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                <title>tender - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>दिल्ली : LG ने दी पुनर्वास नीति-2026 को मंजूरी, हजारों परिवारों को मिलेगा स्थायी आशियाना</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली के उपराज्यपाल ने 'झुग्गी पुनर्वास नीति-2026' को मंजूरी दे दी है। इसके तहत डीडीए (DDA) और डूसिब (DUSIB) अगले 45 दिनों में पांच जेजे क्लस्टरों के लिए टेंडर जारी करेंगे। योजना के तहत झुग्गीवासियों को आधुनिक आवास के साथ स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/good-news-for-slum-dwellers-in-delhi-lg-approves-rehabilitation/article-157261"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/d-1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने बुधवार को कहा कि दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 'दिल्ली स्लम एवं जेजे क्लस्टर पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति-2026' को मंजूरी दी गयी है। संधू ने एक्स पर आज इसकी जानकारी देते हुए कहा कि गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्री आशीष सूद भी मौजूद रहे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'जहां झुग्गी, वहां मकान' पहल को तेजी से लागू करने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) अगले 45 दिनों के भीतर पांच जेजे क्लस्टरों के पुनर्वास के लिए टेंडर जारी करेंगे। यह योजना के पहले चरण का हिस्सा होगा और इसके जरिए झुग्गीवासियों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू होगी। उपराज्यपाल ने कहा कि पहले चरण के बाद हर महीने कम से कम पांच नए टेंडर जारी किए जायेंगे, ताकि पुनर्वास कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जा सके। इससे राजधानी की विभिन्न झुग्गी बस्तियों में रहने वाले हजारों परिवारों को स्थायी और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। </p>
<p>इन पुनर्वास परियोजनाओं में आधुनिक आवासों के साथ स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी और अन्य आवश्यक सामाजिक सुविधाएं भी विकसित की जायेंगी। यह नीति न केवल वंचित वर्गों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करेगी, बल्कि समावेशी, टिकाऊ और नियोजित शहरी विकास को भी बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल हजारों परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने के साथ-साथ 'विकसित दिल्ली' के लक्ष्य , को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और राजधानी के भविष्य-केंद्रित शहरी विकास को नयी दिशा देगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 15:27:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>असर खबर का :  बरसात से पहले साफ हो जाएगा पत्थरों का पहाड़</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम ने किया पत्थर उठाने का टेंडर, आज से शुरु होगा काम।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--the--mountain-of-stones--will-be-cleared-before-the-monsoon-arrives/article-155807"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/856.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दादाबाड़ी स्थित नाले में करीब छह माह से अधिक समय से लगे पत्थरों का पहाड़ बरसात से पहले साफ हो जाएगा। नगर निगम ने इसके टेंडर करने के बाद मंगलवार को कार्यादेश भी जारी कर दिया। अब बुधवार से पत्थर हटाने का काम शुरु होगा। जिससे बरसात में यह बाधक नहीं बनेगा। </p>
<p>नगर निगम की ओर से बसंत विहार से दादाबाड़ी धोकड़े वाले हनुमानजी मंदिर तक बड़े बरसाती नाले का काम कराया जा रहा है। जिसके तहत नाले में सीसी बैड बनाना है। साथ ही बीच में ड्राई वैदर चैनल बनाई जा रही है। जिससे पूरे साल चैनल के माध्यम से और बरसात में पूरे नाले से पानी का निर्वाध बहाव हो सके। इस काम के दौरान नाले की खुदाई से निकले बड़ी मात्रा में पत्थरों का नाले में ही अम्बार लग गया। जिससे वहां ऐसा लग रहा है मानो पत्थरों का पहाड़ खड़ा हो। निगम की ओर से उस पत्थर को नहीं हटाने से इससे बरसात में पानी का बहाव में रूकावट होने पर दादाबाड़ी, बसंत विहार व जवाहर नगर समेत कई क्षेत्रों में पानी भरने की समस्या हो सकती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नगर निगम ने पत्थर हटाने के लिए टेंडर कर इसकी नीलामी की प्रक्रिया शुरु की थी। जिसके फाइनल होने के बाद मंगलवार को उसका कार्यादेश जारी कर दिया गया। निगम अधिकारियों के अनुसार चुनाई के इस पत्थर को 416 रुपए प्रति टन के हिसाब से बेचा जाएगा। संवेदक द्वारा बुधवार से इसे हटाने का काम शुरु कर दिया जाएगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि दादाबाड़े नाले में लगे पत्थरों के पहाड़ व इससे बरसात में होने वाली समस्या का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 16 मई को पेज 8 पर' बरसात में बाधक बनेगा नाले में पत्थरों का पहाड़ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें इससे होने वाले प्रभाव व लोगों की समस्या को उजागर किया था।<br />समाचार प्रकाशित होने के बाद निगम अधिकारी हरकत में आए। उन्होंने पत्थरों के पहाड़ को हटाने के लिए इसके टेंडर व नीलामी प्रक्रिया शुरु की। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार को पत्थर हटाने का कार्यादेश भी जारी कर दिया गया।</p>
