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                <title>houses - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>केरल सरकार का मछुआरों के लिए बड़ा काम : 12 हजार घर, 6,300 फ्लैट सौंपे; बच्चों को मेडिकल से लेकर यूरोप तक पढ़ाई का मौका</title>
                                    <description><![CDATA[ केरल में 2016 में सत्ता में आई मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नीत वामपंथी सरकार ने पुनर्वास योजना के तहत मछुआरों के लिए 12,000 मकान और 6,300 फ्लैट बनाकर उन्हें सौंपे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kerala-governments-fishermen--houses-handed/article-119095"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news1.png" alt=""></a><br /><p>अलपुझा। केरल में 2016 में सत्ता में आई मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नीत वामपंथी सरकार ने पुनर्वास योजना के तहत मछुआरों के लिए 12,000 मकान और 6,300 फ्लैट बनाकर उन्हें सौंपे हैं। मत्स्य पालन मंत्री साजी चेरियन ने कहा कि मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन जल्द ही नवनिर्मित 400 फ्लैटों की चाबियां मछुआरों सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि वामपंथी सरकार ने समुद्री कटाव से बचाने के लिए 344 करोड़ रुपए की लागत से चेल्लनम में समुद्री दीवार का निर्माण पूरा कर लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार जहां भी आवश्यक हो समुद्री दीवारें बनाकर राज्य के तटीय इलाकों की रक्षा के लिए लगातार काम कर रही है।</p>
<p>चेरियन ने कहा कि सरकार ने ऐसी योजनाएं लागू की हैं, जिनके तहत उन मछुआरों के बच्चों को एक लाख रुपए तक की सहायता दी जाती है, जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया है। इस वर्ष 26 छात्रों ने सरकार द्वारा प्रदान की गई मुफ्त प्रवेश कोचिंग के माध्यम से मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाया। सरकार ने हाल के वर्षों में मछुआरा समुदाय के 90 छात्र डॉक्टर बन गए हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में छात्र इंजीनियरिंग, कानून और शिक्षण जैसे पेशेवर पाठ्यक्रमों का भी अध्ययन कर रहे हैं। सिविल सेवाओं में रुचि रखने वालों को सिविल सेवा अकादमी के माध्यम से प्रशिक्षण और आवास दोनों प्रदान किए जाते हैं। केरल भारत का एकमात्र राज्य है जिसने ‘मछुआरा’ समुदाय के दो छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए सरकारी खर्च पर यूरोप भेजा है। उनकी शिक्षा पर 90 लाख रुपए खर्च किए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Jul 2025 14:21:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>सात साल में मात्र 40 हजार घरों तक पहुंची पीएनजी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान स्टेट गैस लिमिटेड कर रही शहर में पाइप से गैस पहुंचाने का काम। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/png-reached-only-40-thousand-houses-in-seven-years/article-95260"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer-(1)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एलपीजी गैस की बढ़ती कीमतों को देखते हुए अब महानगरों की तर्ज पर कोटा में भी पाइप लाइन के जरिए घरों में गैस पहुंचाने का काम तेजी से किया जा रहा है। राजस्थान स्टेट गैस लिमिटेड(आरएसजीएल) द्वारा डाली जा रही पाइपों से मार्च 2025 तक करीब एक लाख घरों में पाइप से गैस पहुंचाने की योजना है।  स्मार्ट सिटी में चयनित कोटा शहर में पाइप लाइन से हर घर में पीएनजी गैस पहुंचाने की योजना बनी थी। इस योजना को  शुरुआत में गैल के माध्यम से मूर्त रुप दिया जाना था। गैल ने कई साल पहले इसका काम शुरु किया था। लेकिन काम की गति इतनी धीमी थी कि उस समय कम्पनी गिनती के ही कनेक् शन दे पाई थी। अगस्त 2017 में यह काम राजस्थान स्टेट गैस लिमिटेड (आरएसजीएल)  ने  हाथ में लिया। उसके बाद भी शुरूआत में काम की गति धीमी होने से सीमित घरों तक ही गैस पहुंच सकी थी। पिछले कुछ समय से गैस लाइन बिछाने का काम तेजी से हुआ। जिससे यह संख्या पहले की  तुलना में कई गुना अधिक बढ़ गई है। </p>
<p><strong>वर्तमान में 40 हजार घरों तक गैस</strong><br />आरएसजीएल द्वारा किए जा रहे इस काम के तहत कुछ समय पहले तक जहां मात्र 20 हजार घरों तक ही गैस पहुंचाई गई थी। उसके बाद इस काम को गति दी गई। जिससे वर्तमान में शहर के कई क्षेत्रों में करीब 40 हजार से अधिक घरों तक यह गैस पहुंचाई जा चुकी है। </p>
<p><strong>इन क्षेत्रों में पहुंची पाइप से घरों तक गैस</strong><br />योजना को लागू हुए तो 7 साल से अधिक हो गया लेकिन अभी तक जितने घरों तक कनेक् शन  पहुंचने थे वह नहीं पहुंचे है। शहर के कई इलाके ऐसे हैं जहां पाइप से गैस घरों तक पहुंच चुकी है। उनमें झालावाड़ रोड रीको इंडस्ट्रीयल एरिया, बारां रोड महालक्ष्मी एनक् लेव समेत कई बहुमंजिला इमारतों में, तलवंडी सेक्टर बी, सी. 2 व 3, ए के कुछ भाग में, कुन्हाड़ी के पार्श्वनाथ एनक्लेव, आर.के. पुरम् ए और महावीर नगर प्रथम के अधिकतर क्षेत्रोंं में यह गैस पहुच चुकी है। प्रेम नगर अफोर्डेबल में भी पाइप से गैस घरों तक पहुंचाई जा रही है। </p>
<p><strong>इन क्षेत्रों के लोगों को है इंतजार</strong><br />पाइप लाइन के माध्यम से घरों में गैस पहुंचने का इंतजार शहर के हर व्यक्ति को है। जिनमें  इंद्र विहार जैसे पॉश इलाके, स्टेशन क्षेत्र, बजरंग नगर,  नयापुरा, उद्योग नगर  क्षेत्र और बारां रोड स्थित कई कॉलोनियां के लोगों को अभी भी  पाइप लाइन से गैस घरों तक पहुंचने का इंतजार है। </p>
<p><strong>सुरक्षा अधिक और सस्ती सुविधा </strong><br />पाइप लाइन से घरों तक गैस पहुंचना अधिक सुरक्षित है। साथ ही यह एलपीजी गैस सिलेंडर से करीब 40 से 50 फीसदी सस्ती भी है। कम्पनी के अधिकारियों के अनुसार पाइप लाइन से गैस घर तक पहुंचने में उसका प्रेशर काफी कम रहता है। इस गैस का भंडारण नहीं होने से उसके लीकेज होने या फटने का खतरा भी नहीं है। यदि गैस पाइप लाइन में कहीं से लीकेज भी होती है तो पाइप लाइन में लगा रेगुलेटर स्वत: ही बंद हो जाता है।  बड़ी लाइन स्टील की, उसके बाद प्लास्टिक के पाइप की और फिर घर तक जीआई पाईप की लाइन होने से यह अधिक सुरक्षित है। </p>
