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                <title>notices - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जर्जर भवनों को मालिक खुद तोड़ दे, वरना निगम करेगा कार्रवाई</title>
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                        <![CDATA[पुराने शहर में सबसे अधिक जर्जर भवन सूरजपोल, मोखापाड़ा, पाटनपोल और रामपुरा क्षेत्र में हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/owners-must-demolish-the-dilapidated-buildings-themselves--or-the-corporation-will-take-action/article-144943"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/200-x-60-px)-(6).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा की ओर से शहर में जर्जर भवन मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं। जिनमें उन्हें खुद तोड को कहा है। उनके ऐसा नहीं करने पर निगम कार्रवाई करेगा।नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि शहर में बड़ी संख्या में भवन पुराने व जर्जर हैं। जिनका नगर निगम की ओर से सर्वे कराया गया है। विशेष रूप से पुराने शहर में अनंत चतुर्दशी मार्ग व हैरिटेज वॉक मार्ग में ऐसे भवन अधिक हैं। उन भवनों पर लाल निशान तो लगाए हुए हैं। साथ ही अब निगम की ओर से सभी को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>इन क्षेत्रों में हैं जर्जर भवन</strong><br />निगम अधिकारियों के अनुसार पुराने शहर में सबसे अधिक जर्जर भवन सूरजपोल, मोखापाड़ा, पाटनपोल और रामपुरा क्षेत्र में हैं। हालांकि बरसात के समय झालावाड़ जिले के पिपलोदी में हुए स्कूल भवन की छत हादसे में बच्चों की मौत के बाद सभी सरकारी व निजी जर्जर भवनों का सर्वे कराया गया था। लेकिन उसके बाद उन पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।</p>
<p><strong>..तो निगम वसूलेगा खर्चा</strong><br />आयुक्त ने बताया कि उन नोटिसों में भवन मालिकों से कहा गया है कि वे स्वयं उन्हें अपने स्तर पर हटा लें। यदि निर्धारित समय में वे ऐसा नहीं करते हैं तो निगम उन भवनों को ध्वस्त करेगा। उसका पूरा खर्चा हजार्ना भवन मालिकों से वसूल किया जाएगा।</p>
<p><strong>हादसों की आशंका अधिक</strong><br />आयुक्त ने बताया कि निगम की ओर से हर साल अनंत चतुर्दशी से पहले जर्जर भवनों का सर्वे कर उन पर लाल निशान लगाए जाते हैं। लेकिन उसके बाद भी उन भवनों को अभी तक नहीं तोड़ा गया है। जिससे अनंत चतुर्दशी व अन्य आयोजनों के दौरान भीड़ के उन मकानों पर चढ?े से हादसों की आशंका बनी रहती है।ऐसे में पहले से ही कार्यवाई की जाएगी तो हादसे व अनहोनी को टाला जा सकता है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 16:00:52 +0530</pubDate>
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                <title>यूडी टैक्स: ढाई हजार प्रोपर्टी कर के दायरे में, नगर निगम ने दिए नोटिस</title>
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                        <![CDATA[वर्तमान में यूडी टैक्स का लक्ष्य करीब 18 करोड़ रुपए उसमें से अभी 50 फीसदी से ही अधिक लक्ष्य प्राप्त हुआ ।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ud-tax--2-500-properties-under-the-tax-net--municipal-corporation-issues-notices/article-142042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से हर साल वसूल किया जाने वाला नगरीय विकास कर(यूडी टैक्स) समय पर जमा नहीं करवाने वालों पर अब शिकंजा कसा जाएगा। निगम द्वारा बड़े बकायादारों को नोटिस देने के बाद अब उनके प्रतिष्ठान की सीजिंग की कार्रवाई की जाएगी। पूर्व में जब कोटा में दो नगर निगम उत्तर व दक्षिण थे। उस समय दोनों नगर निगम की बजट बोर्ड बैठकों में अन्य मदों के साथ ही नगरीय विकास कर के भी बजट लक्ष्य तय किए गए थे। हालांकि बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने के बाद फिर से नगर निगम एक हो गया है। ऐसे में वर्तमान में नगरीय विकास कर का लक्ष्य करीब 18 करोड़ रुपए हो गया है। लेकिन उसमें से अभी 50 फीसदी से ही अधिक लक्ष्य प्राप्त हुआ है।</p>
<p><strong>छूट का इंतजार</strong><br />राज्य सरकार द्वारा हर साल टैक्स जमा नहीं करवाने वालों को राहत देने के लिए ब्याज पेनल्टी में छूट का प्रावधान करती है। जिससे अधिक से अधिक बकायादार बिना ब्याज पेनल्टी के टैक्स जमा करवा सके। हालाकि फरवरी का महीना शुरू हो गया है। अभी तक सरकार ने छूट की घोषणा नहीं की है। जबकि बड़े बकायादार सरकार की छूट का इंतजार कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार वर्तमान वित्त वर्ष में कर जमा करवाने वालों के लिए अभी समय है। लेकिन जो कर दाता बरसों से बकाया कर जमा नहीं करवा रहे हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>वित्तीय वर्ष समाप्त होने में दो माह का समय</strong><br />वित्तीय वर्ष 2025-26 के समाप्त होने में अब मात्र दो माह का ही समय शेष है। 31 मार्च को वित्त वर्ष समाप्त हो जाएगा। ऐसे में यूडी टैक्स वसूली के लक्ष्य को इन शेष दो माह की अवधि में ही पूरा करना है। जबकि हालत यह है कि अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे कर दाता हैं जिन्होंने टैक्स जमा नहीं कराया है। साथ ही कई कर दाता तो ऐसे हैं जो पिछले काफी समय से टैक्स जमा नहीं करवा रहे हैं। उनके खिलाफ नगर निगम अब सख्त कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।</p>
<p><strong>दक्षिण में 15 सौ व उत्तर में एक हजार </strong><br />नगर निगम की ओर से नगरीय कर की वसूली निजी फर्म के माध्यम से की जा रही है। फर्म द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार शहर में करीब 25 सौ प्रोपर्टी ऐसी हैं जो यूडी टैक्स के दायरे में आती हैं। जिनमें से दक्षिण में 15 सौ व उत्तर में एक हजार हैं। जिनमें से करीब एक चौथाई ने ही कर जमा कराया है।</p>
