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                <title>multi-storey - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बिना कंट्रोल चल रही लिफ्ट, आए दिन हो रहे हादसे</title>
                                    <description><![CDATA[बहुमंजिला इमारतों में बिल्डर व सोसायटी संचालक वसूल रहे शुल्क]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lifts-are-running-without-control--accidents-are-happening-every-day/article-110186"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(2)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के विकास व विस्तार के साथ ही यहां बहुमंजिला इमारतों की बाढ़ सी आ गई है। इन आवासीय व व्यवसायिक इमारतों में आवागमन  की सुविधा के लिए लिफ्ट तो लगाई जा रही है लेकिन उनमें किसी भी प्रावधान का उपयोग नहीं किया जा रहा। यहां तक कि आमजन से जुड़े सरकारी विभागों तक में आए दिन लिफ्ट बंद व खराब होने की समस्या बनी हुई है। साथ ही कई बार हादसे भी हो चुके है। बहुमंजिला इमारत चाहे आवासीय सोसायटी हो या होटल, हॉस्टल हो या मॉल। यहां तक कि बड़े शिक्षण संस्थानों तक में सीढ़ियों के साथ लिफ्ट लगने लगी है। हर बिल्डर व सोसायटी के अलावा संबंधित व्यवसायिक इमारतों में मालिकों द्वारा ही अपने स्तर पर लिफ्ट लगवाई जा रही है। जिनकी न तो समय पर मेंटेनेंस हो रही है और न ही उनकी नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। जिससे आए दिन उन लिफ्ट के कभी खराब होने तो कभी लोगों के उनमें फंसने के मामले सामने आ रहे है। इतना ही नहीं सोसायटी में रहने वाले फ्लैट मालिकों से बिल्डर व सोसायटी संचालक मेंटेनेंस के नाम पर हर महीने हजारों रुपए शुल्क भी वसूल रहे है। लेकिन लिफ्ट की मेंटेनेंस नियमित नहीं हो रही है। शहर में 10 से 18 मंजिला तक की इमारतें हैं जिनमें बिना लिफ्ट के ऊपरी मंजिल तक पहुंचना भी मुुश्किल है। </p>
<p><strong>निगम की दोनों लिफ्ट बंद</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की दोनों लिफ्ट पिछले कई दिन से बंद है। जिनकी सप्लाई ही बंद की हुई है। उत्तर की लिफ्ट मेंटेनेंस के लिए तो दक्षिण की बदहाल होने से बंद की हुई है। जिससे तीसरी मंजिल पर जाने के लिए लोगों को सीढ़ियों का उपयोग करना पड़ रहा है।  निगम कार्यालय में लिफ्ट प्रशासनिक भवन के साथ ही वर्ष 2012 में लगी थी। कोटा विकास प्राधिकरण में नव विस्तारित भवन में लिफ्ट लगी हुई है। इसे लगे हुए अभी 4 साल ही हुए हैं। जुलाई 2021 में इस भवन का उद्घाटन हुआ था। उसी समय यहां लिफ्ट लगाई गई थी। जिससे वह सही हालत में है। </p>
<p><strong>पहले हो चुके कई हादसे</strong><br />गत वर्ष जुलाई में आर.के. पुरम् क्षेत्र स्थित बहुमंजिला इमारत में लिफ्ट के अचानक बंद होने से एक महिला फंस गई थी। जिसे निकालने के दौरान वह तीसरी मंजिल से नीचे गिर गई थी। जिससे ुसकी मौत हो गई थी। उसी तरह से शहर में कई अन्य घटनाएं हो चुकी है। एक -दो जगह तो ल्फिट खराब होने से लोगों के फंसने तक के मामले हो चुके है।  हालांकि पूर्व में हो चुके हादसों को देखते हुए अब अधिकतर जगह पर पारदर्शी लिफ्ट लगने लगी है। जिससे उसके बंद या खराब होने पर बाहर से ही लोगों के उसमें फ़ंसे होने का पता चल सके। जानकारों के अनुसार सरकारी विभागों में लिफ्ट खराब होने का प्रमुख कारण वहां गार्ड नहीं होना है। जिससे दिनभर लोग अपनी मर्जी से बटन  दबाकर उसका उपयोग करते है। साथ ही पब्लिक लिफ्ट का भी सर्विस लिफ्ट की तरह भारी सामान ले जाने में करते हैं। </p>
