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                            <item>
                <title>कृषक कल्याण एवं कृषि विकास: किश्तों की राशि एक अप्रेल, 2026 से 30 सितम्बर, 2026 तक एकमुश्त जमा कराए जाने पर ब्याज में शत-प्रतिशत छूट दिए जाने की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में कृषि यंत्रों, तारबंदी, बीज, सिंचाई और डेयरी विकास हेतु हजारों करोड़ के अनुदान की घोषणा। लाखों किसान, पशुपालक और ग्रामीण उद्यमी लाभान्वित होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/announcement-of-100-interest-rebate-if-the-amount-of-farmer/article-142834"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(9)9.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए किसान साथियों को विभिन्न कृषि यंत्रों यथा पावर, टिलर, डिस्क, कल्टीवेटर आदि के लिए 160 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 50 हजार कृषक लाभान्वित होंगे साथ ही, आगामी वर्ष 500 कस्टम हायरिंग सेंटर्स की 96 करोड़  रुपए की लागत से स्थापना की जाएगी। नीलगाय, जंगली जानवरों व निराश्रित पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए आगामी वर्ष 50 हजार किसानों को 20 हजार किलोमीटर तारबंदी के लिए 228 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा। साथ ही, सामुदायिक तारबंदी में कृषकों की न्यूनतम संख्या 10 से घटाकर 7 किया जाना प्रस्तावित है।आधुनिकतम तकनीकों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के आधार पर खेती करने में आसानी एवं क्षमता विकास के लिए उठाएं जाएंगे विभिन्न कदम</p>
<p><strong>एग्री स्टैक पीएमयू का होगा गठन</strong></p>
<ul>
<li>आगामी वर्ष 5 लाख कृषकों को मूंग, एक लाख कृषकों को मोठ तथा एक लाख कृषकों को ज्वार, बाजरा व बरसीम फसल के मिनिकिट का वितरण किया जाना प्रस्तावित है। इस के लिए 33 करोड़ रुपए से अधिक का अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा। गुणवत्तायुक्त उन्नत बीज उत्पादन के लिए मुख्यमंत्राी बीज स्वावलम्बन योजना अन्तर्गत 90 प्रतिशत अनुदान पर 70 हजार क्विंटल बीज उपलब्ध करवाया जाना प्रस्तावित हैै। इस योजनान्तर्गत 50 करोड़ रुपए का व्यय कर 3 लाख कृषकों को लाभान्वित किया जाएगा।<br />  <br />छोटे बाजरे की बढ़ती मांग तथा जनजाति क्षेत्रों के किसानों की आय में वृद्धि के लिए कांगनी, कोदो, सांवा, कुटकी, चीना, रागी आदि छोटे बाजरे के 100 हेक्टेयर क्षेत्रा में प्रदर्शन आयोजित कर एक हजार कृषकों को लाभान्वित किया जाएगा। जलवायु परिवर्तन से कृषि भूमि के पोषक तत्वों पर होने वाले प्रभावों का आंकलन तथा मृदा उर्वरा शक्ति के प्रबन्धन के लिए आगामी वर्ष एक लाख 92 हजार मृदा नमूनों की जांच की जानी प्रस्तावित है।  </li>
<li>प्रत्येक ग्राम पंचायत में वर्मी कम्पोस्ट इकाई स्थापित करने के संकल्प को पूरा करने की दृष्टि से सर्वप्रथम 5 हजार से अधिक आबादी वाली 3 हजार 496 ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध रूप से वर्मी कम्पोस्ट इकाइयां स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। आगामी वर्ष, प्रथम चरण में 2 हजार 98 ग्राम पंचायतों में इस के लिए लगभग 270 करोड़ रुपए से अधिक का व्यय किया जाएगा। </li>
<li>कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रा में एआई/एमएल का वृहद स्तर पर उपयोग किए जाने व उत्पादकता वृद्धि के साथ-साथ कृषकों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एग्री स्टैक पीएमयू का गठन किया जाएगा। राज किसान साथी पोर्टल 3.0 पर विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत आवेदन से अनुदान तक की गतिविधियों के ऑनलाइन मॉडयूल का उन्नयन किया जाएगा।  </li>
<li>कृषकों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने, उनकी क्षमता वृद्धि करने के उद्देश्य से नॉलेज इनहांसमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत आगामी वर्ष 3 हजार 300 किसानों को राज्य से बाहर एक्सपोजर विजिट करवाई जाएगी। मधुमक्खी पालकों को वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन करने के साथ-साथ उच्च मूल्य वाले उत्पादकों व मधुमक्खी पराग के उत्पादन की जानकारी देने के लिए एक हजार मधुमक्खी पालकों को किट, वर्कशॉप व एक्सपोजर विजिट की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।</li>
<li>डिजिटल कृषि मिशन के अन्तर्गत कृषि सूचना एवं प्रबंधन प्रणाली राज-एम्स विकसित की जाएगी। इसके अन्तर्गेत कृषि में एआई/एमएल, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग एवं सेटेलाइट इमेजरी आदि तकनीकों द्वारा किसानों को जलवायु जोखिम से बचाव, मौसम आधारित बुवाई, फसल स्वास्थ्य की निगरानी सम्बन्धी सुविधायें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस के लिए 77 करोड़ रुपए व्यय किये जाएंगे। </li>
<li>उन्नत तकनीक के ग्रीन हाउस-पॉलीहाउस/शेडनेट, लो टनल, प्लास्टिक मल्च उपलब्ध करवाने के लिए आगामी वर्ष 4 हजार कृषकों को 200 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा। </li>
<li>प्रदेश में उद्यानिकी विकास के लिए औषधीय पौधों व मसाला फसलों तथा फूल व सब्जी आदि की खेती संवर्द्धन के लिए विभिन्न कार्य करवाए जाएंगे। ये कार्य हैं- </li>
<li>कृषि जोत भूमि के निरन्तर घटते जा रहे आकार को देखते हुए सब्जियों के गुणवत्तायुक्त उत्पादन वृद्धि के लिए वर्टिकल सपोर्ट सिस्टम आधारित खेती के लिए 5 हजार कृषकों को अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा। </li>
<li>उद्यानिकी उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए कृषकों को अनुदानित 500 सोलर क्रॉप ड्रायर्स उपलब्ध करवाए जाएंगे।  </li>
<li>पश्चिमी राजस्थान में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक हजार कृषकों को ईसबगोल, अश्वगंधा, सफेद मूसली, एलोवेरा आदि औषधीय पौधों के उन्नत बीज व आदान उपलब्ध कराये जायेंगे।  </li>
<li>प्रदेश में जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी आदि मसाला फसलों का 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्रा में विस्तार किए जाने के लिए अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए लूज फ्लॉवर एवं पॉलीहाउस में डच रोज की 500 हेक्टेयर क्षेत्रा में खेती के लिए कृषकों को अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा।  </li>
<li>राज्य में एग्रो फॉरेस्ट्री के पौधे तैयार करने के लिए जोधपुर, पाली एवं कोटा में ही टेक नर्सरी की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>प्रदेश में चूरू सहित खारे पानी की उपलब्धता वाले जिलों में झींगा पालकों को राहत देने के लिए सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। </li>
