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                <title>आधी सड़क पर अतिक्रमण, कैसे निकले आमजन</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। गुलाबी नगर को मेट्रो शहरों में गिना जाता है, लेकिन हालात तो कुछ ओर ही बयां करते हैं। स्टेशन रोड पर सिंधीकैम्प के सामने और आसपास निजी बस संचालक सड़क पर काउंटर तथा छतरियां लगाकर टिकट बेचते हैं। आधी सड़क पर कतारबद्ध निजी बसों को जमावड़ा रहता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/encroachment-on-half-the-road-how-the-common-people-came/article-13079"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/atikraman.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गुलाबी नगर को मेट्रो शहरों में गिना जाता है, लेकिन हालात तो कुछ ओर ही बयां करते हैं। स्टेशन रोड पर सिंधीकैम्प के सामने और आसपास निजी बस संचालक सड़क पर काउंटर तथा छतरियां लगाकर टिकट बेचते हैं। आधी सड़क पर कतारबद्ध निजी बसों को जमावड़ा रहता है। बसों में लोडिंग के लिए सामान और होटलों के होर्डिंग सड़क पर रखते हैं। वहीं खाने-पीने के सामान के ठेले भी यहां सड़क किनारे ही लगते हैं। यहां हमेशा जाम के हालात बने रहते हैं। इससे यात्री और आमजन को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिम्मेदार प्रशासन इन पर कार्रवाई के नाम पर कुछ दिन सख्त होता है बाद में हालात जस के तस हो जाते हैं। सिंधीकैंप बस स्टैंड के सामने सड़कों पर अवैध तरीके से टिकट काउंटर और बस लगाकर अतिक्रमण कर रखा है। इसके चलते आमजन को आवाजाही में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सिंधीकैंप बस स्टैंड के बाहर की सड़क को तत्कालीन जिला कलेक्टर राजेश्वर सिंह ने 2006 में नो पार्किंग जोन घोषित किया था। इसके बावजूद भी यहां दिनभर अवैध तरीके से निजी बसों का जमावड़ा रहता है। वहीं आधी सड़क पर टिकट काउंटर लगे हुए हैं, इनकी वजह से यहां जाम लगता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jun 2022 12:37:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रोडवेज बसों का टोटा: खटारा पड़ी बसों में कैसे करे सफर?</title>
                                    <description><![CDATA[ जिले में रोडवेज बसों की परिवहन व्यवस्था लचर अवस्था में है।  रोडवेज बसों की कमी के चलते कई प्रमुख रूटों पर बसों का संचालन ठप पड़ा है। वर्षों से रोडवेज डिपो में बसों का टोटा बना हुआ है। 10 बसें खटारा पड़ी है। इसके साथ ही डिपो के 35 रोडवेज ड्राइवर और 43 परिचालकों के पद रिक्त पड़े है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/shortage-of-roadways-buses--how-to-travel-in-bad-buses/article-11925"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/roadways-3.jpg" alt=""></a><br /><p>बारां । जिले में रोडवेज बसों की परिवहन व्यवस्था लचर अवस्था में है।  रोडवेज बसों की कमी के चलते कई प्रमुख रूटों पर बसों का संचालन ठप पड़ा है। वर्षों से रोडवेज डिपो में बसों का टोटा बना हुआ है। 10 बसें खटारा पड़ी है। इसके साथ ही डिपो के 35 रोडवेज ड्राइवर और 43 परिचालकों के पद रिक्त पड़े है। यातायात निरीक्षक सहित 27 अन्य पद खाली होने से रोडवेज बसों की आकस्मिक चैकिंग आदि रूटिन के काम भी प्रभावित हो रहे है। डिपो में लगातार बार-बार मांग उठने के बाद बीते कई वर्षों में बसों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है, जिसके चलते जिले के लोकल रूटों पर यात्री निजी वाहनों के भरोसे हैं।बारां रोडवेज बस डिपो पर आधा दर्जन से ज्यादा बसें कंडम घोषित हो चुकी हैं। फिलहाल 64 बसें चल रही हैं, जबकि डिपो में 130 बसों की आवश्यकता है। इनमें से 15 बसें अनुबंधित स्कीम के तहत चल रही हैं। 42 बसें निगम की है। 10 रोडवेज बसे खटारा पड़ी है।<br /><br /><strong> चालक और परिचालक के पद खाली पड़े</strong><br />बारां बस डिपो पर स्टाफ की संख्या भी बेहद कम है। डिपो पर मौजूद बसों के लिए 79 ड्राइवर उपलब्ध हैं, जबकि डिपो पर 36 चालकों के पद खाली पड़े है। डिपो पर परिचालक भी पूरी मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। फिलहाल 71 परिचालक डिपो पर उपलब्ध हैं, जबकि 43 परिचालकों की कमी है। इसके साथ ही स्टॉफ के यातायात निरीक्षक के 3, सहायक यातायात निरीक्षक के 4 सहित 27 अन्य पद भी खाली पड़े है। ऐसे में रोडवेज बसों की आकस्मिक चैकिंग, बेटिकिट यात्रियों पर आकस्मिक जांच करने आदि काम भी प्रभावित हो रहे है।<br /><br /><strong>प्राइवेट वाहन चालक करते हैं मनमानी</strong><br />सरकारी रोडवेज बसों की संख्या कम होने के कारण मजबूरी में लोगों को प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। रोडवेज बसों की संख्या कम होने का प्राइवेट वाहन चालक जमकर फायदा उठाते हैं। यह चालक नियमों को ताक पर रखकर ज्यादा सवारियों को वाहनों में बैठाकर हादसों को न्यौता देते हैं।<br /><br /><strong>लोकल रूटों पर पड़ रहा है असर</strong><br />रोडवेज की बसों की कमी का सबसे ज्यादा असर लोकल रूटों पर पड़ रहा है। शाम पांच बजे के बाद तो रोडवेज बसों का लोकल रूटों पर दिखना ही बंद हो जाता है। नौकरीपेशा और कोटा में पढ़ने वाले छात्रों को इसका सबसे अधिक खामियाजा भुगतना पड़ता है।रोडवेज बस स्टैंड पर बना शौचालय भी क्षतिग्रस्त हो गया है, जिसके चलते यात्रियों को 5 से 10 में सुलभ शौचालय का सहारा लेना पड़ता क्षतिग्रस्त बिल्डिंगों में बैठने को मजबूर है। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong> <br />शाम को नौकरी से लौटते समय मुझे अक्सर कवाई के लिए  रोडवेज की बसें नहीं मिलती हैं। जिस कारण मजबूरी में प्राइवेट वाहनों का रुख करना पड़ता है।    <br /><strong> -भावेश एरवाल,बारां जिला अस्पताल टेक्नीशियन</strong><br /><br />हमें जब मुंबई के लिए जाना होता है तो रोडवेज बस से नहीं मिल पाती है जिसके चलते हमें निजी बसों व ट्रेन का सहारा लेकर जाना पड़ता है जहां निजी बसों व ट्रेनों का घंटों तक इंतजार करना पड़ता है।<br /><strong> -अब्दुल रईस</strong> <br /><br />बारां बस डिपो में बसों और स्टाफ की संख्या आवश्यकता के अनुसार कम है। इसके लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। उम्मीद है कि जल्दी इस समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।<br /><strong>-सुनीता जैन, मुख्य प्रबंधक बारां रोडवेज डिपो</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 16:07:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>परमाणु हमले के खतरे ने बढ़ाई न्यूक्लियर बंकर की डिमांड,  जाने  कैसे काम करता है न्यूक्लियर बंकर</title>