<p><strong>प्रावधान व मेंटेनेंस जरूरी</strong><br />शॉपिंग सेंटर निवासी रोहित सिंह राजावत ने बताया कि जिस तरह से मल्टी स्टोरी में फायर सिस्टम का प्रावधान किया हुआ है। उसी तरह से लिफ्ट लगाने के लिए भी नियम व प्रावधान होने चाहिए।  जिससे  वहां जिम्मेदारी तय हो सके और उस मल्टी में रहने वालों के जीवन से खिलवाड़ नहीं हो सके। झालावाड़ रोड स्थित एक मल्टी स्टोरी में रहने वाले अशोक नुवाल का कहना है कि मल्टी में जिस कम्पनी की लिफ्ट है उसी कम्पनी को इसके मेंटेनेंस का ठेका दिया हुआ है। कम्पनी द्वारा समय-समय पर इसकी मेंटेनेंस की जा रही है। जिससे यह पिछले कई सालों से सही काम कर रही है। </p>
<p><strong>सरकारी एजेंसी की नहीं मॉनिटरिंग</strong><br />केडीए के वुरष्ठ नगर नियोजक का कहना हैकि मल्टी स्टोरी में लिफ्ट लगाने के संबंध में नेशनल बिल्डिंग कोड(एनबीसी) में प्रावधान किया हुआ है। उसमें उसकी गुणवत्ता का भी उल्लेख है। लेकिन बिल्डिंग में लिफ्ट लगने के बाद सरकारी एजेनसी द्वारा उसकी मॉनिटरिंग का कोई प्रावधान नहीं है। संबंधित सोसायटी व बिल्डर और सरकारी कार्यालयों में संबंधित विभागों की ही जिम्मेदारी है। कि वह समय-समय पर उसकी मेंटेनेंस करवाएं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की लिफ्ट को मेंटेनेंस के लिए बंद किया हुआ है। निगम की लिफ्ट की शुरुआत में तो कम्पनी द्वारा ही मेंटेनेंस की जाती थी। बाद में उसका पैनल चैंज कर अब निजी कम्पनी व संवेदक को उसका ठेका दिया  हुआ है। कम्पनी इंजीनियर व निगम इंजीनियर हर सप्ताह उसकी जांच करते है। लिफ्ट पुरानी होने से उसकी मेंटेनेंस के लिए सप्लाई बंद की हुई है। उत्तर की लिफ्ट तो जल्दी ठीक हो जाएगी। जबकि दक्षिण निगम में नई व आधुनिक तकनीक वाली लिफ्ट लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। <br /><strong>- सचिन यादव, अधिशाषी अभियंता(विद्युत) नगर निगम कोटा उत्तर/दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Apr 2025 14:40:51 +0530</pubDate>
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                <title>नियम ताक पर रख हो रहा निर्माण</title>
                                    <description><![CDATA[नियम विरुद्ध निर्माण व अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदारी नगर निगम के निरीक्षकों की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/on-going-construction/article-52107"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/niyam-taak-pr-rkh-ho-rha-nirmaan...kota-news-18-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल कोटा एक तरफ तो पर्यटन नगरी के रूप में विकसित हो रही है। वहीं दूसरी तरफ चुनावी आहट के साथ ही यहां नियम ताक पर रखकर किए जा रहे निर्माण व अतिक्रमण की हौड़ सी मची हुई है।  शहर में जहां देखो वहां बहुमंजिला इमारतें बनने लगी है। नए कोटा से लेकर नदी पार क्षेत्र तक में हो रहे निर्माण में अधिकतर बिना अनुमति और नियमों को ताक पर रखकर निर्माण किया जा रहा है। शहर में बिना सैट बैक छोड़े और छोटे भूखंडों पर 7 से 8 मंजिल तक का निर्माण किया जा रहा है। इतनी अधिक संख्या में व ऊंचाई तक निर्माण होने के बावजूद नगर निगम व नगर विकास न्यास प्रशासन को वे नजर ही नहीं आ रहे हैं। नियम विरुद्ध निर्माण व अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदारी नगर निगम के निरीक्षकों की है। लेकिन उनका इस पर कोई ध्यान ही नहीं है। </p>
<p><strong>सर्वाधिक हॉस्टलों का  निर्माण</strong><br />शहर में निर्मित बहुमंजिला इमारतों में अधिकतर हॉस्टल बने हुए हैं। उनमें भी अधिकतर नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए हैं। निर्माण होने के बाद न तो उन पर कोई कार्रवाई हो रही है और न ही नए निर्माण रूक रहे हैं। हालत यह है कि शहर में वर्तमान में भी धडल्ले से नियमों को ताक पर रखकर निर्माÞ किए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>चुनाव की आड़ में हो रहा निर्माण</strong><br />राज्य में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले है। प्रशासन का पूरा ध्यान उसकी तैयारी में लगा हुआ है। सरकार व जनप्रतिनिधि टिकट की जुगाड़ में लगे हैं। इसका शहर में कई लोग फायदा उठा रहे हैं। नियम ताक पर रखकर किए जा रहा निर्माण सिर्फ बहुमंजिला ही नहीं हो रहा। कॉलोनियों में भी इस तरह का निर्माण हो रहा है। फिर चाहे वह किशोरपुरा का क्षेत्र हो या गुमानपुरा का। उन्हें देखने वाला कोई नहीं है। </p>