<li>कृषि अनुसंधान, कृषि प्रसार शिक्षा तथा कृषि शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यों को और अधिक गति दिए जाने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों में रिक्त पद चरणबद्ध रूप से भरे जाने प्रस्तावित हैं। आगामी वर्ष 443 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। </li>
<li>दलहनी एवं तिलहनी फसलों की उत्पादकता में वृद्धि तथा आत्मनिर्भरता के लिए मूंग, उड़द, अरहर, सोयाबीन, सरसों, तिल एवं अरण्डी आदि फसलों के 70 हजार प्रदर्शनों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही, 2 लाख 50 हजार से अधिक किसानों को दलहनी एवं तिलहनी फसलों के अनुदानित प्रमाणित बीजों का वितरण कर लाभान्वित किया जाएगा। इन पर 135 करोड़ रुपए का व्यय किया जाना प्रस्तावित है। </li>
<li>प्रदेश में कृषि विकास के लिए उन्नत बीज, भूमि सुधार, बायो एजेंट्स एवं छोटे बाजरे को बढ़ावा देने के उद्देश्य से होंगे विभिन्न कार्य  </li>
</ul>
<p><strong>मुख्यमंत्राी बीज स्वावलम्बन योजना से होगा 3 लाख कृषकों को लाभ</strong></p>
<ul>
<li>राज्य में हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 5 हजार कृषकों को नेपियर घास का नि:शुल्क वितरण किया जाएगा।  </li>
<li>क्षारीय एवं लवणीय भूमि के सुधार तथा भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए 50 हजार ढैंचा बीज मिनिकिट का कृषकों को नि:शुल्क वितरण किया जाएगा।  </li>
<li>कृषि उत्पादों के गुणवत्ता संवर्द्धन में बायो एजेंट्स की उपयोगिता को दृष्टिगत रखते हुए इनका उत्पादन 100 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 200 मीट्रिक टन किया जाना प्रस्तावित है।  </li>
<li>नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी को बढ़ावा देने के लिए एक लाख हेक्टेयर क्षेत्रा में इनके छिड़काव के प्रदर्शनों के लिए 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में अनियमित एवं अनिश्चित वर्षा के कारण वर्षा जल का संग्रहण कर बिना छीजत के पानी का उपयोग सुनिश्चित किए जाने के लिए आगामी वर्ष 8 हजार डिग्गियों व 15 हजार किलोमीटर सिंचाई पाइप लाइन सहित आगामी दो वर्षों में 36 हजार फार्म पोंड्स के लिए 585 करोड़ रुपए से अधिक का अनुदान दिया जाएगा। इससे 80 हजार से अधिक किसान लाभान्वित होंगे।</li>
</ul>
<p><strong>कृषि विपणन एवं सहकारिता</strong></p>
<ul>
<li>ब्याज मुक्त अल्पकालीन फसली ऋण वितरण योजना के अन्तर्गत आगामी वर्ष 35 लाख से अधिक किसान साथियों को 25 हजार करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए जाने की घोषणा। इस के लिए 800 करोड़ रुपए ब्याज अनुदान पर व्यय किए जाएंगे।</li>
<li>दीर्घकालीन सहकारी कृषि एवं नॉन फार्मिंग सेक्टर्स के लिए 590 करोड़ रुपए के ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 26 हजार किसान एवं लघु उद्यमी लाभान्वित होंगे। </li>
<li>एग्रो प्रोसेड प्रोडक्ट्स को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान तथा इनसे जुड़े कृषकों को बेहतर मूल्य दिलवाने की दृष्टि से मिशन राज गिफ्ट होगा प्रारंभ <br />प्रदेश में भण्डारण क्षमता वृद्धि, कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग, क्षमता विकास, मण्डी विकास तथा आधारभूत संरचना निर्माण सम्बन्धी विभिन्न कार्य करवाए जाएंगे।</li>
</ul>
<p><strong>गोदाम निर्माण, क्षमता संवर्द्धन, मण्डी सम्बन्धी कार्य</strong></p>
<ul>
<li>वर्ष 2047 तक 30 लाख मीट्रिक टन भण्डारण क्षमता के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रदेश में 250 मीट्रिक टन एवं 500 मीट्रिक टन क्षमता के 50-50 गोदामों का निर्माण करवाया जाएगा। इस के लिए लगभग 20 करोड़ रुपए का व्यय किया जाएगा।</li>
<li>गुराडिया माना, सरोद (डग) व लावासल (मनोहरथाना)- झालावाड़ सहित 100 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 100 मीट्रिक टन क्षमता के जीर्ण-शीर्ण गोदाम मय चारदीवारी के पुनर्निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा।</li>
<li>ठीकरिया चारणान-बूंदी व गैलानी, सालरिया (झालरापाटन), बडाय (खानपुर), पाडलिया, चाडा, सुनारी (डग)- झालावाड़ सहित 200 नवगठित गोदाम विहीन ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 100 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम एवं कार्यालय भवन मय चारदीवारी निर्माण के लिए 30 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे।  </li>
<li>प्याज की फसल को खराब होने से बचाने एवं मूल्य के उतार-चढ़ाव के नियंत्रण के लिए आगामी वर्ष तीन हजार किसानों को कम लागत की प्याज भण्डारण संरचनाओं के निर्माण के लिए लगभग 26 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा।  </li>
</ul>
<p><strong>मसाला उत्पादन तथा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कॉन्क्लेव ऑन स्पाइस</strong></p>
<ul>
<li>प्रदेश में मसाला उत्पादन तथा निर्यात को बढ़ावा देने की दृष्टि से आगामी वर्ष राष्ट्रीय स्तर के कॉन्क्लेव ऑन स्पाइस का आयोजन किया जायेगा।  </li>
<li>अलवर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ऑनियन, श्रीगंगानगर में सेंटर  ऑफ एक्सीलेंस फॉर किन्नू तथा बांसवाड़ा में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मैंगो खोले जाएंगे।</li>
<li>आमजन को जैविक कृषि उत्पाद उपलब्ध कराने की दृष्टि से जोधपुर, कोटा व उदयपुर में ऑर्गेनिक फूड मार्केट की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>कृषि जिन्सों के प्रोसेसिंग, व्यवसाय एवं निर्यात को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से प्रदेश के चयनित जिलों में 2 हजार कृषकों, प्रोसेसर्स व्यापारियों व निर्यातकों को प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा।  </li>
</ul>
<p>नवीन कृषि उपज अनाज मण्डी-बागीदौरा-बांसवाड़ा, सिकराय-दौसा, राजियासर स्टेशन (सूरतगढ़)-श्रीगंगानगर, कृषि उपज अनाज मण्डी में आवश्यक विकास कार्य-नदबई-भरतपुर, कोटपूतली-कोटपूतली बहरोड़, लोसल (धोद)-सीकर, राजलदेसर-चूरू थोक सब्जी मण्डी-नोखा-बीकानेर, सब्जी मण्डी-सवाई माधोपुर, बयाना-भरतपुर अनार मण्डी जीवाणा-जालोर में मूलभूत सुविधाओं का निर्माण कराया जाएगा। गौण मण्डी यार्ड, मूंडवा-नागौर में विशिष्ट पान-मैथी यार्ड तथा आधारभूत संरचनाओं का विकास कार्य ग्रामीण हाट (झालरापाटन)-झालावाड़ के लिए 10 करोड़ रुपए का व्यय किया जाएगा।  </p>
