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                <title>tender - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>रनवे के काम में तेजी, लेकिन फेज दो में सिटी साइड का काम अब तक शुरू भी नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट : शिलान्यास के डेढ़ माह बाद भी शुरू नहीं हुआ फेज दो का निर्माण कार्य।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/runway-work-accelerates--but-phase-ii--city-side--construction-has-not-even-started-yet/article-152074"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(1)57.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का शिलान्यास हुए डेढ़ माह से अधिक हो गया लेकिन इसके फेज दो सिटी साइट का काम शुरू नहीं हो पाया है। निर्माण कम्पनी को 18 माह में यह काम पूरा करना है। दिसम्बर 2027 में इस एयरपोर्ट से उड़ान भरने का दावा किया जा रहा है।<br />शम्भूपुरा में 440.646 हैक्टेयर भूमि में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण किया जाना है। यह काम दो फेज में होना है। पहले फेज में रनवे साइट का और दूसरे में सिटी साइट यानि बिल्डिंग व पार्किंग का निर्माण किया जाना है। रनवे का काम नवम्बर 2025 में शुरू कर दिया गया है।<br />फेज एक में रनवे साइट पर बीच में आ रहे पावर ग्रिड के एक टावर को ही शिफ्ट किया जा सका है। एयरपोर्ट की भूमि से करीब 88 टावर शिफ्ट किए जाने हैं। इसकी प्रक्रिया चल रही है। जहां टावर शिफ्ट किए जाने हैं उस जगह की क्लीयरेंस मिल चुकी है। टावर शिफ्टिंग के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा देने का काम भी केडीए की ओर से किया जा रहा है। कई लोगों को तो मुआवजा राशि के चैक शिविर के माध्यम से दिए भी जा चुके हैं।</p>
<p><strong>फेज दो का टेंडर हुआ फाइनल</strong><br />एयरपोर्ट अथोरिटी आॅफ इंडिया की ओर से 1507 करोड़ की लागत से एयरपोर्ट का निर्माण किया जाना है। इसके लिए फेज एक का काम तो करीब 283 करोड़ की लागत से चल रहा है। वहीं फेज दो का टेंडर तो लगभग फाइनल हो गया है। करीब 393 करोड़ से इस काम को दिल्ली की आहलूवालिया कांट्रक्ट प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी को करना है।</p>
<p><strong>मौके पर स्थापित हुई लैब</strong><br />एयरपोर्ट निर्माण के लिए उपयोग में होने वाली सामग्री की जांच के लिए निर्माण स्थल पर ही कम्पनी ने प्रयोगशाला स्थापित की है।अब निर्माण सामग्री की जांच के लिए हाल ही में करीब 800 करोड़ रुपए में थर्ड पार्टी क्वालिटी एश्योरेंस किया गया है। यह काम आरटीयू को दिया गया है। यहां की टीम को इस काम को 20 माह में पूरा करना है।</p>
<p><strong>पानी की लाइन का काम भी शुरू नहीं</strong><br />एयरपोर्ट तक पानी पहुंचाने का काम जलदाय विभाग को करना है। इसके लिए सकतपुरा स्थित मिनी अकेलगढ़ से एयरपोर्ट तक करीब 21 कि.मी. लम्बी पाइप लाइन बिछानी है। इसके लिए एएआई और जलदाय विभाग के बीच करीब 17.46 करोड़ रुपए का एमओयू हुआ है। करीब 6 माह पहले 30 अक्टूबर 2025 को एमओयू होने के बाद भी अभी तक इसका काम भी शुरू नहीं हो सका है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का शिलान्यास हो गया है। इसके पहले फेज में रनवे का काम तेजी से किया जा रहा है। इसके सबग्रेड का काम चल रहा है। बरसात के बाद इसके ऊपरी हिस्से का काम शुरू किया जाएगा। वहीं फेज दो का टेंडर तो हो गया है। निर्माण कम्पनी ने मौके पर अपना आॅफिस व लैब समेत अन्य सिस्टम स्थापित करना शुरू कर दिया है। सॉयल टेस्टिंग का काम किया जा रहा है। फेज दो का काम भी शीघ्र ही शुरू हो जाएगा। प्रयास है कि समय पर इस काम को पूरा किया जा सके।<br /><strong>- सुनील प्रसाद, जीएम प्रोजेक्ट, कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 14:59:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - चंबल के बांधों का बदलेगा स्वरूप, 50 गेट पहली बार होंगे नए</title>
                                    <description><![CDATA[निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य को 36 माह में पूरा करने का लक्ष्य है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---the-chambal-dams-will-be-transformed--50-gates-to-be-replaced-for-the-first-time/article-142388"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(24).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चंबल नदी पर बने कोटा बैराज, राणप्रताप सागर और जवाहर सागर को पहली बार बड़े स्तर पर नवजीवन देने की तैयारी शुरू हो गई है। करीब 66 साल पुराने इन बांधों के 50 गेट बदले जाएंगे, जिस पर कुल 236 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 11 फरवरी को निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जल संसाधन विभाग के अनुसार अब तक इन बांधों के गेट कभी पूरी तरह बदले नहीं गए थे। समय के साथ गेट, स्लूज सिस्टम और मैकेनिज्म पुराने हो चुके हैं, जिससे संचालन में जोखिम बढ़ गया था। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने तीनों बांधों के व्यापक सुधार और आधुनिकीकरण का निर्णय लिया है।</p>
<p><strong>कोटा बैराज के बदलेंगे 19 गेट</strong><br />परियोजना के तहत पहली बार कोटा बैराज के 19 गेट बदले जाएंगे। इसके अलावा राणप्रताप सागर बांध के 7 बड़े और 4 छोटे गेट व जवाहर सागर बांध के 10 गेट को भी पूरी तरह बदला जाएगा। इसके साथ ही स्लूज गेट, कंट्रोल सिस्टम और अन्य तकनीकी हिस्सों को भी आधुनिक बनाया जाएगा।</p>
