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                <title>UttarPradesh - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>यूपी चुनाव 2027 की तैयारी : भाजपा का विधायकों पर 'परफॉर्मेंस टेस्ट' शुरू, सर्वे में खराब निकले तो कटेगा टिकट</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने मौजूदा विधायकों का 'रिपोर्ट कार्ड' बनाना शुरू कर दिया है। दो बाहरी एजेंसियों द्वारा कराए जा रहे इस सर्वे में जनता की नाराजगी झेल रहे विधायकों की जगह नए और जिताऊ चेहरों की तलाश की जा रही है। मुरादाबाद मंडल पर पार्टी का विशेष ध्यान है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mission-2027-bjps-performance-test-on-mlas-begins-if-they/article-154532"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/bjp-kerala.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के क्रम में भारतीय जनता पार्टी ने 2022 में जीते अपने विधायकों का 'रिपोर्ट कार्ड' तैयार करना शुरू कर दिया है। पार्टी सूत्रों की मानें तो पार्टी यह परख रही है कि क्षेत्र में विधायक की जमीनी पकड़ कैसी है और जनता के बीच उनकी सक्रियता कितनी है। जिन विधायकों से जनता नाराज है, उनकी जगह नए और जिताऊ चेहरों की तलाश तेज कर दी गई है।</p>
<p>पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि, “हाईकमान ने पूरे सर्वे की जिम्मेदारी दो बाहरी एजेंसियों को दी है जिनकी टीमें पिछले कई दिनों से शहरी और ग्रामीण इलाकों में घूमकर लोगों से सीधा संवाद कर रही हैं। विधायकों के काम, व्यवहार और क्षेत्र में मौजूदगी पर जनता की राय ली जा रही है। इसके अलावा संभावित नए दावेदारों की लोकप्रियता और जातीय-सामाजिक प्रभाव का भी आकलन किया जा रहा है। भाजपा यह तय करना चाहती है कि 2027 में किस चेहरे पर दांव लगाने से जीत की गारंटी मिलेगी।”</p>
<p>सर्वे पूरे प्रदेश में मंडलवार कराया जा रहा है। ज्यादातर मंडलों में भाजपा की स्थिति मजबूत है, लेकिन मुरादाबाद मंडल पार्टी के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। 2017 के चुनाव में भाजपा को यहां 27 में से 14 सीटें मिली थीं, जो 2022 में घटकर सिर्फ 10 रह गईं। इसी नुकसान की भरपाई के लिए पार्टी इस मंडल में खास सतर्कता बरत रही है और हर सीट पर मजबूत उम्मीदवार खोज रही है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक संगठन अपने स्तर पर जिला और क्षेत्रवार संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट बना रहा है। इसमें स्थानीय सांसदों और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राय को भी महत्व दिया जाएगा। बाहरी एजेंसियों की रिपोर्ट और संगठन की सूची का मिलान किया जाएगा।</p>
<p>भाजपा के वरिष्ठ नेता ने बताया कि जो नाम दोनों जगह कॉमन होंगे और जिन पर सहमति बनेगी, उनका टिकट लगभग पक्का माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार एजेंसियों की रिपोर्ट जल्द ही दिल्ली हाईकमान को सौंप दी जाएगी। सूत्रों ने बताया कि इस सर्वे में सिर्फ विधायकों का ही नहीं, बल्कि योगी सरकार की योजनाओं और नौ साल के कामकाज को लेकर भी जनता का मूड भांपा जा रहा है। पार्टी यह जानना चाहती है कि किस इलाके में सरकार की ब्रांडिंग मजबूत है और कहां एंटी-इनकंबेंसी है। नेतृत्व का मानना है कि अभी से मिली जमीनी फीडबैक से 2027 की रणनीति को धार दी जा सकेगी। साफ संकेत हैं कि जो विधायक काम में फिसड्डी साबित हुए, उनका पत्ता अगले चुनाव में कटना तय है।</p>
<p>गौरतलब है कि इसी तरह कांग्रेस ने पश्चिमी यूपी की सीटों पर प्राइवेट एजेंसियों से संभावित चेहरों की लिस्ट बनवानी शुरू कर दी है। सपा भी अंदरखाने सर्वे के जरिए उम्मीदवार छांट रही है। मायावती की बसपा कई सीटों पर प्रभारी और संभावित प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। आजाद की आजाद समाज पार्टी दूसरे दलों के मजबूत नेताओं को तोड़कर अपने पाले में लाने में जुटी है। कुल मिलाकर 2027 का चुनावी दंगल शुरू होने से पहले ही सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी चालें चलनी शुरू कर दी हैं। टिकट का गणित, जातीय समीकरण और सर्वे रिपोर्ट ही तय करेंगे कि अगली बार लखनऊ की सत्ता किसके हाथ आएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 18:03:17 +0530</pubDate>