<p><strong>पथरीली इलाके होने से गति धीमी</strong><br />कम्पनी के अधिकारियों का कहना है कि कोटा में अधिकतर क्षेत्र पथरीला है। जहां पाइप लाइन डालने के लिए जमीन खोदने में परेशानी होती है। इस कारण से भी काम की गति धीमी है। हालांकि प्रयास किए जा रहे हैं कि काम की गति को बढ़ाया जाए। वर्तमान में शहर के अधिकतर क्षेत्रों में एक साथ काम चल रहे हैं।  जिससेआने वाले कुछ हीसमय में अधिक से अधिक घरोंतक यह गैस पहुंचाई जा सकेगी।</p>
<p><strong>घर पर लगे मीटर की रीडिंग से उपभोग का आंकलन</strong><br />पाइप लाइन से घरों तक गैस पहुंचने पर हर घर में एक मीटर लगाया गया है। जिसका कनेक् शन घर की रसोई में रखे गैस के चूल्हे से  किया गया है। जितनी गैस का उपयोग होगा उसकी रीडिंग मीटर में आ  जाती है।  कम्पनी का कर्मचारी हर दो महीने में रीडिंग लेने आता है। उस रीडिंग के हिसाब से बिल का उपभोक्ता भुगतान कर रहे हैं।</p>
<p><strong>चार माह में  एक लाख घरों में पहुंचाने का लक्ष्य</strong><br />राजस्थान स्टेट गैस लिमिटेड के  डीजीएम आनंद कुमार गर्ग का कहना है कि  शहर में शुरुआत में काम धीमी गति से हुआ था। लेकिन अब काम तेजी से किया जा रहा है। इंद्र विहार व स्टेशन के माला रोड समेत कई जगह पर लाइनें डाल दी गई हैं। वहां जल्दी ही कनेक् शन घरों से कर दिए जाएंगे। स्मार्ट सिटी योजना के तहत अधिक से अधिक घरों तक यह सुविधा देनी है। यह सुरक्षित व सस्ती भी है। आने वाले समय में इस काम में तेजी लाई जाएग़ी।  वर्तमान में करीब 40 हजार से अधिक घरों तक यह गैस पहुंचाई जा रही है।  मार्च 2025 तक करीब एक लाख घरों तक गैस सप्लाई पहुंचाने का लक्ष्य है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Nov 2024 16:31:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नवीकरणीय ऊर्जा निवेशक सम्मेलन और एक्सपो का प्रधानमंत्री ने किया उद्घाटन, कहा भारत में हम बना रहे 7 करोड़ घर</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रधानमंत्री ने कहा कि 140 करोड़ भारतीय देश को तेजी से टॉप तीन इकॉनोमी में पहुंचाने का संकल्प लेकर काम कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/we-are-building-7-crore-houses-in-india-modi/article-90712"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/2rtrer-(7)5.png" alt=""></a><br /><p>गांधीनगर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत में हम सात करोड़ घर बना रहे हैं। ये दुनिया के कई देशों की आबादी से भी ज्यादा है। मोदी ने सुबह गांधीनगर में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के लाभार्थियों से बातचीत करने के बाद गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में चौथे वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा निवेशक सम्मेलन और एक्सपो (री-इनवेस्ट) का उद्घाटन किया।</p>
<p>उन्होंने इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि आप सभी जानते हैं कि भारत की जनता ने 60 साल बाद लगातार किसी सरकार को तीसरा कार्यकाल दिया है। हमारी सरकार को मिले तीसरे कार्यकाल के पीछे भारत की बहुत आकांक्षाएं हैं। आज 140 करोड़ भारतवासियों, युवाओं और महिलाओं को भरोसा है कि उनकी आकांक्षाओं को पिछले 10 साल में जो पंख लगे हैं। वे इस तीसरे कार्यकाल में एक नयी उड़ान भरेंगे। देश के गरीब, दलित, पीड़ति, शोषित और वंचित को भरोसा है कि हमारा तीसरा टर्म उनके गरिमापूर्ण जीवन जीने की गारंटी बनेगा।</p>
<p> प्रधानमंत्री ने कहा कि 140 करोड़ भारतीय देश को तेजी से टॉप तीन इकॉनोमी में पहुंचाने का संकल्प लेकर काम कर रहे हैं। एक बड़ी दूरदर्शिंता, एक बड़े मिशन का हिस्सा है, ये 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की हमारे कार्रवाई योजना का हिस्सा है।   उन्होंने कहा कि हमारे पहले 100 दिनों में हमारी प्राथमिकता, ‘स्पीड और स्केल’ की भी एक झलक मिलती है। इस दौरान हमने हर उस ‘सेक्टर और फैक्टर’ पर ध्यान दिया है, जो भारत के तेज विकास के लिए जरूरी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Sep 2024 10:22:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भवन निर्माण की स्वीकृति बनी औपचारिकता, बैठक ही नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[विधानसभा चुनाव की आचार संहिता से पहले ही इस समिति की बैठक हुई थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/building-construction-approval-became-a-formality--no-meeting/article-90136"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/2rtrer-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में रोजाना नए नए मकान बन रहे हैं  व निर्माण कार्य हो रहे हैं। निर्माण कर्ता नगर निगम में स्वीकृति के लिए आवेदन भी कर रहे हैं लेकिन उन्हें स्वीकृति ही नहीं मिल रही है। जिससे वे बिना स्वीकृति के ही निर्माण कर रहे हैं। राज्य सरकार के बिल्डिंग बायलाज के अनुसार  कोई भी व्यक्ति यदि निर्माण कार्य करता है तो उसे नगर निगम या नगर विकास न्यास से निर्माण स्वीकृति लेनी पड़ती है। नगर निगम क्षेत्र में निगम से और न्यास क्षेत्र में न्यास से स्वीकृति लेना आवश्यक है। पहले जहां निर्माण स्वीकृति के लिए लोगों को आॅफलाइन आवेदन करना होता था। वहीं अब इस प्रक्रिया को आॅनलाइन कर दिया गया है। निर्माण कर्ता ई मित्र के माध्यम से आॅनलाइन आवेदन करना होता है। सभी औपचारिकताएं पूरी करने पर नियमानुसार 15 से 20 दिन में स्वीकृति जारी कर दी जाती है। लेकिन निगम में कई फाइलें एक साल से अधिक समय से अटकी हुई है। </p>
<p><strong>500 मीटर से अधिक से अधिक के भूखंड पर समिति देती है स्वीकृति</strong><br />राज्य सरकार के नियमानुसार 500 मीटर से अधिक के भूखंÞड पर यदि कोई निर्माण करता है तो उसके लिए निर्माण की स्वीकृति भवन निर्माण स्वीकृति समिति द्वारा दी जाती है। राज्य सरकार ने इसके लिए महापौर की अध्यक्षता में समिति का गठन किया हुआ है। कोटा दक्षिण में दो साल पहले समिति का गठन किया गया था।  जबकि 500 मीटर से कम के भूखंड पर डीटीपी के स्तर पर निर्माण स्वीकृति जारी की जाती है। यह स्वीकृति एम्पावर कमेटी  के माध्यम से दी जाती है। </p>
