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                <title>Prashant Bhushan - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Prashant Bhushan RSS Feed</description>
                
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                <title>एमएसपी तय करने की मांग वाली याचिका को लेकर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को भेजा नोटिस, एमएसपी उत्पादन लागत से 50 प्रतिशत होना चाहिए अधिक </title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने एमएसपी निर्धारण को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में मांग की गई है कि फसलों का दाम उत्पादन लागत (C2) से 50% अधिक तय हो। वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि कम एमएसपी और अधूरी खरीद नीति किसानों के संकट और आत्महत्या का मुख्य कारण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-sent-notice-to-the-central-government-regarding-the/article-150215"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/superme-court.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें सरकार को उचित तरीके से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने के लिए निर्देश देने की मांग की गयी है। महाराष्ट्र के किसान प्रकाश गोपालराव पोहरे, पुरुषोत्तम गावड़े और विशाल ओमप्रकाश रावत द्वारा संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में मांग की गई है कि फसलों पर एमएसपी उत्पादन लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक होना चाहिए। इसे तय करते समय संबंधित राज्य सरकारों द्वारा प्रस्तावित खेती की वास्तविक लागत (सी2) को प्रभावी महत्व देना चाहिए।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने इन दलीलों पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि यह मुद्दा देश भर के किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एमएसपी की कमी के कारण बड़ी संख्या में किसानों नेआत्महत्याएं की हैं। भूषण ने कहा कि एमएसपी अक्सर खेती की व्यापक लागत से भी कम दर पर तय किया जाता है और एमएसपी पर खरीद केवल गेहूं और चावल जैसी फसलों के लिए ही महत्वपूर्ण है, जिससे अन्य फसलें उगाने वाले किसान अत्यधिक संकट में हैं। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वर्तमान एमएसपी पद्धति मुख्य रूप से ए2 एफएल (लागत और पारिवारिक श्रम) पर आधारित है, जबकि इसमें भूमि की लागत और कार्यशील पूंजी पर ब्याज को छोड़ दिया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 18:00:28 +0530</pubDate>
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                <title>आखिर क्यों सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम कुत्तों से खुद सर्टिफिकेट लेकर चलने के लिए क्यों नहीं कह सकते? जानें</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को आवारा कुत्तों के आतंक और उनके नसबंदी से जुड़े मामले पर तीखी बहस हुई। बताया जा रहा है कि जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने आवारा कुत्तों के हमलों और नगर निगमों की विफलताओं पर गहरी चिंता व्यक्त की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/after-all-why-did-the-supreme-court-say-that-we/article-140266"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(12).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को आवारा कुत्तों के आतंक और उनके नसबंदी से जुड़े मामले पर तीखी बहस हुई। बताया जा रहा है कि जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने आवारा कुत्तों के हमलों और नगर निगमों की विफलताओं पर गहरी चिंता व्यक्त की।</p>
<p>सी बीच एक वकील ने टिप्पणी देते हुए कहा कि उनके इलाके में कुत्तों का आतंक हमेशा रहता है कभी कुत्ते किसी बच्चे को काटते हैं तो कभी किसी बुजुर्ग को और इतना ही नहीं कुत्ते रात भर शोर करते हैं जिसके कारण उनकी नींद और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। इसके आगे उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय न्याय संहिता के तहत अधिकारियों को 'पब्लिक न्यूसेंस' पैदा करने वाले जानवरों को हटाने का अधिकार है।</p>
<p>जब वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुझाव दिया कि एक ऐसा ऑनलाइन सिस्टम होना चाहिए जहां लोग उन कुत्तों की रिपोर्ट कर सकें जो नसबंदीशुदा नहीं लगते, तो जस्टिस संदीप मेहता ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा— "तो क्या हम अब कुत्तों से यह उम्मीद करें कि वे अपना नसबंदी सर्टिफिकेट साथ लेकर चलें?"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 16:59:41 +0530</pubDate>
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