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                <title>notices - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बहुमंजिला कोचिंग...कोटा में भी कई कोचिंग में नहीं आग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ के अलीगंज इलाके की कोचिंग जैसा कोटा में भी कहीं हो ना जाए हादसा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/multi-story-coaching-centers----many-coaching-institutes-in-kota-lack-robust-fire-safety-arrangements/article-157839"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px)-(3)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके के एक कोचिंग संस्थान में सोमवार को भीषण आग लगने से पूरी बिल्डिंग धू-धू कर जल गई। जिससे उसमें मौजूद कई बच्चे जान बचाने के लिए पहली व दूसरी मंजिल से कूदे तो उनमें से करीब 15 बच्चों की मौत हुई है। ऐसा ही हादसा कोटा में भी हो सकता है। यहां भी कई छोटे कोचिंग संस्थान ऐसे हैं जिनमें आग से सुरक्षा के इंतजाम तक नहीं है। हालांकि नगर निगम के फायर अनुभाग ने उन सभी को नोटिस जारी किए हुए हैं।</p>
<p>शिक्षा की छोटी काशी के नाम से विख्यात कोटा में कोचिंग की भरमार है। यहां देशभर से लाखों बच्चे मेडिकल व इंजीनियरिंग की कोचिंग करने के लिए आते हैं। ऐसे में कोटा शहर में एक से बढ़कर एक कोचिंग संस्थान है। कई बड़े कोचिंग संस्थान है। जिनमें शहर में ही कई ब्रांच हैं। उनकी बिल्डिंग भी बहुमंजिला हैं। उन कोचिंग संस्थान में एक बार में हजारों बच्चे एक साथ कोचिंग करते हैं। सुबह जल्दी से रात तक अलग-अलग शिफ्टों में कक्षाएं लगती है। वहीं दर्जनों छोटे कोचिंग संस्थान भी है। जो पीजी या आवासीय भवनों में संचालित हो रही है। उनमें भी बच्चों की संख्या काफी अधिक है।</p>
<p>हालत यह हैै कि कोटा में बच्चों से हजारों लाखों रुपए फीस लेने के बावजूद अधिकतर कोचिंग संस्थानों में आग से सुरक्षा के इंतजाम तक नहीं है। ऐसे में जिस तरह से सोमवार को लखनऊ के अलीगंज इलाके की एक कोचिंग में आग लगने पर हादसा हुआ है कहीं ऐसा हादसा कोटा में भी नहीं हो जाए।</p>
<p><strong>छोटे कोचिंगों में नहीं है इंतजाम</strong><br />नगर निगम की ओर से शहर में समय-समय पर बहुमंजिला इमारतों में फायर सिस्टम व एनओसी की जांच की जाती है। हाल ही में की गई जांच में भी यह सामने आया कि शहर के अधिकतर बड़े कोचिंग संस्थानों में जो नामचीन हैं उन सभी में तो फायर सिस्टम लगे हुए हैं। उनके पास फायर एनओसी भी है। लेकिन छोटे कोचिंग संस्थान जो एक या दो मंजिल और पीजी में संचालित हो रहे हैं उनमें अधिकतर में आग से सुरक्षा के नाम पर एक उपरकण तक नहीं है। जिससे वहां कभी भी कोई आग जनित घटना होने पर बच्चों की जान को खतरा हो सकता है।</p>
<p><strong>प्रवेश-निकास एक और लकड़ी का काम अधिक</strong><br />नगर निगम कोटा के उपायुक्त फायर व सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि छोटे कोचिंग संस्थानों में प्रवेश व निकास के लिए एक ही रास्ता है। वह रास्ता भी संकरा है। जिससे कोई भी हादसा होने पर वहां से आसानी से निकलना तक मुश्किल हो सकता है। वहीं सजावट के नाम पर लकड़ी का काम काफी कराया हुआ है। सभी जगह एसी लगे हुए हैं लेकिन बिजली के लोड की नियमित जांच नहीं की जाती है। यदि कहीं फायर इंस्टीब्यूशन लगे हुए हैं तो वे अवधि पार हो रहे हैं। जिससे आवश्यकता होने पर उनका उपयोग नहीं किया जा सकता। कहीं सब कुछ सही है तो उसे संचालित करना नहीं आता। ऐसे में शॉर्ट सर्किट होने पर उससे निकली एक चिंगारी लकड़ी पर गिरने से भयावह रूप ले सकती है। जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।</p>
<p><strong>हर बार हादसों के बाद ही चेतता है प्रशासन</strong><br />लखनऊ में सोमवार को कोचिंग में आग लगी। इससे पहले दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में आग लगी थी। उसके बाद बिहार के एक निजी हॉस्पिटल के आईसीयू में आग लगी। कोटा में भी गत दिनों एक मॉल के स्टोर में भीषण आग लगी थी। एक पटाखा कारखाना में आग लगने से कई लोगों की मौत हो गई थी।ऐसे में आग जनित हो या अन्य किसी तरह का हादसा। प्रशासन हर बार हादसा होने के बाद ही चेतता है। लेकिन उससे पहले व्यवस्था में सुधार पर ध्यान नहीं दिया जाता। जिससे इस तरह की घटनाएं हो रही है। अभी तक जितनी भी घटनाएं हुई हैं। उनमें एक ही कारण सामने आया है कि वहां न तो फायर सिस्टम लगा हुआ था और न ही एनओसी थी। हालांकि कोटा में पहले कई हॉस्टल में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई थी। जबकि अलेीगंज के कोचिंग संस्थान में तो कई बच्चों की जान जा चुकी है यह गम्भीर मामता है।</p>
<p><strong>नोटिस देकर व्यवस्था सुधार के निर्देश</strong><br />नगर निगम के उपायुक्त फायर व सीएफओ राकेश व्यास का कहना है कि निगम के फायर अनुभाग की ओर से ही हाल ही में शहर के सभी कोचिंग संस्थान, मॉल, कमर्शियल कॉम्पलेक्स, होटल, हॉस्टल व आवासीय भवनों में आग से सुरक्षा के इंतजामों की जांच व सर्वे किया गया है। जहां भी कमियां पाई गई। उन सभी को नोटिस जारी किए हैं। व्यास ने बताया कि कोटा में जितने भी बड़े कोचिंग संस्थान हैं। जिनकी खुद की बिल्डिग़ हैं उन सभी में फायर सिस्टम भी लगे हुए हैं और उनके पास एनओसी भी है। जांच के दौरान सभी जगह पर सिस्टम कार्यशील भी पाए गए। कई जगह पर प्रवेश व निकास को लेकर समस्या थी तो उन्हें सुषार के निर्देश दिए थे। वहीं पीजी में या निजी मकानों में संचालित छोटे कोचिंग संस्थानों में जरूर फायर सिस्टम नहीं है। ऐसे करीब सौ से सवा सौ कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी किए हैं। उनमें से कुछ ने सिस्टम लगाने व एनओसी की प्रक्रिया भी शुरु कर दी है।</p>
