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                <title>stress - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>तनाव मानसिक रोगों की सबसे बड़ी वजह, हर 7 में से एक व्यक्ति मानसिक समस्या से है ग्रस्त</title>
                                    <description><![CDATA[देश में लगभग 20 करोड़ लोग मेंटल डिस्ऑर्डर के शिकार, राजस्थान में लाइफटाइम मेंटल मोरबिडिटी का प्रतिशत लगभग 15.4 फीसदी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/stress-is-the-biggest-cause-of-mental-diseases-one-out/article-92698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/mental-health.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मानसिक स्वास्थ्य लोगों को जीवन के तनावों से लड़ने, अपनी क्षमताओं का एहसास करने, अच्छी तरह से सीखने और काम करने और समाज में योगदान करने में सक्षम बनाता है। यह हमारे सोचने, महसूस करने और कार्य करने के तरीके को प्रभावित करता है। मानसिक रोग कई प्रकार के होते हैं जैसे कि डिप्रेशन, एंजाइटी डिस्ऑर्डर, साइकोसिस, सिजोफ्रेनिया, डिमेंशिया, नशे की लत आदि।</p>
<p>आकड़ों के अनुसार 19.73 करोड़ भारतीय यानी लगभग हर सात में से एक व्यक्ति किसी ना किसी मानसिक समस्या से पीड़ित है जिनमें लगभग 45 मिलियन डिप्रेशन एवं इतने ही एन्जाइटी डिस्ऑर्डर के केस हैं। नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे के अनुसार राजस्थान में लाइफटाइम मेंटल मोरबिडिटी का प्रतिशत लगभग 15.4 है।</p>
<p>तंबाकू उपयोग का प्रतिशत 39.6 और सुसाइड रिस्क लगभग 7.9 प्रतिशत है। इसी प्रकार सिजोफ्रेनिया व अन्य साइकॉटिक डिस्ऑर्डर का प्रसार लगभग 0.4 प्रतिशत, एन्यूरोटिक एवं स्ट्रेस रिलेटेड डिस्ऑर्डर का प्रसार राजस्थान में लगभग 6 प्रतिशत है वहीं मूड डिस्ऑर्डर्स का प्रसार राजस्थान में लगभग तीन प्रतिशत है। ये आंकड़ें देश और प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य के हालात बयान कर रहे हैं।</p>
<p><strong>सामाजिक-पारिवारिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव</strong><br />मानसिक रोग व्यक्ति की सामाजिक, पारिवारिक, प्रोफेशनल लाइफ  पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मानसिक बीमारियों का असर हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। वर्तमान समय में इन का इलाज संभव है और समय पर ली गई उचित मनोचिकित्सकीय सलाह से हम ऐसे व्यक्ति को एक सामान्य एवं सकारात्मक जीवन जीने में मदद कर सकते हैं।</p>
<p>नियमित दिनचर्या जैसे उचित नींद एवं संतुलित भोजन, एक्सर्साइज, योगा इत्यादि, पारस्परिक संवाद, स्वस्थ जीवन शैली, अवास्तविक अपेक्षाओं से बचें, मेलजोल बढ़ाएं, भावनाओं को साझा करें, अपने शौक विकसित करें एवं उसके लिए कुछ समय निकालें, आउटडोर गेम खेलें, नशे से बचें, तुलना करना बंद करें, मदद मांगने में कभी संकोच न करें, वर्क और पर्सनल लाइफ  में बैलेंस पर फोकस करें। <br /><strong>-डॉ. अखिलेश जैन, वरिष्ठ मनोचिकित्सक</strong></p>
<p>मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बेहद जरूरी है। मनोचिकित्सक से सलाह लेना, समय पर दवाएं लेना, स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, पर्याप्त नींद लेना, सकरात्मक सोच रखना, तनाव से बचना आदि ऐसे तरीके हैं जिनसे मानसिक रोगों से बचा जा सकता है।<br /><strong>-डॉ. सुनील शर्मा, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, एसएमएस मेडिकल कॉलेज</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Oct 2024 10:20:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>घबराहट और तनाव के शिकार होते बच्चे</title>
                                    <description><![CDATA[देखा जाए तो कोरोना के बाद से बच्चों में डिप्रेशन और एंजाइटी का रोग तेजी से बढ़ता जा रहा है। कोरोना की दहशत के हालात, लॉकडाउन, वर्क फ्राम होम और बच्चों की ऑनलाईन पढ़ाई के साइड इफेक्ट सामने आने लगे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/children-suffering-from-anxiety-and-stress/article-85830"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/anxiety.png" alt=""></a><br /><p>देखा जाए तो कोरोना के बाद से बच्चों में डिप्रेशन और एंजाइटी का रोग तेजी से बढ़ता जा रहा है। कोरोना की दहशत के हालात, लॉकडाउन, वर्क फ्राम होम