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                <title>dismissed - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>नगर पालिका मेढ़ता सिटी चेयरमैन गौतम टांक बर्खास्त, पवन कुमार को अध्यक्ष पद का सौंपा कार्यभार </title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार ने  नगर पालिका मेढ़ता सिटी के अध्यक्ष गौतम टांक को अध्यक्ष पद से बर्खास्त कर दिया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/municipality-medta-city-chairman-gautam-tank-dismissed-pawan-kumar/article-110062"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news18.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार ने नगर पालिका मेढ़ता सिटी के अध्यक्ष गौतम टांक को अध्यक्ष पद से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 50 (1) (iv) (क) के तहत की गई है। बर्खास्तगी के बाद नगर पालिका मेढ़ता सिटी के वार्ड संख्या 25 के सदस्य पवन कुमार को 60 दिनों के लिए अध्यक्ष पद का कार्यभार सौंपा गया है। यह आदेश आगामी दो महीने या राज्य सरकार के अन्य निर्देश, जो भी पहले हो, तक लागू रहेगा। इस आदेश को सक्षम स्तर से अनुमोदित किया गया है।</p>
<p>आदेश जारी करने वाले निदेशक एवं विशिष्ट शासन सचिव इन्द्रजीत सिंह ने बताया कि यह निर्णय नगर पालिका के सुचारु प्रशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। शासन की इस कार्रवाई ने नगर पालिका मेढ़ता सिटी में प्रशासनिक हलचल पैदा कर दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Apr 2025 14:19:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>IAS पूजा खेडकर सेवा से बर्खास्त </title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र ने 6 सितंबर के आदेश के तहत आईएएस (प्रोबेशन) नियम, 1954 के नियम 12 के तहत खेडकर को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ias-pooja-khedkar-dismissed-from-service%C2%A0/article-89931"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/pooja.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने विवादों में घिरी आईएएस की 2023 के महाराष्ट्र कैडर की अधिकारी पूजा खेडकर को तत्काल बर्खास्त कर दिया है। खेडकर पर धोखाधड़ी करने और सेवा में अपना चयन सुनिश्चित करने के लिये ओबीसी और विकलांगता कोटा लाभों का गलत तरीके से लाभ उठाने का आरोप था।</p>
<p>केंद्र ने 6 सितंबर के आदेश के तहत आईएएस (प्रोबेशन) नियम, 1954 के नियम 12 के तहत खेडकर को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Sep 2024 13:04:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चीन ने ली शांगफू को किया बर्खास्त, 2 महीने से थे गायब</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व विदेश मंत्री किन गैंग के बाद ली इस साल गायब होने वाले दूसरे वरिष्ठ चीनी अधिकारी हैं। किन गैंग को भी जुलाई में बिना किसी स्पष्टीकरण के पद से हटा दिया गया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/china-dismissed-of-the-li-shangfu/article-60413"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/sizte--(1)20.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने एक बार फिर अपने एक मंत्री पर एक्शन लिया है। चीन ने लंबे समय से गायब चल रहे अपने रक्षा मंत्री जनरल ली शांगफू को हटा दिया है। पिछले दो महीने से उन्हें लेकर सार्वजनिक तौर पर कोई सूचना नहीं आ रही थी। पूर्व विदेश मंत्री किन गैंग के बाद ली इस साल गायब होने वाले दूसरे वरिष्ठ चीनी अधिकारी हैं। किन गैंग को भी जुलाई में बिना किसी स्पष्टीकरण के पद से हटा दिया गया था। </p>
<p>कैबिनेट फेरबदल के दौरान रक्षा मंत्री बने ली को 29 अगस्त को भाषण देने के बाद से नहीं देखा गया है। दोनों ही नेताओं के गायब होने से चीन की विदेश या रक्षा नीति में बदलाव का कोई संकेत नहीं दिखता है। हालांकि इस एक्शन से शी जिनपिंग के करीबी पावर सर्कल पर सवाल उठ रहे हैं। शी जिनपिंग निष्ठा को सर्वोपरि मानते हैं और उन्होंने सार्वजनिक और निजी तौर पर भ्रष्टाचार पर हमला किया है। हालांकि इस तरह के एक्शन को कभी-कभी राजनीतिक विरोधियों को खत्म करने, खराब अर्थव्यवस्था से ध्यान भटकाने और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने के तौर पर देखा जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Oct 2023 10:54:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सरकार ने सौम्या गुर्जर को पद से किया बर्खास्त </title>