<p>जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना की अनुमानित लागत 236 करोड़ रुपए है। निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य को 36 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निविदा दस्तावेज 11 फरवरी से उपलब्ध होंगे, जबकि तकनीकी और वित्तीय निविदाएं फरवरी-मार्च में खोली जाएंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि चंबल के ये तीनों बांध राजस्थान और मध्यप्रदेश के सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए रीढ़ की हड्डी हैं। रणप्रताप सागर और जवाहर सागर से बिजली उत्पादन होता है, वहीं कोटा बैराज से लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई और शहरों को पेयजल मिलता है।</p>
<p><strong>66 साल पुराने बांध आधुनिक तकनीक से होंगे लैस</strong><br />तीनों बांधों का निर्माण 1960 के दशक में हुआ था। उस समय की तकनीक आज के मानकों के अनुसार पुरानी हो चुकी है। विभागीय रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गेट और मशीनरी की औसत उम्र 40-50 साल होती है, जबकि ये सिस्टम उससे कहीं अधिक समय से उपयोग में हैं। अब नई तकनीक से गेट बदले जाने से संचालन अधिक सुरक्षित, सटीक और तेज होगा। कुल मिलाकर, 236 करोड़ की यह परियोजना चंबल नदी के तीनों बांधों को नया जीवन देगी, जिससे कोटा सहित पूरे हाड़ौती और प्रदेश के जल भविष्य को मजबूती मिलेगी। जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह पहली बार है जब चंबल के तीनों प्रमुख बांधों के गेट एक साथ बदले जाएंगे। इससे बांधों की सुरक्षा बढ़ेगी और आने वाले दशकों तक जल प्रबंधन सुचारू रहेगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />चंबल नदी पर बने तीन प्रमुख बांधों के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 30 नवंबर2025 को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि राणा प्रताप सागर (आरपीएस), जवाहर सागर और कोटा बैराज के नवीनीकरण का बहुचर्चित प्रोजेक्ट पिछले 6 वर्षों से फाइलों और निरीक्षणों में अटका हुआ है। इस दौरान प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 100 करोड़ से बढ़कर 236 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इसके बाद भी अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। बजट बढ़ने के कारण अब टैंडर की अनुमति भारत नहीं बल्कि अमेरिका स्थित विश्व बैंक मुख्यालय से मिलेगी। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि 200 करोड़ से ऊपर की अनुमति विश्व बैंक के मुख्यालय से आती है। तीनों बांधों के रखरखाव की राशि विश्व बैंक से लोन के रूप में ली जा रही है। विश्व बैंक से अनुमति मिलने के बाद ही टैंडर प्रक्रिया शुरू हो सकती है।</p>
<p>चंबल नदी पर बने कोटा बैराज, राणप्रताप सागर और जवाहर सागर को नवजीवन देने की तैयारी शुरू हो गई है। करीब 66 साल पुराने इन बांधों के 50 गेट बदले जाएंगे, जिस पर कुल 236 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 11 फरवरी को निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी।<br /><strong>- आरपी गोयल, सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:41:02 +0530</pubDate>
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                <title>फ्लाई ओवर के नीचे गेम जोन से गायब होने लगी रैलिंग व जाली</title>
                                    <description><![CDATA[नए कोटा क्षेत्र में विशेषकर कोचिंग एरिया में  खेल की जगह उपलब्ध करावने के लिए फ्लाई ओवर के नीचे गेम जोन बनाया है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/railings-and-nets-are-disappearing-from-the-game-zone-under-the-flyover/article-133446"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/1200-x-600-px-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में चोरों के हौंसले इतने अधिक बुलंद हो रहे हैं कि वे न तो घरों को छोड़ रहे हैं और न ही सार्वजनिक स्थानों को। चोरों ने झालावाड़ रोड जैसे व्यस्त मार्ग पर फ्लाई ओवर के नीचे बने गेम जोन तक को नहीं छोड़ा। यहां से भी रैलिंग व जालियां गायब होने लगी है। नए कोटा क्षेत्र विशेष रूप से कोचिंग एरिया में युवाओं व विद्यार्थियों को खेल की जगह उपलब्ध करावने के उद्देश्य से कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा झालावाड़ रोड पर सिटी मॉल के सामने फ्लाई ओवर के नीचे गेम जोन बनाया है। इसके लिए यहां रैलिंग लगाकर उसे जालियों से कवर किया है। जिससे यहां खेल की प्रेक्टिस करने वालों को सुरक्षा भी मुहैया हो सके।</p>
<p><strong>4 स्पान, दो खेल</strong><br />सिटी मॉल के सामने बने फ्लाई ओवर के नीचे चार स्पान को गेम जोन के लिए चिन्हित किया गया है। जिनमें दो गेम का अभ्यास कराया जाएगा। तीन स्पान में स्केटिंग व एक में बास्केटबॉल का अभ्यास कराया जाएगा। इसके लिए केडीए की ओर से बास्केटबॉल की नेट भी लगाई गई है।</p>
<p><strong>देखरेख के अभाव में दुर्दशा</strong><br />केडीए ने गेम जोन बनाने के लिए हजारों रुपए खर्च तो कर दिए। लेकिन वहां उसकी सुरक्षा के लिए न तो अभी तक गार्ड लगाए हैं और न ही अभी तक इसके संचालन का टेंडर किया गया है। जिसका फायदा चोर उठा रहे हैं। पिछले कई दिन से धीरे-धीरे चोर सिटी मॉल के सामने वाले हिस्से से रैलिंग और कई जगह से जालियों के छोटे-छोटे हिस्से चोरी कर ले जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि कुछ समय और इसकी देखरेख नहीं की गई तो इसकी अधिक दुर्दशा हो जाएगी।</p>
