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                <title>guru - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>उतार-चढ़ाव से भरा रहा इस स्टारकिड का करियर: नकली अंगूठी से किया था प्रपोज; मजबूरी में किए क्या-क्या काम, आज है 280 करोड़ का मालिक</title>
                                    <description><![CDATA[अभिनेता अभिषेक बच्चन 50 वर्ष के हो गए। ‘रिफ्यूजी’ से शुरुआत कर ‘धूम’, ‘गुरु’ जैसी हिट फिल्मों से उन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/trending-today/this-star-kids-career-was-full-of-ups-and-downs/article-142049"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/bachchan.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता अभिषेक बच्चन आज 50 वर्ष के हो गए हैं। 05 फरवरी, 1976 को मुंबई में जन्में अभिषेक को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनके पिता अमिताभ बच्चन अभिनेता, जबकि मां जया भादुरी जानी-मानी अभिनेत्री हैं। अभिषेक बच्चन ने अपने करियर की शुरूआत वर्ष 2000 में प्रदर्शित जे.पी.दत्ता की फिल्म रिफ्यूजी से की।</p>
<p><img src="https://images.news18.com/ibnlive/uploads/2026/02/abhishek-bachchan-Birthday-amitabh-2026-02-6d5ec0df22dbcaa08b8554034569faca-16x9.jpg?impolicy=website&amp;width=400&amp;height=225" alt="Abhishek Bachchan Turns 50: 50 Facts On Films, Family And Career |  Bollywood News - News18"></img></p>
<p>हालांकि यह फिल्म टिकट खिड़की पर कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी, लेकिन अभिषेक के अभिनय को अवश्य पसंद किया गया। इसके बाद अभिषेक ने तेरा जादू चल गया, ढ़ाई अक्षर प्रेम के, बस इतना सा ख्वाब है, हां मैने भी प्यार किया है, शरारत, मुंबई से आया मेरा दोस्त, मैं प्रेम की दीवानी हूं, ओम जय जगदीश, एलओसी कारगिल, कुछ न कहो जैसी फिल्मों में काम किया, लेकिन इनमें से कोई फिल्म टिकट खिड़की पर सफल नहीं रही।</p>
<p><img src="https://images.moneycontrol.com/static-mcnews/2024/08/20240826055427_tcynm.jpg?impolicy=website&amp;width=770&amp;height=431" alt="Aishwarya Rai Bachchan on her marriage and career: 'No question of losing  myself'"></img></p>
<p>वर्ष 2003 में अभिषेक की फिल्म जमीन प्रदर्शित हुई। इस फिल्म में अभिषेक के अलावा अजय देवगन की भी मुख्य भूमिका थी। फिल्म को टिकट खिड़की पर औसत सफलता मिली। वर्ष 2004 में प्रदर्शित फिल्म युवा अभिषेक के करियर की महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुई। इस फिल्म में अभिषेक का किरदार ग्रे शेड्स लिए हुए थे, लेकिन वह दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने में सफल रहे। वर्ष 2004 में प्रदर्शित फिल्म धूम उनके करियर की पहली सुपरहिट फिल्म साबित हुई। इसके बाद अभिषेक ने कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया, जिनमें उनके अभिनय को सराहा गया।</p>
<p><img src="https://www.livemint.com/lm-img/img/2025/07/04/600x338/Kaalidhar_Laapata_Abhishek_Bachchan_1751636094289_1751636094481.jpeg" alt="कालीधर लापता' समीक्षा: अभिषेक बच्चन ने परित्याग, उपचार और अप्रत्याशित  दोस्ती की एक कोमल कहानी को बखूबी निभाया | मिंट"></img></p>
<p>वर्ष 2007 में अभिषेक बच्चन को मणिरत्नम की फिल्म गुरू में काम करने का अवसर मिला। माना जाता है कि यह फिल्मदिवंगत उद्योगपति धीरू भाई अंबानी के जीवन पर बनायी गयी थी। अभिषेक बच्चन ने अपने संजीदा अभिनय से दर्शको का दिल जीत लिया। इस फिल्म के लिये अभिषेक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिये नामांकित किये गये। इसी वर्ष अभिषेक बच्चन ने ऐश्वर्या राय से शादी कर ली।वर्ष 2008 में अभिषेक बच्चन की दोस्ताना और सरकार राज जैसी सुपरहिट फिल्में प्रदर्शित हुयी और दोनो फिल्मों के लिये वह सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिये नामांकित किये गये।वर्ष 2009 में अभिषेक बच्चन ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रख दिया और सुपरहिट फिल्म 'पा' का निर्माण किया।</p>