<p><strong>समस्त जिलों में नवीन उपहार विक्रय केन्द्र होंगे शुरू </strong></p>
<ul>
<li>उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त ग्रोसरी एवं अन्य खाद्य उत्पाद उपलब्ध करवाये जाने के लिए नवगठित जिलों में जिला सहकारी उपभोक्ता भण्डार स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, समस्त जिलों में नवीन उपहार विक्रय केन्द्र शुरू किए जाएंगे। </li>
<li>दूरदराज से कृषि उपज की बिक्री के लिए कृषि उपज मण्डियों में आने वाले किसानों को गर्मी एवं बरसात से बचाव के लिए शेड निर्माण सहित मण्डियों तक पहुंच मार्ग एवं यार्डों मेंअन्य आधारभूत कार्यों के लिए 350 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। </li>
</ul>
<p><strong>पशुपालन एवं डेयरी: 200 ग्राम पंचायतों में खोले जाएंगे पशु चिकित्सा उपकेन्द्र  </strong></p>
<p>न्यूनतम 3 हजार पशुधन वाली पशु चिकित्सा संस्था विहीन ग्राम पंचायतों में से गहनौली (नदबई)-भरतपुर, धांधोला (जहाजपुर), बांगोलिया (रायपुर)-भीलवाड़ा, पावली (राशमी)-चित्तौड़गढ़, गढ़ोरा (सिकराय)-दौसा, रतनपुरा (संगरिया) -हनुमानगढ़, सामोर (आंधी)-जयपुर, आलवाड़ा (सायला)-जालोर, रेवासा दलेलपुरा (नावां)-डीडवाना कुचामन, संगतडा-सलूम्बर, 17 एमडी (घड़साना) -श्रीगंगानगर सहित 200 ग्राम पंचायतों में पशु चिकित्सा उपकेन्द्र खोले जायेंगे। </p>
<p>ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में क्रमश: 6 किमी.की परिधि में न्यूनतम 5 हजार पशुधन तथा 4 किमी.की परिधि में न्यूनतम 3 हजार पशुधन की अनिवार्यता को प्राथमिकता देते हुए चतरपुरा (बानसूर)-कोटपूतली बहरोड़, मालपुर (गोविन्दगढ़)-अलवर, लीडी (पीसांगन)-अजमेर, बामडला (सेड़वा)-बाड़मेर, नवलपुरा (लाखेरी)-बूंदी, कौरेर-डीग, घोटािद (सागवाड़ा)-डूंगरपुर, मांडियाई खुर्द (तिंवरी)-जोधपुर, कितलसर (डेगाना), हरसोलाव (मेड़तासिटी)-नागौर, डाबरकलां, सिरोही, टोडा का गोठडा, सावतगढ़ (देवली)-टोंक, तलावड़ा (खण्डार)-सवाई माधोपुर, गोमावाली (विजयनगर)- श्रीगंगानगर, खिवाड़ा (राणी)-पाली सहित 25 पशु चिकित्सा उपकेन्द्रों को पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत किया जाएगा।  </p>
<p>ग्रामीण क्षेत्रा में 6 किमी.की परिधि में न्यूनतम 5 हजार पशुधन तथा शहरी क्षेत्रा में 4 किमी.की परिधि में न्यूनतम 2 हजार पशुधन की पात्राता रखने वाले उपरेड़ा (बनेड़ा)-भीलवाड़ा, बिलोठी (सेवर)-भरतपुर, थांवला, राजमहल, चांदली (देवली)-टोंक, बान्दनवाड़ा (भिनाय)-अजमेर, अजबपुरा (नारायणपुर), बुद्ध विहार-अलवर, द्वारापुरा (बांदीकुई)-दौसा, जखराना-कोटपूतली बहरोड़, कठोती (जायल)-नागौर, कोटडी सिमारला (श्रीमाधोपुर)-सीकर, भालेरी (तारानगर)-चूरू, नेवरी व इन्द्रपुरा (उदयपुरवाटी)-झुंझुनूं सहित 50 पशु चिकित्सालयों को प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नत किया जाएगा।  </p>
<p>प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय से बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नयन- जमवारामगढ़-जयपुर, खेतड़ी-झुंझुनूं, फलौदी बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय, झालरापाटन-झालावाड़ के भवन निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।  </p>
<p>प्रदेश में डेयरी एवं दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हमारे द्वारा गठित राजस्थान सहकारी डेयरी अवसंरचना विकास कोष की राशि एक हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर दो हजार करोड़ रुपये किये जाने की घोषणा। </p>
<p>सरस ब्राण्ड को गुणवत्तापूर्ण राष्ट्रीय डेयरी ब्राण्ड के रूप में स्थापित करने के लिए एनसीआर, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में सरस उत्पादों के आउटलेट्स खोले जायेंगे। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।</p>
<p>दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के अंतर्गत वर्तमान में 5 रुपये प्रति लीटर अनुदान दिया जा रहा है। आगामी वर्ष इस योजना में 700 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 5 लाख पशुपालक लाभान्वित होंगे। </p>
<p>विकसित राजस्थान @2047 के लिए प्रदेश में मिल्क प्रोसेसिंग कैपेसिटी 200 लाख लीटर प्रतिदिन तथा दूध और दुग्ध उत्पाद बिक्री केन्द्रों की संख्या एक लाख किये जाने का लक्ष्य है। इसके लिए प्रदेश के उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त दूध व मिल्क प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराने, मिल्क प्लांट्स की स्थापना, अपग्रेडेशन एवं विस्तार करने की दृष्टि से विभिन्न कार्य करवाये जाएंगे। </p>
<p><strong>दुग्ध केन्द्र/संयंत्रा की स्थापना/संवर्द्धन कार्य  </strong></p>
<ul>
<li>ग्रामीण क्षेत्र में आगामी वर्ष होगी एक हजार नवीन दुग्ध संकलन केन्द्रों स्थापना</li>
<li>आगामी वर्ष, ग्रामीण क्षेत्र में एक हजार नवीन दुग्ध संकलन केन्द्रों की स्थापना की जाएगी।  </li>
<li>अलवर में 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 200 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।  </li>
<li>बारां तथा सिरोही में के 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए 100 करोड़ रुपए का व्यय किया जएगा।  </li>
<li>जैसलमेर मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का सुदृढ़ीकरण करते हुए क्षमता 30 हजार लीटर से बढ़ाकर 50 हजार लीटर प्रतिदिन की जायेगी। इस पर 25 करोड़ रुपये का व्यय होगा।  </li>
<li>ग्रामीण क्षेत्रा में दुग्ध व दुग्ध उत्पादों के विपणन के साथ-साथ रोजगार उपलब्ध कराये जाने के लिए 500 डेयरी बूथ आवंटित किये जाएंगे।</li>
<li>एक लाख पशुपालकों को वेल्यू एडेड दुग्ध आधारित उत्पाद- शुद्ध घी, मावा, पनीर, मिठाई आदि तैयार किये जाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। </li>
<li>प्रदेश में मुर्गीपालन तथा गो उत्पादों को बढ़ावा दिये जाने की दृष्टि से विभिन्न कार्य करवाये जायेंगे, जिनमें मुर्गीपालन/गोशाला संवर्द्धन सम्बन्धी विभिन्न कार्य प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़, सिरोही, जालोर, पाली आदि में हैचरी, कोल्ड स्टोरेज एवं प्रोसेसिंग यूनिट की सुविधायुक्त बैक यार्ड के 35 पॉलट्री के 35 क्लस्टर्स महिला शक्ति पोल्ट्री समूह के माध्यम से स्थापित किये जायेंगे। इसके अन्तर्गत प्रति ब्सनेजमत 10 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा।  </li>
<li>उचित मूल्य पर मुर्गी दाना उपलब्ध करवाने के लिए तबीजी-अजमेर में पॉलट्री, फीड यूनिट स्थापित की जाएगी।  </li>