<p><strong>ये करें प्रयास तो सुरक्षा संभव</strong><br />व्यास ने बताया कि आग से सुरक्षा के लिए लोगों को विशेष रूप से बिल्डिंग मालिक व संचालक को जागरूक होना पड़ेगा। फायर सिस्टम लगाने के साथ ही उसे क्रियाशील रखना, बिजली के लोड की नियमित चैकिंग करना, लकडी का काम कम से कम करवाना, प्रवेश व निकास की व्यवस्था प्रोपर रखना, बिजली उपकरणों के पास ज्वलनशील पदार्थ नहीं रखना समेत अन्य सुधार के प्रयास करने होंगे। जिससे काफी हद तक सुरक्षा की जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 15:09:49 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : अवैध वाहनों पर परिवहन विभाग की सख्त कार्रवाई शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल परिसर में नियम उल्लंघन पर 150 वाहनों को नोटिस जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-news-report--transport-department-initiates-strict-action-against-illegal-vehicles/article-156886"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(6)2.png" alt=""></a><br /><p>बूंदी। चिकित्सालय परिसर में बिना वैध रजिस्ट्रेशन के संचालित निजी वाहनों तथा नियमों की अनदेखी कर काले शीशे लगाकर दौड़ रही निजी एंबुलेंसों के मामले में 12 जून के अंक में दैनिक नवज्योति समाचार पत्र में समाचार प्रकाशित होने के बाद जिला परिवहन विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन सक्रिय हो गया है और कार्रवाई तेज कर दी गई है।</p>
<p>जिला परिवहन अधिकारी सौम्या शर्मा ने बताया कि अस्पताल परिसर एवं आसपास अवैध रूप से संचालित वाहनों तथा नियमों का उल्लंघन कर चल रही एंबुलेंसों की जानकारी संज्ञान में आने के बाद विभाग ने त्वरित कदम उठाए हैं। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत लगभग 150 वाहनों के पंजीकरण (आरसी) निरस्त करने के नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग अब केवल नोटिस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धरातल पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए एक विशेष टीम गठित की जा रही है, जो अस्पताल परिसर एवं अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में औचक निरीक्षण करेगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर वाहनों को मौके पर ही जब्त किया जाएगा।</p>
<p>जिला प्ररिवहन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि बिना वैध दस्तावेजों के चल रही निजी एंबुलेंस न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रही थीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन रही थीं। ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। इस कार्रवाई के बाद अवैध वाहन संचालकों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन का कहना है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।</p>
<p>इस प्रकार की अनियमितता यदि पाई जाती है तो इन प्राइवेट एंबुलेंसों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिन गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन खत्म हो रहा है, उनके खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। पूर्व में भी कई वाहनों के आरसी रजिस्ट्रेशन खारिज किए जा चुके हैं। और आज भी करीब 150 गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन खारिज करने के लिए नोटिस जारी किए हैं<br /><strong>- सौम्या शर्मा, जिला परिवहन अधिकारी, (DTO), बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 16:01:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का :  नगर निगम ने 37 भवन मालिकों व विज्ञापन दाताओं को दिए नोटिस, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[कई जगह से लोगों ने खुद ही हटाए होर्डिग्स व वॉलड्रॉप। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--municipal-corporation-issues-notices-to-37-building-owners-and-advertisers/article-153221"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)38.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में निजी भवनों की छतों व दीवारों पर लगे अवैध होर्डिंग्स व वॉल ड्रॉप के मामले में नगर निगम के राजस्व अनुभाग की ओर से शुक्रवार को 37 भवन मालिकों व विज्ञापन दाताओं को नोटिस जारी किए गए। वहीं कई जगह पर लोगों ने खुद ही वॉल ड्रॉप हटा लिए।<br />शहर में पुराने शहर से लेकर नए शहर के पॉश इलाकों तक में और झालावाड़ रोड से लेकर बूंदी रोड तक बड़ी संख्या में निजी भवनों व प्रतिष्ठानों की छतों पर अवैध रूप से होर्डिग्स लगे हुए हैं। साथ ही कई भवनों व दुकानों की दीवारों पर भारी भरकम वॉल ड्रॉप लगाए हुए हैं। जिससे मौसम में बदलाव होने पर आंधी तूफान व बरसात के समय में तेज हवा से ये उड़कर सड़क पर गिर रहे हैं या गिरने का खतरा बना हुआ है। जिससे राह चलते लोगों के साथ कभी भी हादसे का खतरा बना हुआ है।</p>
