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                <title> jaipur literature festival 2026 - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> jaipur literature festival 2026 RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुरों में सजी जीवन की सीख : JLF में गौर गोपाल दास का राग–वैराग्य, कहा- हर जीवन एक अधूरी धुन की तरह है, जिसमें कोई न कोई बोझ छुपा होता है</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का एक सत्र उस वक्त सुरों और संवेदनाओं में डूब गया, जब मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास ने शब्दों के साथ संगीत को भी संवाद का माध्यम बनाया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/gaur-gopal-dass-raga-vairagya-in-jlf-a-life-lesson-decorated/article-139888"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(1)32.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का एक सत्र उस वक्त सुरों और संवेदनाओं में डूब गया, जब मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास ने शब्दों के साथ संगीत को भी संवाद का माध्यम बनाया। उन्होंने कहा कि हर जीवन एक अधूरी धुन की तरह है, जिसमें कोई न कोई ऐसा बोझ छुपा होता है, जो मन के तारों को कसकर बाँधे रखता है। असली सवाल यह नहीं कि परेशानी क्या है, बल्कि यह है कि हम आज कौन-सा बोझ उतारने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि लोग मृत्यु को अनावश्यक रूप से कोसते हैं, जबकि जीवन की उलझनें ही अक्सर सबसे भारी साबित होती हैं।</p>
<p>अपने विचारों को और गहराई देने के लिए गौर गोपाल दास ने ‘खामोशियाँ’ सहित अन्य गीत गाए, जिससे पूरा माहौल संगीत मय हो गया। सुरों के बीच उन्होंने बताया कि उनकी लेखन यात्रा भी इसी आत्मबोध से निकली है। जब मन अपने भीतर जमा शोर को शांत कर देता है, तभी जीवन की नई लय बनती है। उन्होंने श्रोताओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन की उस धुन को पहचानें, जो अब बेसुरी हो चुकी है और जिसे छोड़ देना ही आगे बढ़ने का रास्ता है। जयपुर के जेएलएन मार्ग स्थित होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित जेएलएफ के तीसरे दिन की शुरुआत समाजसेवी और राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति के वक्तव्य से हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 15:00:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अनुवाद सिर्फ शब्दों को दूसरी भाषा में बदलना नहीं  यह भावनाओं को समझाने का काम : पूनम सक्सेना</title>
                                    <description><![CDATA[जेएलएफ के दूसरे दिन लेखिका और अनुवादक पूनम सक्सेना ने एक विचार मंथन सत्र के दौरान अनुवाद के काम की तुलना भगवान के काम से की। उन्होंने भाषा की शक्ति, अनुवाद की जटिलताओं और हिंदी सिनेमा की बदलती भाषा पर बात की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/translation-is-not-just-changing-words-into-another-language-it/article-139873"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(8)5.