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                <title>Ursula von der Leyen - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Ursula von der Leyen RSS Feed</description>
                
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                <title>15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर यूरोप में लगेगा प्रतिबंध? राष्ट्रपति मैक्रॉन ने यूरोपीय आयोग से कानून बनाने को कहा</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने यूरोपीय आयोग से 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए पूरे यूरोप में सख्त कानून बनाने का आग्रह किया है। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मैक्रॉन ने त्वरित कार्रवाई की मांग की है और इसे 2027 तक लागू करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/there-will-be-a-ban-in-europe-on-the-use/article-164970"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(3)2.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए पूरे यूरोप में लागू होने वाला कानून बनाने को कहा है। रिपोर्ट के अनुसार, मैक्रॉन ने खास तौर पर ‘यूरोपीय संघ के सभी बच्चों की सुरक्षा’ की मांग की है और इस कार्य में यूरोपीय आयोग के विभागों की ‘विशेषज्ञता और सक्रिय भागीदारी’ पर भरोसा जताया है।</p>
<p>खबरों के मुताबिक, मैक्रॉन ने पत्र में कहा है, “इस स्थिति में तुरंत कदम उठाने की ज़रूरत है।” अगस्त के मध्य में, फ्रांस की संवैधानिक परिषद ने फैसला सुनाया था कि बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर मैक्रॉन का प्रस्तावित प्रतिबंध यूरोपीय संघ के कानूनों के अनुरूप नहीं है। इसके बावजूद, मैक्रॉन 2027 के वसंत तक इस कानून को लागू करवाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 12:27:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुक्त व्यापार समझौते के करीब ऑस्ट्रेलिया-ईयू: विवादास्पद मुद्दों को हल करने के बाद समझौते पर कर सकते हैं हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं। प्रधानमंत्री अल्बानीज और उर्सला वॉन डेर लेयन लाल मांस निर्यात से जुड़े शेष विवादों को सुलझाने के करीब हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/australia-eu-close-to-free-trade-agreement-can-sign-agreement-after/article-143376"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(14)1.png" alt=""></a><br /><p>कैनबेरा। ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच संभावित मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत अपने अंतिम दौर में है और आने वाले हफ्तों में इस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया के समाचार चैनल एबीसी न्यूज ने ईयू और ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन के हवाले से यह जानकारी दी <br />है। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सला वॉन डेर लेयन बचे हुए विवादास्पद मुद्दों को हल करने के बाद समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, ये विवादास्पद मुद्दे लाल गोश्त के निर्यात से संबंधित हैं। वॉन डेर लेयन ऑस्ट्रेलिया का दौरा भी कर सकती हैं, जहां वह न सिर्फ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करेंगी, बल्कि एक सुरक्षा साझेदारी पर भी मुहर लगाएंगी। उनके दौरे की अंतिम तारीख अभी निर्धारित नहीं हुई है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और ईयू के बीच बातचीत कई सालों तक चलने के बाद 2023 में रुक गयी थी। ऑस्ट्रेलिया के व्यापार मंत्री डॉन फरेल ने इससे पहले कहा था कि वह तब तक समझौता नहीं करेंगे, जब तक ईयू लाल गोश्त सहित ऑस्ट्रेलिया के अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए टैरिफ कम नहीं कर देता। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 14:59:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>77th Republic Day 2026: नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचे पीएम मोदी, शहीदों को अर्पित की श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[भारत आज 26 जनवरी 2026 को अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गौरव के साथ मना रहा है। राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/77th-republic-day-2026-pm-modi-reached-national-war-memorial/article-140851"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(24).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत आज 26 जनवरी 2026 को अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गौरव के साथ मना रहा है। राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगी और परेड की सलामी लेंगी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p>इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह की थीम ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ रखी गई है, जो देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को दर्शाती है। परेड में भारत की सांस्कृतिक विविधता, लोकतांत्रिक मूल्यों, ऐतिहासिक विरासत और सैन्य शक्ति का भव्य प्रदर्शन देखने को मिलेगा। विभिन्न राज्यों की झांकियां और सशस्त्र बलों की टुकड़ियां देश की विकास यात्रा की झलक पेश करेंगी।</p>
<p>इस बार गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन हैं, जो भारत-यूरोप संबंधों की मजबूती का प्रतीक हैं।</p>
<p>इसके साथ ही लाल किले पर 26 से 31 जनवरी तक ‘भारत पर्व’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश की सांस्कृतिक, कलात्मक और पर्यटन विरासत का उत्सव मनाया जाएगा। गणतंत्र दिवस का यह अवसर भारतीय संविधान और लोकतंत्र की शक्ति को स्मरण करने का दिन है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Jan 2026 10:24:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ग्रीनलैंड विवाद: अमेरिका पर 93 अरब यूरो का आयात शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है यूरोपीय संघ</title>
                                    <description><![CDATA[यूरोपीय संघ डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड खरीदने की धमकी के जवाब में 93 अरब यूरो का आयात शुल्क लगाने और अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का मसौदा तैयार कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/eu-is-considering-imposing-import-duty-of-93-billion-euros/article-140122"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>ब्रसेल्स। ग्रीनलैंड पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार बयानों और धमकियों के बीच यूरोपीय संघ (ईयू) अमेरिका पर 93 अरब यूरो (107.68 अरब डॉलर) का आयात शुल्क लगाने या अमेरिकी कंपनियों को यूरोपीय ब्लॉक में व्यापार करने से रोकने पर विचार कर रहा है। </p>