और बच्चों की ऑनलाईन पढ़ाई के साइड इफेक्ट सामने आने लगे हैं। ऑनलाईन स्टडी के चलते बच्चें मोबाइल के अधिकांश इस तरह के ऐप्स से रुबरु होने लगे जो बालपन को कहीं ना कहीं सीधे सीधे प्रभावित करने लगा। एक और जहां चाहे-अनचाहे आनलाईन गेमों की बच्चों में लत लगी वहीं सोशियल मीडिया साइट्स भी बच्चों में लत के रूप में लगने के साथ ही बच्चों के दिलों दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव डालने में सफल रही है। देखा जाए तो खेल-खेल में बच्चे ना चाहते हुए भी तनाव और एंजाइटी के दौर में प्रवेश कर गए हैं। बदलती जीवनशैली और सामाजिक आर्थिक सिनेरियों में सर्दी जुकाम की तरह एंजायटी यानी कि घबराहट और डिप्रेशन यानी कि अवसाद आज के बच्चों में आम होता जा रहा है।  मनोवैज्ञानिकों ने अध्ययन के दौरान 11 से 15 साल के बच्चों के बीच अध्ययन किया और खासतौर से यह समझने की कोशिश की गई कि जिस तरह से सर्दी जुकाम संक्रामक बीमारी है और एक से दूसरे में फैल जाती है उसी तरह से एंजायटी या डिप्रेशन भी एक बच्चे से दूसरे बच्चे को प्रभावित कर सकता है क्या? अध्ययन में पाया गया कि घबराहट या एंजाइट प्रभावित बच्चें के लक्षण साथ वाले बच्चें में भी विकसित होने के देखे गए हैं। यह अध्ययन भी एक दो नहीं बल्कि सात लाख बच्चों में किया गया है। चिंता की बात यह है कि सर्दी जुकाम संक्रामक रहा है व संपर्क में आने वालों को गिरफ्त में लेने की प्रबल संभावनाएं रहती है, लगभग यही हालात एंजाइटी और डिप्रेशन को लेकर देखी जाने लगी है। हालात की गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि फिनलैंड विश्वविद्यालय के शोधार्थियों के अध्ययन में यह साफ हुआ है कि छह में से एक व्यक्ति बैचेनी यानी कि एंजायटी से प्रभावित रहने लगा है। कोरोना के बाद इस तरह के मरीजों की संख्या में 60 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। यदि अध्ययन कतार्ओं की मानें तो कोविड 19 अर्थात कोरोना के बाद हालात तेजी से विकट हुए हैं। खासतौर से पैसों वालों व बुजुर्गों की बीमारी से बच्चें प्रभावित होने लगे हैं। बैचेनी, घबराहट, हाथों में कंपनए नींद ना आना, चिडचिडापन, तनावग्रस्त कुंठा आदि लक्षण दिखने लगते हैं। इससे  बच्चों में नकारात्मकता भी आती जा रही है। अधिक चिंता की बात यह है कि यह बीमारी बच्चों में सक्रामक रोग की तरह फैलती जा रही है। कोराना के लॉकडाउन के साथ ही पेरेंट्स की अंधी प्रतिस्पर्धा और अधिक से अधिक पाने की लालसा, बच्चों के बीच परस्पर सहयोग, समन्वय, मित्रता, सहभागिता के स्थान पर संवेदनहीनता और गलाकाट प्रतिस्पर्धा के परिणाम सामने आने लगे हैं। बच्चों में कुंठा तो आम होती जा रही है। रही सही कसर सोशियल मीडिया ने पूरी कर दी है। सोशियल मीडिया जो परस्पर संवाद का माध्यम बन सकता है चह तनाव का प्रमुख कारण बनता जा रहा है।  लाइक अनलाइक और कमेंट्स बालमन को नकारात्मक रुप से प्रभावित करता जा रहा है। ऑनलाईन अध्ययन के चलते बच्चों में मोबाइल का शोक लग गया है और उसका नकारात्मक असर वीडियो गेम्स के रुप में देखा जा सकता है जो बच्चों को गेम के चक्कर में डिप्रेशन में जाते हुए देखा जा सकता है। गेम्स बच्चों में तनाव का कारण बनते जा रहे हैं। ओटीटी प्लेटफार्म भी अपना असर दिखाता जा रहा है। रील्स का तो कहना ही क्या? लगता है बच्चों के बालमन को नकारात्मक रुप से प्रभावित करने वाले सभी कारक सामने आते जा रहे हैं। शिक्षण संस्था हो या परिवार खासतौर से एकल परिवार के हालात हालात और भी गंभीर करते जा रहे हैं। हालात यहां तक होते जा रहे हैं कि बच्चे आक्रामक होते जा रहे हैं।  </p>
<p>समाज विज्ञानियों के सामने यह गंभीर समस्या दस्तक दे रही है। हालात बद से बदतर हो उससे पहले ही समस्या की गंभीरता को समझना होगा। दादा-दादी और नाना- नानी कहीं पीछे छुट रहे हैं, पेरेंट्स अवकाश भी परिवार के साथ बिताने के स्थान पर कहीं घूमने जाना पसंद करने लगे हैं जिससे परिवार और परिवार से मिलने वाले संस्कार खोते जा रहे हैं। हालात दिन प्रतिदिन बदतर होते जा रहे हैं और इसके परिणाम आए दिन सामने आते जा रहे हैं। अत्यधिक तनाव के कारण बच्चों को आत्महत्या जैसे कदम उठाते देखा जा रहा है। वहीं बदले की भावना,बात- बात में गुस्सेल होना, तुनक मिजाजी आदि तो बस पूछो ही मत। अत्यधिक महत्वाकांक्षा भी तनाव का कारण बनती जा रही है। समाज विज्ञानियों और मनोविज्ञानियों के सामने अधिक चुनौती पूर्ण समय आ गया है। समय रहते इसका समाधान खोजना ही होगा नहीं तो दुनिया के देशों में जिस तरह से बच्चों को छोटी उम्र में ही हिंसक होते देखा जा रहा है उसमें कमी होने के स्थान पर गंभीरता पूर्वक हालात बदतर ही होंगे। इसका समाधान खोजना होगा नहीं तो आने वाली पीढ़ी किसी भी हालत में हमें माफ नहीं करेगी।