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                <title>इन्हें न कोई बूझ सका और न ही कभी बूझ सकेगा</title>
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                        <![CDATA[अगर स्वर्ग और नर्क आसमान में कहीं है, तो धरती पर क्या है ? ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/no-one-could-understand-them-nor-will-they-ever-be/article-136604"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(2)16.png" alt=""></a><br /><p>अगर स्वर्ग और नर्क आसमान में कहीं है, तो धरती पर क्या है? सिर्फ जीवन? भारतीय शास्त्रों में इसे आसमान में कहीं वह जगह कहा गया है, जहां उसके कर्मों की सजा दी जाती है। ऐसा कई धर्म शास्त्र भी मानते हैं, लेकिन विज्ञान नहीं मानता। भारतीय शास्त्र कहते हैं कि हां यह सच है। जबकि विज्ञान कहता है कि नहीं, यह कदापि संभव नहीं। ऐसा नहीं हो सकता। लेकिन हाल ही अमेरिका के केनसास में एक 68 वर्षीय महिला शार्लोट की मृत्यु हो गई। मृत्यु के ठीक 11 मिनट बाद वह पुन: जिंदा हो गई। जीवित होने के बाद उसने जीवन-मृत्यु के बीच के 11 मिनट में ब्रह्माण्ड में जो कुछ देखा, उसे अपने डॉक्टर और रिश्तेदारों को सुनाया। वह सब-कुछ बेहद चौंकाने वाला था। किसी को यकीन ही नहीं हुआ, लेकिन मृत शार्लोट होम्स के पुन: जीवित हो जाने पर इसे मानना पड़ा कि कुछ तो है, जो ब्रह्मांड में है, अजीबो-गरीब है और विज्ञान की समझ से परे है। क्योंकि शार्लोट होम्स की मृत्यु को सभी डॉक्टर्स प्रमाणित कर चुके थे।</p>
<p><strong>शास्त्रों में उल्लेखित :</strong></p>
<p>ब्रह्मांड में शार्लोट होम्स ने जो कुछ देखा, ठीक वैसा ही भारतीय शास्त्रों में उल्लेखित है। शार्लोट का कहना है कि इन 11 मिनटों में उसने जन्नत और जहन्नुम दोनों की सैर की। उस अद्भुत जगह को देख कर विस्मित हुई शार्लोट होम्स ने अपने डॉक्टर और परिवार वालों को बताया कि वहां सब-कुछ बड़ा विस्मित कर देने वाला था। मै वहां हूं और नहीं भी हूं। लेकिन मै सब कुछ देख रही थी। जहां मै थी, वह जन्नत थी और वहां एक अनोखे संगीत की मधुर धुन पर लोग झूम रहे थे। चारों ओर खूबसूरत फूल थे। मैने खुद को अपने शरीर से अलग, लेकिन हवा में ऊपर कहीं पाया। मैने वहां से अपने शव को भी देखा जिसके पास सभी डॉक्टर्स और नर्स खड़े थे। मैने जान लिया कि मैं मर चुकी हूं और अब स्वर्ग में हूं। शार्लोट का कहना है कि स्वर्ग की वह सुन्दरता हमारी कल्पना से लाखों गुना अद्भुत है। वहां भय का नामो-निशान नहीं था। एक अनोखे आनन्द की अनुभूति थी।</p>
<p><strong>चर्चा का विषय :</strong></p>
<p>सबसे ज्यादा भावुक पल तब आया जब मुझे एक छोटे-से बच्चे से मिलवाया गया। मै समझ नहीं पा रही थी कि वह बच्चा कौन है। तभी मुझे एक तैरती हुई आवाज सुनाई दी। उस आवाज ने कहा कि यह बच्चा वही है, जिसे तुम अपने गर्भ में तब खो चुकी थी, जब वह पांच महीने का था। वहां मै अपने मृत माता-पिता से भी मिली। ऐसे ही अन्य रिश्तेदारों से भी। जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। उस आवाज ने उस बच्चे को गोद में उठाया और मुझे नर्क की तरफ ले गई। जहां पर मैंने बहुत बुरी दुर्गंध महसूस की। वहां चीखों की भयानक आवाजें आ रही थीं। सब-कुछ असहनीय था। वहीं पर उस आवाज ने कहा कि अब वापस जाओ और मैं पुन: जीवित हो गई। यद्यपि पुन: जीवित होते समय मुझे एक-दम अजीब-सा दर्द महसूस हुआ। शार्लोट की यह घटना पूरे अमेरिका में चर्चा का विषय बनी हुई है।</p>
<p><strong>ग्रंथों में उल्लेख है :</strong></p>
<p>इस पर तथ्यात्मक रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन भारतीय प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख है कि ऐसा है। जबकि विज्ञान इसे नहीं मानता। महाभारत में भी इस बात का उल्लेख है कि धर्मराज युधिष्ठिर सशरीर स्वर्ग गए थे और वहां उन्होंने स्वर्ग और नरक दोनों देखे। बावजूद स्वर्ग और नर्क एक विवादास्पद मुद्दा है। चूंकि जहां एक ओर आत्मा को अजर अमर बताया गया है, तो वह स्वर्ग और नर्क की हकदार कैसे हुई? दूसरी बात यह कि पाप और पुण्य तो शरीर करता है, आत्मा नहीं। ऐसे में शरीर के गुनाहों की सजा आत्मा को क्यों? अमूमन अखबारों में ऐसी खबरें पढ़ने को मिलती हैं कि उक्त व्यक्ति मर गया और थोड़ी देर बाद पुन: जीवित हो उठा और उसने भी वही सब-कुछ बताया जो शार्लोट होम्स ने बताया। भारत में ऐसे सैंकड़ों किस्से हो चुके हैं और सभी में ऐसी ही समान स्थितियां बताई गईं। इन सब की वैसी ही आलौकिक अनुभूतियों में समानता क्यों ?</p>
<p><strong>उलझी पहेली है :</strong></p>
<p>ईसाई और इस्लाम धर्म इसे ईश्वर का वह वास्तविक स्थान मानते हैं, जहां आत्माएं मृत्यु के बाद जाती हैं। जबकि बौद्ध धर्म स्वर्ग और नर्क को जन्म-मृत्यु के चक्र के भीतर विभिन्न लोकों में देखता है। हिन्दू धर्म में भी स्वर्ग और नर्क की अवधारणाएं हैं, जो कि कर्मों के अनुसार पुनर्जन्म का हिस्सा है। अस्तु स्वर्ग और नर्क का वजूद एक ऐसी उलझी पहेली है, जिसका किसी के पास कोई प्रामाणिक जवाब नहीं और जिसे कोई नहीं सुलझा सकता। यद्यपि शार्लोट होम्स ने जो कहा उस पर अब शोध किया जा रहा है और धरती से ऊपर कहीं स्वर्ग और नर्क है या नहीं, इसे भी स्पष्टत: नहीं कहा जा सकता।</p>
<p><strong>-अशोक शर्मा</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 12:46:43 +0530</pubDate>
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                <title>हर बूंद में जीवन, हर जन में भागीदारी</title>
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                        <![CDATA[क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा राज्य राजस्थान अपनी शुष्क जलवायु, अनियमित वर्षा और घटते भूजल के कारण गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/life-in-every-drop-participation-in-every-public/article-117855"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer102.png" alt=""></a><br /><p>क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा राज्य राजस्थान अपनी शुष्क जलवायु, अनियमित वर्षा और घटते भूजल के कारण गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। जन जल अभियान, एक महत्वपूर्ण अभियान है, जिसका उद्देश्य सामुदायिक भागीदारी, वैज्ञानिक नियोजन और विकेंद्रीकृत शासन के माध्यम से राज्य में जल प्रबंधन को बदलना है, जिसे राजस्थान सरकार ने सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट और पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन के साथ साझेदारी में शुरू किया था। राजस्थान ऐतिहासिक रूप से जल-संकटग्रस्त राज्य रहा है, जहां कई जिलों को भूजल के अत्यधिक दोहन की श्रेणी में चिह्नित किया गया है। वर्षा न केवल कम होती है, बल्कि असमान रूप से वितरित होती है, जिससे सतही जल की उपलब्धता भी बेहद कम हो जाती है। राजस्थान में बावड़ी, कुंड, जोहड़ और टांका जैसे पारंपरिक जल-संग्रहण प्रणालियों की समृद्ध विरासत रही है, किंतु इनका अधिकांश हिस्सा अब जर्जर अवस्था में है या उपयोग से बाहर हो चुका है। इसके अतिरिक्त, अतिक्रमण, उपेक्षा और सामुदायिक उत्तरदायित्व की कमी ने इन संरचनाओं की प्रभावशीलता को घटा दिया है। </p>
