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                            <item>
                <title>संपत्ति संबंधी झगड़ों के चलते की थी मां की हत्या, दत्तक पुत्र और पुत्रवधु गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[आपसी लड़ाई झगड़ों और संपत्ति संबंधी विवादों के चलते दत्तक पुत्र और पुत्रवधू ने अपनी मां की हत्या कर दी। किसी को शक नहीं हो इसके लिए वे खुद ही अपनी मां को एमएमएस अस्पताल जयपुर ले गए। थाना प्रभारी राजीव डूडी ने बताया कि 24 मई 2022 को पुलिस थाने पर एसएमएस अस्पताल जयपुर से सूचना मिली कि 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला को उसका दत्तक पुत्र मृत अवस्था में अस्पताल लेकर आया है, जो गिरने पड़ने से अपनी मां के सिर पर चोट लगना बता रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mother-was-murdered-due-to-property-disputes-adopted-son-and/article-11103"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/jobner-2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जोबनेर।</strong> आपसी लड़ाई झगड़ों और संपत्ति संबंधी विवादों के चलते दत्तक पुत्र और पुत्रवधू ने अपनी मां की हत्या कर दी। किसी को शक नहीं हो इसके लिए वे खुद ही अपनी मां को एमएमएस अस्पताल जयपुर ले गए। थाना प्रभारी राजीव डूडी ने बताया कि 24 मई 2022 को पुलिस थाने पर एसएमएस अस्पताल जयपुर से सूचना मिली कि 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला को उसका दत्तक पुत्र मृत अवस्था में अस्पताल लेकर आया है, जो गिरने पड़ने से अपनी मां के सिर पर चोट लगना बता रहा है। मृतका के बताए गए नाम पते के आधार पर जांच पड़ताल की गई तो पता चला कि बुजुर्ग महिला व उसके दत्तक पुत्र के बीच में लंबे समय से मुकदमे बाजी चल रही थी। ऐसे में उक्त मृत्यु संदिग्ध प्रतीत होने पर जयपुर ग्रामीण एसपी को इसकी जानकारी दी। मामले को संदिग्ध मानते हुए उन्होंने स्वयं थाना अधिकारी को एसएमएस अस्पताल जाकर मेडिकल बोर्ड का गठन करवाकर बुजुर्ग महिला का पोस्टमार्टम करवाने के आदेश दिए। कुछ ही दिनों में संदिग्ध मामले का पटाक्षेप करते हुए बुजुर्ग महिला की हत्या करके लोगों की नजरों में भला बनने की साजिश रचने वाले दत्तक पुत्र बंशीलाल पुत्र रतनलाल जाति जाट (38) निवासी डाकण की ढाणी तन महेसवास हाल निवासी कुमावतों की ढाणी तन बोबास थाना जोबनेर व उसकी पत्नी संतोष उर्फ  संती पत्नी बंशीलाल जाट (32) निवासी कुमावतों की ढाणी तन बोबास पुलिस थाना जोबनेर को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। दोनों ने रोजाना की लड़ाई झगड़े और संपत्ति संबंधी विवाद को निपटाने के लिए अपनी मौसी की हत्या करना कबूल किया। जिस पर पुलिस द्वारा  दोनों को गिरफ्तार कर सांभर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। जहां से पुलिस रिमांड सौंपा गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mother-was-murdered-due-to-property-disputes-adopted-son-and/article-11103</link>
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                <pubDate>Thu, 02 Jun 2022 16:15:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन की हरकतें</title>
                                    <description><![CDATA[चीन पूर्वी लद्दाख में पिछले दो साल से चल रहे सीमा विवाद को सुलझाने के बजाए भारत को उकसाने की हरकतों को बढ़ावा देने में जुटा है। पिछले दिनों खबर थी कि चीन व भारत के प्रतिनिधि मिलकर सीमा विवादों के हल पर वार्ता के दौर का सिलसिला शुरू करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/any-solution-to-border-disputes-can-be-found/article-10370"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/46545456465.jpg" alt=""></a><br /><p>चीन पूर्वी लद्दाख में पिछले दो साल से चल रहे सीमा विवाद को सुलझाने के बजाए भारत को उकसाने की हरकतों को बढ़ावा देने में जुटा है। पिछले दिनों खबर थी कि चीन व भारत के प्रतिनिधि मिलकर सीमा विवादों के हल पर वार्ता के दौर का सिलसिला शुरू करेंगे। इससे उम्मीद बंधी थी कि लद्दाख सहित अन्य सीमा विवादों का भविष्य में कोई न कोई हल निकल सकेगा। लेकिन पूर्वी लद्दाख में चल रही उसकी हरकतों से कोई ऐसा संकेत नहीं मिलता की वह सीमा विवाद को हल करने और भारत से रिश्ते सुधारने की कोई जरूरत समझता है। हाल ही ऐसी खबरें आई हैं कि चीन