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                <title>SIR 2026 - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>SIR और चुनाव सुधारों पर विधानसभा में बहस को लेकर सत्ता–विपक्ष आमने-सामने, अध्यक्ष लेंगे विशेषज्ञों से राय</title>
                                    <description><![CDATA[विधानसभा की कार्यवाही शुक्रवार को पुनः शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने चुनाव सुधारों और SIR के मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मकराना विधायक जाकिर हुसैन गैसावत द्वारा पर्ची के माध्यम से उठाए गए SIR के मुद्दे पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने आपत्ति जताई, जो उचित नहीं थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sir-and-the-speaker-will-face-to-face-with-the/article-141334"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/(1200-x-600-px)-(8).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विधानसभा की कार्यवाही शुक्रवार को पुनः शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने चुनाव सुधारों और SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मकराना विधायक जाकिर हुसैन गैसावत द्वारा पर्ची के माध्यम से उठाए गए SIR के मुद्दे पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने आपत्ति जताई, जो उचित नहीं थी। जूली ने सुझाव दिया कि जैसे लोकसभा में निर्वाचन सुधारों पर चर्चा हुई, उसी तरह विधानसभा में भी आधे घंटे का समय तय कर इस विषय पर चर्चा कराई जानी चाहिए। इस पर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। संसद में भी SIR पर अलग से चर्चा नहीं हुई, बल्कि केवल चुनाव सुधारों पर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि संसदीय और विधानसभा चुनावों से जुड़े कानून और संविधान संशोधन का अधिकार संसद को है, इसमें राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं होती।</p>
<p>इसलिए विधानसभा के पटल पर लोकसभा और विधानसभा चुनाव सुधारों पर चर्चा नहीं की जा सकती। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि पंचायती राज या नगर निकाय चुनावों के सुधारों पर चर्चा करनी हो, तो विधानसभा में इस पर विचार संभव है, क्योंकि उनके नियम राज्य बनाता है। इसके जवाब में टीकाराम जूली ने कहा कि पंचायती राज और नगर निकाय चुनाव भी राजस्थान में होने हैं, इसलिए उन्हीं विषयों पर चर्चा कर ली जाएगी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि विधि मंत्री और नेता प्रतिपक्ष की बातें उनके संज्ञान में आ गई हैं। इस विषय पर कानूनी विशेषज्ञों और लोकसभा से परामर्श लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 15:20:58 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में सुधार, आपत्तियों की समय सीमा आज पूरी: चुनाव आयोग</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की विस्तारित समय सीमा 19 जनवरी को समाप्त हो रही है। अब तक करीब 9.12 लाख नए आवेदन प्राप्त हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/deadline-for-objections-to-voter-list-correction-in-west-bengal/article-140097"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/west-bengal-sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मसौदा मतदाता सूची पर आवेदन और आपत्तियां दाखिल करने की चुनाव आयोग की विस्तारित समय सीमा सोमवार को समाप्त हो जायेगी। इसी के साथ विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के शिकायत और दावा चरण का समाप्त हो जायेगा। </p>
<p>आयोग ने एसआईआर की घोषणा के समय ही स्पष्ट कर दिया था कि मतदाताओं के साथ-साथ राजनीतिक दलों को भी मसौदा सूची के प्रकाशन के बाद दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अनुमति होगी। पश्चिम बंगाल में इस तरह के आवेदनों को जमा करने की अंतिम तिथि 19 जनवरी निर्धारित की गयी थी। आज समय सीमा समाप्ति के बाद अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन तक कोई ताजा आवेदन या आपत्तियां स्वीकार नहीं की जायेंगी।</p>
<p>प्रारंभिक मतदाता सूची 16 दिसंबर को प्रकाशित की गयी थी और आयोग ने 17 दिसंबर से दावे और आपत्तियां स्वीकार करना शुरू कर दिया था। इस दौरान मतदाताओं ने या तो मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया या फिर फॉर्म-7 जमा कर नाम हटाने की मांग की। राजनीतिक दलों ने भी अपने बूथ स्तरीय एजेंटों (बीएलए) के जरिये आवेदन किया।</p>
<p>पहले दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि 15 जनवरी निर्धारित की गयी थी। चुनाव आयोग ने हालांकि बाद में समय सीमा चार दिनों के लिए बढ़ा दी थी। सुनवाई प्रक्रिया सात फरवरी तक जारी रहेगी। आयोग ने कहा कि जिन मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया गया है, वे चाहें तो जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। यह सुविधा आवेदन विंडो बंद होने के बावजूद मतदाताओं के लिए सात फरवरी तक खुली रहेगी।</p>
<p>आधिकारिक आंकड़े के अनुसार, रविवार रात तक के मसौदा सूची के प्रकाशन के बाद मतदाता सूची में शामिल किये जाने के आवेदनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रारंभिक सूची के प्रकाशित होने से पहले नये नामों को शामिल कराने के लिए 3,31,075 आवेदन प्राप्त हुए थे। प्रारंभिक सूची के प्रकाशन के बाद के एक महीने में नाम शामिल कराने के लिए 5,59,053 और आवेदन जमा कराये गये। </p>
<p>मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए अब तक कुल 9,12,128 लोगों ने आवेदन दिया है। तय समय में नाम हटाने के लिए 56,867 आवेदन प्राप्त हुए हैं। प्रारंभिक सूची के प्रकाशन के बाद ऐसे 41,847 और आवेदन दायर किये गये। कुल मिलाकर नाम हटाने के लिए करीब एक लाख आवेदन आयोग के सामने आये हैं। राजनीतिक मोर्चे पर तृणमूल कांग्रेस ने 13 मतदाताओं के नाम शामिल करने के लिए आवेदन किया है, जिन्हें मतदाता सूची के मसौदे में 'मृत' दिखाया गया था। पिछले कुछ दिनों में तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सार्वजनिक बैठकों में बार-बार यह मुद्दा उठाया और उन व्यक्तियों को पेश कर दावा किया कि मसौदा सूची में मृत के रूप में दर्ज होने के बावजूद वे जीवित हैं।</p>
<p>इन आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने कई मौकों पर जवाब दिया है। कुछ मामलों में गलतियां मानी हैं और कुछ में संबंधित बूथ लेवल अधिकारियों से सफाई मांगी है। ऐसा माना जा रहा है कि तृणमूल की तरफ से जमा किये गये आवेदन इन 13 'मृत' मतदाताओं से जुड़ी हैं। इसकी तुलना में भारतीय जनता पार्टी ने ऐसे सिर्फ एक को शामिल कराने के लिए आवेदन दी है। इसके विपरीत भाजपा की ओर से नाम हटाने की मांग करने वाले सबसे अधिक आवेदन आये हैं। आयोग के सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने 591 नामों को हटाने की मांग की है, जबकि तृणमूल ने केवल 13 नाम हटाने के लिए आवेदन किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
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