<p>नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि माइनिंग विभाग की परमीशन समेत कई औपचारिकताएं पूरी करने में समय लगा। नीलामी पूरी होने के बाद मंगलवार को कार्यादेश जारी कर दिया गया है। बुधवार से पत्थर उठाने का काम शुरु हो जाएगा।आयुक्त ने बताया कि संवेदक को 20 से 25 दिन का समय दिया गया है। जिससे बरसात शुरु होने से पहले पत्थरों का पहाड़ साफ हो जाएगा। उसके बाद मिट्टी को तो साफ कर देंगे। जिससे बरसात में लोगों को परेशानी नहीं होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:27:33 +0530</pubDate>
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                <title>CBSE के डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम पर उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार सख्त, चेयरमैन-सचिव का तबादला, टेंडर और री-वैल्यूएशन पोर्टल की जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा मंत्रालय ने सीबीएसई के ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम विवाद पर सख्त कदम उठाते हुए बोर्ड के चेयरमैन और सचिव का तबादला कर दिया है। सरकार डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली, टेंडर प्रक्रिया में धांधली और री-वैल्यूएशन पोर्टल की तकनीकी खामियों की आईआईटी विशेषज्ञों से ऑडिट करा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/amidst-the-questions-raised-on-the-digital-evaluation-system-of/article-155793"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/cbse.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम को लेकर उठे विवाद के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा मंत्रालय ने सीबीएसई चेयरमैन और सचिव का तबादला करते हुए पूरे मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। मंत्रालय ने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली, टेंडर प्रक्रिया और री-वैल्यूएशन पोर्टल में सामने आई तकनीकी खामियों को गंभीरता से लिया है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार सरकार सीबीएसई की अब तक दी गई सफाई से संतुष्ट नहीं है। इसी कारण ओएसएम सिस्टम से जुड़ी खरीद प्रक्रिया और टेंडर शर्तों की विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं। आरोप हैं कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के लिए निकाले गए टेंडर में पात्रता नियमों और तकनीकी शर्तों में बदलाव कर हैदराबाद की एक कंपनी को फायदा पहुंचाया गया।</p>
<p>परीक्षा के बाद छात्रों ने उत्तरपुस्तिकाओं के धुंधले स्कैन, पन्ने गायब होने और री-वैल्यूएशन पोर्टल में तकनीकी समस्याओं की शिकायतें की थीं। मंत्रालय ने अब आईआईटी विशेषज्ञों की मदद से पोर्टल और साइबर सुरक्षा ढांचे का ऑडिट शुरू कराया है। सीबीएसई को डिजिटल सिस्टम मजबूत करने और छात्रों की समस्याओं का जल्द समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:39:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संजय राउत का दावा: NCP में चल रही अंदरूनी कलह, पार्टी का अस्तित्व खतरे में, भाजपा में विलय की संभावना ?</title>
                                    <description><![CDATA[शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने दावा किया है कि अजीत पवार की एनसीपी का अस्तित्व समाप्त हो सकता है या भाजपा में विलय हो सकता है। पार्टी के भीतर छगन भुजबल और पार्थ पवार के बीच टेंडर विवाद को लेकर हुई तीखी बहस और अंदरूनी कलह के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/sanjay-raut-claims-the-ongoing-internal-strife-in-ncp-existence/article-155443"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/सुनेता-अजितपवार.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के राज्यसभा सांसद और मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने आज संकेत दिया कि राज्य की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी का अस्तित्व समाप्त हो सकता है या भाजपा में विलय हो सकता है। संजय राउत ने सुनेत्रा अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में चल रही अंदरूनी कलह की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अजीत पवार द्वारा बनाई गई यह पार्टी भविष्य में अस्तित्व में नहीं रहेगी। अब छगन भुजबल, प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, हसन मुश्रीफ और धनंजय मुंडे की चौकड़ी को अपने फैसलों पर पछतावा हो सकता है। शरद पवार से अलग करके अजीत पवार को भाजपा से जोड़ने के अपने फैसले पर उन्हें पछतावा हो सकता है।”</p>