<p><strong>दो से तीन माह में बैठक का प्रावधान:</strong> नगर पालिका अधिनियम के तहत हर दो से तीन माह में निर्माण स्वीकृति समिति की बैठक होना आवश्यक है। लेकिन हालत यह है कि कोटा दक्षिण निगम में करीब एक साल से अधिक समय हो गया अभी तक निर्माण स्वीकृति समिति की बैठक ही नहीं हुई है। विधानसभा चुनाव की आचार संहिता से पहले ही इस समिति की बैठक हुई थी। उसके बाद से बैठक नहीं हुई। कभी लोकसभा चुनाव की आचार संहिता तो कभी अधिकािरयों के स्थानांतरण होने से बैठक नहीं हो सकी।  </p>
<p><strong>500 मीटर अधिक निर्माण की 7  फाइलें लम्बित</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में 500 मीटर से अधिक के भूखंड पर निर्माण स्वीकृति की 7 पत्रावलियां लम्बित हैं। जबकि इससे कम के भूखंड पर निर्माण की 22 पत्रावलियां लम्बित हैं।</p>
<p><strong>स्वीकृति नहीं मिलने पर भी निर्माण जारी</strong><br />महावीर नगर विस्तार योजना निवासी लक्ष्मण सिंह ने बताया  कि जब आवेदन कर्ता द्वारा निर्माण के लिए आॅनलाइन आवेदन कर दिया जाता है तो निगम व न्यास को समय पर स्वीकृति जारी करनी चाहिए। स्वीकृति के लिए राशि भी जमा होती है। लेकिन निगम व न्यास समय पर स्वीकृति जारी नहीं करते। ऐसे में लोगों द्वारा निर्माण करवाना गलत नहीं है। इसमें उनकी गलती नहीं है। बिना स्वीकृति निर्माण कर रहे हैं तो गलत है।  तलवंडी निवासी महावीर सुमन का कहना है कि जब निर्माण स्वीकृति की आॅनलाइन  प्रक्रिया शुरू की है तो समय पर स्वीकृति मिलनी चाहिए। स्वीकृति समय पर जारी नहीं करके निगम अधिकारी गलती कर रहे हैं फिर बाद में निर्माण कर्ता की गलती बताकर व निर्माण को अवैध बताकर उसे तोडने की कार्यवाही करते हैं। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।  जवाहर नगर निवासी महेश सिंघल का कहना है कि एक से डेढ़ साल हो गया बोर्ड की बैठक ही नहीं हो रही निर्माण समिति की बैठक एक साल से नहीं होना कोई बड़ी बात नहीं है।  </p>
<p> पहले विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव की आचार संहिता जल्दी-जल्दी लगने से निर्माण समिति की बैठक नहीं हो सकी। हालांकि निर्माण संबंधी अधिक पत्रावलियां लम्बित नहीं है। फिर भी जो पत्रावलियां हैं उनका निस्तारण करने के लिए शीघ्र ही समिति की बैठक की जाएगी। <br /><strong>  -राजीव अग्रवाल, महापीर व अध्यक्ष भवन निर्माण स्वीकृति समिति, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Sep 2024 17:22:43 +0530</pubDate>
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                <title>करोड़ों की जमीन पर अतिक्रमण कर बनाए मकान</title>
                                    <description><![CDATA[नांता थाने के नजदीक बंजारा बस्ती का मामला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/houses-built-by-encroaching-on-land-worth-crores/article-78678"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/photo-size-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण करने वालों के हौंसले लगातार बुलंद हो रहे हैं। अधिकारियों की लापरवाही व अनदेखी के साथ ही चुनाव की आचार संहिता का फायदा उठाकर अतिक्रमण करने वालों ने पक्के मकान तक बना लिए। यह मामला है नदी पार नांता क्षेत्र की बंजारा बस्ती का। नांता थाने से कुछ ही दूरी पर और राम नगर पत्थर मंडी के पास बंजारा बस्ती में नगर विकास न्यास की करोड़ों रुपए की बेशकीमती जमीन है। करीब 10 से 15 बीघा जमीन पर लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। यह अतिक्रमण अचानक नहीं हुआ। धीरे-धीरे लोग पत्थर लाकर वहां रखते रहे और मकान तक बना  लिए लेकिन न तो न्यास अधिकारियों को पता चला और न ही पुलिस अधिकारियों को। हालांकि नगर विकास न्यास की ओर से हाल ही में इस क्षेत्र से अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 11 बीघा जमीन को अतिक्रमण से मुक्त भी कराया है। लेकिन उसके बावजूद अभी भी उसके आस-पास के क्षेत्र में काफी अधिक जमीन है जिस पर लोगों ने अतिक्रमण कर पक्के मकान तक बना लिए हैं। उन मकानों में लोग रह भी रहे हैं लेकिन न्यास अधिकारी उन पर कोई कार्रवाई तक नहीं कर पा रहे हैं। जानकारों के अनुसार सरकारी जमीन खाली पड़ी हुई है। इस क्षेत्र में न्यास के अधिकारी आते भी नहीं है। ऐसे में अतिक्रमण करने वालों को मौका मिल गया। यहां तक कि कई लोगों ने तो गरीब लोगों से रुपए लेकर उस जमीन को सस्ते में बेच भी दिया।  छोटे-छोटे प्लॉट काटकर बेच दिए। मौके पर जो स्थिति है उसे देखकर ऐसा लग रहा है जैसे किसी कॉलोनाइजर ने कॉलोनी काट रखी हो। </p>
<p><strong>नोटिस दिए, कार्रवाई करेंगे</strong><br />नगर विकास न्यास के अतिक्रमण निरोधक दस्ते के प्रभारी व पुलिस उप अधीक्षक लोकेन्द्र पालीवाल ने बताया कि नांता की बंजारा बस्ती में करीब 12 से 15 बीघा जमीन पर अतिक्रमण हो रहा था। जिसमें से काफी जमीेन को तो अतिक्रमण से मुक्त करवा दिया है। लेकिन उसके आस-पास भी कई लोगों ने अतिक्रमण कर मकान बना लिए हैं। उन्हें मकान खाली करने के लिए नोटिस दिए गए हैं। उनके खिलाफ भी शीघ्र ही कार्रवाई की जाएगी। </p>
<p><strong>जहां से हटाए वहां भी आकर जमे अतिक्रमी</strong><br />इतना ही नहीं शहर में कई अन्य स्थानों पर भी सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण हो रहे हैं। न्यास अधिकारियों ने वहां पूर्व में कार्रवाई कर अतिक्रमियों को हटाया भी था। लेकिन फिर से वहां अतिक्रमण हो गया। यह स्थिति मेडिकल कॉलेज के सामने विनोबा भावे नगर, रंगबाड़ी और शहर के बीच की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 May 2024 17:05:47 +0530</pubDate>
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                <title>करबला क्षेत्र में सौ से अधिक मकानों में आई दरार</title>