                                    <description><![CDATA[स्वायत्त शासन विभाग ने मेयर को पद से बर्खास्त करने का प्रस्ताव तैयार कर नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के पास भेजा था, जिस पर स्वीकृति मिलने के बाद विभाग ने आदेश जारी किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-dismissed-of-somya-gurjar-from-post/article-24616"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/dsc_1249-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान सरकार ने न्यायिक जांच रिपोर्ट के बाद नगर निगम जयपुर ग्रेटर की महापौर सौम्या गुर्जर को पद से हटा दिया है। स्वायत्त शासन विभाग ने मेयर को पद से बर्खास्त करने का प्रस्ताव तैयार कर नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के पास भेजा था, जिस पर स्वीकृति मिलने के बाद विभाग ने आदेश जारी किए। इसके साथ ही सौम्या को अगले 6 साल तक चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य घोषित कर दिया है। नगर निगम ग्रेटर मुख्यालय में सौम्या गुर्जर तत्कालीन नगर निगम आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव और अन्य पार्षदों के बीच बैठक में विवाद हुआ था। इस दौरान बात इतनी बढ़ गई कि आयुक्त ने पार्षदों ने  मारपीट और धक्का-मुक्की का आरोप लगाते हुए सरकार को लिखित में शिकायत की और थाने में मामला दर्ज कराया। </p>
<p>प्रदेश सरकार ने सौम्या गुर्जर और पार्षद पारस जैन, अजय सिंह व शंकर शर्मा के खिलाफ मिली शिकायत की जांच स्वायत्त शासन निदेशालय की क्षेत्रीय निदेशक को दी। जांच में चारों को दोषी मानते हुए सरकार ने सभी को पद से निलंबित कर दिया और इन सभी के खिलाफ न्यायिक जांच शुरू कर दी। सरकार ने पार्षद शील धाबाई को कार्यवाहक मेयर बना दिया। सौम्या को एक फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने निलंबन आदेश स्टे दे दिया। सौम्या ने वापस मेयर की कुर्सी संभाली थी। सौम्या और 3 पार्षदों के खिलाफ न्यायिक जांच की रिपोर्ट आई, जिसमें सभी को दोषी माना गया। सरकार ने पार्षद पारस जैन, अजय सिंह और शंकर शर्मा की सदस्यता खत्म कर दी और पद से हटा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को कार्रवाई के लिए स्वतंत्र करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Sep 2022 10:05:43 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>विधायक के पुत्र को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, गैंगरेप मामले में याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[ कोर्ट ने दीपक के विरुद्ध प्रसंज्ञान लिया था। कोर्ट ने गैंगरेप और पॉक्सो मामले में प्रसंज्ञान लिया था। इसके बाद प्रसंज्ञान आदेश को दीपक ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/high-court-dismissed-petition-of-deepak-in-gang-rape-case/article-14369"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/court.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजगढ़ के विधायक के पुत्र दीपक को निचली अदालत से राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने दीपक के विरुद्ध प्रसंज्ञान लिया था। कोर्ट ने गैंगरेप और पॉक्सो मामले में प्रसंज्ञान लिया था। इसके बाद प्रसंज्ञान आदेश को दीपक ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट जस्टिस उमाशंकर व्यास ने दीपक की याचिका खारिज कर दी। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Jul 2022 16:01:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नहीं खुलेंगे ताज महल के बंद दरवाजे</title>