पैंगोंग झील इलाके में एक और नया पुल बनाना शुरू कर दिया है। जिस जगह यह पुल बनाया जा रहा है, उस पर वह लगभग साठ साल से दावा ठोेकता आ रहा है, लेकिन भारत ने कभी इसे मान्यता नहीं दी क्योंकि चीन ने अवैध रूप से इस क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है। यदि यह इलाका उसका वैध हिस्सा होता तो भारत को भला क्या एतराज हो सकता है? सवाल है कि जब  उस इलाके पर उसका अधिकार ही नहीं है, तो उसे तनाव पैदा करने की स्थिति पैदा ही नहीं करनी चाहिए। इससे स्पष्ट जाहिर होता है कि उसका मुख्य मकसद भारत को भड़काने व धमकाने का ही रहा है। चीन ने पैंगोंग झील क्षेत्र में पहले ही एक पुल बना लिया था और अब उसके बराबर दूसरा पुल भी बना रहा है।</p>
<p>साफ है कि चीन इस इलाके में अपनी मोर्चाबंदी को मजबूत कर रहा है और क्षेत्र में अपनी और सैनिक तैनात करने जा रहा है। दो साल पुराने गलवान विवाद के बाद उसकी गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। हालांकि विवाद को खत्म करने के लिए दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच पंद्रह दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं। कूटनीतिक स्तर की वार्ताएं हुई हैं, लेकिन विवाद जस का तस बना हुआ है। चीन भारतीय पक्ष की बात को स्वीकार करने को तैयार नहीं है, तो ऐसी वार्ताओं का कोई औचित्य भी नहीं रह जाता है। चीन तो तनाव को बढ़ाने वाली गतिविधियों में लिप्त है। चीन पूर्वी लद्दाख में ही अवैध निर्माण नहीं कर रहा है बल्कि भारत से सटी अन्य सीमाओं पर भी अवैध निर्माण करने में लगा है। चीन की हरकतें भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है। चीन से निपटने की भारत ने भी तैयारियां कर रखी हैं, लेकिन अवैध निर्माणों पर भी अंकुश लगाने की कोई तैयारी और रणनीति बनाने की जरूरत है। अवैध निर्माण बढ़ते रहे तो विवाद फिर कैसे हल होंगे।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 May 2022 11:02:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्व मण्डल में दर्ज भू-राजस्व के मामलों की हकीकत : रेवेन्यू बोर्ड में पीढ़ियां लड़ रही केस, फिर भी जमीनी विवादों में फैसले नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[विभिन्न राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या तीन लाख 68 हजार के भी पार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/reality-of-land-revenue-cases-registered-in-revenue-board--generations-fighting-cases-in-revenue-board--yet-no-decisions-in-land-disputes/article-5304"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/revenue-board.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। राजस्व मण्डल में लंबित प्रकरणों के निस्तारण की गति धीमी होने के साथ ही भू-राजस्व के वाद रजिस्टर्ड होने की रफ्तार साल दर साल बढ़ती जा रही है। कई प्रकरण तो ऐसे है, जिनमें एक के बाद दूसरी पीढ़ी लड़ रही है, लेकिन उनमें अभी निर्णय होना बाकी है। मण्डल के साथ ही अधीनस्थ न्यायालयों में भी दायर वादों की लाखों तक पहुंच चुकी है, जिनमें अभी निर्णय होना बाकी है। प्रकरणों के निस्तारण में होने वाली देरी के कारण दायर केसों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। राजस्व मण्डल में 31 दिसंबर, 2018 तक लम्बित प्रकरणों की संख्या 63,316 थी, जो 31 जनवरी 2022 तक बढ़कर 64,736 हो गई। अधीनस्थ न्यायालयों में 31 दिसंबर, 2018 तक 3,68,999 प्रकरण लम्बित थे। जनवरी 2019 से जनवरी 2022 तक 3,85,786 प्रकरण दर्ज हुए एवं इस अवधि के दौरान 2,64,122 प्रकरणों के निस्तारण उपरान्त 4,90,663 प्रकरण लम्बित रहें। विधानसभा के एक सवाल में विभाग की ओर से यह जानकारी दी गई है। प्रकरणों के निस्तारण को गति देने के लिए जिला कलेक्टर का अपीलीय अधिकारी, राजस्व अपीलीय अधिकारी के स्थान पर संबंधित संभागीय आयुक्त को राजस्व अपील अधिकारी की शक्तियां देने के लिए राजस्व विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की जा चुकी है।<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>केस नंबर-1</strong></span><br />रेवेन्यू बोर्ड का सबसे पुराना यह प्रकरण 1976 से लंबित है। दो दिन पहले ही सिंग बैंच में रखा गया था, लेकिन निर्णित नहीं हो सका। यह केस 1975 में जिला कलेक्टर जोधपुर के यहां दिया गया था। इसके खिलाफ राजस्व अपील अधिकारी कोर्ट में गया। इसके बाद यह 1976 में रेवेन्यू बोर्ड में आया, तब से अब तक अनिर्णित है।