<p>यह अभियान जनसहभागिता के माध्यम से इन प्राचीन जल-संरचनाओं का पुनरुद्धार और पुनरजीवन करने का प्रयास है। यह अभियान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा 5 जून 2025 को औपचारिक रूप से प्रारंभ किया गया था। यह अभियान आधिकारिक रूप से 5 जून से 20 जून 2025 तक चलेगा, जो 15 दिनों तक जनभागीदारी की सघन गतिविधियों से भरपूर होगा। जल जन अभियान का मूल उद्देश्य सामुदायिक स्वामित्व, वैज्ञानिक जल बजट निर्धारण और पारंपरिक जल के पुनरुद्धार जैसे सिद्धांतों में निहित है। यह अभियान कई महत्वपूर्ण लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। बावड़ियों, कुंडों, जलाशयों, जोहड़ों और बांधों जैसे पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण और पुनर्जीवन किया जाएगा। इसमें रामगढ़ बांध जैसे ऐतिहासिक स्थलों को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य राज्य में जल धारण क्षमता और भूजल स्तर में वृद्धि सुनिश्चित करना है। अगले चार वर्षों में 45,000 से अधिक संरचनाएं मरम्मत की जाएंगी, जिसमें पहले वर्ष में 5,000 निर्माण का लक्ष्य है। शुष्क और अति-शोषित क्षेत्रों में भूजल स्तर को स्थिर और मजबूत करने के लिए सतही जल का बहाव रोकना, जलाशयों की गाद हटाना, और बोरवेल पुनर्भरण को प्रोत्साहित किया जाएगा। </p>
<p>जल स्रोतों की सफाई और संरक्षण नदियों, झीलों, कुओं और बावड़ियों की सफाई के लिए राज्यव्यापी अभियान में बड़े संस्थानों और नगरों में अपशिष्ट जल उपचार परियोजनाएं शामिल हैं। जन सहभागिता के लिए श्रमदान, नुक्कड़ नाटक, गीत, फिल्में, वृक्षारोपण, कलश यात्राएं और सामुदायिक संकल्प कार्यक्रम के अलावा नागरिकों को अभियान से जोड़ा जा रहा है। पंचायतों, स्कूलों, महिला समूहों और दानदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। प्रत्येक ग्राम पंचायत को पानी योजना तैयार करने का दायित्व दिया गया है, जो स्थानीय जल विज्ञान और मांग के अनुसार आधारित होगी। ग्रामीणों को जल लेखा, जल संतुलन और जलवायु-प्रतिकारक योजना में प्रशिक्षित किया जा रहा है। अभियान की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिदिन प्रगति का मूल्यांकन, विभागीय समन्वय और सोशल मीडिया पर प्रचार किया जा रहा है।</p>
<p>जल संकटग्रस्त क्षेत्रों और पुनर्भरण स्थलों की पहचान रिमोट सेंसिंग तकनीकों से की जा रही है। जल उपयोग और कार्य प्रगति की निगरानी के लिए मोबाइल ऐप्स और डैशबोर्ड भी शुरू किए गए हैं। जल सुरक्षा को स्थायी बनाने के लिए इस अभियान को प्रमुख दीर्घकालिक परियोजनाओं से जोड़ा जा रहा है, जैसे कि पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ परियोजना। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में इस योजना का पहला चरण 9,400 करोड़ की लागत वाला एलिवेटेड कैनाल प्रोजेक्ट वन विभाग से स्वीकृत हुआ है, जिससे 17 जल-संकटग्रस्त जिलों को चंबल का जल मिलेगा। जल जन अभियान 2025 केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक परिवर्तनकारी आंदोलन है,जो यह परिभाषित करता है कि राजस्थान जल को कैसे मूल्य देता है, संरक्षित करता है और भावनात्मक रूप से उससे जुड़ता है। उस प्रदेश में जहां हर वर्षा की बूंद आशा और अस्तित्व का प्रतीक है, यह पहल न केवल सदियों पुरानी परंपराओं को फिर से जीवित कर रही है, बल्कि नवाचार को गांव-गांव तक पहुंचा रही है और लाखों लोगों को जल संरक्षण,जल जीवन के एकजुट ध्येय में बांध रही है। </p>
<p>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दृढ़ और दूरदर्शी नेतृत्व में यह अभियान केवल फाइलों और वादों तक सीमित नहीं रहा। इसने जीवन को छुआ है, नदियों को फिर से जीवंत किया है, भूले-बिसरे जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया है और सबसे महत्वपूर्ण बात सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को जाग्रत किया है। सरकारी कर्मचारियों से लेकर किसानों तक, विद्यार्थियों से लेकर संतों तक,ग्राम पंचायतों से लेकर शहरी नागरिकों तक हर कोई इस मिशन का भागीदार बन चुका है। हर साफ की गई टंकी, हर मरम्मत हुआ एनीकट और हर संजोई गई बूंद यह सभी सामूहिक प्रयासों की शक्ति का प्रमाण हैं। श्रमदान, वृक्षारोपण, कलश यात्रा, नुक्कड़ नाटक और जागरूकता रैलियों के माध्यम से यह अभियान केवल जल स्रोतों को नहीं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने, सांस्कृतिक गौरव और पर्यावरणीय चेतना को भी पुनर्जीवित कर रहा है। </p>
<p>यह केवल ढांचागत विकास नहीं यह मानसिकता का परिवर्तन है। यह लोगों को अपने संसाधनों का स्वामी बनाने का आंदोलन है, यह युवाओं को प्रकृति का रक्षक बनने की प्रेरणा देता है, यह दिखाता है कि स्थायी विकास की नींव गांवों से शुरू हो सकती है। जल है तो कल है। जल ही जीवन है, जल ही भविष्य है। हर नागरिक जल संरक्षक बने। हर गांव में गूंजे जल रक्षा की भावना। समय अब है। मिशन हमारा है।</p>
<p><strong>-मीनल जींगर</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Jun 2025 11:58:09 +0530</pubDate>
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                <title>जीवन को उत्सवधर्मिता से जोड़ने का पावन पर्व</title>
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                        <![CDATA[ परम तत्व से साक्षात्कार की यह वह विधा है जो व्यक्ति को अंतर का उजास प्रदान करती है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/holy-festival-to-connect-life-with-festivity/article-82223"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/photo-size-(6)6.png" alt=""></a><br /><p>योग भारत की वह महान परम्परा है, जिसने हमारे देश को कभी विश्व गुरू के रूप में पहचान दिलाई थी। आदर्श जीवन शैली के रूप में आज यह इसीलिए भी अधिक महत्वपूर्ण है कि इसके जरिए स्वस्थ तन और स्वस्थ मन की ओर हम अग्रसर होते हैं। महर्षि अरविन्द विश्व के महान योगी हुए हैं। उन्होंने समग्र जीवन-दृष्टि हेतु योगाभ्यास को बहुत महत्वपूर्ण बताते हुए कभी यह कहा था कि यदि मनुष्य योग को अपनाता है तो पूरी तरह से रूपान्तरित हो जाता है।  वह सकारात्मकता  के भावों के साथ जीवन की उत्सवधर्मिता से जुड़ जाता है।<br />यह बात समझने की है कि योग चिकित्सा नहीं है, योग आत्मविकास का सबसे बड़ा माध्यम है। परम तत्व से साक्षात्कार की यह वह विधा है जो व्यक्ति को अंतर का उजास प्रदान करती है। इसीलिए आरम्भ से ही हमारे यहां योग की परम्परा से ऋषि-मुनि और भद्रजन जुड़े रहे हैं।</p>