                                    <description><![CDATA[ रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में पूरी दुनिया के लिए परमाणु बम एक बड़ा खतरा बना हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/--threat-of-nuclear-attack-increased-the-demand-for-nuclear-bunker--know-how-nuclear-bunker-works/article-9034"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/eastern-europe-1-mobilemaster.jpg" alt=""></a><br /><p>लंदन। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में पूरी दुनिया के लिए परमाणु बम एक बड़ा खतरा बना हुआ है। परमाणु बमों से सिर्फ न्यूक्लियर बंकर ही बचा सकता है। न्यूक्लियर युद्ध के खतरे से लोग इस कदर डरे हैं कि यूरोप में परमाणु बंकरों की डिमांड में बड़ा उछाल देखने को मिला है। लोगों को इस बात का अंदेशा है कि रूस किसी भी वक्त परमाणु बम से भरे रॉकेट को लॉन्च कर देगा। टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक बंकर बनाने वाली कंपनियों ने कहा है कि जर्मनी, स्विटजरलैंड, फ्रांस और यूके के नागरिक न्यूक्लियर बंकर खरीदने और उनके निर्माण से जुड़ी जानकारी मांग रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि लगातार यूक्रेन युद्ध में रूस पश्चिमी देशों को न्यूक्लियर स्ट्राइक की चेतावनी दे रहा है। दो महीन से जारी जंग में यूरोप और अमेरिका में कुछ लोगों को इस बात का डर है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन किसी भी वक्त दूसरे देशों को निशाना बनाने के लिए परमाणु हमला कर सकते हैं। स्विटजरलैंड में न्यूक्लियर बंकर बनाने और रिपेयर करने वाली एक कंपनी ने बताया कि मार्च की शुरूआत में लोग बेहद डरे हुए थे। <br /><br />वह तुरंत मदद मांग रहे थे। रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद तो डिमांड तेजी से बढ़ी है। यूके की एक फर्म ने भी बताया कि बंकर की डिमांड पिछले साल की तुलना में दोगुनी हो गई है। जर्मनी की एक कंपनी ने बताया कि देश में 599 पब्लिक शेल्टर हैं। हम इसे अपग्रेड करने का तरीका खोज रहे हैं। यूरोप के साथ ही अमेरिका में भी इसका खतरा बरकरार है और वहां भी न्यूक्लियर बंकर की डिमांड बढ़ी है।</p>
<p><br /><strong>कैसे काम करता है न्यूक्लियर बंकर</strong><br />न्यूक्लियर बम के कारण एक बड़ा धमाका होता है। अगर इसके सीधे संपर्क में कोई आ जाए तो उसे यह पता भी नहीं चलेगा कि वह कब राख बन गया। इन धमाकों के बाद सबसे खतरनाक चीज रेडिएशन होती है। इसी से बचने के लिए बंकर बनाए जाते हैं जो जमीन के नीचे बने घर की तरह होते हैं। इनकी दीवारें मोटी कंक्रीट से बनी होती हैं, ताकि रेडिएशन न पहुंचे। बंकरों में आॅक्सीजन और खाने-पीने की व्यवस्था रखी जाती है, क्योंकि धमाके के कई दिनों बाद तक उसी में रहना होगा। कोल्ड वार के समय बड़ी संख्या में न्यूक्लियर बंकर बने थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 May 2022 15:08:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पूरी पेंशन खर्च कर गणेश मंदिर बनवाया चौकीदार रहमान ने</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के चमराजानगर के चिखोले रिजर्व में एक मुस्लिम चौकीदार के अपनी पेंशन की रकम से मंदिर बनवाने की चर्चा हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/chowkidar-rahman-got-ganesh-temple-built-by-spending-full-pension-said---god-is-one--then-how-is-the-difference/article-7804"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ganesh-mandir.jpg" alt=""></a><br /><p>चमराजानगर। कनार्टक में जब धार्मिक आधार पर नफरत की आग भड़कने लगी है तब एक मुसलमानों के हाथों भगवान गणेश का मंदिर बनने की घटना अपने आप में बहुत राहत देने वाली है। कर्नाटक के चमराजानगर के चिखोले रिजर्व में एक मुस्लिम चौकीदार के अपनी पेंशन की रकम से मंदिर बनवाने की चर्चा हो रही है। पी. रहमान ने कहा कि उन्हें दिव्य शक्तियों ने मंदिर बनवाने का निर्देश उनके सपने में दिया था। उन्होंने उन्हीं निदेर्शों का पालन किया है। रहमान ने नासिर्फ मंदिर बनवाया है बल्कि उन्होंने मंदिर में एक पुजारी भी नियुक्त किया है जिसे वह हर महीने अपनी जेब से चार हजार रुपए का वेतन भी देते हैं। वह हर हफ्ते सोमवार और शुक्रवार को वहां पूजा के लिए फूलों और अन्य पूजन सामग्री की व्यवस्था भी करते हैं। पूजा के बाद रहमान प्रसादम का भी वितरण करते हैं।</p>
<p> </p>
<p>जब रहमान से आजकल के माहौल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह नहीं समझ पा रहे कि लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं। रहमान कहते हैं कि मनुष्यों में केवल पुरुष और महिला का अंतर है। बाकी सब तो एक ही हैं। उन्होंने कहा कि चार साल पहले यह मंदिर बनवाया था। इससे बनाने के लिए मैंने अपनी पेंशन खर्च कर दी, लेकिन परिवार ने कभी विरोध नहीं किया। मेरे समुदाय के लोगों को भी इस बात से कोई परेशानी नहीं है कि मैं हिंदू भगवान की पूजा क्यों करता हूं या मैंने क्यों मंदिर बनवाया है। रहमान का कहना है कि इंसान के तौर पर हिंदू और मुस्लिम में कोई अंतर नहीं है। हमारा एक ही खून है। चिक्काहोल बांध के पास एक शिलाखंड पर एक मूर्ति थी जो चोरी हो गई। मैंने स्थानीय संतों से परामर्श किया और भगवान गणेश की मूर्ति लाने के लिए तमिलनाडु गया। ईश्वर एक है। उनके सच्चे भक्त इसके लिए अंतर नहीं करते हैं कि मंदिर एक मुसलमान की ओर से बनाया जा रहा है। मुझे समझ नहीं आता कि अचानक से कलह क्यों हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Apr 2022 16:01:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>स्वास्थ्य दिवस पर आइए जानें कैसी है हेल्थ सिस्टम की सेहत</title>
                                    <description><![CDATA[अभी कुल 52 हजार डॉक्टर, सात सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ही सालाना 1.76 करोड़ मरीज ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--news--on-health-day--let-s-know-how-is-the-health-of-the-health-system-lack-of-20-thousand-doctors-in-the-state--16-thousand-government-doctors-are-treating-9-crores/article-7512"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/health.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:left;"> जयपुर। राजस्थान की वर्तमान आबादी तकरीबन 7.25 करोड़ है। इनके स्वास्थ्य को ठीक रखने का जिम्मा प्रदेश के सरकारी और प्राइवेट मिलाकर करीब 52 हजार डॉक्टरों (राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड) पर है। आदर्श स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अभी भी 20 हजार और डॉक्टरों की जरूरत है, क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन मानता है कि बेहतर हेल्थ मैनजमेंट को प्रति एक हजार की आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए। राजस्थान में 1538 की आबादी पर एक डॉक्टर है। प्रदेश का बड़ा तबका सरकारी अस्पतालों पर ही निर्भर है। हालांकि प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा महकमे में तीन हजार से ज्यादा डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। यदि पूरे पद भी भर दिए जाएं तब भी बड़ी संख्या में और डॉक्टर चाहिए, क्योंकि सरकार के सात मेडिकल कॉलेज और 2863 अस्पतालों में करीब 16 हजार ही डॉक्टर हैं। इन्होंने बीते साल करीब 9 करोड़ बीमार होकर आने वाले लोगों यानी आबादी से 1.75 करोड़ से अधिक लोगों का इलाज किया। आंकड़े चिंता में इसलिए डालते हैं कि गंभीर मरीजों के इलाज के लिए बने सरकार के सातों मेडिकल कॉलेजों में केवल 3169 ही बड़े डॉक्टर (मेडिकल टीचर्स) हैं। बीते साल इन अस्पतालों में इलाज को 1.76 करोड़ से अधिक मरीज पहुंचे थे। इनमें भी सर्जरी के एक्सपर्ट तकरीबन 10 फीसदी ही हैं, जिन्होंने 4.38 लाख ऑपरेशन कर मरीजों को नई जिंदगी दी। <br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>विश्व स्वास्थ्य दिवस </strong></span><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>प्रदेश में अभी 1349 मरीजों पर एक डॉक्टर</strong></span><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>5 साल में WHO के मुताबिक होंगे डॉक्टर</strong></span></p>