<p><strong>केडीए ने दो बार किया टेंडर</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से गेम जोन के संचालन के लिए दो बार टेंडर किए जा चुके है। पहली बार में तो कोई भी नहीं आया। अब दोबारा टेंडर किया है। उसकी प्रक्रिया चल रही है। केडीए द्वारा गेम जोन का संचालन करने वाले से एक साल में ९६ हजार रुपए यानि करीब ८ हजार रुपए महीना किराए के रूप में लिया जाएगा। इसके बाद यहां जितने लोग प्रेक्टिस करने आएंगे उनसे मासिक शुल्क संबंधित संचालन कर्ता द्वारा वसूल किया जाएगा।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />झालावाड़ रोड फ्लाई ओवर के नीचे गेम जोन के लिए केडीए ने सैटअप तैयार किया है। अब इसके संचालन की प्रक्रिया की जा रही है। पहली बार टेंडर में कोई नहीं आया। अब दूसरी बार टेंडर किया है। उसके शीघ्र ही फाइनल होने पर इसका संचालन किया जाएगा। साथ ही जब तक इसका संचालन करने वाला नहीं मिलता है तब तक यहां गार्ड की व्यवस्था की जाएगी। जिससे इसे किसी तरह का कोई नलकसान नहीं हो।<br /><strong>- मुकेश चौधरी, सचिव,कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 15:20:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कापरेन में बदलेगा ड्रेन का स्वरूप, 19 करोड़ की लागत से होगा पक्का निर्माण, मिलेगी जलभराव से राहत</title>
                                    <description><![CDATA[पीडब्ल्यूडी ने पुनर्निर्माण का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/drain-in-kapren-to-be-revamped--permanent-construction-to-cost-rs-19-crore--providing-relief-from-waterlogging/article-131981"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(2)8.png" alt=""></a><br /><p>कापरेन। नगरवासियों के लिए राहतभरी खबर है। कस्बे के बीच से गुजरने वाली मुख्य ड्रेन के पक्के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। राज्य सरकार की बजट घोषणा के तहत इस कार्य के लिए 19 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। नगरपालिका को कार्यकारी एजेंसी बनाया गया है। पालिका प्रशासन ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो 12 नवंबर को खोले जाएंगे। कार्य की समयावधि 18 माह निर्धारित की गई है। पालिका ईओ प्रवीण कुमार शर्मा ने बताया कि शंकर कॉलोनी से लेकर जोस्या खेड़ा की पुलिया तक ड्रेन का पक्का निर्माण किया जाएगा। ड्रेन की खुदाई व गहरीकरण से वर्षा ऋतु में जलभराव की समस्या समाप्त होगी। बरसात में खेतों व छोटे-बड़े नालों का पानी इसी ड्रेन से होकर निकलता है, जिससे तेजाजी मेला ग्राउंड, अस्पताल और शक्ति चौराहे पर जलभराव हो जाता था। अब नगरवासियों को इस परेशानी से राहत मिलेगी और गंदगी की स्थिति में भी सुधार होगा।</p>
<p><strong>सौंदर्यीकरण के साथ बनेगा फुटपाथ</strong><br />निर्माण कार्य के दौरान ड्रेन के दोनों ओर सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी। जहां पर्याप्त स्थान रहेगा, वहां फुटपाथ बनाया जाएगा। सौंदर्यीकरण के तहत पौधरोपण और लाइटिंग की भी व्यवस्था होगी। इससे कस्बे का स्वरूप और आकर्षक बनेगा।</p>
<p><strong>शक्ति चौराहे की पुलिया का पुनर्निर्माण प्रस्तावित</strong><br />हाल ही में आई बाढ़ में शक्ति चौराहे की पुलिया बह जाने से आवागमन बाधित हो गया था। इस पर पीडब्ल्यूडी ने पुनर्निर्माण का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।</p>
<p>मुख्य ड्रेन के पक्के निर्माण की बजट स्वीकृति मिल गई है, तकनीकी प्रक्रिया पूरी होते ही ड्रेन निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। जहां जगह रहेगी वहां फुटपाथ भी प्रस्तावित है। साथ ही सौंदर्यीकरण में पौधरोपण व लाइटिंग भी शामिल है।शक्ति चौराहे की टूटी पुलिया को लेकर भी डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी ने भेज दिया है। जैसे ही बजट स्वीकृत होगा, निर्माण कराया जाएगा। फिलहाल मुख्य ड्रेन का काम प्राथमिकता में है।<br /><strong>- प्रवीण कुमार शर्मा,ईओ नगरपालिका कापरेन।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Nov 2025 16:51:21 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जल संरचनाओं की मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू, 1.91 लाख की होगी मरम्मत</title>
                                    <description><![CDATA[जल संसाधन विभाग ने बांधों, नहरों और जल संरचनाओं की मरम्मत कार्यों के लिए निविदा आमंत्रित की है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/tender-process-for-repairing-water-structures-will-start-191-lakh/article-121304"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/jal-sansadhan-department.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जल संसाधन विभाग ने बांधों, नहरों और जल संरचनाओं की मरम्मत कार्यों के लिए निविदा आमंत्रित की है। कार्यकारी अभियंता कार्यालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह कार्य तहसील लालसोट क्षेत्र में किया जाएगा। </p>
<p>कुल लागत 1.91 लाख रुपए निर्धारित की गई है, जिसमें 3820 रुपए निविदा शुल्क, 955 रुपये बीमा शुल्क और 500 रुपए निविदा पत्र शुल्क शामिल हैं। इस निविदा का उद्देश्य जल संरक्षण ढांचे को सुचारु रूप से क्रियाशील बनाए रखना है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निविदा की शर्तें एवं तकनीकी अर्हताएं वेबसाइट पर उपलब्ध हैं और नियमों के अनुसार पारदर्शी प्रक्रिया के तहत चयन किया जाएगा। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति और सिंचाई व्यवस्था को सशक्त बनाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Jul 2025 15:50:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए 385 करोड़ का दूसरा टेंडर भी हुआ जारी</title>
                                    <description><![CDATA[दिसम्बर 2027 तक निर्माण पूरा होने का किया जा रहा दावा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---second-tender-of-rs-385-crore-also-issued-for-greenfield-airport/article-120998"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/855842roer1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के शम्भूपुरा में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट निर्माण के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी आॅफ इंडिया  एएआई ने गुरुवार को 384.79 करोड़ का दूसरा टेंडर जारी किया है। वहीं एयरपोर्ट का निर्माण कार्य दिसम्बर 2027 में पूरा होने का दावा किया जा रहा है। बिल्डिंग साइड के इस दूसरे टेंडर के अंतर्गत नए टर्मिनल भवन, एटीसी टॉवर, फायर स्टेशन, कार पार्किंग और सिटी साइड डवलपमेंट जैसे प्रमुख कार्य शामिल हैं। टेंडर के लिए निविदाएं 15 सितंबर 2025 तक आमंत्रित की जाएंगी। निर्माण कार्यों के लिए 18 माह की समय-सीमा निर्धारित की गई है। </p>