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                <title>आखिर क्यों मायावती ने कहा, बसपा के खिलाफ हो रही साजिशें, विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज करें कार्यकर्ता</title>
                                    <description><![CDATA[बसपा सुप्रीमो मायावती ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर कार्यकर्ताओं से संगठन मजबूत करने, बूथ स्तर पर सक्रिय रहने और जनता के मुद्दों पर निरंतर जनसंपर्क बढ़ाने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/after-all-why-did-mayawati-say-that-there-are-conspiracies/article-142309"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(5)6.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी  की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शनिवार को पार्टी की एक अहम बैठक में आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर कार्यकर्ताओं को अभी से पूरी ताकत के साथ जुट जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, ऐसे में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना और जनता के बीच सक्रिय रहना बेहद जरूरी है।</p>
<p>मीडिया को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के चलते हाल के दिनों में पार्टी की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, लेकिन अब सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पूरी ऊर्जा के साथ चुनावी तैयारी में लग जाना चाहिए। उन्होंने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने और निरंतर जनसंपर्क बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। बसपा सुप्रीमो ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक पार्टियां बसपा के खिलाफ साजिश कर रही हैं और पार्टी को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से ऐसी साजिशों के प्रति सतर्क रहने और पार्टी की विचारधारा व नीतियों को मजबूती से जनता तक पहुंचाने की अपील की।</p>
<p><strong>संसद का गतिरोध सियासी दलों का खेला</strong></p>
<p>मायावती ने मौजूदा संसद के बजट सत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहे गतिरोध को सियासी पार्टियों का खेला करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में मौजूद सरकारें जनहित के मुद्दों पर काम करने के बजाय धर्म और जाति की राजनीति को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे समाज में विभाजन और नफरत का माहौल बन रहा है। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिए कि गरीबों, ओबीसी, एससी-एसटी, अल्पसंख्यकों, किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों की समस्याओं को प्राथमिकता से उठाया जाए और जनता के बीच जाकर उनकी आवाज बना जाए। मायावती ने कहा कि बीएसपी हमेशा सामाजिक न्याय और सर्वजन हिताय की राजनीति करती आई है। </p>
<p>आगामी विधानसभा चुनावों में भी पार्टी जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। बैठक में चुनावी रणनीति, संगठन विस्तार और जनसंपर्क अभियान को तेज करने पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने विश्वास जताया कि मजबूत संगठन और समर्पित कार्यकर्ताओं के बल पर बीएसपी आने वाले चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करेगी। बैठक में जिला, मंडल और विधानसभा स्तर के अध्यक्षों समेत पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 09:56:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>स्कूली बच्चों को नमाज पढ़ाने के आरोप में प्रधानाध्यापक निलंबित, बच्चों का ब्रेनवॉश करने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[मथुरा के प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक पर छात्रों को जबरन नमाज पढ़ाने और धार्मिक प्रचार का आरोप लगा। बीएसए ने निलंबन किया, मामले की जांच समिति गठित की आदेश दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/principal-suspended-for-teaching-namaz-to-school-children-accused-of/article-141697"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(11)1.png" alt=""></a><br /><p>मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के प्राथमिक विद्यालय नौहझील में तैनात प्रधानाध्यापक पर छात्रों को जबरन नमाज पढ़ाने और धर्म विशेष के प्रचार-प्रसार के आरोप में निलंबन की कार्रवाई की गई है। बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) मथुरा ने प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए संबंधित प्रधानाध्यापक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।</p>