<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>केस नंबर-2</strong></span><br />हनुमानगढ़ में नोहर तहसील का एक मामला है, जो 1973 में एसडीएम के यहां पर डिग्री होने के बाद 1976 में कलेक्टर के बाद रेवेन्यू बोर्ड में पहली बार रेफेंरेंस में आया। ये मामला दो बार 1981 में हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है। इसमें करीब 100-150 पक्षकार है और केस में करीब 12 वकील पैरवी कर रहे हैं।<br /><br /><br />राजस्व मण्डल में जनवरी 2019 से जनवरी 2022 तक राजस्व संबंधी 264122 प्रकरणों का निस्तारण किया गया। राजस्व नियमों में संशोधन एक सतत प्रक्रिया है। लोकहित एवं आवश्यकता के अनुरूप आवश्यक संशोधन समय-समय पर किए जाते है एवं भविष्य में भी आवश्यकतानुसार किए जाएंगे। -<strong>रामलाल जाट, राजस्व मंत्री</strong></p>
<table style="width:778px;">
<tbody>
<tr style="height:41.1667px;">
<td style="width:340.983px;height:41.1667px;text-align:center;"><strong><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;">किस कानून में कितने केस लंबित</span></strong></td>
<td style="width:434.017px;height:41.1667px;text-align:center;"> </td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:340.983px;height:41px;">एक्ट नाम</td>
<td style="width:434.017px;height:41px;">   कुल केस</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:340.983px;height:41px;">एसचीट एक्ट 1956 </td>
<td style="width:434.017px;height:41px;">23</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:340.983px;height:41px;">कोलोनाइजेशन एक्ट 1945 </td>
<td style="width:434.017px;height:41px;">1966</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:340.983px;height:41px;">जमींदारी बिस्वेदारी अधि. 1959</td>
<td style="width:434.017px;height:41px;">8</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:340.983px;height:41px;">जागीर/एबोलेशन एक्ट 1959</td>
<td style="width:434.017px;height:41px;">34</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:340.983px;height:41px;">टीनेंसी एक्ट 1955  </td>
<td style="width:434.017px;height:41px;">34697</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:340.983px;height:41px;">डायरेक्टर लैंड रिकॉर्ड</td>
<td style="width:434.017px;height:41px;">46</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:340.983px;height:41px;">पब्लि.डिमांड रिकवरी एक्ट 1952</td>
<td style="width:434.017px;height:41px;">88</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:340.983px;height:41px;">फोरेस्ट एक्ट 1953 </td>
<td style="width:434.017px;height:41px;">14</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:340.983px;height:41px;">राज.भू राजस्व अधि.1956</td>
<td style="width:434.017px;height:41px;">25493</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:340.983px;height:41px;">लैण्ड रिफॉर्म एएलओई 1963</td>
<td style="width:434.017px;height:41px;">15</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:340.983px;height:41px;">सीलिंग अधिनियम 1973</td>
<td style="width:434.017px;height:41px;">932</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:340.983px;height:41px;">कुल  </td>
<td style="width:434.017px;height:41px;">63316</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p> </p>
<table style="width:778px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:452px;height:41px;"><span style="color:#ff0000;background-color:#ffff99;"><strong>विभिन्न स्तर पर रजिस्टर्ड कुल केसों की स्थिति</strong></span></td>
<td style="width:154.9px;height:41px;">  </td>
<td style="width:168.1px;height:41px;"> </td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:452px;height:41px;">कोर्ट का नाम  </td>
<td style="width:154.9px;height:41px;">पेंडिंग   </td>
<td style="width:168.1px;height:41px;">कुल रजिस्टर्ड</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:452px;height:41px;">संभागीय आयुक्त    </td>
<td style="width:154.9px;height:41px;">5232   </td>