<p>मुझे याद है, संयुक्त राष्ट्र संघ में 27 सितम्बर 2014 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने योग को विश्व स्तर पर मनाए जाने का प्रस्ताव रखा और 177 देश तब इसके सह प्रस्तावक बने। रिकॉर्ड समय में विश्व योग दिवस मनाने के प्रस्ताव को पारित किया गया। संयुक्त राष्ट्र संघ में 11 दिसम्बर 2014 को 193 सदस्यों द्वारा 21 जून को योग दिवस मनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली। भारत की इस महान परम्परा को विश्वभर के लिए उपयोगी मानते हुए 21 जून को विश्व योग दिवस की घोषणा हुई। मैं यह मानता हूं कि यह हमारी परम्परा और संस्कृति की वैश्विक स्वीकार्यता है। योग का अर्थ ही है, जोड़ना। हमारे यहां सबसे पहले महर्षि पंतजलि ने विभिन्न ध्यानपारायण अभ्यासों को सुव्यवस्थित कर योग सूत्रों को संहिताबद्ध किया था। वेदों की भारतीय संस्कृति में जांएगे तो वहां भी योग की परम्परा से साक्षात् होंगे। हिरण्यगर्भ ने सृष्टि के आरंभ में योग का उपदेश दिया। पंतजलि, जैमिनी आदि ऋषि- मुनियों ने बाद में इसे सबके लिए सुलभ कराया। हठ से लेकर विन्यास तक और ध्यान से लेकर प्राणायाम तक योग जीवन को समृद्ध और संपन्न करता आया है। ऐसे दौर में जब भौतिकता की अंधी दौड़ में निरंतर मन भटकता है, मानसिक शांति एवं संतोष के लिए भी योग सर्वथा उपयोगी है। </p>
<p>महर्षि अरविन्द ने लिखा है, योग का अर्थ जीवन को त्यागना नहीं है बल्कि दैवी शक्ति पर विश्वास रखते हुए जीवन की समस्याओं एवं चुनौतियों का साहस से सामना करना है। अरविन्द की दृष्टि में योग कठिन आसन व प्राणायाम का अभ्यास करना भर ही नहीं है बल्कि ईश्वर के प्रति निष्काम भाव से आत्म समर्पण करना तथा मानसिक शिक्षा द्वारा स्वयं को दैवी स्वरूप में परिणित करना है। योग तन के साथ मन से जुड़ा है। मन यदि स्वस्थ हो तो तन अपने आप ही स्वस्थता की ओर अग्रसर होता है। अन्तर्ज्ञान में व्यक्ति को अपने भीतर के अज्ञान से साक्षात्कार होता है। योग इसमें मदद करता है। मैंने इसे बहुतेरी बार अनुभूत किया है। आधुनिक पीढ़ी यदि योगिक दिनचर्या से जुड़ती है, विद्यालयों और महाविद्यालयों में इसे अनिवार्य किया जाता है तो जीवन से जुड़ी बहुत सारी जटिलताओं को बहुत आसानी से हल किया जा सकता है। स्वामी विवेकानंद ने अपने समय में योगियों को नसीहत दी थी कि उनका आचरण स्वयं ही प्रमाण बनना चाहिए। उनके कहने का तात्पर्य यह था कि योग को व्यावसायिकता से दूर रखा जाए। इसे चमत्कार से नहीं जोड़ते हुए मानवता के कल्याण के रूप में देखा जाए। यही इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।</p>
<p>भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने योग: कर्मसु कौषलम् कहा है। यानी किसी भी कार्य में कुशलता ही प्राप्त करने की विधा ही योग है। महात्मा गांधी ने अनासक्ति योग का व्यवहार किया है।  पांतजल योगदर्शन में क्रियायोग है। पाशुपत और माहेश्वर योग आदि तमाम रूपों में योग हमारी पवित्र जीवन शैली का आरंभ से ही हिस्सा रहा है। इसे अपनाने का अर्थ है, चित्त वृतियों का निरोध। स्वस्थ तन और स्वस्थ मन। यही आज की सबसे बड़ी आवश्यकता भी है।</p>]]>
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                <pubDate>Fri, 21 Jun 2024 11:05:07 +0530</pubDate>
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                <title>जल-संकट : जीवन एवं कृषि  खतरे में</title>
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                        <![CDATA[मानवीय गतिविधियों और क्रिया-कलापों के कारण दुनिया का तापमान बढ़ रहा है और इससे जलवायु में होता जा रहा परिवर्तन।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/water-crisis-endangers-life-and-agriculture/article-77031"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(4)9.png" alt=""></a><br /><p>मानवीय गतिविधियों और क्रिया-कलापों के कारण दुनिया का तापमान बढ़ रहा है और इससे जलवायु में होता जा रहा परिवर्तन। जो मानव जीवन के हर पहलू के साथ जलाशयों एवं नदियों के लिए खतरा बन चुका है। जलवायु परिवर्तन का खतरनाक प्रभाव गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र  सहित प्रमुख जलाशयों और नदी घाटियों में कुल जल भंडारण पर खतरनाक स्तर पर महसूस किया जा रहा है, जिससे लोगों को गंभीर जल परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। केंद्रीय जल आयोग के नवीनतम आंकड़े भारत में बढ़ते इसी जल संकट की गंभीरता को ही दर्शाते हैं। आंकड़े देश भर के जलाशयों के स्तर में आई चिंताजनक गिरावट की तस्वीर उकेरते हैं। रिपोर्ट के अनुसार 25 अप्रैल 2024 तक देश में प्रमुख जलाशयों में उपलब्ध पानी में उनकी भंडारण क्षमता के अनुपात में तीस से पैंतीस प्रतिशत की गिरावट आई है। जो हाल के वर्षों की तुलना में बड़ी गिरावट है। जो सूखे जैसी स्थिति की ओर इशारा करती है। जिसके मूल में अल नीनो घटनाक्रम का प्रभाव एवं वर्षा की कमी को बताया जा रहा है। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। मानव एवं जीव-जन्तुओं के अलावा जल कृषि के सभी रूपों और अधिकांश औद्योगिक उत्पादन प्रक्रियाओं के लिये भी बेहद आवश्यक है। परंतु आज भारत गंभीर जल-संकट के साए में खड़ा है। अनियोजित औद्योगीकरण, बढ़ता प्रदूषण, घटते रेगिस्तान एवं ग्लेशियर, नदियों के जलस्तर में गिरावट, वर्षा की कमी, पर्यावरण विनाश, प्रकृति के शोषण और इनके दुरुपयोग के प्रति असंवेदनशीलता भारत को एक बड़े जल संकट की ओर ले जा रही है। भारत भर में 150 प्रमुख जलाशयों में जल स्तर वर्तमान में 31 प्रतिशत है, दक्षिण भारत में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र हैं, जिसके 42 जलाशय वर्तमान में केवल 17 प्रतिशत क्षमता पर हैं। यह भारत के विभिन्न क्षेत्रों में देखी गई सबसे कम जल क्षमता का प्रतीक है। स्थिति अन्य क्षेत्रों में भी चिंताजनक है, पश्चिम में 34 प्रतिशत और उत्तर में 32.5 प्रतिशत जलाशय क्षमता है। पूर्वी और मध्य भारत की स्थिति बेहतर हैं, उनके पास अपने जलाशयों की सक्रिय क्षमता का क्रमश: 40.6 प्रतिशत और 40 प्रतिशत है, पिछले वर्ष वर्षा कम थी, विशेष रूप से दक्षिण भारत में, 2023 का मानसून असमान था, क्योंकि यह अल नीनो वर्ष भी था, एक जलवायु पैटर्न जो आम तौर पर इस क्षेत्र में गर्म और शुष्क परिस्थितियों का कारण बनता है। इससे काफी चिंता पैदा हुई है।  <br />लंबे समय तक पर्याप्त बारिश न होने के कारण जल भंडारण में यह कमी आई है। जिसके चलते कई क्षेत्रों में सूखे जैसे और असुरक्षित हालात पैदा हो गये हैं। जिससे विभिन्न फ सलों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इसका एक कारण यह भी है कि देश की आधी कृषि योग्य भूमि आज भी मानसूनी बारिश के निर्भर है। ऐसे में सामान्य मानसून की स्थिति पर कृषि का भविष्य पूरी तरह निर्भर करता है। वास्तव में लगातार बढ़ती गर्मी के कारण जल स्तर में तेजी से गिरावट आ रही है। इसके गंभीर परिणामों के चलते आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में पानी की कमी ने गंभीर रूप धारण कर लिया है। देश का आईटी हब बेंगलुरु गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। जिसका असर न केवल कृषि गतिविधियों पर पड़ रहा है बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। ऐसे में किसी आसन्न संकट से निपटने के लिए जल संरक्षण के प्रयास घरों से लेकर तमाम कृषि पद्धतियों और औद्योगिक कार्यों तक में तेज करने की जरूरत है।  </p>
