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                <title>pil - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>'कॉकरोच जनता पार्टी' से जुड़ी गतिविधियों और फर्जी वकीलों की याचिका पर Supreme Court ने केंद्र से मांगा जवाब, CBI को नोटिस जारी</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने फर्जी लॉ डिग्री, अदालती टिप्पणियों के व्यावसायिक दुरुपयोग और 'कॉकरोच जनता पार्टी' से जुड़ी गतिविधियों की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र, बीसीआई और सीबीआई को नोटिस जारी किया है। याचिका में कोर्टरूम की कार्यवाही के मीम्स और व्यावसायिक उपयोग पर कार्रवाई की मांग की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-seeks-response-from-center-on-the-activities-related/article-162703"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने फर्जी वकीलों, फर्जी लॉ डिग्री और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) से जुड़ी गतिविधियों की केंद्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) से जांच की मांग को लेकर पेश याचिका पर मंगलवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने वकील राजा चौधरी की ओर से दायर जनहित याचिका पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय , बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) और सीबीआई को नोटिस जारी किया।</p>
<p>याचिकाकर्ता राजा चौधरी ने खुद अदालत में अपना पक्ष रखा। याचिका में गत 15 मई की अदालती कार्यवाही के दौरान की गयी मौखिक टिप्पणियों के कथित 'व्यावसायिक शोषण' और उनसे पैसे कमाने के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गयी है। याचिका में कहा गया है कि कोर्टरूम में हुई बातचीत के कुछ हिस्सों को चुन-चुनकर काटा गया और बाद में मीम्स, वीडियो, मिमिक्री, राजनीतिक ब्रांडिंग और व्यावसायिक सामग्री के लिए इस्तेमाल किया गया।</p>
<p>याचिका में सक्षम अधिकारियों को उन लोगों/संस्थाओं के खिलाफ कानून के अनुसार जांच और कार्रवाई करने के निर्देश देने की मांग की गयी ,जो कथित तौर पर व्यावसायिक शोषण, ट्रेडमार्क के दुरुपयोग, पैसे कमाने के लिए प्रसार या न्यायालय के समक्ष कार्यवाही से उत्पन्न मौखिक अदालती टिप्पणियों और प्रतीकात्मक अभिव्यक्तियों के अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग में शामिल हैं तथा जिसमें सीजेपी से जुड़ी गतिविधियां भी शामिल हैं। याचिका में विवाद की जड़ 15 मई की कार्यवाही को बताया गया है, जिस दौरान अदालती प्रक्रियाओं के कथित दुरुपयोग, वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा देने और कानूनी पेशे में पेशेवर मानकों के गिरने पर चिंता जतायी गयी थी।</p>
<p>याचिका में कहा गया है कि कार्यवाही के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी - "कॉकरोच जैसे युवा हैं जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। कुछ सोशल मीडिया पर हैं, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं।" उन्होंने यह भी कहा था, "समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो सिस्टम पर हमला करते हैं और आप उनके साथ हाथ मिलाना चाहते हैं?" इन टिप्पणियों के बाद विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद मुख्य न्यायाषीश ने स्पष्ट किया कि उनकी बातें उन लोगों के लिए थीं जो फर्जी योग्यता और डिग्री के आधार पर नौकरी या प्रोफेशन में आते हैं, न कि आम तौर पर बेरोजगार भारतीय युवाओं के लिए।</p>
<p>याचिकाकर्ता ने हालांकि स्पष्ट किया कि इस जनहित याचिका का मकसद न्यायपालिका की आलोचना, लोकतांत्रिक असहमति, व्यंग्य या संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अपनी बात रखने की आज़ादी पर रोक लगाना नहीं है। मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणियों पर हुए विवाद के बाद अमेरिका के बोस्टन में रहने वाले अभिजीत दिपके ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' का गठन किया। यह ऑनलाइन प्लेटफार्म बेरोजगारी, संस्थागत जवाबदेही और मीडिया की आज़ादी जैसे मुद्दों पर टिप्पणी करने के लिए राजनीतिक व्यंग्य का इस्तेमाल करता है। इसके बाद सीजेपी ने नीट-यूजी प्रश्न पत्र लीक मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। इस आंदोलन का समापन 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर 'संसद चलो' विरोध प्रदर्शन के साथ हुआ, जिसमें पुलिस की कार्रवाई हुई और प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप लगे। इसके बाद श्री प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 13:00:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल​ विधानसभा चुनाव: अधिकारियों के तबादलों को हाईकोर्ट में चुनौती, चुनाव आयोग की शक्तियों पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग द्वारा बंगाल के IAS और IPS अधिकारियों के तबादलों को कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने आयोग के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए इसे राज्य प्रशासन में हस्तक्षेप बताया। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ अगले सप्ताह इस जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी, जो चुनावी निष्पक्षता और शक्तियों की सीमा तय कर सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/transfers-of-west-bengal-assembly-election-officers-challenged-in-high/article-147222"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/calcutta-high-court.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ अधिकारियों के तबादलों का मामला अब कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंच गया है। एक याचिका में चुनाव आयोग के उस अधिकार को चुनौती दी गयी है, जिसके तहत अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए अन्य राज्यों में भेजा जा रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने न्यायालय का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि आयोग के पास इस तरह से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों को राज्य से बाहर भेजने का अधिकार नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि इससे राज्य प्रशासन के सामान्य कामकाज पर असर पड़ता है।</p>
<p>इस मामले में तृणमूल कांग्रेस के अधिवक्ता अर्क नाग जनहित याचिका दाखिल करेंगे। न्यायालय से याचिका दाखिल करने की अनुमति देने की मांग करते हुए बनर्जी ने तबादला आदेशों पर रोक लगाने का आग्रह किया है। मुख्य न्यायाधीश सुजोय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ ने याचिका दायर करने की अनुमति दे दी है और मामले की सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की है।</p>
<p>यह विवाद चुनाव आयोग द्वारा रविवार आधी रात से लेकर गुरुवार तक किये गये बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद उत्पन्न हुआ है। इसमें मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस आयुक्त समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को उनके पदों से हटाया गया है। कई जिलों के जिलाधिकारियों का भी तबादला किया गया है और नये अधिकारियों की नियुक्ति की गयी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि हटाये गये अधिकारियों को फिलहाल पश्चिम बंगाल में चुनाव संबंधी कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इनमें से कई अधिकारियों को अन्य राज्यों में चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में पहले ही प्रतिनियुक्त किया गया है।</p>
<p>तबादलों की इस कार्रवाई पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जतायी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर आयोग के फैसलों पर सवाल उठाये हैं। अब इस मामले के उच्च न्यायालय में पहुंच जाने के बाद चुनाव आयोग की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र की सीमा का कानूनी परीक्षण होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 18:22:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>छात्रसंघ चुनाव रोक के खिलाफ पीआईएल</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार की ओर से मौजूदा शैक्षणिक सत्र 2023-24 में प्रदेश के विश्वविद्यालय और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जाने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका पेश की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pil-against-ban-on-student-union-elections/article-54634"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/rajasthan-university.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार की ओर से मौजूदा शैक्षणिक सत्र 2023-24 में प्रदेश के विश्वविद्यालय और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जाने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका पेश की गई है। शांतनू पारीक की ओर से दायर इस पीआईएल पर हाईकोर्ट आगामी दिनों में सुनवाई करेगा। वहीं मामले में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विभूति भूषण शर्मा ने भी हाईकोर्ट में कैवियट दायर कर मामले में कोई भी अंतरिम आदेश देने से पहले सरकार का पक्ष सुनने का आग्रह किया है।  पीआईएल में प्रमुख उच्च शिक्षा सचिव को पक्षकार बनाते हुए कहा गया है कि छात्रसंघ चुनाव के जरिए छात्रों को उनका प्रतिनिधि चुनने का मौलिक अधिकार है। यह अधिकार उन्हें संविधान के अनु छेद 19(1) (अ) व अनुच्छेद 21 से मिला हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में इसे मौलिक अधिकार का दर्जा दिया था। राज्य सरकार की ओर से केवल एक परिपत्र से ही तर्कहीन व असंवैधानिक कारणों से छात्रसंघ चुनावों को नहीं कराने का निर्णय लिया है, जो गलत है। इस परिपत्र में कहा है कि उच्च शिक्षा नीति की क्रियान्विति, कई विश्वविद्यालयों के परीक्षा परिणाम में देरी और मौजूदा शैक्षणिक सत्र में देरी से प्रवेश के कारण अध्यापन कार्य चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जाने का निर्णय