<p>खबरों के मुताबिक, मंगलवार को हुई पार्टी की बैठक में सुनेत्रा अजीत पवार के नेता सुनील तटकरे और छगन भुजबल के बीच तीखी बहस हुई। यह भी बताया गया कि सुनेत्रा पवार के बेटे और पार्टी सांसद पार्थ पवार तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल के बीच भी तीखी नोकझोक हुई। पार्थ पवार और मंत्री भुजबल के बीच विवाद तब शुरू हुआ जब पार्थ पवार ने कथित तौर पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा जारी राज्य स्तरीय परिवहन निविदा के संबंध में एक ठेकेदार को भुजबल के पास भेजा, लेकिन भुजबल ने पार्थ पवार की बात अनसुनी करते हुए ठेकेदार को तुरंत वापस भेज दिया।</p>
<p>अंततः, इस घटनाक्रम के चलते पार्थ पवार और मंत्री भुजबल के बीच तीखी बहस हो गई। भुजबल ने पार्थ पवार से नाराज़गी जताते हुए कहा, “आपके पिता या दादाजी ने भी मुझसे कभी इस तरह की बात नहीं कही।” खबरों के मुताबिक, पार्थ पवार ने भुजबल को जवाब देते हुए कहा, “अगर ऐसा है, तो मुझे आपको आपके विभाग से हटाना पड़ेगा।”</p>
<p>भुजबल ने कहा, “अनुबंध अदालत में अटका हुआ है। मंत्रिमंडल ने इसे मंज़ूरी दे दी है। अनुबंध देने की ऑनलाइन प्रक्रिया है। जो लोग उस प्रक्रिया के माध्यम से योग्य होते हैं, उन्हें अनुबंध दिए जाते हैं। किसी को यूं ही अनुबंध कैसे दिया जा सकता है? हम दोनों के बीच कोई विवाद नहीं था। कुछ काम आपसी समझ से करने पड़ते हैं। फिलहाल, निविदा दस्तावेजों की जांच और अंतिम प्रक्रिया अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय समिति द्वारा की जा रही है, और किसी भी परिवहनकर्ता को कोई कार्य आदेश नहीं दिया गया है।”</p>
<p>हालांकि, पार्थ पवार ने इस बात से इनकार किया है कि उनके और छगन भुजबल के बीच कुछ भी हुआ है। पार्थ पवार ने मीडियाकर्मियों से कहा, “हमारे बारे में, खासकर मेरे बारे में, जानबूझकर गलत खबरें फैलाई जा रही हैं। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। मैंने किसी भी सरकारी काम में दखल नहीं दिया है।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 11:27:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आखिरकार टर्मिनल बिल्डिंग साइट का भी शुरु हुआ काम, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का 2027 तक पूरा होना है काम।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/work-finally-begins-on-terminal-building-site/article-153684"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ddddd1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के फेज दो में टर्मिनल बिल्डिंग सिटी साइट का काम आखिरकार शुरु हो गया है। एयरपोर्ट अथोरिटी ऑफ इंडिया की ओर से निर्माण कम्पनी दिल्ली की आहलूवालिया कांट्रेक्ट प्राइवेट लिमिटेड को 393 करोड़ रुपए का कार्यादेश जारी किया गया है। कार्यादेश मिलते ही कम्पनी ने शम्भूपुरा में निर्माण कार्य शुरु कर दिया है।</p>
<p>हालांकि कम्पनी का टेंडर काफी समय पहले फाइनल हो गया था। उसके बाद एलओआई जारी होने के साथ ही कम्पनी की ओर से एयरपोर्ट साइट पर अपना ऑफिस सैटअप जमाने के साथ ही मशीनरी व अन्य संसाधन पहुचाना शुरु कर दिया था। साथ ही सॉयल टेस्टिंग व सर्वे समेत अन्य काम भी किए जा रहे हैं।</p>
<p>एएआई अधिकारियों के अनुसार फेज दो में टर्मिनल बिल्डिंग,एयर कंट्रोल सिस्टम(एटीसी), फायर स्टेशन, कार पार्किंग व सिटी साइट रोड कनेक्टिविटी समेत अन्य कार्य कराए जाने हैं। कम्पनी को यह कार्य 18 माह में पूरा करना है।वहीं दूसरी तरफ फेज एक में रनवे का निर्माण कार्य काफी समय पहले शुरु हो चुका है। 