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                <title>Military Exercise - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Military Exercise RSS Feed</description>
                
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                <title>दुश्मन देशों की खैर नहीं: सैन्य अभ्यास के लिए भारतीय सेना का दल कंबोडिया रवाना, आतंकवाद-रोधी अभियानों पर होगा फोकस</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय सेना का 120 सदस्यीय दल द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास सिनबैक्स-II के लिए कंबोडिया रवाना हो गया। 17 मई तक चलने वाले इस अभ्यास में आतंकवाद-रोधी अभियानों, ड्रोन संचालन और स्नाइपर रणनीतियों पर ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के लिए तालमेल बढ़ाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/enemy-countries-are-not-well-indian-army-team-leaves-for/article-152516"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/india-army.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय सेना का एक दल भारत–कंबोडिया द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास सिनबैक्स–द्वितीय में हिस्सा लेने के लिए रविवार को कंबोडिया रवाना हो गया। यह अभ्यास सोमवार से 17 मई तक कंबोडिया के कंम्पोंग स्प्यू प्रांत स्थित तेचो सेन फ्नोम थॉम म्रियास प्रांतीय रॉयल कंबोडियन एयर फोर्स प्रशिक्षण केंद्र (कैम्प बेसिल) में होगा। मित्र देशों के साथ भारत के सतत रक्षा सहयोग के तहत कंबोडिया के साथ यह द्विपक्षीय अभ्यास वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बदलते परिदृश्य में विशेष महत्व रखता है। संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अंतर्गत आयोजित इस अभ्यास में भारतीय सेना के दल में कुल 120 सैनिक शामिल हैं, जिनमें अधिकांश मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की एक बटालियन से हैं। कंबोडियाई दल में 160 सैनिक शामिल हैं, जो रॉयल कंबोडियन आर्मी से हैं।</p>
<p>यह संयुक्त अभ्यास संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के दौरान शांति सेना द्वारा सामना किए जाने वाले आतंकवाद-रोधी अभियानों की गतिशीलता के अनुरूप होगा। इस उद्देश्य को विभिन्न व्यावहारिक और व्यापक चर्चाओं तथा सामरिक अभ्यासों के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप एक व्यापक सत्यापन अभ्यास किया जाएगा। अभ्यास के अंतर्गत ड्रोन संचालन, मोर्टार और स्नाइपर रणनीतियों सहित विशेष कौशल प्रशिक्षण भी किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच पारस्परिक संचालन क्षमता, समन्वय और कार्यात्मक तालमेल को बढ़ाना है।</p>
<p>यह अभ्यास न केवल वैश्विक शांति बनाए रखने में दोनों देशों की क्षमताओं को प्रदर्शित करेगा, बल्कि अर्ध-शहरी स्थिति में शत्रु बलों के खिलाफ विभिन्न अभियानों के दौरान प्राप्त सर्वोत्तम विधियों और संचालनात्मक अनुभवों के आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करेगा। संयुक्त सैन्य अभ्यास सिनबैक्स–द्वितीय भारत और कंबोडिया के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाता है और यह दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा। यह क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में पारस्परिक समझ को भी बढ़ावा देगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 16:09:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>उत्तराखंड के चौबट्टिया में 24 फरवरी से शुरू होगा भारत-जापान संयुक्त सैन्य अभ्यास धर्म गार्डियन 2026, शहरी युद्ध और आतंकवाद-रोधी अभियानों को मिलेगा बढ़ावा </title>
                                    <description><![CDATA[भारत और जापान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास 'धर्म गार्डियन' का सातवां संस्करण 24 फरवरी से उत्तराखंड के चौबट्टिया में शुरू होगा। इसका उद्देश्य शहरी युद्ध और आतंकवाद-रोधी अभियानों में तालमेल बढ़ाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-japan-joint-military-exercise-will-start-from-february-24-in/article-144222"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/india-and-japan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास धर्म गार्डियन 2026 का सातवां संस्करण 24 फरवरी से नौ मार्च तक उत्तराखंड के चौबट्टिया में आयोजित किया जाएगा। यह अभ्यास प्रतिवर्ष बारी-बारी से भारत और जापान में किया जाता है। अतिरिक्त लोक सूचना महानिदेशालय ने एक्स पर बताया कि इस अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त शहरी युद्ध और आतंकवाद-रोधी अभियानों के दौरान दोनों सेनाओं के बीच परस्पर संचालन क्षमता को बढ़ाना है।  </p>