<td style="width:168.1px;height:41px;">6690</td>
</tr>
<tr style="height:57px;">
<td style="width:452px;height:57px;">अति. संभागीय आयु.   </td>
<td style="width:154.9px;height:57px;">1708   </td>
<td style="width:168.1px;height:57px;"><br />3980</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:452px;height:41px;">राजस्व अपील अधि.   </td>
<td style="width:154.9px;height:41px;">20577    </td>
<td style="width:168.1px;height:41px;">12496</td>
</tr>
<tr style="height:57px;">
<td style="width:452px;height:57px;"><br />भू.राजस्व अधि.पदेन    </td>
<td style="width:154.9px;height:57px;">12176   </td>
<td style="width:168.1px;height:57px;">6042</td>
</tr>
<tr style="height:57px;">
<td style="width:452px;height:57px;"><br />जिला कलेक्टर   </td>
<td style="width:154.9px;height:57px;">11551    </td>
<td style="width:168.1px;height:57px;">24741</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:452px;height:41px;">अति.जिला कलेक्टर   </td>
<td style="width:154.9px;height:41px;">18498    </td>
<td style="width:168.1px;height:41px;">24124</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:452px;height:41px;">उपखंड अधिकारी    </td>
<td style="width:154.9px;height:41px;">245070   </td>
<td style="width:168.1px;height:41px;">256780</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:452px;height:41px;">सहायक कलेक्टर  </td>
<td style="width:154.9px;height:41px;">  25960    </td>
<td style="width:168.1px;height:41px;">17987</td>
</tr>
<tr style="height:57px;">
<td style="width:452px;height:57px;"><br />सहा. कलेक्टर(एफटी)  </td>
<td style="width:154.9px;height:57px;">  21174   </td>
<td style="width:168.1px;height:57px;">18444</td>
</tr>
<tr style="height:56.8333px;">
<td style="width:452px;height:56.8333px;"><br />तहसीलदार   </td>
<td style="width:154.9px;height:56.8333px;">4012   </td>
<td style="width:168.1px;height:56.8333px;">9781</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:452px;height:41px;">नायब तहसीलदार    </td>
<td style="width:154.9px;height:41px;">1482   </td>
<td style="width:168.1px;height:41px;">4562</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:452px;height:41px;">उपनिवेशन    </td>
<td style="width:154.9px;height:41px;">1579    </td>
<td style="width:168.1px;height:41px;">119</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:452px;height:41px;">कुल   </td>
<td style="width:154.9px;height:41px;">368999   </td>
<td style="width:168.1px;height:41px;">385786</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p> </p>
<table style="width:778px;">
<tbody>
<tr>
<td style="width:373.083px;"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>कब से पेंडिंग चल रहे हैं केस</strong></span></td>
<td style="width:174.917px;"> </td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">वर्ष    </td>
<td style="width:174.917px;">पेंडिंग केस</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">1976 </td>
<td style="width:174.917px;">1</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">1997  </td>
<td style="width:174.917px;">1</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">1998 </td>
<td style="width:174.917px;">8</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">1999    </td>
<td style="width:174.917px;">11</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2000</td>
<td style="width:174.917px;">65</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2001</td>
<td style="width:174.917px;">192</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2002</td>
<td style="width:174.917px;">409</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2003   </td>
<td style="width:174.917px;">837</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2004 </td>
<td style="width:174.917px;">930</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2005   </td>
