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                <title>New Delhi Meeting - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>New Delhi Meeting RSS Feed</description>
                
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                <title>हिंद-प्रशांत में चीन की चुनौती के बीच भारत-जापान का बड़ा कदम, रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा मजबूत करने पर सहमति बनी</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के बीच नई दिल्ली में द्विपक्षीय रक्षा मंत्रिस्तरीय वार्ता हुई। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग पर समझौते पर हस्ताक्षर किए तथा मेक इन इंडिया के तहत रक्षा प्रौद्योगिकी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/amidst-chinas-challenge-in-the-indo-pacific-india-and-japan-agreed/article-163436"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को यहां जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के साथ रक्षा मंत्रिस्तरीय बैठक की जिसमें दोनों पक्षों ने मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए रक्षा सहयोग को प्रगाढ़ करने की प्रतिबद्धता जताई। रक्षा मंत्रालय ने बैठक के बाद जारी साझा प्रेस वक्तव्य में कहा कि दोनों मंत्रियों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हालात पर आकलन साझा करने तथा नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता एवं सुरक्षा में बाधा डालने वाली एकतरफा कार्रवाइयों तथा बल या दबाव के जरिए यथास्थिति बदलने के प्रयासों का कड़ा विरोध किया है।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा ," हिन्द प्रशांत की स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम। नयी दिल्ली में जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के साथ सार्थक बैठक हुई। बैठक में हमने समुद्री सुरक्षा सहयोग मजबूत करने , मेक इन इंडिया पहल के तहत रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग बढ़ाने और सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की।" साझा प्रेस वक्तव्य में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने हिन्द-प्रशांत में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए समुद्री सुरक्षा सहयोग को व्यावहारिक और प्रभावी तरीके से बढ़ाने पर सहमति जताई। उन्होंने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किये जिसमें समुद्री क्षेत्र से संबंधित जागरूकता, खोज एवं बचाव, मानवीय सहायता और आपदा राहत तथा भारतीय नौसेना और जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स के बीच सहयोग मजबूत करना शामिल है।</p>
<p>दोनों मंत्रियों ने समुद्री संचार लाइनों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक जहाजों की पारस्परिक यात्राओं, संयुक्त अभ्यास, सैन्यकर्मियों और विशेषज्ञों के आदान-प्रदान तथा बंदरगाहों, रखरखाव और मरम्मत सुविधाओं के इस्तेमाल सहित लॉजिस्टिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों पक्षों ने बारूदी सुरंग रोधी क्षमताओं में तालमेल बढ़ाने तथा जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमताओं का इस्तेमाल करते हुए नौसैनिक पोत निर्माण और डिजाइन में संयुक्त विकास की संभावनाएं तलाशने पर भी सहमति जताई।</p>
<p>भारत और जापान ने द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों को और जटिल तथा व्यापक बनाने, मानवरहित प्रणालियों को शामिल करने और अवसर मिलने पर कम समय के नोटिस पर संयुक्त अभ्यास करने पर सहमति जताई। दोनों पक्षों ने इस साल होने वाले 'वीर गार्जियन 26' वायु अभ्यास का स्वागत किया, जिसमें पहली बार जापान के लड़ाकू विमान भारत आएंगे। उन्होंने हिन्द-प्रशांत के व्यापक दृष्टिकोण के साथ उच्चस्तरीय आदान-प्रदान, सैन्य अभ्यास और अन्य पहलों के जरिए सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। भारत, जापान और इंडोनेशिया के बीच इस साल फरवरी में हुए पहले त्रिपक्षीय नौसैनिक 'पासेक्स' अभ्यास का भी स्वागत किया गया।</p>
<p>दोनों पक्षों ने प्राकृतिक आपदाओं के समय साझेदार देशों को कर्मियों और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के माध्यम से सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके साथ ही, इस वर्ष सितंबर में जापान के रक्षा मंत्रालय में होने वाले नेटवर्क के दूसरे टेबलटॉप अभ्यास का स्वागत किया। भारत और जापान ने रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी सहयोग को आगे बढ़ाने, यूनिकॉर्न एकीकृत संचार एंटीना प्रणाली परियोजना को जल्द साकार करने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और जापान के एटीएलए के बीच उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान एवं विकास सहयोग बढ़ाने तथा रक्षा उद्योग मंच आयोजित करने पर भी सहमति जताई। दोनों मंत्रियों ने सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में समन्वय और क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए महानिदेशक/संयुक्त सचिव स्तर के कार्य समूह की स्थापना पर भी सहमति जताई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 18:33:56 +0530</pubDate>