<table style="width:778px;">
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;width:773px;" colspan="2"><span style="background-color:#cc99ff;color:#000080;"><strong>सरकार की मुफ्त इलाज और नीरोगी राजस्थान की मुहिम</strong></span></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;"> सरकारी अस्पतालों में मरीजों का भार कम करने और प्राइवेट अस्पताल की मुफ्त सेवाओं को चिंरजीवी बीमा से 1.33 करोड़ परिवार बीमित हैं। ये 10 लाख तक का इलाज पर 714 करोड़ रुपए बीमा राशि से हुए।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;">सभी सरकारी अस्पतालों में इलाज पूरी तरह फ्री कर दिया गया है। अस्पतालों में इस साल 150 से अधिक जांचें हुई, जिनमें 10 हजार तक की मुफ्त जांचें।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;"> अस्पताल में मौजूदा 969 मुफ्त दवाओं के अतिरिक्त बाहर से महंगी दवा आने का खर्चा भी सरकार उठा रही।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;">अब तक 30 जिलों में केन्द्र की मदद से 23 मेडिकल कॉलेज मंजूर।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;"> डॉक्टरों की उपलब्धता के लिए प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की जल्द नीति आएगी।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;">राइट टू हेल्थ कानून लागू होने जा रहा है।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;">कुल बजट का सात फीसदी हेल्थ पर खर्च, एनएचएम के तहत 4358.78 करोड़ रुपए केन्द्र दे रहा।</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table style="width:778px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:774px;" colspan="2"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>बीते साल कितने मरीजों का इलाज हुआ</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:774px;" colspan="2"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>सात सरकारी मेडिकल कॉलेजों में</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41.5px;">
<td style="height:41.5px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41.5px;width:715.3px;"> 1,76,42,822 मरीज ओपीडी में</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41px;width:715.3px;">1,31,67,576 मरीज भर्ती हुए</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41px;width:715.3px;"> 4,38,915 ऑपरेशन हुए।</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;" colspan="2"><span style="background-color:#cc99ff;color:#000080;"><strong>8 राजसैम व सोसायटी मेडिकल कॉलेज में 90 लाख मरीज</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;" colspan="2"><span style="background-color:#ccffff;color:#993300;"><strong>2863 अस्पताल</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41px;width:715.3px;">ओपीडी में 6.45 करोड़</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41px;width:715.3px;">भर्ती हुए 70 लाख</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align:left;"> </p>
<p style="text-align:left;">824 डॉक्टरों की जल्द भर्ती कर रहे हैं। जिलों में अस्थायी आधार पर डॉक्टर रखने के आदेश हाल ही में दिए हैं। वहीं एक हजार अधिशेष डॉक्टरों को भी जिन जगह डॉक्टर नहीं है, वहां भेजा जा रहा है।  राजमैस के तहत संचालित मेडिकल कॉलेज में मेडिकल टीचर्स की अस्थाई भर्ती की रियायत दी है।  अस्पतालों में पूरी तरह से इलाज फ्री कर दिया गया है। चिरंजीवी से प्राइवेट की भी सेवाएं 1.33 करोड़ परिवार ले सकते हैं। ऐसी योजनाएं लाएं है कि हेल्थ पर जनता की जेब अब ढीली नहीं होगी। - <strong>परसादी लाल मीणा, चिकित्सा मंत्री, राजस्थान    </strong></p>
<table style="width:708px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="text-align:center;height:41px;width:703px;" colspan="3"><span style="background-color:#ffcc99;color:#ff6600;"><strong>हमारा हेल्थ सिस्टम</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:112.1px;" rowspan="4">
<p style="text-align:left;"><span style="background-color:#ccffcc;color:#008000;"><strong>इलाज की क्षमता</strong></span></p>
<p style="text-align:left;"><strong>मेडिकल कॉलेज में भर्ती की क्षमता 24,517, अन्य सरकारी अस्पतालों में 60 हजार</strong></p>
</td>
<td style="height:41px;width:550.9px;" colspan="2">
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>16 मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में</strong></span></p>
<p><strong>01. सात सरकारी मेडिकल कॉलेज , झालावाड़ में सोसायटी द्वारा संचालित,  7 राजसैम से जिलों में संचालित, 1 अलवर में ईएसआई संचालित</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:41.5667px;">
<td style="height:41.5667px;width:550.9px;" colspan="2">
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>2863 अस्पताल</strong></span></p>
<p><strong>02. 29 जिला,32 सब डिविजनल, 649सीएचसी, 2153 पीएचसी, (13779 सब सेंटर अलग)</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:550.9px;" colspan="2">
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>डॉक्टर</strong></span></p>
<p><strong>03. 12500 चिकित्सा विभाग,  3169 मेडिकल कॉलेज टीचर्स,  805 सीनियर रेजीडेंट्स डॉक्टर <br /></strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:550.9px;" colspan="2">
<p style="text-align:left;"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>रिक्त पद </strong></span></p>
<p style="text-align:left;"><strong>04. 633 मेडिकल टीचर्स, 2500 डॉक्टर,  30हजार पैरामेडिकल स्टाफ, 66 हजार नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ, 52 हजार आशा सहयोगिनियां</strong></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table style="width:602px;">
