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                <title>Supreme Court Appeal - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Supreme Court Appeal RSS Feed</description>
                
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                <title>राम रहीम को मिली पैरोल: 8 साल में 17 बार आए जेल से बाहर, जानें कब लौटेंगे जेल ?</title>
                                    <description><![CDATA[डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 21 दिन की पैरोल मिलने के बाद मंगलवार को रोहतक की सुनारिया जेल से रिहा कर दिया गया। वह कड़ी सुरक्षा के बीच सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय पहुंचे। 2017 में दुष्कर्म के मामलों में 20 साल की सजा पाने के बाद से यह 17वीं बार है जब वह पैरोल पर बाहर आए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ram-rahim-got-parole-came-out-of-jail-17-times/article-163794"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/gurmit-ram-rahim.png" alt=""></a><br /><p>रोहतक। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 21 दिन की पैरोल मंजूर होने के बाद मंगलवार को रोहतक की सुनारिया जेल से रिहा किया गया। वह आज सुबह करीब 6:05 बजे जेल से निकलने के बाद सिरसा स्थित डेरा पहुंचे। उनके वाहन काफिले में दो पुलिस एस्कॉर्ट वाहन शामिल थे। राम रहीम को वर्ष 2017 में दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामलों में दोषी ठहराया गया था। पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने 25 अगस्त 2017 को उसे दोषी करार दिया था और 28 अगस्त को दोनों मामलों में कुल 20 वर्ष की सजा सुनाई थी। इसके बाद से वह रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहे हैं। वह यह करीब नौ वर्षों में 17वीं बार पैरोल पर जेल से बाहर आये है।</p>
<p>इस वर्ष जनवरी में उन्हें 40 दिन की पैरोल और 26 मई को 30 दिन की पैरोल मिली थी। 30 दिन की पैरोल पूरी होने के बाद वह 25 जून को जेल लौट गये थे रणजीत सिंह हत्याकांड में भी उन्हें उम्रकैद की सजा मिली थी, लेकिन मई 2024 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने उन्हें बरी कर दिया। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में भी उच्च न्यायालय ने मार्च 2026 में उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी थी। हालांकि, इस फैसले के खिलाफ छत्रपति के बेटे की अपील पर उच्चतम न्यायालय ने अगस्त 2026 में सुनवाई की अनुमति दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 11:52:02 +0530</pubDate>
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                <title>स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्राधिकरण को नोटिस का जवाब भेजा, बोलें-ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने नियुक्त किया था उत्तराधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण के नोटिस को 'असंवैधानिक' बताते हुए 8 पन्नों का कानूनी जवाब भेजा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अभिषेक सुप्रीम कोर्ट की रोक से पहले ही संपन्न हो चुका था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/swami-avimukteshwaranand-sent-a-reply-to-the-notice-to-the/article-140391"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)10.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण के नोटिस का जवाब उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता ए के मिश्रा के माध्यम से भेज दिया है। अधिवक्ता की तरफ से कल रात आठ पन्नों का प्रयागराज मेला प्राधिकरण को भेजे गए है इस विस्तृत जवाब में मेला प्राधिकरण के आरोपों को सिरे से नकार दिया गया है। नोटिस के जवाब में कहा गया है कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी ने जीवनकाल में ही अविमुक्तेश्वरा नंद को उत्तराधिकारी नियुक्त किया था।</p>
<p>11 सितंबर 2022 को ब्रह्मलीन हुए थे शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज 12 सितंबर 2022 को वैदिक विधिविधान के साथ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विधिवत अभिषेक किया गया एवं सार्वजनिक समारोह में शंकराचार्य पद पर प्रतिष्ठापन किया गया था। उच्चतम न्यायालय के संज्ञान में लाया गया कि अभिषेक पहले ही हो चुका था, 14 अक्टूबर 2022 के आदेश में यह तथ्य दर्ज है</p>
<p>शंकराचार्य पद पर बने रहने को लेकर किसी भी न्यायालय से कोई स्थगन आदेश नहीं है। श्रृंगेरी, द्वारका और पुरी पीठ के शंकराचार्यों का समर्थन होने का दावा किया गया है। भारत धर्म महामंडल द्वारा भी मान्यता का उल्लेख किया गया है। ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की पंजीकृत वसीयत को वैध बताया गया है। गुजरात उच्च न्यायालय ने वसीयत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की थी। </p>
<p>यह जानकारी नोटिस के जवाब में दी गई है। विरोधी पक्ष के बयानों को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में मानहानि वाद दायर किया गया था। लेकिन विरोधी द्वारा दायर आवेदन बाद में वापस लिया गया कुछ व्यक्तियों पर उच्चतम न्यायालय में गलत जानकारी देने का आरोप भी लगा था। फर्जी दस्तावेज पेश करने और भ्रम फैलाने का दावा किया गया है। इस नोटिस में प्रयागराज मेला प्राधिकरण के पत्र को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया गया है। इस प्रशासनिक हस्तक्षेप को असंवैधानिक करार दिया है मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन तीसरे पक्ष के बयान को न्यायाधीन बताया गया है।</p>
<p>शंकराचार्य पद को लेकर भ्रम फैलने से सामाजिक और प्रतिष्ठा की क्षति का दावा किया गया है। नोटिस के जवाब में यह कहा गया है कि अगर 24 घंटे में अगर मेला प्रशासन ने नोटिस वापस नहीं लेता है, तो न्यायालय की अवमानना और शंकराचार्य परंपरा एवं स्वामी जी की छवि धूमिल करने के लिए विधिक कार्यवाही की जाएगी। नोटिस का जवाब प्राधिकरण उपाध्यक्ष को मेल के जरिए भी भेजा गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jan 2026 17:28:25 +0530</pubDate>
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