<p><img src="https://images-hmd.mid-day.com/HMD/images/images/2025/oct/AbhishekBachchan-Award_d.jpg" alt="Abhishek Bachchan wins Filmfare Best Actor award for `I Want to Talk`: अभिषेक  बच्चन ने फिल्मफेयर में `आई वांट टू टॉक` के लिए जीता बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड"></img></p>
<p>वर्ष 2012 में प्रदर्शित सुपरहिट फिल्म बोल बच्चन में अभिषेक बच्चन ने जबरदस्त हास्य अभिनय से दर्शको को मंत्रमुग्ध कर दिया। वर्ष 2013 में अभिषेक बच्चन के करियर की सबसे कामयाब फिल्म धूम 3 प्रदर्शित हुयी। वर्ष 2014 में अभिषेक की एक और सुपरहिट फिल्म हैप्पी न्यू ईयर प्रदर्शित हुयी है। इसके बाद अभिषेक बच्चन की हाउसपुल 3, मनमर्जिया, लूडो, द बिग बुल, बॉब विश्वास, दसवीं, घूमर और आई वांट टू टॉक, हाउसफुल 5 जैसी फिल्में प्रदर्शित हुयी।</p>
<p><img src="https://images.moneycontrol.com/static-mcnews/2024/07/20240716075352_ab.png" alt="अभिषेक बच्चन शाहरुख खान की फिल्म 'किंग' में खलनायक की भूमिका निभाने के लिए  पूरी तरह तैयार हैं।"></img></p>
<p>अभिषेक बच्चन ने फिल्म 'आई वांट टू टॉक' के लिए अपने करियर का पहला बेस्ट एक्टर फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। अभिषेक इन दिनों फिल्म किंग में काम कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                            <category>Trending Today</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 14:52:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कत्थक नृत्य गुरू बिरजू महाराज नहीं रहे, मोदी ने बिरजू महाराज के निधन पर जताया शोक</title>
                                    <description><![CDATA[उन्होंने दिल्ली में साकेत के एक अस्पताल में अंतिम सांसे ली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A5-%E0%A4%A8%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%82-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A5%82-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87--%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A5%82-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A5%8B%E0%A4%95/article-4023"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/birju-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पद्मविभूषण से सम्मानित कत्थक नृत्य गुरू पंडित बिरजू महाराज का सोमवार को यहां दिल का दौरा पडऩे से निधन हो गया। वह 83 वर्ष के थे। उन्होंने दिल्ली में साकेत के एक अस्पताल में अंतिम सांसे ली। पं बिरजू महाराज के पोते स्वरांश मिश्रा ने सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट में लिखा , '' मेरे नाना जी नहीं रहे। मुझे दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि उन्होंने 17 जनवरी 2022 को अंतिम सांसे ली। उनका जन्म चार फरवरी 1938 को उत्तर प्रदेश के हड़यिा में कत्थक प्रेमी परिवार में हुआ था। उनके पिता पंडित लच्छन महाराज का निधन जिस समय हुआ , बिरजू महाराज केवल नौ वर्ष के थे। पंडित बिरजू महाराज ने कत्थक नृत्य शैली को देश और देश के बाहर तमाम कार्यक्रमों में प्रदर्शित किया था। उनका औपचारिक नाम मोहन लाल मिश्रा था , लेकिन उनकी ख्याति पंडित बिरजू महाराज के रूप में फैली। वह लखनऊ  कालिका-बिन्दादीन घराने के कलाकार थे। उनके चाचा शंभू महाराज और लच्छू महाराज भी कत्थक नृत्य के पारंगत थे।''<br />  </p>