                                    <description><![CDATA[स्थानीय लोगों ने बताया कि मकानों में दरार आने से कभी भी हादसा होने का खतरा बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cracks-in-more-than-a-hundred-houses-in-karbala-area/article-72171"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/karbala-khsetra-me-so-s-adhik-mkano-me-ayi-darar...kota-news-08-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर के वार्ड 36 करबला क्षेत्र में फोर्टवाल के ऊपर बने करीब सौ से अधिक मकानों में दरार आ रही है। जिससे वे मकान कभी भी ध्वस्त हो सकते हैं। ऐसे में उन मकानों में रहने वाले परिवारों में हादसे की आशंका से दहशत बनी हुई है। लोग रात को सो नहीं पा रहे हैं और कई लोग तो कर के कारण मकान खाली कर दूसरी जगह जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि  फोर्ट वाल के ऊपर की तरफ  करीब सौ से डेढ़ सो मकान  बने हुए हैं। वे कई बरसों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं। यहां पुरानी सीवरेज लाइन डली हुई थी। जिससे घरों से निकलने वाला सीवरेज का गंदा पानी सीधे नदी में जा रहा था। लेकिन नदी किनारे चम्बल रिवर फ्रंट बनने से सीवरेज के पानी को सीधे नदी में जाने से रोकने के लिए नगर विकास न्यास की ओर से वार्ड में सीवरेज की नई लाइन डाली गई। करीब एक से डेढ़ साल पहले यह लाइन डाली गई है। लेकिन सही ढंग से नहीं डालने से उनके मकानों को भारी नुकसान हो गया है। </p>
<p><strong>अधिकतर मकानों में दरार, कई में फटी दीवार</strong><br />क्षेत्र में जाकर जब मकानों की हालत देखी तो वह बद से बदतर नजर आई। हालत यह है कि अधिकतर मकान चाहे एक मंजिल हो या दो मंजिल। सभी में बड़ी-बड़ी दरारे हो गई हैं। छत से लेकर फर्श तक में दरारे होने से घर में रहना तक मुश्किल हो गया है। इतना ही नहीं कई मकान तो ऐसे हैं जिनमें दरार धीरे-धीरे बढ़कर इतनी बड़ी हो गई कि दीवारों को दो टुकड़ों में फाड़ दिया। दीवार आर-पार होकर दो हिस्सों में बट गई है। दीवार पर एलईडी टीवी लगा हुआ है कि पीछे की दीवार टूटी हुई है। कहीं छत झूलने लगी है। कहीं लोहे का भारी लेंटर लटक गया है। </p>
<p><strong>सीवरेज के साथ मकानों को सही कराया जाए</strong><br />स्थानीय निवासी इस्लाम अब्बासी, अकरम खान,जाकिर हुसैन, मुस्तफा अली व रहमान हुसैन समेत सभी लोगों का कहना है कि उन्होंने निगम व न्यास अधिकारियों को इस संबंध में अवगत करवा दिया है। लेकिन अभी तक किसी ने भी आकर मौका नहीं देखा है। उनकी मांग है कि सीवरेज लाइन को सही करवाने के साथ ही उनके मकानों को भी सही कराया जाए वरना कभी भी हादसा होने पर कई लोगों की जान जा सकती है। </p>
<p><strong>निकास नहीं होने से जाम हैं सीवरेज</strong><br />स्थानीय लोगों ने बताया कि लाइन में प्लास्टिक के पाइप डाले गए। उनका सही ढंग से निकास भी नहीं किया गया। जिससे सीवरेज चैम्बर भरे हुए हैं। ढक्कन से गंदा पानी ऊपर घरों के बाहर तो आता ही है। साथ ही सीवरेज के कारण उनके मकान बैठक लेने लगे हैं। अधिकतर मकान अपनी जगह छोड़ते जा रहे हैं। कई मकान तो टेढ़े होकर झुक गए हैं। </p>
<p><strong>दहशत के कारण अधिकतर लोग घरों के बाहर</strong><br />स्थानीय लोगों ने बताया कि मकानों में दरार आने से कभी भी हादसा होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में रात के समय सही ढंग से सौ भी नहीं पा रहे हैं। लोगों ने बताया कि दिन के समय अधिकतर पुरुष तो काम पर चले जाते हैं। घरों पर महिलाएं व बच्चे रहते हैं। वे भी दहशत के कारण अधिकतर समय घरों से बाहर ही रहते हैं। जबकि कई लोग तो मकान खाली कर अपने रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं। </p>
<p><strong>अंदर ही नहीं बाहर से छज्जा भी क्षतिग्रस्त</strong><br />मकानों के अंदर ही नहीं बाहर से मकानों के छज्जे तक क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। जिससे उनके कभी भी गिरने व हादसा होने का खतरा बना हुआ है। इस्लाम अब्बासी का मकान हो या मोहम्मद जाकिर का। अब्दुल मजीद का मकान हो या अब्दुल हनीफ का। मुस्तफा का मकान हो या रहमान अली का सभी के मकानों में दरार हो रही है। ये तो उदाहरण मात्र हैं। क्षेत्र के अधिकतर लोगों के मकानो की हालत इसी तरह की है। </p>
<p>करबला क्षेत्र में सीवरेज लाइन के कारण मकानों में दरार आने की जानकारी गुरुवार को ही क्षेत्र के लोगों ने दी है। इससे पहले किसी ने भी इस बारे में नहीं बताया। स्थानीय पार्षद को जानकारी दी होगी लेकिन उन्होंने भी नहीं बताया था। अभी दो दिन पहले ही उनका निधन हो गया। जानका री मिलते ही नगर विकास न्यास अधिकारियों से बात की है। उन्होंने मौका देखकर उसे सही करवाने का आश्वासन दिया है। मैं स्वयं भी शुक्रवार को मौका देखूंगी। <br /><strong>- मंजू मेहरा, महापौर, नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>
<p>सीवरेज लाइन नगर विकास न्यास ने डाली है या किसी अन्य एजेंसी ने। इस संबंध में शुक्रवार को भी संबंधित अधिकारियों को भेजकर मौका दिखवा लेंगे। न्यास के स्तर पर कमी रही है तो उसी सही करवा दिया जाएगा। <br /><strong>- कुशल कोठारी, सचिव, नगर विकास न्यास </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Mar 2024 17:42:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बस्तियों से गुजर रही हाइटेंशन लाइन से खतरा, हादसे की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[कई  जगह पर  मकानों की ऊपर से हाइटेंशन लाइन गुजर रही है। जिन क्षेत्रो में मकान की छतों पर से हाइटेंशन लाइन गुजर रही है, वहां पर रहने वाले वाशिंदों ने अपनी छतों की ऊपर से निकल रही हाइटेंशन लाइन को हटवाने के लिए अपने पूरे प्रयास किए, लेकिन प्रयास पूर्ण रूप से विफल रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/danger-from-high-tension-line-passing-through-settlements--fear-of-accident/article-33406"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/bastiyo-se-gujar-rahi-hitension-line-se-khatra,-haaadse-ki-ashanka...chomehla-news-jhalawar..26.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>चौमहला। झालावाड़ जिले के गंगधार उपखंड क्षेत्र के चौमहला कस्बे में आवासीय बस्तियों में मकान की छतों के ऊपर से  11 हजार  केवी की हाईटेंशन  लाइन गुजरने से  आवासीय बस्तियों में रहने वाले परिवार मौत के साए  में जीवन बिताने को मजबूर है। हाइटेंशन लाइन मकान की छतों के बीच में से व कई जगह मकान की गेलरी के पास छूती हुई निकल रही है।  मकानों के छत के ऊपर से गुजर रही इन लाइनों के कारण मेघवाल बस्ती में  एक मिस्त्री व एक बालिका की मौत हाइटेंशन लाइन के छूने से हो गई थी। चौमहला  कस्बे के मेघवाल बस्ती, दुर्गा माता मंदिर रोड,कोलवी सहित कई  जगह पर  मकानों की ऊपर से हाइटेंशन लाइन गुजर रही है। जिन क्षेत्रो में मकान की छतों पर से हाइटेंशन लाइन गुजर रही है, वहां पर रहने वाले वाशिंदों ने अपनी छतों की ऊपर से निकल रही हाइटेंशन लाइन को हटवाने के लिए अपने पूरे प्रयास किए, लेकिन प्रयास पूर्ण रूप से विफल रहे। </p>
