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                <description>energy RSS Feed</description>
                
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                <title>रूस-कजाकिस्तान परमाणु समझौता: इस दशक में शुरू होगा पहला न्यूक्लियर प्लांट, वीवीईआर-1200 रिएक्टरों से बनेगी बिजली</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी परमाणु कंपनी रोसाटॉम ने इस दशक (2030) के भीतर कजाकिस्तान में अपना पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने का लक्ष्य रखा है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अस्ताना यात्रा के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए। इस प्लांट में रूस निर्मित दो वीवीईआर-1200 रिएक्टर इकाइयां लगाई जाएंगी, जिससे ईंधन आपूर्ति और रखरखाव में सहयोग बढ़ेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-kazakhstan-nuclear-agreement-first-nuclear-plant-will-start-in-this/article-155374"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/nuclear-fusion-16x9.webp" alt=""></a><br /><p>अस्ताना। रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम का इस दशक के भीतर कजाकिस्तान में परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण का लक्ष्य है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलेक्सी लिखाचेव ने गुरुवार को यह जानकारी दी। पत्रकारों ने लिखाचेव से पूछा कि कजाकिस्तान में परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए पहली कंक्रीट डालने की समयसीमा क्या होगी। तब उन्होंने कहा, "हम कोशिश करेंगे कि यह काम मौजूदा दशक के भीतर शुरू हो जाए।"</p>
<p>रोसाटॉम ने एक बयान में यह जानकारी देते हुए कहा कि रूस और कजाकिस्तान के बीच परमाणु ऊर्जा संयंत्र निर्माण पर हुए अंतर-सरकारी समझौते में परियोजना के दौरान सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें रखरखाव और परमाणु ईंधन की आपूर्ति भी शामिल है।</p>
<p>कजाकिस्तान में परमाणु ऊर्जा संयंत्र निर्माण के लिए सहयोग के मूल सिद्धांतों और शर्तों से संबंधित समझौते पर कल रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अस्ताना यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए। कजाकिस्तान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने 14 जून 2025 को कहा था कि रोसाटॉम देश के पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक समूह का नेतृत्व करेगा। इस संयंत्र में दो बिजली इकाइयां होंगी, जिनमें रूस में निर्मित वीवीईआर-1200 रिएक्टर लगाए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:57:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>Jodhpur Solar Society की नई कार्यकारिणी का गठन, प्रीतेश माथुर बने अध्यक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[जोधपुर में पीएम सूर्य घर योजना और आसान सब्सिडी से सोलर ऊर्जा का बड़ा विस्तार हुआ है। इस अभियान को गति देने के लिए 'जोधपुर सोलर सोसायटी' की नई कार्यकारिणी का गठन कर प्रीतेश माथुर को अध्यक्ष चुना गया है। संस्था 100 से अधिक सदस्यों के साथ सौर ऊर्जा जागरूकता बढ़ा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/formation-of-new-executive-of-jodhpur-solar-society-pritesh-mathur/article-154858"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/solar.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। जोधपुर में पिछले कुछ वर्षों में सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वर्ष 2020 से पहले शहर में सोलर प्लांट अधिकतर इंडस्ट्रियल एरिया तक ही सीमित थे, क्योंकि उस समय सरकारी सब्सिडी और लोन लेना आसान नहीं था। आम लोगों के लिए सोलर सिस्टम लगवाना काफी मुश्किल माना जाता था। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। केंद्र सरकार की योजनाओं, आसान सब्सिडी प्रक्रिया और पीएम सूर्य घर योजना के कारण आज जोधपुर में हर दूसरे घर की छत पर सोलर प्लेट नजर आने लगी है। इसी बढ़ते सोलर अभियान को और मजबूत बनाने के लिए Jodhpur Solar Society की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। </p>
<p>सर्वसम्मति से प्रीतेश माथुर को संस्था का अध्यक्ष चुना गया। इसके साथ ही जय वर्मा एवं विपुल बाफना को उपाध्यक्ष, मुकेश जांगिड़ को सचिव, चिमन सोनी को सह सचिव, जितेंद्र सर्राफ को कोषाध्यक्ष, नवीन चितारा को मीडिया प्रभारी और भैराराम चौधरी को संगठन मंत्री बनाया गया है। वर्ष 2021 में स्थापित हुई जोधपुर सोलर सोसायटी आज सोलर सेक्टर में एक मजबूत पहचान बन चुकी है। संस्था से 100 से ज्यादा सक्रिय सदस्य जुड़े हुए हैं, जो लगातार लोगों को सोलर ऊर्जा के फायदे समझाने और सही जानकारी देने का काम कर रहे हैं। संस्था का उद्देश्य सिर्फ सोलर सिस्टम लगवाना नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करना और उन्हें सुरक्षित व भरोसेमंद सेवाएं उपलब्ध कराना भी है। अध्यक्ष प्रीतेश माथुर ने बताया कि आज जोधपुर में सोलर ऊर्जा को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदली है। पहले लोग सोलर सिस्टम को महंगा और कठिन प्रक्रिया मानते थे, लेकिन अब सरकार से आसानी से सब्सिडी मिल रही है। पीएम सूर्य घर पोर्टल आने के बाद आम व्यक्ति भी</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 17:58:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राजस्थान में दुर्लभ खनिजों का महाभंडार: सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स बनेगा देश की सामरिक सुरक्षा का नया केंद्र</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिमी राजस्थान के बालोतरा स्थित सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में रेयर अर्थ एलिमेंट्स और क्रिटिकल रेयर मेटल्स के विशाल भंडार की पुष्टि हुई है। 