<p><strong>कॉलोनियों में अतिक्रमण की भरमार</strong><br />वहीं दूसरी तरफ कॉलोनियों में अतिक्रमण की होड़ मची हुई है। लोगों ने सड़ँक सीमा में मकान से लेकर मकान के छज्जे तक बढ़ा दिए हैं। किसी ने नाली को ढककर रैम्प बना लिया है तो किसी ने सीड़ियां। किसी ने बैठने का चबूतरा बना लिया है तो किसी ने वाहन खड़ा करने के लिए गैराज। यह स्थिति दादाबाड़ी, बसंत विहार, महावीर नगर, तलवंडी से लेकर कुन्हाड़ी और खेड़ली फाटक व स्टेशन क्षेत्र की कई कॉलोनियों में बनी हुई है।  नगर निगम व नगर विकास न्यास की ओर से कुछ समय पहले अभियान चलाकर कार्रवाई भी की गई थी लेकिन उसके बाद फिर से इस तरह से मामले बढ़े हैं। </p>
<p><strong>न्यास ने सीज किए हॉस्टल</strong><br />नगर विकास न्यास की ओर से कुछ समय पहले जवाहर नगर व बसंत विहार में निर्माणाधीन हॉस्टल के बिना अनुमति बनाने पर सीजिंग की कार्रवाई की थी। लेकिन उसके बाद अधिकारी अन्य कामों में व्यस्त हो गए। जिसका फायदा उठाकर शहर में नियम विरुद्ध निर्माण व अतिक्रमण होने लगे हैं। </p>
<p><strong>निगम के पास अवैध निर्माण की जानकारी नहीं</strong><br />शहर में कहां-कहां अवैध निर्माण हो रहा है। इसकी जानकारी नगर निगम के पास नहीं है। निगम अधिकारियों का कहना है कि जहां भी अवैध निर्माण व अतिक्रमण होने की शिकायत मिलती है। वहां नोटिस देने और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। लेकिन शहर में कितने अवैध निर्माण या नियम ताक पर रखकर निर्माÞ हो रहे हैं इसकी जानकारी नहीं है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में निर्माण कार्य करने से पहले उसकी अनुमति व स्वीकृति लेना आवश्यक है। निगम क्षेत्र में नगर निगम से और न्यास क्षेत्र में नगर विकास न्यास से। भूखंड के साइज व रोड की चौड़ाई समेत अन्य नियमों की पालना करते हुए ही निर्माण की स्वीकूति जारी की जाती है। यदि कोई बिना सैट बैक छोड़े निर्माण कर रहा है तो वह नियम विरुद्ध है। उसके खिलाफ संबंधित विभाग कार्रवाई कर सकता है। <br /><strong>- के.के. जांगिड़, उप नगर नियोयक</strong></p>
<p>शहर में बिना स्वीकृति के बहुमंजिला निर्माण होना गलत है। नियम विरुद्ध हो रहे निर्माण को प्राथमिक स्तर पर ही रोका जा सकता है। पूरा निर्माण होने के बाद उसे रोकना मुश्किल होता है। रीको क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में हॉस्टलों का नियम विरुद्ध तरीके से निर्माण हो गया है। संबंधित विभागों को चाहिए कि स्वीकृति के बाद ही निर्माण कार्य हो और नियमों के तहत हो। जिससे बाद में कोई समस्या न हो। <br /><strong>- ओ.पी. बुनकर, कलक्टर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Jul 2023 15:26:08 +0530</pubDate>
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                <title>बहुमंजिला इमारतों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बनेगी नीति, मौजूदा दरें नही है तर्क संगत</title>