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जेएलएफ के दूसरे दिन लेखिका और अनुवादक पूनम सक्सेना ने एक विचार मंथन सत्र के दौरान अनुवाद के काम की तुलना भगवान के काम से की। उन्होंने भाषा की शक्ति, अनुवाद की जटिलताओं और हिंदी सिनेमा की बदलती भाषा पर बात की। सक्सेना ने कहा कि अनुवाद सिर्फ शब्दों को दूसरी भाषा में बदलने का काम नहीं, बल्कि इसमें किसी टेक्स्ट में छिपे सांस्कृतिक संदभोंर्, भावनात्मक बारीकियों और सामाजिक वास्तविकताओं को समझाना शामिल है। कभी-कभी कुछ शब्दों का दूसरी भाषा में अनुवाद करने से वह सटीक भावना या असर नहीं आ पाता, फिर भी मुझे लगता है कि साहित्य के वैश्विक आदान-प्रदान के लिए यह जरूरी है। हालांकि उन्होंने माना कि अनुवादक अक्सर मूल रचना की पूरी गहराई और बारीकियों को पकड़ने में नाकाम रहते हैं, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह प्रक्रिया भाषाई और भौगोलिक सीमाओं के पार साहित्य और विचारों के आदान-प्रदान के लिए बहुत जरूरी है।</p>
<p>सत्र के दौरान सक्सेना ने हिंदी सिनेमा में भाषा के विकास पर भी बात की और बताया कि कैसे फिल्मों के डायलॉग और कहानियां समय के साथ बदली हैं। शुरुआती हिंदी फिल्में उर्दू और साहित्यिक हिंदी से बहुत ज्यादा प्रभावित थीं, जिससे उनमें एक खास गीतात्मकता थी। वहीं आज का सिनेमा बदलती सामाजिक सोच, शहरी प्रभावों और वैश्विक प्रभाव को दिखाता है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव ने कहानियों को बताने और दर्शकों के समझने के तरीके को काफी हद तक बदल दिया है। चर्चा में उन साहित्यिक कृतियों की यात्रा पर भी बात हुई, जिन्हें फिल्मों में ढाला गया है। खासकर गुलशन नंदा के उपन्यासों को कैसे कटी पतंग और कई अन्य सफल हिंदी फिल्मों में पिरोया गया। सक्सेना ने लिखित कहानियों को विज़ुअल कहानी कहने में अनुवाद करने में आने वाली चुनौतियों पर जोर दिया। जहां फिल्म निर्माताओं को स्क्रीन के लिए किरदारों, भावनाओं और विषयों की फिर से व्याख्या करनी पड़ती है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 14:01:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 : लेखिका शोभा डे ने मीडिया से बातचीत, कहा- सुरक्षित कार्यस्थल और संवेदनशीलता के मामले में अमेरिका जैसे देश भी भारत से पीछे</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में लेखिका शोभा डे ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि स्त्री को अपने अधिकार, इच्छाएं और संवेदनशीलता खुद पहचाननी होगी। क्योंकि कोई भी समाज या व्यवस्था यह अधिकार सहज रूप से नहीं देती। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-literature-festival-2026-writer-shobha-de-while-talking-to/article-139872"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(7)5.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में लेखिका शोभा डे ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि स्त्री को अपने अधिकार, इच्छाएं और संवेदनशीलता खुद पहचाननी होगी। क्योंकि कोई भी समाज या व्यवस्था यह अधिकार सहज रूप से नहीं देती। उन्होंने कहा कि दुनिया के लगभग हर समाज में महिलाओं को सम्मान और समानता के लिए पुरुषों की तुलना में अधिक संघर्ष करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त शोभा डे ने फ्रंट लॉन में आयोजित सत्र के दौरान भी अपनी किताब 'द सेंसुअल सेल्फ' को लेकर अनीश गवांडे के साथ चर्चा की। </p>
<p><strong>महिलाओं की प्रगति, संघर्ष अब भी जारी</strong><br />मीडिया से बातचीत के दौरान शोभा डे ने माना कि भारत में पिछले कुछ दशकों में महिलाओं के लिए अवसर बढ़े हैं। आज महिलाएं फाइटर पायलट से लेकर शीर्ष नेतृत्व की भूमिकाओं तक पहुंच रही हैं, जो सामाजिक बदलाव का सकारात्मक संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षित और संवेदनशील कार्यस्थल के मामले में अमेरिका जैसे विकसित देश भी कई मायनों में भारत से पीछे है। </p>
