<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/contempt-of-court/tag-68661" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>Contempt of Court - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/68661/rss</link>
                <description>Contempt of Court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अवैध भूमि पट्टा वितरण मामला: मेघायल सीएम कॉनराड संगमा और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज, जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा और जिलाधिकारी के खिलाफ भूमि पट्टों के कथित अवैध वितरण हेतु प्राथमिकी दर्ज की गई है। दानाकग्रे अखिंग की ग्राम प्रधान का आरोप है कि मामला उच्च न्यायालय में लंबित होने के बावजूद पट्टे बांटे गए। इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन और अदालत की अवमानना बताते हुए न्याय की मांग की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/illegal-land-lease-distribution-case-fir-registered-against-meghalaya-cm/article-145488"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/meghalaya-cm-conrad-sangma.png" alt=""></a><br /><p>शिलांग। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा, पश्चिमी गारो हिल्स के जिलाधिकारी विभोर अग्रवाल और अन्य के खिलाफ अखिंग क्षेत्र में कथित तौर पर भूमि पट्टों के अवैध वितरण के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गयी है। ये प्राथमिकियां गुरुवार को पश्चिम गारो हिल्स जिले के अराइमिले थाने में दानाकग्रे अखिंग गांव की ग्राम प्रधान एनिला च. मारक और उनकी बेटी अमान्चे च. मारक द्वारा दर्ज करायी गयी हैं।</p>
<p>नोकमा और उनकी बेटी ने नेशनल पीपुल्स पार्टी के उम्मीदवार चार्मिंग एन. संगमा, तुरा नगर बोर्ड के अध्यक्ष जे.डी. संगमा, पश्चिम गारो हिल्स के डीसी और अतिरिक्त उपायुक्त के साथ-साथ उन सभी अधिकारियों या नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज करने का अनुरोध किया है, जिन्होंने दानाकग्रे अखिंग में पट्टा वितरण की शुरुआत की थी।</p>
<p>शिकायतकर्ताओं ने दर्ज प्राथमिकी में कहा कि मेघालय सरकार, उपायुक्त, उपायुक्त (राजस्व) और अन्य के खिलाफ शिलांग स्थित मेघालय उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी। इसमें दानाकग्रे अखिंग के इलाकों को मनमाने ढंग से सरकारी भूमि बताकर भूमि के अवैध बंदोबस्त को चुनौती दी गई थी।</p>
<p>प्राथमिकी में कहा गया है, यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और पिछले साल ही सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। मामले के लंबित होने के बावजूद, इस साल की शुरुआत में हमें पता चला कि अवैध रूप से दावा की गई सरकारी भूमि से संबंधित निवासियों की सूची, प्लॉट नंबर, भूमि का वर्गीकरण और दरों का विवरण प्रसारित किया गया है।</p>
<p>मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने 11 फरवरी, 2026 को व्यक्तिगत रूप से दानाकग्रे अखिंग के अंतर्गत आने वाले निकवतग्रे इलाके में निवासियों को पट्टे वितरित किए थे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जब मामला अदालत में लंबित है, तब भारी रकम के भुगतान पर निवासियों को ये पट्टे लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है।</p>
<p>प्राथमिकी के अनुसार, चूंकि मामला उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित था, इसलिए पट्टों का जारी करना और वितरण करना छठी अनुसूची के तहत मान्यता प्राप्त प्रधानों के संवैधानिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है। चल रही न्यायिक कार्यवाही के बीच पट्टे बांटने का कार्य अदालत की अवमानना और हमारे प्रथागत एवं संवैधानिक अधिकारों का हनन है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/illegal-land-lease-distribution-case-fir-registered-against-meghalaya-cm/article-145488</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/illegal-land-lease-distribution-case-fir-registered-against-meghalaya-cm/article-145488</guid>
                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 15:08:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/meghalaya-cm-conrad-sangma.png"                         length="819951"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने लगाई NCERT को फटकार: विवादित पुस्तक पर लगाया प्रतिबंध, जानें क्या है पूरा मामला?</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का संदर्भ देने वाली NCERT कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक के पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर लगाया प्रतिबंध। कोर्ट ने इसे बदनाम करने की साजिश बताया। दो सप्ताह में मांगी अनुपालन रिपोर्ट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-reprimands-ncert-bans-textbook-containing-chapter-on-corruption/article-144704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/ncert-and-supreme-court.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की उस पाठ्यपुस्तक के पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का संदर्भ दिया गया था। न्यायालय ने प्रचलन में मौजूद किताबों की प्रतियों को तुरंत जब्त करने का निर्देश दिया और इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट मांगी ।</p>