<br />   <strong>-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा</strong><br /><strong>   (ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jul 2024 14:19:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तनाव व एंजाइटी की समस्या में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति गम्भीरता आवश्यक: डीजीपी उमेश मिश्रा </title>
                                    <description><![CDATA[बढ़ती प्रतिस्पर्धा व अभिभावकों के उचित मार्गदर्शन के अभाव की स्थितियों में बच्चे मानसिक तनाव के शिकार होकर आत्महत्या तक का कदम उठा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-case-of-stress-and-anxiety-seriousness-towards-mental-health/article-57588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/umesh-mishra-1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। महानिदेशक पुलिस उमेश मिश्रा ने कहा है कि वर्तमान दौर में मानसिक तनाव व एंजाइटी की समस्या निरन्तर बढ़ती जा रही है। उन्होंने पुलिस बल सहित आमजन में भी मानसिक तनाव की समस्या को दृष्टिगत रखते हुए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति गम्भीरता बरतने की आवश्यकता प्रतिपादित की। मिश्रा बुधवार को पुलिस मुख्यालय में इंग्लैंड के मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में कार्यरत राजस्थान मूल के डॉ विमल शर्मा के सानिध्य में मानसिक स्वास्थ्य के बारे में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मिश्रा ने कहा कि जीवन की जटिलताओं के मध्य युवा वर्ग सहित शहरी ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह समस्या बढ़ती जा रही है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा व अभिभावकों के उचित मार्गदर्शन के अभाव की स्थितियों में बच्चे मानसिक तनाव के शिकार होकर आत्महत्या तक का कदम उठा रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण पर बल देते हुए कहा कि काम के बढ़ते बोझ की स्थितियों में व्यवस्थित जीवन शैली आवश्यक है। नियमित व्यायाम, योग प्राणायाम, खेल सहित स्वयं की समुचित देखभाल एवं मनोरंजन गतिविधियों से अपने प्रसन्नता के पैमाने को बढ़ाया जा सकता है। </p>
<p>डीजी कानून व्यवस्था राजीव शर्मा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए पुलिस अधिकारियों व जवानों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति गम्भीरता की आवश्यकता प्रतिपादित करते हुए मानसिक समस्याओं के समय पर सामाधन पर बल दिया। एसएमएस मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रिंसिपल  व हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ राजीव बगरहट्टा ने व्यवस्थित दिनचर्या के साथ ही नियमित व्यायाम पर जोर दिया। मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में कार्यरत राजस्थान मूल के डॉ विमल शर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य की स्थितियों के नियमित रूप से आंकलन करने के साथ ही समय समय पर विशेषज्ञों से विचार विमर्श पर बल दिया। </p>
<p>इंग्लैंड से आये विशेषज्ञ डॉ कैथरीन एवं डॉ रॉबर्ट पॉल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर एडीजी क्राइम दिनेश एमएन, एडीजी बिपिन पाण्डे, आईजी राजेन्द्र सिंह, डीआईजी श्वेता धनखड़, एसएमएस के सीनियर प्रोफेसर डॉ लोकेश शर्मा,  पुलिस मुख्यालय के डॉ सुनील पूनिया सहित प्रदेशभर के पुलिस संस्थानों में कार्यरत चिकित्साधिकारियों ने भाग लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Sep 2023 12:43:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कभी भी होने लगता है तनाव और काम में नहीं लगता ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[तनाव में इमोशनली भी एग्जॉस्टेड फील होता और सिर में दर्द महसूस होता है सो अलग तनाव की स्थिति में किसी भी काम में ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>ऐसा शायद ही कोई होगा जिसे तनाव ना होता हो,आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और कभी ना खत्म होने वाला काम तनाव की वजह बनते हैं,तनाव होने पर व्यक्ति शारीरिक रूप से भी बीमार महसूस कर सकता है, तनाव में इमोशनली भी एग्जॉस्टेड फील होता और सिर में दर्द महसूस होता है सो अलग तनाव की स्थिति में किसी भी काम में ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है।