<p><strong>टैक्स जमा नहीं करवाने वालों पर हो सख्ती</strong><br />लोगों का कहना है कि नगरीय कर के दायरे में आने वाले प्रतिष्ठानों को समय पर टैक्स जमा करवाना चाहिए। कर जमा नहीं करवाने वालों पर सख्ती होनी चाहिए। नयापुरा निवासी महेश खत्री का कहना है सरकार ऐसे लोगों को पेनल्टी व सजा देने की जगह टैक्स जमा नहीं करवाने वालों को हर साल छूट का लाभ देकर उपकृत करती है। ऐसा करना गलत है। जबकि समय पर टैक्स जमा करवाने वालों को कोई लाभ नहीं दिया जाता। दादाबाड़ी निवासी रामबाबू नागर का कहना है कि व्यवसायिक प्रतिष्ठान जब कमाई करते हैं तो उन्हें टैक्स भी समय पर देना चाहिए। यह उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन कई कर दाता कार्रवाई का डर नहीं होने से टैक्स जमा नहीं करवाते हैं। जिससे कर जमा करवाने वालों को नुकसान होता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वित्त वर्ष समाप्त होने में अब मात्र दो माह का भी समय शेष नहीं है। ऐसे में नगरीय विकास कर जमा नहीं करवाने वाले सभी कर दाताओं को धारा 131 के नोटिस दो से तीन बार दिए जा चुके हैं। उसके बाद भी विशेष रूप से बड़े बकायादारों द्वारा टैक्स जमा नहीं करवाने वालों पर अब निगम सख्ती करेगा। ऐसे प्रतिष्ठानों पर अब सीजिंग की कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई शीघ्र ही चालू की जाएगी।<br /><strong>- धीरज सोनी, उपायुक्त राजस्व, नगर निगम कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:24:29 +0530</pubDate>
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                <title>पुलिस से वन विभाग तक लाखों का पानी बिल बकाया, विभागों को नोटिस जारी होने के बाद भी जमा नहीं करवाए बिल राशि </title>
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                        <![CDATA[जलदाय विभाग के राजस्व वसूली लक्ष्य में सरकारी विभाग सबसे बड़ा अडंगा]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-bills-worth-lakhs-are-pending--from-the-police-to-the-forest-department--despite-notices-issued-to-the-departments--the-bills-remain-unpaid/article-128058"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(3)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जलदाय विभाग को हर साल करोड़ों का राजस्व वसूली का लक्ष्य मिलता है लेकिन विभाग वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक भी पूरा नहीं कर पाता। नतीजन, 40% टारगेट अधूरा रह जाता है। जिसकी बड़ी वजह सरकारी डिपार्टमेंट है। जलदाय विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, कोटा में सेंट्रल गवर्नमेंट व स्टेट गवर्नमेंट के डिपार्टमेंट को मिलाकर कुल 15.56 करोड़ रुपए बकाया चल रहा है। वहीं, जिले में 1.80 लाख उपभोक्ता है, जिन पर भी बड़ी संख्या में पुराना व नया बिल बकाया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि सरकारी विभाग बकाया बिल जमा करवा दे तो 90% टारगेट पूरा हो सकता है। </p>
<p><strong>दादाबाड़ी पुलिस थाने पर 14 लाख बकाया</strong><br />जलदाय विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, दादाबाड़ी पुलिस थाने पर 14 लाख रुपए का पानी का बिल बकाया चल रहा है, जो कई वर्षों से जमा नहीं करवाया गया। वहीं, किशोरपुरा पुलिस थाने पर 2 लाख रुपए बकाया चल रहा है। विभाग द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बावजूद बकाया बिल जमा नहीं हुए।</p>
<p><strong>60% से कम टारगेट तो जेईईएन-एईईएन को नोटिस </strong><br />नाम न छापने की शर्त पर जल अधिकारियों ने बताया कि जिले में 6 सब डिवीजन कार्यालय है। प्रत्येक सब डिजीवन पर एक एईएन होता है। जिनके अधीन करीब 2-2 जेईएन होते हैं। लेकिन वर्तमान में जेईएन के पद रिक्त होने से अधिकतर सब डिवीजन में 1-1 ही जेईएन कार्यरत हैं। ऐसे में राजस्व वसूली  लक्ष्य के अनुरूप कर पाना चूनौतिपूर्ण हो जाता है। यदि, 60% से कम वसूली होने पर उच्चाधिकारियों द्वारा प्रत्येक एईएन व जेईएन को कारण बताओ नोटिस थमा दिया जाता है। दिन-रात दौड़ने के बावजूद नोटिस के रूप में तनाव झेलना पड़ता है। </p>
<p><strong>सरकारी विभागों ने नहीं भरा 15.56 करोड़ का बिल</strong><br />जिले में सरकारी विभागों पर वर्तमान में 15 करोड़ 56 लाख रुपए का बिल बकाया चल रहा है। इनमें केंद्रीय विभागों पर 56 लाख तथा राज्य सरकार के विभागों पर 15 करोड़ रुपए पानी का बिल कई वर्षों से पेडिंग चल रहा है। केंद्रीय विभागों में नारकोटिक्स डिपार्टमेंट, प्रोजेक्ट इंजीनियर इंस्टूमेंशन, मैनेजर सेंट्रल हाउस, नेशनल सीड्स कॉपरेशन, रीको सहित कई विभागों पर बकाया है। </p>
<p><strong>बिल जमा करवाने में एमबीएस अव्वल</strong><br />जानकारी के अनुसार, जिले के बड़े सरकारी अस्पतालों में बकाया पानी के बिल जमा करवाने के मामले में महाराव भीम सिंह अस्पातल अव्वल रहा है। एमबीएस का वर्तमान में मात्र 1500 रुपए का बिल बकाया चल रहा है। जबकि, राजकीय जिला अस्पताल रामपुरा पर 66 हजार और जेकेलोन चिकित्सालय पर 24 हजार 178 रुपए बकाया चल रहा है। </p>
<p><strong>1.80 लाख उपभोक्ता </strong><br />जल अधिकारियों ने बताया कि कोटा जिले में कुल 1 लाख 80 हजार उपभोक्ता हैं। इनमें से अधिकतर उपभोक्ताओं पर भी बड़ी संख्या में बिल राशि बकाया चल रही है।  हालांकि, हर दो माह में बिल भेजा जाता है। जिसे वसूलने के  लिए कर्मचारी घर-घर दस्तक दे रहे हैं। वहीं, आॅनलाइन प्लेटफार्म भी उपलब्ध करवा रखा है। </p>
<p>सरकारी विभागों पर करोड़ों रुपए का पानी का बिल बकाया चल रहा है। जिसे वसूलने के लिए नोटिस भेज दिए गए हैं। पहले भी भेजे गए थे। शत-प्रतिशत वसूली के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। <br /><strong>- जीवनधर राठौर, एक्सईएन जलदाय विभाग खंड प्रथम</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 16:21:58 +0530</pubDate>
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                <title>अब भूखंड मालिकों को होंगे नोटिस जारी </title>
