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                <title>Multilateralism - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>डब्लूटीओ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन बेनतीजा: अमेरिका समर्थित डिजिटल सीमा शुल्क छूट पर ब्राजील और तुर्की ने लगाई रोक, विदेश मंत्री मौरो विएरा ने एकपक्षीय उपायों और व्यापार समझौतों की आलोचना की </title>
                                    <description><![CDATA[विश्व व्यापार संगठन (WTO) का 14वां सम्मेलन बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गया। ब्राजील और तुर्की ने इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर सीमा शुल्क छूट को 2030 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को रोक दिया। ब्राजील ने 1994 के पुराने नियमों में ढांचागत सुधारों की मांग की है, जबकि अमेरिका ने बहुपक्षीय समझौते की विफलता पर गहरी निराशा व्यक्त की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/wto-ministerial-conference-inconclusive-brazil-and-turkey-block-us-backed-digital/article-148572"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/wto.png" alt=""></a><br /><p>याओउंडे। विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) का 14वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन सोमवार को गतिरोध के साथ समाप्त हो गया। ब्राजील और तुर्की ने इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर सीमा शुल्क से मिलने वाली छूट को 2030 के अंत तक बढ़ाने के अमेरिका समर्थित समझौते को रोक दिया। पिछले 28 वर्षों से मिली यह छूट देशों को डिजिटल वस्तुओं पर टैरिफ लगाने से रोकती है, जो वैश्विक ई-कॉमर्स का प्रमुख आधार है। ब्राजील ने डब्ल्यूटीओ में व्यापक सुधारों का आह्वान किया और चेतावनी दी कि नियमों पर आधारित व्यापार प्रणाली अभूतपूर्व दबाव में है। विदेश मंत्री मौरो विएरा ने उन एकपक्षीय उपायों और व्यापार समझौतों की आलोचना की, जो ब्राजील के विचार में डब्ल्यूटीओ की कानूनी सुसंगतता को कमजोर करते हैं और निर्यातकों व विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए पूर्वानुमान की स्थिति को खतरे में डालते हैं।</p>
<p>विएरा ने कहा, "वर्तमान में महसूस की जा रही विखंडन की शक्तियों को दशकों के वार्ता गतिरोध ने और बढ़ा दिया है।" उन्होंने कृषि और डिजिटल व्यापार तथा स्थिरता जैसे उभरते मुद्दों पर रुकी हुई चर्चाओं का हवाला दिया। उन्होंने डब्ल्यूटीओ की अपीलीय संस्था के पंगु होने का भी उल्लेख किया, जिससे सदस्यों के पास या तो अनसुलझे विवाद बचते हैं या उपायों और जवाबी उपायों का एक खतरनाक चक्र' शुरू हो जाता है।</p>
<p>विएरा ने आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रतिबिंबित करने के लिए संरचनात्मक और व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया, न कि 1994 के उस ढांचे की जिसके तहत डब्ल्यूटीओ बनाया गया था। उन्होंने कहा, "ब्राजील जबरदस्ती के बजाय बातचीत को, शक्ति के बजाय नियमों को और विखंडन के बजाय बहुपक्षवाद को चुनता है।" अमेरिका ने इस मोहलत को आगे बढ़ाने में विफलता पर निराशा व्यक्त की। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि और डब्ल्यूटीओ में राजदूत जेमीसन ग्रीर ने कहा, "महीनों की तैयारी और जुड़ाव के बावजूद भविष्य के वैश्विक व्यापार नीति प्रयासों में डब्ल्यूटीओ केवल सीमित भूमिका ही निभा पायेगा।"</p>
<p>उन्होंने उल्लेख किया कि अमेरिका ने अधिकतर प्रमुख व्यापारिक भागीदारों से अमेरिकी डिजिटल वस्तुओं पर टैरिफ न लगाने की प्रतिबद्धता हासिल कर ली है। यदि आम सहमति नहीं बन पाती है, तो अमेरिका डब्ल्यूटीओ के बाहर एक बहुपक्षीय ई-कॉमर्स समझौता करने की योजना बना रहा है। उप अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जोसेफ बारलून ने कहा कि हालांकि कई सदस्यों ने रचनात्मक रूप से भाग लिया, लेकिन समझौता सुरक्षित करने में असमर्थता "उन वास्तविक सीमाओं को उजागर करती है जो डब्ल्यूटीओ में हासिल की जा सकती हैं।" इस मंत्रिस्तरीय सम्मेलन की अध्यक्षता कैमरून के व्यापार मंत्री ल्यूक मैग्लौयर म्बार्गा अतांगाना ने की। यह डब्ल्यूटीओ की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। यह गतिरोध डिजिटल व्यापार, व्यापक संस्थागत सुधारों और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की प्रभावशीलता पर सदस्य देशों के बीच निरंतर मतभेदों को दर्शाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:09:52 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका नहीं, मैं हूं दुनिया का असली लीडर, चीन का बड़ा ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनलैंड पर ट्रंप की चेतावनी से यूरोपीय सहयोगी असहज हैं। चीन ने बहुपक्षवाद, मुक्त व्यापार और सहयोग की बात कर खुद को नया वैश्विक विकल्प पेश किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/i-am-not-america-i-am-the-real-leader-of/article-140438"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trunp-and-china.