<p>इसे देखते हुए नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा के निर्देश पर नगर निगम के राजस्व अनुभाग द्वारा जहां भी इस तरह के होर्डिग्स व वॉलड्रॉप लगे हुए मिले उन सभी को नोटिस जारी किए गए। विशेष रूप से एरोड्राम चौराहे से अनंतपुरा तक कार्रवाई करते हुए 37 लोगों को नोटिस जारी किए गए।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />शहर में निजी भवनों की छतों पर अवैध होडिंग्स व वॉल ड्रॉप लगाने का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 7 मई को पेज 6 पर: छतों पर लगे अवैध होडिंग्स व वॉल ड्रॉप से दुर्घटनाओं का खतरा शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें हाल ही में बदले मौसम से स्टेशन क्षेत्र में गिरे एक होर्डिग्स को लेकर शहर में इस तरह के कई जगह पर होने का मामला प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशित होते ही नगर निगम प्रशासन हरकत में आया।आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि जिन भी जगह पर इस तरह से अवैध होडिंग्स व वॉलड्रॉप लगे हुए हैं। वहां कार्रवाई करने के लिए संबंधित उपायुक्तों को निर्देशित किया गया है।</p>
<p>वहीं उपायुक्त राजस्व धीरज सोनी के मार्गदर्शन में निगम के फायर अनुभाग की टीम हरकत में आई। टीम ने शुक्रवार को एक ही दिन में सुबह से शाम तक एरोड्राम चौराहे से झालावाड़ रोड पर अनंतपुरा तक 37 जनों को नोटिस जारी किए। जिनमें से अधिकतर को तो नोटिस थमाए। वहीं कई जगह पर दुकान व मकान बंद होने पर वहां नोटिस चस्पा भी किए गए हैं। निगम अधिकारियों के अनुसार नोटिस के डर से कई लोगों ने तो खुद ही होर्डिग्स व वॉल ड्रॉप तुरंत हटा दिए।</p>
<p><strong>आम सूचना भी की प्रकाशित</strong><br />निगम अधिकारियों के अनुसार नगर निगम की ओर से इस संबंध में आम सूचना भी जारी की गई है। जिसमें सभी को अवगत कराया गया कि निगम की ओर से भवनों की छतों पर विज्ञापन होर्डिग्स व वॉल ड्रॉप लगाना अवैध व प्रतिबंधित किया हुआ है। साथ ही सभी को चेताया है कि यदि कहीं ऐसा हो रहा है तो वे स्वयं उन्हें हटा लें वरना निगम के स्तर पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 14:24:50 +0530</pubDate>
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                <title>जर्जर भवनों को मालिक खुद तोड़ दे, वरना निगम करेगा कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने शहर में सबसे अधिक जर्जर भवन सूरजपोल, मोखापाड़ा, पाटनपोल और रामपुरा क्षेत्र में हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/owners-must-demolish-the-dilapidated-buildings-themselves--or-the-corporation-will-take-action/article-144943"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/200-x-60-px)-(6).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा की ओर से शहर में जर्जर भवन मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं। जिनमें उन्हें खुद तोड को कहा है। उनके ऐसा नहीं करने पर निगम कार्रवाई करेगा।नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि शहर में बड़ी संख्या में भवन पुराने व जर्जर हैं। जिनका नगर निगम की ओर से सर्वे कराया गया है। विशेष रूप से पुराने शहर में अनंत चतुर्दशी मार्ग व हैरिटेज वॉक मार्ग में ऐसे भवन अधिक हैं। उन भवनों पर लाल निशान तो लगाए हुए हैं। साथ ही अब निगम की ओर से सभी को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>इन क्षेत्रों में हैं जर्जर भवन</strong><br />निगम अधिकारियों के अनुसार पुराने शहर में सबसे अधिक जर्जर भवन सूरजपोल, मोखापाड़ा, पाटनपोल और रामपुरा क्षेत्र में हैं। हालांकि बरसात के समय झालावाड़ जिले के पिपलोदी में हुए स्कूल भवन की छत हादसे में बच्चों की मौत के बाद सभी सरकारी व निजी जर्जर भवनों का सर्वे कराया गया था। लेकिन उसके बाद उन पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।</p>
<p><strong>..तो निगम वसूलेगा खर्चा</strong><br />आयुक्त ने बताया कि उन नोटिसों में भवन मालिकों से कहा गया है कि वे स्वयं उन्हें अपने स्तर पर हटा लें। यदि निर्धारित समय में वे ऐसा नहीं करते हैं तो निगम उन भवनों को ध्वस्त करेगा। उसका पूरा खर्चा हजार्ना भवन मालिकों से वसूल किया जाएगा।</p>
<p><strong>हादसों की आशंका अधिक</strong><br />आयुक्त ने बताया कि निगम की ओर से हर साल अनंत चतुर्दशी से पहले जर्जर भवनों का सर्वे कर उन पर लाल निशान लगाए जाते हैं। लेकिन उसके बाद भी उन भवनों को अभी तक नहीं तोड़ा गया है। जिससे अनंत चतुर्दशी व अन्य आयोजनों के दौरान भीड़ के उन मकानों पर चढ?े से हादसों की आशंका बनी रहती है।ऐसे में पहले से ही कार्यवाई की जाएगी तो हादसे व अनहोनी को टाला जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 16:00:52 +0530</pubDate>
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                <title>यूडी टैक्स: ढाई हजार प्रोपर्टी कर के दायरे में, नगर निगम ने दिए नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में यूडी टैक्स का लक्ष्य करीब 18 करोड़ रुपए उसमें से अभी 50 फीसदी से ही अधिक लक्ष्य प्राप्त हुआ ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ud-tax--2-500-properties-under-the-tax-net--municipal-corporation-issues-notices/article-142042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से हर साल वसूल किया जाने वाला नगरीय विकास कर(यूडी टैक्स) समय पर जमा नहीं करवाने वालों पर अब शिकंजा कसा जाएगा। निगम द्वारा बड़े बकायादारों को नोटिस देने के बाद अब उनके प्रतिष्ठान की सीजिंग की कार्रवाई की जाएगी। पूर्व में जब कोटा में दो नगर निगम उत्तर व दक्षिण थे। उस समय दोनों नगर निगम की बजट बोर्ड बैठकों में अन्य मदों के साथ ही नगरीय विकास कर के भी बजट लक्ष्य तय किए गए थे। हालांकि बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने के बाद फिर से नगर निगम एक हो गया है। ऐसे में वर्तमान में नगरीय विकास कर का लक्ष्य करीब 18 करोड़ रुपए हो गया है। लेकिन उसमें से अभी 50 फीसदी से ही अधिक लक्ष्य प्राप्त हुआ है।</p>