<p><strong>अंतिम चरण में पहले टेंडर की प्रक्रिया </strong><br />इससे पूर्व फरवरी में एएआई ने एयरपोर्ट के पहले चरण के तहत एयर साइड निर्माण कार्यों  जैसे रनवे, टैक्सी वे, एप्रन आदि के लिए 467.67 करोड़ का टेंडर जारी किया गया था। जिसकी प्रक्रिया वर्तमान में अंतिम चरण में है। पहले और दूसरे चरण को मिलाकर अब तक कोटा एयरपोर्ट के लिए कुल 850 करोड़ से अधिक के कार्य टेंडर प्रक्रिया में आ चुके हैं।</p>
<p><strong>दिसंबर 2027 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य</strong><br />नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार कोटा के ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण दिसंबर 2027 तक पूर्ण कर यहां से नियमित विमान सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा है। लोकसभा कैम्प कार्यालय और उड्डयन मंत्रालय की ओर से लगातार प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग की जा रही है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए दूसरे चरण बिल्डिंग साइड का टेंडर अभी तक जारी नहीं होने का मामला दैनिक नवज्योति ने समय-समय पर प्रकाशित किया था। हाल ही में 1 जुलाई 2025 को पेज 2 पर‘ टेंडर का फेर, काम शुरु होने में हो रही देरी’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया था कि अभी तक तो पहले चरण की टेंडर प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई है। वहीं दूसरे चरण बिल्डिंग साइड का टेंडर भी अभी तक जारी नहीं हुआ है। जिससे एयरपोर्ट निर्माण का कार्य शुरु होने में देरी हो रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Jul 2025 15:06:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा दक्षिण उप महापौर ने लगाया भेदभाव का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[जनता की शिकायतों का समाधान करने में परेशानी आ रही है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-deputy-mayor-alleges-discrimination/article-108178"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer88.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा दक्षिण के उप महापौर पवन मीणा ने सफाई व्यवस्था  में निगम प्रशासन द्वारा उनके साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सफाई समिति अध्यक्ष होने के बाद भी निगम प्रशासन द्वारा उन्हें न तो सफाई के लिए ट्रेक्टर ट्रॉली दी गई और न ही सफाई श्रमिक। उप महापौर ने कहा कि राजीव अग्रवाल कांग्रेस पार्षदों के समर्थन से महापौर चुने गए थे, लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान वे भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके बाद से ही कांग्रेस पार्षदों के वार्डों में विकास कार्यों में अड़चनें डाली जा रही हैं। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा स्वीकृत योजनाओं को भी रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>सफाई समिति अध्यक्ष को श्रमिक नहीं मिलने से जनता हो रही परेशान</strong><br />उप महापौर ने आरोप लगाया कि  दिसंबर 2024 में 1700 सफाई श्रमिकों के लिए एक टेंडर जारी किया गया था। उसमें से 20 श्रमिक मेयर ने अपने पास रख लिए। 20 श्रमिक नेता प्रतिपक्ष को दे दिए और वीआईपी मूमेंट के दौरान 90 श्रमिक रिजर्व रखे गए। अन्य श्रमिक भी अलग-अलग कार्यों के लिए आरक्षित कर दिए गए। लेकिन  सफाई समिति का अध्यक्ष होने के बावजूद  उपमहापौर को एक भी श्रमिक नहीं दिया गया।इससे उन्हें सफाई व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित करने में कठिनाई हो रही है। जनता की शिकायतों का समाधान करने में परेशानी आ रही है।</p>
<p><strong>ट्रैक्टर-ट्रॉली आंवटन में भी भेदभाव</strong><br />उप महापौर ने बताया कि  हाल ही में एक और टेंडर जारी किया गया। जिसमें प्रत्येक 9 सेक्टरों को 1-1 ट्रैक्टर-ट्रॉली आवंटित की गई। साथ ही महापौर और नेता प्रतिपक्ष को 1-1 ट्रैक्टर-ट्रॉली रिजर्व की गई। लेकिन उपमहापौर को एक भी ट्रैक्टर-ट्रॉली नहीं दी गई।</p>
<p><strong>सफाई समिति की बैठक तक नहीं हो रही</strong><br />उप महापौर ने कहा कि नगर निगम में सफाई समिति की बैठक नहीं होने देना भी  इस भेदभाव की एक बड़ी कड़ी है।  उन्होंने कई बार नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर सफाई समिति की आधिकारिक बैठक बुलाने का निवेदन किया, लेकिन  अब तक बैठक नहीं करवाई गई। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 5 वर्ष के कार्यकाल में मात्र 2 ही बैठकें हुई हैं।</p>
