<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/lower/tag-6750" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>lower - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/6750/rss</link>
                <description>lower RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>गैस संकट से ठंडी पड़ी सब्जी बाजार की रफ्तार</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[रेस्टोरेंट व ढाबों में घटी सब्जियों की डिमांड, दाम कम होने से आमजन को राहत।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/gas-crisis-slows-down-the-vegetable-market/article-149400"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में जारी एलपीजी संकट का असर अब सब्जी बाजार पर गहराने लगा है। गैस सिलेंडरों की कमी के चलते होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन और छोटे ढाबों में भोजन तैयार करने का काम प्रभावित हुआ है। इससे सब्जियों की थोक और खुदरा मांग में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। मांग घटने के कारण सब्जियों के दामों में भी कमी आई है, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिल रही है, लेकिन किसानों और व्यापारियों के सामने नई चिंता खड़ी हो गई है। व्यापारियों के मुताबिक पहले जहां शहर की मंडियों में रोजाना भारी मात्रा में सब्जियों की खपत होती थी, वहीं अब हालात यह हैं कि मंडियों में माल बचने लगा है। होटल और ढाबों की खरीद आधी रह गई है, जबकि कई छोटे व्यवसाय अस्थायी रूप से बंद भी हो गए हैं। इसके चलते थोक बाजार में आवक अधिक और खपत कम होने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है।</p>
<p><strong>इन सब्जियों के दामों में आई गिरावट</strong><br />पिछले एक सप्ताह में टमाटर, आलू, प्याज, भिंडी, लौकी, बैंगन और हरी सब्जियों के दामों में 10 से 30 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। जहां टमाटर के भाव पहले 30-40 रुपए किलो थे, वहीं अब 10-15 रुपए किलो तक आ गए हैं। पहले भिंडी सबसे महंगी 60 रुपए प्रति किलो तक बिक रही थी। अब इसकी भी डिमांड कम होने से भाव टूट कर 30 रुपए प्रति किलो पर आ गए हैं। इसके अलावा आलू भी 10 रुपए किलो बिक रहा है। अन्य सब्जियों के भावों में कमी दर्ज की गई है। जिससे आमजन को घरेलू बजट पर कुछ राहत मिली है।</p>
<p><strong>आमजन को राहत, किसान आहत</strong><br />सब्जियों के दाम कम होने से आम उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिला है। गृहिणियों का कहना है कि पिछले कुछ समय से बढ़ती महंगाई के बीच सब्जियों के सस्ते होने से रसोई का खर्च कुछ कम हुआ है। खासकर मध्यम वर्ग और दैनिक आय वाले परिवारों को इससे राहत महसूस हो रही है। वहीं दूसरी ओर किसानों और व्यापारियों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। कम मांग के कारण उन्हें अपनी उपज कम दामों पर बेचनी पड़ रही है। कई बार तो लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। व्यापारियों का कहना है कि यदि यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>डिमांड बढ़ते ही भावों में आएगी तेजी</strong><br />सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि अभी डिमांड कम होने से सब्जियों की खपत घट गई है। बाद में जैसे ही एलपीजी आपूर्ति सामान्य होगी और होटल और रेस्टोरेंट फिर से पूरी क्षमता से संचालित होंगे तो सब्जियों की मांग में तेजी आएगी। इसके साथ ही दामों में भी फिर से बढ़ोतरी हो सकती है। अभी शादियों की सीजन भी शुरू नहीं हो पाया है। विवाह सीजन का दौर चालू होने के बाद फिर से सब्जियों के भावों में तेजी आने की उम्मीद है। फिलहाल, बाजार में सुस्ती के बीच आमजन को सस्ती सब्जियों का लाभ मिल रहा है, जबकि किसान और व्यापारी हालात सुधरने का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p>पहले रोजाना पूरा माल निकल जाता था, लेकिन अब आधा भी नहीं बिक रहा। मजबूरी में कम दाम पर बेचना पड़ रहा है, जिससे नुकसान हो रहा है।<br /><strong>-शब्बीर वारसी, सब्जी व्यापारी</strong></p>
<p>सब्जियों के दाम कम होने से थोड़ी राहत मिली है। पहले जहां 500-600 रुपए में हफ्ते की सब्जी आती थी, अब 300-400 में काम चल रहा है।<br /><strong>-मीना कुमारी, गृहिणी</strong></p>
<p>खेत में मेहनत करने के बाद भी सही दाम नहीं मिल रहे। मंडी में भाव गिर गए हैं, जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।<br /><strong>-रामकेश मीणा, सब्जी उत्पादक</strong></p>
<p>गैस सिलेंडर की दिक्कत के कारण ढाबा पूरा नहीं चला पा रहे हैं। इससे सब्जियों की खरीद भी कम कर दी है।<br /><strong>-अशोक रोहिड़ा, ढाबा संचालक </strong></p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/gas-crisis-slows-down-the-vegetable-market/article-149400</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/gas-crisis-slows-down-the-vegetable-market/article-149400</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 14:31:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/122200-x-60-px%2916.png"                         length="1628970"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टेंडर में बीएसआर से कम रेट डाली, तो गैप राशि का 50 फीसदी एडवांस में कराना होगा जमा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[सरकारी विभागों की ओर से विकास कार्यो के निकाले जाने वाले टेंडर में बीएसआर से कम रेट डालने वालों पर अब सरकार ने नया रास्ता निजात किया है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/616d539db5c59/article-1754"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/ashok_gehlot_630x4004.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सरकारी विभागों की ओर से विकास कार्यो के निकाले जाने वाले टेंडर में बीएसआर से कम रेट डालने वालों पर अब सरकार ने नया रास्ता निजात किया है। अब कम रेट डालने पर संवेदकों को गैप राशि की 50 फीसदी राशि जमा करानी होगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के स्तर पर हुई बैठक में बताया गया कि निर्माण कार्याें में कई बार ठेकेदारों द्वारा अनुमानित राशि से काफी कम दर बिड में डाली जाती है और कार्य या तो समय पर पूरा नहीं किया जाता अथवा गुणवत्ता मेंटन नहीं की जाती है। इस पर अंकुश लगाने के लिए राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शीता नियम-2013 में अतिरिक्त कार्य सम्पादन प्रतिभूति लिए जाने का प्रावधान जोड़ा गया है। सफल ठेकेदार की दर अनुमानित मूल्य से 85 प्रतिशत से कम आने पर उस से 85 प्रतिशत से जितनी कम राशि होगी, उस राशि की 50 प्रतिशत अतिरिक्त कार्य सम्पादन प्रतिभूति ली जाएगी। इस व्यवस्था से टेण्डर में अनुमानित मूल्य से काफी कम दर लगाने वाले ठेकेदारों पर अंकुश लगाया जा सकेगा।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/616d539db5c59/article-1754</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/616d539db5c59/article-1754</guid>
                <pubDate>Mon, 18 Oct 2021 17:32:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2021-10/ashok_gehlot_630x4004.jpg"                         length="103522"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Administrator]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        