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                <title>constitution - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>डी.के. शिवकुमार का राज्यपाल पर निशाना, बोले- वाजपेयी को मौका मिल सकता है, तो टीवीके को क्यों नहीं ? </title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने तमिलनाडु में TVK को सरकार बनाने का मौका न देने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि बहुमत का फैसला केवल सदन में होना चाहिए। उन्होंने राज्यपाल से लोकतांत्रिक सिद्धांतों का पालन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी को अवसर देने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/on-reports-of-not-being-given-a-chance-to-form/article-153139"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/tvk1.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को तमिलनाडु में टीवीके को सरकार बनाने का अवसर न दिए जाने की रिपोर्टाें पर सवाल उठाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि बहुमत की परीक्षा केवल सदन में ही होनी चाहिए। शिवकुमार ने तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा बहुमत साबित करने के प्रयास के बावजूद टीवीके को दावा पेश करने के लिए आमंत्रित करने से कथित रूप से मना करने की आलोचना करते हुए पूछा,"क्या वाजपेयी को मौका नहीं मिला था?"</p>
<p>विधानसभा में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रथा और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुसार सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने एवं विश्वास मत प्राप्त करने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "राज्यपाल को सरकार बनाने की अनुमति देनी चाहिए। कर्नाटक में भी बी एस येदियुरप्पा को सरकार बनाने की अनुमति दी गई थी। अधिक संख्या वाली पार्टियों को हमेशा अपना बहुमत साबित करने का मौका दिया जाता रहा है।"</p>
<p>डी.के. शिवकुमार ने अतीत के उदाहरणों से तुलना करते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भी इसी तरह लोकतांत्रिक परंपरा का पालन करते हुए पहले सरकारों के गठन की अनुमति दी और बाद में संसद में उनका परीक्षण किया। उन्होंने कहा, "बहुमत एक वोट से भी प्राप्त किया जा सकता है या गंवाया जा सकता है। क्या वाजपेयी के मामले में ऐसा नहीं हुआ? सबसे पहले, बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए। अगर संख्या पर्याप्त नहीं होती है तो अगले विकल्प पर विचार किया जा सकता है।"</p>
<p>राज्यपाल की कथित कार्रवाई को गलत बताते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, "यह लोकतंत्र है। सदन में ही यह तय होना चाहिए कि किसके पास बहुमत है।" एक अन्य मुद्दे पर, डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सरकार प्रस्तावित बेंगलुरु नॉर्थ कॉर्पोरेशन कार्यालय के लिए तीन से चार स्थानों पर विचार कर रही है और स्थलों के निरीक्षण के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गांधी कृषि विज्ञान केंद्र फिलहाल इस परियोजना के लिए विचाराधीन नहीं है। कांग्रेस नेताओं सतीश जार की होली और लक्ष्मी हेब्बलकर के साथ अपनी हालिया मुलाकात की बात करते हुए उन्होंने कहा कि चर्चा बेलगावी जिले में सिंचाई परियोजनाओं से संबंधित थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 15:55:00 +0530</pubDate>
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                <title>रामचन्द्र राव का बड़ा हमला: टीएमसी और कांग्रेस पर संविधान-लोकतंत्र का अपमान करने का लगाया आरोप, ममता बनर्जी के समर्थन को लेकर राहुल पर साधा निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने को लोकतंत्र का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल जनादेश के बाद भी सत्ता में बने रहना असंवैधानिक है। राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्होंने विपक्ष को 'सीट चोरी' का दोषी ठहराया और जनता से 10 मई को पीएम मोदी की जनसभा में जुड़ने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ramchandra-raos-big-attack-on-tmc-and-congress-accused-of/article-152843"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/n-ramchandra-rao.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमों ममता बनर्जी और कांग्रेस पर संविधान-लोकतंत्र का अपमान करने का आरोप लगाया। राव ने यहां लालपेट में एक दीवार लेखन अभियान में भाग लेते हुए विपक्षी दलों पर यह तीखा हमला बोला। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 10 मई को परेड ग्राउंड में होने वाली जनसभा की तैयारियों के तहत चलाया गया। उन्होंने ममता बनर्जी की आलोचना करते हुए कहा कि चुनाव हारने के बावजूद पद पर बने रहना लोकतंत्र और संविधान का अपमान है। संविधान के अनुच्छेद 172 का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद और प्रतिकूल जनादेश के बावजूद सत्ता में बने रहना संवैधानिक भावना के विरुद्ध है।</p>