<p><strong>आयुक्त से बात करें</strong><br />इस बारे में महापौर राजीव अग्रवाल का कहना है कि सफाई श्रमिक देने का काम आयुक्त का है। वैसे किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा। फिर भी यदि उन्हें लगता है तो वे इस संबंध में आयुक्त से बात कर सकते है। जहां तक ट्रेक्टर ट्रॉली का मामला है वह सड़क से मिट्टी उठाने लिये दूसरी जगह काम में जिया जायेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Mar 2025 15:40:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का -  ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के पहले फेज का एएआई ने जारी किया 467.67 करोड़ का टेंडर</title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्रीय उड्डयन मंत्री नायडू ने लोकसभा अध्यक्ष बिरला को दी जानकारी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---aai-issued-a-tender-of-rs-467-67-crore-for-the-first-phase-of-greenfield-airport/article-103441"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(2)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के शम्भूपुरा में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट निर्माण का काम एक कदम और आगे बढ़ गया है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने गुरुवार को एयरपोर्ट के एयर साइड निर्माण का 467.67 करोड़ का टेंडर जारी कर दिया है। केंद्रीय उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने गुरुवार को दिन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के संसद भवन स्थित कार्यालय में उनसे मुलाकात की। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष बिरला को एयरपोर्ट को लेकर चल रही प्रक्रियाओं की जानकारी दी।  इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने उन्हें शीघ्र टेंडर जारी कराने को कहा। जिसके बाद शाम होते-होते एएआई ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी। शाम तक फेज एक में एयर साइड निर्माण का 467.67 करोड़ का टेंडर जारी कर दिया गया। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष के ओएसडी राजीव दत्ता व एयरपोर्ट अथॉरिटी के शरद कुमार भी मौजूद रहे।  </p>
<p><strong>फेज दो का टेंडर भी जल्दी होगा :</strong></p>
<p>निर्माण के लिए फेज दो का भी टेंडर किया जाना है। कोटा हवाई अड्डे के निदेशक  तुलसीराम मीणा ने बताया कि फेज एक का टेंडर होने के बाद अब फेज दो सिटी साइड का टेंडर होना है। इसके भी 15 फरवरी तक होने की संभावना है। जिससे एक साथ दोनों निर्माण कार्य शुरु हो सकेंगे। यह करीब 600 करोड़ का टेंडर होगा। </p>
<p><strong>रनवे समेत अन्य महत्वपूर्ण कामों का होगा निर्माण : </strong></p>
<p>एएआई द्वारा जारी टेंडर के अनुसार पहले फेज में करीब 467.67 करोड़ की लागत से एयरपोर्ट का निर्माण कार्य होगा। इसमें  रनवे सहित एयर साइड से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे। टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 11 अप्रेल है। जबकि   17 अप्रेल को टेंडर घोषित होंगे। इसके अलावा अन्य एजेंसियों द्वारा भी सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर काम शुरू कर दिया है।</p>
<p><strong>जल्द शुरू होगा निर्माण कार्य : </strong></p>
<p>उड्डयन मंत्री नायडू ने  लोकसभा अध्यक्ष बिरला को जानकारी दी कि अगले 3 महीने में टेंडर से संबंधित सभी प्रक्रियाएं पूरी कर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।  दिसंबर 2027 तक एयरपोर्ट निर्माण पूरा कर लिया जाएगा और कोटा से विमान सेवा शुरू हो जाएगी। इसका लाभ कोटा-बूंदी क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ पूरे हाड़ौती और पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों को मिलेगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने  उठाया था मुद्दा : </strong></p>
<p>गौरतलब है कि एयरपोर्ट निर्माण के टेंडर शीघ्र अपलोड होने का मामला दैनिक नव’योति ने प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में4 फरवरी को पेज 3 पर ‘एयरपोर्ट निर्माण के दो चरणों में होने वाले टेंडर शीघ्र होंगे अपलोड शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें  पहले एयर साइड और उसके बाद फेज दो में सिटी साइड का टेंडर अपलोड करने की जानकारी दी थी।  जिसमें बताया था कि  एयरपोर्ट अथोरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारी दिन रात टेंडर डॉक्यूमेंट को अंतिम रूप देने में जुटे हुए थे। इस मामले में  लोकसभा अध्यक्ष ने उड्डयन मंत्री को टेंडर शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए। जिसके बाद एएआई ने गुरुवार को टेंडर जारी कर दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Feb 2025 15:47:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समय पर निर्माण कार्य शुरु करने के लिए इसी माह फाइनल करनी होगी टेंडर प्रक्रिया </title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का दो चरणों में होगा निर्माण कार्य।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-the-construction-is-to-start-in-may--then-the-tender-process-will-have-to-be-finalized-this-month/article-100280"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(3)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शम्भूपुरा में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण कार्य मई में शुरु होना है लेकिन उसके लिए अभी तक तो टेंडर ही फाइनल नहीं हुए है। दो चरणों में होने वाले निर्माण के लिए इसी माह टेंडर प्रक्रिया को पूरा करना है, तभी समय के अनुसार समय पर निर्माण कार्य शुरु हो सकेगा। शम्भूपुरा में  440.646 हैक्टेयर  भूमि पर एयरपोर्ट का निर्माण कार्य किया जाना है। जिसमें से 406 हैक्टेयर भूमि वन विभाग के अधिकार क्षेत्र की थी। जिसका कुछ समय पहले डायवर्जन हो चुका है।  वहीं 33 हैक्टेयर भूमि कोटा विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र की है। ऐसे में डायवर्जन के बाद अब कुल भूमि 440.646 हैक्टेयर एयरपोर्ट अथोरिटी आॅफ  इंडिया के नाम दर्ज कर दी गई है। एएआई के नाम भूमि दर्ज होने केसाथ ही इसकी डीपीआर को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। हालांकि इसका प्रारूप तैयार होने के बाद दिए गए सुझावों को शामिल करते हुए डीपीआर को सैद्धांतिक स्वीकृति भी दीजा चुकी है। शीघ्र ही डीपीआर को अंतिम स्वीकृति मिलने की संभावना है। वहीं एयरपोर्ट की भूमि पर दो चरणों में निर्माण कार्य किया जाना है। एक चरण में रनवे और दूसरे में बिल्डिंग एरिया का निर्माण किया जाना है। करीब 1507 करोड़ रुपए की डीपीआर से रनवे और बिल्ड़िंग का निर्माण किया जाना है। जिसके लिए पूर्व घोषित तिथि के अनुसार दिसम्बर में ही टेंडर प्रक्रिया पूरी करनी थी। लेकिन उसकी तिथि बार-बार बढ़ाई जा रही है। अब 10 जनवरी  के बाद टेंडर को फाइनल कर अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार इसी माह टेंडर फाइनल होंगे तभी टाइम लाइन के अनुसार मई में इसका निर्माण कार्य शुरु हो सकेगा। क्योंकि जनवरी में टेंडर फाइनल होने के बाद करीब डेढ़ माह तक टेंडर आमंत्रित करने का समय रहेगा। उसके बाद 15 दिन वित्त विभाग से स्वीकृति में लगेंगे। वहीं करीब एक माह का समय संवेदक फर्म को काम शुरु करने का दिया जाएगा। यह तभी संभव होगा जब जनवरी में टेंडर फाइनल होंगे। </p>