<br /><br />इसके अलावा देखा जाए तो तनाव कई स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का कारण बनता है,बहुत से लोगों को तनाव के कारण बाल झड़ने और शरीर के कई हिस्सों में दर्द की शिकायत भी रहने लगती है,ऐसे में अपने खानपान में आप ऐसी चीजों को शामिल कर सकते हैं जिनका असर स्ट्रेस कम करने में कमाल का नजर आता है।<br /><br />डार्क चॉक्लेट<br />तनाव कम करने में डार्क चॉक्लेट  का असर देखा जाता है,अगर आपको तनाव महसूस होता है तो आप डार्क चॉक्लेट का सेवन कर सकते हैं,डार्क चॉक्लेट कॉर्टिसोल हार्मोन रिलीज को धीमा करता है ,जिससे तनाव कम महसूस होता है,इसमें फाइबर भी भरपूर मात्रा में होता है।<br /><br />हरी पत्तेदार सब्जियां<br />हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे केल और पालक स्ट्रेस कम करने वाले फूड्स में शामिल हैं,पत्तेदार सब्जियों में फोलेट और विटामिन होते हैं ,जो फील गुड केमिकल्स डोपामिन और सेरोटोनिन को प्रोड्यूस करने में मदद करते हैं।<br /><br />सूखे मेवे<br />सूखे मेवों में बी विटामिंस, हेल्दी फैट्स और मैग्नीशियम की अच्छी मात्रा होती है,खासकर मैग्नीशियम स्ट्रेस को कम करने और रेग्यूलेट करने में सहायक साबित होता है, इस चलते तनाव की स्थिति में सूखे मेवों का सेवन किया जा सकता है।<br /><br />बीज<br />चिया सीड्स और अलसी के बीजों का सेवन तनाव से मुक्ति दिलाने में सहायक साबित होता है,बीजों में ओमेगा.3 फैटी एसिड्स होते हैं जो सेल्युलर स्ट्रक्चर और फंक्शन में मदद करते हैं,इन बीजों को ग्रीक योगर्ट के साथ खाना फायदेमंद होता है।<br /><br />एवोकाडो<br />एवोकाडो में एसेंशियल विटामिन और खनिज होते है,इनमें विटामिन सी, ई, के और बी.6 के साथ- साथ रिबोफ्लेविन,नियासिन, फोलेट, मैग्नीशियम और पौटेशियम की अच्छी मात्रा होती है,स्ट्रेस कम करने में एवोकाडो सुपरफूड साबित होते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/health/stress-starts-happening-anytime-and-does-not-concentrate-in-work/article-47407</link>
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                <pubDate>Thu, 01 Jun 2023 15:59:02 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>परीक्षा के तनाव में दसवीं के छात्र ने जहर खाया, उपचार के दौरान मौत</title>
                                    <description><![CDATA[पूछताछ में सामने आया कि मृतक के पिता पन्नू कुमार सिंह मल्टीमेटल कंपनी में मजदूरी का काम करता है।  दो बेटों में सूरज बड़ा लड़का था। शाम को सूरज ने अपने पिता को चाय बना कर पिलाई। जिसके बाद  पिता ड्यूटी पर चला गया था। ड्यूटी पर पहुंचने के बाद उसे सूरज की तबीयत खराब होने की सूचना मिली। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/class-10-student-consumed-poison-under-exam-stress--died-during-treatment/article-38962"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/whatsapp-image-2023-03-04-at-14.28.59.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  विज्ञान नगर थाना क्षेत्र में देर रात अज्ञात जहर खाने से दसवीं कक्षा के छात्र की उपचार के दौरान मौत हो गई । बताया जाता है कि छात्र ने परीक्षा के तनाव के चलते शुक्रवार रात 9 बजे घर पर अज्ञात जहर का सेवन कर लिया था।  उसकी तबीयत खराब होने पर परिजन एमबीएस अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे घर भेज दिया । रात को करीब 12 बजे उसे फि र से उल्टियां होने पर हॉस्पिटल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया ।   पुलिस निरीक्षक देवेश भारद्वाज ने बताया कि छात्र सूरज कुमार उम्र 15 साल पुत्र पन्नू कुमार मुजफ्फ रपुर बिहार का रहने वाला था जो हाल में संजय नगर क्षेत्र में परिवार सहित पिछले 10 साल से रह रहा था। सूरज दसवीं का छात्र था। बोर्ड परीक्षा के चलते छात्र मानसिक तनाव में चल रहा था ।  पूछताछ में सामने आया कि मृतक के पिता पन्नू कुमार सिंह मल्टीमेटल कंपनी में मजदूरी का काम करता है।  