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                <title>review - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>तेलंगाना में 'डिजिटल कैबिनेट' शुरू: सचिवालय में हुई अनौपचारिक कैबिनेट बैठक, कई अहम मुद्दों पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना सरकार ने पारदर्शिता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 'डिजिटल कैबिनेट' पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में सचिवालय में पहली पूरी तरह पेपररहित बैठक हुई। मंत्रियों को विशेष टैबलेट दिए गए, जिससे एजेंडा और सभी सरकारी दस्तावेज अब डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/digital-cabinet-started-in-telangana-informal-cabinet-meeting-held-in/article-157391"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/hydrabad.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में तेलंगाना कैबिनेट की एक अनौपचारिक बैठक शुरू हुई। इस बैठक के साथ ही 'तेलंगाना डिजिटल कैबिनेट' पहल की शुरुआत हुई, जो पेपररहित शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार ने कैबिनेट की बैठकें पूरी तरह से पेपररहित तरीके से आयोजित करने का निर्णय लिया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, कैबिनेट की चर्चा से पहले मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रियों की एक विशेष बैठक में इस फैसले को मंज़ूरी दी गयी।</p>
<p>इस पहल के अंतर्गत, आईटी एवं उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और सभी कैबिनेट मंत्रियों को खास तौर पर तैयार किए गए टैबलेट बांटे। इन टैबलेट का उपयोग कैबिनेट का एजेंडा, नोट्स और दूसरे सरकारी दस्तावेज़ डिजिटल रूप से उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा जिससे कागजी फाइलों की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बैठक शुरू होने से पहले डिजिटल कैबिनेट प्रणाली के कामकाज की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा की और इसकी कार्यप्रणाली की विशेषताओं का जायजा लिया।</p>
<p>अधिकारियों ने कहा कि तेलंगाना डिजिटल कैबिनेट पहल का उद्देश्य कुशल, पारदर्शी एवं पर्यावरण के अनुकूल कामकाज को बढ़ावा देना है और राज्य को पूर्ण डिजिटल प्रशासनिक व्यवस्था की ओर तेज़ी से लेकर जाना है। बैठक के लिए कैबिनेट का एजेंडा मंत्रियों को टैबलेट के माध्यम से उपलब्ध कराया गया, जिससे वे आसानी से सरकारी दस्तावेज़ देख सके और चर्चा कर सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 18:45:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>तृणमूल कांग्रेस एक राजनीतिक दल नहीं, गिरोह थी: दिलीप घोष का बड़ा हमला, बोले- जो हो रहा है वह तय था</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा नेता दिलीप घोष ने सिलीगुड़ी में तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उसे राजनीतिक संगठन के बजाय 'गिरोह' करार दिया। उन्होंने कहा कि अवसरवादी लोग फायदे के लिए टीएमसी में आए थे और अब संकट देखकर पार्टी छोड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सत्ता से बाहर होते ही यह पूरा ढांचा ढह जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%A4%E0%A5%83%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%A6%E0%A4%B2-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82--%E0%A4%97%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B9-%E0%A4%A5%E0%A5%80--%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%AA-%E0%A4%98%E0%A5%8B%E0%A4%B7-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A4%BE--%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A5%87--%E0%A4%9C%E0%A5%8B-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B5%E0%A4%B9-%E0%A4%A4%E0%A4%AF-%E0%A4%A5%E0%A4%BE/article-156675"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/dilip-ghosh.png" alt=""></a><br /><p>सिलीगुड़ी। पश्चिम बंगाल के पंचायत मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस को एक राजनीतिक संगठन के बजाय ‘गिरोह’ करार दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में यह पार्टी जिस दौर और संकट से गुजर रही है, वह ‘तय’ था। घोष ने यहां संवाददाताओं से कहा, “ जिस तरह संगठित आपराधिक गिरोह होते हैं, ठीक उसी तरह तृणमूल कांग्रेस का भी एक गिरोह था। आज पार्टी के साथ जो कुछ भी हो रहा है, वह होना ही था। अवसरवादी लोग व्यक्तिगत लाभ के लिए इसमें शामिल हुए थे और अब वे इसे छोड़कर जा रहे हैं। हमने बहुत पहले ही कहा था कि अगर तृणमूल कभी सत्ता से बाहर हुई, तो इसके इर्द-गिर्द बना पूरा ढांचा ढहने लगेगा। आज बिल्कुल वैसा ही हो रहा है।”</p>