<p>आबादी में वृद्धि के साथ पानी की खपत बेतहाशा बढ़ी है, लेकिन पृथ्वी पर साफ पानी की मात्रा कम हो रही है। जलवायु परिवर्तन और धरती के बढ़ते तापमान ने इस समस्या को गंभीर संकट बना दिया है। दुनिया के कई हिस्सों की तरह भारत भी जल संकट का सामना कर रहा है। वैश्विक जनसंख्या का 18 प्रतिशत हिस्सा भारत में निवास करता है, लेकिन चार प्रतिशत जल संसाधन ही हमें उपलब्ध है। भारत में जल-संकट की समस्या से निपटने के लिये प्राचीन समय से जो प्रयत्न किये गये है, उन्हीं प्रयत्नों को व्यापक स्तर पर अपनाने एवं जल-संरक्षण क्रांति को घटित करने की अपेक्षा है।</p>
<p>हमारे यहां जल बचाने के मुख्य साधन हैं नदी, ताल एवं कूप। इन्हें अपनाओं, इनकी रक्षा करो, इन्हें अभय दो, इन्हें मरुस्थल के हवाले न करो। गांव के स्तर पर लोगों के द्वारा बरसात के पानी को इकट्ठा करने की शुरुआत करनी चाहिये। उचित रख-रखाव के साथ छोटे या बड़े तालाबों को बनाकर या उनका जीर्णोद्धार करके बरसात के पानी को बचाया जा सकता है। धरती के क्षेत्रफ ल का लगभग 70 प्रतिशत भाग जल से भरा हुआ है। परंतु, पीने योग्य जल मात्र तीन प्रतिशत है। इसमें से भी मात्र एक प्रतिशत मीठे जल का ही वास्तव में हम उपयोग कर पाते हैं। </p>
<p><strong>- ललित गर्ग</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 May 2024 10:50:55 +0530</pubDate>
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                <title>रामकल्याण ने सीने पर गोली खाई पर फिर भी थामे रहे तिरंगा  </title>
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                        <![CDATA[शहीद राम कल्याण बूंदी प्रजा मंडल के अध्यक्ष और बूंदी नगर पालिका में उपाध्यक्ष के पद पर निर्वाचित हुए थे। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/ramkalyan-got-shot-on-the-chest-but-still-held-the-tricolor/article-54716"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/kota-ram.png" alt=""></a><br /><p>बूंदी। 11 अगस्त 1947 को अंग्रेजों के सामने निकाली गई तिरंगा यात्रा पर अंग्रेजों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिससे तिरंगा यात्रा में भगदड़ मच गई। फायरिंग के बावजूद नेतृत्व कर रहे शहीद राम कल्याण तिरंगा हाथों में लेकर भारत माता की जय के नारे लगाते रहे। अंग्रेजों की चेतावनी के बावजूद स्वतन्त्रता सैनानी राम कल्याण ने तिरंगा नहीं छोड़ा और सीने में गोली खाकर अपना बलिदान दे दिया। जहां पर यह शहीद हुए वहां इनका स्मारक बना हुआ है और मूर्ति स्थापित हैं और सर्किट हाउस से खोजा गेट वाले रोड़ का नामकरण भी शहीद राम कल्याण के नाम पर किया गया हैं।भारत देश अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। पूरे देश भर में अमृत महोत्सव को लेकर उत्साह है। जोर शोर से तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है। घर-घर तिरंगे लगाए जा रहे हैं। देश की स्वतन्त्रता की बलिवेदी पर न्योछावर होने वाले शहीदों, स्वतन्त्रता सैनानियों को याद कर रहे हैं। उन तमाम ज्ञात अज्ञात सैनानियों के त्याग और बलिदान से आने वालीं पीढ़ी को बताया जा रहा हैं। ऐसे में उन स्वतन्त्रता सैनानियों की चर्चा आवश्यक हो जाती हैं, जिनके त्याग और बलिदान को हम विस्मृत कर चुके हैं -शहीद राम कल्याण के दोहिते सौभाग्य शर्मा बताते हैं कि 1912 में जन्में शहीद राम कल्याण के पिता बून्दी के राजपरिवार के लिए खाना पकाने का काम करते थे। स्वयं मेहनत मजदूरी करते हुए पढ़ाई की और वकीलों के पास मुंशी का काम करते हुए ही वकील बने। शहीद राम कल्याण बूंदी प्रजा मंडल के अध्यक्ष और बूंदी नगर पालिका में उपाध्यक्ष के पद पर निर्वाचित हुए थे। इनके विवाह भंवरी बाई से हुआ था, जिनसे दो संताने हुई। सौभाग्य शर्मा ने बताया कि 11 अगस्त 1947 को अपनी तांगे से सुबह करीब नौ बजे घर से हिंडोली कोर्ट के लिए निकले। राम कल्याण अपनी दोनों पुत्रियों को विद्यालय छोड़कर बूंदी के नाहर चोहट्टा स्थान तक पहुंचे। जहां जानकारी मिली थी आज मोटर व्यवसाय एसोसिएशन के आंदोलन के जुलूस का नेतृत्व करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में राम कल्याण त्वरित निर्णय लिया और अपने तांगे वाले को वापस लौटा दिया और खुद पैदल जुलूस का नेतृत्व करने के लिए निकल गए।</p>
<p>अंग्रेजी प्रशासन द्वारा शहर के परकोटे में धारा 144 लगा देने से मोटर व्यवसाय एसोसिएशन के आंदोलन के जुलूस शहर के परकोटे के बाहर निकाला गया, जिसे थोड़ा आगे बढ़ने पर अंग्रेज पुलिस ने रोक दिया गया। शहीद रामकल्याण शर्मा जुलूस में सबसे आगे तिरंगा थामे चल रहे थे। पुलिस द्वारा जुलूस रोकने के बाद जुलूस में शामिल लोगों पर हवाई फायरिंग करने से मची भगदड़ मच गई। ऐसे में बचने के लिए लोग इमली के पेड़ों पर चढ़ गए। लेकिन शहीद रामकल्याण शर्मा झंडे को लिए कुछ लोगों के साथ वही डटे रहे। अंग्रेजों द्वारा उनसे जुलूस बंद करने, झंडे को छोड़कर परिवार की दुहाई देते हुए चले जाने को कहा। लेकिन राम कल्याण ने भारतीय तिरंगे को नहीं छोड़ा और कई चेतावनी के बाद भी शहीद रामकल्याण शर्मा जीवन की परवाह किए बिना वहीं डटे रहे। आखिर में पुलिस द्वारा उन पर गोली चला दी गई और वह तिरंगे को सीने से लगाए धरती पर गिर पड़े। देखते ही देखते सारी भीड़ तीतर भीतर हो गई। गोली लगने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका और आजादी के दिवस से महज 4 दिन पूर्व उन्होंने तिरंगे की शान में अपना बलिदान दे दिया।</p>
