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                <title>reprimand - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>प्रदूषण पर कोर्ट की केंद्र और दिल्ली सरकार को 'सुप्रीम' फटकार</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में कल से स्कूल बंद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B--%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE--%E0%A4%AB%E0%A4%9F%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-2889"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/sc.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली और केंद्र सरकार को गुरुवार को फिर फटकार लगाई और कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वो गंभीरतापूर्वक विचार कर वायु प्रदूषण स्तर कम करने का उपयुक्त उपाय करें  तथा शुक्रवार सुबह 10 बजे तक उनके बारे में अवगत कराएं, अन्यथा वह कोई 'निर्देश' पारित करेगा। हांलाकि दिल्ली सरकार ने इस फटकार के बाद शुक्रवार से स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है। <br /> <br /> उल्लेखनिय है कि मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने दिल्ली में स्कूलों खोले जाने पर नाराजगी व्यक्त की। इसके अलावा वायु प्रदूषण फैलाने वाले प्रमुख कारकों औद्योगिक इकाइयों और वाहनों पर  पर्याप्त कार्रवाई नहीं किए जाने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। शीर्ष अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार के उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें प्रदूषण कम करने के तमाम उपाय किए जाने के दावे किए गए हैं। अदालत ने सवालिया लहजे में कहा कि जब तमाम उपाय किए जा रहे हैं तो प्रदूषण का स्तर क्यों बढ़ रहा है। पीठ ने नौकरशाहों के कामकाज के तरीकों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े किए ये। शीर्ष अदालत ने केंद्र, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार और अन्य पक्षकारों से कहा है कि हम आपको 24 घंटे का समय दे रहे हैं।  हम चाहते हैं कि आप इस पर गंभीरता से विचार करें और इसका समाधान निकालें।<br /> <br /> मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्य खंडपीठ ने कहा, ''हम कल सुबह 10 बजे 30 मिनट के लिए सुनवाई कर सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने दिल्ली सरकार से पूछा कि प्रदूषण के मद्देनजर जब व्यस्कों  को घर से काम करने की इजाजत है तो तीन-चार साल तक के बच्चों को स्कूल जाने पर मजबूर क्यों किया जा रहा है? इस पर दिल्ली सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि विशेषज्ञों की राय पर स्कूल खोले गए हैं, जिसमें बताया था कि स्कूल नहीं जाने की वजह से बच्चों के सीखने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।<br /> <br /> इसपर अदालत ने फिर से पूछा कि प्रदूषण कम करने के उपायों का क्या हुआ? सिंघवी ने कहा कि नवंबर में  प्रदूषण फैलाने वाले 1500 वाहन जब्त किए गए हैं। सरकार के दावों से असंतुष्ट पीठ ने कहा कि हमें लगता है कि जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हो रहा है, क्योंकि प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। अदालत ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि हमें लगता है कि हम अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।<br /> <br /> न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने कहा कि पर्यावरण के नाम पर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के प्रयास नजर आ रहे हैं। 'पर्यावरण बचाओ' के बैनर लेकर लोग सड़कों दिखाई देते हैं लेकिन प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है।<br /> <br /> याचिकाकर्ता स्कूली छात्र आदित्य दुबे  का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील विकास ङ्क्षसह ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य जारी रहने पर एक बार फिर आपत्ति दर्ज कराते हुए  कहा कि लोगों के स्वास्थ्य की कीमत पर विकास नहीं हो सकता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब हम इंडिया गेट पर जाते हैं तो चारों ओर धूल उड़ रही होती है। ऐसे में निर्माण गतिविधियों पर अदालती रोक के आदेश का क्या मतलब हैं? उन्होंने कहा कि आज दिल्ली का वायु प्रदूषण स्तर 500 एक्यूआई है।<br />  <br /> पीठ ने केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से हरियाणा में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई किए जाने पर सवाल पूछे।