<li>गोशालाओं द्वारा उत्पादित गोकाष्ठ के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 100 गोशालाओं को रियायती दर पर गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध करवायी जाएंगी।  </li>
<li>गो उत्पादों को प्रोत्साहन देने व आमजन में जागरूकता बढ़ाने के लिए राज्य स्तरीय प्रदर्शनी लगायी जाएगी।  </li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 11:39:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>प्रदेश में ग्राम सेवा सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया होगी ऑनलाइन : प्रक्रिया बनेगी अधिक पारदर्शिता, दक ने कहा- इस पहल से समितियों के गठन की गति होगी तेज</title>
                                    <description><![CDATA[दक ने बताया कि अब तक पैक्स गठन के लिए निरीक्षकों को लक्ष्य दिए जाने, क्षेत्रीय सर्वे कर व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने और प्रस्ताव भेजने जैसी कार्रवाईयां मैनुअल रूप से होती थीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-process-of-formation-of-village-service-cooperative-societies-in/article-128654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार ने सहकारिता क्षेत्र में एक और अहम कदम उठाते हुए ग्राम सेवा सहकारी समितियों (पैक्स) के गठन की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने जानकारी देते हुए बताया कि अब निरीक्षकों को लक्ष्य प्रदान करने से लेकर समितियों के गठन की स्वीकृति जारी करने तक की समस्त कार्रवाई ऑनलाइन होगी। इस पहल से नई समितियों के गठन की गति तेज होगी और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।</p>
<p>दक ने बताया कि अब तक पैक्स गठन के लिए निरीक्षकों को लक्ष्य दिए जाने, क्षेत्रीय सर्वे कर व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने और प्रस्ताव भेजने जैसी कार्रवाईयां मैनुअल रूप से होती थीं। इसके कारण कई बार समितियों के गठन में देरी हो जाती थी। लेकिन नई ऑनलाइन व्यवस्था शुरू होने से यह पूरा काम त्वरित और पारदर्शी तरीके से संपन्न होगा। </p>
<p>उन्होंने बताया कि सहकारिता विभाग ने सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के सहयोग से जीएसएस मॉड्यूल विकसित किया है, जिसे ‘राज सहकार पोर्टल’ पर लागू किया गया है। अधिकारियों और निरीक्षकों की सुविधा के लिए यूजर मैनुअल भी उपलब्ध कराया गया है। राज्य में 2 से 15 अक्टूबर तक सहकार सदस्यता अभियान चल रहा है। इस दौरान पैक्सविहीन ग्राम पंचायतों में नई समितियों का गठन प्रमुख गतिविधियों में शामिल है। ऑनलाइन व्यवस्था से लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति सुनिश्चित होगी।</p>
<p>सहकारिता मंत्री ने कहा कि विभाग से जुड़े अधिकांश कार्य चरणबद्ध रूप से ऑनलाइन किए जा रहे हैं। हाल ही में समितियों की सदस्यता ग्रहण करने के लिए भी ऑनलाइन प्रणाली लागू की गई है। कोई भी 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का व्यक्ति, जो समिति क्षेत्र का निवासी है, एसएसओ आईडी के माध्यम से आवेदन कर सदस्य बन सकता है। यह कदम सहकारिता क्षेत्र में कार्यकुशलता बढ़ाने और आमजन को त्वरित सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Oct 2025 15:40:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान में सहकारी मिलेट आउटलेट्स को मिल रहा जबरदस्त प्रोत्साहन, लक्ष्य से दोगुने खुले केंद्र</title>
                                    <description><![CDATA[ राज्य सरकार की ओर से स्वास्थ्यवर्धक श्री अन्न (मोटे अनाज) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सहकारी संस्थाओं और समितियों के माध्यम से खोले जा रहे मिलेट आउटलेट्स आमजन को खूब पसंद आ रहे हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cooperative-millet-outlets-are-getting-tremendous-incentives-in-rajasthan-doubled/article-122301"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/photo1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार की ओर से स्वास्थ्यवर्धक श्री अन्न (मोटे अनाज) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सहकारी संस्थाओं और समितियों के माध्यम से खोले जा रहे मिलेट आउटलेट्स आमजन को खूब पसंद आ रहे हैं। अल्प समय में ही प्रदेश में सितंबर 2025 तक तय 34 आउटलेट्स के लक्ष्य के मुकाबले 74 मिलेट आउटलेट्स खोले जा चुके हैं।</p>
<p>इन आउटलेट्स के माध्यम से न केवल श्री अन्न उत्पादों को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि सहकारिता और राजीविका की महिला स्वयं सहायता समूहों को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। इनमें से 56 केंद्र सहकारी उपभोक्ता भण्डारों, 12 क्रय-विक्रय सहकारी समितियों, और अन्य समितियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।</p>
<p>इन आउटलेट्स पर सावां, कुटकी, कोदो, रागी, बाजरा सहित मिलेट मिक्स, कुकीज, फ्लेक्स, पास्ता, पोहा जैसे कई उत्पाद उचित दरों पर उपलब्ध हैं। आमजन श्री अन्न के स्वास्थ्य लाभों को समझते हुए इनका सेवन बढ़ा रहे हैं। यह पहल राज्य की खाद्य परंपरा से जुड़ाव के साथ-साथ पोषण और स्थानीय रोजगार को भी सशक्त कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Aug 2025 16:32:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान में नया कॉपरेटिव कोड लाएगी सरकार, 35 लाख किसानों को मिलेगा लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2024-25 के बजट की अनुपालना में 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज मुक्त फसली ऋण वितरित किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-will-bring-new-cooperative-code-in--35-lakh/article-109676"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/6622-copy17.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान सरकार सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नवीन कॉपरेटिव कोड लाने जा रही है, जिससे राजस्थान सहकारिता अधिनियम 2001 को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अधिक प्रासंगिक बनाया जा सके। इसके लिए गठित समिति ने महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश और केरल जैसे सहकारी आंदोलन में अग्रणी राज्यों का दौरा कर उनके कानूनों का व्यवहारिक अध्ययन किया है।</p>