<p>फाइनेंशियल टाइम्स की सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में आधिकारिक सूत्रों के हवाले से कहा गया कि अगले हफ्ते दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) पर होने वाली बैठक से पहले इस शुल्क का मसौदा तैयार किया जा रहा है, ताकि राष्ट्रपति ट्रंप पर यूरोपीय नेताओं को थोड़ी बढ़त मिल सके। </p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया कि यूरोपीय यूनियन ने पिछले साल ही आयात शुल्क की सूची बना ली थी लेकिन व्यापार युद्ध रोकने के लिये उसे छह फरवरी तक के लिये स्थगित कर दिया था। ग्रीनलैंड पर अमेरिका-यूरोप के बीच बढ़ते तनाव के कारण ईयू नेताओं ने रविवार को इसे दोबारा लागू करने पर विचार किया। इसके अलावा यूरोपीय नेताओं ने दबाव-विरोधी मसौदे पर भी बातचीत की, जिसके लागू होने पर अमेरिकी कंपनियां यूरोप में अपना सामान नहीं बेच पायेंगी। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि, इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि जो देश ग्रीनलैंड खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका का समर्थन नहीं करेंगे, वह उन पर आयात शुल्क लगा सकते हैं। ट्रंप ने डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा भी की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर हालात नहीं बदलते तो एक जून से यह बढ़कर 25 प्रतिशत हो जायेगा। जिसके बाद आठों देशों ने रविवार को एक संयुक्त बयान जारी कर ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लिये पूर्ण समर्थन का ऐलान किया था। </p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप बुधवार और गुरुवार को विश्व आर्थिक मंच की बैठक में हिस्सा लेंगे। वहां वह यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सला वॉन डेर लियन सहित अन्य यूरोपीय नेताओं से बात कर सकते हैं। इसके साथ ही वह यूक्रेन का समर्थन करने वाले पश्चिमी देशों की एक बैठक में भी शामिल हो सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 17:13:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ग्रीनलैंड विवाद:  बढ़ते तनाव के बीच ईयू ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड न बेचने पर आयात शुल्क लगाने की धमकी के बाद ईयू ने प्रस्तावित व्यापार समझौते पर रोक लगा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/eu-bans-proposed-trade-deal-with-us-amid-rising-tension/article-139976"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump2.png" alt=""></a><br /><p>ब्रुसेल्स। ग्रीनलैंड मामले में अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईयू ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत रोक दी है। ईयू ने यह कदम डेनमार्क और संघ के कई देशों पर अमेरिका द्वारा आयात शुल्क लगाने की चेतावनी के बाद उठाया है। ईयू के नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा है कि ये आयात शुल्क संघ और अमेरिका के संबंधों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। साथ ही, उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के प्रति अपना पूर्ण समर्थन दोहराते हुए इस बात पर जोर दिया कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता ऐसे सिद्धांत हैं जिन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।</p>
<p>गौरतलब है कि, जुलाई 2025 में प्रस्तावित समझौते को आयात शुल्क कम करने और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया था। हालांकि ग्रीनलैंड पर ट्रंप के रुख और और आयात शुल्क लगाने की उनकी चेतावनी के बाद संघ ने इस प्रस्तावित समझौते के अनुमोदन को रोकने का आह्वान किया है। </p>
<p>ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में धमकी दी है कि यदि ग्रीनलैंड को'पूरी तरह' से अमेरिका को नहीं बेच दिया जाता, तो एक फरवरी 2026 से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा, जो 1 जून से बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाएगा।</p>
<p>ट्रंप ने ग्रीनलैंड के'रणनीतिक स्थान और खनिज संसाधनों को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए चेतावनी दी, एक फरवरी 2026 से, उपर्युक्त सभी देशों द्वारा अमेरिका को भेजे जाने वाले सभी सामानों पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा। एक जून 2026 को यह शुल्क बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। यह तब तक लागू रहेगा, जब तक ग्रीनलैंड को खरीदने के लिए कोई समझौता नहीं हो जाता।</p>
<p>यूरोपियन पीपल्स पार्टी के उपाध्यक्ष सिगफ्राइड मूरसन और अन्य यूरोपीय अधिकारियों ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह घोषणा उस स्थिरता को कमजोर करती है, जिसे सुनिश्चित करने के लिए यह व्यापार समझौता किया गया था। मूरसन ने कहा, पिछले साल अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच हुए व्यापार समझौते से स्थिरता ही एकमात्र लाभ होता। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा कई ईयू सदस्य देशों पर नए आयात लगाने की आज की घोषणा उस स्थिरता को छीन लेती है। यही कारण है कि उस व्यापार समझौते के अनुसमर्थन को स्थगित करना उचित है।</p>
<p>मूरसन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, हमें पिछले जुलाई के ईयू-यूएस व्यापार समझौते को बहुत जल्द अनुमोदित करना था, जिससे अमेरिका से यूरोपीय संघ में होने वाले आयात पर आयात शुल्क शून्य हो जाता। हालांकि, हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए इस मंजूरी के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को हासिल करने पर आमादा हैं। हालांकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने अपने 'आत्मनिर्णय के अधिकार' पर जोर देते हुए इस विचार को खारिज कर दिया है। बढ़ते तनाव के जवाब में, डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है, जबकि जर्मनी, स्वीडन, फ्रांस, नॉर्वे और नीदरलैंड ने भी छोटी सैन्य टुकड़यिाँ भेजी हैं। यूरोपीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के किसी भी अमेरिकी प्रयास का नाटो और अटलांटिक के दोनों ओर की सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 13:35:00 +0530</pubDate>
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