<p>भाजपा बाजना मंडल अध्यक्ष दुर्गेश प्रधान द्वारा बीएसए को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया कि प्रधानाध्यापक जान मोहम्मद बच्चों को बहला-फुसलाकर इस्लाम धर्म के प्रति प्रेरित करते थे तथा विद्यालय परिसर में नमाज पढ़वाते थे। शिकायत में हिंदू देवी-देवताओं के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियां करने तथा विद्यालय में राष्ट्रगान न कराने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। साथ ही विद्यालय परिसर में बाहरी व्यक्तियों के आने और बच्चों पर धार्मिक प्रभाव डालने की बात भी कही गई है।</p>
<p>बीएसए कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार खंड शिक्षा अधिकारी की आख्या के आधार पर प्रधानाध्यापक को निलंबित कर प्राथमिक विद्यालय नगला हुमायूं, मांट से संबद्ध किया गया है। मामले की विस्तृत जांच के लिए बीईओ छाता और बीईओ मांट की द्विसदस्यीय समिति गठित कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने कहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 17:10:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोडीन युक्त कफ सिरप मामला : शुभम जायसवाल का करीबी विकास नर्वे गिरफ्तार, पूछताछ जारी</title>
                                    <description><![CDATA[कोडीन कफ सिरप तस्करी मामले में मुख्य आरोपी के सहयोगी विकास सिंह नर्वे को नेपाल सीमा के पास गिरफ्तार किया गया। वाराणसी पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cough-syrup-case-containing-codeine-close-to-shubham-jaiswal-vikas/article-140967"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/arrestedd.png" alt=""></a><br /><p>वाराणसी। कोडीन युक्त कफ सिरप तस्करी मामले में मुख्य सरगना शुभम जायसवाल के सबसे करीबी सहयोगी विकास सिंह नर्वे को वाराणसी पुलिस और स्पेशल जांच टीम (एसआईटी) ने सिद्धार्थनगर जिले में नेपाल बॉर्डर के निकट से गिरफ्तार कर लिया है। अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध शाखा) सरवणन टी. ने बताया कि नर्वे को उस समय गिरफ्तार किया गया जब वह नेपाल भागने की फिराक में था। गिरफ्तारी के बाद विकास सिंह को वाराणसी लाया जा रहा है। विकास के खिलाफ लुकआउट नोटिस के साथ-साथ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था।</p>
<p>इस मामले में शैली ट्रेडर्स फर्म के मुखिया भोला प्रसाद जायसवाल के खिलाफ सोनभद्र और वाराणसी पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। अपराध से अर्जित करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को विभिन्न इलाकों में जब्त किया जा चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 18:45:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>UGC के नए नियमों को लेकर वाराणसी जिला मुख्यालय पर स्वर्ण समाज का विरोध प्रदर्शन, लखनऊ विवि के छात्रों ने की जमकर नारेबाजी</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ विश्वविद्यालय में यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस 2026 के विरोध में छात्रों ने प्रदर्शन किया। नियमों को मनमाना बताते हुए वापसी की मांग की, परिसर में भारी पुलिस तैनात रही।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/swarna-samaj-protest-at-varanasi-district-headquarters-regarding-the-new/article-140990"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(14)2.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता संवर्धन विनियम, 2026 को लेकर विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को विवि के छात्रों ने यूजीसी के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए इसे वापस लेने की मांग की। परिसर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर मौजूद पुलिस प्रशासन ने पूरे परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया। विवि के प्रवेश द्वार संख्या एक पर प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना था कि नए इक्विटी नियम अस्पष्ट और मनमाना है। छात्रों का कहना है कि इन नियमों से शैक्षणिक संस्थानों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है और भविष्य में इसके दुरुपयोग की आशंका भी है।</p>