<p>राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2024-25 के बजट की अनुपालना में 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज मुक्त फसली ऋण वितरित किया है, जिससे 35 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं। आगामी 2025-26 के बजट में 25 हजार करोड़ रुपए के ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है। सहकारिता विभाग की प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल ने बताया कि ‘सहकार से समृद्धि’ की परिकल्पना को साकार करने में राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में है। इस योजना के अंतर्गत 54 पहलें शुरू की गई हैं, जिनमें पेक्स कम्प्यूटराइजेशन, बहुद्देशीय ग्राम सेवा सहकारी समितियों की स्थापना और अन्न भंडारण के लिए गोदाम निर्माण जैसी योजनाएं शामिल हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Apr 2025 15:19:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केन्द्रीय सहकारी बैंकों को शत प्रतिशत वसूली करने के सख्त निर्देश दिए</title>
                                    <description><![CDATA[ कम लागत की कासां अमानतों के लिए 40% का मानक स्तर अर्जित करने व अमानतो में लक्ष्यों के अनुरूप वृद्धि के निर्देश प्रदान किए गए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/strict-instructions-given-to-central-cooperative-banks-to-make-100/article-96204"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/9930400-sizee1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शासन सचिव सहकारिता एवं प्रशासक, राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) मंजू राजपाल की अध्यक्षता में गुरुवार को राज्य के केन्द्रीय सहकारी बैंको के प्रबंध निदेशकगणों के साथ बैंक की ऋण वितरण, वसूली, पैक्स कंप्यूटराइजेशन की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में केन्द्रीय सहकारी बैंकों की गत 3 वर्षों की वसूली कार्यवाही, अवधिपार व ऋण वितरण की समीक्षा कर शत प्रतिशत वसूली करने के सख्त निर्देश दिए गए। पैक्स कम्प्यूटराईजेशन योजना में दिनांक 31-03-2025 तक सभी पैक्स को कम्प्यूटरीकृत करने के लिए उप रजिस्ट्रार, अंकेक्षक, बैंक व पैक्स स्टाफ के मध्य समन्वय कर शीघ्र कार्य पूर्ण करने के निर्देश प्रदान किए गए। कम लागत की कासां अमानतों के लिए 40% का मानक स्तर अर्जित करने व अमानतो में लक्ष्यों के अनुरूप वृद्धि के निर्देश प्रदान किए गए। </p>
<p>राजस्थान सरकार की राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड ऋण योजना एवं बजट घोषणा के बिन्दु संख्य 127 एवं 128 पर घोषित दीर्घकालीन कृषि एवं अकृषि ऋण योजना में कमश: 7% एवं 5% ब्याज अनुदान के दृष्टिगत अधिकाधिक ग्रामीणों को लाभान्वित करने के निर्देश प्रदान किए गए। अंत में संजय पाठक प्रबन्ध निदेशक शीर्ष सहकारी बैंक द्वारा सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Nov 2024 11:41:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों के सहकार व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजनाओं को लेकर सदन में सरकार घिरी, जवाब नहीं दे सके मंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[ जवाब में सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना की जगह सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री टीकाराम जूली ने सवाल का जवाब दिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-surrounded-the-house-regarding-the-farmers--cooperative-personal-accident-insurance-schemes--the-minister-could-not-answer/article-6886"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/rajendra_01---copy.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य विधानसभा में सोमवार को विपक्ष ने राज सहकार व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना का सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा। उप नेता राजेंद्र राठौड़ ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिस कंपनी ने राज सहकार व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना में बीच में करार तोड़ दिया, उसी कंपनी को राज्य सरकार ने दोबारा कांटेक्ट दे दिया। ऐसे में प्रदेश के 23 लाख किसानों के साथ सरकार ने धोखा किया है।<br /><br />नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि सरकार को उस कंपनी को ब्लैक लिस्ट करना चाहिए था जिसने किसानों से जुड़े मामले में बीच में करार तोड़ दिया लेकिन यहां तो उल्टा हो रहा है सरकार ने उसी को दोबारा से ठेका दे दिया सरकार इसका जवाब दें। जवाब में सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना की जगह सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री टीकाराम जूली ने सवाल का जवाब देते हुए कहा कि सहकारी बैंकों से ऋण लेने वाले किसानों का राज सहकार व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा तथा सहकार जीवन सुरक्षा बीमा योजनान्तर्गत शत प्रतिशत प्रीमियम राशि किसानों से ली जाती है। बीमा प्रीमियम राशि राज्य सरकार वहन नहीं करती है।</p>
<p><br />वर्तमान में राज सहकार व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना का करार मै. यूनाईटेड इण्डिया इन्श्योरेन्स कम्पनी के साथ  31 मार्च 2022 तक है। सहकार जीवन सुरक्षा बीमा योजना का करार  31 मार्च 2022 तक मै. श्रीराम लाइफ इन्श्योरेन्स कम्पनी के साथ था, किन्तु बीमा कम्पनी की ओर से करार की शर्तो के अध्ययधीन 24.10.2021 के उपरान्त उक्त योजना की क्रियान्विति में असमर्थता व्यक्त की गई। उक्त दोनों योजनान्तर्गत कृषक सदस्यों को बीमा सुरक्षा प्रीमियम कटौती से एक वर्ष के लिए उपलब्ध होती है। जुली ने कहा कि सहकार जीवन सुरक्षा बीमा योजनान्तर्गत वर्ष 2021-22 में बीमा करने वाली कम्पनी मै. श्रीराम लाइफ इन्श्योरेन्स कम्पनी की ओर से  निर्धारित करार 31 मार्च 2022 से पूर्व ही 24.10.2021 को योजना क्रियान्विति में असमर्थता व्यक्त किये जाने एवं नवीन बीमा कम्पनी का चयन नहीं हो पाने के कारण जनवरी 2022 तक अनुबंध नहीं किया है।</p>
<p> </p>