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                        <![CDATA[ खाली पड़े भूखंडों पर फैली गंदगी से परेशान थे मोहल्लेवासी ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/now-notices-will-be-issued-to-the-plot-owners/article-125246"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(2)72.png" alt=""></a><br /><p>कवाई। कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में लंबे समय से खाली पड़े भूखंड कचरा फैंकने का अड्डा बन चुके हैं। इससे उठने वाली दुर्गंध और मच्छर व अन्य जहरीले जीव-जंतु बीमारियों का खतरा हर समय मंडराता रहता है। मोहल्ले वासियों का कहना है कि जहां सरकार और प्रशासन स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से स्वच्छता का संदेश देते हैं, वहीं कई जिम्मेदार सरकारी कर्मचारी ही भूखंडों में गंदगी का कारण बने हैं। कई भूखंड सरकारी कर्मचारियों के नाम हैं, जो उन्हें खरीद तो लेते हैं, पर रख-रखाव या सफाई पर ध्यान नहीं देते। सूत्रों के अनुसार ये भूखंड भविष्य में दुगना-तिगुना दाम मिलने की आशा में खाली रखे जाते हैं। ग्रामीणों ने कई बार पंचायत और जिम्मेदार अधिकारियों को शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब ग्राम पंचायत ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए भूखंड मालिकों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है। </p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाई थी समस्या </strong><br />कवाई कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में लंबे समय से खाली पड़े भूखंडों में कचरा फैंकने से होने वाली समस्या को लेकर नवज्योति ने 19 जुलाई को खबर को निजी भूखंड बीमारियों का बन रहे ठिकाना शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसका असर यह हुआ कि ग्राम पंचायत प्रशासन हरकत में आया और अब ग्राम पंचायत ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए भूखंड मालिकों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है। जिससे अब मौहल्लेवासियों को गदंगी और बीमारियों से राहत मिलने की उम्मीद जगी है। इसके लिए कस्बेवासियों और मोहल्लेवासियों ने नवज्योति का आभार जताया है। </p>
<p>जिन भूखंडों में गंदगी पाई गई है, उनके मालिकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्हें निर्धारित समय में साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि समय पर सफाई नहीं कराई गई तो आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।<br /><strong>-  रामप्रताप सिंह, विकास अधिकारी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 30 Aug 2025 15:50:51 +0530</pubDate>
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                <title>मैरिज गार्डन व हॉल में कमियों पर नोटिस देकर की इतिश्री, फायर टीम दे चुकी 200 से अधिक नोटिस</title>
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                        <![CDATA[मैरिज गार्डन में आग की घटना के बाद से नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के फायर अनुभाग द्वारा शहर में लगातार मैरिज गार्डन, मैरिज हॉल व होटलों में फायर सिस्टम की जांच की जा रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/notices-were-issued-on-deficiencies-in-marriage-gardens-and-halls/article-115955"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer67.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में बिना पंजीयन व अग्निशमन सुरक्षा संसाधनों के संचालित हो रहे मैरिज गार्डनों व मैरिज हॉल और होटलों को नगर निगम के फायर अनुभाग द्वारा कमियां मिलने पर नोटिस देकर इतिश्री की जा रही है। निगम  ने अभी तक किसी पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। जिससे मैरिज गार्डन संचालकों पर कोई असर भी नहीं दिख रहा है। झालावाड़ रोड स्थित एक मैरिज गार्डन में शादी समारोह के दौरान 19 मई को अचानक आग लग गई थी। शॉर्ट सर्किट से मंच पर लगी आग से पूरा मंच जल गया था। साथ ही समारोह में भगदड़ मच गई थी। गनीमत रही कि उस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। समय रहते निगम के फायर अनुभाग की दमकलों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया था। उस घटना के बाद नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के आयुक्तों के निर्देश पर फायर अनुभाग की टीमों द्वारा लगातार मैरिज गार्डनों व मैरिज हॉल और होटलों की जांच की जा रही है। इस दौरान वहां फायर उपकरण, फायर एनओसी और निगम में उनका पंजीयन समेत अन्य सुरक्षा उपायों को देखा जा रहा है। </p>
<p><strong>फायर टीम दे चुकी 200 से अधिक नोटिस</strong><br />मैरिज गार्डन में आग की घटना के बाद से नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के फायर अनुभाग द्वारा शहर में लगातार मैरिज गार्डन, मैरिज हॉल व होटलों में फायर सिस्टम की जांच की जा रही है। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि अभी तक 10 दिन में जांच के बाद 201 मैरिज गार्डन, हॉल व होटलों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। जिनमें फायर सिस्टम या एनओसी नहीं पाई गई। उनमें से अभी तक 10 फीसदी से भी कम मात्र 15 ने ही फायर एनओसी के लिए आवेदन किए हैं। उनके आवेदन पत्रों की जांच की जा रही है। सिस्टम लगा होने व नियमों की पालना होने पर ही एनओसी जारी की जाएगी। </p>
<p><strong>अधिकतर में नहीं हो रही नियमों की पालना</strong><br />हालत यह है कि शहर में जितने भी मैरिज गार्डन, मैरिज हॉल व होटल संचालित हो रहे हैं। उनमें से गिनती के ही मैरिज गार्डन नियमों के दायरे में आ रहे हैं। जबकि अधिकतर में नियमों की पालना तक नहीं हो रही है। न तो उनका निगम में पंजीयन है और न ही उनमें फायर सिस्टम लगे हुए हैं। यहां तक कि जिस मैरिज गार्डन में आग लगी थी। उसमें भी सिस्टम नहीं था। जबकि निगम के फायर अनुभाग की टीम द्वारा उसकी पूर्व में जांच के बाद नोटिस भी जारी किया गया था। उसके बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ। </p>