                                    <description><![CDATA[इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने ताजमहल के बंद दरवाजों को खोलने की गुजारिश वाली याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने सवा दो बजे मामले की सुनवाई करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/high-court-dismissed-petition-of-taj-mahal/article-9658"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/tt-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने ताजमहल के बंद दरवाजों को खोलने की गुजारिश वाली याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने सवा दो बजे मामले की सुनवाई करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। याचिका अयोध्या के डॉ. रजनीश सिंह ने दायर की थी। याचिका में इतिहासकार पीएन ओक की किताब ताजमहल का हवाला देते हुए दावा किया गया कि ताजमहल वास्तव में तेजोमहालय है, जिसका निर्माण 1212 एडी में राजा परमार्दी देव ने कराया था।</p>
<p><strong>याचिका में दावा : वहां शिव का मंदिर</strong> <br />याचिका में यह भी दावा किया गया कि ताजमहल के बंद दरवाजों के भीतर भगवान शिव का मंदिर है। याची ने ताजमहल के संबंध में एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी  बनाकर अध्ययन करने और ताजमहल के बंद करीब 20 दरवाजों को खोलने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया है जिससे सत्यता सामने आ सके।</p>
<p><strong>पहले एमए करिए, शोध करिए</strong><br />इसके बाद दो न्यायाधीशों की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि जाइए एमए करिए और उसके बाद ऐसा विषय चुनिए। अगर कोई संस्थान आपको रोकता है तो हमारे पास आइए। अदालत ने पूछा ‘आप किससे सूचना मांग रहे हैं।’ इसके जवाब में याचिकाकर्ता ने कहा ‘प्रशासन से।’ इस पर कोर्ट ने कहा ‘अगर वो कह चुके हैं कि सुरक्षा कारणों से कमरे बंद हैं तो वही सूचना है। अगर आप संतुष्ट नहीं हैं तो इसको चुनौती दीजिए। आप एमए करिए और फिर नेट, जेआरएफ करिए और अगर कोई यूनिवर्सिटी आपको इस विषय पर शोध करने से रोके तो हमारे पास आइए।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 May 2022 10:14:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पूर्व सीएम को बंगला देने का मामले में  अवमानना याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[ जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस अनूप ढंड की खंडपीठ ने यह आदेश मिलापचंद डांडिया की अवमानना याचिका पर दिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/case-of-giving-bungalow-to-former-cm--contempt-petition-dismissed/article-6572"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/rajasthan-high-court.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री को बंगला देने से जुड़ी अवमानना याचिका को खारिज करते हुए मामले में पक्षकार बनाए गए अफसरों को अदालती अवमानना से मुक्त कर दिया है। जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस अनूप ढंड की खंडपीठ ने यह आदेश मिलापचंद डांडिया की अवमानना याचिका पर दिए। अदालत ने कहा कि मामले में जानबूझकर अवमानना नहीं हुई है।</p>
<p><br />अवमानना याचिका में कहा गया था कि हाईकोर्ट ने 4 सितंबर, 2019 को आदेश जारी कर राजस्थान मंत्री वेतन संशोधन अधिनियम, 2017 के उस प्रावधान को रद्द कर दिया था, जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सुविधाएं देने का प्रावधान किया गया था। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। इसे सुप्रीम कोर्ट ने 6 जनवरी को खारिज कर दिया था। अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया ने सुविधाएं लौटाकर बंगला खाली कर दिया था। वहीं पूर्व सीएम राजे ने सिर्फ सुविधाएं लौटाई थी।</p>
<p><br />याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि राज्य सरकार ने 18 अगस्त, 2020 को वरिष्ठ विधायकों को आवास आवंटित करने के लिए कैटेगरी तय की थी। इसके तहत पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को आवास देने की बात कही जा रही है, लेकिन वे पहले से वहां रह रहीं हैं। वहीं सरकार ने 2 अगस्त, 2019 को प्रावधान किया था कि तय अवधि में आवास खाली नहीं करने पर संबंधित मंत्री को प्रतिदिन दस हजार रुपए का हर्जाना देना होगा। ऐसे में अदालती आदेश 4 सितंबर, 2019 से 17 अगस्त, 2020 तक की अवधि में बंगले का उपयोग करने पर पूर्व सीएम राजे से हर्जाना क्यों नहीं वसूल किया गया। दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि राजे को वरिष्ठ विधायक के नाते आवास दिया गया है। इसमें अदालती आदेश की अवमानना नहीं हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/case-of-giving-bungalow-to-former-cm--contempt-petition-dismissed/article-6572</link>