32 सौ गुणा 45 मीटर के इस रनवे के लिए कई सतह की परतें डाली जा रही है। उसका काम तेजी से चल रहा है। वहीं टावर शिफ्टिंग का काम भी साथ-साथ किया जा रहा है। जिस जगह पर ये टावर शिफ्ट किए जाने वहां की अधिग्रहित भूमि का डायवर्जन व जमीन मालिकों को केडीए की ओर से मुआवजा भी दिया जा चुका है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि एयरपोर्ट के फेज दो का काम अब तक शुरु नहीं होने का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 29 अप्रैल को पेज दो पर' रनवे के काम में तेजी लेकिन फेज दो में सिटी साइट का अब तक शुरु भी नहींझ् शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया था कि एयरपोर्ट का शिलान्यास 7 मार्च को किया जा चुका है। लेकिन अभी तक भी सिटी साइट का काम शुरू नहीं हो सका है। जबकि दिसम्बर 2027 तक इसका काम पूरा होने के बाद यहां से उड़ान भरने का दावा किया जा रहा है। समाचार प्रकाशित होने के बाद एएआई अधिकारी व संबंधित ने तत्परता दिखाते हुए निर्माण कम्पनी को कार्यादेश जारी किया। जिससे काम जल्दी से जल्दी शुरु हो सके। कार्यादेश मिलते ही कम्पनी ने काम भी शुरु कर दिया है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 15:20:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रनवे के काम में तेजी, लेकिन फेज दो में सिटी साइड का काम अब तक शुरू भी नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट : शिलान्यास के डेढ़ माह बाद भी शुरू नहीं हुआ फेज दो का निर्माण कार्य।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/runway-work-accelerates--but-phase-ii--city-side--construction-has-not-even-started-yet/article-152074"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(1)57.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का शिलान्यास हुए डेढ़ माह से अधिक हो गया लेकिन इसके फेज दो सिटी साइट का काम शुरू नहीं हो पाया है। निर्माण कम्पनी को 18 माह में यह काम पूरा करना है। दिसम्बर 2027 में इस एयरपोर्ट से उड़ान भरने का दावा किया जा रहा है।<br />शम्भूपुरा में 440.646 हैक्टेयर भूमि में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण किया जाना है। यह काम दो फेज में होना है। पहले फेज में रनवे साइट का और दूसरे में सिटी साइट यानि बिल्डिंग व पार्किंग का निर्माण किया जाना है। रनवे का काम नवम्बर 2025 में शुरू कर दिया गया है।<br />फेज एक में रनवे साइट पर बीच में आ रहे पावर ग्रिड के एक टावर को ही शिफ्ट किया जा सका है। एयरपोर्ट की भूमि से करीब 88 टावर शिफ्ट किए जाने हैं। इसकी प्रक्रिया चल रही है। जहां टावर शिफ्ट किए जाने हैं उस जगह की क्लीयरेंस मिल चुकी है। टावर शिफ्टिंग के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा देने का काम भी केडीए की ओर से किया जा रहा है। कई लोगों को तो मुआवजा राशि के चैक शिविर के माध्यम से दिए भी जा चुके हैं।</p>
<p><strong>फेज दो का टेंडर हुआ फाइनल</strong><br />एयरपोर्ट अथोरिटी आॅफ इंडिया की ओर से 1507 करोड़ की लागत से एयरपोर्ट का निर्माण किया जाना है। इसके लिए फेज एक का काम तो करीब 283 करोड़ की लागत से चल रहा है। वहीं फेज दो का टेंडर तो लगभग फाइनल हो गया है। करीब 393 करोड़ से इस काम को दिल्ली की आहलूवालिया कांट्रक्ट प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी को करना है।</p>
<p><strong>मौके पर स्थापित हुई लैब</strong><br />एयरपोर्ट निर्माण के लिए उपयोग में होने वाली सामग्री की जांच के लिए निर्माण स्थल पर ही कम्पनी ने प्रयोगशाला स्थापित की है।अब निर्माण सामग्री की जांच के लिए हाल ही में करीब 800 करोड़ रुपए में थर्ड पार्टी क्वालिटी एश्योरेंस किया गया है। यह काम आरटीयू को दिया गया है। यहां की टीम को इस काम को 20 माह में पूरा करना है।</p>
<p><strong>पानी की लाइन का काम भी शुरू नहीं</strong><br />एयरपोर्ट तक पानी पहुंचाने का काम जलदाय विभाग को करना है। इसके लिए सकतपुरा स्थित मिनी अकेलगढ़ से एयरपोर्ट तक करीब 21 कि.मी. लम्बी पाइप लाइन बिछानी है। इसके लिए एएआई और जलदाय विभाग के बीच करीब 17.46 करोड़ रुपए का एमओयू हुआ है। करीब 6 माह पहले 30 अक्टूबर 2025 को एमओयू होने के बाद भी अभी तक इसका काम भी शुरू नहीं हो सका है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का शिलान्यास हो गया है। इसके पहले फेज में रनवे का काम तेजी से किया जा रहा है। इसके सबग्रेड का काम चल रहा है। बरसात के बाद इसके ऊपरी हिस्से का काम शुरू किया जाएगा। वहीं फेज दो का टेंडर तो हो गया है। निर्माण कम्पनी ने मौके पर अपना आॅफिस व लैब समेत अन्य सिस्टम स्थापित करना शुरू कर दिया है। सॉयल टेस्टिंग का काम किया जा रहा है। फेज दो का काम भी शीघ्र ही शुरू हो जाएगा। प्रयास है कि समय पर इस काम को पूरा किया जा सके।<br /><strong>- सुनील प्रसाद, जीएम प्रोजेक्ट, कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 14:59:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - चंबल के बांधों का बदलेगा स्वरूप, 50 गेट पहली बार होंगे नए</title>