<p>दिल्ली में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रमों और तृणमूल कांग्रेस के भीतर आंतरिक कलह की खबरों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के भविष्य को लेकर पूछे गये सवाल पर श्री घोष ने बेहद नपा-तुला जवाब दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “ पहले चीजों को सामने आने दीजिए। जब तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी, तब टिप्पणी करने के लिए काफी समय होगा।” घोष इस समय तृणमूल कांग्रेस द्वारा संचालित सिलीगुड़ी महाकुमा परिषद के कामकाज और वहां के बुनियादी ढांचे की समीक्षा करने के लिए सिलीगुड़ी पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य महाकुमा परिषद की जरूरतों का आकलन करना है। उन्होंने कहा, “ सिलीगुड़ी महाकुमा परिषद में अभी भी बुनियादी ढांचे की भारी कमी है। मैं यहां इसकी आवश्यकताओं को विस्तार से समझने आया हूं।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:27:36 +0530</pubDate>
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                <title>स्वास्थ्य विभाग में अनियमितता बर्दाश्त नहीं, जल्द होगी सिविल सर्जनों और डीपीएम की समीक्षा बैठक : निशांत कुमार</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने जदयू मुख्यालय में जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल्द ही सिविल सर्जनों के साथ समीक्षा बैठक कर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि विभाग में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/irregularities-will-not-be-tolerated-in-the-health-department-review/article-155226"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/nishant-kumar.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने बुधवार को कहा कि जल्द ही सभी जिलों के सिविल सर्जनों और डीपीएम के साथ समीक्षा बैठक कर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। जनता दल यूनाइटेड (जदयू)मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने आम लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बहुत जल्द राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जन एवं डीपीएम के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं मानकों के अनुरूप बनाने पर विस्तार से चर्चा होगी। </p>
<p>उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य विभाग में किसी भी प्रकार की अनियमितता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर पटना के वरिष्ठ चिकित्सकों की एक टीम ने स्वास्थ्य मंत्री से शिष्टाचार मुलाकात भी की। बैठक में आम लोगों को बेहतर, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। मुलाकात करने वालों में पद्मश्री डॉ .आर.एन.सिंह , डॉ. अब्दुल हई, डॉ. सहजानंद, डॉ. अखिलेश, डॉ. दिनेश एवं डॉ. रमेश प्रसाद सिंह सहित अन्य चिकित्सक शामिल थे। जनसुनवाई कार्यक्रम में परिवहन मंत्री दामोदर रावत ने भी लोगों की विभागीय समस्याएं सुनकर उनके समाधान के लिए आवश्यक पहल की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 11:48:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कीटनाशक पर प्रतिबंध लगाने से नहीं रुकेंगी किसानों की आत्महत्याएं, मूल कारण को दूर करने की आवश्यकता: क्रॉपलाइफ इंडिया</title>
                                    <description><![CDATA[क्रॉपलाइफ इंडिया ने 'पैराक्वाट' और 'कार्बोसल्फान' पर संभावित प्रतिबंध की समीक्षा के बीच सरकार से व्यावहारिक रुख अपनाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि उत्पादों को हटाने से कर्ज और फसल की बर्बादी जैसे मूल कारण खत्म नहीं होंगे। खरीफ सीजन में इन किफायती विकल्पों के अचानक बंद होने से किसानों का वित्तीय तनाव और बढ़ सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/banning-pesticides-will-not-stop-farmer-suicides-need-to-address/article-155067"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/croplife.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार के तेलंगाना में प्रतिबंध और जहर से होने वाली मौतों पर चिंता के बाद फसल सुरक्षा उत्पादों 'पैराक्वाट डाइक्लोराइड' और 'कार्बोसल्फान' की बिक्री की समीक्षा किए जाने के बीच, क्रॉपलाइफ इंडिया ने आग्रह किया है कि कोई भी निर्णय किसानों की आत्महत्या के वास्तविक कारणों की स्पष्ट समझ और गंभीर तनाव से जूझ रहे किसानों पर इस प्रतिबंध के पड़ने वाले व्यावहारिक असर को ध्यान में रखकर ही लिया जाना चाहिए। संगठन का कहना है कि किसी उत्पाद पर प्रतिबंध लगाने से साधन तो हट जाता है, लेकिन समस्या का मूल कारण खत्म नहीं होता। वास्तव में, किसी उत्पाद को प्रतिबंधित करने से वह संकट और गहरा सकता है, जो किसी किसान को अपनी जान लेने के लिए मजबूर करता है।</p>