<p>मोदी ने बिरजू महाराज के निधन पर जताया शोक<br /> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रख्यात कत्थक नृत्य गुरू पंडित बिरजू महाराज के निधन पर शोक व्यक्त किया है।  मोदी ने टविटर पर अपने शोक संदेश में कहा कि भारतीय नृत्य कला को विशिष्ट पहचान दिलाने वाले पंडित बरजू महाराज के निधन से अत्यंत दुख हुआ । उनका जाना संपूर्ण कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ है। ओम शांति।<br /> <br /> उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने पंडित बिरजू महाराज के निधन पर शोक व्यक्त किया है।<br /> आदित्य नाथ ने कहा कि पंडित बिरजू महाराज ने अपनी कला और प्रतिभा से पूरी दुनिया में देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया था। वे शास्त्रीय कत्थक नृत्य के लखनऊ कालिका-बिन्दादीन घराने के अग्रणी नर्तक थे। उनके निधन से कला जगत को हुई हानि की भरपाई होना कठिन है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्म की शांति की कामना करते हुए पंडित बिरजू महाराज के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Jan 2022 12:32:10 +0530</pubDate>
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                <title>मेडिटेशन एक ऐसी एकाग्रता, जिससे आप स्वयं को पहचान सकें : निर्मला</title>
                                    <description><![CDATA[‘वननेस विथ द यूनिवर्स’ में आध्यात्मिक गुरु सेवानी ने बताए तनाव मुक्त जीवन के गुर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%90%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE--%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%AA-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%AF%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82---%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A4%BE/article-1791"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/51.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। शरद पूर्णिमा वह खगोलीय घटना है जब हम चन्द्रमा और ब्रह्मांड की प्राकृतिक ऊर्जा और प्रकाश से कई स्वास्थ्य, आर्थिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। ये कहना था प्रसिद्ध ध्यान विशेषज्ञ, आध्यात्मिक गुरु निर्मला सेवानी का। उन्होंने यह बात मंगलवार शाम 7.30 बजे भवानी सिंह रोड स्थित वेदा पाणिग्रह में रोटरी क्लब जयपुर साउथ के तत्वावधान में हुए ‘वननेस विथ द यूनिवर्स’ कार्यक्रम में कही। सेवानी ने मेडिटेशन के बारे में भी जानकारी देते हुए बताया कि मेडिटेशन एक ऐसी एकाग्रता है, जिससे आप स्वयं को पहचान सकें। मेडिटेशन के जरिए नकारात्मकता हमसे कोसों दूर हो जाती है और व्यक्ति अपने आप को बेहतर महसूस करता है। विशेष अतिथि डॉ.सत्येन्द्र पाल सिंह बख्शी ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मेडटेशन बहुत जरूरी है। साथ ही तनाव मुक्त रहने के लिए भी मेडिटेशन महत्वपूर्ण है। इससे पहले दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम की शुरूआत की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए रोटरी क्लब जयपुर साउथ के अध्यक्ष हर्ष चौधरी ने बताया कि विशेष अतिथि सरिता सरवरिया, अमित त्यागी, अजय काला, डॉ.बलवंत सिंह चिराना, प्रोफेसर विद्या जैन उपस्थित रहीं। मंच संचालन रोटरी क्लब जयपुर साउथ की सचिव रितु खत्री और पायल चौधरी ने किया। कार्यक्रम का मीडिया सहयोगी दैनिक नवज्योति रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Oct 2021 15:35:56 +0530</pubDate>
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                <title>ऐसे ही महाशक्ति और विश्वगुरु बनेगा देश</title>
                                    <description><![CDATA[हम गर्व से कहते नहीं थकते कि हम हिंदू हैं। कहना भी चाहिए, इसमें कोई बुराई भी नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%90%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6/article-1772"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/jkj.jpg" alt=""></a><br /><p>हम गर्व से कहते नहीं थकते कि हम हिंदू हैं। कहना भी चाहिए, इसमें कोई बुराई भी नहीं है। लेकिन समझ नहीं आता कि भारतीय कहने में हमें गर्वानुभूति क्यों नहीं होती। जबकि यह भरत का देश है और उसी की वजह से भारत की पहचान है। इसे झुठलाया भी नहीं जा