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                <title>Supreme Court Hearing - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Supreme Court Hearing RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>तीन-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, 9वीं से नई भाषा शुरू करने पर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने सीबीएसई द्वारा नौवीं कक्षा में तीसरी भाषा अनिवार्य करने पर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि इससे विद्यार्थियों पर मानसिक बोझ बढ़ेगा और स्पष्ट किया कि नई शिक्षा नीति (एनईपी) किसी राज्य पर हिंदी नहीं थोपती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-courts-comment-on-three-language-policy-raises-questions-on-starting/article-160040"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/supreme-court-of-india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड पाठ्यक्रम के तहत नौवीं कक्षा के स्तर पर तीसरी भाषा को शामिल किए जाने पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह बोर्ड की परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने यह टिप्पणी तमिलनाडु सरकार की एक अपील पर सुनवाई के दौरान की। यह अपील मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ थी, जिसमें राज्य को हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय बनाने की सुविधा देने का निर्देश दिया गया था। गौरतलब है कि तमिलनाडु सरकार नवोदय विद्यालयों की स्थापना का विरोध कर रही है, और उसका तर्क है कि ये विद्यालय त्रि-भाषा नीति का पालन करते हैं।</p>
<p>केंद्र सरकार की त्रिभाषा की नीति की वैधता हालांकि इस मामले में विचाराधीन नहीं थी, फिर भी न्यायमूर्ति नागरत्ना ने नौवीं कक्षा में तीसरी भाषा को शामिल करने के समय पर सवाल उठाया। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय बोर्ड की इस त्रि-भाषा नीति को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली एक न्यायपीठ के समक्ष अलग से चुनौती दी गई है। पीठ ने इस नीति के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है और इस मामले को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।</p>
<p>सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि त्रि-भाषा नीति में तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को अनिवार्य नहीं किया गया है। उन्होंने तमिलनाडु की आपत्ति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर छात्र संस्कृत जैसी भाषाओं का विकल्प चुनते हैं तो राज्य को क्या आपत्ति है। जब राज्य सरकार ने कहा कि तीसरी भाषा केवल नौवीं कक्षा से अनिवार्य होती है, तो उन्होंने टिप्पणी की कि उस स्तर पर एक नई भाषा की शुरुआत करना "बहुत खराब" है क्योंकि छात्रों पर बोर्ड परीक्षा का दबाव होता है। इसकी जगह इसे छठी कक्षा से शुरू किया जाना चाहिए।</p>
<p>न्यायमूर्ति नागरत्ना ने स्पष्ट किया कि नीति में तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को अनिवार्य नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, "राज्य की भाषा पढ़ाई जानी चाहिए, अंग्रेजी पढ़ाई जानी चाहिए और कोई भी तीसरी भाषा। यह हिंदी नहीं कहता।" प्रतिवादी की वकील जी प्रियदर्शिनी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति विशेष रूप से यह प्रावधान करती है कि किसी भी राज्य पर कोई भाषा थोपी नहीं जानी चाहिए। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वे नौवीं कक्षा से तीसरी भाषा लागू न करें, क्योंकि यह बोर्ड परीक्षा की तैयारी के तनाव को बढ़ाती है और इसकी शुरुआत छठी कक्षा से होनी चाहिए। उन्होंने तमिलनाडु सरकार को यह भी सलाह दी कि वे केंद्रीय योजनाओं को केवल इसलिए खारिज न करें क्योंकि वे केंद्र सरकार से आई हैं। यह देखते हुए कि जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित करने पर चर्चा अभी भी जारी है और राज्य में एक नयी सरकार ने कार्यभार संभाला है, उच्चतम न्यायालय ने मामले को 11 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:37:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राजा रघुवंशी हत्याकांड: सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, मेघालय सरकार की मांग पर तुरंत रोक लगाने से इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत पर तत्काल रोक लगाने की मेघालय सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी फिलहाल बाहर रहेगी, लेकिन जमानत रद्दीकरण पर अंतिम फैसला बाद में होगा। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए 'जमानत नियम है, जेल अपवाद' के सिद्धांत को दोहराया और अगली सुनवाई अगले गुरुवार के लिए तय की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/raja-raghuvanshi-murder-case-big-relief-for-sonam-raghuvanshi-from/article-158752"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/021.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि शीर्ष अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला ऐसा नहीं लगता जिसमें गिरफ्तारी के आधार न बताए गए हों, फिर भी चूंकि सोनम पहले से जमानत पर बाहर है, इसलिए फिलहाल उस आदेश में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।</p>
<p>जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने स्पष्ट किया कि जमानत रद्द करने का अंतिम फैसला मामले की सुनवाई के दौरान किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि अपराध गंभीर होने के बावजूद भारतीय न्याय व्यवस्था में जमानत नियम है, जबकि जेल अपवाद।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार की जमानत रद्द करने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई और सोनम रघुवंशी को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई अगले गुरुवार को होगी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दावा किया कि हाई कोर्ट का जमानत आदेश गिरफ्तारी से जुड़े एक तकनीकी त्रुटि के आधार पर दिया गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 13:23:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>उन्नाव मामला: सुप्रीम कोर्ट में कुलदीप सेंगर की जमानत पर सुनवाई, 'पब्लिक सर्वेंट' की व्याख्या पर तकरार</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली जमानत के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करने जा रहा है। बता दें कि हाल ही में, 29 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए सेंगर को नोटिस जारी किया था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/unnao-case-kuldeep-sengars-bail-hearing-in-supreme-court-dispute/article-140226"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(6)11.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली: पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली जमानत के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करने जा रहा है। बता दें कि हाल ही में, 29 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए सेंगर को नोटिस जारी किया था, जिससे उनकी जेल से रिहाई रुक गई थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर को सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित कर दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने कानून के महत्वपूर्ण सवालों को देखते हुए फिलहाल स्थगित रखा है।</p>
<p>आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पॉक्सो की धारा 5 के तहत 'एग्रवेटेड पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट' का मामला बनता है, जिसमें कम से कम 20 साल की सजा का प्रावधान है। सीबीआई ने अपनी याचिका में हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें कहा गया था कि एक विधायक पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 5(c) के तहत 'पब्लिक सर्वेंट' की श्रेणी में नहीं आता। दरअसल, सीबीआई का कहना है कि हाई कोर्ट ने एल.के. आडवाणी मामले के मिसाल की अनदेखी की है, जहां निर्वाचित प्रतिनिधियों को लोक सेवक माना गया है। सेंगर एक प्रभावशाली व्यक्ति है और उसकी रिहाई से पीड़िता और उसके परिवार की जान को खतरा हो सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 14:18:02 +0530</pubDate>
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