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                <title> फिलहाल खुले रहेंगे स्कूल, गाइडलाइन पर फैसला नहीं : नई मंत्रिपरिषद् की पहली बैठक में सुशासन को लेकर लिए कई निर्णय</title>
                                    <description><![CDATA[मंत्री करेंगे नियमित जनसुनवाई, फिर चलेगा शुद्ध के लिए युद्ध अभियान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%82%E0%A4%B2--%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%A1%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AB%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82---%E0%A4%A8%E0%A4%88-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B7%E0%A4%A6%E0%A5%8D-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%A0%E0%A4%95-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%95%E0%A4%88-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A4%AF/article-2710"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/cm-copy3.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मंत्रिपरिषद ने स्कूलों में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है। ऐसे में फिलहाल सतर्कता और कोविड अनुशासन की निरंतर पालना के साथ स्कूल खुले रहेंगे। शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला स्कूलों में कोरोना गाइडलाइन का प्रस्ताव लेकर पहुंचे थे, लेकिन उस पर निर्णय नहीं हुआ। इस प्रस्ताव पर अब सीएम कलेक्टरों व चिकित्सा अधिकारियों के साथ चर्चा कर फैसला लेंगे। मंत्रिपरिषद ने जोर दिया कि कोविड महामारी के प्रसार को रोकने के लिए सतर्कता तथा कोविड अनुशासन की निरन्तर पालना करना जरूरी है। विगत दिनों में कोरोना संक्रमण के मामलों में कुछ वृद्धि हुई है। विद्यालयों में भी  संक्रमण के मामले आए हैं, जिस पर राज्य सरकार चिंतित है। प्रदेश में मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर को लगातार मजबूत किया जा रहा है।<br /><br /></p>
<p><strong>प्रभारी मंत्री जिलों में हर महीने कम से कम दो दिन करेंगे दौरा</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार के मंत्री अब सप्ताह के प्रथम तीन दिवस-सोमवार, मंगलवार एवं बुधवार को जयपुर मुख्यालय पर ही रहकर जनअभाव अभियोग के निराकरण के साथ ही विभागीय योजनाओं की नियमित समीक्षा करेंगे। सभी प्रभारी मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में प्रत्येक माह कम से कम दो दिन का दौरा करना होगा। इस दौरान वे जनसुनवाई करेंगे और जनप्रतिनिधियों के साथ जिले की समस्याओं, राज्य सरकार की योजनाओं एवं कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन का फीडबैक लेंगे और जिला प्रशासन के साथ इन पर समीक्षा करेंगे।</p>
<p><br />गहलोत की अध्यक्षता में बुधवार को नई राज्य मंत्रिपरिषद् की सीएमआर में हुई पहली बैठक में संवेदनशील, पारदर्शी एवं जवाबदेह सुशासन की दिशा में इस तरह के कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में तय किया कि मंत्री जिलों के दौरों में प्रशासन गांवों के संग एवं प्रशासन शहरों के संग अभियान, 20 सूत्री कार्यक्रम,  फ्लैगशिप योजनाओं, जन-घोषणा पत्र तथा बजट घोषणाओं एवं मुख्यमंत्री की घोषणाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग करेंगे।<br /><br /><strong>एक जनवरी से प्रारंभ होगा शुद्ध के लिए युद्ध अभियान</strong><br />मंत्रिपरिषद ने निर्णय किया कि प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट की रोकथाम के लिए नए वर्ष की पहली तारीख से शुद्ध के लिए युद्ध अभियान प्रारंभ होगा। जमीनी स्तर तक इस अभियान की सफलता सुनिश्चित की जाएगी ताकि आमजन को मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से बचाया जा सके। इसके लिए सम्बन्धित विभागों द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जाए। राज्य सरकार निवेश के प्रवाह को बढ़ाने एवं प्रदेश के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए 24-25 जनवरी को इन्वेस्ट राजस्थान सम्मेलन के रूप में एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम होगा। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को कोविड के विपरीत प्रभाव से बाहर निकलने तथा आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में इस आयोजन से बड़ी मदद मिलेगी।</p>
