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                <title>CJI Surya Kant - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>CJI Surya Kant RSS Feed</description>
                
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                <title>विवाद का स्थायी समाधान एक-दूसरे की बात धैर्यपूर्वक सुनने से निकलता है: सूर्यकांत</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में आयोजित राष्ट्रमंडल शांति मध्यस्थता और विधि का शासन (सीपीएमसी-2026) सम्मेलन में सीजेआई सूर्यकांत ने धैर्यपूर्वक संवाद को विवाद समाधान की कुंजी बताया। 52 देशों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में उन्होंने कहा कि शांति और कानून एक-दूसरे के पूरक हैं तथा मध्यस्थता से मुकदमों का शीघ्र व स्थायी समाधान संभव है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/surya-kant-permanent-solution-to-dispute-comes-by-patiently-listening/article-161617"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/cji.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा है कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान केवल बोलने से नहीं, बल्कि एक-दूसरे की बात धैर्यपूर्वक सुनने से निकलता है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने राजस्थान में जयपुर के होटल द ललित में शुक्रवार को आयोजित तीन दिवसीय ‘राष्ट्रमंडल शांति मध्यस्थता और विधि का शासन’ (सीपीएमसी-2026) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि चाहे मामला दो पड़ोसियों के बीच का हो या दो देशों के बीच का, संवाद और मध्यस्थता ही विवाद के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि किसी एक पक्ष में संवाद की इच्छा ही नहीं हो, तो सबसे अच्छे प्रयास भी सफल नहीं हो पाते।</p>
<p>न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि शांति और कानून को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। कानून की सबसे बड़ी उपलब्धि स्थायी शांति स्थापित करना है। मध्यस्थता ऐसा मंच है, जहां प्रत्येक पक्ष को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलता है और किसी एक की आवाज दूसरे पर हावी नहीं होती। कार्यक्रम में केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष स्टीवन थिरु और उच्चतम न्यायालय बार संघ के अध्यक्ष विकास सिंह सहित देश-विदेश के कई न्यायाधीश, विधि विशेषज्ञ और नीति निर्माता मौजूद रहे। सम्मेलन में 52 कॉमनवेल्थ देशों के प्रतिनिधि शिरकत कर रहे हैं।</p>
<p>न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भारत की प्राचीन ग्राम पंचायत व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि सदियों से समाज में विवादों का समाधान आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से होता आया है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास और रिश्तों को मजबूत करने का माध्यम भी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि भारतीय परंपरा हमेशा टकराव से पहले संवाद की रही है। उन्होंने रामायण और महाभारत के उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान राम ने युद्ध से पहले अंगद को शांति दूत बनाकर भेजा था और भगवान श्रीकृष्ण ने भी महाभारत युद्ध से पहले समझौते का प्रयास किया था।</p>
<p>राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि मध्यस्थता के माध्यम से मामलों के निस्तारण में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है। वहीं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव हरिओम आत्री ने कहा कि मध्यस्थता से वर्षों तक चलने वाले मुकदमों का समाधान कुछ महीनों में संभव हो जाता है, जिससे समय, धन और आपसी संबंधों की भी रक्षा होती है। उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता अरुणेश्वर गुप्ता की पुस्तक का भी विमोचन किया गया। सम्मेलन का समापन दो अगस्त को जयपुर शांति मध्यस्थता घोषणा-पत्र को अपनाने के साथ होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 09:08:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट का आर्टिकल 142 का उपयोग: बंगाल चुनाव से पहले 'पूर्ण न्याय' का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संविधान के आर्टिकल 142 के तहत अपनी खास शक्तियों का इस्तेमाल किया ताकि यह पक्का किया जा सके कि प्रोसेस की टाइमलाइन की वजह से पश्चिम बंगाल में कोई भी योग्य वोटर वोटर रोल से छूट न जाए, और राज्य विधानसभा चुनावों से पहले यह एक बहुत बड़ा दखल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-courts-use-of-article-142-to-order-complete-justice/article-144398"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/supreme-court-of-india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सशक्त बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह सुनिश्चित किया कि समय सीमा की बाधाओं के कारण कोई भी पात्र मतदाता मताधिकार से वंचित न रहे।</p>
<p><strong>सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट और ज्यूडिशियल मैनपावर</strong></p>
<p>अदालत ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद भी सप्लीमेंट्री (पूरक) लिस्ट जारी रखी जाए। यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में 'लॉजिकल डिसकम्पेन्सी' जैसे तकनीकी कारणों से लगभग 80 लाख मामलों का निपटारा होना अभी बाकी है। कोर्ट ने माना कि मौजूदा गति से इन दावों को निपटाने में 80 दिन लग सकते हैं, जो चुनाव की संभावित तारीखों के हिसाब से बहुत अधिक है।</p>
<p>काम में तेजी लाने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को झारखंड और ओडिशा के मौजूदा व सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की मदद लेने का अधिकार दिया गया है। कोर्ट ने इसे "युद्ध स्तर पर" पूरा करने का निर्देश दिया है।</p>
<p><strong>चुनावी शुद्धता और समावेशिता</strong></p>
<p>बेंच ने स्पष्ट किया कि पहचान के सबूत के तौर पर आधार, एडमिट कार्ड और सर्टिफिकेट मान्य रहेंगे। इस हस्तक्षेप का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच "भरोसे की कमी" को पाटते हुए मतदाता सूची की पवित्रता बनाए रखना है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अनुच्छेद 142 के तहत दिए गए इन निर्देशों को भविष्य के लिए 'मिसाल' (Precedent) नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह केवल बंगाल की "असाधारण स्थिति" के लिए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 14:11:51 +0530</pubDate>
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                <title>उन्नाव मामला: सुप्रीम कोर्ट में कुलदीप सेंगर की जमानत पर सुनवाई, 'पब्लिक सर्वेंट' की व्याख्या पर तकरार</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली जमानत के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करने जा रहा है। बता दें कि हाल ही में, 29 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए सेंगर को नोटिस जारी किया था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/unnao-case-kuldeep-sengars-bail-hearing-in-supreme-court-dispute/article-140226"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(6)11.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली: पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली जमानत के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करने जा रहा है। बता दें कि हाल ही में, 29 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए सेंगर को नोटिस जारी किया था, जिससे उनकी जेल से रिहाई रुक गई थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर को सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित कर दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने कानून के महत्वपूर्ण सवालों को देखते हुए फिलहाल स्थगित रखा है।</p>
<p>आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पॉक्सो की धारा 5 के तहत 'एग्रवेटेड पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट' का मामला बनता है, जिसमें कम से कम 20 साल की सजा का प्रावधान है। सीबीआई ने अपनी याचिका में हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें कहा गया था कि एक विधायक पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 5(c) के तहत 'पब्लिक सर्वेंट' की श्रेणी में नहीं आता। दरअसल, सीबीआई का कहना है कि हाई कोर्ट ने एल.के. आडवाणी मामले के मिसाल की अनदेखी की है, जहां निर्वाचित प्रतिनिधियों को लोक सेवक माना गया है। सेंगर एक प्रभावशाली व्यक्ति है और उसकी रिहाई से पीड़िता और उसके परिवार की जान को खतरा हो सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 14:18:02 +0530</pubDate>
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