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                <title> Fraud - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> Fraud RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मृत महिला के नाम पर 6.30 लाख की धोखाधड़ी का खुलासा, बैंककर्मी सहित तीन गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[मृत महिला के नाम पर पेंशन व बैंक खाते से 6 लाख 30 हजार रुपए की धोखाधड़ी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार। शिकायतकर्ता तपीश श्रीवास्तव प्रबंधक एसबीआई बैंक शाखा राजा पार्क ने बताया कि मृतक शांतिदेवी के खाते से उनकी मृत्यु के बाद भी लगातार अवैध निकासी की जा रही थी। जांच में सामने आया कि आरोपी लालचंद ने अपनी मां को जीवित दिखाकर बैंक से मिलीभगत की और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रकम निकाली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/fraud-of-rs-630-lakh-in-the-name-of-dead/article-158966"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जवाहर नगर थाना पुलिस ने रविवार को मृत महिला के नाम पर पेंशन व बैंक खाते से 6 लाख 30 हजार रुपए की धोखाधड़ी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। थानाप्रभारी सरला यादव ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में सिराज अहमद कुरैशी निवासी भट्टा बस्ती शास्त्री नगर, लालचंद निवासी गौतम नगर टोंक रोड बजाज नगर और खुशबू दीक्षित उर्फ नेहा निवासी सांगानेर सदर हाल करणी नगर शामिल हैं।</p>
<p>यादव ने बताया कि मामला 9 जनवरी 2024 को दर्ज हुआ था, जिसमें शिकायतकर्ता तपीश श्रीवास्तव प्रबंधक एसबीआई बैंक शाखा राजा पार्क ने बताया कि मृतक शांतिदेवी (पेंशनधारक) के खाते से उनकी मृत्यु (2 मई 2021) के बाद भी लगातार अवैध निकासी की जा रही थी। जांच में सामने आया कि आरोपी लालचंद ने अपनी मां को जीवित दिखाकर बैंक से मिलीभगत की और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रकम निकाली। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि बैंक अधिकारी सिराज अहमद ने फर्जी हस्ताक्षर कर तीन बार में 73 हजार 500 रुपए अपने निजी खाते में ट्रांसफर किए जबकि अन्य आरोपियों ने फर्जी जीवन प्रमाण पत्र और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर बैंक को गुमराह किया।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 11:00:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑनलाइन निवेश के नाम पर 13 लाख की ठगी : पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज कर जांच की शुरू, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[जोधपुर के केरू क्षेत्र में एक व्यक्ति से ऑनलाइन स्कीम के नाम पर 13.28 लाख रुपए की ठगी का मामला। पीड़ित की शिकायत पर एटीएस जयपुर ने राजीव गांधी नगर थाने को रिपोर्ट भेजी, जीरो एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू। पुलिस ने पीड़ित को बयान के लिए बुलाया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/cheating-of-rs-13-lakh-in-the-name-of-online/article-148608"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/news002.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। शहर के केरू क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति के साथ में गत साल दिसम्बर में 13.28 लाख का फ्रॉड हो गया। उसने ऑनलाइन शिकायत दी थी। बाद में पता लगा कि उसके द्वारा ऑनलाइन एक स्कीम में पैसा लगाया गया था। साइबर फ्रॉड के शिकार की ऑन लाइन शिकायत पर एटीएस जयपुर की तरफ से संबंधित थाना राजीव गांधी नगर में रिपोर्ट भेजी गई। इस पर पुलिस ने जीरो नंबर की एफआईआर पर अब जांच आरंभ की है। इससे पहले भी तीन प्रकरण सामने आ रखे है। थानाधिकारी रविंद्रपाल सिंह ने बताया कि केरू निवासी झूमरराम चौधरी के साथ गत साल दिसम्बर को यह फ्रॉड हुआ था। उसने किसी स्कीम के झांसे में आकर ऑनलाइन रकम को जमा करवाया था।</p>
<p>रिपोर्ट में उसने 13 लाख 28 हजार 922 रूपए का फ्रॉड होना बताया है। उसके द्वारा ऑनलाइन शिकायत दिए जाने के साथ रिपोर्ट जयपुर भेजी गई थी। जयपुर एटीएस की तरफ से अब संबंधित थाने में रिपोर्ट भेजी गई है। पीड़ित को बुलाया गया है, उसके बयान लिए जाने है। थानाधिकारी रविंद्रपाल सिंह ने बताया कि इससे पहले भी दो तीन प्रकरण इसी तरह के सामने आए है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:03:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सावधान : अंतरराष्ट्रीय आईवीआर कॉल से डिजिटल अरेस्ट का नया खतरा, ठग खुद को बताते हैं पुलिस, ट्राई या दूरसंचार विभाग (फेडेक्स) का अधिकारी </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका अपनाया। विदेशी नंबरों से आईवीआर कॉल कर खुद को पुलिस या ट्राई अधिकारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया जा रहा। अपराधी बैंक डिटेल्स और ओटीपी लेकर ठगी कर रहे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/beware-there-is-a-new-danger-of-digital-arrest-due/article-145551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(1)7.