<p><strong>छूट का इंतजार</strong><br />राज्य सरकार द्वारा हर साल टैक्स जमा नहीं करवाने वालों को राहत देने के लिए ब्याज पेनल्टी में छूट का प्रावधान करती है। जिससे अधिक से अधिक बकायादार बिना ब्याज पेनल्टी के टैक्स जमा करवा सके। हालाकि फरवरी का महीना शुरू हो गया है। अभी तक सरकार ने छूट की घोषणा नहीं की है। जबकि बड़े बकायादार सरकार की छूट का इंतजार कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार वर्तमान वित्त वर्ष में कर जमा करवाने वालों के लिए अभी समय है। लेकिन जो कर दाता बरसों से बकाया कर जमा नहीं करवा रहे हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>वित्तीय वर्ष समाप्त होने में दो माह का समय</strong><br />वित्तीय वर्ष 2025-26 के समाप्त होने में अब मात्र दो माह का ही समय शेष है। 31 मार्च को वित्त वर्ष समाप्त हो जाएगा। ऐसे में यूडी टैक्स वसूली के लक्ष्य को इन शेष दो माह की अवधि में ही पूरा करना है। जबकि हालत यह है कि अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे कर दाता हैं जिन्होंने टैक्स जमा नहीं कराया है। साथ ही कई कर दाता तो ऐसे हैं जो पिछले काफी समय से टैक्स जमा नहीं करवा रहे हैं। उनके खिलाफ नगर निगम अब सख्त कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।</p>
<p><strong>दक्षिण में 15 सौ व उत्तर में एक हजार </strong><br />नगर निगम की ओर से नगरीय कर की वसूली निजी फर्म के माध्यम से की जा रही है। फर्म द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार शहर में करीब 25 सौ प्रोपर्टी ऐसी हैं जो यूडी टैक्स के दायरे में आती हैं। जिनमें से दक्षिण में 15 सौ व उत्तर में एक हजार हैं। जिनमें से करीब एक चौथाई ने ही कर जमा कराया है।</p>
<p><strong>टैक्स जमा नहीं करवाने वालों पर हो सख्ती</strong><br />लोगों का कहना है कि नगरीय कर के दायरे में आने वाले प्रतिष्ठानों को समय पर टैक्स जमा करवाना चाहिए। कर जमा नहीं करवाने वालों पर सख्ती होनी चाहिए। नयापुरा निवासी महेश खत्री का कहना है सरकार ऐसे लोगों को पेनल्टी व सजा देने की जगह टैक्स जमा नहीं करवाने वालों को हर साल छूट का लाभ देकर उपकृत करती है। ऐसा करना गलत है। जबकि समय पर टैक्स जमा करवाने वालों को कोई लाभ नहीं दिया जाता। दादाबाड़ी निवासी रामबाबू नागर का कहना है कि व्यवसायिक प्रतिष्ठान जब कमाई करते हैं तो उन्हें टैक्स भी समय पर देना चाहिए। यह उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन कई कर दाता कार्रवाई का डर नहीं होने से टैक्स जमा नहीं करवाते हैं। जिससे कर जमा करवाने वालों को नुकसान होता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वित्त वर्ष समाप्त होने में अब मात्र दो माह का भी समय शेष नहीं है। ऐसे में नगरीय विकास कर जमा नहीं करवाने वाले सभी कर दाताओं को धारा 131 के नोटिस दो से तीन बार दिए जा चुके हैं। उसके बाद भी विशेष रूप से बड़े बकायादारों द्वारा टैक्स जमा नहीं करवाने वालों पर अब निगम सख्ती करेगा। ऐसे प्रतिष्ठानों पर अब सीजिंग की कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई शीघ्र ही चालू की जाएगी।<br /><strong>- धीरज सोनी, उपायुक्त राजस्व, नगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:24:29 +0530</pubDate>
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                <title>पुलिस से वन विभाग तक लाखों का पानी बिल बकाया, विभागों को नोटिस जारी होने के बाद भी जमा नहीं करवाए बिल राशि </title>
                                    <description><![CDATA[जलदाय विभाग के राजस्व वसूली लक्ष्य में सरकारी विभाग सबसे बड़ा अडंगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-bills-worth-lakhs-are-pending--from-the-police-to-the-forest-department--despite-notices-issued-to-the-departments--the-bills-remain-unpaid/article-128058"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(3)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जलदाय विभाग को हर साल करोड़ों का राजस्व वसूली का लक्ष्य मिलता है लेकिन विभाग वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक भी पूरा नहीं कर पाता। नतीजन, 40% टारगेट अधूरा रह जाता है। जिसकी बड़ी वजह सरकारी डिपार्टमेंट है। जलदाय विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, कोटा में सेंट्रल गवर्नमेंट व स्टेट गवर्नमेंट के डिपार्टमेंट को मिलाकर कुल 15.56 करोड़ रुपए बकाया चल रहा है। वहीं, जिले में 1.80 लाख उपभोक्ता है, जिन पर भी बड़ी संख्या में पुराना व नया बिल बकाया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि सरकारी विभाग बकाया बिल जमा करवा दे तो 90% टारगेट पूरा हो सकता है। </p>
<p><strong>दादाबाड़ी पुलिस थाने पर 14 लाख बकाया</strong><br />जलदाय विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, दादाबाड़ी पुलिस थाने पर 14 लाख रुपए का पानी का बिल बकाया चल रहा है, जो कई वर्षों से जमा नहीं करवाया गया। वहीं, किशोरपुरा पुलिस थाने पर 2 लाख रुपए बकाया चल रहा है। विभाग द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बावजूद बकाया बिल जमा नहीं हुए।</p>
<p><strong>60% से कम टारगेट तो जेईईएन-एईईएन को नोटिस </strong><br />नाम न छापने की शर्त पर जल अधिकारियों ने बताया कि जिले में 6 सब डिवीजन कार्यालय है। प्रत्येक सब डिजीवन पर एक एईएन होता है। जिनके अधीन करीब 2-2 जेईएन होते हैं। लेकिन वर्तमान में जेईएन के पद रिक्त होने से अधिकतर सब डिवीजन में 1-1 ही जेईएन कार्यरत हैं। ऐसे में राजस्व वसूली  लक्ष्य के अनुरूप कर पाना चूनौतिपूर्ण हो जाता है। यदि, 60% से कम वसूली होने पर उच्चाधिकारियों द्वारा प्रत्येक एईएन व जेईएन को कारण बताओ नोटिस थमा दिया जाता है। दिन-रात दौड़ने के बावजूद नोटिस के रूप में तनाव झेलना पड़ता है। </p>