सकता। वैसे इस देश में गर्व से कहने को बहुत कुछ है। आजकल गर्व करने वाली सबसे बड़ी बात कही जाए या शर्म की बात कि देश की भुखमरी के मामले में सर्वत्र ख्याति है। यह वैश्विक भुखमरी सूचकांक की सूची से प्रमाणित हो जाता है। उसकी बानगी देखिए कि देश के चहुंमुखी विकास का दावा करना तो बेहद सुखकारी लग सकता है, उस पर गर्व करते रहिए। आपको रोकता कौन है। यह गर्व की बात है भी। लेकिन यह भी देखना बेहद जरूरी है कि वैश्विक भुखमरी सूचकांक में हमारी स्थिति क्या है। आज वैश्विक भुखमरी सूचकांक में हमारा देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से भी पिछड़ा है। वह नेपाल से 24 और पाकिस्तान से 9 पायदान नीचे है। बदतर हालात का अंदाजा इसी से लग जाता है कि वैश्विक भुखमरी सूचकांक की सूची में हम अफगानिस्तान जैसे देश के बेहद करीब हैं। है न यह गर्व करने की बात।</p>
<p><br /> देखा जाए तो वर्तमान में हमारा देश दुनिया के 116 देशों में भुखमरी के मामले में 101वें पायदान पर है, वह भी पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से पीछे। जबकि भुखमरी और कुपोषण के मामले में चीन, ब्राजील और कुवैत दुनिया के 18 देशों में शीर्ष स्थान पर हैं। भारत ही नहीं दुनिया के 37 देश वर्ष 2030 तक भुखमरी को नियंत्रित करने में नाकाम रहेंगे। आयरलैंड की कंसर्न वर्ल्ड वाइड और जर्मनी के वेल्ट हंगर हिल्फ नामक संगठन के अनुसार भुखमरी के मामले में भारत की स्थिति बेहद चिंताजनक है। वैश्विक भुखमरी सूचकांक के पिछले वर्षों का जायजा लें तो पाते हैं कि वर्ष 2018 में भुखमरी सूचकांक की सूची में भारत 103वें स्थान पर, 2019 में 117 देशों में 102वें स्थान पर और 2020 में 107 देशों में 94वें स्थान पर रहा है। खासियत यह कि बीते वर्षों में भी हमारा देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से पीछे ही रहा है। वर्ष 2020 में कुल 107 देशों में 13 देश ही भारत से खराब स्थिति में हैं। इनमें प्रमुख है रवांडा 97, नाइजीरिया 98, अफगानिस्तान 99, लाइबेरिया 102, मोजाम्बिक  103 और चाड 107वें स्थान पर है। इनमें भी चाड, तिमोरलेस्ते और मैडागास्कर भुखमरी के खतरनाक स्तर पर हैं।</p>
<p><br /> भुखमरी सूचकांक के अनुसार अल्प पोषण, कुपोषण, बाल वृद्धि दर और बाल मृत्यु दर के आधार पर हमारे देश का स्तर 2020 से और गिरा है। 2020 में वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत का स्तर 38.8 था, जबकि वर्ष 2012 और 2021 के बीच यह स्तर 28.8 और 27.5 के बीच रहा है। रिपोर्ट की मानें तो इस दौरान नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार और पाकिस्तान की भुखमरी की स्थिति चिंताजनक स्थिति में है लेकिन भारत की तुलना में इन देशों ने अपने नागरिकों को भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में बेहतर प्रदर्शन किया है। भारत इस सूचकांक में भी श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों से भी पीछे है। यदि चाइल्ड वेस्टिंग के मामले में भारत का प्रदर्शन देखा जाए तो इस मामले में भारत की हिस्सेदारी 1998-2002 के मुकाबले 17.1 से बढ़कर 2016-2020 में 17.3 फीसदी हो गई है। इससे साबित होता है और रिपोर्ट भी इसी और इशारा करती है कि भारत सबसे अधिक चाइल्ड वेस्टिंग वाला देश है जहां कोविड-19 महामारी के चलते लगाए प्रतिबंधों से लोग बेहद बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। असलियत यह है कि चीन, बेलारूस, यूक्रेन, तुर्की, क्यूबा सहित दुनिया के 17 देश भूख, कुपोषण के मामले में शीर्ष पायदान पर हैं। हमारे देश की तकरीब 14 फीसदी से भी अधिक आबादी कुपोषण की शिकार है। बांग्लादेश, भारत, नेपाल और पाकिस्तान के आंकड़ों से पता चलता है कि ऐसे परिवारों जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों-कमियों से पीड़ित हैं, के बच्चों का कद नहीं बढ़ पाता है। यहां समय से पहले बच्चों का जन्म और कम वजन के कारण बच्चों की मृत्यु दर गरीब राज्यों के ग्रामीण इलाकों में खासकर बढ़ी है। भारत का जहां तक सवाल है, हमारे यहां उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में भुखमरी सूचकांक की दृष्टि से प्रदर्शन में सुधार की बेहद जरूरत है। इस मामले में राष्टÑीय औसत उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से सर्वाधिक प्रभावित होता है जहां कुपोषण के मामले अधिक हैं। यह भी सच है कि ये ही राज्य देश की आबादी में खासा योगदान भी करते हैं। इसके अलावा झारखंड जैसे राज्यों में भी बदलाव की बहुत आवश्यकता है। जानकारों की मानें तो इसके लिए खराब कार्यान्वयन प्रक्रिया, प्रभावी निगरानी का अभाव, कुपोषण से निपटने का उदासीन रवैय्या और बड़े राज्यों का खराब प्रदर्शन ही सबसे बड़ा जिम्मेदार है।</p>
<p><strong>ज्ञानेन्द्र रावत <br /> (ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /> <br /> अब विचारणीय प्रश्न तो यह है कि इन हालात में यह गर्व का विषय है या शर्म का, यह सोचने का देश के विकास और देश को विश्व की महाशक्ति ही नहीं, विश्व गुरू बनाने का दंभ भरने वाली हमारी सरकार और देश के भाग्य विधाताओं के पास समय ही कहां है। उन बेचारों के पास तो देश और देश की जनता के विकास की खातिर देश के बंदरगाह, रेल, बस अड्डे, हवाई अड्डे, किले, कंपनियां, जमीन और देश की धरोहरों आदि के बेचने और अन्नदाता किसान को पामाल बनाने की खातिर योजनाओं के निर्माण में व्यस्तता से समय ही कहां बचता है। वह तो चौबीसों घंटे देश की सेवा में लगे रहते हैं। यह है न गर्व करने का विषय। दुख तो इसका है कि इस सबके बावजूद भी हम उन पर रात-दिन अनर्गल आरोप- दर- आरोप लगाते नहीं थकते। है न शर्म की बात कि हम अपने देश के कर्णधारों पर विश्वास न कर उनको नाकारा करार देते हैं जिनमें देश की जनता ने पिछले दो चुनावों में अटूट भरोसा जताया  हो।  जैसेकि दावा किया जा रहा है कि अब वह दिन दूर नहीं जब हमारा देश फिर सोने की चिडिया बन जायेगा और विश्व गुरू कहलायेगा। मौजूदा हालात तो इसकी गवाही नहीं देते। उस हालत में और जबकि लाख दावों के बावजूद बेरोजगारी, गरीबी, भुखमरी सुरसा के मुंह की भांति बढ़ रही है। देश का अन्नदाता किसान सरकार द्वारा लाये गये कृषि कानून के चलते अपनी जमीन से बेदखल होने के डर से बीते एक साल से सड़कों पर अपने हकों की लडाÞई लड़ रहा है।  कोरोना के चलते लाकडाउन से हुयी कंपनियों की बंदी से लाखों-करोड़ों कामगारों के आगे परिवार का पेट भरना मुश्किल हो गया हो। लाखों मजदूर बेघर हो गये हों। उनके भूखों मरने की नौबत आ गयी है। इन हालात में क्या यह संभव है और उस समय यह विचारणीय भी है और भविष्य के गर्भ में भी। सबसे बड़ी बात यह कि भूखे पेट कोई देश कैसे महाशक्ति और सोने की चिडिया बन सकता है। यह मुंगेरीलाल के सपने जैसा नहीं है क्या?उस समय  देश की जनता के हाथ क्या आयेगा, यह अब किसी से छिपा नहीं है। वह सबके सामने है। उस समय आपके पास गर्व करने को क्या रहेगा, यही सवाल आपके सोचने का विषय है।<br /> <strong>ज्ञानेन्द्र रावत <br /> वरिष्ठ पत्रकार , लेखक एवं पर्यावरणविद्</strong><br /> 326-ए, जीडीए फ्लैट्स, मिलन विहार-2,<br /> अभय खण्ड-3, समीप मदर डेयरी,<br /> इंदिरापुरम्, गाजियाबाद-201014, उ0प्र0 <br /> मोबाइल: 9891573982    <br /> <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>राष्ट्र-चिंतन</strong></span></span><br /> असलियत यह है कि चीन, बेलारूस, यूक्रेन, तुर्की, क्यूबा सहित दुनिया के 17 देश भूख, कुपोषण के मामले में शीर्ष पायदान पर हैं। हमारे देश की तकरीब 14 फीसदी से भी अधिक आबादी कुपोषण की शिकार है। बांग्लादेश, भारत, नेपाल और पाकिस्तान के आंकडोÞं से पता चलता है कि ऐसे परिवारों जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों-कमियों से पीड़ित हैं, के बच्चों का कद नहीं बढ़ पाता है। यहां समय से पहले बच्चों का जन्म और कम वजन के कारण बच्चों की मृत्यु दर गरीब राज्यों के ग्रामीण इलाकों में खासकर बढ़ी है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 19 Oct 2021 14:22:32 +0530</pubDate>
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