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक नया और मनोवैज्ञानिक तरीका अपनाया है। इसी कड़ी में साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट ने एक खतरनाक ट्रेंड का खुलासा किया है, जिसमें अपराधी इंटरनेशनल आईवीआर (इंटरेक्टिव वॉयस रेस्पॉंस) कॉल के माध्यम से लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठग रहे हैं। एसपी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी सबसे पहले विदेशी नंबरों से एक ऑटोमेटेड आईवीआर कॉल करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति फोन उठाता है, उसे रिकॉर्डेड आवाज सुनाई देती है जो खुद को पुलिस, भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) या दूरसंचार विभाग (फेडेक्स) का अधिकारी बताती है। अपराधी पीड़ित को मनोवैज्ञानिक रूप से इतना डरा देते हैं कि उसे लगता है कि वह वास्तव में किसी बड़ी कानूनी मुसीबत में फंस गया है। कॉल के दौरान पीड़ित को झूठी सूचना दी जाती है कि उसका मोबाइल नंबर या उसके नाम से आया कोई पार्सल किसी अवैध गतिविधि या गंभीर अपराध में शामिल पाया गया है। अपराधी धमकी देते हैं कि उसके खिलाफ  तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी या उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस भारी दबाव के बीच अपराधी पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट का नाटक करते हैं और केस रफा-दफा करने के बदले बैंक विवरण, ओटीपी मांगते हैं या सीधे पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं।</p>
<p><strong>इन अंतरराष्ट्रीय नंबरों से रहें सतर्क :</strong></p>
<p>अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए सैटेलाइट और विदेशी नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं। जांच में पाया गया है कि इनमारसैट (+870) सैटेलाइट नंबरों का सबसे ज्यादा दुरुपयोग हो रहा है। इसके अलावा निम्नलिखित देशों के कोड वाले नंबरों से आने वाली कॉल बेहद संदिग्ध हो सकती हैं।</p>
<ul>
<li>पड़ोसी देश पाकिस्तान +92, बांग्लादेश +880, नेपाल +977, अफगानिस्तान +93।</li>
<li>एशियाई देश दक्षिण कोरिया +82, ईरान +98, कंबोडिया +855, सऊदी अरब +966, संयुक्तअरब अमीरात +971, लाओस +858, पूर्वी तिमोर +670।</li>
<li>अन्य देश यूनाइटेड किंगडम +44, ऑस्ट्रेलिया +61, पोलैंड +48, बोस्निया +387, वनुआतु +678, आइवरी कोस्ट +225, बोत्सवाना +267, तंजानिया +255, न्यू कैलेडोनिया +687।</li>
<li>सैटेलाइट नेटवर्क ग्लोबल सैटेलाइट +881 और थुरया +882।</li>
</ul>
<p><strong>ट्राई की स्पष्ट चेतावनी :</strong></p>
<p>दूरसंचार विभाग और ट्राई ने स्पष्ट किया है कि वे कभी भी किसी व्यक्तिके खिलाफ  व्यक्तिगत जांच नहीं करते हैं। ट्राई न तो किसी से आधार कार्ड या बैंक डिटेल्स मांगता है और न ही किसी को डिजिटल माध्यम से गिरफ्तार करने की धमकी देता है। ऐसे कॉल पूरी तरह फर्जी और धोखाधड़ी के उद्देश्य से किए जाते हैं।</p>
<p><strong>सुरक्षा के उपाय और शिकायत प्रक्रिया :</strong></p>
<p>राजस्थान पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे अनजान अंतरराष्ट्रीय नंबरों से आने वाली कॉल को लेकर सतर्क रहें। यदि कोई संदिग्ध कॉल आती हैए तो उसे तुरंत काट दें और इसकी रिपोर्ट संचार साथी पोर्टल या ऐप पर करें। किसी भी अनजान व्यक्ति को अपनी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा न करें। यदि आप किसी ऐसी धोखाधड़ी का शिकार होते हैं तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा आप निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्प डेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी सूचना दे सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 10:31:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीन बड़ी भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा उजागर : राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के तकनीकी प्रमुख सहित 5 अभियुक्त गिरफ्तार, एसओजी की बड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में 2018 की तीन बड़ी भर्तियों में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ कर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। एसओजी ने आरएसएमएसएसबी के तकनीकी प्रमुख सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में अंकों में फोटोशॉप से हेरफेर कर अयोग्य अभ्यर्थियों को चयनित कराने और लाखों की अवैध वसूली का खुलासा हुआ है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/fraud-exposed-in-three-big-recruitment-examinations-5-accused-including/article-140263"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/6622-copy67.