<br /> <br /> गौरतलब है कि दिल्ली और केंद्र सरकार की ओर से लगातार शीर्ष अदालत में ये दावे किए जा रहे हैं कि वो राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने के लिए लगातार ठोस प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार की ओर से बुधवार को शीर्ष अदालत में एक हलफनामा दायर कर कहा गया था कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में निर्माण गतिविधियों के मद्देनजर प्रदूषण कम करने के तमाम एहतियाती  उपाय किए जा रहे हैं और निर्माण कार्य की कार्यों की वजह से प्रदूषण नहीं फैल रहा है। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय महत्व कार्य बताते हुए केंद्र सरकार ने कहा था कि यहां प्रदूषण रोकने के तमाम ऐतिहासिक उपाय किए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 02 Dec 2021 16:07:37 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली प्रदूषण पर सुप्रीम फटकार, राजनीति और सरकार अपनी सीमाओं से ऊपर उठकर करें उपाय</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली प्रदूषण : लॉकडाउन हो सकता है, राजनीति से ऊपर उठकर तत्काल करें उपाय:  सुप्रीम कोर्ट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%AB%E0%A4%9F%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0--%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%8A%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%89%E0%A4%A0%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%89%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%AF/article-2344"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/polution_sc.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण का स्तर खतरनाक श्रेणी पर पहुंचने पर चिंता जताते  हुए शनिवार को कहा है कि राजनीति और सरकार अपनी सीमाओं से ऊपर उठकर तत्काल ऐसे ठोस उपाय करे ताकि राजधानी में दो-तीन दिनों में हर हालत में प्रदूषण कम किया सके। अदालत ने लॉकडाउन करने के उपायों पर भी विचार करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमन, न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने दिल्ली की प्रदूषण की खतरनाक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार को मिलकर काम करने की सलाह दी और यह आदेश दिया कि वे दो-तीन दिनों में प्रदूषण कम करने के उपाय करें।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रदूषण की गंभीर स्थिति के कारण हम लोग अपने घरों में भी मास्क लगाने को मजबूर हैं। मुख्य न्यायाधीश ने दो-तीन दिन के लिए राजधानी दिल्ली में लॉकडाउन लगाने पर विचार करने  की सलाह दी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए इसे तत्काल कम करने के उपाय के मद्देनजर आज राज्यों के सचिवों की बैठक है। इसमें कोई ठोस उपाय किए जाएंगे।<br /> <br /> शीर्ष अदालत इस मामले को सोमवार को फिर सुनवाई करेगी। अदालत ने उस दिन प्रदूषण कम करने के लिए किए गए उपायों के बारे में कार्यवाही रिपोर्ट देने का आदेश सरकार को दिया है । उच्चतम न्यायालय ने 17 वर्षीय छात्र आदित्य दुबे की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि स्कूल खुले हुए हैं और बच्चे प्रदूषण के बीच सड़कों पर आ जा रहे हैं। आने वाले कुछ दिनों में प्रदूषण की स्थिति और गंभीर होने की संभावना जतायी जा रही है। इससे लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। सुनवाई के दौरान केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से कहा गया कि पंजाब में पराली जलाने के कारण दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति गंभीर स्तर पर पहुंच गयी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पराली जलाने से रोकने के उपाय के लिए किसानों को मशीन खरीदने में दी जाने वाली सब्सिडी एवं अन्य उपायों की जानकारी दी।सर्वोच्च अदालत ने कहा कि स्थाई समाधान के इस मुद्दे पर बाद में विचार किया जाएगा। फिलहाल अगले कुछ दिनों प्रदूषण की और अधिक गंभीर स्थिति से निपटने पर ध्यान केंद्रित किया जाए और इस बारे में सोमवार को अदालत को सरकार कार्यवाही रिपोर्ट से अवगत कराए।</p>