<p><strong><br />सरकार की तीसरी वर्षगांठ पर कई सौगातें</strong><br />मंत्रिपरिषद ने 17 दिसम्बर को राज्य सरकार के कार्यकाल के तीन वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विभिन्न परियोजनाओं एवं विकास कार्यों के प्रस्तावित लोकार्पण एवं शिलान्यास पर भी विस्तृत चर्चा की। इसके बाद निर्णय किया कि सभी मंत्री इस दौरान जिलों में जाएंगे और सफलता के साथ इस कार्य को सम्पादित कराएंगे। इन तीन वर्षों में सरकार ने महिलाओं, युवाओं, आदिवासियों, एससी-एसटी, पिछड़े, अल्पसंख्यक सहित तमाम जरूरतमंद वर्गों की विकास में भागीदारी बढ़ाने के लिए अनेक निर्णय किए हैं।</p>
<p><strong>देर रात सीएम ने की नव नियुक्त सलाहकारों के साथ बैठक</strong></p>
<p>प्रदेश में मंत्री परिषद की बैठक के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को देर रात मुख्यमंत्री निवास पर नव नियुक्त एडवाइजर्स के साथ पहली बैठक की। इस बैठक में प्रदेश में किस प्रकार से सुशासन देने के लिए और बेहतर कार्य किया जा सके, इसे लेकर चर्चा की गई। बैठक में सलाहकार डॉ. जितेंद्र सिंह, संयम लोढ़ा, राजकुमार शर्मा, रामकेश मीणा, बाबूलाल नागर और दानिश अबरार शामिल हुए।</p>
<p><br /><br /><br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 25 Nov 2021 11:42:33 +0530</pubDate>
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                <title>डाबर च्यवनप्राश का नियमित सेवन वायू प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से रखता है सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक डाबर च्यवनप्राश का नियमित सेवन वायू प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से रखता है सुरक्षित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%A1%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%B0-%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%82-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%95-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%96%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4/article-2519"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/dabar.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आयुर्वेद कंपनी डाबर इंडिया लिमिटेड ने अपने प्रीमियम आयुर्वेदिक प्रोडक्ट- डाबर च्यवनप्राश पर एक वैज्ञानिक अध्ययन किया है। इस अध्ययन के द्वारा यह जानने की कोशिश की गई कि पार्टीकुलेट मैटर के कारण होने वाली श्वास संबंधी  की बीमारियों पर डाबर च्यवनप्राश किस तरह से असरदार है। अध्ययन से पता चला है कि डाबर च्यवनप्राश वायु प्रदूषकों जैसे पीएम 2.5 के कारण होने वाली फेफड़ों संबंधी बीमारियों से सुरक्षित रखने में काफ़ी कारगर है।<br /><br />अध्ययन के परिणामों से पता चला हे कि डाबर च्यवनप्राश का नियमित सेवन करने से इन्फेक्शन और पार्टीकुलेट मैटर के कारण फेफड़ों की बीमारियों की संभावना कम हो सकती  है। च्यवनप्राश सेहत के लिए, खासतौर पर रेस्पीरेटरी सिस्टम के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। यह शरीर की इम्यूनिटी  बढ़ाकर क्रोनिक रेस्पीरेटरी रोगों जैसे क्षय (ट्युबरकुलोसिस)  म॓ समर्थन देता है।च्यवनप्राश में ऐसी कई जड़ी-बूटियां हैं जो सेहत के लिए फायदेमंद हैं और प्राचीनकाल से ही इम्यूनिटी बढ़ाने एवं लम्बी उम्र के लिए इनका उपयोग किया जाता रहा है।</p>
<p><br />इन परिणामों के बारे में बात करते हुए राजीव जॉन, वाईस प्रेज़ीडेन्ट- मार्केटिंग, डाबर इंडिया लिमिटेड ने कहा, ‘‘बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है और इसकी वजह से लोग कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। आज इम्युनिटी बढ़ाना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो चुका है। 40  से अधिक जड़ी-बूटियों जैसे आंवला, अश्वगंधा और गिलोय के गुणों से भरपूर डाबर च्यवनप्राश हमेशा से एलर्जी और इन्फेक्शन से लड़ने के लिए इम्यूनिटी बढ़ाता रहा है। सीपीसीएसईए के दिशा निर्देशों को ध्यान में रखते हुए किए गए इस अध्ययन के बाद हमें विश्वास है कि डाबर च्यवनप्राश खासतौर पर शहरी भारत के लोगों को वायू प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से सुरक्षित रखने में मददगार है।’ <br /><br />वायू प्रदूषण में पार्टीकुलेट मैटर मुख्य रूप से पाया जाता है, इसमें प्राकृतिक एवं मानवजनित स्रोतों से उत्पन्न होने वाले हानिकारक पदार्थ होते हैं। पार्टीकुलेट मैटर के कणों का आकार 2.5 स॓10 मिलीमीटर या इससे भी कम हो सकता है । ऐसे में ये लम्बे समय तक हवा में बने रहते हैं और सांस के साथ शरीर के भीतर जाकर फेफड़ों में जमा होने लगते हैं। ये मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।<br /><br /></p>