<p><strong>बिना पंजीयन नहीं होगा मैरिज गार्डनों का संचालन</strong><br />नगर निगम की ओर से कुछ दिन पहले ही एक आदेश जारी किया था। जिसमें कहा  था कि शहर में अब बिना पंजीयन के कोई भी मैरिज गार्डन संचालित नहीं होगा। मैरिज गार्डन संचालकों को नगर निगम में पंजीयन कराना होगा। नियमों की पालना करनी होगी। पार्किंग समेत अन्य सुविधाएं व फायर सिस्टम लगाने होंगे। लेकिन हालत यह है कि निगम की उस चेतावनी का भी किसी पर कोई असर नहीं हुआ। अभी तक किसी भी मैरिज गार्डन व मैरिज हॉल संचालक ने निगम में पंजीयन नहीं कराया है। </p>
<p>नगर निगम की ओर से शहर के सभी मैरिज गार्डन, हॉल व होटलों की जांच करवाई जा रही है। यह काम नियमित जारी है। जहां भी कमियां  मिल रही है। उन्हें नोटिस भी जारी किए गए हैं। नोटिस के बाद भी कमियों में सुधार नहीं करने या नियमों की पालना नहीं करने वालों के खिलाफ शीघ्र ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>- अशोक कुमार त्यागी, आयुक्त नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 May 2025 15:20:11 +0530</pubDate>
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                <title>रूफटॉप रेस्टोरेंट में नहीं हो रही नियमों की पालना</title>
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                        <![CDATA[दो बार नोटिस देकर निगम ने की इतिश्री।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rooftop-restaurants-are-not-following-the-rules/article-88297"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में बड़ी संख्या में होटल व मॉल में रूफटॉप रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं। लेकिन उनमें से अधिकतर रेस्टोरेंट में न तो नियमों की पालना हो रही है और न ही वे निगम से परमीशन लेकर संचालित हो रहे हैं। करीब 95 फीसदी रूफटॉप रेस्टोरेंट बिना स्वीकृति के संचालित हो रहे हैं। नगर निगम ने भी ऐसे रेस्टोरेंट को दो बार नोटिस देकर इतिश्री कर ली है। शहर में भीमगंजमंडी से लेकर राजीव गांधी नगर तक करीब तीन दर्जन से अधिक रूफ टॉप रेस्टोरेंट  संचालित हो रहे हैं। हालांकि नगर निगम के पास ऐसे रेस्टोरेंट का पूरा डाटा तक नहीं है। फिर भी कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में ही निगम के पास दो दर्जन रूफटॉप रेस्टोरेंट संचालित होने की जानकारी है। उनमें से भी अधिकतर द्वारा नियमों की पालना नहीं करने पर नगर निगम के राजस्व अनुभाग की ओर से रेस्टोरेंट सचालकों को एक साल में दो बार नोटिस जारी किए गए। उसके बाद भी न तो रेस्टोरेंट संचालकों ने नियमों की पालना की और न ही निगम से स्वीकृति प्राप्त की। बोर्ड बैठक में उठाया था मुद्दा : नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की गत वर्ष आयोजित बोर्ड बैठकों में शहर में अवैध रूप से संचालित रूफटॉप रेस्टोरेटंट पर कार्रवाई करने का मुद्दा उठाया गया था। दोनों निगमों के नेता प्रतिपक्ष ने यह मामला उठाया था। लेकिन उसके बाद भी निगम अधिकारियों ने रेस्टोरेंट संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। </p>
<p><strong>इन क्षेत्रों में हो रहा संचालन</strong><br />जानकारी के अनुसार कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में बल्लभबाड़ी, एरोड्राम, गुमानपुरा, झालावाड रोड, महावीर नगर प्रथम, तलवंडी, केशवपुरा, राजीव गांधी नगर, डीसीएम रोड, श्रीनाथपुरम् व ट्रांसपोर्ट नगर में रूफ टॉप रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं। जिनकी आॅनलाइन जानकारी होने के बाद व नियमों की पालना नहीं करने के बावजूद निगम अधिकारी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे।  लोगों का कहना है कि कई रूफटॉप रेस्टोरेंट तो रिहायशी इलाकों में हैं। जहां देर रात तक छतों पर डीजे बजते रहे हैं और शोर होने से क्षेत्र के लोगों को परेशानी होती है। इस बारे में थानों में शिकायत करने पर की कोई कार्रवाई नहीं होती। </p>
<p><strong>जांच में मिली अनियमितताएं</strong><br />पुलिस प्रशासन, आबकारी व नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से एक दिन पहले एरोड्राम चौराहा स्थित एक मॉल के रूफटॉप रेस्टोरेंट में ओचक जांच की गई। जांच में वहां फायर से लेकर आबकारी तक की कई अनियमिताएं पाई गई। सूत्रों के अनुसार यहां फायर एनओसी तो है लेकिन 10 में से अधिकतर सिलेंडरों की रिफलिंग नहीं हो रही थी। होजरील कार्यशील अवस्था में नहीं थी। उसके अलावा भी कई कमियां पाई गई। जिसके आधार पर पुलिस प्रशासन कार्रवाई करेगा।  सूत्रों के अनुसार मॉल में संचालित रूफटॉप रेस्टोरेंट में बार का लाइसेंस है वह तभी मिलता है जब फायर एनओसी होती है। जबकि कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में ही ऐसे दो दर्जन से अधिक रूफटॉप रेस्टोरेंट सचालित हो रहे हैं। उन्हें निगम की ओर से जून 2023 व फरवरी 2024 में नोटिस भी दिए जा चुके हैं। लेकिन उन नोटिस का भी संचालकों पर कोई असर नहीं हुआ। निगम अधिकारियों ने भी उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की।  जबकि कुछ समय पहले तलवंडी स्थित एक रूफटॉप रेस्टोरेंट में आग भी लग चुकी है। हालांकि निगम के फायर अनुभाग ने उसे उसी समय बंद करवा दिया था। </p>
<p><strong>चार साल पहले सरकार ने जारी किया था नोटिफिकेशन</strong><br />शहर में रूफटॉप रेस्टोरेंट तो पिछले कई सालों से संचालित हो रहे हैं। महानगरों की तर्ज पर कोटा में भी इनका चलन बढ़ा है। हालांकि लोग भी इसे पसंद कर रहे हैं। ऐसे  में रा’य सरकार की ओर से जनवरी 2020 में एक नोटिफिकेशन जारी  किया था। जिसमें रूफटॉप रेस्टोरेंट संचालकों को नगर निगम से स्वीकृति लेने और नियमों की पालना करने के लिए पाबंद किया गया था। नोटिफेशन के अनुसार रूफटॉप रेस्टोरेंट में एक निर्धारित स्थान पर ही कवर एरिया होगा। वहां का फर्नीचर लकडी का नहीं होकर स्टील एलुमीनियम के फ्रेम में होगा। रेस्टोरेंट में नीचे की तरफ पार्किंग की सुविधा होगी। फायर एनओसी लेना आवश्यक है। इसके लिए यूडी टैक्स जमा करवाना होगा।  </p>