<p><strong>सरकारी विभागों ने नहीं भरा 15.56 करोड़ का बिल</strong><br />जिले में सरकारी विभागों पर वर्तमान में 15 करोड़ 56 लाख रुपए का बिल बकाया चल रहा है। इनमें केंद्रीय विभागों पर 56 लाख तथा राज्य सरकार के विभागों पर 15 करोड़ रुपए पानी का बिल कई वर्षों से पेडिंग चल रहा है। केंद्रीय विभागों में नारकोटिक्स डिपार्टमेंट, प्रोजेक्ट इंजीनियर इंस्टूमेंशन, मैनेजर सेंट्रल हाउस, नेशनल सीड्स कॉपरेशन, रीको सहित कई विभागों पर बकाया है। </p>
<p><strong>बिल जमा करवाने में एमबीएस अव्वल</strong><br />जानकारी के अनुसार, जिले के बड़े सरकारी अस्पतालों में बकाया पानी के बिल जमा करवाने के मामले में महाराव भीम सिंह अस्पातल अव्वल रहा है। एमबीएस का वर्तमान में मात्र 1500 रुपए का बिल बकाया चल रहा है। जबकि, राजकीय जिला अस्पताल रामपुरा पर 66 हजार और जेकेलोन चिकित्सालय पर 24 हजार 178 रुपए बकाया चल रहा है। </p>
<p><strong>1.80 लाख उपभोक्ता </strong><br />जल अधिकारियों ने बताया कि कोटा जिले में कुल 1 लाख 80 हजार उपभोक्ता हैं। इनमें से अधिकतर उपभोक्ताओं पर भी बड़ी संख्या में बिल राशि बकाया चल रही है।  हालांकि, हर दो माह में बिल भेजा जाता है। जिसे वसूलने के  लिए कर्मचारी घर-घर दस्तक दे रहे हैं। वहीं, आॅनलाइन प्लेटफार्म भी उपलब्ध करवा रखा है। </p>
<p>सरकारी विभागों पर करोड़ों रुपए का पानी का बिल बकाया चल रहा है। जिसे वसूलने के लिए नोटिस भेज दिए गए हैं। पहले भी भेजे गए थे। शत-प्रतिशत वसूली के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। <br /><strong>- जीवनधर राठौर, एक्सईएन जलदाय विभाग खंड प्रथम</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 16:21:58 +0530</pubDate>
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                <title>अब भूखंड मालिकों को होंगे नोटिस जारी </title>
                                    <description><![CDATA[ खाली पड़े भूखंडों पर फैली गंदगी से परेशान थे मोहल्लेवासी ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/now-notices-will-be-issued-to-the-plot-owners/article-125246"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(2)72.png" alt=""></a><br /><p>कवाई। कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में लंबे समय से खाली पड़े भूखंड कचरा फैंकने का अड्डा बन चुके हैं। इससे उठने वाली दुर्गंध और मच्छर व अन्य जहरीले जीव-जंतु बीमारियों का खतरा हर समय मंडराता रहता है। मोहल्ले वासियों का कहना है कि जहां सरकार और प्रशासन स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से स्वच्छता का संदेश देते हैं, वहीं कई जिम्मेदार सरकारी कर्मचारी ही भूखंडों में गंदगी का कारण बने हैं। कई भूखंड सरकारी कर्मचारियों के नाम हैं, जो उन्हें खरीद तो लेते हैं, पर रख-रखाव या सफाई पर ध्यान नहीं देते। सूत्रों के अनुसार ये भूखंड भविष्य में दुगना-तिगुना दाम मिलने की आशा में खाली रखे जाते हैं। ग्रामीणों ने कई बार पंचायत और जिम्मेदार अधिकारियों को शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब ग्राम पंचायत ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए भूखंड मालिकों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है। </p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाई थी समस्या </strong><br />कवाई कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में लंबे समय से खाली पड़े भूखंडों में कचरा फैंकने से होने वाली समस्या को लेकर नवज्योति ने 19 जुलाई को खबर को निजी भूखंड बीमारियों का बन रहे ठिकाना शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसका असर यह हुआ कि ग्राम पंचायत प्रशासन हरकत में आया और अब ग्राम पंचायत ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए भूखंड मालिकों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है। जिससे अब मौहल्लेवासियों को गदंगी और बीमारियों से राहत मिलने की उम्मीद जगी है। इसके लिए कस्बेवासियों और मोहल्लेवासियों ने नवज्योति का आभार जताया है। </p>
<p>जिन भूखंडों में गंदगी पाई गई है, उनके मालिकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्हें निर्धारित समय में साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि समय पर सफाई नहीं कराई गई तो आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।<br /><strong>-  रामप्रताप सिंह, विकास अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Aug 2025 15:50:51 +0530</pubDate>