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:left;width:600px;" colspan="2"><span style="background-color:#ffcc99;color:#ff6600;"><strong> नि: शुल्क दवा और जांच</strong></span></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">4 हजार निशुल्क दवा वितरण केंद्र: 8.58 करोड़ मरीजों को दी मुफ्त दवा, 760 करोड़ रुपए खर्च।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">3 हजार से ज्यादा अस्पताल: 4.4 करोड़ जांचे हुई, 100 से ज्यादा मुफ्त जांच,  150.34 करोड़ खर्च।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">अब मंहगी एमआरआई, सीटी स्कैन,  डायलिसिस सहित सभी फ्री होंगे।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">डॉक्टर की जरूरत जल्द पूरी होने की आस, अभी 4200 डॉक्टर बन रहे है, जल्द 7000 तक मिलने लगेंगे।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">3 साल पहले 8 मेडिकल कॉलेज:  जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर, कोटा, झालावाड़ और जयपुर में आरयूएचएस थे, कुल सीटें 1900।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">अब नए 7 नए मेडिकल कॉलेज और शुरू: भरतपुर, भीलवाड़ा, चूरू, डूंगरपुर, पाली, बाड़मेर, सीकर कुल सीटें 980।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">
<p style="text-align:left;">नए प्रस्तावित कॉलेज: 15 को मंजूरी, 2023 तक शुरू होंगे।</p>
<p style="text-align:left;">तीन जिलों में जंहा और कॉलेज की कवायद: राजसमंद, जालौर, प्रतापगढ़।</p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align:left;"> </p>
<p style="text-align:left;"> </p>
<p> </p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p> </p>
<p style="text-align:left;"> </p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong>     <br />    <br />   <br />    <br />   <br />    <br />    <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 10:33:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खेल मैदान दुर्दशा के शिकार फिर कैसे निखरेगी प्रतिभाएं ?</title>
                                    <description><![CDATA[खेल मैदानों में किसी प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके चलते यह खेल मैदान कागजी रिकॉर्ड में मात्र सिमट कर रह गए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/the-playing-field-plight-of--how-will-the-talents-shine/article-7008"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/untitled-1.jpg" alt=""></a><br /><p>राजपुर।  एक और तो सरकार ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं में निखार लाने के लिए तरह तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने और खेल मैदान आवंटित कर रखे हैं लेकिन खेल मैदान दुर्दशा के शिकार हो रहे हैं। खेल मैदानों में किसी प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके चलते यह खेल मैदान कागजी रिकॉर्ड में मात्र सिमट कर रह गए हैं। वही जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि प्रस्ताव बनाकर भेज रखा है जैसे ही बजट आ जाएगा तो खेल मैदान में सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी लेकिन लंबे समय से यह खेल मैदान अपनी दुर्दशा के आंसू रो रहा है और ग्रामीण क्षेत्र की खेल प्रतिभाएं आगे बढ़ने के लिए तरस रही है। <br /><br />राजपुर गणेशपुरा ग्राम पंचायत के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए खेल मैदान की भूमि आवंटित कर संकेत बोर्ड तो लगा दिये है लेकिन खेल मैदान में सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं में निखार नहीं आ पा रहा है। खेल मैदान में कांटेदार झाड़ियां उगी हुई है। मैदान समतलीकरण नहीं है। बाउंड्रीवाल और पानी की व्यवस्था भी नहीं है।  ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों में रोष बना हुआ है। क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों ने खेल मैदान को दुरुस्त और सर्व सुविधा युक्त करने की मांग की है ताकि ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं में निखार आए।<br /><br /><strong> उगी हुई है कांटेदार झाड़ियां, साफ सफाई का अभाव....</strong><br /> आदिवासी अंचल क्षेत्र के अधिकांश स्थानों पर खेल मैदान बने हुए हैं इन खेल मैदानों में किसी प्रकार की सुविधाएं नहीं है। सिर्फ संकेत बोर्ड लगे हुए हैं जो खेल मैदान होने की गवाही देते हैं बाकी कहीं खेल मैदानों पर अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया गया है या फिर कांटेदार झाड़ियों और गंदगी अटी पड़ी है तो कई खेल मैदानों में मिट्टी की खदान बन चुकी है। ऐसे में गांव के ग्रामीण खिलाड़ियों को काफी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। खेल मैदान की जगह तो है लेकिन खेल मैदान में सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में खिलाड़ियों को इधर-उधर खेलना पड़ता है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों से खेल प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं अगर खेल मैदानों की प्रशासन सुध ले तो ग्रामीण क्षेत्रों से खेल प्रतिभाएं आगे बढ़ सकती हैं।<br /><br />खेल मैदान में किसी प्रकार की सुविधाएं नहीं है। काटेदार झाड़ियां उगी भी हैं। बाउंड्रीवाल नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं में निराशा है जिम्मेदारो को इस ओर ध्यान देना चाहिए ताकि ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं में निखार आए।- नीलेश ओझा, खेल प्रेमी।     <br /><br />खेल मैदान बदहाली के आंसू रो रहे हैं। कागजी रिकॉर्ड में खेल मैदान दर्शा रखे हैं, लेकिन खेल मैदान की स्थिति बदहाल है। खेल मैदानों में सुविधाएं उपलब्ध कराना चाहिए ताकि खिलाड़ियों को परेशानी ना हो।  - सागर सोनी, क्रिकेट खिलाड़ी।<br />     <br />अगर खेल मैदान सुविधा युक्त हो तो ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को भी प्रतिभा में निखार लाने के लिए परेशानी ना हो खेलने के लिए खिलाड़ियों को इधर-उधर नहीं भटकना पड़े। खेल मैदानों पर ध्यान देना चाहिए। - शत्रुघ्न भार्गव, युवा खिलाड़ी।<br />     <br />खेल मैदानों की स्थिति को दुरुस्त करना चाहिए ताकि ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को खेलने में असुविधा ना हो और खेल प्रतिभाओं में निखार आए और युवा पीढ़ी स्वस्थ रहे। मैदानों की स्थिति को लेकर जिम्मेदारों को ध्यान देना चाहिए। - विकास बंसल, अग्रवाल समाज अध्यक्ष, राजपुर।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Mar 2022 16:24:09 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हाल-ए-एसएमएस अस्पताल... जरूरत 350 सीसीटीवी की, काम कर रहे हैं 70 कैमरे</title>
                                    <description><![CDATA[130 कैमरे लगे, लेकिन किसी काम के नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/hall-e-sms-hospital----needed-350-cctv-cameras--70-cameras-working--how-will-the-crime-stop--the-third-eye-is-only-four-times-worse--the-criminals-commit-the-crime-to-the-victim-of-the-disease-manifold-pain/article-6934"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/sms.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। प्रदेश ही नहीं, बल्कि आसपास के कई राज्यों के मरीजों का भार संभाल रहा सवाई मानसिंह अस्पताल खुद लचर सुरक्षा व्यवस्था जैसी बड़ी बीमारी से ग्रसित है। यहां दूरदराज से ज्यादातर गरीब तबके के मरीज इलाज के लिए आते हैं, लेकिन यहां उन्हें कभी जेब कटने, मोबाइल चोरी होने तो कभी वाहन चोरी होने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में मरीज के परिजनों और डॉक्टर्स तथा अन्य स्टाफ के साथ ऐसी घटनाएं अब आम हो गई हैं। इसके बाद भी अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा।</p>