<p><strong>निगम को राजस्व का नुकसान</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के नेता प्रतिपक्ष विवेक राजवंशी ने बताया कि शहर में बड़ी संख्या में अवैध रूप से रूफटॉप रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए वे बोर्ड बैठक में भी इस मुद्दे को उठा चुके हैं। स्वीकूति नहीं लेने व फायर एनओसी, यूडी टैक्स जमा नहीं करवाने से निगम को भी राजस्व की हानि हो रही है। लेकिन अधिकारी उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।  इधर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर में संचालित करीब 95 फीसदी रूफटॉप रेस्टोरेंट में न तो नियमों की पालना हो रही है और न ही उन्होंने परमीशन ले रखी है। यूडी टैक्स जमा नहीं होने से उनके पास फायर एनओसी तक नहीं है। हालांकि निगम अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में आग लगने वाले रूफटॉप रेस्टोरेंट को बंद कराया गया है। साथ ही सभी को दो बार नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Aug 2024 15:08:27 +0530</pubDate>
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                <title>एक होटल संचालक ने बकाया 6 लाख यूडी टैक्स जमा कराया, दूसरे होटल से 41 हजार का जुर्माना वसूला</title>
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                        <![CDATA[नगर परिषद की सख्ती पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान के संचालकों में हड़कंप मच गया। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/one-hotel-operator-deposited-the-outstanding-ud-tax-of-6-lakhs--a-fine-of-41-thousand-was-collected-from-another-hotel/article-87303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(3)13.png" alt=""></a><br /><p>बारां। दिल्ली में कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में पानी भरने से तीन विद्यार्थियों की मौत के बाद राज्य सरकारी सख्ती बारां शहर में नगर परिषद की ओर से कड़ी कार्रवाई की जा रही है। शहर के कोचिंग संस्थान, होटल, रेस्टोरेंट में सर्वे के बाद 16 संस्थानों में भारी अनियमितता पाई गई थी। अग्निशमन विभाग के प्रभारी उवेश शेख ने बताया कि नगर परिषद शहर में अग्निशमन विभाग के दिशा निर्देश तथा मानको के अनुसार नहीं चलने वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बार बार नोटिस जारी करने के बाद भी नियमों का उल्लंघन करने को लेकर आयुक्त सौरभ जिंदल के दिशा निर्देश पर अनियमितता बरतने पर सीज करने को चेताया गया था। इस पर नगर परिषद ने गुरुवार को बारां शहर के श्रीजी होटल से 41 हजार का जुर्माना वसूला। इस  होटल के यूडी टैक्स जमा नहीं थे। फायर एनओसी भी नहीं थी। इसी प्रकार होटल दावत रेस्टोरेंट ने अपने बकाया यूडी टैक्स के 6 लाख रुपए जमा परिषद में जमा करा दिए। इसके साथ ही फायर एनओसी के लिए भी इस होटल से आॅनलाइन आवेदन कर दिया। </p>
<p><strong>आनन-फानन में होटल संचालकों ने फायर एनओसी के लिए किए आवेदन</strong><br />नगर परिषद की सख्ती पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान के संचालकों में हड़कंप मच गया। सभी ने आनन-फानन से फायर एनओसी के लिए आॅनलाइन आवेदन करना शुरू कर दिया। अब तक12 प्रतिष्ठानों की ओर से आवेदन कर लिए गए है। इनमें होटल राधिका, होटल महक, होटल कंचन, महावीर गार्डन, होटल सिटी सेंटर, होटल रेड स्टोन आदि ने फायर एनओसी के लिए आवेदन कर दिया है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Aug 2024 17:00:28 +0530</pubDate>
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                <title>अनियमितता वाले होटल, रेस्टोरेंट आदि संस्थानों को परिषद ने नोटिस जारी किए</title>
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                        <![CDATA[भारी बरसात में बेसमेंट में पानी भरने पर हादसे का खतरा।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/the-council-has-issued-notices-to-the-irregular-hotels--restaurants-etc/article-86998"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/photo-size-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>बारां। दिल्ली और जयपुर में बेसमेंट हादसे में हुई मौतों के बाद बारां नगर परिषद ने सख्ती बरतना शुरू कर दिया है। शहर में बेसमेंट, सुरक्षा इंतजाम, फायर एनओसी आदि अनियमितता वाले होटल, रेस्टारेंट आदि स्थानों को नगर परिषद ने सोमवार को नोटिस जारी किए है। इसके बाद अब गुरुवार को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि बारां शहर में बेसमेंट सहित  अन्य अनियमितता बरतने पर बारां शहर में बेसमेंट में धड़ल्ले से चल रही कारोबारी गतिविधियां...शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। जिस पर नगर परिषद ने गंभीरता से लेते हुए लापरवाही बरतने वाले होटल, रेस्टोरेंट आदि संस्थानों को नोटिस जारी किए है। नगर परिषद के सहायक अग्निशमन अधिकारी उवेश शेख ने बताया कि अस्पताल रोड स्थित होटल दावत रेस्टोरेंट, चारमूर्ति चौराहा निवासी होटल सिटी सेंटर, होटल रेड स्टोन, होटल महक, कोटा रोड स्थित होटल राधिका, कोटा रोड स्थित होटल श्रीजी को नोटिस जारी किया गया है। गुरुवार को इन संस्थानों को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली के बाद  जयपुर में भी बेसमेंट में बरसाती पानी भरने से तीन लोगों की मौत हो गई। जिस पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सख्ती बरती है। राज्य सरकार के निर्देश पर अब बारां शहर में शुक्रवार को 21 भवनों की जांच की गई थी।</p>