<p><strong>आंख में गोली लगने से अभय शंकर गुजराती की रोशनी चली गई</strong><br />जिस आंदोलन में शहीद राम कल्याण ने अंग्रेजों की गोली खाकर अपना बलिदान दिया, उसी आंदोलन में पुलिस ने गोलीबारी में अभय शंकर गुजराती ने अपनी आंखों की रोशनी चली गई। गुजराती के पौत्र विकास शर्मा बताते हैं कि 11 अगस्त 1947 को हुई गोलीबारी में एक गोली उनकी आंख में लगी और गोली के कारतूस से अभय शंकर गुजराती की कलाई और जांघ घायल हो गई। इनकी आंख में लगी गोली तो डॉक्टरों ने निकाल ली लेकिन बाकी दो गोले उनके आखिरी समय तक उनके शरीर में मौजूद रहे। अभय शंकर गुजराती का जन्म 21 नवंबर 1913 को बूंदी जिले के जमींदार घराने में मूलचंद एवं भंवरी बाई उर्फ जाना बाई के घर हुआ था। लेकिन बाल्यावस्था में ही पिता की मौत के बाद मां की शिक्षा ने आजादी की लड़ाई में कूदने के लिए प्रोत्साहित किया। 12 वर्ष की उम्र से ही इनके मन में दासता से मुक्त होने की लहरें उमड़ने लगी थी। इनके स्वतंत्रता आंदोलनों में व्यस्त रहे, जिसके कारण उनकी जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया ताक कछ को अंग्रेजों ने जब्त कर लिया। परिणामस्वरूप, उन्हें जीवन यापन के लिए एक ब्रिटिश इलेक्ट्रिक कंपनी में बस मैकेनिक और बस ड्राइवर की नौकरी करनी पड़ी। वर्ष 1926 में एक सभा के दौरान ब्रिटिश सेना के लाठीचार्ज में अभय शंकर गुजराती गंभीर रूप से घायल हो गये। कांग्रेस की नीति और सिद्धांत से प्रभावित जानकारी हुई तो 18 वर्ष की आयु में पार्टी के सदस्य बनकर गोष्ठियां, प्रभात फेरी आयोजित करने लगे। ऋषि दत्त मेहता, केसरी लाल कोटिया से कांग्रेस के उद्देश्यों सीखने वाले अभय शंकर गुजराती को हरावल दस्ते के रूप में जाना जाता था। देश को मिली आजाद के बाद अभय शंकर गुजराती स्वतंत्र भारत में सेनानी तो बन गए, लेकिन सरकार ने उनकी कोई कदर नहीं की। गुजराती के पुत्र मुकुट बिहारी गुजराती बताया कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान के लिए राज्य सरकार ने 2 अक्टूबर 1987 को ताम्रपत्र से सम्मानित किया और 14 नवम्बर 1987 को स्वतंत्रता सेनानी पेंशन प्रदान की। स्वतंत्रता सेनानी अभय शंकर गुजराती का निधन 3 फरवरी 2004 को हुआ था। जिनका पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।  हांलाकि इनके मन में सरकार की उदासीनता को लेकर खिन्नता भी हैं कि 750 बीघा जमीन के मालिक होने के बावजूद आराम की जिन्दगी जीने की जगह उन्होंने आजादी की लड़ाई में अपना सब कुछ लुटा दिया। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Aug 2023 15:48:16 +0530</pubDate>
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                <title>वर्ल्ड पॉपुलेशन डे: जिंदगी खूबसूरत है, लेकिन जब ये बोझ बन जाए तो!</title>
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                        <![CDATA[सोचने पर मजबूर है दुनियां दानिश, जिंदगी तेरा वजूद क्या, आबाद है देश वही जो बढ़ती आबादी का ख्याल रखे। जनसंख्या पर नियंत्रण या घटते हुए संसाधनों पर चिंता करने से क्या ये सवाल, ये समस्या हल हो जाएगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/world-population-day-life-is-beautiful-but-when-it-becomes/article-14020"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/world-population-new.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> सोचने पर मजबूर है दुनियां दानिश, जिंदगी तेरा वजूद क्या, आबाद है देश वही जो बढ़ती आबादी का ख्याल रखे। जनसंख्या पर नियंत्रण या घटते हुए संसाधनों पर चिंता करने से क्या ये सवाल, ये समस्या हल हो जाएगी। समय-समय पर ये सवाल उठता रहा है, जिन्हें फिल्मों ने अपने तरीके से आम लोगों के सामने रखा। आज हम ऐसी ही कुछ फिल्मों का जिक्र करेंगे, जो परिवार  के माध्यम से देश को जागरूक करती हैं।</p>
<p><strong>दंगल:</strong> ये फिल्म इस सोच का खंडन करती है कि बेटे की चाहत में बेटियां पैदा करते जाओ क्योंकि बेटा न हुआ तो वंश, नाम खत्म हो जाएगा। बेटियां भी ये काम गर्व के साथ कर सकती हैं।</p>
<p><strong>परिवार:</strong> बढ़ते परिवार का बोझ जब बढ़ता जाता है तो इंसान टूट जाता है। सीमित परिवार ही सुखी परिवार होता है, उसे रोकने के लिए जो भी कदम उठाने पड़े उठाने चाहिए।</p>
<p><strong>पिया का घर:</strong> ये फिल्म भी छोटे घरों में बड़े परिवार की समस्या को उजागर करती है। अपनी इच्छाओं को मार के जीना भी कोई जीना है। परिवार छोटा तो देश का हर परिवार सुखी।</p>
<p><strong>जल: </strong> पानी की समस्या और पर्यावरण को बढ़ती हुई आबादी की दुविधा से जोड़ के दर्शाती है ।</p>
<p><strong>कड़वी हवा:</strong> आबादी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बीच असंतुलन के दुष्प्रभाव ये फिल्म दिखाती है।</p>
<p><strong>कृष 3:</strong> ये फिल्म वायरस और घनी आबादी वाले देशों में होने वाले भयंकर दुष्परिणामों पर इसके पड़ने वाले सीधे असर को दिखाती है, जो हमने कोरोना काल में भी देखा कि घनी आबादी के बीच कोई भी महामारी कितनी आसानी से फैलती है और किस तरह पूरा देश श्मशान घाट बन जाता है। वर्ल्ड पॉपुलेशन डे इसलिए बनाया जाता है कि इसकी गंभीरता को लोग समझे, जागरूक हो और अपनी सेहत, भविष्य व देश की खुशहाली का ख्याल रखे।</p>
<p>ऐसी कुछ और भी हैं फिल्में ताकि लोग ये समझे के ‘बच्चे एक या दो ही अच्छे’, इसलिए कई फिल्में हेलमेट, छतरी, पोस्टर बॉयज और जन हित में जारी, जागरूक करती हैं, हर उम्र के आदमी-औरत को कि कंडोम खरीदना या उसका उपयोग करना गलत या शर्म की बात नहीं है बल्कि अपने परिवार, अपने समाज, अपने देश के प्रति जिम्मेदारी है, जिसे उठाकर हर देशवासी देश के लिए, दुनिया के लिए, अपना योगदान करे तो ये दुनिया खूबसूरत और बहुत अच्छी बन सकती है, जहां हर जीवन, भुखमरी, बेरोजगारी, लाचारी और बेगारी से निजात पा सकता है। शुरुआत कहीं से भी हो, होगी तो ही बदलाव आएगा।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Jul 2022 15:24:31 +0530</pubDate>
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                <title>सलमान के वकील हस्तीमल सारस्वत को जान की धमकी: लारेंस गुर्गें का हाथ होने का अंदेशा</title>