<p>न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह एनसीईआरटी के निदेशक और उन सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी जहां यह किताब पहुंची है। उन्हें अपने परिसर में मौजूद किताब की सभी प्रतियों को तुरंत जब्त कर सील करना होगा। शीर्ष अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि संबंधित पुस्तक के आधार पर छात्रों को कोई निर्देश या शिक्षा न दी जाए। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को इस आदेश का पालन करने और दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों या बदले हुए शीर्षकों के जरिए इस आदेश का उल्लंघन करने की किसी भी कोशिश को अदालत की अवमानना और निर्देशों की सीधी अवहेलना माना जाएगा। इससे पहले बुधवार को मुख्य न्यायाधीश ने पुस्तक की सामग्री पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था कि वह किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं देंगे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के नेतृत्व वाली पीठ ने इसे न्यायपालिका के खिलाफ एक गहरी साजिश करार दिया। वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल और डॉक्टर अभिषेक मनु सिंघवी ने भी अदालत के समक्ष इस पाठ्यपुस्तक की सामग्री पर चिंता जताई थी और कहा था कि यह पूरी न्यायपालिका की छवि को खराब कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-reprimands-ncert-bans-textbook-containing-chapter-on-corruption/article-144704</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-reprimands-ncert-bans-textbook-containing-chapter-on-corruption/article-144704</guid>
                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 15:16:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/ncert-and-supreme-court.png"                         length="807599"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्राधिकरण को नोटिस का जवाब भेजा, बोलें-ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने नियुक्त किया था उत्तराधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण के नोटिस को 'असंवैधानिक' बताते हुए 8 पन्नों का कानूनी जवाब भेजा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अभिषेक सुप्रीम कोर्ट की रोक से पहले ही संपन्न हो चुका था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/swami-avimukteshwaranand-sent-a-reply-to-the-notice-to-the/article-140391"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)10.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण के नोटिस का जवाब उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता ए के मिश्रा के माध्यम से भेज दिया है। अधिवक्ता की तरफ से कल रात आठ पन्नों का प्रयागराज मेला प्राधिकरण को भेजे गए है इस विस्तृत जवाब में मेला प्राधिकरण के आरोपों को सिरे से नकार दिया गया है। नोटिस के जवाब में कहा गया है कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी ने जीवनकाल में ही अविमुक्तेश्वरा नंद को उत्तराधिकारी नियुक्त किया था।</p>
<p>11 सितंबर 2022 को ब्रह्मलीन हुए थे शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज 12 सितंबर 2022 को वैदिक विधिविधान के साथ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विधिवत अभिषेक किया गया एवं सार्वजनिक समारोह में शंकराचार्य पद पर प्रतिष्ठापन किया गया था। उच्चतम न्यायालय के संज्ञान में लाया गया कि अभिषेक पहले ही हो चुका था, 14 अक्टूबर 2022 के आदेश में यह तथ्य दर्ज है</p>
<p>शंकराचार्य पद पर बने रहने को लेकर किसी भी न्यायालय से कोई स्थगन आदेश नहीं है। श्रृंगेरी, द्वारका और पुरी पीठ के शंकराचार्यों का समर्थन होने का दावा किया गया है। भारत धर्म महामंडल द्वारा भी मान्यता का उल्लेख किया गया है। ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की पंजीकृत वसीयत को वैध बताया गया है। गुजरात उच्च न्यायालय ने वसीयत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की थी। </p>
<p>यह जानकारी नोटिस के जवाब में दी गई है। विरोधी पक्ष के बयानों को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में मानहानि वाद दायर किया गया था। लेकिन विरोधी द्वारा दायर आवेदन बाद में वापस लिया गया कुछ व्यक्तियों पर उच्चतम न्यायालय में गलत जानकारी देने का आरोप भी लगा था। फर्जी दस्तावेज पेश करने और भ्रम फैलाने का दावा किया गया है। इस नोटिस में प्रयागराज मेला प्राधिकरण के पत्र को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया गया है। इस प्रशासनिक हस्तक्षेप को असंवैधानिक करार दिया है मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन तीसरे पक्ष के बयान को न्यायाधीन बताया गया है।</p>
<p>शंकराचार्य पद को लेकर भ्रम फैलने से सामाजिक और प्रतिष्ठा की क्षति का दावा किया गया है। नोटिस के जवाब में यह कहा गया है कि अगर 24 घंटे में अगर मेला प्रशासन ने नोटिस वापस नहीं लेता है, तो न्यायालय की अवमानना और शंकराचार्य परंपरा एवं स्वामी जी की छवि धूमिल करने के लिए विधिक कार्यवाही की जाएगी। नोटिस का जवाब प्राधिकरण उपाध्यक्ष को मेल के जरिए भी भेजा गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/swami-avimukteshwaranand-sent-a-reply-to-the-notice-to-the/article-140391</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/swami-avimukteshwaranand-sent-a-reply-to-the-notice-to-the/article-140391</guid>
                <pubDate>Wed, 21 Jan 2026 17:28:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-01/500-px%2910.png"                         length="1455686"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        