<p>विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया कि संस्थागत समितियों को अत्यधिक अधिकार दिए गए हैं, जबकि झूठे आरोपों से बचाव के लिए कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है। इससे अलग-अलग कॉलेजों में नियमों के असमान या गलत इस्तेमाल की आशंका बढ़ जाती है।   </p>
<p>छात्रों ने इन नियमों को काला कानून करार देते हुए वापस लेने की मांग की और आरोप लगाया कि ये नियम सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के छात्रों के खिलाफ भेदभावपूर्ण हैं तथा कैंपस में झूठे मामलों और विभाजन को बढ़ावा देंगे। हालांकि, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर परीक्षा बाधित करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। प्रवेश द्वार संख्या एक पर प्रदर्शन के बाद छात्रों ने एकजुट होकर गेट नम्बर नम्बर तीन पर भी प्रदर्शन किया। इस दौरान किसी अनहोनी की आशंका से निपटने के लिए पुलिस परिसर में चप्पे चप्पे पर तैनात रही।</p>
<p>गौरतलब है कि, यूजीसी ने इस साल इक्विटी इन हायर एजुकेशन रेगुलेशंस 2026 लागू किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भेदभाव को रोकना और सभी छात्रों व कर्मचारियों को समान अवसर देना बताया गया है। इन नियमों के तहत हर हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट को समान अवसर केंद्र बनाना होगा। भेदभाव से जुड़ी शिकायतों के लिए विशेष समितियां गठित करनी होंगी और 24 घंटे की हेल्पलाइन सेवा भी शुरू करनी होगी। इसके अलावा, तय समय सीमा में शिकायतों पर कार्रवाई भी करनी होगी और अगर कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो यूजीसी उस पर कार्रवाई या जुर्माना भी लगा सकता है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में केंद्र सरकार द्वारा यूजीसी बिल में किए गए संशोधन के विरोध में मंगलवार को जिला मुख्यालय पर सवर्ण संगठनों और कुछ राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। परशुराम सेना, क्षत्रिय महासभा, जनसत्ता दल और सर्व समाज के बैनर तले बड़ी संख्या में लोग जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और संशोधन को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और यूजीसी बिल संशोधन को तत्काल वापस लेने की मांग दोहराई। स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण ढंग से समझाने का प्रयास किया।</p>
<p>प्रदर्शन का नेतृत्व जनसत्ता दल के अध्यक्ष देवानंद सिंह, क्षत्रिय महासभा के जितेंद्र सिंह और परशुराम सेना प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ तिवारी ने किया। नेताओं ने कहा कि यूजीसी बिल में किए गए संशोधन से समाज में असंतोष फैल रहा है और इससे सामाजिक संतुलन प्रभावित होगा। प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया, जिसमें संशोधन को वापस लेने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में यूजीसी के नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज के सैकड़ों लोग  पैदल मार्च करते  हुए सड़कों पर उतरे और आयोग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लिये थे और नारेबाजी कर रहे थे। सवर्ण समाज और छात्र संगठनों का आरोप है कि यह नियम समानता के नाम पर उच्च शिक्षा में विभाजन को बढ़ावा देगा। भाजपा युवा मोर्चा के नेता शिवम मिश्रा के नेतृत्व में आज नवाबगंज बाजार में पैदल मार्च करते हुए सैकड़ों की संख्या में पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने सवर्ण विरोधी यूजीसी नियम वापस लो उच्च शिक्षा में समानता नहीं, विभाजन जैसे नारे लगाए और सरकार को साफ चेतावनी दी कि अगर इस बिल पर पुनर्विचार नहीं हुआ तो आंदोलन को और धारदार दिया जाएगा। </p>
<p>प्रदर्शन के दौरान भाजपा युवा मोर्चा के नेता ने कहा कि सरकार एक ओर समानता की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर ऐसा बिल ला रही है, जो आने वाली पीढिय़ों के भविष्य पर गहरा दंश छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह नियम सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के लिए घातक साबित होगा।</p>