<p>वैज्ञानिक अध्ययनों और साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि किसानों की आत्महत्या के पीछे कर्ज, फसल की बर्बादी, वैकल्पिक आजीविका का अभाव और फसल खराब होने पर ऋण चुकाने में असमर्थता जैसे निरंतर बने रहने वाले मुख्य कारण हैं। उदाहरण के लिए, 'इंडियन जर्नल ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन' में प्रकाशित वर्ष 2024 के एक गुणात्मक अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में किसानों की आत्महत्या के मुख्य कारण मानसिक स्वास्थ्य के बजाय आर्थिक हैं, जिसमें कर्ज और उसके कारण पैदा हुआ ऋण-जाल सबसे प्रमुख कारक है। इसी तरह, 'इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एनवायरनमेंट एंड डेवलपमेंट' के एक अन्य अध्ययन के अनुसार, किसानों की आत्महत्या का सीधा संबंध वर्षा की स्थिति से है।</p>
<p>पांच अत्यधिक प्रभावित राज्यों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि वर्षा में पांच प्रतिशत के बदलाव पर जहां प्रतिवर्ष औसतन 810 किसानों की आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए, वहीं वर्षा में 25 प्रतिशत की कमी होने पर यह संख्या बढ़कर 1,188 तक पहुंचने का अनुमान है। इसी अध्ययन में पाया गया कि जिन क्षेत्रों में गारंटीकृत रोजगार और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध थी, वहां फसल खराब होने के बाद भी आत्महत्या के मामलों में कमी देखी गई। इन साक्ष्यों से साफ है कि आत्महत्या एक गहरे संकट का लक्षण है, और महत्वपूर्ण फसल सुरक्षा उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने से यह संकट और बढ़ सकता है। क्रॉपलाइफ इंडिया ने सभी हितधारकों और उद्योग जगत से आग्रह किया है कि वे सरकार द्वारा आय सहायता, फसल बीमा, संस्थागत ऋण और ग्रामीण रोजगार गारंटी के माध्यम से तैयार किए गए सुरक्षा चक्र को और मजबूत करें ताकि किसानों को इस संकट से उबारा जा सके।</p>
<p>खरीफ बुवाई के सीजन की शुरुआत को देखते हुए यह मामला बेहद संवेदनशील और जरूरी हो जाता है। क्रॉपलाइफ इंडिया ने सरकार से खेतों की व्यावहारिक आवश्यकताओं पर विचार करने का अनुरोध किया है, क्योंकि किसान इस साल के लिए अपनी लागत की योजना और प्रतिबद्धता पहले ही तय कर चुके हैं। सीजन के बीच में किफायती और स्थापित खरपतवार एवं कीट नियंत्रण विकल्पों को अचानक रोकने से किसानों की लागत बढ़ेगी और उन पर वित्तीय दबाव और ज्यादा बढ़ जाएगा, जो कि इन त्रासदियों का असली कारण है।</p>
<p>यह वित्तीय दबाव मामूली नहीं है। 'निदेशालय खरपतवार अनुसंधान' (भाकृअनुप संस्थान) और 'फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया' द्वारा 11 राज्यों के 3,200 किसानों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, देश में खरपतवारों के कारण हर साल लगभग 92,000 करोड़ रुपये की फसल उत्पादकता का नुकसान होता है, जो खरीफ फसलों में 25-26 प्रतिशत और रबी फसलों में 18-25 प्रतिशत तक है। 'पैराक्वाट' का उपयोग सालाना करीब 80 लाख एकड़ भूमि पर किया जाता है और यह चाय, कपास, आलू, मक्का, कॉफी, रबर और बागवानी फसलों में खरपतवार प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बिना जुताई (जीरो-टिलेज) और संरक्षण प्रथाओं का भी समर्थन करता है जिन्हें सरकार स्वयं बढ़ावा देती है। लगभग 300-350 रुपये प्रति एकड़ की लागत के साथ, पैराक्वाट विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक अत्यधिक किफायती समाधान बना हुआ है, जिसकी लागत श्रमिकों की भारी कमी के कारण महंगी हो चुकी हाथ से निराई की तुलना में बहुत कम है। दूसरी ओर, 'कार्बोसल्फान' धान में 'गाल मिज' कीट के खिलाफ सबसे प्रभावी विकल्पों में से एक है और इसका उपयोग लगभग 32 लाख एकड़ में किया जाता है। कृषि लागत में वृद्धि और पैदावार में कमी किसानों को उसी वित्तीय तनाव की ओर धकेलती है जो इस संकट की जड़ में है।</p>
<p>क्रॉपलाइफ इंडिया के अध्यक्ष और क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड के कार्यकारी अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अंकुर अग्रवाल ने कहा, "किसी उत्पाद पर बहस करते समय हम किसानों की आत्महत्या की मुख्य चिंता से भटक रहे हैं। मुख्य मुद्दा यह है कि किसी उत्पाद को रात भर में हटा देने से किसान का संकट दूर नहीं हो जाता। कर्ज, बर्बाद हुई फसल और भविष्य का डर वैसे ही बना रहता है। यदि उद्देश्य जीवन बचाना है, तो समाधान मूल कारण तक पहुंचना चाहिए, जिसमें ऋण की उपलब्धता, फसल की उचित कीमत, फसल खराब होने पर प्रभावी बीमा और जमीनी स्तर पर बेहतर कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण शामिल हो।"</p>
