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                <title>Administrative Reforms - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Administrative Reforms RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>KPSC में भ्रष्टाचार के आरोपों पर कांग्रेस नेताओं का दबाव, शिवकुमार से भर्ती प्रक्रिया रद्द करने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[केपीएससी (KPSC) में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर कांग्रेस नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार से मुलाकात की। नेताओं ने विवादास्पद भर्ती प्रक्रिया को तुरंत रद्द करने तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तर्ज पर प्रणालीगत सुधार लागू कर पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता बहाल करने का आग्रह किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pressure-from-congress-leaders-on-allegations-of-corruption-in-kpsc/article-165850"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/d-k-shivkumar.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) में "बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार" के आरोपों के बीच कांग्रेस नेताओं ने गुरुवार को मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार पर कथित तौर पर विवादों में घिरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तर्ज पर आयोग में व्यापक बदलाव करने का दबाव बनाया। कांग्रेस नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने डी. के. शिवकुमार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और कथित तौर पर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी भर्ती प्रक्रिया रद्द करने तथा केपीएससी की भर्ती व्यवस्था में पूरी तरह बदलाव की मांग की।</p>
<p>नेताओं ने शिवकुमार से केपीएससी में यूपीएससी द्वारा अपनाये जाने वाले नियम, विनियम और प्रक्रियाएं लागू करने का आग्रह किया, ताकि सरकारी भर्तियों में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने केपीएससी की भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उम्मीदवारों के हितों की रक्षा और राज्य की भर्ती व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।</p>
<p>प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी भर्ती प्रक्रिया को जारी रखने के बजाय रद्द किया जाना चाहिए, ताकि विवाद का आयोग के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों की विश्वसनीयता पर असर न पड़े। कांग्रेस नेताओं ने केपीएससी के कामकाज में व्यापक सुधार की भी मांग की, जिसमें परीक्षा और चयन प्रक्रियाओं में मजबूत सुरक्षा उपाय शामिल हैं। उन्होंने शिवकुमार से व्यक्तिगत पहल करते हुए आयोग में व्यापक बदलाव करने और यूपीएससी की तर्ज पर भर्ती व्यवस्था स्थापित करने का आग्रह किया।</p>
<p>ज्ञापन में पारदर्शी और त्रुटिरहित प्रक्रियाएं अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि सरकारी पदों पर भर्ती योग्यता के आधार पर हो और उम्मीदवारों को गड़बड़ी एवं अनियमितताओं से बचाया जा सके। नेताओं ने कहा कि केपीएससी में यूपीएससी की तर्ज पर प्रक्रियाएं अपनाने से संस्थागत जवाबदेही मजबूत करने और राज्य की प्रमुख भर्ती एजेंसी में जनता का विश्वास बहाल करने में मदद मिलेगी। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से अपनी मांगों पर विचार कर जल्द उचित कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 18:35:16 +0530</pubDate>
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                <title>देवनानी का गहलोत पर पलटवार: नियम नहीं पढ़ते, जो प्रावधान बता रहे हैं वही उनके समय में बने थे</title>
                                    <description><![CDATA[स्पीकर वासुदेव देवनानी ने विधानसभा नियमों पर अशोक गहलोत के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये प्रावधान पुराने हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/devnanis-counter-attack-on-gehlot-is-that-the-provisions-which/article-139980"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/devnani.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधानसभा के आगामी सत्र को लेकर कांग्रेस नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयानों पर कड़ा पलटवार किया है। देवनानी ने कहा कि गहलोत शायद नियम पढ़ते नहीं हैं, क्योंकि जिन प्रावधानों पर वे सवाल उठा रहे हैं, वे उनके मुख्यमंत्री रहते हुए तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी के समय तय किए गए थे।</p>
<p>देवनानी ने स्पष्ट किया कि 16वीं विधानसभा के पंचम सत्र में कोई नया नियम या प्रावधान नहीं जोड़ा गया है। सदन की सभी व्यवस्थाएं पूर्ववत हैं और प्रश्नकाल, शून्यकाल, पर्ची व्यवस्था एवं प्रश्न पूछने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि जनवरी 2020 से ही प्रश्नों की ग्राह्यता, समयावधि और सीमा से जुड़े प्रावधान विधानसभा बुलेटिन में शामिल हैं, जो लगातार जारी होते रहे हैं। इस बार भी वही नियम लागू हैं।</p>
<p>विधानसभा अध्यक्ष ने पर्ची व्यवस्था पर उठाए जा रहे सवालों पर कहा कि यह व्यवस्था पहली बार 1995 में तत्कालीन अध्यक्ष हरिशंकर भाभड़ा के समय शुरू हुई थी, जिसे वर्ष 2021 में सी.पी. जोशी के कार्यकाल में बंद किया गया। बाद में जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए इसे पुनः प्रारंभ किया गया। वर्तमान व्यवस्था में केवल पर्ची और प्रश्न ऑनलाइन जमा करने की सुविधा जोड़ी गई है, प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हुआ है।</p>
<p>देवनानी ने “तुच्छ विषय” शब्द के उपयोग को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि राजस्थान विधानसभा की नियमावली में यह प्रावधान 1956 से मौजूद है। यही नियम लोकसभा और देश की अन्य विधानसभाओं में भी लागू है। इसमें कोई नया संशोधन नहीं किया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रश्नों को सीमित क्षेत्र और यथासंभव हाल की जानकारी तक रखने का उद्देश्य विभागों को समय पर उत्तर देने में व्यावहारिक सुविधा देना है, ताकि विधायक सदन में अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रख सकें।</p>
<p>राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित समाचार को तथ्यहीन बताते हुए देवनानी ने कहा कि विधायकों पर किसी प्रकार की कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। विधानसभा सदन नियमों और स्वस्थ संसदीय परंपराओं के अनुसार संचालित होता है और सभी सदस्य उन्हीं नियमों के तहत कार्य करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 16:14:47 +0530</pubDate>
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