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                <title>विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, भारत के पड़ोस में आतंकवादी ढांचों को किसी भी प्रकार की सहायता न दें पोलैंड </title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की से मुलाकात कर आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' अपनाने और भारत के पड़ोस में आतंकी बुनियादी ढांचे को समर्थन न देने का आग्रह किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/foreign-minister-jaishankar-said-that-poland-should-not-provide-any/article-140127"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/jai-shankar.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री डा. एस जयशंकर ने पोलैंड से आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की नीति अपनाने का आग्रह करते हुए कहा है कि उसे भारत के पड़ोस में आतंकवादी ढांचों को किसी भी प्रकार से सहायता नहीं देनी चाहिए। डा. जयशंकर ने भारत यात्रा पर आये पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के साथ सोमवार को यहां के दौरान प्रारंभिक वक्तव्य में कहा कि पोलैंड इस क्षेत्र के लिए कोई अजनबी नहीं हैं और वह सीमा-पार आतंकवाद की लंबे समय से चली आ रही चुनौती से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि पोलैंड को आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनानी चाहिए और हमारे पड़ोस में आतंकवादी ढांचे को किसी भी प्रकार से सहायता नहीं करनी चाहिए।</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों की बातचीत में क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा स्वाभाविक रूप से शामिल होगी। विशेष रूप से अपने-अपने पड़ोस के संबंध में आकलनों का आदान-प्रदान उपयोगी रहेगा। उन्होंने कहा कि वह यूक्रेन संघर्ष और उसके प्रभावों पर भारत के विचार पहले भी स्पष्ट रूप से साझा कर चुके हैं और उन्होंने जोर देकर कहा है कि चुनकर भारत को निशाना बनाना न केवल अनुचित बल्कि अन्यायपूर्ण भी है। विदेश मंत्री ने कहा कि वह आज एक बार फिर इस बात को दोहरा रहे हैं।</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया में काफी उथल-पुथल है। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड  अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित हैं, जिनकी अपनी-अपनी चुनौतियां और अवसर हैं इसे देखते हुए विचारों और दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करना स्वाभाविक रूप से उपयोगी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध भी निरंतर प्रगति कर रहे हैं लेकिन इन पर निरंतर ध्यान दिये जाने की जरूरत है। </p>
<p>भारत और पोलैंड के बीच परंपरागत रूप से गर्मजोशीपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। हाल के वर्षों में ये संबंध उच्च-स्तरीय राजनीतिक आदान-प्रदान तथा सशक्त आर्थिक और लोगों के बीच संपर्कों से आगे बढकर मजबूत हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2024 की पोलैंड यात्रा के दौरान संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया।</p>
<p>डा. जयशंकर ने कहा कि दोनों देश बातचीत के दौरान 2024 से 28 तक कार्ययोजना की समीक्षा करेंगे जिसके माध्यम से हम अपनी रणनीतिक साझेदारी की पूरी क्षमता को साकार करना चाहते हैं। इसके अलावा व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों तथा डिजिटल नवाचार में सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे।</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि पोलैंड मध्य यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 7 अरब डॉलर है जिसमें पिछले एक दशक में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पोलैंड में भारतीय निवेश तीन अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, जिससे पोलैंड के नागरिकों के लिए रोजगार के अनेक अवसर सृजित हुए हैं। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, बड़े बाजार का आकार और निवेश-अनुकूल नीतियाँ वहां के व्यवसायों के लिए अपार अवसर प्रदान करती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 17:56:42 +0530</pubDate>
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