<p>क्रॉपलाइफ इंडिया ने इस मुद्दे की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन और सरकार के विचारशील, परामर्शदात्री तथा विज्ञान आधारित दृष्टिकोण का स्वागत किया है। अनुसंधान एवं विकास पर आधारित 17 फसल सुरक्षा कंपनियों के शीर्ष निकाय के रूप में, क्रॉपलाइफ इंडिया इस समीक्षा में केंद्र, राज्यों और सभी हितधारकों के साथ एक भागीदार के रूप में काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है, ताकि ध्यान उस वास्तविक संकट पर केंद्रित रहे जो देश के किसानों के जीवन को प्रभावित कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 18:50:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फ्रांस में 'हीट डोम' का कहर : भीषण गर्मी से 7 लोगों की मौत, सरकार ने बुलाई आपातकालीन बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस में मई महीने की ऐतिहासिक गर्मी और अति भीषण लू (Heatwave) के कारण सात लोगों की मौत हो गई है। मौसम एजेंसी मेटियो-फ्रांस के अनुसार, 'हीट डोम' की स्थिति से तापमान 36°C तक पहुंच गया है। पेरिस मैराथन और फ्रेंच ओपन पर भी इसका असर दिखा है, जिसके बाद पीएम सेबेस्टियन लेकोर्नू ने आपातकालीन समीक्षा बैठक बुलाई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/heat-record-broken-in-france-7-people-died-due-to/article-155087"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/frace.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। फ्रांस में भीषण गर्मी के कारण सात लोगों की मौत के मामले सामने आये हैं और बढ़ते तापमान को देखते हुए दक्षिण-पश्चिम फ्रांस के समुद्र तटों पर सामान्य से अधिक भीड़ उमड़ने लगी है। इसी बीच, सरकार ने सप्ताह के अंत तक जारी रहने की आशंका वाली गर्मी से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। मौसम एजेंसी मेटियो-फ्रांस ने कहा कि सोमवार का दिन फ्रांस में मई माह का अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया। एजेंसी के अनुसार सप्ताह के दौरान कुछ क्षेत्रों में तापमान 33 से 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है।</p>
<p>फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने गुरुवार को प्रमुख मंत्रियों की बैठक बुलाई है जिसमें लू से निपटने के लिए सरकार की तैयारियों की समीक्षा की जायेगी। इसे वर्ष के शुरुआती चरण में असामान्य रूप से तेज गर्मी से जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर बढ़ती चिंता के रूप में देखा जा रहा है। पेरिस में सप्ताहांत के दौरान तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो गया। शनिवार को वर्ष 2026 में पहली बार तापमान 31.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पेरिस में रविवार को आयोजित 10 किलोमीटर दौड़ के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गयी। नागरिक सुरक्षा सेवाओं ने इसकी पुष्टि की है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार राजधानी के दक्षिण-पूर्वी उपनगर मैजों-अलफोर्ट में आयोजित एक अन्य दौड़ के दौरान 10 धावकों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया।</p>
<p>फ्रेंच ओपन टेनिस टूर्नामेंट में भी गर्मी का असर देखने को मिला, जहां सोमवार को रोलां-गैरो में दर्शकों और खिलाड़ियों को सामान्य से कहीं अधिक तापमान का सामना करना पड़ा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह असामान्य गर्मी "हीट डोम" नामक स्थिति के कारण उत्पन्न हुई है। इसके तहत उत्तरी अफ्रीका से आयी गर्म हवा पश्चिमी यूरोप के ऊपर बने उच्च दबाव क्षेत्र के नीचे फंस गयी है। पूर्वानुमान कर्ताओं का कहना है कि इस कारण तापमान मई के सामान्य स्तर से काफी ऊपर पहुंच गया है और यूरोप के बड़े हिस्से में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव जनित जलवायु परिवर्तन इन चरम परिस्थितियों को और अधिक तीव्र बना रहा है, जिससे हीटवेव अधिक बार, अधिक लंबी और अधिक गंभीर होती जा रही हैं। यूरोप वैश्विक औसत की तुलना में तेजी से गर्म हो रहा है, जिसके चलते सरकारों पर स्कूलों, अस्पतालों, परिवहन नेटवर्क और आवासीय व्यवस्थाओं को बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप ढालने का दबाव बढ़ता जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:37:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बिजली संकट पर यूपी सीएम योगी का सख्त संदेश : बोले- लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, बिना रुकावट बिजली आपूर्ति के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध बिजली देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में उत्पादन इकाइयां पूरी क्षमता से चलें। ट्रांसफार्मर खराब होने या लापरवाही पर जवाबदेही तय होगी और उपभोक्ताओं को समय पर सही जानकारी दी जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/up-cm-yogis-strict-message-on-power-crisis-negligence/article-154860"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/cm-yogi.