दो बेटों में सूरज बड़ा लड़का था। शाम को सूरज ने अपने पिता को चाय बना कर पिलाई। जिसके बाद  पिता ड्यूटी पर चला गया था। ड्यूटी पर पहुंचने के बाद उसे सूरज की तबीयत खराब होने की सूचना मिली।  इसके बाद वह उसे अस्पताल लेकर गया ।  चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। एएसआई सीताराम ने बताया की प्रथम दृष्टया जहर का सेवन करने से छात्र की मौत का मामला सामने आ रहा है।  परिजनों की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर अनुसंधान किया जा रहा है । पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया |</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Mar 2023 15:24:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मेडिकल कॉलेज प्राचार्य व जिला कलेक्टर से जवाब तलब मामले में 6 फरवरी को सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा शहर में 200000 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं लेकिन क्लीनिकल साइकोलॉजी विभाग नहीं है । विभाग प्रारंभ होने से काउंसलिंग की जा सकेगी । कोटा शहर में विद्यार्थियों के मानसिक तनाव को दूर करने के लिए क्लीनिकल साइकोलॉजी विभाग प्रारंभ किया जाना अति आवश्यक है । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hearing-on-february-6-in-the-matter-of-summoning-reply-from-medical-college-principal-and-district-collector/article-34767"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/medical-college-pracharya-va-jila-collector-se-jawab-talab-maamle-mei-6-farwari-ko-sunwai...kota-live-news..12.1.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । स्थाई लोक अदालत ने  गुरुवार को कोटा शहर में  विद्यार्थियों के मानसिक तनाव को  दूर करने के लिए क्लीनिकल साइकोलॉजी विभाग प्रारंभ करने के मामले में सुनवाई करते हुए प्राचार्य एवं नियंत्रण मेडिकल कॉलेज कोटा व जिला कलेक्टर को नोटिस जारी कर 6 फरवरी 2023 तक जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में एडवोकेट लोकेश कुमार सैनी ने अदालत में एक जनहित याचिका पेश करते हुए बताया कि कोटा शहर में विद्यार्थियों के मानसिक तनाव को दूर करने के लिए क्लीनिकल साइकोलॉजी विभाग प्रारंभ किया जाना अति आवश्यक है । यह विभाग न्यू   मेडिकल कॉलेज कोटा में ही शुरू किया जा सकता है । कोटा मेडिकल कॉलेज प्रशासन को , जिला कलेक्टर कोटा के माध्यम से शिक्षा विभाग को इसका प्रस्ताव बनाकर भेजना भी अत्यावश्यक है ताकि इसे सरकार आगामी बजट में शामिल कर सके।  </p>
<p>याचिका में बताया गया कि कोटा में पिछले दिनों विद्यार्थियों के आत्महत्या के मामले लगातार सामने आ रहे हैं । उसके बाद राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आई थी और जिला प्रशासन के साथ बैठक ली थी जिसमें कोटा में क्लीनिकल  साइकोलॉजिस्ट की उपयोगिता की बात उठाई  थी व राज्य सरकार को प्रस्ताव भिजवाने के लिए भी कहा गया था । कोटा शहर में 200000 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं लेकिन उक्त विभाग नहीं है । विभाग प्रारंभ होने से काउंसलिंग की जा सकेगी । मेडिकल कॉलेज प्राचार्य और जिला कलेक्टर की अनदेखी के कारण यह समस्याएं सामने आ रही है। इस मामले में न्यायालय ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य तथा जिला कलेक्टर को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Jan 2023 16:36:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>टेंशन से बचना है तो  मस्त रहिए</title>
                                    <description><![CDATA[अपने जैसे लाखों के बारे में सोचिए और मस्त रहिए। आप सफल नहीं हुए तो इसमें सिर्फ आप वजह नहीं हैं, इसमें कम जगह और उन जगहों को चाहने वालों की बड़ी संख्या जिम्मेदार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/if-you-want-to-avoid-tension-then-be-cool/article-17508"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/parivesh.jpg" alt=""></a><br /><p>आज की तारीख में टेंशन मोबाइल फोन के जैसा हो गया है। बहुत कम लोग बचे हैं, जो टेंशन से दूर हों। जिनके पास टेंशन है, वह उसी तरह उनके साथ सुबह बिस्तर से उठने से लेकर रात सोने तक रहता है, जैसे मोबाइल फोन रहता है। कई बार तो लगता है कि जैसे आज की लाइफस्टाइल और टेंशन एक दूसरे का पर्याय हो गये हैं। एक का दूसरे के बिना काम ही नहीं चलता। लेकिन इसको इतनी सहजता से न लें। भले टेंशन दिन रात हमारे साथ रहता हो, लेकिन टेंशन फिर भी हमारा अपना कतई नहीं है, उसे जब भी मौका मिलेगा, वह किसी न किसी रूप में हमें नुकसान ही पहुंचायेगा।</p>
