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                <title>Crude Oil Prices - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Crude Oil Prices RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग, 88 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसली, जानें क्या है कारण ?</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त अस्थिरता है। सोमवार को $119 तक पहुँचने के बाद, ब्रेंट क्रूड अब गिरकर $87.57 पर आ गया है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संकट ने आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/crude-oil-prices-fell-below-88-per-barrel-know-the/article-146132"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/crude-oil.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ईरान इजरायल युद्व का असर अब कच्चे तेल पर साफ दिखाई दे रहा है। तेल की कीमतों में लगातार उतार चढ़ाव दिखाई दे रहा है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई थी, जिसके बाद लगातार दो दिनों से तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 87.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई। बुधवार को डब्ल्यूटीआई 83.08 डॉलर पर आ गया। इससे पहले मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही और यह 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंच गया था। इससे पहले सोमवार को कच्चा तेल बीच कारोबार में 119 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था।</p>
<p>अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को एक संयुक्त सैन्य अभियान में ईरान पर किये गये हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। ईरान पर हमले और उसकी जवाबी प्रतिक्रिया के कारण पश्चिम एशिया में इन दोनों गंभीर भू-राजनीतिक संकट पैदा हो गया है। इससे कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति और उत्पादन दोनों बाधित हुए हैं। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 18:00:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दी ईरान को चेतावनी, कहा-अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग को रोकता है, तो उस पर बीस गुना अधिक भयानक होगा हमला </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल परिवहन रोका, तो अमेरिका 20 गुना भीषण प्रहार करेगा। युद्ध के खतरे और बीमा रद्द होने से यह मार्ग ठप है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति संकट गहरा गया है। भारत अपने 36 जहाजों को सुरक्षित निकालने हेतु प्रयासरत ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-warned-iran-if-iran-blocks-the/article-145971"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान को चेतावनी दी कि यदि उसकी सेनाएं होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से होने वाले तेल के परिवहन को रोकती हैं, तो उन पर बीस गुना अधिक भयानक हमला किया जाएगा। अमेरिकी ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा, अगर ईरान ऐसा कुछ भी करता है जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य के भीतर तेल का प्रवाह रुकता है, तो अमेरिका उन पर अब तक हुए हमलों की तुलना में बीस गुना अधिक जोर से हमला करेगा। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त, अमेरिका आसानी से नष्ट होने वाले लक्ष्यों को खत्म कर देगा, जिससे ईरान के लिए एक राष्ट्र के रूप में फिर से खड़ा होना लगभग असंभव हो जाएगा।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने इस चेतावनी को अमेरिका की ओर से चीन और उन सभी देशों के लिए एक उपहार बताया जो होर्मुज जलडमरूमध्य का काफी उपयोग करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल की काफी सराहना की जाएगी। उल्लेखनीय है कि 10 मार्च तक होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग में वाणिज्यिक यातायात लगभग पूरी तरह से ठप हो गया है। हालांकि, औपचारिक रूप से इसे बंद करने की कोई घोषणा नहीं की गई है, लेकिन अत्यधिक जोखिमों के कारण बीमा कंपनियों द्वारा बीमा रद्द करने के कारण इस मार्ग पर यातायात प्रभावी रूप से बंद हो गया है।</p>