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                <title>मैरिज गार्डन व हॉल में कमियों पर नोटिस देकर की इतिश्री, फायर टीम दे चुकी 200 से अधिक नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[मैरिज गार्डन में आग की घटना के बाद से नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के फायर अनुभाग द्वारा शहर में लगातार मैरिज गार्डन, मैरिज हॉल व होटलों में फायर सिस्टम की जांच की जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/notices-were-issued-on-deficiencies-in-marriage-gardens-and-halls/article-115955"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer67.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में बिना पंजीयन व अग्निशमन सुरक्षा संसाधनों के संचालित हो रहे मैरिज गार्डनों व मैरिज हॉल और होटलों को नगर निगम के फायर अनुभाग द्वारा कमियां मिलने पर नोटिस देकर इतिश्री की जा रही है। निगम  ने अभी तक किसी पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। जिससे मैरिज गार्डन संचालकों पर कोई असर भी नहीं दिख रहा है। झालावाड़ रोड स्थित एक मैरिज गार्डन में शादी समारोह के दौरान 19 मई को अचानक आग लग गई थी। शॉर्ट सर्किट से मंच पर लगी आग से पूरा मंच जल गया था। साथ ही समारोह में भगदड़ मच गई थी। गनीमत रही कि उस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। समय रहते निगम के फायर अनुभाग की दमकलों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया था। उस घटना के बाद नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के आयुक्तों के निर्देश पर फायर अनुभाग की टीमों द्वारा लगातार मैरिज गार्डनों व मैरिज हॉल और होटलों की जांच की जा रही है। इस दौरान वहां फायर उपकरण, फायर एनओसी और निगम में उनका पंजीयन समेत अन्य सुरक्षा उपायों को देखा जा रहा है। </p>
<p><strong>फायर टीम दे चुकी 200 से अधिक नोटिस</strong><br />मैरिज गार्डन में आग की घटना के बाद से नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के फायर अनुभाग द्वारा शहर में लगातार मैरिज गार्डन, मैरिज हॉल व होटलों में फायर सिस्टम की जांच की जा रही है। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि अभी तक 10 दिन में जांच के बाद 201 मैरिज गार्डन, हॉल व होटलों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। जिनमें फायर सिस्टम या एनओसी नहीं पाई गई। उनमें से अभी तक 10 फीसदी से भी कम मात्र 15 ने ही फायर एनओसी के लिए आवेदन किए हैं। उनके आवेदन पत्रों की जांच की जा रही है। सिस्टम लगा होने व नियमों की पालना होने पर ही एनओसी जारी की जाएगी। </p>
<p><strong>अधिकतर में नहीं हो रही नियमों की पालना</strong><br />हालत यह है कि शहर में जितने भी मैरिज गार्डन, मैरिज हॉल व होटल संचालित हो रहे हैं। उनमें से गिनती के ही मैरिज गार्डन नियमों के दायरे में आ रहे हैं। जबकि अधिकतर में नियमों की पालना तक नहीं हो रही है। न तो उनका निगम में पंजीयन है और न ही उनमें फायर सिस्टम लगे हुए हैं। यहां तक कि जिस मैरिज गार्डन में आग लगी थी। उसमें भी सिस्टम नहीं था। जबकि निगम के फायर अनुभाग की टीम द्वारा उसकी पूर्व में जांच के बाद नोटिस भी जारी किया गया था। उसके बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ। </p>
<p><strong>बिना पंजीयन नहीं होगा मैरिज गार्डनों का संचालन</strong><br />नगर निगम की ओर से कुछ दिन पहले ही एक आदेश जारी किया था। जिसमें कहा  था कि शहर में अब बिना पंजीयन के कोई भी मैरिज गार्डन संचालित नहीं होगा। मैरिज गार्डन संचालकों को नगर निगम में पंजीयन कराना होगा। नियमों की पालना करनी होगी। पार्किंग समेत अन्य सुविधाएं व फायर सिस्टम लगाने होंगे। लेकिन हालत यह है कि निगम की उस चेतावनी का भी किसी पर कोई असर नहीं हुआ। अभी तक किसी भी मैरिज गार्डन व मैरिज हॉल संचालक ने निगम में पंजीयन नहीं कराया है। </p>
<p>नगर निगम की ओर से शहर के सभी मैरिज गार्डन, हॉल व होटलों की जांच करवाई जा रही है। यह काम नियमित जारी है। जहां भी कमियां  मिल रही है। उन्हें नोटिस भी जारी किए गए हैं। नोटिस के बाद भी कमियों में सुधार नहीं करने या नियमों की पालना नहीं करने वालों के खिलाफ शीघ्र ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>- अशोक कुमार त्यागी, आयुक्त नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 May 2025 15:20:11 +0530</pubDate>
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                <title>रूफटॉप रेस्टोरेंट में नहीं हो रही नियमों की पालना</title>
                                    <description><![CDATA[दो बार नोटिस देकर निगम ने की इतिश्री।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rooftop-restaurants-are-not-following-the-rules/article-88297"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में बड़ी संख्या में होटल व मॉल में रूफटॉप रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं। लेकिन उनमें से अधिकतर रेस्टोरेंट में न तो नियमों की पालना हो रही है और न ही वे निगम से परमीशन लेकर संचालित हो रहे हैं। करीब 95 फीसदी रूफटॉप रेस्टोरेंट बिना स्वीकृति के संचालित हो रहे हैं। नगर निगम ने भी ऐसे रेस्टोरेंट को दो बार नोटिस देकर इतिश्री कर ली है। शहर में भीमगंजमंडी से लेकर राजीव गांधी नगर तक करीब तीन दर्जन से अधिक रूफ टॉप रेस्टोरेंट  संचालित हो रहे हैं। हालांकि नगर निगम के पास ऐसे रेस्टोरेंट का पूरा डाटा तक नहीं है। फिर भी कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में ही निगम के पास दो दर्जन रूफटॉप रेस्टोरेंट संचालित होने की जानकारी है। उनमें से भी अधिकतर द्वारा नियमों की पालना नहीं करने पर नगर निगम के राजस्व अनुभाग की ओर से रेस्टोरेंट सचालकों को एक साल में दो बार नोटिस जारी किए गए। उसके बाद भी न तो रेस्टोरेंट संचालकों ने नियमों की पालना की और न ही निगम से स्वीकृति प्राप्त की। बोर्ड बैठक में उठाया था मुद्दा : नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की गत वर्ष आयोजित बोर्ड बैठकों में शहर में अवैध रूप से संचालित रूफटॉप रेस्टोरेटंट पर कार्रवाई करने का मुद्दा उठाया गया था। दोनों निगमों के नेता प्रतिपक्ष ने यह मामला उठाया था। लेकिन उसके बाद भी निगम अधिकारियों ने रेस्टोरेंट संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। </p>