<p>पोस्ट के अनुसार दो सप्ताह के दौरान सैनिक संयुक्त योजना निर्माण को परिष्कृत करेंगे, सामरिक अभ्यासों का समन्वय करेंगे और विशेष युद्ध कौशल का अभ्यास करेंगे। प्रमुख गतिविधियों में अस्थायी ऑपरेटिंग बेस की स्थापना, आईएसआर ग्रिड विकसित करना, मोबाइल चेक पोस्ट, घेराबंदी और तलाशी अभियान, हेलिबोर्न मिशन और हाउस इंटरवेंशन ड्रिल शामिल हैं।  </p>
<p>धर्म गार्डियन 2026 भारत-जापान रक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। अभ्यास का छठा संस्करण 2025 में जापान के ईस्ट फुजी मैनोवर ट्रेनिंग एरिया में आयोजित हुआ था। भारतीय दल में 120 कर्मी शामिल थे, जिनका प्रतिनिधित्व मुख्य रूप से मद्रास रेजिमेंट की एक बटालियन तथा अन्य हथियारों और सेवाओं के जवानों ने किया था। </p>
<p>जापानी दल समान संख्या में था और उसका प्रतिनिधित्व जापान ग्राउंड आत्मरक्षा बल की 34वीं इन्फैंट्री रेजिमेंट ने किया था। इससे पहले, पांचवां संस्करण 2024 में राजस्थान में आयोजित किया गया था। रक्षा मंत्रालय ने पहले जारी बयान में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के तहत शहरी युद्ध और आतंकवाद-रोधी अभियानों में दोनों सेनाओं की परस्पर काम करने की क्षमता बढ़ाना इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य है। </p>
<p>पिछले एक दशक में भारत-जापान रक्षा सहयोग में निरंतर मजबूती आई है, जिसे उच्चस्तरीय संवाद, रक्षा नीति संवाद, 2 2 मंत्रिस्तरीय और वार्षिक रक्षा मंत्रिस्तरीय बैठक जैसे संस्थागत तंत्रों से बल मिला है। टोक्यो घोषणा और रक्षा सहयोग एवं आदान-प्रदान पर समझौता ज्ञापन ने इस साझेदारी को रणनीतिक दिशा प्रदान की है।  </p>
<p>सितंबर 2020 में हुए पारस्परिक आपूर्ति एवं सेवाओं के प्रावधान संबंधी समझौते ने सहयोग को नयी गति दी, जिसे मिलान-2022 के दौरान लागू किया गया और इससे अभ्यासों तथा जहाजों एवं विमानों की यात्राओं के दौरान लॉजिस्टिक्स सहयोग सुगम हुआ। रक्षा उपकरण, प्रौद्योगिकी और सेवा-सेवा सहयोग में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। संयुक्त कार्य समूह अब तक सात बैठकें कर चुका है, जबकि उद्योग-से-उद्योग संपर्क भी लगातार बढ़ रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 12:44:21 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रूस-पाक में जमीनी ट्रेड, सैन्य अभ्यास और जेएफ-17 लड़ाकू विमानों के इंजन की डील</title>
                                    <description><![CDATA[रूस और पाकिस्तान तुर्की में हुई बैठक में सीधी हवाई और जमीनी कनेक्टिविटी बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। रूस द्वारा जेएफ-17 विमानों के लिए आरडी-93 इंजनों की आपूर्ति और संयुक्त सैन्य अभ्यासों ने भारत की सामरिक चिंताएं बढ़ा दी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-pak-ground-trade-military-exercises-and-deal-for-engines-of/article-143603"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/pakistan-and-russia.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान और रूस के बेहतर होते संबंधों ने हालिया समय में दुनिया के बड़े हिस्से, खासतौर से भारत का ध्यान खींचा है। दोनों देश बीते हफ्ते तुर्की में हुई एक बैठक में सीधे जमीनी और हवाई संपर्क बनाने पर सहमत हुए हैं। दोनों देशों में सहयोग सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। रूस से पाकिस्तान को जेएफ-17 लड़ाकू विमानों के इंजन सप्लाई लगातार चर्चा में रही है। चीन की मदद से बने पाकिस्तान के इस विमान में रूस का इंजन लगा है। रूस के पाकिस्तान को आरडी-93एमए इंजन सप्लाई करने ने भारत में इस बहस को जन्म दिया है कि क्या उसका पारंपरिक सहयोगी मॉस्को इस्लामाबाद की तरफ जा रहा है। ओआरएफ की रिपोर्ट बताती है कि यह नया नहीं है क्योंकि रूसी मिलिट्री एक्सपर्ट लंबे समय से भारत के अलावा पाकिस्तान को भी हथियार सप्लाई करने पर जोर दे रहे हैं। इसी सोच का असर हालिया संबंधों पर दिखता है। हालांकि रूस को पाकिस्तान पर अभी भी बहुत भरोसा नहीं है।</p>
<p><strong>एसयू-27 देने पर भी किया था विचार</strong></p>