<p>राव ने दावा किया कि सात मई के बाद सुश्री बनर्जी का मुख्यमंत्री बने रहना असंवैधानिक होगा और उन्होंने कहा कि संवैधानिक मानदंड और जनता का जनमत बहुमत वाली पार्टी द्वारा नई सरकार के गठन के पक्ष में है। भाजपा नेता ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए टिप्पणी की कि कांग्रेस सांसद अक्सर संविधान की एक प्रति अपने साथ रखते हैं लेकिन उन्हें इसकी समझ नहीं है। उन्होंने कांग्रेस की इस बात के लिए आलोचना की कि उसने ममता बनर्जी का समर्थन किया, जबकि पहले कथित तौर पर दूसरों पर "वोट चोरी" का आरोप लगाया था और अब "सीट चोरी" की बात कर रही है जिसे उन्होंने राजनीतिक दिवालियापन बताया। उन्होंने कहा कि किसी को भी जनता के जनादेश या संविधान का अनादर करने का अधिकार नहीं है।</p>
<p>राव ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की भारी जीत, साथ ही असम और पुडुचेरी में मिली जीत पूरे देश की जनता के मिजाज को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के मतदाताओं ने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच मतभेद उत्पन्न करने की कोशिश करके विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देने वाली पार्टियों को खारिज कर दिया है और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि तेलंगाना में भी भाजपा समर्थक भावना बढ़ रही है। उन्होंने लोगों से अपील किया कि वे बड़ी संख्या में प्रधानमंत्री मोदी की परेड ग्राउंड में होने वाली जनसभा में शामिल हों और तेलंगाना में राजनीतिक परिवर्तन का समर्थन करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 16:46:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कांग्रेस का केंद्र पर निशाना : पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त बनाने की राजीव गांधी की पहल ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी, दो लाख से अधिक गांवों को मिल रहा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर जयराम रमेश ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के दूरदर्शी नेतृत्व को नमन किया। 73वें संविधान संशोधन के जरिए पंचायतों को संवैधानिक दर्जा और महिलाओं को आरक्षण मिला। आज 15 लाख महिला प्रतिनिधि ग्रामीण विकास की धुरी हैं, हालांकि कांग्रेस ने मनरेगा समाप्ति को लेकर केंद्र पर निशाना भी साधा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-targets-central-government-rajiv-gandhis-historic-and-transformative-initiative/article-151555"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rajiv-gandhi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर शुक्रवार को कहा कि पंचायतों को सशक्त बनाने की दिशा में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में की गई पहल ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी थी, जिसका आज देश के दो लाख 67 हजार से अधिक गांवों और जिला परिषदों को फायदा मिल रहा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने आज यहां एक बयान में कहा कि 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन 1993 में संविधान का 73वां संशोधन लागू किया गया था, जिसके तहत अनुच्छेद 243-ए- से 243-O तक के प्रावधान जोड़कर पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा और व्यापक अधिकार दिए गए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश में लगभग 2.6 लाख ग्राम पंचायतें, 6,700 से अधिक मध्यवर्ती पंचायतें और 673 जिला परिषद कार्यरत हैं, जो स्थानीय शासन की मजबूत नींव हैं। कांग्रेस के अनुसार, इस व्यवस्था को मजबूत करने में राजीव गांधी की दूरदृष्टि और प्रतिबद्धता का अहम योगदान रहा। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की पहल भी राजीव गांधी के प्रयासों का परिणाम थी, जिसमें अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं को भी शामिल किया गया। आज देश में लगभग 32 लाख निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि हैं, जिनमें करीब 15 लाख महिलाएं हैं।</p>