<td style="width:174.917px;">1565</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2006</td>
<td style="width:174.917px;">2577</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2007</td>
<td style="width:174.917px;">3938</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2008</td>
<td style="width:174.917px;">3571</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2009</td>
<td style="width:174.917px;">3177</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2010</td>
<td style="width:174.917px;">2757</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2011</td>
<td style="width:174.917px;">3362</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2012</td>
<td style="width:174.917px;">3362</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2013</td>
<td style="width:174.917px;">2741</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2014</td>
<td style="width:174.917px;">3288</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2015</td>
<td style="width:174.917px;">3492</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2016</td>
<td style="width:174.917px;">3834</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2017</td>
<td style="width:174.917px;">4089</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2018</td>
<td style="width:174.917px;">5086</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2019</td>
<td style="width:174.917px;">5083</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2020</td>
<td style="width:174.917px;">3622</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2021</td>
<td style="width:174.917px;">5275</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">2022</td>
<td style="width:174.917px;">465</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:373.083px;">कुल</td>
<td style="width:174.917px;">  64736</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p>  <br /><br /></p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><br /><br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Mar 2022 11:47:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>चीन का संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने नया सीमा कानून बनाकर संदेश दे दिया है कि सीमाओं पर उत्पन्न विवादों को वह स्वीकार नहीं करता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/617941e810b62/article-1948"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/india-china1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>चीन </strong>ने नया सीमा कानून बनाकर संदेश दे दिया है कि सीमाओं पर उत्पन्न विवादों को वह स्वीकार नहीं करता। जहां-जहां सीमाओं पर वह काबिज है, उसी का हिस्सा है। यह कानून 1 जनवरी 2022 से लागू होगा। इस कानून के तहत चीन की सेनाओं को गश्त करने व निर्माण कार्य करने का अधिकार चीन का मकसद कोई छिपी बात नहीं है। वह पहले से ही पड़ोसी देशों की जमीनों पर दादागीरी से कब्जा करता चला आ रहा है। लेकिन यह कानून एक ऐसे वक्त में लाया गया है जब भारत के साथ उसका सीमा विवाद चल रहा है। पूर्वी लद्दाख में उसने भारतीय सीमा के कुछ केन्द्रों पर कब्जा कर रखा है और पक्के निर्माण भी। दोनों देशों के बीच में काफी तनाव है। इसके साथ ही चीन ने सैन्य स्तर की वार्ताओं का क्रम भी जारी रखा हुआ है, जो उसकी गहरी चाल का हिस्सा है। लद्दाख के अलावा चीन ने अरुणाचल प्रदेश व सिक्किम सीमा पर भी सैन्य गतिविधियां बढ़ा रखी हैं और निर्माण कार्य भी कर रहा है। उसके भविष्य के इरादे क्या हैं, इसके बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। फिर दोनों देशों के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद भी चल रहा है, जिनको निपटाने के लिए चीन कतई गंभीर नहीं है। अब तो उसने सीमा संबंधी कानून बनाकर अपनी दुराग्र्रहिता व शत्रुता के आचरण से अवगत करा दिया है। भारत के साथ उसके सीमा विवादों को लेकर अक्सर तनाव बना रहता है। चीन दावा कर रहा है कि उसने अपनी सीमा से लगते बारह देशों के साथ तो सीमा विवादों का समाधान निकाल लिया है। ऐसे में अब भारत