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                <pubDate>Wed, 23 Mar 2022 12:35:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पूर्व मुख्यमंत्री को बंगला देने से जुड़ी अवमानना याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[ हाइकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री को बंगला देने से जुड़ी अवमानना याचिका को खारिज करते हुए पक्षकार बनाए गए अधिकारियों को अवमानना से मुक्त कर दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/contempt-petition-for-giving-bungalow-to-chief-minister-dismissed/article-6522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/high-court-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हाइकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री को बंगला देने से जुड़ी अवमानना याचिका को खारिज करते हुए पक्षकार बनाए गए अधिकारियों को अवमानना से मुक्त कर दिया है। जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस अनूप ढंड की खंडपीठ ने यह आदेश मिलापचन्द डांडिया की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा की मामले में 'विल फुल कंटेम्प्ट' नहीं हुआ है। अवमानना याचिका में अधिवक्ता विमल चौधरी ने कहा की हाईकोर्ट ने 4 सितंबर, 2019 को आदेश जारी कर राजस्थान मंत्री वेतन संशोधन अधिनियम के उस प्रावधान को रद्द कर दिया था, जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सुविधाएं देने का प्रावधान किया गया था। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 6 जनवरी को खारिज कर दिया था। अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाडिया ने सुविधाएं लौटाकर बंगला खाली कर दिया था। वहीं पूर्व सीएम राजे ने सिर्फ सुविधाएं लौटाई थी। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया की राज्य सरकार ने विधायकों को आवास आवंटित करने के लिए कैटेगरी तय की थी। इसके तहत पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को आवास देने की बात कही जा रही है, लेकिन वे पहले से वहां रह रही हैं।</p>
<p>राज्य सरकार ने 2 अगस्त 2019 को प्रावधान किया था की तय अवधि में आवास खाली नहीं करने पर संबंधित मंत्री को प्रतिदिन दस हजार रुपए का हर्जाना देना होगा। ऐसे में अदालती आदेश 4 सितंबर 2019 से 17 अगस्त 2020 तक की अवधि में बंगले का उपयोग करने पर पूर्व सीएम राजे से हर्जाना क्यों नहीं वसूल किया गया। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि राजे को वरिष्ठ विधायक के नाते आवास दिया गया है। इसमें अदालती आदेश की अवमानना नहीं हुई है। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Mar 2022 11:32:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिजाब मामले में फैसला देने वाले न्यायाधीशों को वाई श्रेणी सुरक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[बोम्मई ने कहा कि एक विशेष समुदाय की आक्रामकता का समर्थन करना धर्म-निरपेक्षता नहीं बल्कि साम्प्रदायिकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/karnataka-chief-minister-basavaraj-bommai--said-the-state-government-has-decided-to-provide-y-category-security-to-three-judges--including-chief-justice-ritu-raj-awasthi--who-dismissed-the-petitions-in-the-hijab-case/article-6451"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/high-court.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार हिजाब मामले में याचिकाएं खारिज करने वाले मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी सहित तीन न्यायाधीशों को वाई श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु तौहीद जमात के नेता कोवई रहमतुल्लाह ने गुरुवार को मदुरई में एक सभा को संबोधित करते हुए न्यायाधीशोंं को मौत की धमकी दी थी। रहमतुल्लाह का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें तौहीद जमात के नेता को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि जैसे झारखंड के एक न्यायाधीश की हत्या हुई थी, वैसे ही