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में सरकारी भर्तियों की शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए सुपरवाईजर (महिला अधिकारिता) सीधी भर्ती परीक्षा-2018, प्रयोगशाला सहायक भर्ती परीक्षा-2018 एवं कृषि पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा-2018 में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इस प्रकरण में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) के तकनीकी प्रमुख सहित कुल 05 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है।<br />अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी), राजस्थान, जयपुर विशाल बंसल ने बताया कि वर्ष 2018 की इन तीनों भर्तियों में कुल 3212 पदों के लिए 9,40,038 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परीक्षाएं वर्ष 2019 में आयोजित हुई थीं। परीक्षा परिणाम तैयार करने हेतु ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग एवं डाटा प्रोसेसिंग का अत्यंत गोपनीय कार्य एक आउटसोर्स फर्म राभव लिमिटेड, नई दिल्ली को सौंपा गया था।</p>
<p><strong>ओएमआर शीट्स से छेड़छाड़ कर बढ़ाए गए अंक :</strong></p>
<p>एसओजी की जांच में सामने आया कि आउटसोर्स फर्म के कार्मिकों ने ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग के बाद कम्प्यूटर सिस्टम में वास्तविक डाटा से छेड़छाड़ की। चुनिंदा अभ्यर्थियों के अंकों में कूटरचना कर अनुचित वृद्धि की गई, जिससे अयोग्य अभ्यर्थियों को चयनित कराया गया। जब बोर्ड द्वारा मूल ओएमआर शीट्स की पुनः स्कैनिंग कराई गई, तो परीक्षा परिणामों में गंभीर विसंगतियां सामने आईं।</p>
<p><strong>तकनीकी प्रमुख की अहम भूमिका :</strong></p>
<p>विस्तृत अनुसंधान में यह तथ्य उजागर हुआ कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में तत्कालीन सिस्टम एनालिस्ट-कम-प्रोग्रामर (उप निदेशक) एवं तकनीकी प्रमुख श्री संजय माथुर इस आपराधिक षड्यंत्र में सक्रिय रूप से शामिल थे। वे संपूर्ण ओएमआर स्कैनिंग एवं परीक्षा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया के प्रभारी थे और उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए स्कैनिंग टीम व आउटसोर्स फर्म के कार्मिकों से मिलीभगत कर अपने परिचित अभ्यर्थियों को अवैध लाभ पहुंचाया।</p>
<p><strong>फोटोशॉप से बदले गए उत्तर :</strong></p>
<p>जांच में यह भी सामने आया कि अभियुक्तों द्वारा ओएमआर शीट्स की स्कैन कॉपी में फोटोशॉप के माध्यम से सही उत्तर अंकित किए गए और अंकों में अत्यधिक वृद्धि की गई।</p>
<p>उदाहरण के तौर पर, अभियुक्त पूनम माथुर को वास्तविक रूप से लगभग 63 अंक प्राप्त होने थे, जबकि फर्जीवाड़े के माध्यम से उसके 182 अंक दर्शाए गए। इसी प्रकार अन्य कई अभ्यर्थियों के 30 से 50 वास्तविक अंकों को बढ़ाकर 185 से अधिक अंक दिखाए गए।</p>
<p><strong>जांच समिति में ही शामिल कर दिया गया मुख्य आरोपी :</strong></p>
<p>यह तथ्य भी अत्यंत गंभीर पाया गया कि इस फर्जीवाड़े की जांच हेतु राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा गठित प्रशासनिक समिति में ही मुख्य सूत्रधार संजय माथुर एवं प्रवीण गंगवाल को सदस्य बनाया गया, जिससे जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।</p>
<p><strong>गिरफ्तार अभियुक्त :</strong></p>
<p>एसओजी के उप महानिरीक्षक पुलिस परीस देशमुख के पर्यवेक्षण में अनुसंधान अधिकारी यशवंत सिंह द्वारा की गई गहन जांच के बाद निम्नलिखित अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है-</p>
<p>शादान खान<br />विनोद कुमार गौड़<br /> पूनम माथुर<br />संजय माथुर – तत्कालीन उप निदेशक (सिस्टम एनालिस्ट), राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर<br />प्रवीण गंगवाल – प्रोग्रामर, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर</p>
<p><strong>लाखों रुपए की अवैध वसूली :</strong></p>
<p>अनुसंधान से यह भी प्रमाणित हुआ है कि बोर्ड के उक्त कार्मिकों ने न केवल अपने परिचित अभ्यर्थियों को चयनित कराया, बल्कि आउटसोर्स फर्म के कर्मचारियों के माध्यम से अन्य अभ्यर्थियों के परीक्षा परिणामों में कूटरचना करने के बदले लाखों रुपये की अवैध धनराशि भी प्राप्त की।</p>
<p><strong>दर्ज धाराएं :</strong></p>
<p>अब तक के अनुसंधान में अभियुक्तों के विरुद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी, राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 1992 की धारा 3, 5, 6 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 व 84-बी के अंतर्गत अपराध प्रमाणित पाए गए हैं।</p>
<p>एसओजी द्वारा मामले में अनुसंधान लगातार जारी है और आने वाले समय में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना से इंकार नहीं किया गया</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 18:43:13 +0530</pubDate>
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