<p><strong>केन्द्र व राज्य के अधिकारियों के साथ किया निरीक्षण</strong><br />एयरपोर्ट निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया को फाइनल करने से पहले केन्द्र व रा’य सरकार के अधिकारियों की टीम ने गत दिनों कोटा में प्रस्तावित एयरपोर्ट भूमि का निरीक्षण किया था। इसमें एएआई के डिप्टी जीएम से लेकर कंसलटेंट, आर्किटेक्ट व एएआई के दिल्ली व रा’य के अधिकारियों की 5सदस्यीय टीम कोटा आई थी। टीम ने सिचाई विभाग, केडीए, वन विभाग, एएआई और जिला प्रशासन समेत अन्य सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों से इस संबंध में चर्चा की। दो दिन तक चली चर्चा व निरीक्षण के दौरान सभी विभागों में आपसी समंवय बनाकर  काम करने पर जोर दिया गया। दो दिन बाद टीम तो लौट गई। अब निर्माण के टेंडरों को अंतिम रूप दिया जाएगा।  </p>
<p><strong>काम पूरा होने में लगेगा ढाई साल का समय</strong><br />लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा दिल्ली में एयरपोर्ट अथोरिटी आॅफ इंडिया के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। जिसमें तय किया गया था कि एयरपोर्ट का काम मई 2025 में शुरु कर दिया जाएगा। जिसके पूरा होने में करीब ढाई साल का समय लगेगा। जिसके दिसम्बर 2027 तक पूरा होने की संभावना है। हालांकि निर्माण कार्य शुरु होने से पहले हाइवे से एयरपोर्ट भूमि तक एप्रोच रोड बनाने व बाहरी ड्रेनेज सिस्टम को बनाने समेत कई आवश्यक काम भी किए जाने है।  कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से सम्पर्क सड़क बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है। करीब 600 मीटर की यह सड़क बननी है। </p>
<p><strong>32 सौ मीटर लम्बा व 45 मीटर चौड़ा होगा रनवे</strong><br />एएसआई अधिकारियों के अनुसार एयरपोर्ट का रनवे 32 सौ मीटर लम्बा और 45 मीटर चौड़ा बनाया जाएगा। जिससे एयरपोर्ट पर एक समय में7 विमानों की पार्किंग की जा सकेगी। वहीं बिल्डिंग निर्माण में सभी तरह की सुविधाओंका निर्माण किया जाना है। वहीं इसके साथ ही चार दीवारी भी बनाई जाएगी। उसका भी टेंडर किया जाना है। </p>
<p><strong>आज बैठक में होगी टेंडर प्रक्रिया पर चर्चा</strong><br />एएआई की ओर से ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट की दिन प्रति दिन की रिपोर्टिनग कीजा रही है। वहीं हर सप्ताह समीक्षा बैठक की जा रही है। जिसमें दिल्ली से लेकर रा’य सरकार और कोटा के अधिकारी भी वीसी के माध्यम से शामिल होते है। पहले यह बैठक शुक्रवार को होती थी। जिसे कुछ समय के लिए सोमवार को कर दिया था। लेकिन  वापस इसे शुक्रवार को कर दिया गया। शुक्रवार को होने वाली बैठक में रनवे व बिल्ड़िंग के होने वाले टेंडर प्रक्रिया पर चर्चा और उसकी तिथि फाइनल की जा सकती है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />एयरपोर्ट निर्माण के लिए दो चरणों में टेंडर होने है। एक रनवे का और दूसरा बिल्डिंग का। निर्माण के टेंडर फाइनल हुए या नहीं इसकी जानकारी नहीं है। शुक्रवार को वीसी से होने वाली समीक्षा बैठक में इसकी जानकारी मिल सकती है। वैसे अभी तक जो प्रक्रिया चल रही है वह टाइम लाइन केअनुसार है। इससे संभावना है कि एयरपोर्ट का निर्माण कार्य भी टाइमलाइन के अनुसार समय पर ही हो सकेगा। <br /><strong>- तुलसीराम मीणा, निदेशक कोटा हवाई अड्डा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jan 2025 15:23:42 +0530</pubDate>
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                <title>तीन बार टेंडर विफल, अब मरम्मत का बढ़ेगा खर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्रीय जल आयोग ने नया एस्टीमेट बनाने की दी मंजूरी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tender-failed-thrice--now-the-cost-of-repair-will-increase/article-88231"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/pze-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चम्बल नदी पर बने कोटा बैराज, राणाप्रताप सागर और जवाहर सागर बांध को काफी समय से मरम्मत की दरकार है। इनके जीर्णोद्धार के लिए केन्द्रीय जल आयोग ने 183 करोड़ का बजट स्वीकृत कर रखा है। इस सम्बंध में अब तक तीन बार टेंडर हो चुके हैं, लेकिन ठेकेदार कंपनियों के नहीं आने से टेंडर विफल हो गए। अब तीनों बांधों के जीर्णोद्धार कार्य के टेंडर फिर से एस्टीमेट बनाकर होंगे। जिससे जीर्णोद्धार कार्य की लागत बढ़ जाएगी। गत दिनों जलसंसाधन विभाग कोटा के अधिकारियों की दिल्ली स्थित केन्द्रीय जल आयोग में बैठक हुई थी। इसके बाद आयोग ने बांधों के जीर्णोद्धार के लिए नया एस्टीमेट बनाने की अनुमति दे दी है। विभाग ने नए सिरे से एस्टीमेट बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।</p>