<p>कांग्रेस ने यह भी कहा कि पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण का प्रावधान अनुच्छेद 243-डी(6) के तहत किया गया, जिसका कई राज्यों ने लाभ उठाया है। पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल का भी उल्लेख किया और कहा कि उनकी सरकार ने 2004 में पंचायती राज मंत्रालय की स्थापना की और 2006 में मनरेगा योजना शुरू की, जिससे ग्राम पंचायतों को विकास योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में केंद्रीय भूमिका मिली। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मौजूदा केंद्र सरकार ने दिसंबर 2025 में मनरेगा को समाप्त कर दिया। पार्टी ने कहा कि पंचायतों और नगरपालिकाओं के सशक्तिकरण की ज़रूरत केवल लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने की राजनीति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 14:36:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सरकार परिसीमन की आड़ में देश का निर्वाचक मानचित्र बदलना चाहती है : राहुल गांधी</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने परिसीमन विधेयक का पुरजोर विरोध करते हुए इसे ओबीसी और दलितों के हितों पर हमला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण के नाम पर जनता को भ्रमित कर रही है और चुनावी लाभ के लिए भारत का चुनावी नक्शा बदलना चाहती है। राहुल ने इसे 'मनुवाद' का प्रयास करार दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-government-wants-to-change-the-electoral-map-of-the/article-150845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/rahul-gandhi-on-mnerga.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार परिसीमन की आड़ में भारत का निर्वाचक मानचित्र बदल देना चाहती है लेकिन इससे महिलाओं का सशक्तीकरण नहीं होने वाला है। राहुल गांधी ने संसदीय सीटों के परिसीमन विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह 'देश द्रोह' है और विपक्ष इसे किसी कीमत नहीं होने देगा। राहुल गांधी ने परिसीमन विधेयक 2026, संविधान ( एक सौ इकतीसवां संशोधन ) विधेयक 2026 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर हो रही चर्चा में शामिल होते हुए यह भी कहा कि सरकार लोक सभा सीटों का परिसीमन और विधायिका में महिलाओं का आरक्षण जिस तरह से देना चाहती है, वह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) , दलितों और अल्पसंख्यकों के हितों पर हमला है। विपक्षी सदस्य इसका कड़ा विरोध करते हैं।</p>
<p>उन्होंने सत्ता पक्ष से कहा, "आप ओबीसी को, दलितों को हिन्दू तो कहते हैं लेकिन सत्ता में उन्हें स्थान नहीं देते। आप इन्हें हिन्दू तो कहते हैं, लेकिन इन्हें कोई स्थान नहीं देते। कार्पोरेट में ओबीसी, दलित कहां हैं, शिक्षा क्षेत्र में वंचित वर्ग कहां है, निजी क्षेत्र में ओबीसी-दलित कहां हैं। सार्वजनिक क्षेत्र से वंचित वर्गों को हटाया जा रहा है।" राहुल गांधी ने सरकार से कहा कि महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने वाला पुराना विधेयक लाइये, वह उसका समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि अतीत में ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यकों के लोगों के साथ बहुत क्रूर बर्ताव किया गया। अब यह विधेयक लाकर उनके साथ बिल्कुल वही काम किया जा रहा है। ऐसा काम किया जा रहा है, जिससे पिछड़ों और दलितों के हाथ में सत्ता कभी न आने दी जाये। उन्होंने कहा, " मनुवाद संविधान पर हावी है। "</p>
<p>विपक्ष के नेता ने कहा कि सरकार जनता को भ्रमित करना चाहती है, वह जानती है कि संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं होगा। वह महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने के नाम पर चुनावी लाभ लेना चाहती है। अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी से कहा कि वह ऐसा कुछ नहीं कहें, जो सदन की गरिमा और मर्यादा के खिलाफ हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 18:06:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उप सभापति चुने गए हरिवंश : पीएम मोदी और खरगे ने दी बधाई, कहा-सदन का आपके प्रति गहरा विश्वास</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नेंद्र मोदी और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने हरिवंश को लगातार तीसरी बार