कर्नाटक के न्यायाधीशों को हिजाब के फैसले पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई गई है और पुलिस महानिदेशक को फौरन मामले की जांच कर आरोपी को हिरासत में लेने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा, हम राष्ट्र-विरोधी लोगों के ऐसे राष्ट्र-विरोधी कामों को सहन नहीं कर सकते। हमें इस कृत्य को रोकना होगा। बोम्मई ने कहा कि एक विशेष समुदाय की आक्रामकता का समर्थन करना धर्म-निरपेक्षता नहीं बल्कि साम्प्रदायिकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Mar 2022 12:33:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूक्रेन ने रूस के सामने झुकने से किया इंकार </title>
                                    <description><![CDATA[यूक्रेन ने मारियुपोल को आत्मसमर्पण करने की मॉस्को की चेतावनी के बीच रूस के सामने झुकने से इंकार किया। इसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमिर जेलेंस्की ने एक बार फिर दुनिया को याद दिलाया कि अगर बातचीत नहीं हुई, तो यह एक वैश्विक आपदा होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ukraine-refuses-to-bow-down-to-russia/article-6429"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/russia-ukraine-war02-copy3.jpg" alt=""></a><br /><p>कीव। यूक्रेन ने मारियुपोल को आत्मसमर्पण करने की मॉस्को की चेतावनी के बीच रूस के सामने झुकने से इंकार किया। इसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमिर जेलेंस्की ने एक बार फिर दुनिया को याद दिलाया कि अगर बातचीत नहीं हुई, तो यह एक वैश्विक आपदा होगी। उनके डिप्टी ने मारियुपोल शहर को छोडऩे की रूसी मांग को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी आत्मसमर्पण का कोई सवाल ही नहीं है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने शहर के आत्मसमर्पण के बदले मानवीय गलियारे खोलने की पेशकश की थी। इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि रूस ने मारियुपोल में युद्ध अपराध किए। जेलेंस्की ने कहा है कि उनका मानना है कि रूस के आक्रमण के अंत में बातचीत करने में विफलता का अर्थ तीसरा विश्व युद्ध होगा। सीएनएन से बात करते हुए जेलेंस्की ने कहा कि वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधे बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि बातचीत ही लड़ाई को समाप्त करने का एकमात्र तरीका है। उन्होंने कहा कि  मुझे लगता है कि हमें बातचीत की संभावना के लिए किसी भी प्रारूप, किसी भी अवसर का उपयोग करना होगा।</p>
<p>जेलेंस्की ने कहा कि वह किसी भी समझौते को खारिज करेंगे, जिसमें यूक्रेन को रूसी-प्रायोजित अलगाववादी क्षेत्रों को स्वतंत्र के रूप में मान्यता देने की आवश्यकता होगी। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने एक बार फिर कहा कि उनका मानना है कि अगर उनका देश नाटो का सदस्य होता, तो युद्ध शुरू नहीं होता। गर नाटो के सदस्य हमें गठबंधन में शामिल करने के लिए तैयार हैं, तो इसे तुरंत करे,  क्योंकि लोग रोज मर रहे हैं। मारियुपोल के मेयर के सलाहकार प्योत्र एंड्रीशेंको का कहना है कि मास्को के मानवीय वादों पर भरोसा नहीं किया जा सकता है, और शहर खुद का बचाव करना बंद नहीं करेगा। एंड्रीशेंको ने हाल के दिनों में अन्य मारियुपोल अधिकारियों द्वारा किए गए अपुष्ट दावों को दोहराया कि रूसी सेनाएं अपने कुछ निवासियों को रूस में जबरन निकाल रही हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले शहर के एक विद्यालय पर हमला किया गया था, जहां करीब 400 लोग शरण लिए हुए थे। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमर जेलेंस्की ने वैश्विक समर्थन रैली के प्रयासों के तहत वीडियो लिंक द्वारा इजराइल की संसद से बात की। उन्होंने इस्राइली सांसदों से कहा कि हम जीना चाहते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/ukraine-refuses-to-bow-down-to-russia/article-6429</link>