<p><strong>महिलाएं जागरूक होकर उन्हें अपने जीवन में करें लागू </strong><br />शोभा डे ने कहा कि कानूनी अधिकार तभी सार्थक होते हैं, जब महिलाएं स्वयं जागरूक होकर उन्हें अपने जीवन में लागू करें। इसके लिए शिक्षा, आत्मबोध और अपने शरीर व भावनाओं के प्रति ईमानदारी बेहद जरूरी है। अपनी पुस्तक के संदर्भ में उन्होंने बताया कि 'द सेंसुअल सेल्फ' उनकी अपनी अनुभूतियों, सवालों और इच्छाओं को समझने की आजीवन यात्रा का परिणाम है। उन्होंने कहा कि 20 वर्ष की उम्र हो या 70 की, प्रेम, स्नेह और स्पर्श की चाह पूरी तरह मानवीय है। उम्र के साथ संवेदनशीलता खत्म नहीं होती, उसका स्वरूप बदलता है।  शोभा डे ने समाज पर टिप्पणी करते हुए कहा कि महिलाओं पर लंबे समय से 'अच्छी लड़की' होने का नैतिक दबाव डाला जाता रहा है। परिणामस्वरूप उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अपने प्रेम, रिश्तों और शारीरिक अनुभवों पर चुप्पी साधे रखें। उन्होंने सवाल उठाया कि एक स्त्री कब तक अपने भीतर के सच को दबाती रहेगी। अब समय है कि वह शर्म और संकोच से बाहर आकर अपनी भावनाओं को समझे और व्यक्त करे।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 13:24:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जेएलएफ में 'व्हेन गॉड्स डोंट मैटर' पुस्तक का विमोचन और कविता सत्र</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में एएएफ  बागान वेन्यू पर 'व्हेन गॉड्स डोंट मैटर' शीर्षक से एक रोचक लिटरेरी सत्र का आयोजन हुआ। इस सेशन में कवि जगदीप सिंह ने सीनियर जर्नलिस्ट और लेखक, स्वाति वशिष्ठ के साथ संवाद किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/when-gods-dont-matter-book-launch-and-poetry-session-at/article-139869"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(6)8.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ ) में एएएफ बागान वेन्यू पर 'व्हेन गॉड्स डोंट मैटर' शीर्षक से एक रोचक लिटरेरी सत्र का आयोजन हुआ। इस सेशन में कवि जगदीप सिंह ने सीनियर जर्नलिस्ट और लेखक, स्वाति वशिष्ठ के साथ संवाद किया। इस अवसर पर जगदीप सिंह ने लिखित उनके नए पोएट्री कलेक्शन का विमोचन भी किया। पुस्तक का विमोचन लेखक और कल्चरिस्ट संदीप भूतोड़िया ने फेस्टिवल को-डायरेक्टर नमिता गोखले और टीमवर्क आर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर संजॉय के.रॉय के साथ मिलकर किया।</p>
<p>स्वाति वशिष्ठ ने चर्चा समकालीन समय में कविता की प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज की कविता किस तरह ईश्वर से हटकर व्यक्तिगत अनुभवों और सामाजिक सच्चाइयों पर केंद्रित हो रही है। संवाद में यह भी सामने आया कि जगदीप सिंह की रचनाएं उन पाठकों से जुड़ती हैं जो अनिश्चितता, मूल्यों के अभाव और पारंपरिक ढांचों से हटकर किसी अर्थ की तलाश में हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/when-gods-dont-matter-book-launch-and-poetry-session-at/article-139869</link>
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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 13:00:54 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 : साहित्य संग फैशन का दिखा जलवा, विश्वनाथन आनंद से लेकर स्टीफन फ्राय की शब्द-कला</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के दूसरे दिन शुक्रवार को होटल क्लार्क्स आमेर साहित्य, इतिहास, विज्ञान, हास्य, कला और यात्रा लेखन के बहुरंगी महासागर में डूबा नजर आया। साहित्य महोत्सव ने एक बार फिर विचारों, संवादों और रचनात्मक अभिव्यक्तियों के माध्यम से हजारों साहित्य प्रेमियों को आकर्षित किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-literature-festival-2026-fashion-along-with-literature-from-vishwanathan/article-139866"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(5)11.