<p><strong>होटल, रेस्टोरेंट आदि में इमारतों में जांच में मिली भारी अनियमितता</strong><br />परिषद की अग्निशमन टीम ने शुक्रवार को बारां शहर में संचालित कोचिंग सेंटर, लाईब्रेरी, रेस्टोरेंट, हॉटल, कॉम्पलेक्स, अस्पताल, स्कूल सहित आवासीय और वाणिज्यिक संस्थानों का शुक्रवार को जांच की गई। इनमें 5 संस्थान में सुरक्षा उपकरण सही  अवस्था में पाए गए। जबकि शेष 16 संस्थानों में सुरक्षा उपकरण नहीं पाए गए। इन इमारतों के बेसमेंट, भवन, भवन निर्माण स्वीकृति, फायर एनओसी, फायर सिस्टम, यूडी टैक्स, लेंड यूज आदि की जांच की गई। जांच में 16 इमारतों कई सुरक्षा खामियां भी मिली है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Aug 2024 17:13:02 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - किसान को ठगने वाली दोनों व्यापारिक फर्मों को नोटिस जारी </title>
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                        <![CDATA[दैनिक नवज्योति ने मंडी में व्यापारियों द्वारा किए जा रहे किसानों के शोषण की खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---notice-issued-to-both-business-firms-cheating-farmers/article-73738"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/asar-khabar-ka---kisano-ko-thgne-wali-dono-vyaparik-farmo-ko-notice-jari...kota-news-26-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>रामगंजमंडी। कृषि उपज मंडी समिति रामगंजमंडी में शुक्रवार को एक किसान की कृषि उपज की बोली लगाने के बाद भी व्यापारी द्वारा उपज के सही दाम नही मिलने के मामले का कृषि उपज मंडी सचिव के हस्तक्षेप के बाद निस्तारित हो गया। गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति में शुक्रवार को मंडी में व्यापारियों द्वारा किए जा रहे किसानों के शोषण की खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। उसके बाद कृषि उपज मंडी सचिव दिवाकर दाधीच ने बताया कि शुक्रवार को यह मामला मेरी जानकारी में आया था। उसके बाद दोनों व्यापारिक फर्मों को फोन पर समझाइश कर मामले का निस्तारण कर दिया था। जितनी बोली लगाई गई थी, उतनी ही राशि व्यापारिक फर्म से दिलवा दी गई है। लापरवाही बरतने के मामले में दोनों व्यापारिक फर्मों को नोटिस भी जारी कर दिया है।  </p>
<p>किसान ने बोली लगाते समय जो जिंस दिखाई थी, बाद में उस ढेरी में अन्य जिंस भी मिला दी थी। इसलिए विवाद हुआ था।<br /><strong>- मुकेश धाकड़,अध्यक्ष, ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन     </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Mar 2024 15:48:32 +0530</pubDate>
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                <title>न्यास की कॉलोनियों में खाली हैं करीब 15 सौ भूखंड </title>
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                        <![CDATA[नगर विकास न्यास की ओर से खाली पड़े भूखंडों के मालिकों को जोन वाइज नोटिस जारी किए जा रहे हैं।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/about-15-hundred-plots-are-vacant-in-trust-colonies/article-70629"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/nyas-ki-coloniyo-me-khali-h-kreeb-15-so-bhukhand...kota-news-20-02-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर विकास न्यास की ओर से शहर में लोगों को मकान बनाने व रहने के लिए जमीन आवंटित की जा रही है। लेकिन लोग उन भूखंडों को लेने के बाद निर्माण नहीं कर रहे हैं। न्यास की ओर से करवाए गए सर्वे में इस तरह से बिना निर्माण के खाली पड़े करीब 15 सौ भूख़ड मिले हैं। जिन्हें अब न्यास की ओर से नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अनंतपुरा थाना क्षेत्र में गत दिनों तीन वर्षीय एक बालक की खाली भूखंड में भरे पानी में डूबने से मौत हो गई थी। उस घटना के बाद नगर विकास न्यास के अधिकारी हरकत में आए। उन्होंने जानकारी की तो पता चला कि शहर में इस तरह से बड़ी संख्या में भूखंड खाली पड़े हैं। जिनमें अवैध खनन हो रहा है। जिससे उनमें बड़े-बड़े गड्ढ़े हो गए हैं। उन गड्ढ़ों  में बरसाती पानी भरा हुआ है। जिससे आए दिन बच्चों के डूबने की घटनाएं हो रही हैं। </p>
<p><strong>15 दिन में निर्माण व समतलीकरण के दिए थे निर्देश</strong><br />नगर विकास न्यास की ओर से उस घटना के बाद खाली पड़े भूखंडों के मालिकों को निर्देश जारी किए थे। जिसमें कहा था कि वे 15 दिन में नियमानुसार निर्माण स्वीकृति लेकर निर्माण कार्य प्रारग्भ करें या फिर उनमें मिट्टी भरकर सड़क लेवल तक भूख़ंडों का समतलीकरण करें। ऐसा नहीं करने वालों के आवंटन निरस्त करने की कार्यवाही की जाएगी। </p>
<p><strong>अधिकतर कॉलोनियों व क्षेत्रों में मिले खाली भूखंड</strong><br />न्यास सूत्रों के अनुसार जब न्यास की ओर से तहसीलदार व संबंधित अधिकारियों के माध्यम से खाली भूखंडों का सर्वे कराया गया। जिसमें पाया कि शहर के अधिकतर क्षेत्रों में स्थित कॉलोनियों में भूखंड खाली पड़े हुए हैं। जिनमें से किसी में बरसाती गंदा पानी भरा हुआ है। किसी में कचरे का ढेर लगा हुआ है। कहीं दुर्गंध आ रही है तो कहीं बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। उन सभी की सूची तैयार की गई है। </p>
<p><strong>15 सौ भूखंड, नोटिस होंगे जारी</strong><br />नगर विकास न्यास के उप सचिव मुकेश चौधरी ने बताया कि शहर के सभी क्षेत्रों में न्यास की कॉलोनियों  में सर्वे कराया गया। जिनमें करीब 15 सौ भूखंड खाली पाए गए हैं। न्यास की ऐसी विभिन्न आवासीय योजनाओं के खाली भूखंडों के मालिकों को जोन वाइज नोटिस जारी किए जा रहे हैं।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Feb 2024 19:26:25 +0530</pubDate>
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                <title>गरीबों के निवाले पर डाला डाका, अब वसूलेंगे पाई-पाई</title>