                                    <description><![CDATA[निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य को 36 माह में पूरा करने का लक्ष्य है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---the-chambal-dams-will-be-transformed--50-gates-to-be-replaced-for-the-first-time/article-142388"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(24).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चंबल नदी पर बने कोटा बैराज, राणप्रताप सागर और जवाहर सागर को पहली बार बड़े स्तर पर नवजीवन देने की तैयारी शुरू हो गई है। करीब 66 साल पुराने इन बांधों के 50 गेट बदले जाएंगे, जिस पर कुल 236 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 11 फरवरी को निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जल संसाधन विभाग के अनुसार अब तक इन बांधों के गेट कभी पूरी तरह बदले नहीं गए थे। समय के साथ गेट, स्लूज सिस्टम और मैकेनिज्म पुराने हो चुके हैं, जिससे संचालन में जोखिम बढ़ गया था। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने तीनों बांधों के व्यापक सुधार और आधुनिकीकरण का निर्णय लिया है।</p>
<p><strong>कोटा बैराज के बदलेंगे 19 गेट</strong><br />परियोजना के तहत पहली बार कोटा बैराज के 19 गेट बदले जाएंगे। इसके अलावा राणप्रताप सागर बांध के 7 बड़े और 4 छोटे गेट व जवाहर सागर बांध के 10 गेट को भी पूरी तरह बदला जाएगा। इसके साथ ही स्लूज गेट, कंट्रोल सिस्टम और अन्य तकनीकी हिस्सों को भी आधुनिक बनाया जाएगा।</p>
<p>जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना की अनुमानित लागत 236 करोड़ रुपए है। निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य को 36 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निविदा दस्तावेज 11 फरवरी से उपलब्ध होंगे, जबकि तकनीकी और वित्तीय निविदाएं फरवरी-मार्च में खोली जाएंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि चंबल के ये तीनों बांध राजस्थान और मध्यप्रदेश के सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए रीढ़ की हड्डी हैं। रणप्रताप सागर और जवाहर सागर से बिजली उत्पादन होता है, वहीं कोटा बैराज से लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई और शहरों को पेयजल मिलता है।</p>
<p><strong>66 साल पुराने बांध आधुनिक तकनीक से होंगे लैस</strong><br />तीनों बांधों का निर्माण 1960 के दशक में हुआ था। उस समय की तकनीक आज के मानकों के अनुसार पुरानी हो चुकी है। विभागीय रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गेट और मशीनरी की औसत उम्र 40-50 साल होती है, जबकि ये सिस्टम उससे कहीं अधिक समय से उपयोग में हैं। अब नई तकनीक से गेट बदले जाने से संचालन अधिक सुरक्षित, सटीक और तेज होगा। कुल मिलाकर, 236 करोड़ की यह परियोजना चंबल नदी के तीनों बांधों को नया जीवन देगी, जिससे कोटा सहित पूरे हाड़ौती और प्रदेश के जल भविष्य को मजबूती मिलेगी। जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह पहली बार है जब चंबल के तीनों प्रमुख बांधों के गेट एक साथ बदले जाएंगे। इससे बांधों की सुरक्षा बढ़ेगी और आने वाले दशकों तक जल प्रबंधन सुचारू रहेगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />चंबल नदी पर बने तीन प्रमुख बांधों के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 30 नवंबर2025 को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि राणा प्रताप सागर (आरपीएस), जवाहर सागर और कोटा बैराज के नवीनीकरण का बहुचर्चित प्रोजेक्ट पिछले 6 वर्षों से फाइलों और निरीक्षणों में अटका हुआ है। इस दौरान प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 100 करोड़ से बढ़कर 236 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इसके बाद भी अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। बजट बढ़ने के कारण अब टैंडर की अनुमति भारत नहीं बल्कि अमेरिका स्थित विश्व बैंक मुख्यालय से मिलेगी। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि 200 करोड़ से ऊपर की अनुमति विश्व बैंक के मुख्यालय से आती है। तीनों बांधों के रखरखाव की राशि विश्व बैंक से लोन के रूप में ली जा रही है। विश्व बैंक से अनुमति मिलने के बाद ही टैंडर प्रक्रिया शुरू हो सकती है।</p>
<p>चंबल नदी पर बने कोटा बैराज, राणप्रताप सागर और जवाहर सागर को नवजीवन देने की तैयारी शुरू हो गई है। करीब 66 साल पुराने इन बांधों के 50 गेट बदले जाएंगे, जिस पर कुल 236 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 11 फरवरी को निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी।<br /><strong>- आरपी गोयल, सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:41:02 +0530</pubDate>
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                <title>फ्लाई ओवर के नीचे गेम जोन से गायब होने लगी रैलिंग व जाली</title>