<p><strong>इन क्षेत्रों में हो रहा संचालन</strong><br />जानकारी के अनुसार कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में बल्लभबाड़ी, एरोड्राम, गुमानपुरा, झालावाड रोड, महावीर नगर प्रथम, तलवंडी, केशवपुरा, राजीव गांधी नगर, डीसीएम रोड, श्रीनाथपुरम् व ट्रांसपोर्ट नगर में रूफ टॉप रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं। जिनकी आॅनलाइन जानकारी होने के बाद व नियमों की पालना नहीं करने के बावजूद निगम अधिकारी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे।  लोगों का कहना है कि कई रूफटॉप रेस्टोरेंट तो रिहायशी इलाकों में हैं। जहां देर रात तक छतों पर डीजे बजते रहे हैं और शोर होने से क्षेत्र के लोगों को परेशानी होती है। इस बारे में थानों में शिकायत करने पर की कोई कार्रवाई नहीं होती। </p>
<p><strong>जांच में मिली अनियमितताएं</strong><br />पुलिस प्रशासन, आबकारी व नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से एक दिन पहले एरोड्राम चौराहा स्थित एक मॉल के रूफटॉप रेस्टोरेंट में ओचक जांच की गई। जांच में वहां फायर से लेकर आबकारी तक की कई अनियमिताएं पाई गई। सूत्रों के अनुसार यहां फायर एनओसी तो है लेकिन 10 में से अधिकतर सिलेंडरों की रिफलिंग नहीं हो रही थी। होजरील कार्यशील अवस्था में नहीं थी। उसके अलावा भी कई कमियां पाई गई। जिसके आधार पर पुलिस प्रशासन कार्रवाई करेगा।  सूत्रों के अनुसार मॉल में संचालित रूफटॉप रेस्टोरेंट में बार का लाइसेंस है वह तभी मिलता है जब फायर एनओसी होती है। जबकि कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में ही ऐसे दो दर्जन से अधिक रूफटॉप रेस्टोरेंट सचालित हो रहे हैं। उन्हें निगम की ओर से जून 2023 व फरवरी 2024 में नोटिस भी दिए जा चुके हैं। लेकिन उन नोटिस का भी संचालकों पर कोई असर नहीं हुआ। निगम अधिकारियों ने भी उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की।  जबकि कुछ समय पहले तलवंडी स्थित एक रूफटॉप रेस्टोरेंट में आग भी लग चुकी है। हालांकि निगम के फायर अनुभाग ने उसे उसी समय बंद करवा दिया था। </p>
<p><strong>चार साल पहले सरकार ने जारी किया था नोटिफिकेशन</strong><br />शहर में रूफटॉप रेस्टोरेंट तो पिछले कई सालों से संचालित हो रहे हैं। महानगरों की तर्ज पर कोटा में भी इनका चलन बढ़ा है। हालांकि लोग भी इसे पसंद कर रहे हैं। ऐसे  में रा’य सरकार की ओर से जनवरी 2020 में एक नोटिफिकेशन जारी  किया था। जिसमें रूफटॉप रेस्टोरेंट संचालकों को नगर निगम से स्वीकृति लेने और नियमों की पालना करने के लिए पाबंद किया गया था। नोटिफेशन के अनुसार रूफटॉप रेस्टोरेंट में एक निर्धारित स्थान पर ही कवर एरिया होगा। वहां का फर्नीचर लकडी का नहीं होकर स्टील एलुमीनियम के फ्रेम में होगा। रेस्टोरेंट में नीचे की तरफ पार्किंग की सुविधा होगी। फायर एनओसी लेना आवश्यक है। इसके लिए यूडी टैक्स जमा करवाना होगा।  </p>
<p><strong>निगम को राजस्व का नुकसान</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के नेता प्रतिपक्ष विवेक राजवंशी ने बताया कि शहर में बड़ी संख्या में अवैध रूप से रूफटॉप रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए वे बोर्ड बैठक में भी इस मुद्दे को उठा चुके हैं। स्वीकूति नहीं लेने व फायर एनओसी, यूडी टैक्स जमा नहीं करवाने से निगम को भी राजस्व की हानि हो रही है। लेकिन अधिकारी उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।  इधर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर में संचालित करीब 95 फीसदी रूफटॉप रेस्टोरेंट में न तो नियमों की पालना हो रही है और न ही उन्होंने परमीशन ले रखी है। यूडी टैक्स जमा नहीं होने से उनके पास फायर एनओसी तक नहीं है। हालांकि निगम अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में आग लगने वाले रूफटॉप रेस्टोरेंट को बंद कराया गया है। साथ ही सभी को दो बार नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Aug 2024 15:08:27 +0530</pubDate>
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                <title>एक होटल संचालक ने बकाया 6 लाख यूडी टैक्स जमा कराया, दूसरे होटल से 41 हजार का जुर्माना वसूला</title>
                                    <description><![CDATA[नगर परिषद की सख्ती पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान के संचालकों में हड़कंप मच गया। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/one-hotel-operator-deposited-the-outstanding-ud-tax-of-6-lakhs--a-fine-of-41-thousand-was-collected-from-another-hotel/article-87303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(3)13.png" alt=""></a><br /><p>बारां। दिल्ली में कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में पानी भरने से तीन विद्यार्थियों की मौत के बाद राज्य सरकारी सख्ती बारां शहर में नगर परिषद की ओर से कड़ी कार्रवाई की जा रही है। शहर के कोचिंग संस्थान, होटल, रेस्टोरेंट में सर्वे के बाद 16 संस्थानों में भारी अनियमितता पाई गई थी। अग्निशमन विभाग के प्रभारी उवेश शेख ने बताया कि नगर परिषद शहर में अग्निशमन विभाग के दिशा निर्देश तथा मानको के अनुसार नहीं चलने वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बार बार नोटिस जारी करने के बाद भी नियमों का उल्लंघन करने को लेकर आयुक्त सौरभ जिंदल के दिशा निर्देश पर अनियमितता बरतने पर सीज करने को चेताया गया था। इस पर नगर परिषद ने गुरुवार को बारां शहर के श्रीजी होटल से 41 हजार का जुर्माना वसूला। इस  होटल के यूडी टैक्स जमा नहीं थे। फायर एनओसी भी नहीं थी। इसी प्रकार होटल दावत रेस्टोरेंट ने अपने बकाया यूडी टैक्स के 6 लाख रुपए जमा परिषद में जमा करा दिए। इसके साथ ही फायर एनओसी के लिए भी इस होटल से आॅनलाइन आवेदन कर दिया। </p>