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                        <![CDATA[लारेंस विश्रोई इन दिनों अजमेर की हाई सिक्युरिटी जेल में है। पंजाबी सिंग मूसेवाला की हत्या गत दिनों हुई थी। जिसमें भी लारेंस विश्रोई का नाम आरंभिक तौर पर सामने आया था। उससे पंजाब पुलिस भी पूछताछ कर चुकी है। लारेंस विश्रोई इससे पहले सलमान खां और उसके पिता सलीम खां को भी धमकी वाला पत्र भिजवा चुका है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/salman-s-lawyer-hastimal-saraswat-has-been-threatened-with-life--fears-of-lawrence-s-henchmen-s-hand/article-13741"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/new-2.jpg" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। कुख्यात अपराधी लारेंस विश्रोई द्वारा फिल्म अभिनेता सलमान खां को जान की धमकी के बाद अब उसे अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत को जान की धमकी मिली है। सारस्वत ने इस बारे में एक परिवाद पुलिस आयुक्त को दिया है। जिसके आधार पर अब महामंदिर पुलिस थाने में इसकी शिकायत दर्ज की गई है। पुलिस इस धमकी भरे पत्र पर तफ्तीश कर रही है। धमकी के पीछे लारेंस गैंग के गुर्गें का हाथ होने की आशंका भी जताई जाती है। दो लाइन में लिखीं इस धमकी में किसी सिरफिरे का भी हाथ हो सकता है। दो लाइन में लिखे इस पत्र में मूसेवाला जैसा हाल करेंगे, सलमान का दोस्त हमारा दुश्मन है। अंत में एलबी और जीबी लिखा है। पुलिस इसकी तस्दीक कर रही है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार पुराना हाईकोर्ट के जुबली चेंबर की कुंडी में धमकी भरा पत्र पाया गया है। बताया गया कि धमकी में लॉरेंस बिश्नोई और उसके गुर्गे का संकेत दिया गया है। एहतियात के तौर पर हस्तीमल सारस्वत के घर पर सिक्योरिटी लगाई गई है। इस बारे में खुफिया पुलिस भी नजर रखे हुए है। बता दें कि ऐसी ही धमकी भरा पत्र सलमान और सलमान के पिता सलीम खान को भी मिला था। महामंदिर थानाधिकारी लेखराज सिहाग ने बताया कि परिवाद पर जांच की जा रही है। सारस्वत थाना क्षेत्र में निवास करते है ऐसे में उनके घर के बाहर सुरक्षा भी बढ़ाई जा रही है। बता दें कि लारेंस विश्रोई इन दिनों अजमेर की हाई सिक्युरिटी जेल में है। पंजाबी सिंग मूसेवाला की हत्या गत दिनों हुई थी। जिसमें भी लारेंस विश्रोई का नाम आरंभिक तौर पर सामने आया था। उससे पंजाब पुलिस भी पूछताछ कर चुकी है। लारेंस विश्रोई इससे पहले सलमान खां और उसके पिता सलीम खां को भी धमकी वाला पत्र भिजवा चुका है।</p>
<p><strong>पहले भी मिल चुकी धमकी:</strong></p>
<p>अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने पुलिस को दिए परिवाद में बताया कि उनके सहायक अधिवक्ता जितेंद्र प्रसाद विश्रोइ की तरफ से धमकी पत्र की जानकारी 3 जुलाई को हुई थी। वे सवा माह तक भारत से बाहर थे। इससे पहले साल 2018 में जब सलमान खां अवैध हथियारों के मामले में बरी हुआ तब अंतरराष्ट्रीय डॉन रवि पुजारी ने भी जान की धमकी दी थी। वक्त घटना भी पुलिस ने सुरक्षा प्रदान की थी।</p>
<p><strong>इनका कहना है :</strong></p>
<p>मैं पिछले सवा महिने से भारत से बाहर था। जोधपुर आने पर मेेरे कार्मिक ने बताया कि उनके पुराना हाईकोर्ट के  चेंंबर की कुंडी में एक पर्ची मिली है। जिसमें धमकी लिखी हुई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घर और कार्यालय के बाहर सुरक्षा बढ़ाई है। अब पुलिस इसमें जांच कर रही है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Jul 2022 15:38:10 +0530</pubDate>
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                <title>शॉर्ट कट के चक्कर में दांव पर लगा रहे जिंदगी</title>
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                        <![CDATA[ शहरवासी यातायात नियमों का उल्लंघन करने से बाज नहीं आ रहे। चंद मिनट की दूरी से बचने के लिए वाहन चालक शॉटकर्ट ले रहे हैं। व्यस्तम मार्ग पर एक साइड से आ रहे वाहनों के सामने विपरीत दिशा में वाहन दौड़ा रहे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/life-is-at-stake-in-the-affair-of-short-cut/article-13452"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/short-cut-ke-chakkar-mei-daav-par-laga-rahe-zindagi.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहरवासी यातायात नियमों का उल्लंघन करने से बाज नहीं आ रहे। चंद मिनट की दूरी से बचने के लिए वाहन चालक शॉटकर्ट ले रहे हैं। व्यस्तम मार्ग पर एक साइड से आ रहे वाहनों के सामने विपरीत दिशा में वाहन दौड़ा रहे हैं। ऐसा करने से वे खुद के साथ दूसरों की जिंदगी भी खतरे में डाल रहे हैं। हालात यह है, गत ढाई सालों में हेलमेट के बाद सबसे ज्यादा चालान रोंग साइड के बने हैं। आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2020 से अप्रेल 2022 तक 37 हजार 669 लोग चालान कटवाकर लाखों रुपए भुगत चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या बाइकर्स की हैं। शहर में जिन सड़कों पर दाएं से बायं जाने के लिए कोई कट बना हुआ नहीं है या पुलिस द्वारा बंद कर दिया हो वहां से यू-टर्न लेने के लिए लंबा चक्कर से बचने को बाइक सवार रोंग साइड में घुस जाते हैं। जिन सड़कों पर कंजेक्शन ज्यादा रहता है वहां तो यह ट्रेंड आम हो चला है। शहर के मुख्य मार्ग एरोड्रम सर्किल, अंटाघर, जेल चौराहा, घोड़े वाले चौराहा पर हर दिन ऐसे ही हालात बने रहते हैं।<br /><br /><strong>डिवाइडर पार कर रोंग साइड में घुस रहे बाइकर्स</strong><br />ट्रैफिक पुलिस की सख्ती के बावजूद दुपहिया वाहन चालक नियमोें की पालना नहीं कर रहे। एयरोड्रम सर्किल स्थित पंजाब नेशनल बैंक से छावनी की ओर जा रही स्लीप लेन पर बाइक सवार रोंग साइड में घुसकर चौराहे की ओर जाते हैं। वहीं सुवालाल कचौरी वाले के पास रोटरी बिनानी सभागार की तरफ से आने वाले बाइकर्स एयरोड्रम जाने वाली वन-वे सड़क पर डिवाइडर पार कर  रोंग साइड में घुस जाते हैं। जिससे वे खुद के साथ दूसरों की जिंदगी भी खतरे में डाल देते हैं। फ्लाईओवर के नीचे से गुजर रही दोनों सड़कों पर वाहनों का दबाव अधिक होने से हादसे की आशंका बनी रहती है। पूर्व में यहां कई बार हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद लोग सुघरने को तैयार नहीं है। <br /><br /><strong>डिवाइडर की ऊंचाई बढ़वाएंगे</strong> <br />रोटरी बिनानी सभागार के सामने फ्लाईओवर के नीचे सड़क की दोनों साइडों के बीच कट बना हुआ है। जहां से बाइकर्स शोर्टकट के चक्कर में सड़क की एक साइड से दूसरी साइड में घुस रहे हैं। पुलिस ने अस्थाई रूप से बेरीकेडिंग लगाकर एक तरफ का कट बंद किया हुआ है। इसके बावजूद दुपहिया वाहन चालक डिवाइडर पार कर रोंग साइड जा रहे हैं। हमने यूआईटी को डिवाइडर की ऊंचाई बढ़ाने को कहा है। वहीं, ट्रैफिक पुलिस डिवाइडर पर भी बेरीकेडिंग लगाएगी, ताकि वाहन चालक डिवाइडर पार कर रोंग साइड में न जा सके। <br /><strong>- धर्माराम गिला, डीएसपी ट्रैफिक पुलिस</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Jul 2022 15:05:48 +0530</pubDate>
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                <title>तेज अंधड़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त </title>