लिया है। वहीं सरकार ने यह भी कहा है कि लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों की पालना भी नहीं हो पा रही है। जबकि इन सिफारिशों की पालना करवाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार, विवि और कॉलेज प्रशासन की है। हर विवि ने लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों पर एक कोड आॅफ कंडक्ट के नियम बना रखे हैं और यदि इन नियमों की अवहेलना होती है तो नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे में प्रदेश के विवि और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव कराए जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Aug 2023 10:12:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कांग्रेस की रैली से हटे संकट के बादल : कांग्रेस की प्रस्तावित रैली के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[ सीजे अकील कुरैशी और जस्टिस उमाशंकर व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश राजेश मूथा की जनहित याचिका पर दिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A4%9F%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B2---%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AB-%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9C/article-2963"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/cong_hc.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाइकोर्ट ने कांग्रेस की ओर से प्रस्तावित रैली के आयोजन के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। सीजे अकील कुरैशी और जस्टिस उमाशंकर व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश राजेश मूथा की जनहित याचिका पर दिए। </p>
<p><br />याचिका में कहा गया कि कांग्रेस पार्टी की ओर से आगामी 12 दिसंबर को महंगाई हटाओ रैली का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें कांग्रेस पार्टी के आला नेताओं सहित देशभर से करीब दो लाख लोगों के पहुंचने की संभावना है। याचिका में कहा गया कि कोरोना का नया वेरिएंट कई देशों में आ चुका है। यह पुराने वेरियंट से कई गुणा घातक और फैलने वाला है। याचिका में कहा गया कि रैलियों के आयोजन से कोरोना बढ़ने की पूरी संभावना है। कोरोना के नए वेरिएंट मिलने के चलते इसकी तीसरी लहर आने की भी संभावना हो गई है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा रैली का आयोजन लोगों की जान कीमत पर किया जा रहा है और यह रैली लोगों के जीवन के लिए खतरा साबित हो सकती है। याचिका में गुहार की गई है की रैलियों के आयोजन पर रोक लगाई जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Dec 2021 15:04:29 +0530</pubDate>
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                <title>रीट 2021 में हुए कथित पेपर लीक मामले में दायर जनहित याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने रीट 2021 में हुए कथित पेपर लीक मामले में दायर जनहित याचिका को किया खारिज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%9F-2021-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%8F-%E0%A4%95%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%95-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9C/article-1748"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/hc3.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने रीट 2021 में हुए कथित पेपर लीक मामले में दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को कहा है कि वह मामले में एकलपीठ के समक्ष याचिका पेश कर सकता है। न्यायाधीश गोवर्धन बाढ़दार और न्यायधीश मनोज व्यास ने यह आदेश भागचंद की जनहित याचिका पर दिए। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से कहा गया की याचिकाकर्ता खुद भर्ती में शामिल हुआ था। ऐसे में यदि उसे कोई आपत्ति थी तो वह एकलपीठ के समक्ष जा सकता था। इसलिए जनहित याचिका को खारिज किया जाए।</p>
<p><br /> याचिका में कहा गया है कि भर्ती परीक्षा के पूर्व ही अनाधिकृत लोगों के पास पेपर आ गया था। वहीं कई परीक्षा केन्द्रों पर दिए गए पेपर की सील खुली हुई थी और बुक नंबर भी मार्कर से बदले हुए थे। पेपर लीक होने से परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। याचिका में कहा गया कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने रीट परीक्षा की मॉनिटरिंग के लिए करोडों रुपए खर्च कर सीसीटीवी लगाए थे, लेकिन राज्य सरकार की ओर से इंटरनेट पर रोक के चलते इन कैमरों का उपयोग ही नहीं हो सका। राज्य सरकार ने रीट पेपर आउट होने के चलते ही कई अफसरों का निलंबन किया है, जो कि इस भर्ती में अनियमितता को उजागर करता है। इसलिए मामले की किसी भी केन्द्रीय जांच एजेंसी से निष्पक्ष जांच करवाई जाए। वहीं मामले की सुनवाई होने तक अंतरिम आदेश के जरिए इसके परिणाम जारी करने पर रोक लगाई जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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