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                <title>Religious Controversy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Religious Controversy RSS Feed</description>
                
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                <title>नमाज विवाद मामला: प्रोफेसर दिलीप झा को हाईकोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[बिलासपुर हाईकोर्ट ने गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर दिलीप झा को राहत देने से इनकार कर दिया है। नमाज विवाद में दर्ज एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने की उनकी याचिका खारिज हो गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोप पत्र दाखिल होने के बाद हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। प्रोफेसर पर धार्मिक दबाव डालने का आरोप है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/namaz-controversy-case-professor-dilip-jha-gets-a-shock-from/article-150760"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/namaz.png" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर दिलीप झा को नमाज विवाद मामले में उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया,जिसकी जानकारी आज दी गयी। अदालत ने साफ कहा कि मामले में आरोप पत्र पहले ही दाखिल हो चुका है, इसलिए इस स्तर पर हस्तक्षेप संभव नहीं है।</p>
<p>प्रोफेसर झा ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करने की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया। दरअसल, पूरा मामला मार्च 2025 में कोटा क्षेत्र के शिवतराई में आयोजित एनएसएस के सात दिवसीय शिविर से जुड़ा है। 26 मार्च से 1 अप्रैल तक चले इस शिविर के दौरान 30 मार्च को ईद के दिन चार मुस्लिम छात्रों को मंच पर नमाज पढ़ने के लिए बुलाने और अन्य छात्रों पर भी इसमें शामिल होने का दबाव बनाने का आरोप लगा था। विरोध करने वाले छात्रों को प्रमाण पत्र रद्द करने की धमकी देने की बात भी सामने आई थी।</p>
<p>इस मामले में प्रोफेसर दिलीप झा के साथ मधुलिका सिंह, सूर्यभान सिंह, डॉ. ज्योति वर्मा, प्रशांत वैष्णव, बसंत कुमार और डॉ. नीरज कुमारी पर भी आरोप लगाए गए हैं। घटना के बाद प्रभावित छात्रों ने कोनी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी के छात्रों ने इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया था। शिकायत के आधार पर कोटा पुलिस ने सभी आरोपित शिक्षकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 13:58:17 +0530</pubDate>
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                <title>माघ मेला प्रशासन ने जारी किया स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस, जानें क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[प्रयागराज माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर उनके 'शंकराचार्य' पद की वैधता पर सवाल उठाए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/magh-mela-administration-issued-notice-to-swami-avimukteshwaranand-know-why/article-140236"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)6.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उच्चतम न्यायालय की नोटिस का हवाला देते हुये स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद सरस्वती को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा है। मेला प्रशासन द्वारा ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य न माने जाने को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का जवाब भी सामने आया है। उन्होंने साफ कहा है कि शंकराचार्य वह है जिसे बाकी अन्य तीन पीठों के शंकराचार्य मान्यता देते हैं। उन्होंने दावा किया है कि बाकी दो पीठों द्वारका पीठ और श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य उन्हे शंकराचार्य कहते हैं। </p>
<p>स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा है कि पिछले माघ मेले में उन्हे साथ लेकर दोनों शंकराचार्य स्नान कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि जब श्रृंगेरी और द्वारका के शंकराचार्य यह कह रहे हैं कि वह ही शंकराचार्य हैं, तो आखिर किस प्रमाण की आवश्यकता है कि हम शंकराचार्य हैं कि नहीं। </p>
<p>उन्होंने कहा, क्या अब यह प्रशासन तय करेगा कि हम शंकराचार्य हैं कि नहीं। क्या उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री या भारत का राष्ट्रपति तय करेगा कि शंकराचार्य कौन है। भारत के राष्ट्रपति को भी यह अधिकार नहीं है कि वह यह तय करें कि शंकराचार्य कौन है। शंकराचार्य का निर्णय शंकराचार्य करते हैं। हम निर्णीत हैं क्योंकि पुरी के शंकराचार्य ने हमारे बारे में कुछ नहीं कहा है। उन्होंने न तो यह कहा कि वह शंकराचार्य नहीं है और ना ही यह कहा कि शंकराचार्य हैं। पुरी के शंकराचार्य इस मामले में मौन हैं। इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट में भी जो हलफनामा उनकी ओर से दाखिल किया गया है। उसको लेकर यह भ्रम फैलाया गया कि उन्होंने विरोध किया है लेकिन जब हम लोगों ने हलफनामे की उच्चतम न्यायालय से कापी निकाली तो उसमें यह लिखा गया है कि हमसे कोई समर्थन मांगा नहीं इसलिए हमने समर्थन नहीं दिया है। </p>
<p>अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, दो शंकराचार्य का प्रत्यक्ष और लिखित व व्यव हारिक समर्थन मुझे प्राप्त है।इसके साथ ही तीसरे पीठ के शंकराचार्य की मौन स्वीकृति हमारे साथ है। ज्योतिष पीठ का आखिर और कौन शंकराचार्य है यह बताइए। निर्विवाद रूप से ज्योतिष पीठ के हम शंकराचार्य हैं। अगर इस पर कोई विवाद दिखता है तो इसका मतलब वह दूषित भावना वाला है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा है कि अगर कोई यह कहता है कि मैं ज्योतिष पीठ पर शंकराचार्य हूं तो वह आकर मुझसे बात करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 14:39:35 +0530</pubDate>
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