750 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र से रक्षा, परमाणु ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कच्चा माल मिलेगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने परियोजना के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/balotras-sivana-ring-complex-will-become-the-new-center-of/article-154867"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(2)71.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पश्चिमी राजस्थान का बालोतरा स्थित सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स देश की सामरिक, औद्योगिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है। यहां रेयर अर्थ एलिमेंट्स, हैवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स और क्रिटिकल रेयर मेटल्स के विशाल भंडार मिलने से भारत को रक्षा, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और हाईटेक उद्योगों के लिए जरूरी कच्चा माल उपलब्ध हो सकेगा।</p>
<p>केन्द्रीय खान मंत्रालय की टेक्निकल कम कॉस्ट कमेटियों की संयुक्त बैठक में सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स के तीन ब्लॉक्स में दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार होने की पुष्टि की गई है। इन ब्लॉक्स के तकनीकी मूल्यांकन का कार्य तीन कंपनियों को आवंटित किया गया है। करीब 750 वर्ग किलोमीटर में फैले इस ज्वालामुखीय क्षेत्र के सर्वेक्षण में नियोबियम, जिरकोनियम और हाफनियम जैसे महत्वपूर्ण रेयर अर्थ एलिमेंट्स पाए गए हैं। इन खनिजों का उपयोग एयरोस्पेस इंजनों के सुपरअलॉय, सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट, चिकित्सा उपकरणों और वैज्ञानिक अनुसंधान में किया जाता है।</p>
<p>इसके अलावा परमाणु रिएक्टर, इलेक्ट्रिक कार, मिसाइल तकनीक, रोबोटिक्स, माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक्स और रासायनिक प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में भी इन दुर्लभ खनिजों की बड़ी भूमिका है। विशेषज्ञों के अनुसार ये खनिज देश की सामरिक सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।</p>
<p>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स और सिवाना ग्रेनाइट क्षेत्र में रेयर अर्थ एवं हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की उपलब्धता राजस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने अधिकारियों को परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने तथा केंद्र सरकार के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p>राज्य सरकार दुर्लभ खनिजों के अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए रेयर अर्थ एक्सीलेंस सेंटर की स्थापना भी कर रही है। इसके लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टरेट फॉर एक्सप्लोरेशन एंड रिसर्च, आईआईटी हैदराबाद और आईआईटी आईएसएम धनबाद जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी की जा रही है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (एनसीएमएम) शुरू किया है। इस मिशन के तहत ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए रणनीतिक खनिजों की खोज और विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 17:14:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक, बोले- पीछे मुड़कर देखने का नहीं है समय, विकास कार्यो में लाए तेजी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 देशों के दौरे से लौटते ही मंत्रिपरिषद के साथ साढ़े चार घंटे लंबी समीक्षा बैठक की। इस बैठक में 30 कैबिनेट मंत्रियों सहित सभी मंत्री शामिल हुए। पीएम ने लंबित कार्यों को तेज करने, महंगाई पर लगाम लगाने और पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/council-of-ministers-meeting-chaired-by-pm-modi-said/article-154628"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(10)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली जैसे पांच देशों के राजनयिक दौरे से लौटने के तुरंत बाद मंत्रिपरिषद के साथ साढ़े चार लंबी चली समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। सरकारी अधिकारियों ने इस बैठक को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल की एक बड़ी मध्यावधि समीक्षा प्रक्रिया बताया है। इस बैठक में प्रशासनिक कामकाज, आर्थिक तैयारी, कल्याणकारी योजनाओं के वितरण और पश्चिम एशिया में बढ़ते विवाद का ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई पर पड़ने वाले असर पर ध्यान केंद्रित किया गया।</p>