<p>कोलवी दुर्गा माता मंदिर रोड पर स्थित मकान के पास ट्रांसफर लगा है। इस ट्रांसफर से हाइटेंशन की लाइन मकान की छत के ऊपर  गुजरने के कारण घटना घटित होने का अंदेशा बना रहता है बच्चों को छत पर नहीं जाने देते हैं।<br /><strong>-  रमेश दुबे, उपभोक्ता</strong></p>
<p>मकान के ऊपर से गुजरे हाइटेंशन लाइन निकलने से हमेशा करंट लगने का डर रहता है। छत पर ही रसोई घर है ऐसे में बार बार छत पर आना जाना पड़ता है। छत पर  जाने में भी डर लगता है। कई बार आंधी तूफान या अंधड आने की स्थिति में लाइन के तार भी टूट जाते है। इन दिनों तार और अधिक नीचे झूलने लगे है।<br /><strong>- गणेश मेघवाल, उपभोक्ता       </strong><br />                            <br />चौमहला कस्बे में जिन जिन मकानों के ऊपर से हाइटेंशन लाइन के तार निकल रहे हैं उन स्थानों को चिन्हित करवाकर उनके शिफ्टिंग का एस्टिमेट  बना रखा है  उपभोक्ता विभाग में आकर संपर्क कर सकते है।<br /><strong>- रामकिशोर बारहट, कनिष्क अभियंता, जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेट चौमहला</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Dec 2022 15:04:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हर वर्ष 40 हजार मकानों की खरीद बिक्री  </title>
                                    <description><![CDATA[ कोरोना काल के बाद एक बार फिर से यह उद्योग पनपने लगा है। हर व्यक्ति व परिवार को मकान की जरूरत है। सरकार भी हर परिवार को छत मुहैया करवा रही है। ऐसे में जैसे ही कोरोना संक्रमण का खतरा कम हुआ वैसे ही लोग फिर से अपने मकान के सपने को साकार करने में जुट गए। रियल एस्टेट कारोबारी व बिल्डर्स को भी काम मिल गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sale-and-purchase-of-40-thousand-houses-every-year/article-30719"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/har-varsh-40-hazar-makano-ki-khareed-bikri...kota-news-..25.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । कोरोना काल  में दो साल तक रियल एस्टेट एक तरह से ठप सा हो गया था। लेकिन दो साल बाद एक बार फिर से इसमें बूम आया है।  जरूरतमंद लोगों द्वारा मकान बनाने और मकान की रजिस्ट्री  करवाई जा रही है। जिससे इसमें भी काफी वृद्धि हुई है। कोटा में रीयल एस्टेट का कारोबार काफी बेहतर रहा है। यहां एक के बाद एक लगातार बहुमंजिला इमारतों का निर्माण हो रहा है। जिनमें आवासीय से लेकर व्यवसायिक तक शामिल हैं। नगर विकास न्यास द्वारा तो आवासीय कॉलोनियां विकसित की ही जा रही हैं। उसके अलावा भी बिल्डर्स  व रियल एस्टेट के बड़े कारोबारी भी नई-नई प्लानिंग बना रहे हैं।  जिससे कोटा में मकानों व जमीनों की कीमतों में भी काफी उछाल आया है। कोटा में तेजी से बढ़ रहे रियल एस्टेट पर कोरोना काल में दो साल तक रोक सी लग गई थी। हालांकि इस दौरान हर व्यवसाय प्रभावित हुआ था। लेकिन कोरोना काल के बाद एक बार फिर से यह उद्योग पनपने लगा है। हर व्यक्ति व परिवार को मकान की जरूरत है। सरकार भी हर परिवार को छत मुहैया करवा रही है। ऐसे में जैसे ही कोरोना संक्रमण का खतरा कम हुआ वैसे ही लोग फिर से अपने मकान के सपने को साकार करने में जुट गए। रियल एस्टेट कारोबारी व बिल्डर्स को भी काम मिल गया है। दीपावली के पहले से ही इस कारोबार में वृद्धि होना शुरू हो गई थी जो उसके  एक महीने बाद तक जारी है। </p>
<p><strong>कोटा में हर साल बिक रहे करीब 40 हजार से अधिक मकान </strong><br />कोटा के दोनों रजिस्ट्रार कार्यालयों का वित्तीय वर्ष 2022-23 का लक्ष्य 226 करोड़ 44 लाख रुपए है। जिसमें से वित्तीय वर्ष के 7 माह में ही कार्यालय ने 191 करोड़ 15 लाख का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। करीब दो सौ करोड़ रुपए की आय अभी तक रजिस्ट्रार कार्यालय मकानों की रजिस्ट्री से कर चुका है। जानकारों के अनुसार वैसे तो रजिस्ट्री डीएलसी दर व प्रोपर्टी की कीमत के हिसाब से होती है। लेकिन यदि एक मकान की औसत रजिस्ट्री करीब 50 हजार रुपए भी आंकी जाए तो दो सौ करोड़  के हिसाब से कोटा में हर साल करीब 40 हजार से अधिक मकानों की खरीद फरोख्त हो  चुकी है।  महीने का आंकलन किया जाए तो हर महीने करीब 3 से 4 हजार मकान बिक रहे हैं। जबकि अभी तो वित्त वर्ष के 5 महीने शेष हैं। </p>
<p><strong>रजिस्ट्रार कार्यालय में लक्ष्य से अधिक आय</strong><br />मकान बनाने वाले हर व्यक्ति को उसकी रजिस्ट्री करवाना आवश्यक होता है। रजिस्ट्री प्रोपर्टी की कीमत के हिसाब से होती है। कोटा में दो उप रजिस्ट्रार कार्यालय हैं। जिनमें पिछले तीन साल के रिकॉर्ड का आंकलन करने पर पता चला कि  रजिस्ट्री का जो विभाग का लक्ष्य था उससे काफी अधिक आय हो चुकी है। रजिस्ट्रार कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 में जहां उप रजिस्ट्रार प्रथम का लक्ष्य 91 करोड़ 6 लाख रुपए था वहीं आय 59 करोड़ 85 लाख रुपए हुई थी। यानि लक्ष्य का करीब 65 फीसदी आय हुई थी। वहीं उप रजिस्ट्रार कार्यालय द्वितीय का इसी अवधि का लक्ष्य 120 करोड़ 7 लाख रुपए था जबकि आय 70 करोड़ 9 लाख रुपए यानि करीब 58.38 फीसदी ही लक्ष्य प्राप्त हुआ था। जबकि वित्त वर्ष 2021-22 में उप रजिस्ट्रार कार्यालय प्रथम का लक्ष्य 88 करोड़ 11 लाख रुपए था जिसकी एवज में आय हुई 92 करोड़ 56 लाख यानि 105.5 फीसदी। वहीं उप रजिस्ट्रार कार्यालय द्वितीय में इसी अवधि का लक्ष्य था 96 करोड़ 47 लाख और आय हुई थी 102 करोड़ 97 लाख यानि 106.73 फीसदी। </p>