<table style="width:602px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:64.3333px;height:41px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:535.667px;height:41px;"> 130 कैमरे लगे, लेकिन किसी काम के नहीं</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:64.3333px;height:41px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:535.667px;height:41px;">पुलिस ने एसएमएस प्रशासन को सौंपा वाहन और मोबाइल चोरी रोकने का मास्टर प्लान</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:64.3333px;height:41px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:535.667px;height:41px;"> सुरक्षा में तैनात गार्ड भी नाकाफी, 300 गार्ड भी हैं कम</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><span style="color:#ff0000;background-color:#ffff99;"><strong>एक नजर में वारदात</strong></span><br />पुलिस की ओर से तैयार रिपोर्ट की बात करें तो 18 अगस्त, 2021 से लेकर 31 दिसम्बर, 2021 तक कुल 512 मोबाइल और 52 बाइक चोरी हुई। वहीं 2022 में एक जनवरी, 2022 से लेकर 21 फरवरी तक 150 मोबाइल और 15 बाइक चोरी हुई। एसएमएस के गेट नम्बर एक से लेकर 6 नम्बर के बीच में सबसे ज्यादा वाहन चोरी होते हैं। चोर मास्क लगाकर आते हैं और आसानी से वारदात करते हैं। मास्क से भी पुलिस को वाहन चोर पकड़ने में मशक्कत करनी पड़ती है।</p>
<table style="width:602px;">
<tbody>
<tr>
<td style="width:599px;text-align:center;" colspan="2"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>वर्तमान में सुरक्षा व्यवस्था</strong></span></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:66.2667px;">1.</td>
<td style="width:532.733px;">करीब 200 सीसीटीवी लगे हैं, जिनमें से 70 कैमरे ही काम कर रहे हैं।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:66.2667px;">2.</td>
<td style="width:532.733px;">अस्पताल के मुख्य द्वारों पर कोई भी कैमरा और गार्ड नहीं हैं।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:66.2667px;">3.</td>
<td style="width:532.733px;">वर्तमान में एसएमएस की सुरक्षा के लिए निजी कम्पनी के 423 गार्ड हैं। इसके साथ ही 56 गार्ड एक्स-आर्मी मैन हैं।</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table style="width:602px;">
<tbody>
<tr>
<td style="width:74.3333px;text-align:center;" colspan="2"><strong><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;">यह होना चाहिए</span></strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:74.3333px;">1.</td>
<td style="width:525.667px;">पूरे अस्पताल की सुरक्षा के हिसाब से 350 सीसीटीवी अतिआवश्यक हैं।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:74.3333px;">2.</td>
<td style="width:525.667px;">हाल में तैनात गार्ड के अलावा 100 गार्ड्स की और तैनाती की जाए तो सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता हो सकती है।</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>सबसे ज्यादा भीड़ वहां भी सुरक्षा नहीं</strong></span><br />हर रोज एसएमएस के गेट नम्बर-4 जहां धनवंतरी ओपीडी है यहां पर सबसे ज्यादा भीड़ आती है। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार यहां पर गार्ड और सीसीटीवी कैमरे नहीं है। इसी गेट पर महावीर विकलांग समिति है, जिसके बाहर गार्ड व सीसीटीवी कैमरे नहीं है।<br /><br />अस्पताल में कैमरों और गार्ड की संख्या जल्द ही बढ़ाई जाएगी। पुलिस प्रशासन से भी बात हो गई है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर मरीजों और स्टाफ के साथ हो रही चोरी की घटनाओं पर लगाम लगाने का पूरा प्रयास किया जाएगा। <br />-<strong>डॉ. विनय मल्होत्रा, अधीक्षक, एसएमएस अस्पताल</strong><br /><br />एसएमएस में हो रही वाहन चोरी, मोबाइल छीनने और पर्स निकालने जैसी वारदातों को रोकने के लिए एक प्लान एसएमएस प्रशासन को सौंपा है, इसमें हर वारदात के हॉट स्पॉट को बताते हुए उन्हें रोकने के सुझाव भी दिए हैं। यदि यह प्लान लागू होता है तो काफी हद तक वारदातें रोकी जा सकेंगी। <br />-<strong>नवरतन धौलिया, थाना प्रभारी, एसएमएस</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Mar 2022 12:56:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> गैजेट्स का अधिक इस्तेमाल कितना हानिकारक -एक्सपर्ट्स  </title>
                                    <description><![CDATA[अगर आप महिला हैं और आपको भी स्क्रीन देखने की लत हो चुकी है तो आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि इसका खामियाजा आपके साथ आपके बच्चों को भी उठाना पड़ सकता है,क्योंकि गैजेट्स का अधिक इस्तेमाल आप को देखकर बच्चे जरूर सीखेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/how-harmful-is-the-excessive-use-of-gadgets---experts/article-6372"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/gadgets.jpg" alt=""></a><br /><p>अगर आप महिला हैं और आपको भी स्क्रीन देखने की लत हो चुकी है तो आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि इसका खामियाजा आपके साथ आपके बच्चों को भी उठाना पड़ सकता है,क्योंकि गैजेट्स का अधिक इस्तेमाल आप को देखकर बच्चे जरूर सीखेंगे।<br /><br />आज के डिजिटल दौर में शायद ही कोई हो जो इन गैजेट्स का इस्तेमाल न कर रहा हो। चाहे घंटों नेटफ्लिक्स देखना हो, कंप्यूटर या लैपटॉप पर सारा दिन काम करना हो, वीडियो गेम्ज या फिर मोबाइल पर गेम या सोशल मीडिया देखना ही क्यों न हो। हम सभी अपने दिन का अच्छा ख़ासा वक्त स्क्रीन को देखते हुए गुजारते हैं।</p>
<p><br /><strong>हाल ही में हुई रिसर्च</strong> <br /> 70 प्रतिशत टीनएजर्स महसूस करते हैं कि उन्हें मोबाइल की लत लग चुकी है, और 40 प्रतिशत पैरेंट्स ये मानते हैं कि वे भी अपने स्मार्टफोन्स से दूर नहीं रह पाते। हम में से ज्यादातर लोग सोने से ज्यादा वक्त स्क्रीन्स को देखने में लगाते हैं। यह समस्या किसी एक देश की नहीं है, यह देखना आसान है कि डिजिटल उपकरणों पर निर्भरता एक विश्वव्यापी समस्या है।</p>
<p><br /><strong>डिजिटल आई स्ट्रेन</strong><br />कंप्यूटर स्क्रीन के सामने काम करने वाले 50 प्रतिशत से अधिक लोग डिजिटल आई स्ट्रेन नामक स्थिति का अनुभव करते हैं। डिजिटल आई स्ट्रेन के सामान्य लक्षणों में आंखों की थकान, आंखों में ड्राईनेस, आंखों में जलन या खुजली, आंखों का लाल होना और सिरदर्द होना शामिल हैं। इन लक्षणों को उच्च-ऊर्जा दृश्य प्रकाश या डिजिटल उपकरणों द्वारा उत्सर्जित नीली रोशनी के अत्यधिक संपर्क के कारण माना जाता है।</p>
