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                <title> Digital arrest - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> Digital arrest RSS Feed</description>
                
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                <title>डिजिटल अरेस्ट कर 90 वर्षीय पूर्व जिला जज से 2.50 करोड़ रुपए की ठगी, बैंक मैनेजर की सतर्कता से बची पीपीएफ की रकम</title>
                                    <description><![CDATA[साइबर ठगों ने सीबीआई अधिकारी और आरबीआई मैनेजर बनकर 90 वर्षीय पूर्व जिला जज को करीब 15 दिन डिजिटल अरेस्ट रखा। हवाला लेनदेन में फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाकर 3 से 10 अगस्त के बीच अलग-अलग खातों में 2.50 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/90-year-old-former-district-judge-cheated-by-digital-arrest/article-162917"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/cycber.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ज्योतिनगर थाना इलाके में साइबर ठगों ने सीबीआई अधिकारी और आरबीआई मैनेजर बनकर 90 वर्षीय पूर्व जिला जज को करीब 15 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। मुंबई में 50 करोड़ रुपए के हवाला लेनदेन में फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाकर आरोपियों ने 3 से 10 अगस्त के बीच अलग-अलग बैंक खातों में 2.50 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए। बुधवार को पीपीएफ की रकम भी ट्रांसफर कराने के दौरान भारतीय स्टेट बैंक के प्रबंधक को संदेह हुआ और ठगी का खुलासा हो गया।</p>
<p><strong>सीबीआई अधिकारी बन धमकाया : </strong>पुलिस के अनुसार लालकोठी स्कीम निवासी पूर्व जिला जज गणपत सिंह भण्डारी के भांजे रविन्द्र सिंह मोहनोत ने मामला दर्ज कराया है। रिपोर्ट के अनुसार ठगों ने वॉट्सऐप वीडियो कॉल किया जिसमें वह पुलिस की वर्दी पहने हुए था। खुद को मुंबई सीबीआई का अधिकारी बताया। उसने कहा कि मुंबई में 50 करोड़ रुपए के हवाला लेनदेन का खुलासा हुआ है, जिसमें 40 लाख रुपए उनके एसबीआई खाते में आए हैं। जांच में सहयोग नहीं करने पर गिरफ्तारी कर मुंबई ले जाने की धमकी दी गई। कुछ देर बाद दूसरे व्यक्ति ने वॉट्सऐप कॉल कर खुद को आरबीआई का प्रबंधक बताया। उसने हवाला की रकम से म्यूचुअल फंड में निवेश किए जाने की बात कहते हुए वित्तीय दस्तावेज और अन्य जानकारी मांगी। गिरफ्तारी के डर से पूर्व जज ने आरोपियों को जरूरी दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध करा दी। इसके बाद ठगों ने जांच के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करानी शुरू कर दी। हर कॉल के बाद वॉट्सऐप चैट, कॉल हिस्ट्री और संदेश मिटाने के निर्देश दिए जाते थे। भय के कारण पीड़ित रिकॉर्ड डिलीट करते रहे और परिवार को भी इसकी जानकारी नहीं हो सकी।</p>
<p><strong>पीपीएफ की रकम ट्रांसफर कराने पहुंचे तो खुला राज :</strong> बुधवार सुबह आरोपियों ने पूर्व जज से पीपीएफ खाते की रकम भी ट्रांसफर करने को कहा। इसके लिए वे एसबीआई की जौहरी बाजार शाखा पहुंचे। रकम ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया के दौरान बैंक प्रबंधक को संदेह हुआ। पूछताछ में पूरी जानकारी सामने आने पर प्रबंधक ने लेनदेन रुकवा दिया और पूर्व जज को बताया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद पूर्व जज ने बुधवार शाम ज्योति नगर थाने में मामला दर्ज कराया गया। पुलिस अब आरोपियों के इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और लेनदेन की जांच कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 13:27:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सावधान : अंतरराष्ट्रीय आईवीआर कॉल से डिजिटल अरेस्ट का नया खतरा, ठग खुद को बताते हैं पुलिस, ट्राई या दूरसंचार विभाग (फेडेक्स) का अधिकारी </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका अपनाया। विदेशी नंबरों से आईवीआर कॉल कर खुद को पुलिस या ट्राई अधिकारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया जा रहा। अपराधी बैंक डिटेल्स और ओटीपी लेकर ठगी कर रहे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/beware-there-is-a-new-danger-of-digital-arrest-due/article-145551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(1)7.