<p><strong>यहां 7 माह में ही लक्ष्य से काफी अधिक</strong><br />रियल एस्टेट कारोबार में बूम का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले वर्षों की तुलना में वर्तमान वित्त वर्ष 2022-23 में उप रजिस्ट्रार कार्यालय प्रथम का लक्ष्य 108 करोड़ 10 लाख रुपए है। जबकि अप्रेल से अक्टूबर तक के 7 माह में इस कार्यालय में लक्ष्य से काफी अधिक 113 करोड़ 45 लाख रुपए की रजिस्ट्री कर 104.95 फीसदी आय प्राप्त कर ली है। हालांकि उप रजिस्ट्रार कार्यालय द्वितीय का इसी अवधि का लक्ष्य 118 करोड़ 54 लाख रुपए है। उसकी एवज में अभी तक 77 करोड़ 70 लाख रुपए यानि 65.66 फीसदी लक्ष्य प्राप्त किया जा चुका है। अभी तो वित्त वर्ष को पूरा होने में 5 माह का समय शेष है। </p>
<p><strong>बिल्डर्स समूहों में भी उत्साह</strong><br />कोरोना काल के दो साल बाद रियल एस्टेट में आए बूम से बिल्डर्स समूहों में भी उत्साह है। उनमें भी कारोबार बढ़ने से एक बार फिर से काम करने की उम्मीद जगी है। जबकि कोरोना काल के दो साल तक अधिकतर लोग द्वारा प्रोपर्टी खरीेदना बेचना बंद कर दिया था। नए मकान बनना बंद से हो गए थे। जिससे बिल्डर्स में भी निराशा सी छा गई थी।</p>
<p>कोरोना काल के बाद रियल एस्टेट में वृद्धि हुई है। हर व्यक्ति अपने घर के सपने को साकार करना चाहता है। इस कारण से लोग मकान खरीदना व बनाना चाह रहे हैं। लोगों के साथ ही बिल्डर्स में भी फिर से काम करने की उम्मीद जगी है। <br /><strong>-आई.एल. सैनी, निदेशक, सुमंगलम् ग्रुप </strong></p>
<p>कोरोना काल के बाद लोगों में एक बार फिर से प्रोपर्टी खरीदने के प्रति रूझान बढ़ा है। हालांकि अधिकतर जरूरतमंद लोग ही प्रोपर्टी खरीद व बेच रहे हैं। दीपावली के समय में लोगों ने प्रोपर्टी व्यवसाय में इनवेस्ट किया है। जिससे इसमें पिछले सालों की तुलना में उछाल आया है। <br /><strong>-सुशील जैन, निदेशक, ओरियंट बिल्डर्स </strong></p>
<p>कोरोना काल के दो साल बाद एक बार फिर से  रीयल एस्टेट कारोबार में वृद्धि हुई है। पहले जहां लोग इनवेस्ट के हिसाब से प्रोपर्टी खरीद कर रख रहे थे। वहीं अब लोग जरूरत के हिसाब से ही प्रोपर्टी में इनवेस्ट कर रहे हैं। प्रोपर्टी खरीदने के बाद उसकी रजिस्ट्री भी करवा रहे हैं। जिससे पिछले सालों की तुलना में इस साल में इस कारोबार में उत्साह है। <br /><strong>-अभिषेक गुप्ता, निदेशक, आकांक्षा दीप हाइट्स </strong></p>
<p>कोरोना काल में सब कुछ ठप सा हो गया था। दो साल तक तो लोगों ने न तो कोई प्रोपर्टी खरीदी और न ही बेची। जिससे रजिस्ट्री भी बहुत कम हुई थी। कोरोना काल के वित्त वर्ष 2020-21 में रजिस्ट्रार कार्यालय का लक्ष्य  पूरा नहीं हो पाया  था। जबकि उसके बाद दो साल से वित्त वर्ष 2021-22 व 2022-23 में आय से काफी अधिक लक्ष्य प्राप्त हो चुका है। जबकि अभी 5 माह का समय शेष है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रीयल एस्टेट बढ़ा है और लोग  प्रोपर्टी खरीद रहे हैं तभी तो उसकी रजिस्ट्री करवाने आ रहे हैं। <br /><strong>-बाल कृष्ण तिवारी, उप महानिरीक्षक, पंजीयन एवं मुद्रांक </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Nov 2022 15:30:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो क्षतिग्रस्त आवासों को कराया ध्वस्त</title>
                                    <description><![CDATA[कस्बे के गाजीपुर रोड स्थित पंचायत समिति आवासों में दो आवास पूर्णतया क्षतिग्रस्त हो गए थे। जिन्हें विकास अधिकारी अनीता मीणा ने गुरुवार को जेसीबी की सहायता से ध्वस्त करवा दिया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dholpur/demolition-of-two-damaged-houses/article-13361"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/m-2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>टोडाभीम।</strong> कस्बे के गाजीपुर रोड स्थित पंचायत समिति आवासों में दो आवास पूर्णतया क्षतिग्रस्त हो गए थे। जिन्हें विकास अधिकारी अनीता मीणा ने गुरुवार को जेसीबी की सहायता से ध्वस्त करवा दिया गया। ध्वस्त करवाए गए आवासों के बारे में विकास अधिकारी अनीता मीणा ने बताया कि उक्त दोनों आवासों को पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता द्वारा नाकारा घोषित कर दिया गया। पंचायत समिति की साधारण सभा की बैठक में दोनों क्षतिग्रस्त आवासों को ध्वस्त करने का प्रस्ताव लिया गया। बैठक में लिए गए प्रस्ताव के बाद गुरुवार को दोनों जर्जर आवासों को जेसीबी द्वारा ध्वस्त करवा दिया गया और मलबे को पंचायत समिति आवास परिसर में बने हुए गड्ढों में डलवाकर समतलीकरण करवाया जाएगा।</p>
<p>विकास अधिकारी द्वारा ध्वस्त करवाए गए आवासों को लेकर पंचायत समिति प्रधान कल्पना मीणा ने बताया कि विकास अधिकारी ने अपनी मनमर्जी से दोनों आवासों को जेसीबी से ध्वस्त करवा दिया है। उक्त कार्य के लिए विकास अधिकारी द्वारा उनसे कोई स्वीकृति नहीं ली गई है और ना ही बैठक में कोई प्रस्ताव लिया गया है तथा सार्वजनिक निर्माण विभाग से भी कोई अनुमति नहीं ली गई है। किसी भी सरकारी संपत्ति को ध्वस्त करने से पूर्व सार्वजनिक निर्माण विभाग से परमिशन लेनी पड़ती है तथा साधारण सभा में इसका प्रस्ताव लिया जाता है जिस पर पंचायत समिति प्रधान की स्वीकृति होना आवश्यक है। विकास अधिकारी द्वारा उक्त कार्य के लिए किसी भी प्रकार की स्वीकृति नहीं ली गई है।<br /> <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धौलपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Jul 2022 12:47:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नालों में मकान बने, पानी बहाव में हुआ अवरोध</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के विकास व विस्तार के साथ ही जहां दूरदराज तक बस्तियां व कॉलोनियां बन गई हैं। वहीं दूसरी तरफ कई लोग नालों तक में मकान बनाकर रहने लगे हैं। जिससे वहां पानी के बहाव में अवरोध होने लगा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/houses-built-in-drains--obstruction-in-water-flow/article-13106"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/naaloo-mei-makan-bane-pani-bahav-mei-avrodh.