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                <title>Indian judiciary - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Indian judiciary RSS Feed</description>
                
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                <title>25 PIL दाखिल करने वाले वकील को सुप्रीम कोर्ट की फटकार : याचिकाओं पर सुनवाई से इंकार, पढ़ें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील द्वारा दायर 25 जनहित याचिकाओं को सुनने से इनकार करते हुए कड़ी फटकार लगाई। न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने याचिकाकर्ता को "पीआईएल की दुकान" बंद कर वकालत पर ध्यान देने की सलाह दी। अदालत ने तुच्छ मुद्दों और बिना गहराई के दायर मुकदमों पर नाराजगी जताते हुए संवेदनशीलता बरतने की हिदायत दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/lawyer-who-filed-25-pil-got-a-shock-from-the/article-149870"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/supreme-court--2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एक ही याचिकाकर्ता की ओर से व्यक्तिगत रूप से दायर 25 जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पांचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता वकील सचिन गुप्ता को जनहित याचिकाएं दायर करने के बजाय अपनी वकालत पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा। न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने टिप्पणी की, "पेशे पर ध्यान केंद्रित करें। जब सही समय होगा, हम मामलों पर भी विचार करेंगे। लेकिन पहले संवेदनशील बनें और मुद्दों को गहराई से समझें।"</p>
<p>अदालत के समक्ष पेश याचिकाओं में कई तरह की मांगें की गयी थीं। इनमें देश में प्रचलित सभी भाषाओं और बोलियों के शब्दों को मिलाकर भारत में एक सामान्य संपर्क भाषा विकसित करने की नीति, टेलीविजन पर कानूनी जागरूकता कार्यक्रम के लिए नीति और साबुनों में रसायनों के उपयोग पर नीति बनाना शामिल था। इसके अलावा साबुनों में केवल ऐसे रसायनों की अनुमति देने की मांग की गयी थी, जो हानिकारक बैक्टीरिया को मारते हों न कि त्वचा के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बैक्टीरिया को। याचिकाओं में अखिल भारतीय स्तर पर खाद्य/एफएसएसएआई पंजीकरण अभियान के लिए नीति बनाने जैसी मांगें भी शामिल थीं।</p>
<p>याचिकाकर्ता ने याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे पीठ ने मंजूर कर लिया। पीठ ने उन लोगों की भी आलोचना की, जो 'पीआईएल की दुकानें' चला रहे हैं। अदालत का इशारा तुच्छ मुद्दों पर बड़ी संख्या में दायर की जाने वाली जनहित याचिकाओं की ओर था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 14:54:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बंगाल एसआईआर मामला: सीएम ममता उच्चतम न्यायालय के सामने आज होंगी पेश, मानवीय हितों की अनदेखी का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में एसआईआर विवाद पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होंगी। याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ सुनवाई करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bengal-sir-case-cm-mamata-to-appear-before-supreme-court/article-141876"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/mamta-banraji.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी बुधवार को उच्चतम न्यायालय के कोर्ट रूम नंबर 1 में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होंगी। यह पेशी पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिका के संबंध में होगी।</p>
<p>सीएम बनर्जी ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने की अनुमति मांगने के लिए एक आवेदन दायर किया है। चूंकि उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है इसलिए उनकी उपस्थिति के लिए सुरक्षा मंजूरी मांगी गई है। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री के पास कोलकाता के जोगेश चंद्र चौधरी विधि महाविद्यालय से कानून की डिग्री है और उन्होंने संक्षिप्त रूप से वकील के रूप में काम किया है। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि उन्होंने अंतिम बार कानूनी प्रैक्टिस 2003 में की थी। </p>
<p>पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से मतदाताओं को बड़े पैमाने पर बाहर किए जाने के आरोपों और एसआईआर प्रक्रिया की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह को आज उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। ये याचिकाएं राज्य में चल रही एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित हैं।</p>