                                    <description><![CDATA[बहुमंजिला इमारतों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए दरों को तर्क संगत बनाया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--policy-will-be-made-to-provide-drinking-water-in-multi-storey-buildings--the-current-rates-are-not-rational/article-8683"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/mahesh-joshi-.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बहुमंजिला इमारतों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए दरों को तर्क संगत बनाया जाएगा। इसके लिए कमेटी गठित कर एक माह में रिपोर्ट ली जाएगी। जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न शहरों में बहुमंजिला आवासीय भवनों में रह रहे लोगों की पेयजल संबंधी समस्या के समाधान को लेकर राज्य सरकार गंभीर है और इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने इस संबंध में नीति बनाने के लिए कमेटी के गठन एवं एक माह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। डॉ. जोशी मंगलवार को सचिवालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में बहुमंजिला इमारतों एवं निजी टाउनशिप में पेयजल कनेक्शन जारी करने के संबंध में बनाई जाने वाली नीति पर चर्चा के लिए आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शहरों में बढ़ रही जनसंख्या की आवास की जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुमंजिला इमारतों की संख्या बढ़ रही है। इन इमारतों में रहने वाले लोगों की पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यावहारिक नीति बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है और इस मुद्दे पर जल्द ही उचित निर्णय लिया जाएगा।</p>
<p><strong> राजस्थान की पेयजल उपलब्धता की परिस्थितियां अन्य राज्यों के मुकाबले विकट</strong><br />जलदाय मंत्री ने कहा कि राजस्थान की पेयजल उपलब्धता की परिस्थितियां अन्य राज्यों के मुकाबले विकट हैं। ऐसे में इन परिस्थितियों को देखते हुए अन्य राज्यों में बहुमंजिला इमारतों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अपनाई गई नीतियों का अध्ययन किया जाएगा। मल्टी स्टोरी एवं निजी टाउनशिप डवलपर्स के साथ ही रेजीडेन्ट वेलफेयर सोसायटी के प्रतिनिधियों के सुझावों को शामिल करते हुए  नीति का शुरूआती ड्राफ्ट जल्द ही तैयार किया जाएगा। विस्तृत अध्ययन एवं सभी के सुझावों के आधार पर फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पेयजल कनेक्शन की अफोर्डेबल दरें तय करने के लिए न्यायसंगत तरीका निकाला जाएगा जो सभी के हित में हो। साथ ही, इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि बहुमंजिला इमारतों में रह रहे लोगों और फ्लैट खरीदने वालों पर अत्यधिक भार नहीं पड़े। <br /><br /><strong>अभी कैसे से मिलता है पानी का कनेक्शन</strong><br />बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी डॉ. सुबोध अग्रवाल ने कहा कि जयपुर शहर के बहुमंजिला भवनों में 42 रूपए प्रति वर्गफीट की दर से जल कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए 30 नवम्बर 2016 को परिपत्र जारी किया गया था। इसके अलावा 6 अक्टूबर 2020 को जगतपुरा-महल रोड जलापूर्ति परियोजना के तहत जगतपुरा-महल रोड क्षेत्र की बहुमंजिला इमारतों के लिए 25 रुपए प्रति वर्गफीट की दर निर्धारित की गई थी, लेकिन इसके उत्साहजनक परिणाम प्राप्त नहीं हुए। अभी बहुमंजिला भवनों में पेयजल कनेक्शन के लिए एकमुश्त भुगतान प्रस्तावित है। इसके अलावा जलापूर्ति की बुनियादी सुविधाओं की कमी वाले क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतों के रहवासियों को उस क्षेत्र की परियोजना लागत का न्यूनतम 50 प्रतिशत अग्रिम भुगतान देना होता है। <br />उन्होंने कहा कि बिल्डर्स, टाउनशिप डवलपर्स एवं रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन आदि से विचार विमर्श कर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने के लिए गठित होने वाली कमेटी अपनी रिपोर्ट एक माह में प्रस्तुत करेगी। इस कमेटी में बिल्डर्स एवं टाउनशिप डवलपर्स के साथ ही रेजीडेंट वेलफेयर सोसायटी के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Apr 2022 18:24:56 +0530</pubDate>
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                <title>चार आवासीय योजनाओं में बनेंगे विभिन्न श्रेणियों के 2668 बहुमंजिला आवास</title>