<p>इस बैठक में 30 कैबिनेट मंत्री, 36 राज्य मंत्री और 5 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री शामिल थे। यह इस साल मंत्रिपरिषद की पहली पूर्ण बैठक थी। बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने सभी केंद्रीय मंत्रियों को साफ़ तौर पर सभी लंबित सरकारी कामों को तेज़ी से पूरा करने का निर्देश दिया। कार्रवाई से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने परिषद से लंबित काम पूरे करने का आग्रह किया। मंत्रियों ने बुनियादी ढांचे, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आवास, रोज़गार पैदा करना, डिजिटल शासन और कल्याणकारी योजनाओं के वितरण जैसे प्रमुख कार्यक्रमों पर विस्तृत प्रगति रिपोर्ट भी पेश की। इसमें उपलब्धियों, चुनौतियों और अंतिम छोर तक वितरण को बेहतर बनाने के लिए कार्य योजनाएं बताई गईं।</p>
<p>एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, "इस प्रक्रिया का मकसद प्रशासनिक नतीजों का मूल्यांकन करना और यह पक्का करना है कि प्रमुख कार्यक्रम ज़मीनी स्तर पर असरदार तरीके से काम करते रहें।" उन्होंने यह भी कहा कि "मंत्रालयों के बीच तालमेल सुधारने और वितरण के तरीकों को बेहतर बनाने पर भी ज़ोर दिया गया है।" चर्चा का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट और उसके आर्थिक असर पर केंद्रित था। ईरान से जुड़े तनाव और बड़ी क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ज़्यादा हो गईं, इसलिए परिषद ने घरेलू महंगाई के दबाव को कम करने और ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखने पर गहराई से विचार-विमर्श किया। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे समुद्री परिवहन बाधा बिंदुओं पर चिंता जताई गई। यह दुनिया भर में तेल परिवहन के एक बड़े हिस्से के लिए एक ज़रूरी मार्ग है।</p>
<p>एक और सूत्र ने कहा, "सरकार दुनिया भर में अनिश्चितताओं और उनके घरेलू असर को लेकर सचेत है।" "चर्चा के दौरान आर्थिक मजबूती, कल्याणकारी सुरक्षा और रणनीतिक तैयारी मुख्य विषय बने रहने की उम्मीद है।" मंत्रिपरिषद ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बदलावों के जवाब में तुरंत राजकोषीय नीति उपायों और सरकार द्वारा शुरू की गई मितव्ययिता निगरानी प्रणाली का भी जायजा लिया। अर्थव्यवस्था के अलावा, सत्र में "अगली पीढ़ी के सुधारों" के लिए कार्ययोजना की समयसीमा का आकलन किया गया, जिसका मकसद "जीवन यापन में आसानी" और "व्यापार करने में आसानी" को बेहतर बनाना है। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने लागू करने की चुनौतियों, जवाबदेही प्रणाली और उभरते वैश्विक और घरेलू जोखिमों के लिए तैयारी पर मंत्रियों के साथ विस्तार से बातचीत की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 11:58:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पेट्रोल, डीज़ल एवं गैस संकट पर ARTIA का मंथन, ऊर्जा आत्मनिर्भरता हेतु वैकल्पिक ऊर्जा परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्री एसोसिएशन (आरतिया) ने जयपुर में पेट्रोल, डीजल और गैस की बढ़ती कीमतों पर मंथन किया। संगठन ने केंद्र सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि पेट्रोलियम पर निर्भरता घटाने के लिए बायोचार, कोयला गैसीकरण और वेस्ट-टू-मीथेन जैसी वैकल्पिक ऊर्जा परियोजनाओं को तुरंत मिशन मोड पर शुरू किया जाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/artias-brainstorming-on-petrol-diesel-and-gas-crisis-demand-for/article-154493"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/artoia.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अखिल राज्य ट्रेड एंड इंडस्ट्री एसोसिएशन (आरतिया) द्वारा पेट्रोल, डीज़ल एवं रसोई गैस की बढ़ती कीमतों, ऊर्जा लागत में वृद्धि तथा इसके व्यापार, उद्योग एवं आमजन पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर आयोजित मंथन में विष्णु भूत, कमल कंदोई, आशीष सराफ, प्रेम बियानी, श्रवण पारीक, संजय शर्मा, पंकज गोयल (दीप ज्योति), हरि शर्मा, हनीफ टांक, प्रकाश छाबड़ा, के. एस. राठौड़, सूर्य प्रकाश शर्मा, संजीव बंसल, नीरज खदरिया, सीए महेंद्र दानी आदि उपस्थित रहे। बैठक में संगठन ने केंद्र सरकार को विस्तृत सुझाव प्रेषित करते हुए कहा कि बढ़ती ईंधन लागत अब केवल आर्थिक चुनौती नहीं, बल्कि व्यापार, परिवहन, कृषि, लघु उद्योग एवं आम नागरिकों के दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाला गंभीर विषय बन चुकी है।</p>