<p><br /><strong>क्या कहते हैं एक्सपर्ट</strong><br /> आंखों पर जोर पड़ना एक सामान्य स्थिति है, जो विशेष रूप से लंबे समय तक कंप्यूटर, फोन और टैबलेट सहित डिजिटल उपयोग की वजह से होती है। आंखों पर जोर कम पड़े इसके लिए आप  हर 20 मिनट बाद 20 सेकेंड का ब्रेक लें और डिजिटल स्क्रीन को 20 फीट दूर रखें। साथ ही आईड्रॉप्स का उपयोग भी कर सकते हैं। लाइटिंग का ध्यान भी रखें ताकि आंखों पर स्ट्रेन कम पड़े। इसके अलावा हर आधे घंटे पर 5 मिनट का ब्रेक लेने से थकावट और स्ट्रेन दोनों से बचा जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Mar 2022 13:14:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गदर 2 के सेट पर सनी देओल कैसी रही होली.... जानने के लिए पढ़े यह ख़बर</title>
                                    <description><![CDATA[सनी पर अनिल गुलाल फेंकते है और फिर उनके चेहरे पर रंग लगाया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/how-was-sunny-deol-s-holi-on-the-sets-of-gadar-2--read-this-news-to-know/article-6366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/sunny.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। हर किसी की नजर इस पर रहती है कि उनके बॉलिवुड स्टार्स ने होली कैसे मनाई। तो हम आपको बताने जा रहे है कि बॉलीवुड के माचो मैन सनी देओल ने अपनी आने वाली फिल्म गदर 2 के सेट पर होली कैसे मनायी है। सनी देओल इन दिनों फिल्म 'गदर 2' की शूटिंग कर रहे हैं। सनी देओल का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह होली के मौके पर गदर 2 के सेट पर टीम संग जमकर मस्ती करते नजर आ रहे हैं।<br /><br />'गदर 2' के सेट से होली का यह वीडियो फिल्म निर्देशक अनिल शर्मा ने सोशल मीडिया पर साझा किया है। वीडियो में सनी पर अनिल गुलाल फेंकते हुए और फिर उनके चेहरे पर रंग लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिसके बाद सनी भी जोश में आ जाते हैं और रंग लेकर अनिल के चेहरे पर घिस-घिसकर लगाते हैं। बीच में उत्कर्ष शर्मा भी एंट्री मारते हैं और दोनों के साथ जमकर हुड़दग मचाते हैं। वीडियो में इन तीनों के साथ'गदर 2 की पूरी टीम होली खेलते हुए नजर आ रही है। वीडियो को शेयर करते हुए अनिल शर्मा ने लिखा है, ''कुछ लम्हे कुछ पल हमेशा रह जाते हैं और जीवन में रंग बिखेरते हैं। ये वही लम्हा है वही रंग हैं, जो हमेशा रहेंगे। तारा ङ्क्षसह और जीते के संग रंगीन रंगो में रंगे लम्हे।'गदर 2Óकी टीम की तरफ से आप सबको होली की बधाइयां।''<br /><br />गौरतलब है कि 'गदर 2' में सनी देओल , अमीषा पटेल और उत्कर्ष शर्मा की अहम भूमिका है। यह फिल्म वर्ष 2001 में प्रदर्शित गदर की सीक्वल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Mar 2022 11:51:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होली सो होली, कैसे हों होली के रंग?</title>
                                    <description><![CDATA[होली सो होली, मतलब जो बीत गया सो बीत गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/holi-so-holi--how-are-the-colors-of-holi/article-6306"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/holi-3.jpg" alt=""></a><br /><p>इए इस होली पर एक नई दृष्टि से विचार करते हैं। होली सो होली, मतलब जो बीत गया सो बीत गया। जो बाकी बचा है उसे सम्भाला जाए और आगे बढ़ा जाए। बीत गई सो बात गई, उस बात का शिकवा कौन करें। जो तीर कमान से निकल गया उस तीर का पीछा कौन करें? आपने अक्सर देखा-सुना होगा कि ज्यादातर लोग पिसे हुए को पीसते रहते हैं। जो बीत गया उसको बार-बार याद करते रहते हैं या यों कहें कि यादों की जुगाली करते रहते हैं। जो घटनाएं पूर्व में घट चुकी है उनको याद करके दुखी होने से क्या फायदा? हां, अगर कोई अच्छी बात हुई है पूर्व में तो उसे याद करके ख़ुश हुआ जा सकता है। भूतकाल में अगर कोई गलती हुई है, कोई भूल हुई है तो उसे सुधारा जा सकता है। उससे शिक्षा ली जा सकती है और आगे बढ़ा जा सकता है। लोग अक्सर बोल रहे होते हैं-हम हमारे जमाने में हम इतना काम करते थे साहब! हमारे जमाने में घी-तेल ये भाव था। हम ऐसे करते थे, वैसे करते थे। और ना जाने क्या- क्या? महिलाएं अक्सर कहती रहती हैं-हम घर का इतना काम करती थी, साथ में दस-दस बच्चों को पालती थी। खेतों में काम करती थीं, ऊपर से गाय-भैंस का काम अलग। और आजकल की ये बहुएं? तौबा-तौबा! ये सब सोच-सोच के वे दु:खी होती रहती हैं। किसी ने वर्षों पहले कोई बात कह दी तो बस उसको जिन्दगी भर पकड़े रहती है।ये जो हमारा उपचेतन (सब कौन्सियस) मन है ये चेतन मन (कॉन्शियस माइंड) का बड़ा अच्छा निजी सचिव है। पुरानी फाइल कबाड़ में से निकालकर बॉस (चेतन मन) के सामने पेश करता रहता है। फलस्वरूप आदमी भूतकाल का रोना रोता रहता है और अपने आपको दुखी करता रहता है।</p>
<p><br />याद रखिए फ्यूज बल्ब की कोई कीमत नहीं होती, चाहे वो कितने भी वॉट का रहा हो। कीमत तो जलते हुए बल्ब की ही होती है चाहे वो फिर जीरो वॉट का ही क्यों न हो! आप क्या थे, आपने क्या-क्या किया,कौन-कौन से सुख-दु:ख झेलें, उससे कोई मतलब नहीं है।आप वर्तमान में क्या हैं? आज क्या कर रहे हैं? आज क्या स्थिति है आपकी, वह मायने रखती है। आप अगर भूतकाल का ही रोना रोते रहते हैं तो तय मानिए आप एक फ्यूज बल्ब ही है। तो इस होली पर प्रण लें कि होली सो होली, मतलब बीती बातों, यादों, घटनाओं  को याद करके आप दु:खी नहीं होंगे। लोगों को माफ करना सीखें, माफ करें और आगे बढ़े। आप तो किसी को माफ करते नहीं और चाहते हैं कि भगवान आपको माफ  कर दें। ये कैसे सम्भव है? आप तो किसी का भला करते नहीं, किसी पर दया करते नहीं और भगवान से चाहते हैं कि वो आप पर दया करें, आपका भला करें। कैसी विडम्बना है? आदमी समझना नहीं चाहता बल्कि समझाना चाहता है। चाहता है कि दूसरे ही एडजस्ट करें, उसके साथ, वो किसी के साथ  ना करें। हम सदा दूसरों से ही अपेक्षा रखते हैं, क्या हम भी कभी दूसरे की अपेक्षाओं पर खरे उतरते है? मां-बाप, पत्नी, बच्चोंं, समाज, मित्रों, देश की और भगवान की भी कुछ अपेक्षाएं हैं हमसे, क्या हम उन्हें पूरा करते है? जरा ईमानदारी से सोचिएगा!</p>
<p><br />होली के रंग-होली पर हम लोग ये प्रयास करते हैं कि सामने वाले पर जरा पक्का रंग लगाया जाए जो कई दिनों तक न छूटे और वो हमको याद रखे। दुकानदार के पास जाते हैं और बोलते हैं- भैया जरा पक्का वाला रंग देना जो आसानी से नहीं उतरे।  आप किसी पर कितना भी पक्का रंग लगाएं दो, चार दिन में उतर ही जाता है। तो क्यों नहीं कोई ऐसा रंग लगाया जाए जो हरदम ही उस पर चढ़ा रहे और वो आपको हमेशा याद रखें। ऐसा कौन सा रंग हो सकता है। ऐसा रंग है प्रेम का रंग। ऐसा रंग है अपनेपन का रंग, दया का रंग, करुणा का रंग, उल्लास-उमंग-तरंग का रंग, मस्ती का रंग! दूसरों से निस्वार्थ प्रेम करके देखिए, निष्काम भाव से उनका सहयोग करके देखिए, वो आपको हमेशा याद रखेंगे। लोगों को अपना बनाने की कोशिश कीजिए। याद रखें दिल से कही बात दिल तक जाती है और देर तक असर करती है। जब निस्वार्थ भाव से खुश होकर किसी की सेवा की जाती है तो वह सीधे परमात्मा तक पहुंचती है। भगवान के रजिस्टर में आपका नाम लिखा जाता है। लोगों को खुशियां बाँटे,  उनका दु:ख हरे, उन्हें माफ  करना सीखें।<br />एक तो वे लोग होते हैं जो भगवान को याद करते हंै और दूसरे वे लोग होते हैं जिनको भगवान याद करते हैं।और वे वो ही लोग होते हैं जो उपरोक्त वर्णित रंग दूसरों को लगाते हैं। हम भगवान को पकड़े तो हमारी पकड़ छूट सकती है, ढीली पड़ सकती है। पर भगवान ही हमको पकड़ ले तो फिर उसकी पकड़ छुटती नहीं। पर याद रखिए अकड़ से पकड़ छूट जाती है। अत: अकड़े नहीं।उस मालिक को सब कुछ बर्दाश्त है पर किसी की अकड़ या अहंकार बर्दाश्त नहीं। आपने दूसरों को तो रंग लगा दिया अब जरा स्वयं को स्वयं रंगने का प्रयास करें। जिससे आप भी रंगीन दिखे, केवल रंगीन दिखे ही नहीं बल्कि रंगीन बने। तो स्वयं को कौन सा रंग लगाएं? इस होली से ख़ुद को भक्ति का रंग लगाएं। थोड़ी देर सुबह शाम उस मालिक की बन्दगी कर लिया करें, जिसने इतना कुछ दे रखा है और वह भी बिल्कुल फ्री! </p>