                                    <description><![CDATA[नए कोटा क्षेत्र में विशेषकर कोचिंग एरिया में  खेल की जगह उपलब्ध करावने के लिए फ्लाई ओवर के नीचे गेम जोन बनाया है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/railings-and-nets-are-disappearing-from-the-game-zone-under-the-flyover/article-133446"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/1200-x-600-px-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में चोरों के हौंसले इतने अधिक बुलंद हो रहे हैं कि वे न तो घरों को छोड़ रहे हैं और न ही सार्वजनिक स्थानों को। चोरों ने झालावाड़ रोड जैसे व्यस्त मार्ग पर फ्लाई ओवर के नीचे बने गेम जोन तक को नहीं छोड़ा। यहां से भी रैलिंग व जालियां गायब होने लगी है। नए कोटा क्षेत्र विशेष रूप से कोचिंग एरिया में युवाओं व विद्यार्थियों को खेल की जगह उपलब्ध करावने के उद्देश्य से कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा झालावाड़ रोड पर सिटी मॉल के सामने फ्लाई ओवर के नीचे गेम जोन बनाया है। इसके लिए यहां रैलिंग लगाकर उसे जालियों से कवर किया है। जिससे यहां खेल की प्रेक्टिस करने वालों को सुरक्षा भी मुहैया हो सके।</p>
<p><strong>4 स्पान, दो खेल</strong><br />सिटी मॉल के सामने बने फ्लाई ओवर के नीचे चार स्पान को गेम जोन के लिए चिन्हित किया गया है। जिनमें दो गेम का अभ्यास कराया जाएगा। तीन स्पान में स्केटिंग व एक में बास्केटबॉल का अभ्यास कराया जाएगा। इसके लिए केडीए की ओर से बास्केटबॉल की नेट भी लगाई गई है।</p>
<p><strong>देखरेख के अभाव में दुर्दशा</strong><br />केडीए ने गेम जोन बनाने के लिए हजारों रुपए खर्च तो कर दिए। लेकिन वहां उसकी सुरक्षा के लिए न तो अभी तक गार्ड लगाए हैं और न ही अभी तक इसके संचालन का टेंडर किया गया है। जिसका फायदा चोर उठा रहे हैं। पिछले कई दिन से धीरे-धीरे चोर सिटी मॉल के सामने वाले हिस्से से रैलिंग और कई जगह से जालियों के छोटे-छोटे हिस्से चोरी कर ले जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि कुछ समय और इसकी देखरेख नहीं की गई तो इसकी अधिक दुर्दशा हो जाएगी।</p>
<p><strong>केडीए ने दो बार किया टेंडर</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से गेम जोन के संचालन के लिए दो बार टेंडर किए जा चुके है। पहली बार में तो कोई भी नहीं आया। अब दोबारा टेंडर किया है। उसकी प्रक्रिया चल रही है। केडीए द्वारा गेम जोन का संचालन करने वाले से एक साल में ९६ हजार रुपए यानि करीब ८ हजार रुपए महीना किराए के रूप में लिया जाएगा। इसके बाद यहां जितने लोग प्रेक्टिस करने आएंगे उनसे मासिक शुल्क संबंधित संचालन कर्ता द्वारा वसूल किया जाएगा।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />झालावाड़ रोड फ्लाई ओवर के नीचे गेम जोन के लिए केडीए ने सैटअप तैयार किया है। अब इसके संचालन की प्रक्रिया की जा रही है। पहली बार टेंडर में कोई नहीं आया। अब दूसरी बार टेंडर किया है। उसके शीघ्र ही फाइनल होने पर इसका संचालन किया जाएगा। साथ ही जब तक इसका संचालन करने वाला नहीं मिलता है तब तक यहां गार्ड की व्यवस्था की जाएगी। जिससे इसे किसी तरह का कोई नलकसान नहीं हो।<br /><strong>- मुकेश चौधरी, सचिव,कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 15:20:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कापरेन में बदलेगा ड्रेन का स्वरूप, 19 करोड़ की लागत से होगा पक्का निर्माण, मिलेगी जलभराव से राहत</title>
                                    <description><![CDATA[पीडब्ल्यूडी ने पुनर्निर्माण का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/drain-in-kapren-to-be-revamped--permanent-construction-to-cost-rs-19-crore--providing-relief-from-waterlogging/article-131981"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(2)8.png" alt=""></a><br /><p>कापरेन। नगरवासियों के लिए राहतभरी खबर है। कस्बे के बीच से गुजरने वाली मुख्य ड्रेन के पक्के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। राज्य सरकार की बजट घोषणा के तहत इस कार्य के लिए 19 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। नगरपालिका को कार्यकारी एजेंसी बनाया गया है। पालिका प्रशासन ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो 12 नवंबर को खोले जाएंगे। कार्य की समयावधि 18 माह निर्धारित की गई है। पालिका ईओ प्रवीण कुमार शर्मा ने बताया कि शंकर कॉलोनी से लेकर जोस्या खेड़ा की पुलिया तक ड्रेन का पक्का निर्माण किया जाएगा। ड्रेन की खुदाई व गहरीकरण से वर्षा ऋतु में जलभराव की समस्या समाप्त होगी। बरसात में खेतों व छोटे-बड़े नालों का पानी इसी ड्रेन से होकर निकलता है, जिससे तेजाजी मेला ग्राउंड, अस्पताल और शक्ति चौराहे पर जलभराव हो जाता था। अब नगरवासियों को इस परेशानी से राहत मिलेगी और गंदगी की स्थिति में भी सुधार होगा।</p>