<p>डॉ जेएलएन शास्त्री, ग्लोबल आर एण्ड डी हैड, डाबर इंडिया लिमिटेड ने कहा कि इससे पहले भी डाबर ने कई क्लीनिकल और प्रीक्लीनिकल अध्ययन किए हैं जो बताते हैं कि च्यवनप्राश इम्यूनिटी , मौसम में बदलाव के कारण होने वाली बीमारियों, एलर्जी एवं इन्फेक्शन आदि के लिए काफ़ी फायदेमंद है। च्यवनप्राश त्रिदोष- वात, पित्त और कफ को संतुलित बनाने में मदद करता है, जिनका विवरण प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में दिया गया है। यह डेनड्रिटिकसैल्स, एन के सैल्स और मैक्रोफेजेज़ को एक्टिवेट कर जर्म्स से लड़ने में मदद करता है। डाबर हमेशा से आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के संयोजन के साथ हेल्थ सोल्युशन्स लाता रहा है। इस अध्ययन के परिणाम इम्यूनिटी  के लिए च्यवनप्राश के फायदों को  दर्शते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Thu, 18 Nov 2021 16:45:54 +0530</pubDate>
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                <title>भर्तियों को लेकर CM गहलोत के दो महत्वपूर्ण निर्णय</title>
                                    <description><![CDATA[शैक्षणिक योग्यता संबंधी विवादों को दूर करने के लिए समिति का गठन : विभागों में रिक्त पदों पर हों नियमित भर्तियां]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/616e8b61e6203/article-1774"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/gehlot_1013.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में भर्तियों को लेकर दो महत्वपूर्ण निर्णय किए हैं। उन्होंने भर्तियों में शैक्षणिक योग्यता तथा शैक्षणिक योग्यता की समकक्षता के संबंध में होने वाले विवादों के समाधान की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही विभागों में रिक्त एवं नवसृजित पदों पर नियमित रूप से भर्तियां करने और इस प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से सम्पन्न कराने के भी उन्होंने निर्देश दिए हैं।<br /> <br /> मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने भर्तियों में शैक्षणिक योग्यता संबंधी विवादों को दूर करने के लिए विभागों में विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में शैक्षिक अर्हता एवं शैक्षिक समकक्षता समिति के गठन तथा नियमित भर्तियों के संबंध में अलग-अलग परिपत्र जारी किए हैं।</p>
<p><br /> परिपत्र के अनुसार समिति में विभागीय अधिकारियों के साथ ही मनोनीत विषय विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा। यह समिति विभिन्न पदों की शैक्षिक अर्हता एवं शैक्षणिक समकक्षता के नियमों को अद्यतन करने के साथ ही उनका स्पष्ट निर्धारण करेगी, जिससे कि ऐसे विवादों को दूर कर भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से सम्पन्न किया जा सके।</p>
<p><br /> उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार में अलग-अलग पदों पर नियुक्ति के लिए बने सेवा नियमों में पद के अनुरूप आवश्यक शैक्षणिक योग्यता का प्रावधान है। साथ ही, इन पदों की वांछित शैक्षणिक योग्यता में डिग्री, डिप्लोमा या पाठ्यक्रम के साथ ही ‘अथवा समकक्ष’ निर्धारित किया जाता है। वर्तमान में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा लगातार नए पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं, जो इन पदों की शैक्षिक अर्हता से संबंधित डिग्री, डिप्लोमा अथवा पाठ्यक्रम के समान ‘अथवा समकक्ष‘ होते हैं। इन सभी कोर्सेज को पद विशेष की शैक्षणिक योग्यता में शामिल कर पाना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में पदों की शैक्षणिक योग्यता को अद्यतन करने तथा भर्तियों में शैक्षणिक योग्यता की समकक्षता के संबंध में होने वाले किसी भी विवाद के समाधान के लिए यह समिति एक संस्थागत व्यवस्था के रूप में कार्य कर सकेगी।</p>