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                        <![CDATA[ सरकारी नौकरी के बाद भी कुछ कर्मचारियों का सरकारी राशन से मोह नहीं छूट रहा है। रसद विभाग की ओर से गत दिनों कराई जांच में इसका खुलासा हुआ है। अब रसद विभाग ने नोटिस जारी कर इन पर शिंकजा कसने की तैयारी कर ली है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/robbery-put-on-the-morsel-of-the-poor--now-you-will-collect-pie/article-11740"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/4567.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकारी नौकरी के बाद भी कुछ कर्मचारियों का सरकारी राशन से मोह नहीं छूट रहा है। रसद विभाग की ओर से गत दिनों कराई जांच में इसका खुलासा हुआ है। अब रसद विभाग ने नोटिस जारी कर इन पर शिंकजा कसने की तैयारी कर ली है। सरकारी नौकरी में होने के बावजूद कई कर्मचारियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राशन कार्ड बनवा लिए थे और वर्षों से राशन सामग्री ले रहे थे। पूर्व में इसकी जांच की कोई व्यवस्था नहीं होने से राशन सामग्री लेने वाले सरकारी कर्मचारियों की कोई पहचान नहीं हो पा रही थी। ऐसे में कई सरकारी कर्मचारी गरीबों का निवाला डकार रहे थे। वहीं राशन कार्डधारियों की संख्या में भी काफी इजाफा हो रहा था। इस कारण सरकार ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राशन सामग्री उठाने वाले सरकारी कर्मचारियों का पता लगाने का निर्णय लिया था। इसके बाद प्रत्येक जिला स्तर जांच की गई तो कई सरकारी कर्मचारी पात्र नहीं होने के बावजूद राशन सामग्री लेते हुए पाए गए। इसके बाद विभाग इन कर्मचारियों को नोटिस जारी कर राशि वसूली की तैयारी में जुट गया।<br /><br /><strong>ऐसे हुआ खुलासा</strong><br />खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से जन आधार कार्ड से राशन कार्ड की मैपिंग के दौरान कई सरकारी कर्मचारियों की पहचान हुई, जो पात्र नहीं होने के बावजूद सस्ती राशन सामग्री उठा रहे थे। मैपिंग अभियान के दौरान राशन कार्ड डेटा का राजस्थान सरकार स्वास्थ्य सेवाओं (आरजीएचएस) में नामांकित परिवार के सदस्यों से मिलान करने पर पाया गया कि कई सरकारी कार्मिक ऐसे हैं, जो या तो सरकारी नौकरी कर रहे हैं या फिर सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होकर पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। इस तरह से यह काफी समय से सस्ता राशन उठा रहे थे।<br /><br /><strong>सरकार ने दिया मौका, लेकिन नहीं आए</strong><br />रसद विभाग ने राशन कार्डों की संख्या को देखते हुए अपात्रों द्वारा भी राशन सामग्री लेने की संभावना जताई थी। इस पर विभाग ने आमजन से अपील की थी कि जो भी अपात्र होने के बावजूद राशन सामग्री ले रहा है वह अपना राशन कार्ड सरेंडर कर दे ताकि इसका लाभ पात्र और जरुरतमंदों को मिल सके। रसद विभाग की इस अपील का अपात्रों पर कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद सरकार ने इन पर शिकंजा कसने का निर्णय लिया।<br /><br /><strong>कोटा में ज्यादा, झालावाड़ में कम</strong><br />राशन कार्ड की मैपिंग के दौरान कोटा संभाग में लगभग तीन हजार सरकारी कर्मचारियों के राशन सामग्री लेने की पहचान हुई है। इनमें कोटा में 1646, बारां में 446, बूंदी में 385 और झालावाड़ में 360 सरकारी कर्मचारी अपात्र होने के बावजूद राशन सामग्री लेते हुए पाए गए। अब इनसे वसूली की तैयारी शुरू हो गई है।अपात्र होने के बावजूद इन सरकारी कर्मचारियों ने सस्ते राशन सामग्री का भरपूर लाभ उठाया। राशन कार्ड के माध्यम से एक से दो रुपए किलो के बीच गेहूं मिलता है। अब सरकार ने अपात्र सरकारी कर्मचारियों से 27 रुपए किलो के हिसाब से वसूली करने के निर्देश दिए हैं। इस सम्बंध में अपात्र कर्मचारियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />योजनाओं में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम सामने आने के मामलों में विशेष अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है। सरकार को कर्मचारियों को अंतिम मौका देते हुए खुद शपथ पत्र लेना चाहिए। फिर भी अधिकारी व कर्मचारी का नाम इस तरह की योजनाओं में मिलता है तो एफआईआर दर्ज कराकर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।<br /><strong>- लोकेश कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता</strong><br /><br />आरजीएचएस के डाटा से खाद्य सप्लाई की सूची का क्रॉस सत्यापन कराया तो अपात्रों द्वारा राशन सामग्री उठाने के मामले सामने आए हैं। अब इनसे वसूली की तैयारी की जा रही है। <br /><strong>- पुष्पा हिरवानी, जिला रसद अधिकारी</strong></p>]]>
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                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jun 2022 15:55:13 +0530</pubDate>
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                <title>जयपुर के तीन उप पंजीयक कार्यमुक्त, 44 कार्मिकों को नोटिस, सात लिपिक एपीओ</title>
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                        <![CDATA[ई-ग्रास चालान के दुरुपयोग व बिना शुल्क चुकाए दस्तावेजों के पंजीयन के मामले में बड़ी कार्रवाई : 7.94 करोड़ की राजस्व अपवंचना]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%89%E0%A4%AA-%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4--44-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%B8--%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%8F%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%93/article-1763"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/denik-navjyoti-news_paper_new.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अजमेर</strong>। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग ने ई-ग्रास चालान का दुरुपयोग कर बिना शुल्क चुकाए दस्तावेजों का पंजीयन कराने के मामले में दस्तावेजों के सत्यापन में  लापरवाही बरतने वाले तीन उप पंजीयकों को कार्यमुक्त कर उन्हें राजस्व मण्डल भेज दिया है। जबकि 44 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 7 लिपिकों को एपीओ कर दिया गया है। इनके अलावा गड़बड़ी करने वाले 19 स्टाम्प वैंडरों के लाइसेंस निरस्त कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के महानिरीक्षक महावीर प्रसाद ने बताया कि उप पंजीयक जयपुर (पंचम) साधना शर्मा, उप पंजीयक जयपुर (दशम) राजीव बड़गूजर तथा कार्यवाहक उप पंजीयक जयपुर (द्वितीय) सविता शर्मा को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया गया है। तत्कालीन पंजीयन लिपिक बाबूलाल मीणा, सुशील कुमार शर्मा, बलबीर सिंह धायल, अनुपम सिंह, अशोक कुमार उपे्रती, दीपक हिंगोनिया तथा श्यामलाल कुमावत को एपीओ कर उनका मुख्यालय बदला गया है। वहीं 44 पंजीयन लिपिकों एवं अन्य संबंधित कार्मिकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जिन पर जांच के बाद नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उप पंजीयक कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही मिलने और अपवंचना चिन्हित होने के बावजूद भी वसूली के सार्थक प्रयास नहीं करने, चालानों के दुरुपयोग और कूटरचना के दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने में विलम्ब के कारण यह कार्रवाई की गई है। <br /> <br /> <strong>सत्यापन करते तो नहीं लगता चूना</strong><br /> मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने मुख्यालय स्तर पर भी एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर जांच के निर्देश दिए। समिति ने जांच में पाया है कि कतिपय स्टाम्प वैण्डरों द्वारा कोषालय से स्टाम्प क्रय करने के लिए उपयोग में लिए गए चालानों को फर्जीवाड़े के जरिए दस्तावेजों के पंजीयन के लिए पुन: उपयोग में लिया गया है। वहीं संबंधित उप पंजीयक, पंजीयन लिपिक एवं अन्य स्टाफ ने राज्य सरकार और विभाग द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों की अवहेलना कर चालानों का ई-ग्रास साइट से सत्यापन किए बिना ही लापरवाही पूर्वक दस्तावेजों का पंजीयन किया है। <br /> <br /> <strong>19 स्टाम्प वैंडरों के लाइसेंस रद्द</strong><br /> उन्होंने बताया कि उप महानिरीक्षक जयपुर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय द्वारा ऐसे 19 स्टाम्प वैण्डरों, जिनके उपयोग में लिए गए चालानों का दस्तावेजों के पंजीयन में कूटरचित कर पुन: उपयोग किया गया है, के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं। उनके विरुद्ध कूटरचना के लिए प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। अन्य उप महानिरीक्षकों द्वारा भी ऐसे मामलों में लाइसेंस निरस्तीकरण और प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है। विभाग ने ऐसे पीड़ित लोगों, जिनके दस्तावेजों में कूटरचित चालानों का उपयोग किया गया है, से अनुरोध किया है कि वे आगे आकर पुलिस को उन व्यक्तियों के नाम और पहचान बताएं, जिनके माध्यम से उन्होंने चालान बनाकर दस्तावेज पंजीबद्ध करवाए हैं। ताकि अपराधियों के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई हो सके।<br /> <strong><br /> 5.64 करोड़ की वसूली है बाकी</strong><br /> उन्होंने बताया कि इन प्रकरणों को संबंधित उप महानिरीक्षकों को भिजवा कर दस्तावेजों की कार्यालय प्रतियों से जांच करने के निर्देश दिए गए तथा राजस्व अपवंचना पाई जाने की स्थिति में वसूली करने, मामले में आपराधिक कृत्य पाए जाने पर प्रकरण दर्ज कराने तथा विभागीय स्तर पर लापरवाही पाई जाने पर संबंधित के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के प्रस्ताव मुख्यालय को प्रेषित करने के निर्देश दिए थे। उप महानिरीक्षकों से प्राप्त सूचना के अनुसार इन 676 प्रकरणों में से 11 प्रकरणों में राशि जमा होने का सत्यापन हो गया है। शेष 665 प्रकरणों में से 218 प्रकरणों में पक्षकारों द्वारा रुपए 2 करोड़ 28 लाख जमा कराए जा चुके हैं तथा 447 प्रकरणों में रुपए 5 करोड़ 64 लाख की वसूली शेष है। <br /> <br /> <strong>अब एसआईटी करेगी जांच</strong><br /> उप-पंजीयक कार्यालयों में फर्जी ई-ग्रास जरिए विक्रय पत्र पंजीयन करवाकर सरकार को करोड़ों रुपए की चपत लगाने के मामले में अब इसकी जांच पुलिस की विशेष अनुसंधान टीम करेगी। एसआईटी अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त करण शर्मा के नेतृत्व में गठित कर उसमें पुलिस निरीक्षक हरजी लाल और नरेन्द्र पारीक को शामिल किया है। एडिशनल कमिश्नर प्रथम अजयपाल लांबा ने बताया कि कुट रचित ई-ग्रास के जरिए विक्रय पत्र पंजीयन होने की जानकारी सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के अधिकारियों को होने पर उन्होंने विक्रय पत्रों से संबंधित क्रेता पक्षों को नोटरी जारी कर ब्याज राशि जमा कराने का कहा था। ई-ग्रास की संपूर्ण राशि नकद व बैंक ट्रांसफर के जरिए डीड राइटरों को अदा कर दी थी। इस कारण मामले की एफआईआर बनीपार्क थाने में दर्ज कराई थी। पूर्व में मामले में जांच बनीपार्क थाना प्रभारी कर रहे थे, लेकिन फर्जी ई-ग्रास बनाकर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी करने की घटना सामने आने पर मामले की प्रभावी जांच के लिए एसआईटी गठित की है। <br /> <br /> <strong>676 दस्तावेजों से पहुंचाई हानि</strong><br /> महानिरीक्षक सिंह ने बताया पहले से ही उपयोग में लिए जा चुके चालान को दस्तावेज के पंजीयन के लिए पुन: उपयोग लिए जाने की सूचना को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने एनआईसी एवं  ई-ग्रास की तकनीकी टीम के साथ बैठक कर उन्हें ई-पंजीयन एवं ई-ग्रास में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करने तथा पुन: उपयोग में लिए गए चालानों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। एनआईसी द्वारा 913 ऐसे दस्तावेजों की सूची उपलब्ध कराई गई, जिनमें पहले से ही उपयोग में लिए गए चालानों के पुन: उपयोग की आशंका थी। विभाग द्वारा इन मामलों में राजस्व अपवंचना का पता लगाने के लिए मुख्यालय स्तर पर कमेटी का गठन कर इन मामलों का परीक्षण कराया गया। कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार कुल 17 उप पंजीयक कार्यालयों से संबंधित 676 दस्तावेजों में 7 करोड़ 94 लाख रुपए की राजस्व अपवंचना पाई गई।</p>]]>
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                <pubDate>Tue, 19 Oct 2021 11:27:55 +0530</pubDate>
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