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ में ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन एवं सभी बिजली वितरण कंपनियों के अधिकारियों के साथ प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने भीषण गर्मी और बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिना रुकावट बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए सभी उत्पादन इकाइयां पूरी क्षमता से चलाई जाएं और इनके कामों की लगातार निगरानी हो।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने प्रदेश के पारेषण तंत्र को और अधिक मजबूत, आधुनिक और भरोसेमंद बनाने पर जोर दिया। उन्होंने फीडर स्तर पर निगरानी और जवाबदेही तय करने को कहा। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि ट्रांसफार्मर खराब होने, फीडर बाधित होने या शिकायत निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन को बिजली आपूर्ति से जुड़ी सही और समयबद्ध जानकारी उपलब्ध कराई जाए। संवाद और पारदर्शिता से उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत होगा और शिकायतों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने उपभोक्ता सेवाओं को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने पर बल दिया। उन्होंने ऊर्जा मंत्री एवं विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायत निस्तारण व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 17:32:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली हाई कोर्ट ने WFI को लगाई फटकार, कहा- मातृत्व का सम्मान होता है,  विनेश को आगामी एशियन गेम्स ट्रायल में शामिल करने का दिया निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट ने पहलवान विनेश फोगाट को घरेलू प्रतियोगिताओं से बाहर करने पर रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि मातृत्व का सम्मान होना चाहिए। अदालत ने केंद्र को विशेषज्ञ समिति बनाने और विनेश को आगामी एशियन गेम्स ट्रायल में शामिल करने का निर्देश दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/delhi-high-court-reprimanded-wfi-said-motherhood-is-respected-should/article-154692"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/vinesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विनेश फोगाट को घरेलू प्रतियोगिताओं से बाहर किए जाने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने Wrestling Federation of India की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि मातृत्व का सम्मान किया जाना चाहिए और चयन नियमों में अचानक बदलाव कई सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं कि विनेश फोगाट के मामले की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई जाए और उन्हें आगामी एशियन गेम्स ट्रायल में हिस्सा लेने का अवसर दिया जाए।</p>
<p>मातृत्व अवकाश के बाद वापसी कर रहीं विनेश को डब्ल्यूएफआई ने अनुशासनहीनता और एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए नोटिस जारी किया था। साथ ही 26 जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने पर रोक लगा दी गई थी। इसी फैसले के खिलाफ विनेश ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट अब मामले में डब्ल्यूएफआई के जवाब और नियमों की वैधता पर सुनवाई कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 17:36:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संशोधित PKC-ERCP परियोजना में तेजी, चंबल जलसेतु के 3000 पाइलों का कार्य पूरा </title>
                                    <description><![CDATA[वाटर ग्रिड कॉर्पोरेशन की बैठक में संशोधित PKC-ERCP परियोजना की प्रगति रिपोर्ट पेश की गई। नौनेरा पंप हाउस की खुदाई जारी है और चंबल जलसेतु के लिए 5,000 में से 3,000 पाइलों का निर्माण पूरा हो चुका है। मेज से गलवा तक सुरंग खुदाई और फीडर निर्माण कार्य भी तेजी से जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/revised-pkc-ercp-project-expedited-work-of-3000-piles-of-chambal/article-154698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/secratrait11.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान वाटर ग्रिड कॉर्पोरेशन लिमिटेड की 12वीं बैठक में संशोधित पीकेसी-ईआरसीपी (PKC-ERCP) परियोजना के तहत अब तक हुए कार्यों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के विभिन्न पैकेजों में निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। जानकारी के अनुसार, नौनेरा पंप हाउस के लिए नींव की खुदाई का कार्य जारी है। वहीं चंबल जलसेतु पर लगाए जाने वाले कुल 5060 पाइलों में से 3000 पाइलों का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा 8 पाइल कैप का कांक्रीटीकरण कार्य पूर्ण हो गया है, जबकि 4 पाइल कैप का सुदृढ़ीकरण कार्य भी संपन्न कर लिया गया है।</p>