                                    <description><![CDATA[आवासन मंडल की योजनाओं में आवेदकों का उत्साह : अंतिम तिथि से पूर्व ही 11 हजार से अधिक आए आवेदन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AD%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-2668-%E0%A4%AC%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8/article-1764"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/awasan-madal-rhb1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। आम लोगों को सस्ती दरों पर आवास उपलब्ध कराने के लिए लांच की गई चार आवासीय योजनाओं मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत सेक्टर 8 व 26 प्रताप नगर जयपुर, अरावली विहार आवासीय योजना भिवाड़ी और स्टूडियो अपार्टमेंट प्रताप नगर जयपुर में 2668 बहुमंजिला आवासों का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 11 हजार से अधिक आवेदकों ने अभी तक आवेदन कर दिया है, जबकि 25 अक्टूबर इसकी अंतिम तिथि है। राजस्थान आवासन मंडल आयुक्त पवन अरोड़ा ने बताया कि आम लोगों को सस्ती दरों पर आवास की सुविधा उपलब्ध कराने की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंशा के अनुरूप बहुमंजिला आवासों का निर्माण करने के लिए जयपुर एवं भिवाड़ी में चार आवासीय योजनाओं में आवेदन मांगे जा रहे हैं। इसमें आवेदक नकद भुगतान पद्धति एवं किश्तों पर आवेदन कर सकेंगे। <br /> <br /> <strong>फ्लैटों की ये होगी कीमत </strong><br /> जयपुर की प्रतिष्ठित आवासीय योजना प्रताप नगर में मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत सेक्टर 8 व सेक्टर 26 में दो प्रोजेक्टों में आवास निर्मित किए जाएंगे। इनमें सेक्टर 26 में निर्मित योजना में ईडब्ल्यूएस के लिए 726 आवास बनेंगे। इनमें एक फ्लैट का सुपर बिल्टअप एरिया 378.42 वर्ग फीट एवं कीमत 7.65 लाख रुपए रखी है। इसी योजना में एलआईजी के 620 फ्लैट बनाए जाएंगे, इनका सुपर बिल्टअप एरिया 548.12 वर्ग फीट और कीमत 11.10 लाख रुपए है। इसी तरह मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत ही सेक्टर 8 प्रताप नगर में ईडब्ल्यूएस के 130 आवास बनाए जाएंगे। एक फ्लैट का सुपर बिल्टअप एरिया 352 वर्ग फीट और इसकी कीमत 7.11 लाख रुपए होगी। इसी तरह एलआईजी के 114 फ्लैट बनेंगे। इसका सुपर बिल्टअप एरिया 550 वर्ग फीट व इसकी कीमत 11.11 लाख रुपए होगी। अरावली विहार भिवाड़ी में 808 फ्लैट बनाए जाएंगे। इनमें आर्थिक दृष्टि से कमजोर आय वर्ग के लिए 536 और अल्प आय वर्ग के लिए 272 फ्लैट बनेंगे।<br /> <strong><br /> स्टूडियो अपार्टमेंट में बनेंगे 270 आवास</strong><br /> जयपुर के प्रताप नगर में 60 से 70 हजार विद्यार्थियों की क्षमता वाला प्रदेश का पहला कोचिंग हब बन रहा है। इस कोचिंग हब का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इसके प्रथम चरण का कार्य सितंबर 2022 तक पूरा होगा। हब के पास ही मंडल द्वारा स्ववित्त पोषित योजना (एसएफएस) के आधार पर 270 बहुमंजिलें स्टूडियो अपार्टमेंट बनाए जाएंगे। एक अपार्टमेंट का सुपर बिल्टअप एरिया 415 वर्गफीट होगा। इसकी कीमत 8.97 लाख रुपए रखी है। <br /> <br /> <strong>ये आए आवेदन</strong><br /> भिवाड़ी आवासीय योजना में ईब्ल्यूएस के लिए 126, एलआईजी के 403, मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत ही सेक्टर 8 प्रताप नगर में ईडब्ल्यूएस के 1405 व एलआईजी के 3900, सेक्टर 26 प्रताप नगर में ईडब्ल्यूएस के 1295 व एलआईजी 3608 एवं स्टूडियो अर्पाटमेंट में 701 आवेदकों सहित कुल 2668 आवासों के लिए 11 हजार 438 आवेदक अब तक आवेदन कर चुके है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Oct 2021 11:45:19 +0530</pubDate>
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