<p><br /><strong>आइये जानते हैं कैसे ?</strong><br />अगर थकान महसूस हो रही हो, दिल तेजी से धड़क रहा हो, कमजोरी महसूस हो रही हो, तो साफ मतलब है कि हम टेंशन में हैं। अब जब हमें पता ही चल गया है तो सवाल है इससे कैसे निपटें ?</p>
<p><br />-एक गिलास रूम टैम्प्रेचर का पानी पीएं। रिलैक्स करें। समय हो और संभव हो तो एक से डेढ़ किलोमीटर तक अकेले में चुपचाप घूमने निकल जाएं। दिल धीरे धीरे फिट होने लगेगा। घर लौटकर आएं अगर घर वालों से बातें करने का मन है तो करें वरना आधा पौना घंटे लेट जाएं। अगर इस बीच एक हल्की सी गहरी झपकी आ जाए तो सोने में सुहागा,सारा टेंशन दूर हो जाएगा। लेकिन अगर झपकी नहीं भी आती तो भी काफी आराम महसूस करेंगे।</p>
<p><br />आपको जिस रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार था, वह आ गया है। लेकिन हाय री किस्मत आपका नाम सफल उम्मीदवारों में नहीं है। हमें पता है टेंशन इसी की फिराक में है। जैसे ही आप हकीकत से दोचार होंगे कि टेंशन आपके सिर पर चढ़कर बैठ जायेगा। लेकिन इससे झगडे न, इससे भयभीत होने की जरूरत नहीं है। बस कुछ बातें को सोचने भर की जरूरत है। माना कि आपका सलेक्शन नहीं हुआ, लेकिन जगह सिर्फ 254 हैं और उम्मीदार थे 3 लाख 42 हजार। जाहिर है आप अकेले ऐसे नहीं हैं जो रिजल्ट से नाउम्मीद हुए हैं। इसलिए अपने जैसे लाखों के बारे में सोचिए और मस्त रहिए। आप सफल नहीं हुए तो इसमें सिर्फ आप वजह नहीं हैं, इसमें कम जगह और उन जगहों को चाहने वालों की बड़ी संख्या जिम्मेदार है।घर का एक सदस्य बहुत गंभीर रूप से बीमार है। आप खुद से हेल्पलेस महसूस कर रहे हैं, क्योंकि कुछ कर नहीं पा रहे हैं।</p>
<p><br />- यह बहुत आम बात है घर के किसी महत्वपूर्ण सदस्य की बीमारी ही नहीं अगर वह अचानक कहीं चला गया है तो भी कई बार उन घरों में यह काफी चिंता बढ़ाने वाला हो जाता है, खास करके जब बीमार व्यक्ति की बहुत सारी जिम्मेदारियां जीवित रहने वाले लोगों की तरफ बढ़ी चली आ रही हों, तो इस तनाव से बचने का एक ही तरीका है मान लें कि आप बचे हुए भाई नहीं हैं यानी आप भी परेशान हैं तो क्या इस परेशानी से आपकी समस्या का हल निकल आयेगा। शायद नहीं। इसलिए बेफिक्र रहें, क्योंकि चाहकर भी कुछ कर नहीं सकते।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Aug 2022 14:55:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>चांदना के पास बड़ी जिम्मेदारी, तनाव में आकर किया होगा ट्वीट: गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर: मंत्री अशोक चांदना के ट्वीट वाले बयान पर मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि उनके पास बड़ी जिम्मेदारी है, इसलिए वह तनाव में आ गए होंगे। तनाव में ही ट्वीट कर दिया होगा। मेरी उनसे बात नहीं हुई उनसे बात करके उन्हें मना लेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-ashok-chandna-has-a-big-responsibility--must-have-tweeted-under-stress---gehlot/article-10542"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/ashok--chand1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। खेल मंत्री अशोक चांदना के इस्तीफे की पेशकश के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि खेल विभाग की बजट घोषणा को पूरा करने में  उन पर इतना बड़ा भार उनके ऊपर आया हुआ है, हो सकता है कि वो टेंशन में आ गए हो, कोई कमेंट कर दिया हो, ज्यादा उसको गंभीरता से नहीं लेना चाहिए, उनसे बातचीत करेंगे, अभी पता नहीं, अभी मेरी बातचीत भी उनसे नहीं हुई है, होगी तो देख लेंगे, वो दबाव में काम कर रहे दिखते है।<br /><br />गहलोत शुक्रवार को रामनिवास बाग में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नहेरु को पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। पत्रकारों की ओर से अशोक चांदना के इस्तीफे की पेशकश  को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में  गहलोत ने कहा कि मुझे लगता है कि अभी अशोक चांदना ने पिछली बार जो किया था, स्टेट लेवल का प्रोग्राम बहुत बड़ा प्रोग्राम था, शानदार प्रोग्राम था वो स्टेट स्पोर्ट्स का, उसी प्रकार से अब एक प्रोग्राम बहुत बड़ा होने जा रहा है ग्रामीण ओलंपिक, हिंदुस्तान में पहली बार राजस्थान में जो बजट घोषणाएं हैं, बजट घोषणा को करने का जो अभियान चल रहा है, वो इतिहास बनाएगा, करीब 30 लाख से ज्यादा लोग गांव-गांव में खेलेंगे, चाहे कबड्डी हो, वॉलीबॉल हो, जो भी खो-खो हो, तो इतना बड़ा भार उनके ऊपर आया हुआ है, हो सकता है कि वो टेंशन में आ गए हो, कोई कमेंट कर दिया हो, ज्यादा उसको गंभीरता से नहीं लेना चाहिए, उनसे बातचीत करेंगे, अभी पता नहीं, अभी मेरी बातचीत भी उनसे नहीं हुई है, होगी तो देख लेंगे, वो दबाव में काम कर रहे दिखते है, इतनी बड़ी जिम्मेदारी उनके ऊपर आ गई है, जब बात होगी तो देख लेंगे।