<p><strong>सौंदर्यीकरण के साथ बनेगा फुटपाथ</strong><br />निर्माण कार्य के दौरान ड्रेन के दोनों ओर सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी। जहां पर्याप्त स्थान रहेगा, वहां फुटपाथ बनाया जाएगा। सौंदर्यीकरण के तहत पौधरोपण और लाइटिंग की भी व्यवस्था होगी। इससे कस्बे का स्वरूप और आकर्षक बनेगा।</p>
<p><strong>शक्ति चौराहे की पुलिया का पुनर्निर्माण प्रस्तावित</strong><br />हाल ही में आई बाढ़ में शक्ति चौराहे की पुलिया बह जाने से आवागमन बाधित हो गया था। इस पर पीडब्ल्यूडी ने पुनर्निर्माण का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।</p>
<p>मुख्य ड्रेन के पक्के निर्माण की बजट स्वीकृति मिल गई है, तकनीकी प्रक्रिया पूरी होते ही ड्रेन निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। जहां जगह रहेगी वहां फुटपाथ भी प्रस्तावित है। साथ ही सौंदर्यीकरण में पौधरोपण व लाइटिंग भी शामिल है।शक्ति चौराहे की टूटी पुलिया को लेकर भी डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी ने भेज दिया है। जैसे ही बजट स्वीकृत होगा, निर्माण कराया जाएगा। फिलहाल मुख्य ड्रेन का काम प्राथमिकता में है।<br /><strong>- प्रवीण कुमार शर्मा,ईओ नगरपालिका कापरेन।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/drain-in-kapren-to-be-revamped--permanent-construction-to-cost-rs-19-crore--providing-relief-from-waterlogging/article-131981</link>
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                <pubDate>Mon, 10 Nov 2025 16:51:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जल संरचनाओं की मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू, 1.91 लाख की होगी मरम्मत</title>
                                    <description><![CDATA[जल संसाधन विभाग ने बांधों, नहरों और जल संरचनाओं की मरम्मत कार्यों के लिए निविदा आमंत्रित की है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/tender-process-for-repairing-water-structures-will-start-191-lakh/article-121304"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/jal-sansadhan-department.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जल संसाधन विभाग ने बांधों, नहरों और जल संरचनाओं की मरम्मत कार्यों के लिए निविदा आमंत्रित की है। कार्यकारी अभियंता कार्यालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह कार्य तहसील लालसोट क्षेत्र में किया जाएगा। </p>
<p>कुल लागत 1.91 लाख रुपए निर्धारित की गई है, जिसमें 3820 रुपए निविदा शुल्क, 955 रुपये बीमा शुल्क और 500 रुपए निविदा पत्र शुल्क शामिल हैं। इस निविदा का उद्देश्य जल संरक्षण ढांचे को सुचारु रूप से क्रियाशील बनाए रखना है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निविदा की शर्तें एवं तकनीकी अर्हताएं वेबसाइट पर उपलब्ध हैं और नियमों के अनुसार पारदर्शी प्रक्रिया के तहत चयन किया जाएगा। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति और सिंचाई व्यवस्था को सशक्त बनाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Jul 2025 15:50:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए 385 करोड़ का दूसरा टेंडर भी हुआ जारी</title>
                                    <description><![CDATA[दिसम्बर 2027 तक निर्माण पूरा होने का किया जा रहा दावा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---second-tender-of-rs-385-crore-also-issued-for-greenfield-airport/article-120998"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/855842roer1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के शम्भूपुरा में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट निर्माण के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी आॅफ इंडिया  एएआई ने गुरुवार को 384.79 करोड़ का दूसरा टेंडर जारी किया है। वहीं एयरपोर्ट का निर्माण कार्य दिसम्बर 2027 में पूरा होने का दावा किया जा रहा है। बिल्डिंग साइड के इस दूसरे टेंडर के अंतर्गत नए टर्मिनल भवन, एटीसी टॉवर, फायर स्टेशन, कार पार्किंग और सिटी साइड डवलपमेंट जैसे प्रमुख कार्य शामिल हैं। टेंडर के लिए निविदाएं 15 सितंबर 2025 तक आमंत्रित की जाएंगी। निर्माण कार्यों के लिए 18 माह की समय-सीमा निर्धारित की गई है। </p>
<p><strong>अंतिम चरण में पहले टेंडर की प्रक्रिया </strong><br />इससे पूर्व फरवरी में एएआई ने एयरपोर्ट के पहले चरण के तहत एयर साइड निर्माण कार्यों  जैसे रनवे, टैक्सी वे, एप्रन आदि के लिए 467.67 करोड़ का टेंडर जारी किया गया था। जिसकी प्रक्रिया वर्तमान में अंतिम चरण में है। पहले और दूसरे चरण को मिलाकर अब तक कोटा एयरपोर्ट के लिए कुल 850 करोड़ से अधिक के कार्य टेंडर प्रक्रिया में आ चुके हैं।</p>