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                        <![CDATA[ शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में बुधवार को तेज अंधड़ व तूफान से जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त सा नजर आने लगा। तेज तूफान के चलते मुख्य बाजार में दुकानों के सामने लगे टीनशेड हवा में उड़ गए तो ग्रामीण क्षेत्र में जगह जगह सैकड़ों पेड धराशाही हो गए।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bharatpur/-heavy-storm-disrupted-life/article-13300"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/m-21.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नदबई।</strong>  शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में बुधवार को तेज अंधड़ व तूफान से जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त सा नजर आने लगा। तेज तूफान के चलते मुख्य बाजार में दुकानों के सामने लगे टीनशेड हवा में उड़ गए तो ग्रामीण क्षेत्र में जगह-जगह सैकड़ों पेड धराशाही हो गए। विद्युत निगम के करीब 60 से अधिक विद्युत पोल टूटने से शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में विद्युत व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई। ऐसे में लोगों को विद्युत अव्यवस्था के साथ ही पानी की समस्या से जूझना पडेगा।</p>
<p>सड़कों के बीच पेड टूटकर गिरने से कई जगह यातायात बाधित होने की सूचना भी मिल रही। नदबई डहरामोड और नदबई कुम्हेर मार्ग पर कई जगह पेड़ गिरने से यातायात बाधित होने की सूचना मिली। उधर, नगर पालिका प्रशासन शहरी क्षेत्र में धराशाही हुए पेडों को हटाते हुए यातायात संचालन करने के प्रयास में जुट गया तो विद्युतकर्मियों की टीम विद्युत पोलों को दुरुस्त करने में जुट गई।<br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>भरतपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jun 2022 14:53:57 +0530</pubDate>
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                <title>बड़ों को प्रणाम करने से बढ़ता है आयु और बल</title>
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                        <![CDATA[जयपुर। संस्कृत अकादमी में विद्यार्थियों के लिए तीन दिवसीय संस्कार-संस्कृति शिविर के तीसरे और अन्तिम दिन स्वतन्त्रता आन्दोलन और युवा तथा मीडिया, सोशल मीडिया और युवा विषय पर जाने माने पत्रकार और लेखक यशवन्त व्यास, जन सम्पर्क विभाग के अतिरिक्त निदेशक गोविन्द पारीक ने अपने विचार रखे। समापन समारोह के मुख्य अतिथि कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला थे। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/saluting-elders-increases-life-and-strength/article-13070"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/103.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। संस्कृत अकादमी में विद्यार्थियों के लिए तीन दिवसीय संस्कार-संस्कृति शिविर के तीसरे और अन्तिम दिन स्वतन्त्रता आन्दोलन और युवा तथा मीडिया, सोशल मीडिया और युवा विषय पर जाने माने पत्रकार और लेखक यशवन्त व्यास, जन सम्पर्क विभाग के अतिरिक्त निदेशक गोविन्द पारीक ने अपने विचार रखे। समापन समारोह के मुख्य अतिथि कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला थे। ये आयोजन झालाना स्थित अकादमी संकुल में  आज़ादी के अमृत महोत्सव के अन्तर्गत कला एवं संस्कृति विभाग, राजस्थान संस्कृत अकादमी, राजस्थान ललित कला अकादमी, राजस्थान सिंधी अकादमी एवं करुणा संस्थान के संयुक्त तत्त्वावधान में किया जा रहा है। तीन दिवसीय समारोह में चित्रकला प्रतियोगिता, रामायण आधारित प्रश्नमाला और महाभारत आधारित प्रश्नमाला प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। समापन पर तीनों प्रतियोगिताओं के विजेताओं को डॉ. बी.डी. कल्ला ने प्रमाण पत्र वितरित किए।<br /> <br /><strong>बड़ों को प्रणाम करने से बढ़ता है आयु और बल- डॉ. बी.डी. कल्ला</strong><br />डॉ. बी.डी. कल्ला ने अपने उद्बोधन में बड़ों को प्रणाम किए जाने की महत्ता पर रोशनी डालते हुए कहा कि जो अपने से बड़ों को प्रणाम करता है उससे उसकी आयु और बल स्वतः ही बढ़ जाते हैं। अगर हम अपने जीवन में आचार्य देव भव, पित्र देवो भव और मात्र देवो भव का भाव जगा लें तो हमारे जीवन की अनेक कठिनाईयां स्वतः ही समाप्त हो सकती है। उन्होंने कहा इनसान के जीवन में सत्य ही सबसे बड़ा धर्म है। मोबाइल के अनावश्यक बढ़ते दुरूप्योग के के प्रति उन्होंने वहां मौजूद बच्चों को जागरूक करते हुए कहा कि मोबाइल के अनावश्यक इस्तेमाल से बच्चे कई तरह की विकारों और बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों को बच्चों को 12वीं कक्षा तक मोबाइल नहीं देने की सलाह दी। कल्ला ने कहा कि इसके बाद बच्चा स्वतः ही परिपक्व हो जाएगा और मोबाइल का सही इस्तेमाल करने का अभ्यस्त हो जाएगा।</p>
<p><br /><strong>इंटरनेट के जरिए ज़िंदगी को बेहतर बनाया जा सकता है - यशवन्त व्यास</strong><br />इस मौके पर अपने उद्बोधन में यशवन्त व्यास ने कहा कि इंटरनेट का सही इस्तेमाल सीखें क्योंकि इंटरनेट ऐसी चीज है जिसके जरिए ज़िंदगी को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा लिखना चाहिए जो असरकारक और सत्य हो। ऐसा लिखें जिसमें संशोधन की गुंजाइश नहीं हो। उन्होंने आज की युवा पीढ़ी की तारीफ करते हुए कहा कि आज के युवाओं के हौसले ही से दुनिया आगे बढ़ रही है। इससे पूर्व सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के अतिरिक्त निदेशक गोविन्द पारीक ने स्वतंत्रता आन्दोलन में देश के युवाओं के योगदान पर सारगर्भित और जानकारी से परिपूर्ण उद्बोधन दिया। उन्होंने देश के लिए बलिदान देने वाले शहीद भगत सिंह, चंदेशेखर आजाद सहित अनेक युवाओं के योगदान को रेखांकित किया।<br /> <br /><strong>चित्रकला प्रतियोगिता के विजेता</strong><br />सारिका राणा, विनायक घोचक, सीमा मण्डल, रोसी जयकुमार और राज पारीक।<br />रामायण आधारित प्रश्नमाला प्रतियोगिता -आयुष ढोकवाल, पिंकी कुमारी बैरवा, कार्तिकेय शर्मा, ईशान झाला , रोशनी बलाई।<br />महाभारत आधारित प्रश्नमाला प्रतियोगिता -संयुक्ता पापड़ीवाल, नेहा महावर, अनूप जाटव, सम्यक जैन और भार्गवी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jun 2022 18:25:34 +0530</pubDate>
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                <title>ब्रेन डेड युवक ने अंगदान कर चार को दी नई जिंदगी</title>
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                        <![CDATA[लिवर और एक किडनी महात्मा गांधी अस्पताल, एक किडनी और हार्ट एसएमएस में लगाया]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/brain-dead-youth-donated-organs-and-gave-new-life-to-four/article-12986"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/doctor-with-patient.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> सवाईमानसिंह अस्पताल में शुक्रवार को चौथा हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। जयपुर के फोर्टिस हॉस्पिटल में ब्रेन डेड मरीज के अंगदान के बाद ये ट्रांसप्लांट किया गया। हार्ट के अलावा मरीज की दोनों किडनी और लिवर भी डोनेट किए गए, जिससे कुल चार लोगों की जिंदगी बचाई गई। प्रदेश में किया गया यह 11वां हार्ट ट्रांसप्लांट है। ब्रेनडेड 36 वर्षीय राजेन्द्र शिंदे मूलत: महाराष्टÑ के पुणे का रहना वाला था और यहां सीकर रोड पर गोविंदगढ़ में काम करता था। सड़क हादसे में घायल होने के बाद राजेन्द्र को फोर्टिस लाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद डॉक्टर्स ने अंगदान के लिए राजेन्द्र की पत्नी से समझाइश की जो अंगदान के लिए तैयार हो गई। एक किडनी और हार्ट को ग्रीन कोरिडोर से ट्रांसप्लांट के लिए एसएमएस हॉस्पिटल में लाया गया जबकि एक किडनी व लिवर महात्मा गांधी हॉस्पिटल में जरूरत मंद मरीजों को लगाया गया।</p>