<p>ARTIA ने देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए बायोचार, कोयला गैसीकरण एवं अपशिष्ट-से-मीथेन (Waste-to-Methane) जैसी वैकल्पिक ऊर्जा परियोजनाओं को मिशन मोड पर शीघ्र लागू करने की मांग की। संगठन का मानना है कि फसल अवशेष, जैविक कचरे एवं उपलब्ध संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग कर पेट्रोलियम उत्पादों एवं गैस पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:09:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नार्वे और भारत के बीच सहयोग की अपार संभावना,नार्वे की कंपनियों के लिए खुले हैं दरवाजे: पीएम मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओस्लो में भारत-नॉर्वे व्यापार शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने नॉर्वे की कंपनियों को स्वच्छ ऊर्जा, जहाज निर्माण और समुद्री उद्योगों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। पीएम मोदी ने TEPA समझौते के तहत $100 अरब के निवेश और भारत में 10 लाख रोजगार सृजन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/there-is-immense-potential-for-cooperation-between-norway-and-india/article-154317"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi8.png" alt=""></a><br /><p>ओस्लो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत और नार्वे के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा है कि नॉर्वे की कंपनियों के लिए भारत के दरवाजे खुले हैं और उन्हें स्वच्छ ऊर्जा, जहाज निर्माण, समुद्री उद्योगों और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में निवेश के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास खाद्य सुरक्षा, उर्वरक, मत्स्य पालन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के उत्कृष्ट अवसर हैं। नार्वे की दो दिन की यात्रा पर गये पीएम मोदी ने सोमवार रात भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। पीएम मोदी ने बाद में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि व्यापार क्षेत्र और अनुसंधान जगत से जुड़े हितधारकों के साथ संवाद करना एक सुखद अवसर था।</p>
<p>उन्होंने कहा, "ओस्लो सिटी हॉल में प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे और मैंने एक व्यापार एवं अनुसंधान शिखर सम्मेलन में भाग लिया। व्यापार क्षेत्र और अनुसंधान जगत से जुड़े हितधारकों के साथ संवाद करना एक सुखद अवसर था। हमारे देशों के पास खाद्य सुरक्षा, उर्वरक, मत्स्य पालन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के उत्कृष्ट अवसर हैं। मैंने नॉर्वे को भारत की स्वच्छ ऊर्जा पहलों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। मैंने भारत के सुधार एजेंडा के समर्थन में भी अपने विचार रखे। जहाज निर्माण एक ऐसा क्षेत्र है जो व्यापक और असीम संभावनाएं प्रदान करता है।"</p>
<p>पीएम मोदी ने भारत और नॉर्वे के बीच मजबूत आर्थिक सहयोग का आह्वान करते हुए नॉर्वे की कंपनियों को स्वच्छ ऊर्जा, जहाज निर्माण, समुद्री उद्योगों और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में निवेश बढ़ाने के लिए कहा। शिखर सम्मेलन में नॉर्वे के क्राउन प्रिंस हाकोन के अलावा 50 से अधिक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ-साथ दोनों देशों के व्यापार और अनुसंधान क्षेत्रों के 250 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। यह आयोजन भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के लागू होने के बाद भारत-नॉर्वे संबंधों में बढ़ती गति को दर्शाता है।</p>
<p>पीएम मोदी ने भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर प्रकाश डाला और दोनों देशों के हितधारकों से व्यापार समझौते के तहत निर्धारित महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "दोनों पक्षों के हितधारकों को टीईपीए के तहत 100 अरब डॉलर के निवेश लक्ष्य तथा भारत में 10 लाख रोजगार सृजन के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रयास करने चाहिए।" प्रधानमंत्री ने भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, अनुकूल जनसांख्यिकी और निवेशक-अनुकूल नीतियों पर जोर देते हुए देश को वैश्विक निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बताया। उन्होंने नॉर्वे को समुद्री अर्थव्यवस्था, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित परिवर्तन, महत्वपूर्ण खनिज, नवप्रवर्तन उद्यमों और जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में अधिक भागीदारी के लिए आमंत्रित किया, साथ ही सतत विकास और जलवायु कार्रवाई के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा, "भारत का विशाल आकार, बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताएं और जलवायु प्रतिबद्धताएं नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना के तीव्र विस्तार को बढ़ावा दे रही हैं।" उन्होंने समुद्री क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन में कमी, महासागर स्थिरता और जलवायु वित्त में नॉर्वे की विशेषज्ञता की भी सराहना की। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के व्यवसायों को नई साझेदारी बनाने और आर्थिक संबंधों को गहरा करने के लिए उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय और नार्वे की कंपनियों तथा संस्थानों के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए गए। इससे पहले दिन में, ओस्लो में चार गोलमेज चर्चाएंआयोजित की गईं, जिनमें स्वास्थ्य सेवा नवाचार, समुद्री सहयोग, बैटरी और ऊर्जा भंडारण प्रणाली, डिजिटलीकरण और विद्युतीकरण तथा पवन ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 12:35:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम मोदी नीदरलैंड दौरा: भारत-नीदरलैंड ने आपसी संबंधों को मजबूत करने पर जताई सहमति, कई अहम समझौतों पर हुए हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड्स के पीएम रोब जेटेन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को "रणनीतिक साझेदारी" स्तर पर ले जाने के लिए उच्च स्तरीय वार्ता हुई। व्यापार, रक्षा, एआई और हरित ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 14 समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों देशों ने भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते को जल्द लागू करने पर भी जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-visits-netherlands-india-netherlands-agreed-to-strengthen-mutual-relations/article-154149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रोब जेटेन के साथ आधिकारिक वार्ता में दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर व्यापक चर्चा की। साझा मूल्यों और आपसी विश्वास के साथ-साथ दोनों देशों के बीच बढ़ते सामंजस्य और सहयोग को देखते हुए, नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को "रणनीतिक साझेदारी" के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया। उन्होंने व्यापार और निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, उभरती और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, समुद्री क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा और शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए एक महत्वाकांक्षी सामरिक साझेदारी रोडमैप अपनाने पर भी सहमति व्यक्त की। बढ़ते व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी पर ध्यान देते हुए, नेताओं ने कहा कि भारत की विकास गाथा द्वारा प्रस्तुत अवसर डच कंपनियों के लिए बेहतर व्यावसायिक संभावनाएं प्रदान करते हैं।</p>
<p>दोनों नेताओं ने निरंतर उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान के माध्यम से द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। जल, कृषि और स्वास्थ्य] में सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने बड़े पैमाने की जल परियोजनाओं पर सहयोग के माध्यम से 'जल पर रणनीतिक साझेदारी' को और अधिक सुदृढ़ करने पर करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं ने स्वास्थ्य सेवा अनुसंधान, डिजिटल स्वास्थ्य, कृषि और खाद्य सुरक्षा सहित प्रमुख क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग का भी स्वागत किया।</p>
<p>पीएम मोदी और जेटेन ने बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों के विस्तार को महत्वपूर्ण बताया। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (भारत-ईयू एफटीए) की परिवर्तनकारी क्षमता को स्वीकार करते हुए, उन्होंने इस पर जल्द हस्ताक्षर करने और इसे लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत-नीदरलैंड सहयोग सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं को समर्थन प्रदान करेगा।</p>
<p>दोनों नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) और सेमीकंडक्टर सहित उभरती प्रौद्योगिकियों में अधिक सहयोग का भी आह्वान किया। उन्होंने दोनों देशों के युवाओं की भागीदारी वाले शामिल हैकाथॉन आयोजित करने को भी प्रोत्साहित किया। नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताते हुए, उन्होंने एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित करने के लिए हरित हाइड्रोजन, बायोफ्यूल, हरित शिपिंग और समुद्री लॉजिस्टिक्स में सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। दोनों प्रधानमंत्रियों ने 'मोबिलिटी पार्टनरशिप' (प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी) और उच्च शिक्षा में सहयोग को मजबूत करने के लिए की गई नयी पहलों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। इस संबंध में, उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय और ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय के बीच संपन्न हुए समझौते पर विशेष रूप से उल्लेख किया।</p>
<p>दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए, पीएम मोदी ने 11वीं शताब्दी की चोल कालीन ताम्रपत्रों की वापसी में सहायता करने के लिए डच सरकार का आभार व्यक्त किया। इस संबंध में, दोनों नेताओं ने लीडेन विश्वविद्यालय पुस्तकालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण(एएसआई) के बीच सहयोग का भी स्वागत किया, जो इन ऐतिहासिक कलाकृतियों के ज्ञान को आगे बढ़ाने में सहायक होगा। आधिकारिक वार्ता के बाद, प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा, व्यापार, मोबिलिटी, जल, कृषि और स्वास्थ्य,शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्रों में 14 समझौता ज्ञापनों(एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री जेटेन