<p><br />उसका जरा धन्यवाद कर लिया करें, आभार प्रकट कर लिया करें, उसकी देनों के प्रति। फिर अपने आपको नियमों का, मर्यादा का, अनुशासन का, मधुरता का रंग भी लगाएं। कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे। अपने आपको नियमों में, मर्यादा में, अनुशासन में ढालना सीखे। अपने प्रति कठोरता और दूसरो के प्रति उदारता बरतिए। याद रखे कठिनाइयों की तरफ  चलने से जिन्दगी आसान हो जाती है और सुविधाओं की तरफ, आसानियों की तरफ भागने से जिन्दगी कठिन हो जाती है।अपने आपको मुस्कुराहट का रंग लगाएं, गाते-गुनगुनाते रहे, हंसते-हंसाते रहे। फुल बनकर मुस्कुराना जिन्दगी है, गम भुलाकर मुस्कुराना जिन्दगी है। जीत कर खुश हुए तो क्या, हार कर भी मुस्कुराना जिन्दगी है।</p>
<p><strong>         -ललित शर्मा</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /><br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>होली-विशेष</strong></span><br />याद रखिए फ्यूज बल्ब की कोई कीमत नहीं होती, चाहे वो कितने भी वॉट का रहा हो। कीमत तो जलते हुए बल्ब की ही होती है चाहे वो फिर जीरो वॉट का ही क्यों न हो! आप क्या थे, आपने क्या-क्या किया,कौन-कौन से सुख-दु:ख झेले, उससे कोई मतलब नहीं है।आप वर्तमान में क्या हैं? आज क्या कर रहे हैं?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/holi-so-holi--how-are-the-colors-of-holi/article-6306</link>
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                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 13:11:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्कूल-कॉलेजों के विवादास्पद मुद्दों में राजनीतिक हस्तक्षेप कितना सही?</title>
                                    <description><![CDATA[ किसी भी शिक्षण संस्थान में जब धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों की घुसपैठ होने लगती है तो वह अपने उद्देश्य शिक्षा से भटकने लगते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/how-right-is-the-political-interference-in-the-controversial-issues-of-schools-and-colleges/article-5168"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/school_college_politics.gif" alt=""></a><br /><p>पिछले कुछ वर्षों में देश के शिक्षण संस्थान नकारात्मक खबरों की वजह से चर्चा का विषय बन रहे हैं। किसी भी शिक्षण संस्थान में जब धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों की घुसपैठ होने लगती है तो वह अपने उद्देश्य शिक्षा से भटकने लगते हैं। देश के शिक्षण संस्थानों में भविष्य तैयार होता है। यहां विवादों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। जिस प्रकार का वातावरण विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों में मिलेगा उनकी विचाराधारा और नजरिया वैसा ही बनता चला जाएगा। किसी भी स्कूल-कॉलेज-विश्वविद्यालय के नियम और अनुशासन होते हैं। यदि वहां कोई भी इश्यू उठता है तो वह उनका आंतरिक मामला होता है और उसे अकेडमिक इश्यू की तरह देखा जाना चाहिए ना कि राजनीतिक दृष्टि से। शिक्षण संस्थानों की नींव अनुशासन होती है। यहां विद्यार्थियों को विकसित सोच वाला व्यक्तित्व प्रदान किया जाता है। विद्यार्थी शिक्षा प्राप्ति के उद्देश्य से यहां प्रवेश करते हैं। इन संस्थानों में विद्यार्थी निरंतर सीखने की अवस्था से गुजर रहे होते हैं। उनका लक्ष्य शिक्षा प्राप्त करना होना चाहिए। जब भी किसी स्कूल-कॉलेज या विश्वविद्यालय में संवेदनशील मुद्दें उठते हैं तो वहां के शिक्षक अपने विद्यार्थियों की समस्या का समाधान करने में सक्षम होते हैं। शिक्षक, अपने विद्यार्थी को बेहतर समझते हैं और उनकी समस्याओं को आसानी से समझकर सुलझा सकते हैं, बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के। वैसे भी गुरु यानी शिक्षक को भगवान से ऊंचा दर्जा दिया गया है। वह विद्यार्थियों का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्हें अंधेरे से उजाले की ओर शिक्षा के माध्यम से लेकर जाते हैं। तभी कहा गया है-‘गुरु गोविंद दोऊ खडेÞ काके लागूं पाए, बलिहारी गुरु आपणे गोविंद दियो बताय।’ इसलिए अकेडमिक इश्यू को राजनीतिक रंग देने के बजाय शिक्षण संस्थानों व उनके शिक्षकों को यह पावर दी जानी चाहिए कि किसी भी तरह का संवेदनशील मुद्दा यदि उनके संस्थान में उठता है तो वह उसे अपने स्तर पर सुलझाए ना कि उसमें राजनीतिक दखलंदाजी हो। इसके लिए एक कमेटी गठित की जा सकती है जिसमें उस शिक्षण संस्थान के ही सदस्य हों। वह चर्चा करके स्थानीय स्तर पर ही समाधान निकालने का प्रयास करें। जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित ना हो। यह उनका आंतरिक मामला ही रहे, राजनीतिक मुद्दा नहीं बनने पाए। यदि फिर भी नहीं सुलझा पाते हैं तो कोर्ट फैसला करें। क्योंकि जब संवेदनशील मुद्दे शिक्षण संस्थानों में उठते हैं वह राजनीतिक गलियारों या देश में सुर्खियां बनते हैं। तब भी कोर्ट की शरण ली जाती है। स्कूल स्तर के लिए शिक्षा बोर्ड, कॉलेज के लिए विश्वविद्यालय और विश्वविद्यालय के लिए यूजीसी को फैसला करना चाहिए। यदि कमेटी स्कूल, कॉलेज व विश्वविद्यालय स्तर पर बनेगी तो इस तरह के मुद्दे परिसर के अंदर ही रहेंगे, कैम्पस से बाहर नहीं आएंगे। इससे ना तो राजनीतिक हस्तक्षेप होगा और ना ही देश में तनाव का माहौल बन सकेगा।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>नरेन्द्र चौधरी</strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Feb 2022 11:48:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस के खिलाफ कितनी देर टिकेगा यूक्रेन? जानिए दोनों सेनाओं की ताकत</title>
                                    <description><![CDATA[पावर इंडेक्स की सूची में रूस दुनिया के 140 देशों की सूची में दूसरे स्थान पर आता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/how-long-will-wkraine-last-against-russia--know-the-strength-of-both-armies/article-4971"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/map.jpg" alt=""></a><br /><p>इस बात में कोई संदेह नहीं है कि युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं बल्कि दिमाग से जीता जाता है। अगर यूक्रेन किसी मामले में कमजोर भी है तो वह रूस से काफी दिनों तक संघर्ष कर सकता है।<br /> <br /> ग्लोबलफायर पावर डॉट कॉम के अनुसार पावर इंडेक्स की सूची में रूस दुनिया के 140 देशों की सूची में दूसरे स्थान पर आता है। जबकि, यूक्रेन 22 नबंर पर है। रूस आबादी के मामले में 9वें और यूक्रेन 34वें स्थान पर है। यानी रूस के पास 14.23 करोड़ की आबादी है तो यूक्रेन के पास 4.37 करोड़ की। करीब 9.85 करोड़ का अंतर है।  रूस मौजूदा मैनपावर की ताकत के मामले में 9वें स्थान पर और यूक्रेन 29वें स्थान पर है। यानी रूस की मौजूदा मैनपावर 6.97 करोड़ से ज्यादा है। इनमें से 4.66 करोड़ से थोड़े ज्यादा लोग फिट फॉर सर्विस है। यूक्रेन की मैनपावर 2.23 करोड़ से ज्यादा है। इनमें से 1.56 करोड़ से ज्यादा लोग फिट फॉर सर्विस हैं।</p>