<p>वर्ष 2021-22 की शेष अवधि के लिए 18.09.2021 एवं 05.10.2021 को जीवन बीमा कम्पनियों से पुनः प्रस्ताव आमंत्रित किये गये किन्तु बीमा कम्पनियों द्वारा भाग नहीं लिया गया। दिनांक 18.11.2021 को पुनः प्रस्ताव आमंत्रित करने पर एकमात्र पात्र पाई गई मै0 श्रीराम लाइफ इन्श्योरेन्स कम्पनी द्वारा प्रस्तुत दर को अधिक आने पर शीर्ष बैंक द्वारा पत्रांक 10042 दिनांक 14.12.2021 से निदेशक, राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग को सहकारी बैंकों में फसली ऋण प्राप्त करने वाले कृषकों का सहकार जीवन सुरक्षा बीमा योजनान्तर्गत जीवन बीमा किये जाने हेतु योजना की क्रियान्विति करने की सहमति मय शर्तो एवं प्रीमियम दर आदि विवरण प्रेषित किया गया। उक्त के जवाब में राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग से प्राप्त पत्र दिनांक 15.12.2021 से उनके द्वारा सहकार जीवन सुरक्षा बीमा योजनान्तर्गत केसीसी कार्डधारक का जीवन बीमा करने में असमर्थता व्यक्त की गई है। इस पर वर्ष 2021-22 की शेष अवधि हेतु दो आयु वर्ग (18 से 60 एवं 60 से 79 वर्ष ) हेतु गठित कमेटी की शीर्ष बैंक द्वारा पत्र दिनांक 29.12.2021 से जीवन बीमा कम्पनियों से सहकार जीवन सुरक्षा बीमा योजना के लिए दिनांक 18.01.2022 तक निविदायें आमंत्रित की गई। वर्ष 2021-22 की शेष अवधि हेतु दो आयुवर्ग (18 से 60 एवं 60 से 79 वर्ष ) हेतु न्यूनतम दर प्रस्तुत करने वाली मै० श्रीराम लाइफ इन्श्योरेन्स कम्पनी से नेगोसिएशन उपरान्त प्रस्तुत की गई दरें अनुमोदित की गई। बीमा कार्य जारी है। राज्य के केन्द्रीय सहकारी बैंकों द्वारा सहकार जीवन सुरक्षा बीमा योजनान्तर्गत बीमा कम्पनी का चयन किये बिना ही ऋणी किसानों का प्रीमियम नहीं काटा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Mar 2022 14:37:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सहकारी मॉडल ने विकास योजना की सफलता में दिया अहम योगदान </title>
                                    <description><![CDATA[सहकारी समितियां स्वयं सहायता, जिम्मेदारी, लोकतंत्र, समानता, हिस्सेदारी और एकजुटता के मूल्यों पर आधारित होती है। अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (आईसीए) ने कहा कि अपने संस्थापकों की परंपरा में, सहकारी समितियों के सदस्य ईमानदारी, खुलेपन, सामाजिक जिम्मेदारी और दूसरों की देखभाल नैतिक मूल्यों में विश्वास करते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/cooperative-contributed-significantly-to-success-of-development/article-6682"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/11-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p>सहकारी समितियां स्वयं सहायता, जिम्मेदारी, लोकतंत्र, समानता, हिस्सेदारी और एकजुटता के मूल्यों पर आधारित होती है। अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (आईसीए) ने कहा कि अपने संस्थापकों की परंपरा में, सहकारी समितियों के सदस्य ईमानदारी, खुलेपन, सामाजिक जिम्मेदारी और दूसरों की देखभाल नैतिक मूल्यों में विश्वास करते हैं। वर्ष 1904 में भारत में पहला सहकारिता कानून लागू होने के बाद से भारतीय सहकारी संगठन अब तेज गति के बदलाव के लिए तैयार हैं। सहकारिता के क्षेत्र में नए प्रतिमानों और सहकारी संगठनों के लिए बजटीय आवंटन के साथ अलग से एक सहकारिता मंत्रालय की मौजूदगी के रूप में इसके बदलते स्वरूप के साथ विकास के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में भारत के सहकारिता आंदोलन में एक नए सिरे से रुचि बढ़ी है। अलग-अलग समय पर विशेष रूप से नौवीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002) तक, बदलाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले सहकारी मॉडल ने भारत की विकास योजना की सफलता में अहम योगदान दिया है। गरीबी उन्मूलन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, सामाजिक एकीकरण और रोजगार सृजन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के क्रम में इसके अंतर्निहित लाभ हुए हैं। सहकारी क्षेत्र हमारी अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में से एक है, जिसकी ऋण और गैर- ऋण समितियों के विशाल नेटवर्क के माध्यम से ग्रामीण भारत में व्यापक पहुंच है। भारत की कुल 8.5 लाख सहकारी इकाइयों में से, लगभग 20 प्रतिशत (1.77 लाख इकाइयां) ऋण संबंधी सहकारी समितियां हैं और शेष 80 प्रतिशत गैर-ऋण सहकारी समितियां हैं, जोकि लगभग 90 प्रतिशत गांवों को कवर करती हुई मत्स्य, डेयरी, उत्पादक, प्रसंस्करण, उपभोक्ता, औद्योगिक, विपणन, पर्यटन, अस्पताल, आवास, परिवहन, श्रम, खेती, सेवा, पशुधन, सहकारी समितियां आदि जैसी विविध गतिविधियों में शामिल हैं। सदस्यता के संदर्भ में अगर बात करें, तो लगभग दो सौ नब्बे मिलियन किसान सहकारी समितियों में नामांकित हैं। इनमें से 72 प्रतिशत किसान ऋण संबंधी सहकारी समितियों और 28 प्रतिशत किसान गैर-ऋण संबंधी सहकारी समितियों से जुड़े हैं।</p>
<p>प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियां (पैक्स) देश की अल्पकालिक सहकारी ऋण संरचना (एसटीसीसीएस) से संबंधित निर्माण खंड हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार कुल 6,39,342 गांवों को कवर करते हुए 13.2 करोड़ सदस्यों के साथ देश में कुल 95,238 पैक्स उपलब्ध थे। ये समितियां गांवों में किसानों और निम्न-आय वर्ग के लोगों की वित्तीय सहायता करके उनके वित्तीय सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। एक अच्छे नेटवर्क और पैक्स जैसे संस्थानों की जरूरत होने के बावजूद, पैक्स के माध्यम से धीमी गति से सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (आईसीए) का कहना है कि सहकारी समितियां स्वयं सहायता, आत्म-जिम्मेदारी, लोकतंत्र, समानता, हिस्सेदारी और एकजुटता के मूल्यों पर आधारित होती हैं। अपने संस्थापकों की परंपरा में, सहकारी समितियों के सदस्य ईमानदारी, खुलेपन, सामाजिक जिम्मेदारी और दूसरों की देखभाल जैसे नैतिक मूल्यों में विश्वास करते हैं।</p>
<p>ऐसा प्रतीत होता है कि सहकारिता के मूल सिद्धांत से समझौता किए जाने की वजह से वित्तीय और गैर-वित्तीय सेवाओं के वितरण में गिरावट आई है। ऋण चुकता करने के क्रम में अपर्याप्त धन संबंधी चूक, पेशेवर मानव संसाधनों की कमी और तकनीक के धीमे समावेश के परिणामस्वरूप प्रबंधन संबंधी सूचना की खराब प्रणाली, पारदर्शिता, आंतरिक नियंत्रण प्रणाली में शिथिलता, कदाचार की समस्याएं पैदा हुई है जिसके कारण विकास की प्रक्रिया में रुकावट आई है। मेहता समिति (1937) ने बढ़ते संकट और असंतोष को दूर करने के लिए सहकारी ऋण समितियों को ‘बहुउद्देश्यीय’ सहकारी समितियों के रूप में पुनर्गठित करने की सिफारिश की थी। इसके अलावा,  आजादी से पहले के काल में, सर मणिलाल नानावटी की अध्यक्षता वाली कृषि ऋण संगठन समिति ने सहकारी समितियों को एक व्यावहारिक व्यावसायिक इकाई बनाने के लिए कृषि वित्त में राजकीय सहायता और सभी सहकारी ऋण समितियों को बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों में बदलने पर जोर दिया था और इस संबंध में सिफारिश की थी। सहकारिता मंत्रालय ने पैक्स को सिर्फ एक ऋण समिति के बजाय एक ऐसी बहु-धंधी समिति के रूप में प्राथमिकता दी है जोकि ऋण एवं विभिन्न सेवाओं के लिए एकल खिड़की के रूप में कार्य कर सके।</p>