को भारत आने का निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। भारत और नीदरलैंड्स के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों तथा विभिन्न क्षेत्रों में बहुआयामी सहयोग पर आधारित मजबूत द्विपक्षीय संबंध हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 17:09:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नए सिरे से होगा बिजली की जरूरत का आंकलन, राजस्थान में 3200 मेगावाट कोयला आधारित बिजली खरीद योजना पर आरईआरसी की रोक</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान विद्युत रेगुलेटरी आयोग (RERC) ने 3200 मेगावाट कोयला आधारित बिजली खरीदने की योजना को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। आयोग ने कहा कि ग्रीन एनर्जी और बैटरी स्टोरेज के दौर में भविष्य की जरूरतों का नए सिरे से मूल्यांकन जरूरी है। इस फैसले से डिस्कॉम पर दीर्घकालिक बिजली खरीद का दबाव कम होने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rerc-ban-on-3200-mw-coal-based-power-purchase-scheme/article-154105"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/electricity-6.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विद्युत रेगुलेटरी आयोग (आरईआरसी) ने राज्य में 3200 मेगावाट कोयला आधारित बिजली खरीद की बड़ी योजना को फिलहाल मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट कहा कि भविष्य में राज्य को वास्तव में कितनी अतिरिक्त बिजली की जरूरत होगी, इसका नए सिरे से विस्तृत आंकलन किया जाना जरूरी है। यह मामला राजस्थान ऊर्जा विकास एवं आईटी सर्विसेज लिमिटेड की उस योजना से जुड़ा है, जिसमें डिस्कॉम कंपनियों के लिए 25 वर्षों तक 4 गुणा 800 मेगावाट यानी कुल 3200 मेगावाट कोयला आधारित राउंड द क्लॉक बिजली खरीदने की अनुमति मांगी गई थी। कंपनी का तर्क था कि आने वाले वर्षों में बिजली की भारी मांग बढ़ सकती है, इसलिए अभी से दीर्घकालिक व्यवस्था आवश्यक है। </p>
<p>हालांकि आरईआरसी ने कहा कि प्रस्तावित थर्मल और न्यूक्लियर परियोजनाओं, तेजी से बढ़ रही ग्रीन एनर्जी और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम को ध्यान में रखे बिना इतनी बड़ी बिजली खरीद का फैसला उचित नहीं होगा। आयोग ने यह भी माना कि ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस, वर्चुअल नेट मीटरिंग और गु्रप नेट मीटरिंग जैसी नई व्यवस्थाओं से उपभोक्ता खुद बिजली उत्पादन और स्टोरेज कर सकेंगे। इससे भविष्य में डिस्कॉम पर बिजली खरीद का दबाव कम हो सकता है। ऐसे में नई कोयला आधारित परियोजनाओं की जरूरत का पुनर्मूल्यांकन जरूरी बताया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 10:15:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऊर्जा बचत के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा कदम : ईवी कार से पहुंचे सचिवालय कपिल मिश्रा, वर्क फ्रॉम होम पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने ऊर्जा बचत का संदेश देने के लिए ईवी कार का उपयोग किया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने 'मेट्रो मंडे' और दो दिन 'वर्क फ्रॉम होम' जैसे कड़े कदम उठाए हैं। व्यापारियों और अधिकारियों ने भी ईंधन बचाने और प्रदूषण कम करने के इस राष्ट्रीय दायित्व में अपना समर्थन दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/energy-conservation-is-not-just-an-option-but-a-national/article-153981"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/kapil-mishra.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली के कला, संस्कृति एवं भाषा और पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व है। कपिल मिश्रा ऊर्जा संरक्षण का सन्देश देने के लिए आज ईवी कार चलाकर दिल्ली सचिवालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार दिल्ली वासियों के सहयोग से ऊर्जा संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। सीएम रेखा गुप्ता के निर्देश पर दिल्ली में मेट्रो मंडे, दो दिन वर्क फ्रॉम होम और न्यूनतम गाड़ियों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने सभी मंत्रीगण और अधिकारीगण भी सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करेंगे और अपने लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करेंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि श्रम मंत्रालय से एडवाइजरी भी जारी की गई है और इसे लेकर आज सुबह से उन्होंने दिल्ली के कई व्यापारियों एवं उद्योगपतियों से चर्चा भी की है। सभी लोग स्वतः प्रेरणा से प्रधानमंत्री के आह्वान के साथ खड़े हैं और वर्क फ्रॉम होम और इलेक्ट्रिक पॉलिसी को लागू कर रहे हैं। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व है। प्रधानमंत्री की देशवासियों से ईंधन बचत और ऊर्जा के जिम्मेदार उपयोग की अपील की गई तथा दिल्ली सरकार और दिल्ली वासी इसे पूरा करने के लिए संकल्पित हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 18:32:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी का यूएई का दौरा: राष्ट्रपति मोदम्मद बिन जायेद से की बात, पांच अरब डॉलर का होगा निवेश</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी की अबू धाबी यात्रा ऐतिहासिक रही, जहाँ यूएई ने भारत में $5 बिलियन के निवेश की घोषणा की। ऊर्जा, रक्षा, शिपिंग और सुपर कंप्यूटर समेत 6 प्रमुख क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते हुए। यह निवेश भारतीय बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा और ऊर्जा सुरक्षा के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modis-visit-to-uae-president-mohammed-bin-zayeds-talk/article-153956"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi4.png" alt=""></a><br /><p>अबू धाबी। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भारत में पांच अरब डालर के निवेश की घोषणा की है इसके अलावा दोनों देशों ने ऊर्जा, रक्षा, जहाजरानी और सुपर कंप्यूटर सहित छह क्षेत्रों में सहयोग के समझौते किये हैं। शुक्रवार सुबह अमीरात की संक्षिप्त यात्रा पर पहुंचे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति मोदम्मद बिन जायेद अल नहयान के साथ शिष्टमंडल स्तर की और द्विपक्षीय वार्ता की जिसके बाद इन समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये ।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की। उन्होंने ऊर्जा, व्यापार और निवेश, समुद्री अर्थव्यवस्था, तकनीकी क्षेत्र जिसमें फिनटेक शामिल है, रक्षा और लोगों के बीच परस्पर संबंधों पर विस्तार से बात की। उन्होंने पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी अपने दृष्टिकोण साझा किए। प्रधान मंत्री मोदी ने यूएई पर हाल के हमलों और इसकी संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने के प्रयासों की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया।</p>
<p>दोनों पक्षों ने ऊर्जा, रक्षा, अवसंरचना जिसमें जहाजरानी भी शामिल है, और उन्नत तकनीक जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौतों का भी आदान-प्रदान किया। इससे भारत-यूएई समग्र रणनीतिक साझेदारी को और गति मिलेगी। एक महत्वपूर्ण कदम में यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है जिससे भारतीय बाजारों और अवसंरचना को मजबूती मिलेगी तथा देश में रोजगार के अवसर बढेंगे। पीएम मोदी की इस यात्रा से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 16:55:11 +0530</pubDate>
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                <title>पीएम मोदी की अपील पर दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: एक साल तक कोई मंत्री नहीं करेगा विदेशी दौरा, सरकारी कर्मचारी 2 दिन करेंगे वर्क फ्रॉर्म होम</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली में बड़े सुधार लागू किए हैं। अब सरकारी कर्मचारी सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम करेंगे। ईंधन और बिजली बचाने के लिए कार्यालयों के समय में बदलाव किया गया है और मंत्रियों के विदेश दौरों पर एक साल तक पूर्ण रोक लगा दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-decision-of-delhi-government-on-pm-modis-appeal-no/article-153833"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rekha-guprta.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश में बढ़ते ऊर्जा संकट और ईंधन बचत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील के बाद दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकारी कामकाज में ऊर्जा बचत और खर्चों में कटौती के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। दिल्ली सरकार के अनुसार अब सरकारी कर्मचारी सप्ताह में दो दिन “वर्क फ्रॉम होम” करेंगे, ताकि कार्यालयों में बिजली और संसाधनों की खपत कम की जा सके। इसके साथ ही सरकारी कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत दफ्तरों का टाइम टेबल चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा, जिससे ट्रैफिक दबाव और ईंधन की खपत कम हो सके। इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने कहा है कि अब से आने वाले एक साल तक कोई भी मंत्री विदेश दौरा नहीं करेगा।</p>
<p>सरकार ने कर्मचारियों के लिए विशेष बस सेवा शुरू करने का भी फैसला लिया है। इससे निजी वाहनों का उपयोग घटेगा और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी। वहीं खर्चों में कटौती के तहत दिल्ली सरकार के किसी भी मंत्री को अगले एक साल तक विदेश दौरे की अनुमति नहीं होगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से ऊर्जा बचत, आत्मनिर्भरता और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग की अपील की थी। दिल्ली सरकार उसी दिशा में यह कदम उठा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 16:11:38 +0530</pubDate>