<p>पाकिस्तान और रूस का रक्षा सहयोग 1990 के दशक में भी बढ़ा था, जब मॉस्को ने इस्लामाबाद को एसयू-27 देने का फैसला लिया था। हालांकि, बाद में भारत के एतराज पर यह डील रद्द कर दी गई। मिसाइलें, टैंक, स्टील्थ फ्रिगेट और आर्टिलरी गन खरीदने के पाकिस्तानी प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चले गए। हालिया वर्षों में दोनों में कई समझौते हो गए हैं। हालिया वर्षों में भारत ने रूस के मिलिट्री हार्डवेयर पर अपनी निर्भरता कम की है तो दूसरी ओर मॉस्को ने पाकिस्तान को डिफेंस सप्लाई की तरफ ध्यान दिया है। हालांकि, इसमें इस्लामाबाद की खरीदारी की सीमित क्षमता एक अड़चन है। वहीं पाकिस्तान की फॉरेन पॉलिसी की अनिश्चित्ता भी मॉस्को की हथियार डील पर चिंता को गहरा करती रही है।</p>
<p><strong>रूसी इंजन पर निर्भरता</strong></p>
<p>चीन और पाकिस्तान अपने जेट के लिए रूस में बने इंजनों पर निर्भर हैं। आरडी-93 रूसी मिग-29 फाइटर जेट में इस्तेमाल होने वाले आरडी-33 इंजन का एक्सपोर्ट वेरिएंट है। इन इंजन को चीन और पाकिस्तान के जेएफ-17 थंडर के लिए डिजाइन किया गया है। रूस ने 2007 से पाकिस्तान को आरडी-93 इंजन डिलीवर किए हैं। रूस-पाकिस्तान के बीच बातचीत का एक और पहलू जॉइंट मिलिट्री ड्रिल है, जो अब रेगुलर बन गई है। द्रुज्बा काउंटर-टेररिज्म एक्सरसाइज का लेटेस्ट एडिशन 15 से 27 सितंबर 2025 तक रूस के सदर्न मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट में हुआ था। ये एक्सरसाइज सितंबर 2016 से दो सालों को छोड़कर रेगुलर तरीके से चल रही है। रूस और पाकिस्तान ने फ्रेमवर्क में नेवी एक्सरसाइज को शामिल किया है। मार्च 2025 में रूस और पाकिस्तान की नेवी ने नॉर्थ अरब सागर में अरेबियन मानसून जॉइंट एक्सरसाइज की थी। इसका मकसद इंटर ऑपरेबिलिटी को बढ़ाना और समुद्री सुरक्षा खतरों का मुकाबला करने के लिए जॉइंट कमिटमेंट दिखाना था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 11:33:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आर्कटिक हलचल: ग्रीनलैंड के पिटुफिक बेस पर नोराड विमानों की तैनाती, सुरक्षा अभ्यास तेज</title>
                                    <description><![CDATA[नोराड (NORAD) के विमान जल्द ही ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस पहुंचेंगे। यह तैनाती अमेरिका, कनाडा और डेनमार्क के बीच 'स्थायी रक्षा सहयोग' और आर्कटिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को मजबूत करने का हिस्सा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/norad-aircraft-will-arrive-in-greenland-for-long-term-planned-activities/article-140220"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(5)14.png" alt=""></a><br /><p>ओटावा। उत्तर अमेरिका एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (नोराड) ने सोमवार को कहा कि उसके विमान जल्द ही ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस पहुंचेंगे। यह तैनाती 'दीर्घावधि से नियोजित नोराड गतिविधियों' की एक शृंखला का हिस्सा है। नोराड ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर जानकारी दी है कि ये विमान अमेरिका और कनाडा के महाद्वीपीय अड्डों से संचालित होने वाले अन्य संसाधनों के साथ जुड़ेंगे। उन्होंने बताया कि ये गतिविधियां अमेरिका, कनाडा और डेनमार्क साम्राज्य के बीच 'स्थायी रक्षा सहयोग' को और मजबूती प्रदान करती हैं।</p>
<p>नोराड ने यह भी स्पष्ट किया कि इस गतिविधि को डेनमार्क के साथ समन्वित किया गया है और सभी सहायक बल आवश्यक राजनयिक मंजूरी के साथ काम कर रहे हैं। साथ ही, ग्रीनलैंड सरकार को भी इन नियोजित गतिविधियों की जानकारी दे दी गयी है। कमांड ने यह भी उल्लेख किया कि यह अलास्का, कनाडा और महाद्वीपीय अमेरिका के एक या सभी तीनों क्षेत्रों के जरिये 'उत्तरी अमेरिका की रक्षा में निरंतर और विस्तृत अभियान नियमित रूप से संचालित करता है'।</p>
<p>कनाडाई मीडिया ने रविवार को खबर दी कि रॉयल कनाडाई वायु सेना का एक सैन्य दल पहले से ही ग्रीनलैंड में नोराडा अभ्यास में भाग ले रहा है। साथ ही, कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भी सेना को भेजने पर विचार कर रहे हैं, ताकि वे डेनमार्क के नेतृत्व वाले संप्रभुता अभ्यासों में शामिल हो सकें। इन अभ्यासों में विशेष रूप से आर्कटिक द्वीप के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर केंद्रित ड्रिल शामिल हो सकती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 13:12:19 +0530</pubDate>
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