<p><strong>नई बीएसआर दर से होंगे टेंडर</strong><br />जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार चंबल के तीनों बांध कोटा बैराज, जवाहर सागर और राणाप्रताप सागर बांध के जीर्णोद्धार कार्य के लिए पिछले साल निविदा प्रक्रिया शुरू की गई थी।12 सितम्बर 2023 को तकनीकी स्वीकृति जारी कर तीनों बांधों के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थी, लेकिन किसी भी कंपनी और ठेकेदार ने निविदा नहीं भरी। दूसरी बार 10 अक्टूबर 2023 और तीसरी बार 20 जनवरी 2024 को निविदा आमंत्रित की गई थी। इस बार भी विभाग को निराशा हाथ लगी। जब 3 बार टेंडर लेने कोई नहीं आया तो ठेकेदार कंपनियों से बात की गई। कंपनियों ने बताया कि बांधों के एस्टीमेट पुरानी दरों पर बनाए गए थे। इस दर में कंपनियों को घाटा होगा। इस कारण कोई भी कंपनी टेंडर में भाग नहीं ले रही थी। इसके बाद विभाग के अधिकारियों की केन्द्रीय जल आयोग में बैठक हुई। आयोग ने नई बीएसआर दर से जीर्णोद्धार कार्य का एस्टीमेट बनाने की अनुमति दे दी है।</p>
<p><strong>बांधों को मरम्मत की सख्त दरकार</strong><br />चम्बल नदी पर तीनों ही बांध 1960 के दशक बने हुए हैं। बांध की मशीनों और हाइड्रों उपकरणों की उम्र 40 साल होती है। जबकि बांध के सिविल वर्क की उम्र 100 साल मानी जाती है। अब लगभग 65 वर्ष गुजरने वाले हैं। ऐसे में यदि इनका समय पर जीर्णोद्धार नहीं हुआ तो बांध की लाइफ और कम हो जाएगी। स्थिति यह है कि राणाप्रताप सागर बांध के स्लूज गेट 37 सालों से नहीं खुले हैं। गेटों से रिसाव हो रहा है। जवाहर सागर बांध का एक गेट अटका हुआ है। कोटा बैराज के गेटों की स्थिति भी ठीक नहीं है। इसके बाद जीर्णोद्धार का कार्य बार-बार टल रहा है। विश्व बैंक ने कोटा बैराज के लिए 45.86 करोड़, जवाहर सागर के लिए 72.02 करोड़ और राणाप्रताप सागर बांध के लिए 65.72 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है।</p>
<p><strong>चंबल के बांधों पर निर्भर ईआरसीपी योजना</strong><br />राजस्थान का अस्तित्व चंबल के तीनों बांधों पर टिका हुआ है। परमाणु बिजलीघर, कोटा थर्मल संयंत्र, भारी पानी संयंत्र, अंता गैस बिजलीघर, हाड़ौती की नहरें, रामगंजमंडी, भीलवाड़ा, चित्तौडगढ़ और बूंदी की पेयजल योजना चंबल नदी के बांधों पर निर्भर है। राज्य में ईआरसीपी योजना को लेकर जोर-शोर से तैयारी की जा रही है। यह योजना भी इन्ही बांधों पर निर्भर है। ऐसे में काफी समय से चंबल के तीनों बांधों के जीर्णोद्धार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक इस काम में सफलता नहीं मिल पाई है। अब नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके लिए दरें बढ़ाई जाएगी ताकि कंपनियां टेंडर में शामिल हो सके।</p>
<p>दिल्ली में गत दिनों केन्द्रीय जल आयोग के अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। वहां से तीन बांधों के नए एस्टीमेट बनाने की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद अब जीर्णोद्धार के लिए नया एस्टीमेट बनाया जा रहा है। जल्द कार्य के लिए निविदा लगाई जाएगी। <br /><strong>- भारतरत्न गौड़, अधिशासी अभियंता, जल संसाधन विभाग, कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Aug 2024 15:36:39 +0530</pubDate>
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                <title>रोड लाइट के नहीं हुए टेंडर, अंधेरे में शहर </title>
                                    <description><![CDATA[पार्षदों का कहना है कि निगम अधिकािरयों को कई बार रोड लाइट का टेंडर करने के लिए कहा जा चुका है लेकिन अधिकारी सुनते ही नहीं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/road-lights-not-tendered--city-in-darkness/article-87550"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में बरसात के समय जहां सड़कों पर जगह-जगह पानी भरा हुआ है।  सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। बीच राह मवेशियों के झुंड बैठे  हुए हैं। जिनके कारण जहां आए दिन हादसों का खतरा बना हुआ है। वहीं दूसरी तरफ हालत यह है कि कोटा दक्षिण निगम में रोड लाइट बंद होने से अंधेरा छाया हुआ है। जिससे आमजन की समस्या अधिक बढ़ गई है। नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र के अधिकतर वार्डों में यही हालात है। नगर निगम कोटा दक्षिण में पिछले काफी समय से नई रोड लाइटें लगाने का टेंडर तक नहीं हुआ है। जिससे पार्षदों के कहने के बाद भी अधिकारी वार्डों में रोड लाइट नहीं लगा पा रहे हैं। ऐसे में आमजन को बरसात के समय में अंधेरे का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम में पूर्व में नई रोड लाइट लगाने का ठेका जिस फर्म के साथ था। वह पूरा हो गया है। उसके बाद विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण अधिकारी नया टेंडर नहीं कर सके। हालांकि अब तो लोकसभा चुनाव की आचार संहिता समाप्त हुए भी दो माह से अधिक का समय हो गया है। अभी तक भी रोड लाइट का टेंडर नहीं हुआ है। जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>निगम क्षेत्र में अधिक समस्या</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की सार्वजनिक रोशनी व्यवस्था समिति के अध्यक्ष पार्षद अनुराग गौतम ने बताया कि नगर निगम कोटा दक्षिण में नई रोड लाइट लगाने का टेंडर काफी समय से नहीं हुआ है। जिससे पार्षदों के डिमांड करने पर भी निगम की ओर से रोड लाइट नहीं लगाई जा रही है। जबकि वार्ड के लोग उनसे बार-बार शिकायत कर रहे हैं। वे निगम अधिकारियों को अवगत करवा देते हैं लेकिन निगम अधिकारी मस्त हो रहे हैं। टेंडर के प्रक्रियाधीन होना बताकर हर बार टाल देते हैं। गौतम ने बताया कि सबसे अधिक समस्या निगम क्षेत्र की उन कॉलोनियों में है जो कृषि भूमि पर बनी हुई हैं। वहां रोड लाइटें लगानी हैं लेकिन लाइट ही नहीं मिलने से नहीं लगा पा रहे हैं। जिससे बरसात के अलावा रात को अंधेरे में चोरी होने व महिलाओं के साथ छेड़छाड़ समेत अन्य घटनाएं होने से लोगों  में डर का माहौल बना हुआ है। कोटा दक्षिण के पार्षदों का कहना है कि निगम अधिकािरयों को कई बार रोड लाइट का टेंडर करने के लिए कहा जा चुका है लेकिन अधिकारी सुनते ही नहीं। जबकि कोटा उत्तर निगम में रोड लाइटें भी लग रही हैं। केडीए की ओर से मेन रोड पर भी सजावटी लाइटें लगाई हुई है। सबसे अधिक समस्या कोटा दक्षिण में ही है।  