<p>मार्सक, सीएमए सीजीएम और हैपग-लॉयड जैसी प्रमुख परिवहन कंपनियों ने इस मार्ग से आवाजाही को स्थगित कर दिया है और जहाजों को केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेज रहे हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से ही ड्रोन और मिसाइल हमलों में कम से कम आठ नाविक मारे गये हैं और कई टैंकर क्षतिग्रस्त हुए हैं। छह मार्च को, संयुक्त अरब अमीरात के ध्वज वाली नौका मुसाफा-2 एक विस्फोट के बाद डूब गयी, जिससे चालक दल के तीन सदस्य लापता हो गए। सात मार्च को, माल्टा के ध्वज वाले टैंकर प्रिमा पर कथित तौर पर एक ईरानी ड्रोन द्वारा हमला किया गया था।</p>
<p>भारत वर्तमान में इस क्षेत्र में फंसे 36 भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। फ्रांस ने भी युद्ध की तीव्रता कम होने के बाद जहाजों को सुरक्षित एस्कॉर्ट करने के लिए एक मिशन की तैयारी की घोषणा की है। नाकाबंदी के परिणामस्वरूप, कच्चे तेल की कीमतें 9 मार्च को 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गईं, जो बाद में घटकर लगभग 88-90 डॉलर पर आ गईं।</p>
<p>कुवैत और कतर ने कुछ ऊर्जा अनुबंधों पर फोर्स मेज्योर घोषित कर दिया है क्योंकि टैंकर सुरक्षित रूप से फारस की खाड़ी से बाहर निकलने में असमर्थ हैं। फोर्स मेज्योर एक सामान्य क्लॉज है जो अनिवार्य रूप से दोनों पक्षों को दायित्व या बाध्यता से मुक्त करता है जब पार्टियों के नियंत्रण से बाहर कोई असाधारण घटना या परिस्थिति आ जाती है। यह जलडमरूमध्य पश्चिमी देशों से जुड़े वाणिज्यिक यातायात के लिए प्रभावी रूप से बंद है। हालांकि, इसके कुछ अपवाद भी हैं। कुछ चीनी ध्वज वाले जहाजों ने स्वचालित पहचान प्रणाली (एआईएस) के माध्यम से अपनी स्थिति प्रसारित कर सफलतापूर्वक पारगमन किया है।</p>
<p>वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत (पाँचवाँ हिस्सा) इस जल क्षेत्र से होकर गुजरता है। अमेरिकी ऊर्जा प्रशासन के अनुसार, इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कच्चे तेल का लगभग 84-89 प्रतिशत और एलएनजी का 83 प्रतिशत हिस्सा एशिया के लिए होता है। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में उर्जा आपूर्ति के लिए यह जलमार्ग काफी महत्वपूर्ण है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 18:00:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केंद्र सरकार ने कहा-भारत के ऊर्जा हितों की रक्षा उसकी प्राथमिकता: विपक्ष का राज्ययसभा से बहिर्गमन</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विपक्ष ने ऊर्जा सुरक्षा और गैस की बढ़ती कीमतों पर नियम 176 के तहत चर्चा की मांग करते हुए वॉकआउट किया। सरकार स्थिति का निरंतर आकलन कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/central-government-said-protecting-indias-energy-interests-is-its/article-145805"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/s-jaishankar1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि वह पश्चिम एशिया में उत्पन्न स्थिति का निरंतर आकलन कर रही है और इस क्षेत्र के देशों में भारतीयों की सुरक्षा, उनकी सकुशल वापसी तथा देश के ऊर्जा हितों की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है जबकि विपक्ष ने इस स्थिति के कारण देश के समक्ष ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों पर नियम 176 के तहत चर्चा कराने की मांग को लेकर सदन से बहिर्गमन किया। विदेश मंत्री डा एस जयशंकर के पश्चिम एशिया तथा खाड़ी देशों की स्थिति के भारत पर प्रभाव के बारे में स्वत: दिये जाने वाले वक्तव्य से पहले विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने इस स्थिति के कारण देश में ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों के मुद्दे पर नियम 176 के तहत सदन में चर्चा कराये जाने की मांग की। नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा ने कांग्रेस के रवैये को गैर जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि इनकी रूचि ने देश हित में है और न ही चर्चा में, बस इनकी रूचि केवल हुड़दंग मचाने में है। </p>
<p>नेता विपक्ष की मांग के तुरंत बाद डॉ. जयशंकर ने विपक्ष के भारी शोर शराबे के बीच अपने वक्तव्य में पश्चिम एशिया की स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि सरकार अमरीका और इजरायल की ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद से स्थिति का निरंतर आकलन कर रही है और सभी संबंधित पक्षों के निरंतर संपर्क में है। उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण इस मामले में मुख्य रूप से तीन बिन्दुओं पर आधारित है पहला सभी मुद्दों का समाधान बातचीत से हो, क्षेत्र में तनाव कम करने के कदम उठाये जायें, आम लोगों पर हमले न किये जायें। दूसरा क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और सकुशल वापसी सरकार की प्राथमिकता है और तीसरा देश के राष्ट्रीय और ऊर्जा हितों की रक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जायेगा। </p>