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के विकास व विस्तार के साथ ही जहां दूरदराज तक बस्तियां व कॉलोनियां बन गई हैं। वहीं दूसरी तरफ कई लोग नालों तक में मकान बनाकर रहने लगे हैं। जिससे वहां पानी के बहाव में अवरोध होने लगा है। मानसून सत्र शुरु होने वाला है। ऐसे में चार महीने तक होने वाली बरसात में उन नालों में पानी भरने से वहां रहने वालों को समस्या का सामना करना पड़ेगा। शहर में रहने के लिए लोगों ने एक ओर जहां कृषि भूमियों तक पर भूखंड काटकर मकान बना लिए है। वहीं दूसरी तरफ लोगों को जहां जगह मिल रही है। वहीं मकान बनाकर रहने लग रहे हैं। शहर में कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां हर साल बरसात में पानी भरता है। उसके बावजूद भी लोग वहां सस्ते के लालच में जगह लेकर मकान बनाकर रहने लगे हैं। <br /><br /><strong>बढ़ती जा रही नाले में मकानों की संख्या</strong><br />झालावाड़ रोड पर अनंतपुरा तालाब हो या पुराने थाने के पीछे का नाला। गोबरिया बावड़ी क्षेत्र का नाला हो या नदी पार नांता क्षेत्र का। हर जगह पर नालों में जहां बस्तियों के और बरसात में बरसाती पानी के निकास की जगह बनी हुई थी। वहां लोग मकान बनाकर रहने लगे हैं। ये मकान भी एक दो साल में नहीं वरन् पिछले कई सालों से बन रहे हैं। एक दूसरे को देखकर उनकी संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। डूब क्षेत्र में होने से वहां हर साल आस-पास के क्षेत्रों का पानी बहकर आता है। जिससे वहां रहने वालों के मकान भी बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। उसके बाद भी लोग वहां से जाने को तैयार नहीं हैं। पिछले कई सालों से बरसात के समय में अनंतपुरा हो या देवली अरब रोड की कॉलोनियां वहां पानी भरने पर नावें चलाई जा रही हैं। जिससे रेस्क्यू कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुचाने की मशक्कत करनी पड़ रही है। बरसात खत्म होते ही फिर से लोग वहां जा बसे। इस बार कुछ ही दिन में फिर से बरसात आने वाली है। तेज बरसात होने से इस साल एक बार फिर से पुरानी स्थिति होने की संभावना है। <br /><br /><strong>हर साल नए मकान बन रहे</strong><br />नगर निगम के गोताखोर विष्णु श्रृंगी ने बताया कि शहर के कई इलाके ऐसे हैं जहां हर साल बरसात में पानी भरता ही है। कुछ इलाकों में तो वर्ष 2006 से ही हर साल नाव चलाकर लोगों को रेस्क्यू किया जाता है। जब भी टीम रेस्क्यू के लिए जाती है। उस समय वहां उन्हें नए मकान बनते हुए ही नजर आते हैं। लोगों को उन जगह पर मकान नहीं बनाने के लिए समझाइश भी की जाती है। लेकिन उन लोगों का कहना है कि बरसात के समय कुछ दिन परेशानी आती है। उसके बाद पूरे साल उन्हें कोई परेशानी नहीं है। सस्ती जगह मिलने से गरीबों के लिए वही उचित जगह है। <br /><br /><strong>निगम ने किए नाले साफ, पानी नहीं भरेगा</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण द्वारा बरसात से पहले सभी छोटे-बड़े बरसाती नालों की सफाई का अभियान चलाया। करीब दो माह से जेसीबी व चैन माउंटेंड मशीनों से नालों की सफाई करवाई जा रहा है। महापौर राजीव अग्रवाल का कहना है कि अधिकतर नालों की गहराई तक सफाई करवाई गई है। जिससे शहर में तो पानी भरने की समस्या नहीं होगी। फिर भी यदि कहीं परेशानी आई तो टीमें तैयार रहेंगी। लेकिन यदि कोई नालों में ही बस गया है तो वहां डूब क्षेत्र होने से पानी भरेगा है। उसका कोई समाधान नहीं है। लोगों को ही समझकर अपनी जान-माल की सुरक्षा करनी होगी। बरसात से पहले सुरक्षित स्थानों पर चले जाना चाहिए। <br /><br /><strong>बाढ़ नियंत्रण कंट्रोल रूम स्थापित</strong><br />बरसात के समय में हर साल होने वाली समस्या को देखते हुए इस बार भी जिला प्रशासन ने 15 जून से ही बाढ़ नियंत्रण कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया है। गोताखोर से लेकर रेस्क्यू टीम तक तैतार कर दी है। लेकिन इसकी जरूरत पानी अधिक भरने पर लोगों को राहत पहुंचाने के समय पड़ेगी। जबकि उससे पहले ही इस तरह की नौबत नही आए उसके लिए प्रशासन द्वारा कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। डूब क्षेत्र में या नालों में मकान बनाकर अवरोध करने वालों को समझाइश कर पहले से ही वहां से पुनर्वास करने जैसे कोई कदम अभी तक नहीं उठाए हैं। जिससे बरसात के समय में एक बार फिर से लोगों को मकानों में  पानी भरने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />गत दिनों जिला कलक्टर कीे अध्यक्षतरा में सभी विभागों की बैठक हुई थी। जिसमें बरसात से पहले नालों में अवरोध पैदा करने वालों को वहां से हटाने के न्यास अधिकारियों को निर्देश दिए थे। साथ ही डूब क्षेत्र के लोगों को वहां से हटाने को भी कहा था। बरसात में होने वाली समस्या से बचने के लिए लोगों को स्वयं ही उन जगहों से हटकर सुरक्षित स्थानों पर चले जाना चाहिए। <br /><strong>राजपाल सिंह, आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jun 2022 16:07:45 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान आवासन मंडल का मामला :  इधर तो मुट्ठी भर चणा, उधर घी घणा</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा शहर में राजस्थान आवासन मंडल पहले लोगों को सस्ते मकान बनाकर उपलब्ध करवा  रहा था। लेकिन वर्तमान में कोटा में कई लोग ऐसे हैं जो आवासन मंडल के मकान लेना चाहते हैं। लेकिन मंडल के पास जमीन का  टोटा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-the-case-of-rajasthan-housing-board--here--a-handful-of-gram--on-the-other-hand-ghee/article-11089"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/rajasthan-awasan-mandal-kota.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । रोटी, कपड़ा और मकान हर व्यक्ति की जरूरत है। कोटा शहर में राजस्थान आवासन मंडल पहले लोगों को सस्ते मकान बनाकर उपलब्ध करवा  रहा था। लेकिन वर्तमान में कोटा में कई लोग ऐसे हैं जो आवासन मंडल के मकान लेना चाहते हैं। लेकिन मंडल के पास जमीन का  टोटा है। वहीं संभाग के अन्य जिलों में मंडल के पास मकानों की भरमार है लेकिन वहां खरीदार नहीं मिल रहे हैं। राजस्थान आवासन मंडल कोटा वृत्त के अधीन कोटा के अलावा संभाग के बारां व झालावाड़ जिले भी शामिल हैं। मंडल की हालत यह है कि कोटा में उसके पास जमीन ही नहीं है। जिससे वे न तो नई कॉलोनी विकसित कर पा रहे हैं और न ही लोगों को मकान बनाकर दे पा रहे हैं। जबकि कोटा में पिछले कई सालों से करीब 200 लोगों ने मकानों के लिए आवेदन किया हुआ है। जिनमें पूर्व मंत्री व पूर्व विधायक भी शामिल हैं।  