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                <pubDate>Mon, 21 Mar 2022 09:35:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिजाब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई से किया इनकार, होली के बाद हो सकती है सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने हिजाब के मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने की मांग संबंधी गुहार अस्वीकार करते हुए इस पर होली के बाद विचार करने का संकेत दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-dismissed-petition-at-hijab-case/article-6234"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/supreme-court-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हिजाब के मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने की मांग संबंधी गुहार अस्वीकार करते हुए इस पर होली के बाद विचार करने का संकेत दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में होली के बाद विचार किया जाएगा। अधिवक्ता संजय हेगडे ने इस मामले को अति आवश्यक बताते हुए विशेष उल्लेख के दौरान तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई थी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में हेगडे एवं अन्य के अनुरोध पर होली के बाद सुनवाई के लिए विचार किया जाएगा। स्कूलों में हिजाब पहनने पर रोक जारी रखने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के कुछ घंटे बाद ही उसे शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी। निबा ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ याचिका के जरिये शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ता ने कर्नाटक शिक्षा अधिनियम और इसके तहत बनाए गए नियमों का हवाला देते हुए अपनी याचिका में दावा किया है कि विद्यार्थियों के लिए किसी भी तरह से अनिवार्य वर्दी का प्रावधान नहीं है।</p>
<p>उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि हिजाब पहनना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। वर्दी का निर्धारण संवैधानिक है और विद्यार्थी इस पर आपत्ति नहीं कर सकते। अदालत में दायर याचिका में कर्नाटक शिक्षा अधिनियम के तहत राज्य सरकार द्वारा पारित पांच फरवरी के आदेश की वैधता पर सवाल सवाल किए गए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि यह निर्देश 'धार्मिक अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से इस्लामी आस्था के तहत हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिला अनुयायियों का उपहास कर उन पर एक प्रकार से हमला करने के अप्रत्यक्ष इरादे से जारी किया गया था। याचिका में कहा गया है कि हिजाब पहनने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत  अंत:करण की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत संरक्षित है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Mar 2022 12:32:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कर्नाटक हाईकोर्ट का हिजाब पर बड़ा फैसला, हिजाब विवाद में याचिका खारिज, हिजाब धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं- HC  </title>
                                    <description><![CDATA[ कर्नाटक हाईकोर्ट में उडुपी की लड़कियों ने याचिका दायर कर स्कूलों में हिजाब पहनने की इजाजत की मांग की थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/karnataka-high-court-s-big-decision-on-hijab--petition-dismissed-in-hijab-controversy--hijab-is-not-a-mandatory-part-of-religion--hc/article-6167"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/untitled-2.jpg" alt=""></a><br /><p><br />बेंगलुरु। हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट (HC) ने स्कूल कॉलेजों में हिजाब बैन के फैसले को चुनौती देने वालीं याचिकाओं को खारिज किया है। हिजाब विवाद को लेकर सभी याचिकाएं खारिज कर दी गई है। याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य प्रथा का हिस्सा नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा है कि हिजाब धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। हिजाब पहनना इस्लाम में अनिवार्य नहीं है।  छात्र स्कूल यूनिफॉर्म पहनने से मना नहीं कर सकते है। कोर्ट ने स्कूल यूनिफॉर्म पहनने का नियम को वाजिब पाबंदी बताया।  उल्लेखनिय है कि कर्नाटक हाईकोर्ट में उडुपी की लड़कियों ने याचिका दायर कर स्कूलों में हिजाब पहनने की इजाजत की मांग की थी। कोर्ट ने छात्राओं की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि छात्र स्कूल ड्रेस पहनने से इनकार नहीं कर सकते है। </p>