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                <title>पीएम मोदी ने दोहराई ऊर्जा संरक्षण की अपील, कहा-राष्ट्र को मजबूत बनाने के लिए सब मिलकर करेंगे काम</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वड़ोदरा में ऊर्जा और विदेशी मुद्रा बचाने हेतु पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने तथा सार्वजनिक परिवहन अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने 'वोकल फॉर लोकल', स्थानीय उत्पादों और डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए भारतीय स्थलों को चुनने पर जोर दिया, ताकि वैश्विक अस्थिरता के बीच देश आर्थिक रूप से मजबूत रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-modi-reiterated-his-appeal-for-energy-conservation-and-said/article-153563"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi3.png" alt=""></a><br /><p>वड़ोदरा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर ऊर्जा संरक्षण की उनकी देशवासियों से की गयी अपील की विपक्ष द्वारा आलोचना किये जाने के बावजूद सोमवार को एक बार फिर जनता से आग्रह किया कि वे पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के लिए मेट्रो, इलेक्ट्रिक बसों और सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करें। पीएम मोदी ने यहां सरदारधाम छात्रावास का उद्घाटन करने के अवसर पर अपने संबोधन में विश्व में बढ़ती अस्थिरता का उल्लेख किया और कोरोना संकट, वैश्विक आर्थिक व्यवधान और पश्चिम एशिया के संघर्ष को वर्तमान चुनौतियों का कारण बताया। उन्होंने कहा कि जैसे देश ने मिलकर कोरोना संकट का सामना किया, वैसे ही यह संकट भी सामूहिक प्रयासों से पार किया जाएगा। उन्होंने कार-पूलिंग, वर्चुअल बैठकों और 'वर्क-फ्रॉम-होम' को बढ़ावा देने की भी अपील की।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने जनभागीदारी को अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि नागरिकों को अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा और राष्ट्रीय संसाधनों पर दबाव कम करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत के आयात का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल पर निर्भर है, जो वर्तमान संघर्षग्रस्त क्षेत्रों से आता है। इससे आपूर्ति और कीमत दोनों पर असर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए खाद्य तेल की खपत कम करने तथा संकट के समय सोने की खरीद टालने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विदेश यात्राओं और 'डेस्टिनेशन वेडिंग्स' पर होने वाला खर्च भी विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ाता है। उन्होंने लोगों से छुट्टियाँ भारत में बिताने और विवाह जैसे आयोजनों के लिए भारतीय स्थानों को चुनने का आग्रह किया। उन्होंने 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' को 'डेस्टिनेशन वेडिंग' के लिए उत्कृष्ट स्थान बताते हुए कहा कि इससे विदेशी मुद्रा देश में ही बनी रहेगी।</p>
<p>"वोकल फॉर लोकल" का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने स्थानीय उत्पादों को अपनाने, स्थानीय उद्यमियों को प्रोत्साहित करने तथा कृषि में स्वदेशी उर्वरकों, प्राकृतिक खेती और सौर पंपों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और पर्यावरण पर दबाव भी कम होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास जब 140 करोड़ लोग मिलकर करते हैं, तो वही देश की सबसे बड़ी शक्ति बन जाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देशवासी मिलकर इस संकट का सामना करेंगे और राष्ट्र को और अधिक मजबूत बनाएँगे।</p>
<p>सरदार धाम की 75 वर्षों पुरानी शैक्षणिक यात्रा को याद करते हुए तथा देशभर में इसके विस्तार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने 2021 की अपनी यात्रा को स्मरण किया, जब कन्या छात्रावास का भूमिपूजन हुआ था। उन्होंने बताया कि संस्था अब सूरत, राजकोट, भुज, मेहसाणा और दिल्ली में भी सक्रिय है। अहमदाबाद के निकोल क्षेत्र में एक हजार क्षमता वाले नए कन्या छात्रावास के शुभारंभ पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष वहाँ हजारों बेटियाँ शिक्षा प्राप्त कर रही थीं और अपने भविष्य को नई दिशा दे रही थीं। आज का यह भूमिपूजन देशभर की बेटियों तक शिक्षा पहुँचाने के प्रति सरदारधाम की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि व्यापक परिवर्तन और स्थायी परिणामों के लिए समाज और सरकार का साथ मिलकर कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को जमीनी वास्तविकताओं पर आधारित परिवर्तनकारी दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। भाषा-आधारित भेदभाव समाप्त करने, कौशल विकास और नवाचार को पाठ्यक्रम में शामिल करने जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को डिग्री के साथ अप्रेंटिसशिप के अवसर भी मिलने चाहिए, ताकि पढ़ाई के बाद वे भ्रमित न हों। सरदार गौरव रत्न सम्मान के लिए आभार व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल के नाम से जुड़ा यह सम्मान उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी लेकर आया है। उन्होंने कहा कि सरदार साहब के अधूरे सपनों को पूरा करना ही उनके जीवन का मिशन बन गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 17:15:01 +0530</pubDate>
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