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक नया और मनोवैज्ञानिक तरीका अपनाया है। इसी कड़ी में साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट ने एक खतरनाक ट्रेंड का खुलासा किया है, जिसमें अपराधी इंटरनेशनल आईवीआर (इंटरेक्टिव वॉयस रेस्पॉंस) कॉल के माध्यम से लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठग रहे हैं। एसपी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी सबसे पहले विदेशी नंबरों से एक ऑटोमेटेड आईवीआर कॉल करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति फोन उठाता है, उसे रिकॉर्डेड आवाज सुनाई देती है जो खुद को पुलिस, भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) या दूरसंचार विभाग (फेडेक्स) का अधिकारी बताती है। अपराधी पीड़ित को मनोवैज्ञानिक रूप से इतना डरा देते हैं कि उसे लगता है कि वह वास्तव में किसी बड़ी कानूनी मुसीबत में फंस गया है। कॉल के दौरान पीड़ित को झूठी सूचना दी जाती है कि उसका मोबाइल नंबर या उसके नाम से आया कोई पार्सल किसी अवैध गतिविधि या गंभीर अपराध में शामिल पाया गया है। अपराधी धमकी देते हैं कि उसके खिलाफ  तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी या उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस भारी दबाव के बीच अपराधी पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट का नाटक करते हैं और केस रफा-दफा करने के बदले बैंक विवरण, ओटीपी मांगते हैं या सीधे पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं।</p>
<p><strong>इन अंतरराष्ट्रीय नंबरों से रहें सतर्क :</strong></p>
<p>अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए सैटेलाइट और विदेशी नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं। जांच में पाया गया है कि इनमारसैट (+870) सैटेलाइट नंबरों का सबसे ज्यादा दुरुपयोग हो रहा है। इसके अलावा निम्नलिखित देशों के कोड वाले नंबरों से आने वाली कॉल बेहद संदिग्ध हो सकती हैं।</p>
<ul>
<li>पड़ोसी देश पाकिस्तान +92, बांग्लादेश +880, नेपाल +977, अफगानिस्तान +93।</li>
<li>एशियाई देश दक्षिण कोरिया +82, ईरान +98, कंबोडिया +855, सऊदी अरब +966, संयुक्तअरब अमीरात +971, लाओस +858, पूर्वी तिमोर +670।</li>
<li>अन्य देश यूनाइटेड किंगडम +44, ऑस्ट्रेलिया +61, पोलैंड +48, बोस्निया +387, वनुआतु +678, आइवरी कोस्ट +225, बोत्सवाना +267, तंजानिया +255, न्यू कैलेडोनिया +687।</li>
<li>सैटेलाइट नेटवर्क ग्लोबल सैटेलाइट +881 और थुरया +882।</li>
</ul>
<p><strong>ट्राई की स्पष्ट चेतावनी :</strong></p>
<p>दूरसंचार विभाग और ट्राई ने स्पष्ट किया है कि वे कभी भी किसी व्यक्तिके खिलाफ  व्यक्तिगत जांच नहीं करते हैं। ट्राई न तो किसी से आधार कार्ड या बैंक डिटेल्स मांगता है और न ही किसी को डिजिटल माध्यम से गिरफ्तार करने की धमकी देता है। ऐसे कॉल पूरी तरह फर्जी और धोखाधड़ी के उद्देश्य से किए जाते हैं।</p>
<p><strong>सुरक्षा के उपाय और शिकायत प्रक्रिया :</strong></p>
