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                <title>Foreign Institutional Investors - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Foreign Institutional Investors RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>शेयर बाजार पर बढ़ा वैश्विक दबाव, कच्चे तेल की कीमत और पश्चिम एशिया संघर्ष से अगले सप्ताह निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच घरेलू शेयर बाजार सपाट स्तर पर बंद हुए। सेंसेक्स साप्ताहिक गिरावट के साथ 77,540.83 अंक और निफ्टी 24,252 अंक पर रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों और एफपीआई (FPI) गतिविधियों पर रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/global-pressure-on-stock-market-increased-investors-will-keep-an/article-163629"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/share-market4.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। घरेलू शेयर बाजारों में पिछले सप्ताह प्रमूख सूचकांकों में रही गिरावट के बाद आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर वैश्विक कारकों पर रहेगी। इन वैश्विक कारकों में कच्चा तेल और पश्चिम एशिया संघर्ष भी शामिल है। ईरान और अमेरिका के बीच अस्थायी युद्ध विराम की 60 दिन की अवधि समाप्त हो चुकी है और फिलहाल कोई नया समझौता नहीं हो सका है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम एक बार फिर 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गये हैं।</p>
<p>बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स पहले तीन दिन गिरावट में रहा। गुरुवार को इसमें तेजी रही जबकि शुक्रवार को यह लगभग सपाट बंद हुआ। सेंसेक्स 468.42 अंक (0.60) प्रतिशत की साप्ताहिक गिरावट में शुक्रवार को 77,540.83 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी सप्ताह के दौरान 114 अंक यानी 0.48 प्रतिशत नीचे 24,252 अंक पर रहा। प्रमुख सूचकांकों के विपरीत वृहत बाजारों में साप्ताहिक बढ़त देखी गयी। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.33 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 1.21 प्रतिशत ऊपर रहा।</p>
<p>बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (अनुसंधान) पबित्रो मुखर्जी ने बताया कि आलोच्य सप्ताह में विदेशी संस्थागत निवेशक शुद्ध रूप से बिकवाल रहे जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में पैसा लगाया। सप्ताह के दौरान एफपीआई का निवेश 16.02 अरब रुपये घट गया। गत सप्ताह सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 18 के शेयरों में साप्ताहिक गिरावट रही। इंफोसिस का शेयर 4.20 प्रतिशत लुढ़क गया। इंडिगो में 4.18 फीसदी, एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 4.12, हिंदुस्तान यूनीलिवर में 3.46 और टेक महिंद्रा में 3.16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी।</p>
<p>सप्ताह के दौरान, आईटीसी का शेयर 2.81 फीसदी, टीसीएस का 2.59, एशियन पेंट्स का 2.58, भारती एयरटेल और ट्रेंट दोनों का 2.26, भारतीय स्टेट बैंक का 2.12 और मारुति सुजुकी का 2.06 प्रतिशत टूटा। अल्ट्राटेक सीमेंट का शेयर 1.40 प्रतिशत, सन फार्मा का 1.25, महिंद्रा एंड महिंद्रा का 0.64, टाटा स्टील का 0.44, एनटीपीसी का 0.28 और बजाज फिनसर्व का 0.07 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। इटरनल में सबसे अधिक 3.02 प्रतिशत की साप्ताहिक तेजी रही। कोटक महिंद्रा बैंक का शेयर 2.49 फीसदी, एक्सिस बैंक का 2.37 और पावरग्रिड का 2.18 प्रतिशत चढ़ा। बीईएल में 0.76 फीसदी, एलएंडटी में 0.62, बजाज फाइनेंस में 0.51, रिलायंस इंडस्ट्रीज में 0.46, अडानी पोर्टस में 0.12, आईसीआईसीआई बैंक में 0.07 और टाइटन तथा एचडीएफसी बैंक दोनों में 0.02 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गयी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 13:32:43 +0530</pubDate>
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                <title>रुपये में एतिहासिक गिरावट: ग्रीनलैंड विवाद के कारण रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 91.29 पर फिसला, वैश्विक ट्रेड वॉर का बढ़ा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय रुपया बुधवार को अब तक के सबसे निचले स्तर पर गिर गया, क्योंकि ग्रीनलैंड विवाद से जुड़े जोखिम से बचने की प्रवृत्ति ने लगातार पूंजी बहिर्वाह और अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की अनुपस्थिति से पड़ने वाले दबाव को और बढ़ा दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/historic-fall-in-rupee-due-to-greenland-dispute-rupee-slips/article-140326"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(3)31.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। भारतीय रुपया बुधवार, 21 जनवरी 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। वैश्विक 'जोखिम से बचने' की प्रवृत्ति और ग्रीनलैंड विवाद के कारण रुपया अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में 91.29 के रिकॉर्ड स्तर तक लुढ़क गया।</p>
<p><strong>गिरावट के मुख्य कारक</strong></p>
<p>मुद्रा विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये पर इस समय तिहरी मार पड़ रही है। बताया जा रहा है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने जनवरी में अब तक करीब $3 बिलियन की निकासी की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय संघ पर 10% से 25% टैरिफ लगाने की धमकी से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता है। इसके अलावा भारत-अमेरिका के बीच किसी ठोस व्यापार समझौते की कमी ने भी निवेशकों के भरोसे को कम किया है।</p>
<p><strong>RBI का रुख</strong></p>
<p>हालांकि आरबीआई ने 91 के स्तर को बचाने के लिए डॉलर की बिक्री की है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक केवल गिरावट की गति को धीमा कर रहा है, उसकी दिशा नहीं बदल रहा। यदि वैश्विक तनाव बना रहता है, तो रुपया जल्द ही 92 के स्तर को देख सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jan 2026 12:22:44 +0530</pubDate>
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