और भूटान ही बचे हैं। इसमें भारत के साथ सीमा विवाद काफी पेचीदा और जटिल है। समय-समय पर होने वाले विवादों व तनाव ने इसे ज्यादा बिगाड़ दिया है। ऐसे में चीन अपने भूमि कानून का इस्तेमाल कब और कैसे करेगा। इसमें कोई संदेह भी नहीं होना चाहिए। हर देश को अपनी क्षेत्रीय अखण्डता, संप्रभुता व सीमा की सुरक्षा का अधिकार है और उसे कानून बनाने का भी, लेकिन चीन का नया कानून कुछ नए संकेत भी देता नजर आता है। नए कानून में चीन ने सबसे ज्यादा जोर सीमाओं पर निर्माण, बसावट व आबादी के साथ सम्पर्क आदि बना दिया है। इसमें सीमा की रक्षा पर भी जोर है। यह भी साफ कहा है कि जिस जमीन पर उसका कब्जा है, वह उसकी ही मानी जाएगी। यानी दूसरे देशों की कब्जाई जमीन को चीन नहीं छोड़ेगा। चीन पहले से ही करता चला आ रहा है अब वह कानून की आड़ में और अड़ियल रुख अपनाएगा और संघर्ष की धमकी देगा। चीन का नया कानून एक तरफा होते हुए भी भारत के लिए काफी चुनौती भरा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Oct 2021 18:17:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भर्तियों को लेकर CM गहलोत के दो महत्वपूर्ण निर्णय</title>
                                    <description><![CDATA[शैक्षणिक योग्यता संबंधी विवादों को दूर करने के लिए समिति का गठन : विभागों में रिक्त पदों पर हों नियमित भर्तियां]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/616e8b61e6203/article-1774"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/gehlot_1013.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में भर्तियों को लेकर दो महत्वपूर्ण निर्णय किए हैं। उन्होंने भर्तियों में शैक्षणिक योग्यता तथा शैक्षणिक योग्यता की समकक्षता के संबंध में होने वाले विवादों के समाधान की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही विभागों में रिक्त एवं नवसृजित पदों पर नियमित रूप से भर्तियां करने और इस प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से सम्पन्न कराने के भी उन्होंने निर्देश दिए हैं।<br /> <br /> मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने भर्तियों में शैक्षणिक योग्यता संबंधी विवादों को दूर करने के लिए विभागों में विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में शैक्षिक अर्हता एवं शैक्षिक समकक्षता समिति के गठन तथा नियमित भर्तियों के संबंध में अलग-अलग परिपत्र जारी किए हैं।</p>
<p><br /> परिपत्र के अनुसार समिति में विभागीय अधिकारियों के साथ ही मनोनीत विषय विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा। यह समिति विभिन्न पदों की शैक्षिक अर्हता एवं शैक्षणिक समकक्षता के नियमों को अद्यतन करने के साथ ही उनका स्पष्ट निर्धारण करेगी, जिससे कि ऐसे विवादों को दूर कर भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से सम्पन्न किया जा सके।</p>
<p><br /> उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार में अलग-अलग पदों पर नियुक्ति के लिए बने सेवा नियमों में पद के अनुरूप आवश्यक शैक्षणिक योग्यता का प्रावधान है। साथ ही, इन पदों की वांछित शैक्षणिक योग्यता में डिग्री, डिप्लोमा या पाठ्यक्रम के साथ ही ‘अथवा समकक्ष’ निर्धारित किया जाता है। वर्तमान में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा लगातार नए पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं, जो इन पदों की शैक्षिक अर्हता से संबंधित डिग्री, डिप्लोमा अथवा पाठ्यक्रम के समान ‘अथवा समकक्ष‘ होते हैं। इन सभी कोर्सेज को पद विशेष की शैक्षणिक योग्यता में शामिल कर पाना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में पदों की शैक्षणिक योग्यता को अद्यतन करने तथा भर्तियों में शैक्षणिक योग्यता की समकक्षता के संबंध में होने वाले किसी भी विवाद के समाधान के लिए यह समिति एक संस्थागत व्यवस्था के रूप में कार्य कर सकेगी।</p>