<p>उनका आरोप है कि यह नियम विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जाति के आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देगा, जिससे छात्र एकता कमजोर होगी। छात्रों ने दो टूक कहा कि सरकार को यह बिल हर हाल में वापस लेना ही पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब अगर किसी शिक्षक या छात्र के खिलाफ झूठी शिकायत की जाती है और वह गलत साबित होती है, तो शिकायतकर्ता पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। इससे कानून के दुरुपयोग की आशंका और बढ़ गई है, खासकर सामान्य वर्ग के खिलाफ। कुल मिलाकर प्रयागराज में यूजीसी को लेकर माहौल गर्म है। सवर्ण समाज और छात्र संगठन साफ कर चुके हैं कि अगर सरकार ने समय रहते इस नियम पर विचार नहीं किया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।</p>
<p>विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर पूरे देश में विरोध का स्वर मुखर हो रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को वाराणसी जिला मुख्यालय पर नए नियमों के विरुद्ध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि इस नियम को तत्काल वापस लिया जाए। उनका आरोप है कि उच्च शैक्षणिक संस्थानों में सामान्य वर्ग (स्वर्ण जाति) के छात्रों के शैक्षणिक जीवन पर खतरा मंडराने लगा है।         </p>
<p>अंशु मिश्रा ने बताया, हमारा विरोध किसी जाति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि नए नियमों के कारण स्वर्ण समाज के छात्रों के मन में भय उत्पन्न हो रहा है। इससे उनके शैक्षणिक जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। करनी सेना के पूर्वांचल प्रभारी अविनाश मिश्रा ने कहा, भारतीय जनता पार्टी का नारा है 'बंटेंगे तो कटेंगे', लेकिन सरकार खुद बंटवारा कर रही है। शिक्षण संस्थानों में दो छात्रों के बीच मनमुटाव होने पर एक छात्र की शिकायत पर दूसरे छात्र के खिलाफ कार्रवाई कहाँ से उचित होगी? इससे उसका भविष्य दाँव पर लग जाएगा।</p>
<p>अधिवक्ता एस.के. सिंह ने बताया, इस कानून ने देश में एक नए प्रकार का विवाद खड़ा कर दिया है। इसे या तो वापस लिया जाए या इसमें आवश्यक संशोधन किया जाए। आज के प्रदर्शन में छात्र, पूर्व छात्र, अधिवक्ता तथा विभिन्न संगठनों के लोग शामिल हुए। इस दौरान जिला मुख्यालय पर पुलिस अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा पर्याप्त बल की तैनाती की गई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 17:59:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अखिलेश यादव का यूपी सरकार पर तीखा हमला, बोलें संविधान को अपने से नीचे समझना लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक</title>
                                    <description><![CDATA[अखिलेश यादव ने यूपी सरकार पर संविधान का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्ता के अहंकार में भाजपा लोकतंत्र और धार्मिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/akhilesh-yadavs-sharp-attack-on-up-government-considering-the-constitution/article-140949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/akhilesh.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार संविधान को अपने से नीचे समझने की भूल कर रही है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने कहा कि जनता आज यह सवाल कर रही है कि जब अपने ऊपर दर्ज मुक़दमे हटवाए गए, तब संविधान के किस अनुच्छेद के तहत यह कार्य किया गया। </p>
<p>मंगलवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि कुछ लोग लगातार मंचों से 'सनातनी संतों' का तिरस्कार कर रहे हैं और अपमानजनक उपमाओं का प्रयोग कर समाज में वैमनस्य फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि माघ मेले जैसे पवित्र आयोजन में भी नकारात्मक 'बुलडोजरी सोच' के समर्थन में नारे लगवाकर धार्मिक सौहार्द बिगाडऩे का प्रयास किया गया, जबकि उपद्रव करने वालों के विरुद्ध मुक़दमे दर्ज नहीं किए जा रहे हैं।</p>
