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                <title>Sanatan Tradition - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अखिलेश यादव ने लगाया केंद्र सरकार पर सनातन परंपराओं का अपमान का आरोप, शंकराचार्य मुद्दे पर साधा निशाना </title>
                                    <description><![CDATA[सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कार्यक्रम पर पाबंदियों को लेकर यूपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सनातन परंपराओं का अपमान और अनावश्यक शर्तें सरकार की 'कमजोर सत्ता' की पहचान हैं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि सरकार कोविड नियमों का बहाना बनाकर विशिष्ट संतों का अपमान कर रही है, जो अत्यंत निंदनीय है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/akhilesh-yadav-accused-the-central-government-of-insulting-sanatan-traditions/article-146089"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/akhilesh-yadav.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर सनातन परंपराओं को अपमान करने का आरोप लगाया है। अखिलेश यादव ने बुधवार को उत्तरप्रदेश सरकार की तरफ से लखनऊ में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के कार्यक्रम की अनुमति को लेकर लगायी गयी शर्त के मुद्दे पर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा और कहा कि किसी कार्यक्रम पर अनावश्यक शर्तें और प्रतिबंध लगाना कमजोर सत्ता की पहचान है। यदि राज्य सरकार सनातन परंपराओं का सम्मान नहीं कर सकती तो कम से कम उसका अपमान भी न करे।</p>
<p>उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया के जरिये आरोप लगाया कि प्रदेश की सरकार एक विशेष समाज के सम्मान को ठेस पहुंचा रही है। इस समाज के लोग राज्य सरकार में मंत्री, सांसद, विधायक या अन्य जनप्रतिनिधि के रूप में शामिल हैं, लेकिन इस मुद्दे पर वे अपने ही समाज के सामने जवाब देने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे जनप्रतिनिधि अपने स्वार्थ के लिए राज्य सरकार के साथ बने हुए हैं और अपने समाज में सम्मान खो चुके हैं।</p>
<p>सपा प्रमुख ने कहा कि जनता अगले चुनाव में ऐसे नेताओं को सबक सिखाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ जनप्रतिनिधि, जो वास्तव में अपने समाज के हितैषी हैं, वे उन दलों के संपर्क में हैं जो सनातन परंपराओं और समाज का सम्मान करते रहे हैं। उन्होंने कोविड-19 को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि महामारी अभी भी प्रभावी है तो सरकार बताए कि आखिरी बार किस सरकारी बैठक के आयोजन में इसका पालन किया गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राज्य सरकार नेताओं की बैठकों में क्या ये नियम लागू होते हैं या नहीं। सपा अध्यक्ष ने कहा कि इस तरह की बंदिशें निंदनीय और आपत्तिजनक हैं तथा यह सरकार की गलत सोच को दर्शाती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 15:27:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी होने पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, बताया-सनातन परंपरा का अपमान</title>
                                    <description><![CDATA[अजय राय ने अविमुक्तेश्वरानंद को मिले नोटिस को सनातन का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि सरकार अब धर्माचार्यों की पहचान तय करने लगी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/on-issuing-notice-to-swami-avimukteshwaranand-congress-targeted-the-central/article-140239"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(7)7.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। माघ मेला क्षेत्र में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने उत्तर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अब प्रदेश सरकार खुद यह तय करने पर उतारू हो गई है कि जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद वास्तव में शंकराचार्य हैं या नहीं। </p>
<p>उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ सनातन परंपरा का अपमान है, बल्कि धर्माचार्यों की गरिमा पर सीधा हमला भी है। एक ओर जगद्गुरु शंकराचार्य को नोटिस भेजे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार और उसके नेता सनातन धर्म के नाम पर बड़े-बड़े भाषण देते नहीं थकते। यह साफ तौर पर सरकार की दोहरी नीति को उजागर करता है।</p>
<p>अजय राय ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस देश और प्रदेश में सत्ता में बैठे लोग खुद को हिंदू धर्म का रक्षक बताते हैं, उसी शासन में एक प्रतिष्ठित धर्माचार्य की पहचान पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यह रवैया न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है, बल्कि भारतीय परंपराओं के भी खिलाफ है।   </p>
<p>प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि धर्म का सम्मान केवल मंचों से भाषण देकर नहीं होता, बल्कि अपने आचरण और व्यवहार से होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार धर्म को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है, लेकिन जब वास्तविक सम्मान की बात आती है तो उसका चेहरा बेनकाब हो जाता है।  </p>
<p>इसके आगे अजय राय ने मांग की कि राज्य सरकार इस पूरे मामले पर अपना रुख स्पष्ट करे और धर्माचार्यों के सम्मान से जुड़े किसी भी कदम से पहले सनातन परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं का ध्यान रखे। गौरतलब है कि, माघ मेला क्षेत्र में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस में न्यायालयीन आदेशों का हवाला देते हुए शंकराचार्य पद से जुड़े विवाद का उल्लेख किया गया है और मेला क्षेत्र में किसी भी प्रकार के आयोजन, शिविर या गतिविधि को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।</p>
<p>प्राधिकरण की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित वाद और पूर्व में पारित आदेशों के तहत विवादित विषय से जुड़े किसी भी प्रकार के आयोजन या प्रचार-प्रसार की अनुमति नहीं दी जा सकती। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि आदेशों के उल्लंघन की स्थिति में विधिक कार्रवाई की जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 18:43:16 +0530</pubDate>
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                <title>उज्जवल रमन ने कहा, प्रयागराज माघ मेला में संतों के साथ दुव्र्यवहार निंदनीय </title>
                                    <description><![CDATA[प्रयागराज सांसद उज्जवल रमन सिंह ने मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए दुर्व्यवहार की निंदा करते हुए जांच की मांग की। अपमान के विरोध में शंकराचार्य मौन व्रत पर हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ujjwal-raman-said-misbehavior-with-saints-in-prayagraj-magh-mela/article-140103"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/megh-mela.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। प्रयागराज से कांग्रेस के सांसद और पूर्व मंत्री उज्जवल रमन सिंह ने माघ मेला के दौरान मौनी अमावस्या के शाही स्नान में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी एवं उनके साथ उपस्थित संतों के साथ हुए कथित दुव्र्यवहार की घटना को अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण बताया।</p>
<p>रमन सिंह ने सोमवार को सोशल मीडिया अकाउंट फेसबुक पर पोस्ट किया,संगम की पवित्र भूमि सदियों से संत, साधु और महात्माओं की आस्था और श्रद्धा का केंद्र रही है। ऐसे पावन आयोजन में संत समाज के साथ किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार न केवल सनातन परंपराओं के विरुद्ध है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक मूल्यों को भी ठेस पहुंचाता है। संत समाज का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए तथा जो भी दोषी हों, उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।</p>
<p>उज्जवल रमन सिंह ने कहा, संतों का सम्मान ही हमारी संस्कृति और परंपरा की पहचान है और इस पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से भी अपेक्षा जताई कि ऐसे आयोजनों में संतों की गरिमा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए।    </p>
<p>गौरतलब है कि, प्रयागराज माघ मेला के दौरान मौनी अमावस्या महास्नान पर्व के मौके पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के संगम स्नान से वंचित रहने का मामला गरमा गया है। इसको लेकर शंकराचार्य के मौन व्रत धारण कर लिया है। दावा किया जा रहा है कि रविवार की घटना के बाद से ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अन्न-जल का त्याग कर दिया है। सोमवार को अपनी आगे की रणनीति का खुलासा कर सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 17:43:49 +0530</pubDate>
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