<br /><br /><strong>नेहरू का आधुनिक भारत में बड़ा योगदान</strong><br />गहलोत ने कहा कि पंडित नेहरू  का जो विजन था, वो दूरदृष्टा थे, आज जो आधुनिक भारत है, उसमें उनके विजन का बहुत बड़ा योगदान है, उन्होंने आजादी के बाद से ही वो निर्णय किए जो आज सबके सामने हैं, चाहे वो साइंस से संबंधित हों, कृषि से संबंधित हों, हेल्थ से संबंधित हों, स्वास्थ्य से संबंधित हों, हर क्षेत्र में उन्होंने बड़े-बड़े बांध, बड़े-बड़े कल-कारखाने, बड़ी-बड़ी साइंटिफिक संस्थाएं बनाईं, एम्स जैसी इंस्टीट्यूट बनाई, प्लानिंग कमीशन बनाया, दुनिया में उनका एक अलग तरह का ऑरा था, सम्मान था पूरे मुल्क के, दुनिया के अंदर। पंचशील के सिद्धांत वो लेकर आए, तो वो बहुत बड़े मानवतावादी थे जिन्होंने 10-12 साल तो जेल में बिताए हैं उस जमाने के अंदर, आजादी की जंग के अंदर और प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में उनका योगदान कोई भूल नहीं सकता है। जरूरत इस बात की है उनकी जो सोच थी, वो वर्तमान नई पीढ़ी तक पहुंचे, जिसकी कमी महसूस की जा रही है, उसमें हम सबकी गलती है। जिस रूप में लगातार उनके विजन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम करना चाहिए था, वो हम नहीं कर पाए, उससे कई बार भटकाव भी होता है। जेल में रहकर जो उन्होंने जो पुस्तकें लिखी हैं या जेल के बाहर जो लिखी हैं, विश्व इतिहास की झलक, भारत एक खोज, ये आज भी मौजूं है और जो विद्वान लोग हैं, साहित्यकार हैं, पत्रकार हैं, उनके जेहन में आज भी वो बातें हैं जो उसमें लिखी हुई हैं, उनके टीवी सीरियल बने हैं, पूरे मुल्क ने देखा भी है, कोई जमाना था। इसलिए वो महान हस्ती का जब दिन आता है, चाहे जन्मदिवस हो, तो बाल दिवस के रूप में क्यों मनाते हैं, आजादी के बाद से ही उनके जन्मदिवस को बाल दिवस के रूप में मनाया जा रहा है, पुण्यतिथि पर लोग याद करते है, उनके विजन को। इसलिए आज जब हम आते हैं तो मन में संकल्प लेते हैं कि कैसे जो उन्होंने शांति का, भाईचारे का, प्यार का, मोहब्बत का जो संदेश दिया था देशवासियों को, उस पर हम लोग आगे बढ़ें, देश में प्रदेश में सभी धर्म, सभी जाति, सभी वर्ग और सभी कार्यकर्ता राजनीतिक हों, सामाजिक हों, सब मिलकर प्यार से, भाईचारे से रहें और शांति कायम रहे, ये हमारा संकल्प होता है हमेशा।</p>
<p><strong>यह था मामला</strong></p>
<p>चांदना ने देर रात ट्वीट किया कि माननीय मुख्यमंत्री मेरा आपसे व्यक्तिगत अनुरोध है कि मुझे इस जलालत भरे मंत्री पद से मुक्त कर मेरे सभी विभागों का चार्ज प्रमुख सचिव को दे दिया जाए, क्योंकि वैसे भी वो ही सभी विभागों के मंत्री हैं। चांदना के इस ट्वीट के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 May 2022 12:05:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान समेत सभी चुनावी राज्यों में बढ़ रहा धार्मिक बवाल</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान समेत देश के सभी चुनावी राज्यों में धार्मिक बवाल बढ़ रहा है। इसके चलते स्थिति से निपटने के लिए आपात योजना तैयार की जा रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/religious-ruckus-growing-in-electoral-state/article-7816"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/4-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान समेत देश के सभी चुनावी राज्यों में धार्मिक बवाल बढ़ रहा है। इसके चलते स्थिति से निपटने के लिए आपात योजना तैयार की जा रही है। राजस्थान में 18 जिलों को चिन्हित किया गया है, जहां धार्मिक बवाल होने की आशंका है। इन जिलों में सौ से ज्यादा विधानसभा क्षेत्र हैं। इन जिलों में पिछले दिनों रामनवमी के मौके पर धारा 144 भी लागू की गई थी। प्रदेश में पांच ऐसे जिले हैं, जिनमें पिछले कुछ साल में सांप्रदायिक तनाव के हादसे हुए हुए हैं। इसके साथ ही गुजरात और मध्यप्रदेश में भी चुनाव होने हैं। हालांकि चुनाव तो हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में भी होंगे, लेकिन दोनों राज्य संवेदनशील प्रदेशों की सूची में शामिल नहीं हैं। संवेदनशील राज्यों की सूची में शामिल गुजरात में इस साल के अंत और राजस्थान व मध्यप्रदेश में अगले साल के अंत में विधानसभा चुनाव होंगे।</p>