<p>सपा अध्यक्ष ने कहा कि सत्ताकामी सरकार का धर्म-विरोधी चेहरा अब पूरी तरह बेनक़ाब हो चुका है। जो नुकसान होना था, वह हो चुका है और अब मजबूरी में मांगी गई माफ़ी का कोई महत्व नहीं रह जाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि माफ़ी वही मायने रखती है, जो दिल से मांगी जाए।</p>
<p>अखिलेश यादव ने शासनाधीशों को आगाह करते हुए कहा कि हठ हमेशा विनाश की ओर ले जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का विचार, वक्तव्य और व्यवहार लगातार असंवैधानिक रहा है। सत्ता के नशे में चूर संविधान-विरोधी भाजपा अब जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 17:07:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शंकराचार्य विवाद पर रामानुजाचार्य की तीखी प्रतिक्रिया, बोलें-माघ मेला क्षेत्र पवित्र स्थल, राजनीति का अखाड़ा नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[अखिलेश यादव ने यूपी सरकार पर संविधान का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्ता के अहंकार में भाजपा लोकतंत्र और धार्मिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ramanujacharyas-sharp-reaction-on-shankaracharya-controversy-magh-mela-area-is/article-140952"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(7)2.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले को लेकर पिछले करीब दस दिनों से विवाद की स्थिति बनी हुई है। मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान के लिए पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ प्रशासन द्वारा कथित दुर्व्यवहार के बाद साधु-संत दो गुटों में बंट गए हैं।</p>
<p>इस विवाद पर श्रृंगवेरपुर धाम के पीठाधीश्वर श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी शांडिल्य महाराज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि माघ मेला क्षेत्र एक पवित्र तीर्थ स्थल है, न कि राजनीति का अखाड़ा। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि बटुकों के साथ मारपीट निंदनीय है।</p>
<p>स्वामी शांडिल्य महाराज ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले को अब राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई कथित अभद्र टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री लगातार सनातन धर्म को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं और उनके खिलाफ इस प्रकार की अपमानजनक भाषा का प्रयोग अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने कहा कि एक विशेष वर्ग को खुश करने के उद्देश्य से की गई ऐसी टिप्पणियों के लिए संबंधित लोगों को माफी मांगनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:02:02 +0530</pubDate>
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                <title>योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई, सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री निलंबित, शामली से संबद्ध</title>
                                    <description><![CDATA[बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित किया गया। सरकार ने उन्हें शामली डीएम कार्यालय से संबद्ध कर जांच के आदेश दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/municipal-magistrate-alankar-agnihotri-associated-with-shamli-suspended-after-supporting/article-140922"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>बरेली। उत्तर प्रदेश में बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को सरकार ने अनुशासनहीनता के आरोप में सोमवार देर रात निलंबित कर दिया है। उन्हें जिलाधिकारी शामली कार्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया है, जबकि जांच अधिकारी कमिश्नर बरेली भूपेंद्र एस चौधरी बनाए गए हैं। उत्तर-प्रदेश शासन नियुक्ति अनुभाग 7 से जारी आदेश में कहा गया है कि अलंकार अग्निहोत्री ने प्रथम दृष्टया अनुशासनहीनता की है, जिसके चलते तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित किया गया है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि गणतंत्र दिवस पर बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा देकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया था। अपने तीखे और भावनात्मक वक्तव्य में उन्होंने न केवल तंत्र पर गंभीर आरोप लगाए, बल्कि ब्राह्मण समाज  कथित अपमान, प्रयागराज माघ मेला घटना और यूजीसी रेगुलेशंस 2026 को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला।</p>