<table style="height:444px;" width="584">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;"> </td>
<td style="width:168.883px;height:41px;">रूस</td>
<td style="width:168.867px;height:41px;">यूक्रेन</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;">सक्रिय सैनिक</td>
<td style="width:168.883px;height:41px;">8.50 लाख</td>
<td style="width:168.867px;height:41px;">2 लाख</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;">रिजर्व सैन्य बल</td>
<td style="width:168.883px;height:41px;">2.50 लाख</td>
<td style="width:168.867px;height:41px;">2.50 लाख</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;">पैरामिलिट्री फोर्स</td>
<td style="width:168.883px;height:41px;">2.50 लाख</td>
<td style="width:168.867px;height:41px;">50 हजार</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;">एयरक्राफ्ट</td>
<td style="width:168.883px;height:41px;">4173</td>
<td style="width:168.867px;height:41px;">318</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;"> फाइटर जेट       </td>
<td style="width:168.883px;height:41px;"> 772   </td>
<td style="width:168.867px;height:41px;"> 69</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;"> ट्रांसपोर्ट व्हीकल</td>
<td style="width:168.883px;height:41px;"> 445    </td>
<td style="width:168.867px;height:41px;">32 </td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;"> टैंक्स  </td>
<td style="width:168.883px;height:41px;">12,420  </td>
<td style="width:168.867px;height:41px;">2596</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;"> बख्तरबंद वाहन</td>
<td style="width:168.883px;height:41px;">30,122</td>
<td style="width:168.867px;height:41px;">12,303</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;">स्वचालित आर्टिलरी </td>
<td style="width:168.883px;height:41px;">6574 </td>
<td style="width:168.867px;height:41px;">1067</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;">मोबाइल रॉकेट लॉन्चर्स </td>
<td style="width:168.883px;height:41px;">3391</td>
<td style="width:168.867px;height:41px;">  490</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;">नौसैनिक फ्लीट             </td>
<td style="width:168.883px;height:41px;">605</td>
<td style="width:168.867px;height:41px;">38</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;">एयरक्राफ्ट करियर  </td>
<td style="width:168.883px;height:41px;">1</td>
<td style="width:168.867px;height:41px;">00</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;"> सबमरीन </td>
<td style="width:168.883px;height:41px;">70</td>
<td style="width:168.867px;height:41px;">00</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;">विधंव्सक    </td>
<td style="width:168.883px;height:41px;">15</td>
<td style="width:168.867px;height:41px;">00</td>
</tr>
<tr style="height:41.5833px;">
<td style="width:240.083px;height:41.5833px;"> फ्रिगेट्स  </td>
<td style="width:168.883px;height:41.5833px;">11 </td>
<td style="width:168.867px;height:41.5833px;">01</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;">कॉर्वेट्स</td>
<td style="width:168.883px;height:41px;">86</td>
<td style="width:168.867px;height:41px;">01</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;">एयरपोर्ट्स</td>
<td style="width:168.883px;height:41px;">1218</td>
<td style="width:168.867px;height:41px;">187</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:240.083px;height:41px;">हेलिकॉप्टर्स</td>
<td style="width:168.883px;height:41px;">1543</td>
<td style="width:168.867px;height:41px;">112</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>            <br /><strong>सदस्य बनने के लिए यूरोपीय देश होना जरूरी</strong><br /> नाटो का सदस्य बनने के लिए यूरोपीय देश होना जरूरी शर्त है। हालांकि, अपनी पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से नाटो ने कई अन्य देशों से भी अपने संपर्क स्थापित किए हैं। अल्जीरिया, मिस्र, जॉर्डन, मोरक्को और ट्यूनिशिया भी नाटो के सहयोगी हैं। अफगानिस्तान और पाकिस्तान में भी नाटो की भूमिका रही है।<br /> <br /> <strong>नाटो: 1949 में स्थापना, 30 सदस्य देश <br /> </strong></p>
<p><strong>उत्तर अटालांटिक संधि संगठन </strong><br /> उत्तरी अमेरिका और यूरोपीय देशों का एक सैन्य संगठन है। इसकी स्थापना 1949 में हुई थी। नाटो का उद्देश्य राजनीतिक और सैन्य माध्यमों से अपने सदस्यों की स्वतंत्रता और सुरक्षा की गारंटी देना है। सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद बने इस संगठन का उस समय मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के बढ़ते दायरे को सीमित करना था। नाटो जब बना तो अमेरिका, ब्रिटेन, बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, इटली, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड्स, नॉर्वे और पुर्तगाल इसके 12 संस्थापक सदस्य थे। वर्तमान में इसके सदस्यों की संख्या 30 है। नॉर्थ मैसेडोनिया साल 2020 में इसमें शामिल होने वाले सबसे नया मेंबर है।<br /> <br /> <strong>नाटो देता है सदस्यों को सुरक्षा का आश्वासन</strong><br /> नाटो के गठन के समय जो समझौता हुआ था उसके तहत इसमें शामिल होने वाले सभी यूरोपीय देशों के लिए खुले दरवाजे की नीति अपनाई गई थी। इसके तहत इसमें कोई भी यूरोपीय देश शामिल हो सकता था। इसके साथ ही इसमें सदस्य देशों के लिए एक सुरक्षा का प्रावधान भी था। इसमें साझा सुरक्षा को लेकर एक घोषणा पत्र में अुनच्छेद भी है। इसके तहत इसके तहत कहा गया है कि यदि कोई बाहरी देश इसके सदस्य देशों पर हमला करता है तो फिर सभी सदस्य देश मिलकर उसकी रक्षा करेंगे। चूंकि, यूक्रेन नाटो का सदस्य नहीं है ऐसे में नाटो के देश सीधे तौर पर उसकी मदद के लिए आगे नहीं आ सकते हैं। हालांकि, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा सीधे तौर पर यूक्रेन की मदद कर रहे हैं।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/how-long-will-wkraine-last-against-russia--know-the-strength-of-both-armies/article-4971</link>
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                <pubDate>Fri, 25 Feb 2022 12:47:05 +0530</pubDate>
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