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुश्मनों से ज्यादा दोस्तों पर भारी पड़ रहे हैं। पहले उन्होंने टैरिफ लगाकर दुनिया की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया। अब वह ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर अमेरिका के खास कहे जाने वाले यूरोपीय सहयोगियों को हड़का रहे हैं। उन्होंने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे का विरोध करने वाले देशों पर टैरिफ की धमकी भी दी है। हालांकि, यूरोपीय देशों ने भी न झुकने की कसम खाई है। इस बीच चीन ने खुद को एक वैकल्पिक वैश्विक नेता के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया है। बड़ी बात यह है कि अमेरिका के सहयोगी देश भी चीन के साथ अपना भविष्य देख रहे हैं और नजदीकियां बढ़ा रहे हैं।</p>
<p><strong>चीन ने खुद को बताया दुनिया का नया नेता</strong></p>
<p>ट्रंप की ग्रीनलैंड पर चेतावनी के कुछ घंटों बाद, चीनी उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग ने सालाना अल्पाइन बैठक में मंच पर जोर देकर कहा कि बीजिंग लगातार साझा भविष्य वाले समुदाय की सोच पर काम कर रहा है और बहुपक्षवाद और मुक्त व्यापार का समर्थन करने में दृढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम सहमति और एकजुटता को बढ़ावा दे रहे हैं, और फूट और टकराव के बजाय सहयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। दुनिया की आम समस्याओं के लिए चीन समाधान पेश कर रहा है। यह बयान ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति के झटके और डर के मुकाबले चीन की खुद को एक शांत, तर्कसंगत और भरोसेमंद विकल्प के रूप में दिखाने की रणनीति को प्रकट करता है।</p>
<p><strong>बिना कुछ किए चीन की हो रही जय-जयकार</strong></p>
<p>चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सालों से एक ऐसी विश्व व्यवस्था को बदलने की बात कर रहे हैं जिसे वे अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा गलत तरीके से हावी मानते हैं। वे तेजी से अपनी खुद की सोच को एक विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं, भले ही चीन के अपने पड़ोसी देशों से सीमा विवाद हो और उस पर आक्रामकता के आरोप लगते रहे हों। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि चीन को वैश्विक शक्ति संतुलन में फायदा उठाने के लिए ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है। उसे बस अपने रास्ते पर चलते रहना है, क्योंकि अमेरिका अपने आप ही सहयोगी और विश्वसनीयता खो रहा है।</p>
<p><strong>चीन से दोस्ती बढ़ा रहे अमेरिका के सहयोगी</strong></p>
<p>चीन की बढ़ते कद का अंदाजा अमेरिका के सबसे करीबी देश कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के हाल के चीन दौरे और भाषण से लगाया जा सकता है। कार्नी ने खुलेआम अमेरिकी वर्चस्व को एक काल्पनिक अंतर्राष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था का हिस्सा बताया। कार्नी ने अमेरिका की ओर इशारा करते हुए कहा, हम जानते थे कि अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित व्यवस्था की कहानी आंशिक रूप से झूठी थी - कि सबसे ताकतवर देश सुविधा के अनुसार खुद को छूट देंगे, कि व्यापार नियमों को असमान रूप से लागू किया जाएगा। <br />हालांकि, कार्नी ने रूस की जमकर आलोचना भी की, लेकिन उनको भी ट्रंप को लेकर डर है।</p>
<p><strong>कनाडा-ब्रिटेन-फ्रांस तक ने छोड़ा साथ</strong></p>
<p>कार्नी ने पिछले हफ्ते चीन का दौरा किया। उन्होंने बीजिंग और ओटावा के बीच सहयोग के एक नए दौर की शुरूआत भी की। कनाडा ने चीन के साथ रणनीतिक साझेदारी पर सहमति जताई है। कार्नी ने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर कनाडा के कड़े टैरिफ में ढील दी, जिसे अमेरिका के साथ मिलकर लागू किया गया था। अमेरिका के अन्य करीबी साझेदारों ने भी चीन के साथ संबंध सुधारने या उसके करीब जाने में दिलचस्पी दिखाई है, क्योंकि वे अमेरिका के खिलाफ बचाव कर रहे हैं। ब्रिटेन के कीर स्टारमर ने बीजिंग के साथ अधिक जुड़ाव पर जोर दिया है। मंगलवार को ब्रिटिश सरकार ने लंदन के वित्तीय जिले के पास एक नए चीनी मेगा दूतावास के विवादास्पद निर्माण को मंजूरी दे दी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 11:28:32 +0530</pubDate>
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