<p>बैठक में बताया गया कि नौनेरा बैराज से मेज तक फीडर निर्माण के लिए लगभग 20 प्रतिशत मिट्टी कार्य पूरा हो चुका है। वर्तमान में मेज से गलवा तक दो स्थानों पर सुरंग की खुदाई का कार्य प्रगति पर है। इस पैकेज के अंतर्गत 12 किलोमीटर लंबाई में 4 संरचनाओं और फीडर निर्माण का कार्य भी लगातार जारी है। अधिकारियों ने परियोजना कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/revised-pkc-ercp-project-expedited-work-of-3000-piles-of-chambal/article-154698</link>
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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 16:20:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक, बोले- पीछे मुड़कर देखने का नहीं है समय, विकास कार्यो में लाए तेजी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 देशों के दौरे से लौटते ही मंत्रिपरिषद के साथ साढ़े चार घंटे लंबी समीक्षा बैठक की। इस बैठक में 30 कैबिनेट मंत्रियों सहित सभी मंत्री शामिल हुए। पीएम ने लंबित कार्यों को तेज करने, महंगाई पर लगाम लगाने और पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/council-of-ministers-meeting-chaired-by-pm-modi-said/article-154628"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(10)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली जैसे पांच देशों के राजनयिक दौरे से लौटने के तुरंत बाद मंत्रिपरिषद के साथ साढ़े चार लंबी चली समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। सरकारी अधिकारियों ने इस बैठक को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल की एक बड़ी मध्यावधि समीक्षा प्रक्रिया बताया है। इस बैठक में प्रशासनिक कामकाज, आर्थिक तैयारी, कल्याणकारी योजनाओं के वितरण और पश्चिम एशिया में बढ़ते विवाद का ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई पर पड़ने वाले असर पर ध्यान केंद्रित किया गया।</p>
<p>इस बैठक में 30 कैबिनेट मंत्री, 36 राज्य मंत्री और 5 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री शामिल थे। यह इस साल मंत्रिपरिषद की पहली पूर्ण बैठक थी। बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने सभी केंद्रीय मंत्रियों को साफ़ तौर पर सभी लंबित सरकारी कामों को तेज़ी से पूरा करने का निर्देश दिया। कार्रवाई से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने परिषद से लंबित काम पूरे करने का आग्रह किया। मंत्रियों ने बुनियादी ढांचे, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आवास, रोज़गार पैदा करना, डिजिटल शासन और कल्याणकारी योजनाओं के वितरण जैसे प्रमुख कार्यक्रमों पर विस्तृत प्रगति रिपोर्ट भी पेश की। इसमें उपलब्धियों, चुनौतियों और अंतिम छोर तक वितरण को बेहतर बनाने के लिए कार्य योजनाएं बताई गईं।</p>
<p>एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, "इस प्रक्रिया का मकसद प्रशासनिक नतीजों का मूल्यांकन करना और यह पक्का करना है कि प्रमुख कार्यक्रम ज़मीनी स्तर पर असरदार तरीके से काम करते रहें।" उन्होंने यह भी कहा कि "मंत्रालयों के बीच तालमेल सुधारने और वितरण के तरीकों को बेहतर बनाने पर भी ज़ोर दिया गया है।" चर्चा का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट और उसके आर्थिक असर पर केंद्रित था। ईरान से जुड़े तनाव और बड़ी क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ज़्यादा हो गईं, इसलिए परिषद ने घरेलू महंगाई के दबाव को कम करने और ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखने पर गहराई से विचार-विमर्श किया। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे समुद्री परिवहन बाधा बिंदुओं पर चिंता जताई गई। यह दुनिया भर में तेल परिवहन के एक बड़े हिस्से के लिए एक ज़रूरी मार्ग है।</p>
<p>एक और सूत्र ने कहा, "सरकार दुनिया भर में अनिश्चितताओं और उनके घरेलू असर को लेकर सचेत है।" "चर्चा के दौरान आर्थिक मजबूती, कल्याणकारी सुरक्षा और रणनीतिक तैयारी मुख्य विषय बने रहने की उम्मीद है।" मंत्रिपरिषद ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बदलावों के जवाब में तुरंत राजकोषीय नीति उपायों और सरकार द्वारा शुरू की गई मितव्ययिता निगरानी प्रणाली का भी जायजा लिया। अर्थव्यवस्था के अलावा, सत्र में "अगली पीढ़ी के सुधारों" के लिए कार्ययोजना की समयसीमा का आकलन किया गया, जिसका मकसद "जीवन यापन में आसानी" और "व्यापार करने में आसानी" को बेहतर बनाना है। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने लागू करने की चुनौतियों, जवाबदेही प्रणाली और उभरते वैश्विक और घरेलू जोखिमों के लिए तैयारी पर मंत्रियों के साथ विस्तार से बातचीत की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 11:58:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ओबीसी आरक्षण पर बंगाल सरकार का बड़ा फैसला: मौजूदा ओबीसी उप-वर्गीकरण रद्द, 66 समुदाय सूची में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित भाजपा सरकार ने ओबीसी सूची का उप-वर्गीकरण ढांचा रद्द कर दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की कैबिनेट बैठक के बाद जारी अधिसूचना के अनुसार, अब केवल 66 समुदायों को 7% आरक्षण का लाभ मिलेगा। सरकार पिछली तृणमूल सरकार द्वारा जारी प्रमाण पत्रों की नए सिरे से समीक्षा करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-west-bengal-government-existing-obc-sub-categorization-canceled/article-154454"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bengal-cm.