उपसभापति चुने जाने पर बधाई दी। पीएम ने उनकी सौम्यता और समय की पाबंदी की सराहना की, जबकि खरगे ने लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद खाली होने पर सवाल उठाए। सदन ने उनकी निष्पक्षता और समृद्ध अनुभव पर भरोसा जताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/harivansh-elected-deputy-chairman-of-rajya-sabha-for-the-third/article-150772"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/harivansh-narayan-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य दलों के नेताओं ने सदन में लगातार तीसरी बार उपसभापति चुने जाने पर श्री हरिवंश को बधाई दी। मोदी ने कहा, "राज्य सभा के उपसभापति के रूप में लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना, इस सदन का आपके प्रति गहरे विश्वास और बीते समय में सबको साथ लेकर चलने के आपके प्रयास पर एक तरह से सदन की मुहर है।" खरगे ने उम्मीद जताई कि उपसभापति विपक्ष के सदस्यों का विशेष ध्यान रखेंगे, उन्हें उचित महत्व देंगे। उन्होंने तीसरे कार्यकाल के लिए समूचे विपक्ष और पूरे सदन की तरफ से उन्हें बधाई दी।</p>
<p>प्रधानमंत्री से पहले अपनी बात रखते हुए उन्होंने लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद रिक्त होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक भावना के विपरीत लोकसभा में 2019 से उपाध्यक्ष का पद खाली है। अच्छा होता कि लोकसभा में भी राज्यसभा की तरह उपाध्यक्ष का चयन हो जाता। खरगे ने कहा, "आप लोकतंत्र की बात करते हैं लेकिन सात साल से उपाध्यक्ष उस सदन में नहीं है, तो इसे क्या कहेंगे? एक संवैधानिक पद को आपने सात साल से खाली रखा है।"</p>
<p>पीएम मोदी ने हरिवंश के पिछले दो कार्यकालों की तारीफ करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में सदन की शक्ति और प्रभावी हुई है। वह अपने निजी जीवन के अनुभवों का भी सदन को समृद्ध करने में इस्तेमाल करते हैं। इससे सदन का संचालन और माहौल और अधिक परिपक्व बनाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके कार्यकाल में सदन के संचालन को नयी ऊंचाई मिलेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि हरिवंश का सार्वजनिक जीवन केवल संसदीय कामों तक सीमित नहीं रहा है। पत्रकारिता में उच्च मानदंड को उन्होंने हमेशा आधार माना। उनकी लेखनी में धार है लेकिन वाणी और व्यवहार में सौम्यता और शिष्टता रही है। वह अपने लेखों में अपना पक्ष काफी दृढ़ता के साथ रखते थे। पत्रकारिता में भी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का उनका प्रयास रहा। उनके राजनीतिक जीवन में भी उसकी छाया नजर आती है।</p>
<p>उपसभापति को नये सांसदों के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए उन्होंने कहा कि वे उनसे काफी कुछ सीख सकते हैं। समय की पाबंदी उनकी विशेषता रही है। जबसे वह राज्यसभा के सदस्य बने हैं, पूरे समय सदन में होते हैं। अपने दायित्व के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के कारण यह संभव होता है। उन्होंने कहा कि सदन के बाहर भी वह अपने दायित्वों को कैसे निभाते हैं यह ध्यान आकर्षित करने वाला है। उनके काम सराहनीय होने के साथ अनुकरणीय भी हैं। उन्होंने अपने सांसद निधि का इस्तेमाल शिक्षा क्षेत्र और युवा पीढ़ी को केंद्र में रखकर किया है, विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और अध्ययन केंद्र बनवाए हैं।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि हरिवंश का जीवन आज भी अपने गांव से जुड़ा रहता है। वह लगातार वहां अपना योगदान देते रहते हैं। नये सदन के निर्माण में भी उन्होंने काफी योगदान दिया है - चाहे द्वारों के नामकरण हों या आर्ट गैलरी को स्वरूप देना। तमिलनाडु से द्रमुक के तिरुचि शिवा ने उम्मीद जताई कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के साथ सामंजस्य बिठाकर अपना दायित्व निभायेंगे। आंध्र प्रदेश से वाईएसआरसीपी के सुभाष  चंद्र बोस पिल्ली ने श्री हरिवंश के सदन संचालन के तौर-तरीकों की तारीफ करते हुए कहा कि वह अनुशासन बनाने के लिए शिष्टापूर्वक सख्ती बरतते हैं।</p>
<p>ओडिशा से बीजू जनता दल के मानव रंजन मंगराज ने कहा कि वह निष्पक्ष तरीके से सदन का संचालन करते हैं और उम्मीद जतायी वह आगे भी ऐसा करते रहेंगे। तमिलनाडु से अन्नाद्रमुक के एम. तंबी दुरै ने कहा कि आसन की सफलता नियमों और संचालन प्रक्रियाओं को लागू कराने से कहीं अधिक सदस्यों की भावनाओं को समझने में है। बिहार से जदयू के संजय झा ने श्री हरिवंश का नियुक्ति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बिहार में पिछले 20 साल में जो भी सकारात्मक काम हुए उनमें अपनी पत्रकारिता और एक सांसद के तौर पर उन्होंने योगदान दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 12:41:06 +0530</pubDate>