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के दूसरे दिन शुक्रवार को होटल क्लार्क्स आमेर साहित्य, इतिहास, विज्ञान, हास्य, कला और यात्रा लेखन के बहुरंगी महासागर में डूबा नजर आया। साहित्य महोत्सव ने एक बार फिर विचारों, संवादों और रचनात्मक अभिव्यक्तियों के माध्यम से हजारों साहित्य प्रेमियों को आकर्षित किया। दूसरे दिन की शुरुआत राजस्थान की समृद्ध लोक परंपरा को जीवंत करती भोप समुदाय की भंवरी देवी की आत्मीय मॉनिंर्ग म्यूजिक प्रस्तुति से हुई। लोक सुरों के बाद महोत्सव का पहला सत्र लाइटनिंग किड रहा। जिसमें विश्व शतरंज चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने राहुल भट्टाचार्य से संवाद में अपने जीवन, करियर और नई पुस्तक के अनुभव साझा किए। </p>
<p><strong>महिलाओं के अनलिखे इतिहास को रखा सामने </strong><br />इतिहास प्रेमियों के लिए द लॉस्ट हीर: वीमेन इन कॉलोनियल पंजाब सत्र खास रहा। जिसमें हरलीन सिंह ने औपनिवेशिक दौर में पंजाब की महिलाओं के अनलिखे इतिहास को सामने रखा। उन्होंने कहा कि आम महिलाओं का इतिहास लोककथाओं, व्यंजनों और बिखरे हुए चित्रों में छिपा है, जिसे समेटना जरूरी है। </p>
<p><strong>वहीं विज्ञान के क्षेत्र में गॉड पार्टिकल : </strong>द स्टोरी ऑफ  एवरीथिंग सत्र में सर्न की वैज्ञानिक अर्चना शर्मा और खगोल-भौतिकीविद् गेरेंट लुईस ने ब्रह्मांड की उत्पत्ति और हिग्स बोसॉन कण पर रोचक चर्चा की। अर्चना शर्मा ने कहा कि आज की हर खोज, कल की नई संभावनाओं का मार्ग खोलती है। </p>
<p><strong>महिलाओं की भागीदारी जैसे अहम मुद्दों पर डाला प्रकाश </strong><br />समसामयिक विषयों पर चर्चा करते हुए द फि लैंथ्रॉपी पैराडॉक्स सत्र में एस्तेर डुफ्लो, सिद्धार्थ शर्मा, वैभव बुधराजा और कांता सिंह ने परोपकार की जटिलताओं, सरकार, एनजीओ और निजी संस्थाओं की भूमिका तथा महिलाओं की भागीदारी जैसे अहम मुद्दों पर प्रकाश डाला। वहीं द ट्रैवल सेशन में जेफ डायर, लाइज डूसेट, नोआ अविशाग स्नाल और पल्लवी अय्यर ने यात्रा लेखन को केवल आत्मकथा नहीं, बल्कि परिवेश और अनुभवों की सामूहिक यात्रा बताया। ब्रिटिश अभिनेता और लेखक स्टीफ न फ्राय ने ए बिट ऑफ  फ्राय सत्र में भाषा, हास्य और बौद्धिक जिज्ञासा पर अपनी विशिष्ट शैली में विचार साझा किए। उन्होंने शब्दों को जीवन का सहारा बताया और ऑस्कर वाइल्ड से मिली प्रेरणा, रचनात्मकता, पहचान और सोशल मीडिया जैसे विषयों पर भी बेबाकी से बात की।</p>
<p><strong>जेएलएफ आईलैंड ऑफ आयरलैंड की घोषणा हुई </strong><br />दूसरे दिन जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के नए अंतरराष्ट्रीय संस्करण जेएलएफ आइलैंड ऑफ  आयरलैंड की घोषणा भी की गई। जो 22 से 31 मई तक आयोजित होगा। इसके साथ ही स्लीपवेल प्रस्तुत द सेक्रेड अमृतसर फेस्टिवल 2026 की तिथियों का ऐलान किया गया। जिसमें कैलाश खेर, उषा उथुप सहित कई नामचीन कलाकार प्रस्तुति देंगे। </p>
<p><strong>कला प्रेमियों को ओजस आर्ट </strong><br />असेंडिंग रूट्स सत्र में परंपरा और आधुनिकता के संगम का अनुभव मिला। इस अवसर पर ओजस आर्ट अवॉर्ड 2026 छत्तीसगढ़ के मुरिया जनजाति के कलाकार पिसाडू राम मंडावी को प्रदान किया गया, जो पूरे महोत्सव के दौरान लाइव आर्ट बनाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 12:32:07 +0530</pubDate>
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