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने बुधवार को राज्य सरकार की नौकरियों और पदों में आरक्षण से जुड़े अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची के मौजूदा उप-वर्गीकरण ढांचे को रद्द कर दिया। इसके साथ ही सरकार ने सात प्रतिशत आरक्षण के लिए ओबीसी श्रेणी के तहत केवल 66 समुदायों को बनाए रखने का फैसला किया है। यह अधिसूचना मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में नबन्ना (सचिवालय) में हुई दूसरी कैबिनेट बैठक के एक दिन बाद आई है। इस बैठक में राज्य सरकार ने ओबीसी सूची की दोबारा जांच करने और पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान जारी किए गए प्रमाण पत्रों की समीक्षा करने का निर्णय लिया था।</p>
<p>मंत्रिमंडल की दूसरी बैठक में लिए गए इस फैसले को इसके कानूनी और राजनीतिक निहितार्थों के कारण नए प्रशासन का सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। सोमवार को हुई बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा था, "मंत्रिमंडल ने ओबीसी श्रेणी के भीतर मौजूदा उप-वर्गीकरण प्रणाली को समाप्त करने, पश्चिम बंगाल सरकार के तहत ओबीसी समुदायों के लिए आरक्षण के प्रतिशत की समीक्षा करने और राज्य की ओबीसी सूची की नए सिरे से जांच करने का निर्णय लिया है।"</p>
<p>पॉल ने कहा था, "इस मामले की नए सिरे से जांच की जाएगी। राज्य सरकार उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) के निर्देशों के अनुसार ही जातियों या समूहों को सूची में शामिल करने के बारे में फैसला करेगी।"राज्यपाल के निर्देश पर मंगलवार को जारी एक अधिसूचना में नवनिर्वाचित भाजपा सरकार ने घोषणा की कि 66 समुदायों को ओबीसी श्रेणी के तहत सात प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा। पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण और उप-वर्गीकरण से जुड़ा यह विवाद वाम मोर्चा सरकार के अंतिम दौर और मार्च 2010 से मई 2012 के बीच तृणमूल कांग्रेस सरकार के पहले कार्यकाल के समय का है। उस अवधि के दौरान, राज्य में 77 समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल किया गया था। इनमें से वाम मोर्चा सरकार के कार्यकाल के दौरान 42 मुस्लिम समुदायों को शामिल किया गया था। इसके बाद आरोप लगे कि आरक्षण का लाभ धर्म के आधार पर दिया जा रहा है, जिससे यह मामला कानूनी विवादों में फंस गया।</p>
<p>ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद ओबीसी सूची में 35 और समुदायों को जोड़ा, जिससे यह संख्या बढ़कर 77 हो गई, जिनमें से 75 मुस्लिम समुदाय से थे। वर्ष 2023 में, ममता सरकार ने एक नया ओबीसी आरक्षण कानून बनाया, जिसके तहत सभी 77 समुदायों को इसके दायरे में ले आया गया। इसके परिणामस्वरूप, राज्य में ओबीसी समुदायों की कुल संख्या बढ़कर 179 हो गई थी। इस नए आरक्षण कानून को हालांकि अदालत में चुनौती दी गई, जहां याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि धर्म के आधार पर दिए गए आरक्षण को रद्द किया जाना चाहिए।</p>
<p>इसके बाद, 22 मई 2024 को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने राज्य की ओबीसी सूची में 113 समुदायों को शामिल करने के फैसले को रद्द कर दिया, जबकि 66 समुदायों को सूची में बने रहने की अनुमति दी। अदालत ने टिप्पणी की थी कि कई समुदायों को शामिल करने का काम मुख्य रूप से धार्मिक आधार पर किया गया था। इस फैसले के बाद वर्ष 2010 से जारी किए गए लगभग पांच लाख ओबीसी प्रमाणपत्र अमान्य हो गए थे। तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार ने बाद में उच्च न्यायालय के इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। मार्च 2025 में, पिछली राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया था कि पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग एक नया सर्वेक्षण करेगा और एक संशोधित ओबीसी सूची तैयार करेगा।</p>
<p>इसी साल जून में, ममता सरकार ने 76 नए समुदायों को शामिल करते हुए एक नई सूची जारी की, जिससे कुल ओबीसी श्रेणियों की संख्या 140 हो गई। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार ने संशोधित सूची के माध्यम से व्यावहारिक रूप से लगभग सभी पुराने समुदायों को वापस शामिल कर लिया है। पिछले साल 17 जून को, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उस संशोधित अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने इस रोक के आदेश को चुनौती देते हुए फिर से उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। पिछले साल जुलाई में, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी थी और वर्तमान में यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष लंबित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:21:16 +0530</pubDate>