<p><strong>दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में</strong><br />  राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शनिवार को भी लोगों को प्रदूषण से राहत नहीं मिली। राजधानी में अभी भी लोगों को सांस लेने खासी परेशानी हो रही है और धुंध की मोटी चादर चारों ओर बरकरार है तथा वायु गणवत्ता का स्तर 'गंभीर' श्रेणी में बना हुआ है। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) कई स्थानों पर 500 के पार पहुंच गया। दिल्ली-एनसीआर के लगभग सभी स्टेशनों ने वायु गुणवत्ता सूचकांक 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गया है। कुछ इलाकों में यह गुणवत्ता सूचकांक 500 के पार पहुंचकर बेहद गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। दिल्ली के लोधी रोड इलाके में वायु गणवत्ता सूचकांक 476, आईआईटी में 479 और दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तरी परिसर क्षेत्र में 578 पर रिकॉर्ड किया गया।<br /> <br /> विभाग के अनुसार अगर वायु गुणवत्ता सूचकांक शून्य से 50 के बीच में है, तो उसे अच्छा श्रेणी में माना जाता है, 51 से 100 के बीच में'संतोषजनक', 101 से 200 के बीच'मध्यम', 201 से 300 के बीच 'खराब' श्रेणी, 301 के बीच 400'बेहद खराब' और 401 से 500 के बीच 'गंभीर' श्रेणी में माना जाता है। मौसम विभाग ने शनिवार सुबह जानकारी दी, ''दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता 13 नवंबर और 14 नवंबर को'बेहद खराब' से 'गंभीर' श्रेणी से ऊपर पहुंच सकती है। इस दौरान दिन के समय धीमी हवाएं और शाम/रात हवाएं थमने से प्रदूषकों के फैलाव के लिए बेहद प्रतिकूल असर रहेगा। प्रतिकूल मौसम की स्थिति अगले पांच दिनों तक बने रहने के असार हैं। वायु गुणवत्ता प्रणाली और मौसम पूर्वानुमान और अनुसंधान (सफर) ने कहा, ''वायु गुणवत्ता सूचकांक आज 'गंभीर' श्रेणी में है और कल भी स्थिति यहीं रहने का अनुमान है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Nov 2021 14:30:43 +0530</pubDate>
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                <title>प्रशासन शहरों के संग अभियान  में18 दिन में बंटे केवल 33 हजार 78 पट्टे</title>
                                    <description><![CDATA[लापरवाह अधिकारियों को फटकार, निलंबन की गिरेगी गाज : अभियान को गति देने के लिए बदला फार्मूला : अब वार्डवाइज भी लगेंगे शिविर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/616fddef76a62/article-1790"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/prashan-shahro-ke-sang-abhiyan.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर। </strong>प्रशासन शहरों के संग अभियान में लक्ष्य के मुताबिक पट्टे नहीं बंटने पर अब राज्य सरकार ने कॉलोनी या वार्डवाइज शिविर लगाने की कार्य योजना तैयार की है। वहीं अभियान में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर शिकंजा कसने की सरकार ने तैयारी कर ली है। ऐसे अधिकारियों को अब निलंबित किया जाएगा और उनकी उनकी एसीआर में भी टिप्पणी लिखी जाएगी। नगरीय निकायों के अधिकारियों की मंगलवार को समीक्षा बैठक में यूडीएच सलाहकार जीएस संधु, प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीणा और स्वायत्त शासन सचिव भवानी सिंह देथा ने नाराजगी जताते हुए फटकार लगाई। उच्चाधिकारियों ने निकाय अधिकारियों को चेतावनी दी कि अगर पट्टे जारी करने की संख्या नहीं बढ़ाई तो कार्रवाई के लिए तैयार रहें। जेडीए को छोड़ प्रदेश के अन्य निकाय अधिकारियों को खरी-खोटी सुननी पड़ी है। अभियान को लगभग 18 दिन का समय बीत चुके है, लेकिन केवल 33 हजार 78 पट्टे ही जारी किए जा सके, जबकि निकायों को 87 हजार से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए हैं। वहीं पुरानी आबादी क्षेत्र के लिए निकायों को 9205 आवेदन मिले हैं और केवल 1072 मामलों में ही पट्टे बांटे गए है।<br /> <br /> <strong>तीन वार्डों में एक शिविर</strong><br /> अभियान को गति देने के लिए अब नई कार्य योजना तैयार की गई है। निकायों की ओर से कॉलोनी या वार्ड वार शिविर लगाए जाएंगे। तीन वार्डों का एक शिविर लगाया जाएगा, जो तीन दिन चलेगा। इस दौरान घर-घर जाकर सर्वे किया जाएगा और आवेदन पत्र बांटे जाएंगे। यह शिविर 22 अक्टूबर से लगेंगे। इसके लिए 21 अक्टूबर तक सभी निकाय 15 दिन का शिविर कार्यक्रम यूडीएच और एलएसजी को भेजेंगे।</p>
<p><br /> <strong>पार्षदों की लेंगे मदद</strong><br /> निकायों को निर्देश दिए हैं कि पुरानी आबादी क्षेत्र में निकाय कार्मिक घर-घर जाकर सर्वे करेंगे। इस दौरान पार्षदों की मदद ली जाएगी। साथ ही निकायों को नाम हस्तांतरण की पेंडेंसी जल्द खत्म करने के भी निर्देश दिए गए हैं। निकायों में नाम हस्तांतरण के लिए 8469 आवेदन प्राप्त हुए है, लेकिन इनमें से 3496 प्रकरणों का ही निस्तारण हो पाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Oct 2021 15:23:02 +0530</pubDate>
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