<p>राजस्थान पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे अनजान अंतरराष्ट्रीय नंबरों से आने वाली कॉल को लेकर सतर्क रहें। यदि कोई संदिग्ध कॉल आती हैए तो उसे तुरंत काट दें और इसकी रिपोर्ट संचार साथी पोर्टल या ऐप पर करें। किसी भी अनजान व्यक्ति को अपनी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा न करें। यदि आप किसी ऐसी धोखाधड़ी का शिकार होते हैं तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा आप निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्प डेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी सूचना दे सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 10:31:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डिजिटल अरेस्ट का बढ़ता खतरा और पुलिस की मुहिम : खाली हो रहे हैं बैंक खाते, राजस्थान पुलिस ने जारी की साइबर सुरक्षा एडवाइजरी  </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान पुलिस के साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट ने “डिजिटल अरेस्ट” नामक साइबर ठगी के नए तरीके से सावधान किया है। अपराधी खुद को सरकारी अधिकारी दिखाकर वीडियो कॉल पर लोगों को डराते हैं और पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं। पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने, कॉल तुरंत काटने और साइबर हेल्पलाइन 1930 या पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करने की अपील की है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/increasing-threat-of-digital-arrest-and-police-campaign-bank-accounts/article-140504"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(3)36.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान पुलिस के साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट ने राज्य में साइबर ठगी के एक और खतरनाक ट्रेंड डिजिटल अरेस्ट को लेकर आमजन को आगाह किया है। साइबर अपराधी अब खुद को सीबीआई, पुलिस, कस्टम, ईडी या इनकम टैक्स का बड़ा अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल करते हैं। इन कॉल्स के माध्यम से वे नागरिकों को डराते हैं कि उनके नाम पर कोई गंभीर अपराध दर्ज हुआ है और जांच पूरी होने तक उन्हें वीडियो कॉल पर ही डिजिटल अरेस्ट रहना होगा।</p>
<p><strong>ठगी के तरीके और मनोवैज्ञानिक दबाव :</strong></p>
<p>महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि अपराधी अक्सर शिकार को फोन कर बताते हैं कि उनके परिवार के किसी सदस्य ने अपराध किया है या उनके आधार कार्ड से जारी सिम का उपयोग देश विरोधी गतिविधियों में हुआ है। ठग पीड़ित को इतना डरा देते हैं कि वह अपनी जमा पूंजी, एफडी और बैंक खातों का वेरिफिकेशन कराने को तैयार हो जाता है। इसके बाद अपराधी एक फर्जी सरकारी बैंक खाता देते हैं, जो उनका ही होता है; जिसमे वे पीड़ित को अपनी सारी रकम ट्रांसफर करने का आदेश देते हैं, जिसे बाद में ठग निकाल लेते हैं।</p>
<p><strong> फर्जी अधिकारियों की पहचान कैसे करें ?</strong></p>
<p>कोई भी असली सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी या पैसों की मांग नहीं करती है। ठगों की पहचान उनके कॉल करने के तरीके से की जा सकती है; वे अक्सर अनजान या अंतरराष्ट्रीय नंबरों (जैसे +92) से कॉल करते हैं। वीडियो कॉल के दौरान वे फर्जी थाने, वर्दी पहने स्टाफ या कोर्ट रूम जैसा बैकग्राउंड दिखाते हैं ताकि पीड़ित को सच लगे। यदि कोई कॉल पर पैसे मांगे या किसी को सूचना देने से मना करे, तो समझ लें कि वह साइबर ठग है।</p>
<p><strong>सतर्कता और आपातकालीन स्थिति में क्या करें ?</strong></p>
<p>राजस्थान पुलिस ने अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल को तुरंत काट दें और घबराएं नहीं। यदि आप या आपके आसपास कोई इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा, साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 या 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है। नागरिक अपनी शिकायत भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in या अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में भी दर्ज करवा सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 16:37:33 +0530</pubDate>
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