<p><strong>शिक्षण संस्थानों में हिजाब की इजाजत नहीं, कर्नाटक हाई कोर्ट ने खारिज की सभी याचिकाएं</strong><br />कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को मुस्लिम छात्राओं की ओर से दायर उन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें शिक्षण अवधि के दौरान शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने की अनुमति देने की मांग की गई थी।न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाओं द्वारा हिजाब पहनना इस्लाम के तहत आवश्यक धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है और विद्यालय के यूनिफॉर्म का निर्धारण केवल एक उचित प्रतिबंध है, जिस पर छात्र-छात्राएं आपत्ति नहीं कर सकते। न्यायालय की पीठ ने यह भी कहा कि राज्य सरकार के पास इस संबंध में आदेश जारी करने का अधिकार है।  उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ऋतु राज अवस्थी, न्यायमूर्ति कृष्णा एस दीक्षित और न्यायमूर्ति जे. एम. काजी की तीन सदस्यीय पीठ ने यह फैसला सुनाया। न्यायालय ने इस संबंध में सुनवाई के 11वें दिन 25 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। इससे पहले पीठ ने एक अंतरिम आदेश पारित किया था,  जिसमें छात्र-छात्राओं को निर्धारित ड्रेस कोड वाले कॉलेजों में कक्षाओं में भाग लेने के दौरान हिजाब, भगवा शॉल या किसी भी धार्मिक झंडे का उपयोग नहीं करने का आदेश दिया गया था।</p>
<p><br /><strong>HC की 3 जजों की बेंच ने सुनाया फैसला</strong><br />छात्राओं ने स्कूल कॉलेजों में हिजाब पहनने पर बैन लगाने के सरकार के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिसके बाद  9  फरवरी को चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की बेंच का गठन किया गया था।  छात्राओं ने अपनी याचिका में कहा था कि उन्हें क्लास के अंदर भी हिजाब पहनने की अनुमति दी जानी चाहिए, क्योंकि यह उनकी आस्था का हिस्सा है। लेकिन हाईकोर्ट के 3 जजों की बेंच ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि हिजाब धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।</p>
<p><strong>धारा 144 लागू</strong> <br />हाईकोर्ट के फैसले से पहले राज्यभर में कड़ी सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। हाईकोर्ट के जज के आवास की भी  सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कर्नाटका के कोप्पल, गडग, कलबुर्गी, दावणगेरे, हासन , शिवामोगा, बेलगांव, चिक्कबल्लापुर, बेंगलुरु  और धारवाड़ में धारा 144 लागू कर दी गई थी। शिवामोगा में स्कूल कॉलेज बंद किए गए हैं।</p>
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<p><strong>हिजाब फैसले की मुस्लिम नेताओं ने की निंदा</strong><br />प्रमुख मुस्लिम नेता असदुद्दीन ओवैसी, महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्लाह ने मंगलवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फैसले की ङ्क्षनदा की जिसमें हिजाब को इस्लाम का गैर-जरूरी अंग बताते हुए शिक्षण संस्थानों में प्रतिबंधित कर दिया गया।<br /><br />पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा, ''यह फैसला बेहद निराशाजनक है। हम एक तरफ महिलाओं को सशक्त करने की बात करते हैं और दूसरी तरफ हम उनसे चुनने का अधिकार छीन रहे हैं। यह सिर्फ धर्म के बारे में नहीं है, बल्कि चुनने की स्वतंत्रता से संबंधित है।''<br /><br />नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके उमर अब्दुल्लाह ने कहा, ''फैसले से बहुत निराश हूं। आप हिजाब के बारे में जो भी सोचते हों, बात सिर्फ एक कपड़े की नहीं है, बात एक महिला के यह चुनने के अधिकार की है कि वह क्या पहनना चाहती है। यह उपहासजनक है कि अदालत ने इस मूल अधिकार की रक्षा नहीं की।''<br /><br />मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (मीम) अध्यक्ष और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उन्हें आशा है कि याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध सर्वोच्च अदालत का रुख करेंगे। उन्होंने फैसले को बदनीयत बताते हुए अपने विचार के पीछे कई कारण गिनाये।