<p><br /> किसी पद की भर्ती में शैक्षणिक योग्यता की समकक्षता के संबंध में विवाद होने पर प्रकरण निर्णय के लिए इस समिति के समक्ष रखा जाएगा। इस स्थिति में कार्मिक विभाग के प्रतिनिधि को भी बैठक में आमंत्रित किया जाएगा। यह समिति नए पाठ्यक्रमों का अध्ययन एवं परीक्षण कर सेवा नियमों को अद्यतन करने एवं समकक्षता के संबंध में अनुशंसा कर सकेगी।<br /> शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार आदि विभागों में शैक्षणिक डिग्रियों के प्रमाणीकरण, अपडेशन एवं शैक्षिक अर्हताओं के स्पष्टीकरण के लिए विशेष प्रकोष्ठ गठित किए जाएंगे। ये प्रकोष्ठ विश्वविद्यालयों, बोर्ड एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों के नियमित सम्पर्क में रहकर उनके द्वारा जारी की जाने वाली डिग्रियों आदि की वैधता तथा मान्यता की जांच कर उनकी सूची विभागीय वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगे।<br /> <br /> <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने तथा रिक्त पद भरने के लिए कार्मिक विभाग की सहमति आवश्यक नहीं</strong></span></span></span></p>
<p>विभागों में रिक्त एवं नवसृजित पदों पर नियमित भर्तियां करने और इस प्रक्रिया को समयबद्ध सम्पन्न कराने के संबंध में मुख्य सचिव द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने एवं रिक्त पदों को भरने के लिए कार्मिक विभाग की सहमति आवश्यक नहीं होगी। सभी प्रशासनिक विभागों द्वारा सीधी भर्ती के पदांें के संबंध में रिक्तियों की गणना 15 अप्रेल तक आवश्यक रूप से सम्पन्न की जाएगी। गणना के लिए 1 अप्रेल को उपलब्ध रिक्तियों, सेवा-निवृत्ति, नवीन पद सृजन अथवा अन्य किसी कारण से 15 अप्रेल तक प्राप्त होने वाली रिक्तियों को शामिल किया जाएगा।</p>
<p><br /> यह भी निर्देश दिए गए हैं कि कार्मिक विभाग द्वारा प्रति वर्ष 15 मई से पूर्व उन सभी विभागों, जिनमें सीधी भर्ती की जानी है अथवा जिनमें रिक्तियां हैं, के संस्थापन कार्य से जुड़े अधिकारियों एवं कार्मिकों की कार्यशाला आयोजित की जाएगी। जिसमें कार्मिकों को भर्तियों से संबंधित सेवा नियमों, प्रक्रिया तथा आरक्षण से संबंधित नवीन प्रावधानों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। विभाग द्वारा उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर सक्षम स्तर से स्वीकृति प्राप्त कर 31 मई से पूर्व अर्थना आरपीएसी, अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड अथवा भर्ती संस्था को प्रेषित की जाएगी। विभागाध्यक्ष सुनिश्चित करेंगे कि 31 मई से पूर्व भर्ती की अर्थना इन एजेन्सियों को प्राप्त हो जाए।</p>
<p><br /> भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से संपादित करने के लिए आरपीएससी तथा कर्मचारी चयन बोर्ड आगामी वर्ष की भर्तियों के लिए कैलेण्डर जारी करेंगे। भर्ती के लिए अर्थना प्राप्त होने के बाद आयोग एवं बोर्ड 15 जुलाई से पूर्व अर्थनाओं का परीक्षण सुनिश्चित करेंगे। इसमें कोई कमी पाए जाने पर प्रशासनिक विभाग अविलम्ब रूप से भर्ती संस्था से समन्वय स्थापित कर 31 अगस्त से पहले अर्थना को पूरी करने की कार्यवाही करेंगे। आयोग एवं कर्मचारी बोर्ड, दोनों में अभ्यर्थियों के लिए आवेदन की एकबारीय पंजीयन व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। किसी भी भर्ती प्रक्रिया के प्रांरभ होने के बाद सेवा नियमों में होने वाले संशोधनों का प्रभाव उस भर्ती पर नहीं होगा।</p>
<p><br /> भर्ती एजेन्सियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया में समय की बचत की दृष्टि से रिक्तियों का न्यूनतम दो गुना अभ्यर्थियों को सत्यापन के लिए आमंत्रित किया जाए। सत्यापन का कार्य परिणाम जारी होने के बाद अधिकतम 45 दिवस में पूरा करना होगा। रिक्तियों की संख्या बहुत अधिक होने पर इसे 15 दिवस तक बढ़ाया जा सकेगा। जिन अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का किसी एक परीक्षा के बाद सत्यापन हो चुका है तो उसके पुनः सत्यापन की आवश्यकता नहीं होगी। सत्यापन के पश्चात सम्पूर्ण चयन सूची एक बार में ही जारी करनी होगी।</p>
<p><br /> सूची जारी होने के बाद विभागों को एक माह में पदस्थापन आदेश जारी करने होंगे। नियुक्ति आदेश जारी होने के बाद अभ्यर्थी को 3 सप्ताह में कार्य ग्रहण करना होगा अन्यथा नियुक्ति आदेश स्वतः निरस्त समझा जाएगा। कार्यग्रहण की समय सीमा में वृद्धि के लिए अभ्यर्थी को अन्तिम तिथि से 7 दिन पूर्व सूचित करना होगा। इस पर विभाग को अन्तिम तिथि से पूर्व ही निर्णय करना होगा। भर्ती परीक्षा में ड्यूटी देने वाले अधिकारी-कर्मचारी भर्ती संस्थाओं के अधीन प्रतिनियुक्ति पर माने जाएंगे। उनके द्वारा अनुशासनहीनता या लापरवाही पर भर्ती संस्थाओं द्वारा अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित की जा सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Oct 2021 15:13:53 +0530</pubDate>
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