<p><strong>राजस्थान में अगले साल होने हैं चुनाव</strong> <br />गुप्तचरों की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में अगले साल होने वाले चुनावों से पहले धार्मिक बवाल हो सकते हैं। वैसे भी पिछले दो सालों में यहां बारां, झालावाड़, बांसवाड़ा और करौली में सांप्रदायिक तनाव के हादसे हो चुके है। विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आएगा, इन हादसों के बढ़ने की आशंका है। यदि पांच वर्ष पहले की बात की जाए तो राजस्थान में 91 हादसे हुए थे, जिनमें 12 लोग मारे गए थे और 175 घायल हुए थे।</p>
<p><strong>ये जिले हैं संवेदनशील</strong><br />प्रदेश में डेढ़ दर्जन ऐसे जिले हैं, जिनको संवदेनशील माना गया है। गुप्तचरों की सूचनाओं के बाद इन जिलों में पिछले दिनों धारा 144 लगाई गई है। इन जिलों में बांसवाड़ा, डूंगरगढ़, प्रतापगढ़, बूंदी, टोंक, अजमेर, धौलपुर, अलवर, करौली, झुंझुनूं, सीकर, जयपुर, कोटा, बीकानेर, जोधपुर, पाली और नागौर शामिल है।</p>
<p>समय-समय पर धार्मिक बवाल वाले संवदेनशील जिलों की सूची तैयार की जाती है। सांप्रदायिक स्थिति से निपटने के लिए आपात योजना बनाई जा रही है। साथ ही पूरी चौकसी बरती जा रही है। पूर्व में सांप्रदायिक हादसों में शामिल लोगों की सूचियां बनाई जा रही है।<br /><strong>- अभय कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह</strong> <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Apr 2022 10:13:52 +0530</pubDate>
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                <title>मेडिटेशन एक ऐसी एकाग्रता, जिससे आप स्वयं को पहचान सकें : निर्मला</title>
                                    <description><![CDATA[‘वननेस विथ द यूनिवर्स’ में आध्यात्मिक गुरु सेवानी ने बताए तनाव मुक्त जीवन के गुर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%90%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE--%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%AA-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%AF%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82---%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A4%BE/article-1791"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/51.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। शरद पूर्णिमा वह खगोलीय घटना है जब हम चन्द्रमा और ब्रह्मांड की प्राकृतिक ऊर्जा और प्रकाश से कई स्वास्थ्य, आर्थिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। ये कहना था प्रसिद्ध ध्यान विशेषज्ञ, आध्यात्मिक गुरु निर्मला सेवानी का। उन्होंने यह बात मंगलवार शाम 7.30 बजे भवानी सिंह रोड स्थित वेदा पाणिग्रह में रोटरी क्लब जयपुर साउथ के तत्वावधान में हुए ‘वननेस विथ द यूनिवर्स’ कार्यक्रम में कही। सेवानी ने मेडिटेशन के बारे में भी जानकारी देते हुए बताया कि मेडिटेशन एक ऐसी एकाग्रता है, जिससे आप स्वयं को पहचान सकें। मेडिटेशन के जरिए नकारात्मकता हमसे कोसों दूर हो जाती है और व्यक्ति अपने आप को बेहतर महसूस करता है। विशेष अतिथि डॉ.सत्येन्द्र पाल सिंह बख्शी ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मेडटेशन बहुत जरूरी है। साथ ही तनाव मुक्त रहने के लिए भी मेडिटेशन महत्वपूर्ण है। इससे पहले दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम की शुरूआत की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए रोटरी क्लब जयपुर साउथ के अध्यक्ष हर्ष चौधरी ने बताया कि विशेष अतिथि सरिता सरवरिया, अमित त्यागी, अजय काला, डॉ.बलवंत सिंह चिराना, प्रोफेसर विद्या जैन उपस्थित रहीं। मंच संचालन रोटरी क्लब जयपुर साउथ की सचिव रितु खत्री और पायल चौधरी ने किया। कार्यक्रम का मीडिया सहयोगी दैनिक नवज्योति रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Oct 2021 15:35:56 +0530</pubDate>
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