<p><strong>आठ घंटे चला ट्रांसप्लांट</strong><br />एसएमएस हॉस्पिटल के सीनियर प्रोफेसर और सिटी सर्जरी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. राजकुमार यादव और आचार्य डॉ. रामगोपाल यादव ने बताया कि सुबह करीब 10.30 बजे हार्ट को एसएमएस हॉस्पिटल लाया गया और शाम 6.30 बजे तक सर्जरी चली। जहां अलवर निवासी 40 साल की महिला धोली देवी को हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। महिला की तबीयत अब ठीक है और उसे आईसीयू में रखा गया है। महिला को करीब चार साल से हार्ट की समस्या थी और पांच दिन पहले ही उसे कार्डियक अरेस्ट आया था। ऐसे में अब हार्ट ट्रांसप्लांट ही अंतिम उपाय था। जैसे ही शुक्रवार सुबह डोनर मिला तो महिला का आॅपरेशन करके उसे दूसरा हार्ट लगाया गया। इस दौरान सीनियर प्रोफेसर डॉ. अनिल शर्मा ने भी अपना सहयोग दिया। इस दौरान टीम में डॉ. रामस्वरूप सैन, डॉ. राजेन्द्र महावर, डॉ. देवी प्रसाद सैनी, डॉ. राजेश शर्मा के अलावा एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट से डॉ. रीमा मीणा, डॉ. अंजुम सैयद, डॉ. अरूण और नर्सिंग स्टाफ  संतोष, रोशन यादव, विश्वनाथ शर्मा समेत अन्य स्टाफ  मौजूद रहे!</p>
<p><strong>पहली बार पुरुष का हार्ट महिला को लगाया</strong><br />सीनियर प्रोफेसर डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी पुरुष का हार्ट महिला मरीज को लगाया गया है। एक पुरुष का हार्ट बड़ा होता है और महिला का छोटा और पुरुष के मुकाबले थोड़ा कमजोर होता है। ऐसे में पुरुष का हार्ट महिला को लगाए जाने से ट्रांसप्लांट के रिजल्ट अच्छे रहते हैं। <br /><br /> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jun 2022 12:38:07 +0530</pubDate>
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                <title>आज का 'राशिफल'</title>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/horoscope/todays-horoscope/article-12690"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/rashifal06.gif" alt=""></a><br /><p>मेष - दिन सामान्य रहेगा। स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो सकती है। सिर दर्द, दांत दर्द की शिकायत की संभावना, चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लें। खान पान पर नियंत्रण रखें। व्यापार में उतार चढाव की स्थिति बनी रहेगी। मौसमी बीमारी से परेशानी बढ सकती है।</p>
<p>वृष - मानसिक परेशानी वाला दिन है, आय में कमी होगी। नौकरी, व्यापार में बाधा उत्पन्न होने से मन विचलित रहेगा। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है। अधीनस्थों के व्यवहार से व्यापार में हानि होने की संभावना। भूमि विवाद या पैतृक संपत्ति में हानि होने की संभावना है।</p>
<p>मिथुन - राज्य पक्ष से लाभ मिलने की संभावना है, संभलकर कदम उठाएं, अवश्य लाभ मिलेगा। आय के साधन बढेंगे। अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा। संतान की शिक्षा को लेकर चल रही परेशानी दूर होगी। व्यापारी वर्ग के लिए अनुकूल समय है।</p>
<p>कर्क - दिन संभल कर व्यतीत करें, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड सकता है। खानपान पर नियंत्रण रखें। माता से विवाद संभव है। माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी रहेगी। व्यापार में हानि की संभावना है। भूमि संबंधी मामलों में हानि की संभावना है।</p>
<p>सिंह - दिन उत्तम है। बहुत दिनों से रूके कार्य आज पूरे होंगे। नौकरीपेशा लोगों को उन्नति के अवसर मिलेंगे। विद्यार्थी वर्ग के लिए भी लाभदायक समय है। शेयर  से लाभ होगा। रूका हुआ धन प्राप्त होगा। पुराने मित्रों से मुलाकात होगी। व्यापार में नए आयाम स्थापित करेंगे।</p>
<p>कन्या -  मानसिक अशांति वाला दिन होने से स्वयं को नियंत्रित रखना आवश्यक है। स्वास्थ्य की दृष्टि से पेट में तकलीफ होने की संभावना है। कार्य क्षेत्र में अधीनस्थों से धोखा मिल सकता है। भागीदार ही नुकसान पहुंचाने का प्रयास करेंगे।शत्रुओं से सावधान रहें।</p>
<p>तुला - दिन उत्तम है, लेकिन जीवनसाथी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी रहेगी। कार्यक्षेत्र में गुप्त शत्रुओं को परास्त करेंगे। पिता का स्वास्थ्य ठीक होगा, संतान सुख उत्तम बनेगा। राज्य पक्ष से लाभ के अवसर मिलेंगे।  सकारात्मक सोच के साथ रहें।</p>
<p>वृश्चिक -  स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का निवारण होगा। रूके हुए काम बनेंगे। भाग्य साथ देगा, व्यापार में बडा लाभ होने की संभावना है। नया व्यापार शुरू करने की सोच रहें हैं, तो दिन उत्तम है, बुजूर्गों के आशीर्वाद से व्यापार शुरू करें, लाभ मिलेगा।</p>
<p>धनु - दिन की शुरूआत से ही मानसिक रूप से स्वयं को संतुलित महसूस करेंगे। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का निवारण होगा। रूका हुआ धन प्राप्त होगा। घर में खुशी का माहौल रहेगा।  छोटी मोटी यात्राओं से व्यापार में भी लाभ अर्जित होगा।</p>
<p>मकर - नौकरी के नए अवसर बनेंगे, आय में वृद्धि होगी। नए व्यापारिक संबंध बनेंगे। मित्रों का सहयोग मिलेगा। शत्रु परास्त होंगे। पारिवारिक माहौल संतोषप्रद रहेगा। राज्य पक्ष से लाभ मिलेगा, व्यापारिक यात्राओं का योग हैं, लाभ होगा।नया व्यापार प्रारंभ करने की संभावना।</p>
<p>कुंभ - पुराने रोगों से निजात मिलेगी। परिवार में खुशी का माहौल बनेगा। संतान व मित्रों के साथ भ्रमण का योग है। यात्राओं से लाभ होगा। आय में वृद्धि होगी, राजकीय मामले पक्ष में हल होंगे। अधीनस्थों से लाभ मिलेगा। व्यापार में लाभ होगा। स्वास्थ्य सुधरेगा।</p>
<p>मीन -दिन मिलाजुला रहेगा। मित्रों से अनबन हो सकती है। व्यापार में आ रहा उतार चढाव अब स्थिरता की ओर बढेगा, लेकिन गुप्त शत्रु व अधीनस्थों के कारण व्यापार में हानि की संभावना है। आय से अधिक व्यय होने से मानसिक रूप से परेशान रहेंगे।</p>]]>
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                <pubDate>Tue, 21 Jun 2022 13:37:42 +0530</pubDate>
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