पार्षदों का कहना है कि कोटा दक्षिण में 80 वार्ड हैं। उनमें से अधिकतर में रात को अंधेरा रहने की समस्या बनी हुई है। पार्षद जितेन्द्र सिंह का कहना है कि कोटा दक्षिण निगम में हर काम के टेंडर समय पर नहीं किए गए। जिससे कई तरह की परेशानियां हो रही हैं। गौशाला में दवाओं के टेंडर नहीं हुए। श्वानों के टेंडर करने में देरी की। उसी तरह से अभी तक रोड लाइटों के टेंडर नहीं किए गए हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा उत्तर में लाइटों का टेंडर हो चुका है। दक्षिण में करीब 22 सौ नई लाइट, 500 बिजली के खम्बे व करीब 35 मीटर केबल का एस्टीमेट तैयार किया है। जिसकी तकनीकी स्वीकृति भी डीएलबी से मिल गई है। अब नई रोड लाइट का टेंडर प्रक्रिया में है। उसके शेघ्र ही करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वैसे पुरानी लाइट के खराब होने पर उनकी मरम्मत का टेंडर समाप्त हो गया था। उसे बढ़ा भी दिया था लेकिन वर्तमान में निगम कर्मचारियों से मरम्मत करवाई जा रही है। <br /><strong>- सचिन यादव, एक्सईएन (विद्युत) नगर निगम उत्तर दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Aug 2024 15:04:57 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - 80 लाख के बजट से बीमार पशुओं को मिली संजीवनी</title>
                                    <description><![CDATA[टेंडर होने के बाद पशु चिकित्सालयों में पहुंचने लगी दवाइयां। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---sick-animals-got-a-lifeline-with-a-budget-of-80-lakhs/article-85307"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/26.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले में बीमार पशुओं के उपचार के लिए दवाओं का संकट झेल रहे पशुपालकों को अब राहत मिल गई है। पशु चिकित्सालयों में आने वाले बीमार पशुओं को अब नि:शुल्क दवा योजना के तहत दवाएं मिल सकेगी। हाल ही में राज्य सरकार की ओर से कोटा जिले के लिए 80 लाख रुपए का बजट स्वीकृत किया है। बजट मिलने के बाद अधिकांश दवाओं के टेंडर हो चुके हैं। इससे जिले के साढ़े छह लाख पशुओं को उपचार संभव होगा। नि:शुल्क दवा योजना में पशुओं के लिए सभी प्रकार के टेस्ट और टीके जैसे की एफएमडी, ब्रुसेला और पीपीआर आदि भी नि:शुल्क लगाए जाएंगे।</p>
<p><strong>अटका था टेंडर </strong><br />पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नि:शुल्क दवा योजना के तहत 138 दवा नि:शुल्क दिए जाने की घोषणा की थी। इसके बाद से दवा नि:शुल्क मिल रही थी, लेकिन पिछले साल विधानसभा चुनाव व इस साल लोकसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लगने से दवाओं के टेंडर नहीं हो पाए थे। इसके चलते जिले के पशु चिकित्सा केंद्रों पर आने वाले पशुओं के लिए नि:शुल्क दवाएं नहीं मिल पा रही थी। पशुपालकों को बाहर की दुकानों से दवा खरीदनी पड़ रही थी। अब टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद दवा आनी शुरू हो गई है। इससे पशुपालकों को दवाएं मिल पाएंगी।</p>
<p><strong>बरसात में ज्यादा बीमार </strong><br />बारिश के मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।  ऐसे में उन्हें दवाइयों की सख्त जरूरत होती है, लेकिन बजट नहीं होने के कारण जिले के पशु अस्पतालों में काफी समय से दवाइयों का टोटा बना हुआ था।  बरसात के दौरान बकरियों में फूड प्वाइजनिंग के केस अधिक आ रहे थे। ऐसे में दवाएं समय पर मिलना जरूरी था। इसके साथ ही डी-वार्मिंग टेबलेट, टिक्स इनफेस्टेशन, एंटी फेयरेटिक, डैक्सोना जैसे दवाओं की मांग इस दौरान ज्यादा रहती है। पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />- जिले में कुल पश                             6.40 लाख<br />- जिले में पशु चिकित्सा इकाइयां         180 <br />- प्रथम श्रेणी के पशु चिकित्सालय        16 <br />- पशु चिकित्सालय                           36 <br />- पशु चिकित्सा उप केंद्र                     124 </p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />जिले के पशु चिकित्सालयों में दवाइयों की कमी से पशुपालकों को हो रही परेशानी को लेकर 30 जून के अंक में दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि पशुपालकों को अपने बीमार मवेशियों के लिए नि:शुल्क दवा नहीं मिलने से परेशान होना पड़ रहा है। जिले में बड़ी संख्या में पशुपालन होता है। पशुओं के बीमार होने पर सरकारी चिकित्सालय में नि:शुल्क दवा नहीं मिलने से पशुपालकों को बाजार से महंगी दवा खरीदनी पड़ रही है। ऐसे में पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके बाद पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बजट उपलब्ध कराने के सम्बंध में रिमाइंडर भेजा था। अब दवाइयां उपलब्ध होने से पशुपालकों को राहत मिली है।    </p>
<p>पूर्व में पशु अस्पतालों में दवाइयों का टोटा होने से चिकित्सकों द्वारा पशुपालकों को बैरंग लौटाया जा रहा था। सामान्य बीमारी की दवाइयां भी बाजार से खरीदनी पड़ रही थी। अब अस्पतालों में दवाइयां मिलने लगी है। इससे पशुओं का उपचार होने लगा है। <br /><strong>- सुल्तान मीणा, पशुपालक, शंकरपुरा</strong></p>
<p>आचार संहिता के चलते पहले दवाओं के टेंडर नहीं हो पा रहे थे। सरकार ने जिले में दवाइयों के लिए 80 लाख का बजट जारी किया है। बजट मिलने के बाद अधिकांश दवाओं के टेंडर हो चुके हैं। दवाएं धीरे धीरे पशु चिकित्सालयों पर पहुंचाई जा रही है।<br /><strong>- डॉ. संजय मीणा, प्रभारी, नि:शुल्क दवा योजना, पशुपालन विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jul 2024 18:00:12 +0530</pubDate>
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