<p><strong>आनन-फानन में होटल संचालकों ने फायर एनओसी के लिए किए आवेदन</strong><br />नगर परिषद की सख्ती पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान के संचालकों में हड़कंप मच गया। सभी ने आनन-फानन से फायर एनओसी के लिए आॅनलाइन आवेदन करना शुरू कर दिया। अब तक12 प्रतिष्ठानों की ओर से आवेदन कर लिए गए है। इनमें होटल राधिका, होटल महक, होटल कंचन, महावीर गार्डन, होटल सिटी सेंटर, होटल रेड स्टोन आदि ने फायर एनओसी के लिए आवेदन कर दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Aug 2024 17:00:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अनियमितता वाले होटल, रेस्टोरेंट आदि संस्थानों को परिषद ने नोटिस जारी किए</title>
                                    <description><![CDATA[भारी बरसात में बेसमेंट में पानी भरने पर हादसे का खतरा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/the-council-has-issued-notices-to-the-irregular-hotels--restaurants-etc/article-86998"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/photo-size-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>बारां। दिल्ली और जयपुर में बेसमेंट हादसे में हुई मौतों के बाद बारां नगर परिषद ने सख्ती बरतना शुरू कर दिया है। शहर में बेसमेंट, सुरक्षा इंतजाम, फायर एनओसी आदि अनियमितता वाले होटल, रेस्टारेंट आदि स्थानों को नगर परिषद ने सोमवार को नोटिस जारी किए है। इसके बाद अब गुरुवार को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि बारां शहर में बेसमेंट सहित  अन्य अनियमितता बरतने पर बारां शहर में बेसमेंट में धड़ल्ले से चल रही कारोबारी गतिविधियां...शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। जिस पर नगर परिषद ने गंभीरता से लेते हुए लापरवाही बरतने वाले होटल, रेस्टोरेंट आदि संस्थानों को नोटिस जारी किए है। नगर परिषद के सहायक अग्निशमन अधिकारी उवेश शेख ने बताया कि अस्पताल रोड स्थित होटल दावत रेस्टोरेंट, चारमूर्ति चौराहा निवासी होटल सिटी सेंटर, होटल रेड स्टोन, होटल महक, कोटा रोड स्थित होटल राधिका, कोटा रोड स्थित होटल श्रीजी को नोटिस जारी किया गया है। गुरुवार को इन संस्थानों को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली के बाद  जयपुर में भी बेसमेंट में बरसाती पानी भरने से तीन लोगों की मौत हो गई। जिस पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सख्ती बरती है। राज्य सरकार के निर्देश पर अब बारां शहर में शुक्रवार को 21 भवनों की जांच की गई थी।</p>
<p><strong>होटल, रेस्टोरेंट आदि में इमारतों में जांच में मिली भारी अनियमितता</strong><br />परिषद की अग्निशमन टीम ने शुक्रवार को बारां शहर में संचालित कोचिंग सेंटर, लाईब्रेरी, रेस्टोरेंट, हॉटल, कॉम्पलेक्स, अस्पताल, स्कूल सहित आवासीय और वाणिज्यिक संस्थानों का शुक्रवार को जांच की गई। इनमें 5 संस्थान में सुरक्षा उपकरण सही  अवस्था में पाए गए। जबकि शेष 16 संस्थानों में सुरक्षा उपकरण नहीं पाए गए। इन इमारतों के बेसमेंट, भवन, भवन निर्माण स्वीकृति, फायर एनओसी, फायर सिस्टम, यूडी टैक्स, लेंड यूज आदि की जांच की गई। जांच में 16 इमारतों कई सुरक्षा खामियां भी मिली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Aug 2024 17:13:02 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - किसान को ठगने वाली दोनों व्यापारिक फर्मों को नोटिस जारी </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति ने मंडी में व्यापारियों द्वारा किए जा रहे किसानों के शोषण की खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---notice-issued-to-both-business-firms-cheating-farmers/article-73738"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/asar-khabar-ka---kisano-ko-thgne-wali-dono-vyaparik-farmo-ko-notice-jari...kota-news-26-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>रामगंजमंडी। कृषि उपज मंडी समिति रामगंजमंडी में शुक्रवार को एक किसान की कृषि उपज की बोली लगाने के बाद भी व्यापारी द्वारा उपज के सही दाम नही मिलने के मामले का कृषि उपज मंडी सचिव के हस्तक्षेप के बाद निस्तारित हो गया। गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति में शुक्रवार को मंडी में व्यापारियों द्वारा किए जा रहे किसानों के शोषण की खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। उसके बाद कृषि उपज मंडी सचिव दिवाकर दाधीच ने बताया कि शुक्रवार को यह मामला मेरी जानकारी में आया था। उसके बाद दोनों व्यापारिक फर्मों को फोन पर समझाइश कर मामले का निस्तारण कर दिया था। जितनी बोली लगाई गई थी, उतनी ही राशि व्यापारिक फर्म से दिलवा दी गई है। लापरवाही बरतने के मामले में दोनों व्यापारिक फर्मों को नोटिस भी जारी कर दिया है।  </p>
<p>किसान ने बोली लगाते समय जो जिंस दिखाई थी, बाद में उस ढेरी में अन्य जिंस भी मिला दी थी। इसलिए विवाद हुआ था।<br /><strong>- मुकेश धाकड़,अध्यक्ष, ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन     </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 26 Mar 2024 15:48:32 +0530</pubDate>
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