<p>इससे पहले खरगे ने ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए इस पर नियम 176 के तहत सदन में चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्थिति निरंतर बदल रही है और भारत भी इससे प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरत का 55 प्रतिशत इस क्षेत्र से पूरा होता है और यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर भारत की आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि रसोई गैस सिलेंडर पहले ही 60 रुपये महंगा हो गया है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भारत के करीब एक करोड़ लोग हैं और उनकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के कुछ लोगों के मारे जाने तथा कुछ के लापता होने की घटनाएं सामने आयी हैं। नेता विपक्ष ने कहा कि सरकार को सदन में इन सभी मुद्दों पर चर्चा करानी चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 13:57:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान संघर्ष का एशिया, अफ्रीका और यूरोप के लिए गंभीर नतीजों की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-इजराइल युद्ध ने शिपिंग लागत में 20% की वृद्धि और निर्यात में भारी गिरावट के साथ भारतीय व्यापार को संकट में डाल दिया है। लाल सागर मार्ग बाधित होने से पेट्रोलियम और चाय निर्यात प्रभावित हुए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और शेयर बाजार में अस्थिरता भारत की आर्थिक रिकवरी और IMEC कॉरिडोर के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-iran-conflict-likely-to-have-serious-consequences-for-asia-africa/article-145016"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। इस संघर्ष ने यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के साथ भारत के व्यापार के लिये महत्त्वपूर्ण प्रमुख शिपिंग मार्गों पर व्यवधान के जोखिम को बढ़ा दिया है। विश्व के रणीनीति विशेषज्ञ इस जंग से चिंतित हैं।  लाल सागर और स्वेज नहर मार्ग विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे प्रतिवर्ष 400 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य के माल के आवागमन में सहायक होते हैं। इस अस्थिरता से न केवल नौवहन मार्गों को खतरा है, बल्कि समुद्री व्यापार की समग्र सुरक्षा को भी खतरा है।</p>
<p><strong>निर्यात पर आर्थिक प्रभाव: </strong>संघर्ष के बढ़ने से भारतीय निर्यात पर असर पड़ना आरंभ हो गया है। उदाहरण के लिये अगस्त 2024 में निर्यात में 9 प्रतिनिधि की गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण लाल सागर में संकट के कारण पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात में 38 प्रतिशत की भारी गिरावट है। ये निर्यात भारत के व्यापार का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है तथा कुल पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात का 21 प्रतिशत  यूरोप को प्राप्त होता है। मूलत: चाय उद्योग में कमजोरी देखी गई है। रान भारतीय चाय के सबसे बड़े आयातकों में से एक है (भारत का निर्यात वर्ष 2024 की शुरूआत में 4.91 मिलियन किलोग्राम तक पहुँच जाएगा), इसलिये शिपमेंट पर संघर्ष के प्रभाव के बारे में चिंताएं उत्पन्न हुई हैं। </p>
<p><strong>बढ़ती शिपिंग लागत:</strong> संघर्ष-संबंधी परिवर्तन के कारण शिपिंग मार्ग लंबे हो जाने से लागत में 15-20प्रतिशत  की वृद्धि हुई है। शिपिंग दरों में इस उछाल से भारतीय निर्यातकों के लाभ मार्जिन पर असर पड़ा है, विशेष रूप से निम्न-स्तरीय इंजीनियरिंग उत्पादों, वस्त्रों और परिधानों का व्यापार करने वाले निर्यातकों के लिये जो माल ढुलाई लागत के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। निर्यातकों ने बताया है कि बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत उनके समग्र लाभप्रदता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, जिससे उन्हें मूल्य निर्धारण रणनीतियों और परिचालन दक्षताओं पर पुनर्विचार करने के लिये बाध्य होना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>भारत-यूरोप आर्थिक गलियारा </strong></p>