<p>अपने इस्तीफे के साथ उन्होंने एक बेहद आक्रामक, भावनात्मक और चेतावनी भरा बयान जारी करते हुए कहा कि जब वे स्वयं पद छोड़ रहे हैं, तो यह उनके (ब्राह्मण) समाज के जनप्रतिनिधियों के लिए भी आत्ममंथन का समय है। उन्होंने खुले शब्दों में आह्वान किया कि ब्राह्मण समाज के जितने भी जनप्रतिनिधि केंद्र सरकार या राज्य सरकार में हैं, यदि उनमें थोड़ी भी शर्म और रीढ़ बची है, तो वे तुरंत अपने-अपने पदों से इस्तीफा दें और समाज के साथ खड़े हों। उन्होंने कहा कि समाज रहेगा, तभी पद रहेगा, समाज के बिना कोई भी व्यक्ति चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं रहेगा।</p>
<p>अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि इस समय सामान्य वर्ग केंद्र और राज्य सरकार से खुद को अलग मानने लगा है और हालात ऐसे बन चुके हैं कि दोनों ही जगह सरकार एक तरह से अल्पमत में दिखाई दे रही है, जिससे देश में अत्यंत भयावह परिस्थितियां उत्पन्न हो चुकी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 12:06:51 +0530</pubDate>
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                <title>अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में सपा ने लगाए पोस्टर,'शंकराचार्य का अपमान, नही सहेगा हिंदुस्तान'</title>
                                    <description><![CDATA[प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य की पालकी रोके जाने पर सपा ने विरोध तेज किया। अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर सनातन धर्म और साधु-संतों के अपमान का आरोप लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/sp-put-up-posters-in-support-of-avimukteshwaranand-india-will/article-140532"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/akhilesh-yadav-blo.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पालकी रोके जाने को लेकर घटित घटना के विरोध में समाजवादी पार्टी (सपा) मैदान में उतर आई है। पार्टी कार्यालय के बाहर अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में समाजवादी छात्रसभा के पूर्व प्रदेश सचिव आशुतोष सिंह ने पोस्टर लगाया है। पोस्टर पर'शंकराचार्य का अपमान, नही सहेगा हिंदुस्तान' लिख कर समर्थन दिया है।</p>
<p>वहीं, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर लगातार भाजपा सरकार पर हमलावर हैं। भाजपा को घेरने के लिए अखिलेश यादव कोई मौका नही चूक रहे हैं। अभी दो दिन पहले ही फोन पर शंकराचार्य से बात कर उनकी लड़ाई को आगे बढ़ाने की बात कही गई थी। इसी क्रम में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने शंकराचार्य से प्रयागराज माघ मेले में मुलाकात की थी। </p>
<p>एक दिन पूर्व अखिलेश यादव ने बयान जारी कर कहा था कि यदि कोई अधिकारी शंकराचार्य से परिचय और प्रमाण-पत्र मांग रहा है, तो सनातन धर्म का इससे बड़ा अपमान कोई और नहीं हो सकता है। भाजपा सरकार ने सनातन धर्म, शंकराचार्य, साधु-संतों, माघ मेला और देश का अपमान किया है।   </p>
<p>अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने शंकराचार्य और साधु-संतों के साथ दुव्र्यवहार किया है। भाजपा को अधिकारियों के माध्यम से ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सरकार देश का संविधान, कानून, भाईचारा और परम्परा तोड़ रही है। इस सरकार में किसी के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं हो रहा है।   </p>
<p>गौरतलब है कि, बीते दिनों माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी परंपरागत पालकी यात्रा के माध्यम से संगम स्नान के लिए जा रहे थे। आरोप है कि प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देते हुए उनकी पालकी यात्रा को बीच रास्ते में रोक दिया और उन्हें जिस स्थान पर उतारा गया, वहीं छोड़ दिया गया। इसी के विरोध में शंकराचार्य उसी स्थान पर धरने पर बैठ गए। वहीं शंकराचार्य ने पुलिस पर मारपीट का भी आरोप लगाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 18:38:50 +0530</pubDate>
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