<p>पुनरुद्धार की यह प्रक्रिया पैक्स को सेवा संगठनों के रूप में एक नई दिशा देने और कृषि विपणन, बागवानी, खाद्य तेल, उत्तर पूर्व क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य शृंखला विकास, प्राकृतिक खेती आदि से संबंधित कृषि बजट 2022-23 की विभिन्न योजनाओं के साथ एकीकृत करने का भी आह्वान करती है। खरीद, भंडारण एवं वेयरहाउसिंग, प्रसंस्करण, ग्रामीण एवं कृषि संबंधी लॉजिस्टिक्स के प्रबंधन, बाजार संबंधी परामर्श एवं खुफिया जानकारी आदि जैसी गतिविधियों पर अमल कर पैक्स को बहुउद्देशीय समितियों के रूप में मजबूत किया जाएगा। हालांकि वर्तमान की बाजार एवं प्रौद्योगिकी संचालित अर्थव्यवस्था में सहकारी समितियों के प्रमुख सिद्धांतों के रूप में ‘‘सदस्यों की आर्थिक भागीदारी’’ और ‘‘सहकारी समितियों के बीच परस्पर सहयोग’’ की केंद्रीयता बनाए रखने की जरूरत है। पैक्स का डिजिटलीकरण प्रौद्योगिकी को अपनाने और व्यावसायिक दृष्टि से व्यवहारिक बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसला है। केन्द्रीय बजट में प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के डिजिटलीकरण के लिए 350 करोड़ रुपए की राशि निर्धारित की गई है। सहकारिता मंत्रालय द्वारा 63000 पैक्स को कम्प्यूटरीकृत करने की योजना तैयार की गई है।</p>
<p><strong>- हेमा यादव</strong><br /><strong>(निदेशक, वैमनिकोम)</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Mar 2022 11:06:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>किसान भाईयों से जुड़ी खबर: सहकारी भूमि विकास बैंकों की ओटीएस स्कीम 31 मार्च तक रहेगी लागू</title>
                                    <description><![CDATA[योजना के तहत अवधिपार श्रेणी के किसानों के अवधिपार ब्याज एवं दंडनीय ब्याज को 50 प्रतिशत तक माफ किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/news-related-to-kisan-brothers--ots-scheme-of-cooperative-land-development-banks-will-be-applicable-till-march-31--loanee-farmers-can-avail-benefits-till-july-1--2021/article-6592"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/udailal-anjana.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने बुधवार को बताया कि सहकारी भूमि विकास बैंकों से ऋण लेने वाले किसान 31 मार्च, 2022 तक एकमुश्त समझौता योजना का लाभ ले सकते है। योजना के तहत अवधिपार श्रेणी के किसानों के अवधिपार ब्याज एवं दंडनीय ब्याज को 50 प्रतिशत तक माफ किया गया है।</p>
<p><br />आंजना ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान किसानों को ऋण चुकाने में हो रही परेशानी को ध्यान में रखते हुए एकमुश्त समझौता योजना लागू की गई थी। योजना के तहत प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों के जिन किसानों के कृषि एवं अकृषि ऋण 1 जुलाई, 2021 तक अवधिपार हो चुके है, ऐसे किसान अब 31 मार्च, 2022 तक अपना अवधिपार ऋण चुकाकर योजना का लाभ ले सकते है। सहकारिता मंत्री ने बताया कि ऐसे अवधिपार ऋणी किसान जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनके परिवार को संपूर्ण बकाया ब्याज, दंडनीय ब्याज एवं वसूली खर्च को पूर्णतया माफ कर राहत दी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Mar 2022 16:17:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> सहकारी बैंकों में गबन होगा आर्थिक अपराध की श्रेणी शामिल, सहकारी फसली ऋण वितरण के लक्ष्य को 23500 करोड़ रूपये करने के प्रयास </title>
                                    <description><![CDATA[पैक्स कम्प्यूटराईजेशन के पायलट प्रोजेक्ट की शुरूआत हनुमानगढ़ जिले की जाएगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%97%E0%A4%AC%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A7-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A3%E0%A5%80-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2--%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AB%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%8B%E0%A4%A3-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A5%8B-23500-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A5%9C-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%AA%E0%A4%AF%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8/article-3478"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/whatsapp-image-2021-12-23-at-16.34.01.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सहकारिता मंत्री  उदय लाल आंजना ने कहा कि राज्य के अधिक से अधिक  किसानों को सहकारी फसली ऋण के दायरे में लाने के लिए फसली ऋण का लक्ष्य 23 हजार 500 करोड रूपये  करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष फसली ऋण वितरण का लक्ष्य 16 हजार करोड से बढ़ाकर 18 हजार 500 करोड रूपये किया गया है, और अब तक 13 हजार 878 करोड रूपये का ऋण वितरित हो चुका है। उन्होंने निर्देश दिये कि 31 जनवरी, 2022 तक अधिकतम ऋण वितरण हो जाना चाहिए।<br /> <br /> आंजना गुरूवार को शासन सचिवालय में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कृषि उपज मण्डियो, आर.सी.डी.एफ एवं राजफैड की जमा पूंजी को सहकारी बैंको में जमा कराने के लिए उच्च स्तर पर निर्णय कराया जाएगा, ताकि बैंको में तरलता बढ सके तथा अधिक किसानों को ऋण वितरण भी हो सके। सहकारिता मंत्री ने पैक्स कम्प्यूटराईजेशन पर जोर देते हुए कहा कि सभी ग्राम सेवा सहकारी समितियों को एक ही सॉफ्टवेयर से जोड़कर प्रणाली में पारदर्शिता स्थापित की जा सके। उन्होंने कहा कि पैक्स कम्प्यूटराईजेशन के पायलट प्रोजेक्ट की शुरूआत हनुमानगढ़ जिले से की जाए।<br /> <br />सहकारिता मंत्री ने कहा कि सहकारी बैंकों में की कार्यप्रणाली और सुचारू बनाने के लिए कार्मिकों की और भर्ती की जाए। उन्होंने जिन बैंकों में फसली ऋण वितरण की गति धीमी है उसमें तेजी लाने के निर्देश दिए।  आंजना ने कहा कि किसान बीमा से वंचित नहीं होना चाहिए, इसकी पुख्ता व्यवस्था की जाए तथा क्लेम का भुगतान समय पर हो, इसकी समीक्षा की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि गोदामों की प्रीकास्ट बनाई जाए ताकि सहकारी समितियों मे गोदामों का निर्माण एक ही प्रारूप हो सके, जिससे समितियों में बनने वाले गोदामों की गुणवत्ता एवं पहचान निर्धारित हो सके।<br /> <br />प्रमुख शासन सचिव, सहकारिता दिनेश कुमार ने कहा कि सहकारी बैंकों में गबन एवं धोखाधड़ी के मामलों को आर्थिक अपराध की श्रेणी में लिया जाएगा। भरतपुर सहकारी बैंक में एफडी के तहत हुई गडबड़ी को एसओजी में जांच हेतु भिजवाया गया है। इस मामले की तफ्तीश में तेजी के लिए गृह विभाग को लिखा जाएगा। कुमार ने कहा कि मछली पालन करने वालो को भी केसीसी लोन दिया जाएगा ताकि ऐसे परिवारों की इस कार्य के लिए जरूरतें पूरी करे सके। उन्होंने निर्देश दिए कि नए किसानों को समय पर लोन वितरण किया जाए ताकि खेती किसानी में परेशानी ना हो। उन्होंने निर्देश दिए कि ऋण वितरण के ऑनलाइन पंजीयन के पोर्टल पर किसानों का भूमि विवरण को भी अपलोड किया जाए तथा कस्टम हायरिंग का कार्य करने वाली जीएसएस को ऐप पर जोड़ा जाए।<br /><br /></p>