<p>भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान भारत, खाड़ी और यूरोप को जोड़ने वाला एक कुशल व्यापार मार्ग बनाने के लिये कटएउ का उद्देश्य स्वेज नहर पर निर्भरता को कम करना है, साथ ही चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का सामना करना है। जारी संघर्ष से इस गलियारे की प्रगति और व्यवहार्यता को खतरा है, जिससे भारत और उसके साझेदारों के बीच द्विपक्षीय व्यापार के साथ-साथ क्षेत्रीय आर्थिक गतिशीलता पर भी असर पड़ रहा है।</p>
<p><strong>कच्चे तेल की कीमतों पर असर</strong></p>
<p>चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, ब्रेंट क्रूड 75 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गया है। चूँकि ईरान एक प्रमुख तेल उत्पादक है, इसलिये किसी भी सैन्य वृद्धि से तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे कीमतें और भी बढ़ सकती हैं। तेल की ऊची कीमतें केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में कटौती करने से रोक सकती हैं, क्योंकि बढ़ी हुई मुद्रास्फीति आर्थिक सुधार के प्रयासों को जटिल बना सकती है।</p>
<p><strong>भारतीय बाजारों पर प्रभाव</strong></p>
<p>भारत तेल आयात पर बहुत अधिक निर्भर है (इसकी 80 प्रतिशत  से अधिक तेल की जरूरतों की पूर्ति विदेशों से होती है), जिससे यह कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो जाता है। तेल की कीमतों में निरंतर वृद्धि से निवेशकों का ध्यान भारतीय इक्विटी से हटकर बॉन्ड या सोने जैसी सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर जा सकता है। भारतीय शेयर बाजार पर इसका प्रभाव पहले ही पड़ चुका है, तथा लंबे समय तक संघर्ष चलने की आशंका के बीच सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ खुले।</p>
<p><strong>सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में सोना </strong></p>
<p>भू-राजनीतिक तनाव और निवेश रणनीतियों में बदलाव के कारण सोने की कीमतें नई ऊँचाइयों पर पहुँच गई हैं। अनिश्चितता के समय में निवेशक प्राय: सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे इसकी कीमत और बढ़ सकती है।</p>
<p><strong>रसद संबंधी चुनौतियां</strong></p>
<p>भारतीय निर्यातक वर्तमान में प्रतीक्षा और निगरानी की स्थिति में हैं। कुछ निर्यातक सरकार से विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भरता कम करने के लिये एक प्रतिष्ठित भारतीय शिपिंग लाइन विकसित करने में निवेश करने का आग्रह कर रहे हैं, जो प्राय: उच्च परिवहन शुल्क लगाती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 11:45:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>रुपये में रिकॉर्ड गिरावट: अब तक के दूसरे निचले स्तर पर रुपया, 91 रुपए से नीचे आया, जानें आम आदमी की जेब पर कैसे बढ़ेगा बोझ ?</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹91.01 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक व्यापार तनाव और भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों (FII) द्वारा लगातार पूंजी निकालने से रुपये पर भारी दबाव बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/record-fall-in-rupee-reached-below-%E2%82%B9-91-for-the/article-140215"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। रुपया 11.25 पैसे टूटकर अब तक के दूसरे निचले स्तर पर आ गया और एक डॉलर 90.90 रुपये का बोला गया। भारतीय मुद्रा में यह लगातार चौथी गिरावट है। पिछले कारोबारी दिवस पर यह 44.75 पैसे गिरकर 90.7875 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई थी। चार दिन में यह 72.50 पैसे टूटी है।</p>
<p>रुपये का ऐतिहासिक निचला स्तर 16 दिसंबर 2025 को दर्ज किया गया था, जब यह बीच कारोबार में 91.14 रुपये प्रति डॉलर तक लुढ़कने के बाद 90.93 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। रुपये में सुबह के कारोबार में तेजी रही। यह 10.75 पैसे मजबूत होकर 90.68 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। यह ऊपर 90.65 रुपये प्रति डॉलर तक चढ़ने के बाद गिरता हुआ 91.01 रुपये प्रति डॉलर तक उतर गया। </p>
<p>दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं के बास्केट में डॉलर में रही गिरावट से भारतीय मुद्रा को शुरुआती मजबूती मिली। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों के भारतीय शेयर बाजार से पैसे निकालने से रुपया दबाव में आ गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 12:46:15 +0530</pubDate>
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