<p><br /> किसी पद की भर्ती में शैक्षणिक योग्यता की समकक्षता के संबंध में विवाद होने पर प्रकरण निर्णय के लिए इस समिति के समक्ष रखा जाएगा। इस स्थिति में कार्मिक विभाग के प्रतिनिधि को भी बैठक में आमंत्रित किया जाएगा। यह समिति नए पाठ्यक्रमों का अध्ययन एवं परीक्षण कर सेवा नियमों को अद्यतन करने एवं समकक्षता के संबंध में अनुशंसा कर सकेगी।<br /> शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार आदि विभागों में शैक्षणिक डिग्रियों के प्रमाणीकरण, अपडेशन एवं शैक्षिक अर्हताओं के स्पष्टीकरण के लिए विशेष प्रकोष्ठ गठित किए जाएंगे। ये प्रकोष्ठ विश्वविद्यालयों, बोर्ड एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों के नियमित सम्पर्क में रहकर उनके द्वारा जारी की जाने वाली डिग्रियों आदि की वैधता तथा मान्यता की जांच कर उनकी सूची विभागीय वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगे।<br /> <br /> <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने तथा रिक्त पद भरने के लिए कार्मिक विभाग की सहमति आवश्यक नहीं</strong></span></span></span></p>
<p>विभागों में रिक्त एवं नवसृजित पदों पर नियमित भर्तियां करने और इस प्रक्रिया को समयबद्ध सम्पन्न कराने के संबंध में मुख्य सचिव द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने एवं रिक्त पदों को भरने के लिए कार्मिक विभाग की सहमति आवश्यक नहीं होगी। सभी प्रशासनिक विभागों द्वारा सीधी भर्ती के पदांें के संबंध में रिक्तियों की गणना 15 अप्रेल तक आवश्यक रूप से सम्पन्न की जाएगी। गणना के लिए 1 अप्रेल को उपलब्ध रिक्तियों, सेवा-निवृत्ति, नवीन पद सृजन अथवा अन्य किसी कारण से 15 अप्रेल तक प्राप्त होने वाली रिक्तियों को शामिल किया जाएगा।</p>
<p><br /> यह भी निर्देश दिए गए हैं कि कार्मिक विभाग द्वारा प्रति वर्ष 15 मई से पूर्व उन सभी विभागों, जिनमें सीधी भर्ती की जानी है अथवा जिनमें रिक्तियां हैं, के संस्थापन कार्य से जुड़े अधिकारियों एवं कार्मिकों की कार्यशाला आयोजित की जाएगी। जिसमें कार्मिकों को भर्तियों से संबंधित सेवा नियमों, प्रक्रिया तथा आरक्षण से संबंधित नवीन प्रावधानों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। विभाग द्वारा उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर सक्षम स्तर से स्वीकृति प्राप्त कर 31 मई से पूर्व अर्थना आरपीएसी, अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड अथवा भर्ती संस्था को प्रेषित की जाएगी। विभागाध्यक्ष सुनिश्चित करेंगे कि 31 मई से पूर्व भर्ती की अर्थना इन एजेन्सियों को प्राप्त हो जाए।</p>
<p><br /> भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से संपादित करने के लिए आरपीएससी तथा कर्मचारी चयन बोर्ड आगामी वर्ष की भर्तियों के लिए कैलेण्डर जारी करेंगे। भर्ती के लिए अर्थना प्राप्त होने के बाद आयोग एवं बोर्ड 15 जुलाई से पूर्व अर्थनाओं का परीक्षण सुनिश्चित करेंगे। इसमें कोई कमी पाए जाने पर प्रशासनिक विभाग अविलम्ब रूप से भर्ती संस्था से समन्वय स्थापित कर 31 अगस्त से पहले अर्थना को पूरी करने की कार्यवाही करेंगे। आयोग एवं कर्मचारी बोर्ड, दोनों में अभ्यर्थियों के लिए आवेदन की एकबारीय पंजीयन व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। किसी भी भर्ती प्रक्रिया के प्रांरभ होने के बाद सेवा नियमों में होने वाले संशोधनों का प्रभाव उस भर्ती पर नहीं होगा।</p>
<p><br /> भर्ती एजेन्सियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया में समय की बचत की दृष्टि से रिक्तियों का न्यूनतम दो गुना अभ्यर्थियों को सत्यापन के लिए आमंत्रित किया जाए। सत्यापन का कार्य परिणाम जारी होने के बाद अधिकतम 45 दिवस में पूरा करना होगा। रिक्तियों की संख्या बहुत अधिक होने पर इसे 15 दिवस तक बढ़ाया जा सकेगा। जिन अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का किसी एक परीक्षा के बाद सत्यापन हो चुका है तो उसके पुनः सत्यापन की आवश्यकता नहीं होगी। सत्यापन के पश्चात सम्पूर्ण चयन सूची एक बार में ही जारी करनी होगी।</p>
<p><br /> सूची जारी होने के बाद विभागों को एक माह में पदस्थापन आदेश जारी करने होंगे। नियुक्ति आदेश जारी होने के बाद अभ्यर्थी को 3 सप्ताह में कार्य ग्रहण करना होगा अन्यथा नियुक्ति आदेश स्वतः निरस्त समझा जाएगा। कार्यग्रहण की समय सीमा में वृद्धि के लिए अभ्यर्थी को अन्तिम तिथि से 7 दिन पूर्व सूचित करना होगा। इस पर विभाग को अन्तिम तिथि से पूर्व ही निर्णय करना होगा। भर्ती परीक्षा में ड्यूटी देने वाले अधिकारी-कर्मचारी भर्ती संस्थाओं के अधीन प्रतिनियुक्ति पर माने जाएंगे। उनके द्वारा अनुशासनहीनता या लापरवाही पर भर्ती संस्थाओं द्वारा अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित की जा सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Oct 2021 15:13:53 +0530</pubDate>
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