<p>सीएम बनर्जी एसआईआर प्रक्रिया को रोकने की मांग कर रही हैं और वर्तमान में पश्चिम बंगाल के उन परिवारों के साथ नयी दिल्ली में हैं जो इस प्रक्रिया से प्रभावित होने का दावा कर रहे हैं। यह मामला सीएम बनर्जी की अनुच्छेद 32 याचिका से जुड़ा है जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा संचालित एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती दी है। अपनी याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि एसआईआर प्रक्रिया से लोगों को अत्यधिक असुविधा हुई है और याचिका में इसके कार्यान्वयन से संबंधित प्रक्रियात्मक एवं कानूनी चिंताओं को उठाया है।</p>
<p>तृणमूल कांग्रेस के सांसदों डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन द्वारा दायर एक याचिका भी मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, साथ ही सीएम बनर्जी द्वारा स्वयं दायर एक अन्य याचिका भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ शीर्ष अदालत में एक मामला भी दायर किया है।</p>
<p>तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और चुनाव आयोग के बीच विवाद सोमवार को उस समय और बढ़ गया जब उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ बैठक से यह आरोप लगाते हुए बाहर वॉकआउट कर दिया कि उन्होंने उनके साथ दुव्र्यवहार किया है। सीएम बनर्जी के साथ-साथ तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी भी बैठक में मौजूद थे, साथ ही एसआईआर प्रक्रिया से कथित रूप से प्रभावित परिवारों के 12 सदस्य भी उपस्थित थे।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि मानवीय हितों की अनदेखी करते हुए तथआ कानूनों एवं नियमों का उल्लंघन करते हुए एसआईआर लागू किया गया है। सूत्रों के अनुसार, वह बुधवार को होने वाली सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय के समक्ष इस मामले पर बहस करेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 12:05:41 +0530</pubDate>
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                <title>लंबी बीमारी के बाद केरल उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एस. श्री जगन का निधन, 74 साल की उम्र में ​ली आखिरी सांस</title>
                                    <description><![CDATA[केरल हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एस. श्री जगन का 74 वर्ष की आयु में कोच्चि में निधन हुआ। जनहित याचिकाओं, सामाजिक न्याय और सार्वजनिक सेवा के लिए वे प्रसिद्ध थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/former-kerala-high-court-judge-s-sri-jagan-passes-away/article-140775"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(3)3.png" alt=""></a><br /><p>कोच्चि। न्याय के प्रति जनहितैषी दृष्टिकोण के लिए विख्यात केरल उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और न्यायविद न्यायमूर्ति एस. श्री जगन का शनिवार देर शाम एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 74 वर्ष के थे। जगन पिछले लगभग तीन सप्ताह से इलाज करा रहे थे। कोल्लम जिले के मय्यनाड के मूल निवासी, न्यायमूर्ति श्री जगन ने 2005 से 2014 में अपनी सेवानिवृत्ति तक केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य किया।</p>
<p>अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने स्वत: संज्ञान जनहित याचिकाओं सहित कई महत्वपूर्ण मामलों को संभाला और करुणा, सुलभता और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता के लिए ख्याति अर्जित की। न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी, न्यायमूर्ति जगन सार्वजनिक सेवा में सक्रिय रूप से जुड़े रहे। उन्होंने केरल में आवारा कुत्तों के हमलों के पीड़तिों के लिए मुआवजे का निर्धारण करने हेतु सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति का नेतृत्व किया, जिसे लोकप्रिय रूप से न्यायमूर्ति जगन समिति के नाम से जाना जाता है।</p>
<p>उन्हें सबरीमाला उच्चाधिकार समिति का अध्यक्ष भी नियुक्त किया गया था और उन्होंने कोच्चि स्थित राष्ट्रीय उन्नत विधि अध्ययन विश्वविद्यालय (एनयूएएलएस) के कार्यवाहक कुलपति के रूप में भी कार्य किया। न्यायमूर्ति जगन को सार्वजनिक कार्यों में उनकी व्यक्तिगत भागीदारी और आम नागरिकों के प्रति उनके अटूट समर्थन के लिए व्यापक रूप से सराहा जाता था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jan 2026 13:24:44 +0530</pubDate>
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