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                <title>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आज विभिन्न बैठकों में होंगे शामिल </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आज मुख्यमंत्री आवास पर विभिन्न महत्वपूर्ण बैठकों की अध्यक्षता करेंगे। दोपहर 12 बजे सामाजिक बैठक के बाद, वे दोपहर 3 बजे राजस्व अर्जन विभागों की समीक्षा करेंगे। शाम 4:30 बजे वे जल संरक्षण को समर्पित “कर्मभूमि से मातृभूमि एवं वंदे गंगाजल संरक्षण अभियान” बैठक को संबोधित करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-minister-bhajanlal-sharma-will-attend-various-meetings-today/article-154138"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/bhajanlal.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भजनलाल शर्मा आज मुख्यमंत्री आवास पर विभिन्न कार्यक्रमों और बैठकों में भाग लेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक सामाजिक बैठक में शामिल होंगे। इसके बाद अपराह्न 3 बजे मुख्यमंत्री राजस्व अर्जन वाले विभागों की समीक्षा बैठक लेंगे। इस बैठक में विभिन्न विभागों के कार्यों, राजस्व संग्रहण और योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की जाएगी। वहीं शाम 4:30 बजे मुख्यमंत्री “कर्मभूमि से मातृभूमि एवं वंदे गंगाजल संरक्षण अभियान” की बैठक को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम भी मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित होगा, जिसमें जल संरक्षण और जनजागरूकता से जुड़े विषयों पर मंथन किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 18:02:19 +0530</pubDate>
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                <title>ग्रेट निकोबार परियोजना पर कांग्रेस ने जताई चिंता: जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री को लिखा पत्र, आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर ग्रेट निकोबार परियोजना के मौजूदा स्वरूप पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर व्यावसायिक बदलावों से पर्यावरण और आदिवासियों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए वैकल्पिक सैन्य परिसंपत्तियों के विस्तार का सुझाव दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-expressed-concern-over-the-great-nicobar-project-jairam-ramesh/article-154130"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jairam-ramesh2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने ग्रेट निकोबार परियोजना के मौजूदा स्वरूप पर राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुनर्विचार की आवश्यकता जताते हुए कहा है कि इससे पर्यावरणीय नुकसान तथा आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन की आशंका है। पार्टी का कहना है कि वह लगातार इस संबंध में सरकार को अवगत करा रही है, लेकिन उसकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने रविवार को बताया कि उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम को पत्र लिखने के बाद अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि सरकार एक व्यावसायिक परियोजना को सुरक्षा जरूरतों के आधार पर उचित ठहराने की कोशिश कर रही है, जबकि इसके पर्यावरणीय प्रभावों तथा आदिवासी हितों पर पड़ने वाले असर को लेकर लगातार आलोचना हो रही है।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि देश की रक्षा क्षमता मजबूत करने पर कोई मतभेद नहीं है, लेकिन ग्रेट निकोबार के कैंपबेल बे स्थित आईएनएस बाज के रनवे विस्तार और नौसैनिक जेट्टी जैसी योजनाएं कम पर्यावरणीय नुकसान के साथ बेहतर विकल्प हो सकती हैं। उन्होंने आईएनएस कार्दीप, आईएनएस कोहासा, आईएनएस उत्क्रोश, आईएनएस जरावा और कार निकोबार वायुसेना स्टेशन जैसी मौजूदा सैन्य परिसंपत्तियों के विस्तार का भी सुझाव दिया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि परियोजना में प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट और टाउनशिप से सैन्य क्षमता नहीं बढ़ती, फिर भी इन्हें सुरक्षा कारणों से उचित ठहराया जा रहा है। उन्होंने रक्षा मंत्री से परियोजना के मौजूदा स्वरूप पर पुनर्विचार करने और नौसेना अधिकारियों द्वारा सुझाए गए विकल्पों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 13:08:29 +0530</pubDate>
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