<p>रजिस्ट्रार सहकारिता  मुक्तानंद अग्रवाल ने कहा कि प्रशासन गांव के संग अभियान में 2 लाख नए किसानों  के लक्ष्य के विरूद्ध 2.57 लाख किसानों को फसली ऋण से जोड़ा गया है। 117 नई ग्राम सेवा सहकारी समितियों बनी है। जिससे करीब 1.75 लाख लोगों को जोड़ा है। डिफाल्टर किसानों को 224 करोड़ का ऋण वितरण किया गया है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता भंडारों से सरकारी विभागों द्वारा की जा रही खरीद की सीमा को आरटीपीपी एक्ट में संशोधन हेतु लिखा जाएगा। रजिस्ट्रार ने कस्टम हायरिंग सेन्टर एवं गोदाम निर्माण की प्रगति से भी अवगत कराया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Dec 2021 16:47:33 +0530</pubDate>
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                <title>JOB Alert : उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल्स संघ ने बढ़ाई तारीख, करें अप्लाई</title>
                                    <description><![CDATA[13 दिसंबर 2021 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/job-alert---%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%98-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A5%9D%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%96--%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%88/article-3002"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/job2.jpg" alt=""></a><br /><p>उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल्स संघ लिमिटेड ने संघ एवं सहकारी चीनी मिलों और आसवनियों में ग्रुप ए के पदों के लिए आवेदन की आखिरी तारीख बढ़ा दी है। संघ द्वारा जारी नोटिस के अनुसार विभिन्न पदों के लिए आवेदन के इच्छुक उम्मीदवार अब 13 दिसंबर 2021 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।  <br /> <br /> <br />  उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल्स संघ लिमिटेड द्वारा जिन पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं, उनमें प्रधान प्रबंधक, मुख्य अभियंता,मुख्य रसायनविद, मुख्य लेखाकार, मुख्य गन्ना अधिकारी और आसवनी प्रबंधक शामिल हैं।</p>
<p><br /> <strong>कैसे करें अप्लाई </strong><br /> उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल्स संघ लिमिटेड में पदों के लिए आवेदन के इच्छुक उम्मीदवार संघ की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराए गए ऑनलाइन अप्लीकेशन फॉर्म के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया के अंतर्गत उम्मीदवारों को मांगे गए विवरणों भरकर और डॉक्यूमेंट्स को अपलोड करके सबमिट करना होगा। उम्मीदवारों को ध्यान देना चाहिए कि उन्हें आवेदन के दौरान 500 रुपये का नॉन-रिफंडेबल फीस भरनी होगी, जिसका भुगतान ऑनलाइन माध्यमों से किया जा सकेगा।  राज्य के एससी, एसटी उम्मीदवारों के लिए शुल्क 250 रुपये ही है। आवेदन से पहले से उम्मीदवारों को विज्ञापन एवं ऑनलाइन अप्लीकेशन पेज पर दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ लेना चाहिए।<br /> <br /> अंतिम तिथि : 13 दिसंबर 2021</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Dec 2021 11:26:52 +0530</pubDate>
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                <title>किसानों को मार्च 2022 तक 18500 करोड़ के फसली ऋण का होगा वितरण</title>
                                    <description><![CDATA[फसली ऋण वितरण के लक्ष्य मे 2500 करोड़ रूपये की बढ़ोतरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9A-2022-%E0%A4%A4%E0%A4%95-18500-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A5%9C-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AB%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%8B%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%A3/article-1755"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/uday-lal-anjana.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने सोमवार को बताया कि सहकारी बैंकों से जुड़े किसानों को अधिक मात्रा में अल्पकालीन फसली ऋण उपलब्ध कराने के उददेश्य से वर्ष 2021-22 में 16000 करोड़ रूपये के फसली ऋण वितरण के लक्ष्य को बढ़ाकर 18500 करोड़ रूपये किया गया है। किसानों को इस वित्तीय वर्ष में 2500 करोड़ रूपये का ज्यादा फसली ऋण वितरित होगा।</p>
<p><br />              आंजना ने बताया कि  मुख्यमंत्री द्वारा बजट वर्ष 2021-22 में केन्द्रीय सहकारी बैंको द्वारा किसानों को 16000 करोड रूपये के अल्पकालीन फसली ऋण वितरित करने की घोषणा की गई, साथ ही 3 लाख नये किसानों को राज्य सरकार की शून्य ब्याज पर फसली ऋण योजना से जोड़े जाने की भी घोषणा की गई थी।</p>
<p><br />             सहकारिता मंत्री ने बताया की मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के क्रम में चालू वर्ष में 2.40 लाख नये किसानों द्वारा ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण एवं आवेदन किया गया है, जिसमें से 1.25 लाख नये किसानों को 248.69 करोड़ रूपये शून्य ब्याज दर योजना से लाभान्वित किया जा चुका है तथा सहकारी बैंकों द्वारा खरीफ 2021 में लगभग 25.68 लाख किसानों को राशि रूपये 9359.87 करोड़ के फसली ऋण वितरित किये जा चुके हैं।</p>
<p><br />              आंजना ने बताया कि गत वर्ष राज्य के केन्द्रीय सहकारी बैंकों द्वारा 2634355 कृषकों को  15235.33 करोड़ रूपये के फसली ऋण उपलब्ध करवाये गये थे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 3 लाख नये किसानों को राज्य सरकार की शून्य ब्याज दर योजना का लाभ उपलब्ध करवाये जाने एवं वर्तमान ऋणी किसानों को अधिक मात्रा मे ऋण उपलब्ध करवाये जाने के निर्देश सहकारी बैंकों को प्रदान किये गये हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 18 Oct 2021 17:39:35 +0530</pubDate>
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