिकी सुरक्षा चिंताओं को दूर करने पर होगा। उल्लेखनीय है कि डेनमार्क और अमेरिका दोनों नाटो के सदस्य हैं। इस बीच, डेनमार्क और कई यूरोपीय सहयोगियों ने ग्रीनलैंड में सैनिक तैनात करने की योजना की घोषणा की है, जो इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आर्कटिक द्वीप पर सुरक्षा को मजबूत करने के एक बड़े प्रयास का संकेत है।</p>
<p>व्हाइट हाउस ने उपराष्ट्रपति वेंस और डेनमार्क के अधिकारियों के बीच हुई बैठक को सकारात्मक बताया है, भले ही राष्ट्रपति ट्रम्प ग्रीनलैंड के अधिग्रहण के लिए दबाव बनाना जारी रखे हुए हैं। लेविट ने प्रशासन के रुख को दोहराते हुए कहा, उस बैठक में, दोनों पक्ष एक कार्य समूह स्थापित करने पर सहमत हुए हैं, जो ग्रीनलैंड के अधिग्रहण पर तकनीकी बातचीत जारी रखेंगे। मुझे बताया गया है कि वे बातचीत हर दो से तीन हफ्ते में होगी।</p>
<p>डेनमार्क के अधिकारियों ने हालांकि बातचीत के बाद बिल्कुल अलग बात कही। डेनमार्क के विदेश मंत्री ने ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री विवियन मोटफेल्ड के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, हमारे लिए, वे विचार जो डेनमार्क साम्राज्य की क्षेत्रीय अखंडता और ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का सम्मान नहीं करते हैं, निश्चित रूप से पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं। रासमुसेन ने कहा, हम अमेरिकी स्थिति को बदलने में सफल नहीं रहे। यह स्पष्ट है कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को हासिल करने की इच्छा है। हमने इसे बहुत स्पष्ट कर दिया है कि यह डेनमार्क के हित में नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड का अधिग्रहण 'बिल्कुल आवश्यक नहीं है और रूस या चीन से कोई'तत्काल खतरा नहीं है।</p>
<p>ग्रीनलैंड में अमेरिकी रुचि इसकी रणनीतिक स्थिति, प्रचुर खनिज संसाधनों और इस क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर उपजी चिंताओं के कारण है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 14:06:33 +0530</pubDate>
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