उन्होंने कहा कि फैसले ने ''धर्म, संस्कृति और अभिव्यक्ति की आजादी के मूलभूत अधिकारों को समाप्त कर दिया है।''<br /><br />उन्होंने कहा,''एक धार्मिक मुसलमान के लिए हिजाब एक प्रकार की आराधना है। अनिवार्य धार्मिक व्यवहार परीक्षा को कसौटी पर रखने का समय आ गया है। एक धार्मिक व्यक्ति के लिए सब कुछ अनिवार्य है और नास्तिक के लिए कुछ अनिवार्य नहीं है। एक धार्मिक हिन्दू ब्राह्मण के जनेऊ अनिवार्य है मगर एक गैर-ब्राह्मण के लिए अनिवार्य नहीं है। यह हास्यास्पद है कि न्यायाधीश अनिवार्यता निर्धारित कर सकते हैं।''<br /><br /> ओवैसी ने कहा,''एक ही धर्म के दूसरे लोगों को अनिवार्यता निर्धारित करने का अधिकार नहीं है। यह एक व्यक्ति और ईश्वर के बीच का मामला है। राज्य को इन धार्मिक अधिकारों में दखल देने की अनुमति सिर्फ तब होनी चाहिए जब यह किसी दूसरे व्यक्ति को नुकसान पहुंचाते हों। हिजाब किसी को हानि नहीं पहुंचाता।'' ओवैसी ने कहा कि हिजाब पर प्रतिबंध लगाना मुस्लिम महिलाओं और उनके परिवारों के लिये हानिकारक है क्योंकि यह उन्हें शिक्षा हासिल करने से रोकता है।<br /><br />उन्होंने कहा, ''दलील दी जा रही है कि वर्दी से एकरूपता सुनिश्चित होगी। कैसे? क्या बच्चों को यह पता नहीं चलेगा कि कौन अमीर परिवार से है और कौन गरीब परिवार से? क्या जातिगत नाम बच्चों के वर्ग की तरफ इशारा नहीं करेंगे? जब आयरलैंड में हिजाब और सिख पगड़ी को अनुमति देने के लिए पुलिस की वर्दी में बदलाव किये गए थे तो मोदी सरकार ने इस फैसले का स्वागत किया था। देश और विदेश के लिए दोहरे मानदंड क्यों? स्कूल की वर्दी के रंग के हिजाब और पगड़ी को पहनने की अनुमति दी जा सकती है।''<br /><br /> ओवैसी ने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि यह फैसला हिजाबी महिलाओं के उत्पीडऩ को सही ठहराने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। एक व्यक्ति उम्मीद कर ही सकता है। बैंकों, अस्पतालों व बस-मेट्रो में इस तरह की घटनाओं के शुरू होने पर निराश होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।''</p>
<p>उल्लेखनीय है कि गत जनवरी में कर्नाटक  में उडुपी स्थित एक सरकारी कॉलेज की कुछ मुस्लिम छात्राएं हिजाब पहनकर कॉलेज पहुंची थी, लेकिन उन्हें कॉलेज में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। इस दौरान मुस्लिम लड़कियों ने तर्क दिया कि हिजाब उनके धर्म और सांस्कृतिक अभ्यास का हिस्सा है। इस मामले को सुनवाई के लिए पहले न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की एकल पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था और उन्होंने यह कहते हुए इस मामलों के वृहत पीठ के पास भेज दिया था कि इसमें मौलिक महत्व के प्रश्न शामिल हैं।<br />इस मामले में प्रतिवादी यानी राज्य सरकार ने तर्क दिया कि हिजाब पहनना इस्लाम की आवश्यक धार्मिक प्रथा के अंतर्गत नहीं आता है और हिजाब पहनने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत मिली अभिव्यक्ति की आजादी के तहत नहीं रखा जा सकता है।<br /><br />न्यायालय में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि उसका पांच फरवरी का आदेश शिक्षा अधिनियम के अनुरूप है और हिजाब पहनना सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित संवैधानिक नैतिकता और व्यक्तिगत गरिमा की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है।<br />वहीं कॉलेज और शिक्षकों ने तर्क दिया कि छात्रों को अनुशासन एवं सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्धारित यूनिफॉर्म धारण करने के नियम का पालन करना चाहिए।<br /><br />उधर, याचिकाकर्ताओं ने दक्षिण अफ्रीका के संवैधानिक न्यायालय के एक फैसले का उल्लेख किया, जिसमें न्यायालय ने दक्षिण भारत की एक हिंदू लड़की के स्कूल में नथ पहनने के अधिकार को बरकरार रखा था। उन्होंने पांच फरवरी के सरकारी आदेश को भी चुनौती दी थी, जिसमें कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय को लक्षित किया गया था। इस बीच हिजाब विवाद पर न्यायालय के फैसले के मद्देनजर पुलिस ने मंगलवार से 21 मार्च तक बेंगलुरु शहर और कर्नाटक के कई हिस्सों में धारा 144 (निषेधाज्ञा) लागू कर दी।</p>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Mar 2022 11:10:52 +0530</pubDate>
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