<p><strong>दिसंबर 2027 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य</strong><br />नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार कोटा के ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण दिसंबर 2027 तक पूर्ण कर यहां से नियमित विमान सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा है। लोकसभा कैम्प कार्यालय और उड्डयन मंत्रालय की ओर से लगातार प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग की जा रही है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए दूसरे चरण बिल्डिंग साइड का टेंडर अभी तक जारी नहीं होने का मामला दैनिक नवज्योति ने समय-समय पर प्रकाशित किया था। हाल ही में 1 जुलाई 2025 को पेज 2 पर‘ टेंडर का फेर, काम शुरु होने में हो रही देरी’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया था कि अभी तक तो पहले चरण की टेंडर प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई है। वहीं दूसरे चरण बिल्डिंग साइड का टेंडर भी अभी तक जारी नहीं हुआ है। जिससे एयरपोर्ट निर्माण का कार्य शुरु होने में देरी हो रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Jul 2025 15:06:02 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कोटा दक्षिण उप महापौर ने लगाया भेदभाव का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[जनता की शिकायतों का समाधान करने में परेशानी आ रही है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-deputy-mayor-alleges-discrimination/article-108178"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer88.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा दक्षिण के उप महापौर पवन मीणा ने सफाई व्यवस्था  में निगम प्रशासन द्वारा उनके साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सफाई समिति अध्यक्ष होने के बाद भी निगम प्रशासन द्वारा उन्हें न तो सफाई के लिए ट्रेक्टर ट्रॉली दी गई और न ही सफाई श्रमिक। उप महापौर ने कहा कि राजीव अग्रवाल कांग्रेस पार्षदों के समर्थन से महापौर चुने गए थे, लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान वे भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके बाद से ही कांग्रेस पार्षदों के वार्डों में विकास कार्यों में अड़चनें डाली जा रही हैं। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा स्वीकृत योजनाओं को भी रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>सफाई समिति अध्यक्ष को श्रमिक नहीं मिलने से जनता हो रही परेशान</strong><br />उप महापौर ने आरोप लगाया कि  दिसंबर 2024 में 1700 सफाई श्रमिकों के लिए एक टेंडर जारी किया गया था। उसमें से 20 श्रमिक मेयर ने अपने पास रख लिए। 20 श्रमिक नेता प्रतिपक्ष को दे दिए और वीआईपी मूमेंट के दौरान 90 श्रमिक रिजर्व रखे गए। अन्य श्रमिक भी अलग-अलग कार्यों के लिए आरक्षित कर दिए गए। लेकिन  सफाई समिति का अध्यक्ष होने के बावजूद  उपमहापौर को एक भी श्रमिक नहीं दिया गया।इससे उन्हें सफाई व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित करने में कठिनाई हो रही है। जनता की शिकायतों का समाधान करने में परेशानी आ रही है।</p>
<p><strong>ट्रैक्टर-ट्रॉली आंवटन में भी भेदभाव</strong><br />उप महापौर ने बताया कि  हाल ही में एक और टेंडर जारी किया गया। जिसमें प्रत्येक 9 सेक्टरों को 1-1 ट्रैक्टर-ट्रॉली आवंटित की गई। साथ ही महापौर और नेता प्रतिपक्ष को 1-1 ट्रैक्टर-ट्रॉली रिजर्व की गई। लेकिन उपमहापौर को एक भी ट्रैक्टर-ट्रॉली नहीं दी गई।</p>
<p><strong>सफाई समिति की बैठक तक नहीं हो रही</strong><br />उप महापौर ने कहा कि नगर निगम में सफाई समिति की बैठक नहीं होने देना भी  इस भेदभाव की एक बड़ी कड़ी है।  उन्होंने कई बार नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर सफाई समिति की आधिकारिक बैठक बुलाने का निवेदन किया, लेकिन  अब तक बैठक नहीं करवाई गई। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 5 वर्ष के कार्यकाल में मात्र 2 ही बैठकें हुई हैं।</p>
<p><strong>आयुक्त से बात करें</strong><br />इस बारे में महापौर राजीव अग्रवाल का कहना है कि सफाई श्रमिक देने का काम आयुक्त का है। वैसे किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा। फिर भी यदि उन्हें लगता है तो वे इस संबंध में आयुक्त से बात कर सकते है। जहां तक ट्रेक्टर ट्रॉली का मामला है वह सड़क से मिट्टी उठाने लिये दूसरी जगह काम में जिया जायेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Mar 2025 15:40:04 +0530</pubDate>
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