लेकिन उन्हें अभी तक भी मकान नहीं मिल रहे हैं। उनके आवेदन अभी तक भी लम्बित हैं। जबकि संभाग के बारां व झालावाड़ जिलों में मंडल के पास मकानों की भरमार है। लेकिन वहां खरीदार नहीं मिल रहे हैं। गत दिनों जयपुर में आवासन मंडल के मकानों की एक ही दिन में रिकॉर्ड नीलामी हुई थी। लेकिन कोटा में पिछले कई सालों से रिकॉर्ड नीलमाी ही नहीं हुई है। <br /><br /><strong>संभाग में 1228 मकान बिक्री के लिए</strong><br />राजस्थान आवासन मंडल कोटा वृत्त में करीब 1228 मकान ऐसे हैं जिन्हें मंडल नीलामी के माध्यम से बेचना चाहता है। लेकिन उनके लिए खरीदार नहीं मिल रहे हैं। हांलाकि जितने भी मकान हैं उनमें से कोटा में मात्र 10 ही फ्लैट हैं शेष मकान बारां व झालावाड़ जिलों में हैं। <br /><br /><strong>यह है मंडल के मकानों की स्थिति</strong><br />राजस्थान आवासन मंडल कोटा वृत्त के अधीन कोटा में कुन्हाड़ी स्थित हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनी में  मात्र 10 ही फ्लैट बिक्री के लिए हैं। जबकि  सबसे अधिक 341 मकान बारां जिले के छबड़ा में है। बारां में 145,छीपाबड़ौद में 195 व मांगरोल में 239 मकान हैं। इसी तरह से झालावाड़ जिले के सुनेल में 4, अकलेरा में 29,चौमेला में 206,झालावाड़ में 10,झालरापाटन में 1, बूंदी जिले के नैनवा में 24 व कोटा जिले के रामगंजमंडी में 24 मकान हैं। <br /><br /><strong>25 से 50 फीसदी की छूट</strong><br />हाउसिंग बोर्ड के मकानों को बेचने के लिए बोर्ड ने उन पर करीब 25 से 50 फीसदी की छूट तक दे रखी है। सुनेल, नैनवा, रामगंजमंडी,कोटा व मांगरोल में 25 फीसदी की और झालावाड़, झालरापाटन को छोड़कर बाकी जगहों पर मंडल के मकानों केी बिक्री पर 50 फीसदी तक की छूट दी गई है। <br /><br /><strong>हर बुधवार को नीलामी</strong><br />आवासन मंडल द्वारा हर बुधवार को मकानों की आॅनलाइन नीलामी की जा रही है। लेकिन उसके बाद भी गिनती के ही मकान बिक रहे हैं। सूत्रों के अनुसार अधिकतर मकानों की या तो लोकेशन सही नहीं है और कई मकान देखरेख के अभाव में जर्जर हो रहे हैं। इस कारण से अधिकतर लोग उन मकानों को खरीदने में रूचि नहीं दिखा रहे हैं। कोटा में जमीनों की कीमत अधिक होने व लोकेशन भी सही होने से अधिकतर लोगों को पहली पसंद कोटा में मकान खरीदने की रहती है। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />आवासन मंडल के पास कोटा में मकान बनाने के लिए जमीन ही नहीं है। मकानों के लिए पूर्व में कई आवेदन प्राप्त हुए थे वे अभी भी लम्बित हैं। जमीन मिले तो मकान बनाकर दें। जबकि संभाग के बारां व झालावाड़ जिलों में मकान तो खूब हैं। उन पर 25 से 50 फीसदी की छूट भी दे रखी है। हर बुधवार को मकानों की नीलामी भी आॅनलाइन की जा रही है। लेकिन उसमें भी गिनती के ही मकान बिक रहे हैं। कोटा वृत्त में 12 सौ से अधिक मकान बिक्री के लिए हैं। <br /><strong>- अनिल सक्सेना, उप आवासन आयुक्त, राजस्थान आवासन मंडल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jun 2022 15:44:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title> आग से चार मकान व बाइक जलकर खाक</title>
                                    <description><![CDATA[उदयपुर। शहर के बड़गांव स्थित आरा मशीन के पास चार मकानों में मंगलवार को अचानक आग लग गई। दमकल विभाग ने इसका कारण शॉर्ट-सर्किट से होना बताया, साथ ही यह भी कहा कि घटना के दौरान गैस की टंकी फटने जैसा कुछ नहीं हुआ था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/udaipur-news-fire-destroyed-four-houses-and-bikes/article-10909"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/aag.jpg" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। शहर के बड़गांव स्थित आरा मशीन के पास चार मकानों में मंगलवार को अचानक आग लग गई। दमकल विभाग ने इसका कारण शॉर्ट-सर्किट से होना बताया, साथ ही यह भी कहा कि घटना के दौरान गैस की टंकी फटने जैसा कुछ नहीं हुआ था। नाल मगरा बस्ती, कैलाश नगर में आग धीरे-धीरे फैलने लगी और आसपास के मकानों को अपने आगोश में ले लिया। इससे चार मकान जलकर राख हो गए। क्षेत्रवासियों ने हादसे की सूचना अग्निशमन विभाग को दी, जिससे दो दमकल मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस घटना में चार मकानों के साथ एक बाइक भी जलकर राख हो गई। गनीमत रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई।</p>
<p><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>राहुल ने दिखाई दिलेरी, टंकी निकाली बाहर</strong></span><br />बताया गया कि घटना के दौरान जलते मकान में गैस से भरी एक टंकी रह गई थी। इसके फटने की पूरी आशंका थी, लेकिन अग्निशमन विभाग के अनुबंधित फायरमैन राहुल कुमावत अपनी जान की परवाह किए बिना मकान में उतरे और वहां रखी गैस की टंकी को निकाल लिया। इससे बड़ा हादसा हाने से टल गया। अग्निशमन विभाग से मौके पर पहुंचे चालक मांगीलाल सालवी, फायरमैन सिद्धार्थ के साथ होमगार्ड के संजय और इंद्रजीत ने आग पर काबू पाया।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong> मुआवजे की मांग</strong></span><br />आग की वजह से सभी मकानों में खाद्य सामग्री, आधार कार्ड, बैंक पास बुक, कपड़े जल गए। रमेश दास पुत्र किशन, नरेंद्र मीणा, कैलाश पुत्र मनालाल, सरसो बाई पत्नी डालू के मकान जल गए। साथ ही एक व्यक्ति की मोटर साइकिल भी पूरी तरह जल गई। विप्र सेना के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने प्रशासन से हताहत परिवारों को मुआवजा देने की मांग की। इसके लिए बुधवार को कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन दिया जाएगा। विप्र सेना के अधिकारी राजेश भट्ट, अरविंद शर्मा, रोशन शर्मा, जगदीश मेनारिया,  शिवदास, कानदास आदि उपस्थित रहे।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jun 2022 12:24:26 +0530</pubDate>
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