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                <title>अखिलेश यादव ने साधा निशाना : संविधान संशोधन विधेयक के सहारे सत्ता की राजनीति कर रही सरकार, एसआईआर के जरिए वोट काटने का लगाया आरोप </title>
                                    <description><![CDATA[सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लोकसभा में सरकार पर तीखा हमला करते हुए महिला आरक्षण को परिसीमन लागू करने की 'साजिश' बताया। उन्होंने जातिगत जनगणना और मुस्लिम व पिछड़ी महिलाओं के लिए 'कोटे में कोटा' की मांग की। अखिलेश ने आरोप लगाया कि सरकार वोट बैंक के लिए संवैधानिक संशोधन का सहारा ले रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/akhilesh-yadav-targeted-the-government-which-is-doing-power-politics/article-150711"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/akhilesh-yadav2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। समाजवाद पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि केंद्र सरकार सत्ता में बने रहने के लिए संविधान में 131वें संशोधन के जरिए वह महिला आरक्षण विधेयक के सहारे परिसीमन संबंधी विधेयक को पारित करवाना चाहती है। अखिलेश यादव ने गुरुवार को लोकसभा में "संविधान 131 वां संशोधन विधेयक 2026" पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि केंद्र सरकार आरक्षण विरोधी है इसलिए वह एसआईआर के जरिए घपले करवा कर सत्ता में बना रहना चाहती है। एसआईआर के माध्यम से वोट काटे जा रहे हैं और जब पकड़े जा रहे हैं तो फिर नयी तरकीब लगा कर वोट काटे जा रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार एसआईआर के जरिए लोगों के वोट कटवा रही है और ऐसा कर केंद्र सरकार चुनाव आयोग के साथ मिलकर वोट बैंक सुरक्षित करने की राजनीति कर रही है। उनका यह भी कहना था कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर के जरिये वोट काटे गए और जब पकड़े गए तो फॉर्म 7 लेकर उसमें नकली दस्तखत करवाए गये लेकिन इसमें भी पकड़े गए तो फॉर्म 7 का इस्तेमाल ही बंद करवा दिया गया। अब केंद्र सरकार महिला आरक्षण विधेयक के जरिए महिलाओं के वोट पाकर सत्ता में बना रहना चाहती है और अपने खोए वोट को वापस पाना चाहती है लेकिन उसे मालूम होना चाहिए कि देश की महिलाएं महंगाई से त्रस्त हैं और अब एलपीजी सिलेंडर ने उनकी नाराजगी और बढ़ा दी है इसलिए महिलाओं को रिझाकर उनका वोट हासिल करने का उनका षड्यंत्र भी बेकार हो गया है।</p>
<p>सपा नेता ने कहा कि अगर केंद्र सरकार महिलाओं के प्रति संवेदनशील है तो उसे मेरठ और नोएडा की आंदोलन कर रही महिलाओं की समस्याओं की समस्या के समाधान के लिए कदम उठाने चाहिए और इस तरह का संकट महिलाओं के सामने फिर ना आए विधेयक में इसकी व्यवस्था करनी चाहिए। उनका कहना था कि सरकार महिला आरक्षण के सहारे रणनीतिक तरीके से राजनीतिक लाभ पाने के लिए परिसीमन के वास्ते संविधान संशोधन विधयेक लेकर आई है।</p>
<p>सपा नेता ने कहा कि पहले जाति के आधार पर जनगणना आवश्यक है यदि जनगणना होती है तो उसके आधार पर आरक्षण की व्यवस्था की जा सकती है लेकिन सरकार आरक्षण नहीं देना चाहती इसलिए वह जनगणना जाति के आधार पर नहीं करना चाहती है। वह अल्पसंख्यकों और खासकर मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण का लाभ नहीं देना चाहती है। यदि जनगणना जाति के आधार पर होती है तो पिछड़े वर्ग तथा अल्पसंख्यक महिलाओं को इसका वाजिब लाभ मिल सकता है।</p>
<p>अखिलेश यादव ने कहा कि यदि सरकार जनगणना जाति के आधार पर नहीं करती है तो फिर महिला आरक्षण विधेयक धोखा है। उनका कहना था कि विधेयक में महिलाओं के हित के लिए कोई व्यवस्था ही नहीं है और पिछड़े अल्पसंख्यक महिलाओं को आरक्षण मिले बिना आरक्षण विधेयक का कोई मतलब नहीं रह जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 18:19:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सोनिया गांधी का सरकार पर निशाना : असली चिंता महिला आरक्षण नहीं, बल्कि प्रस्तावित परिसीमन, राजनीतिक लाभ लेने की मंशा का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला करते हुए प्रस्तावित परिसीमन को "संविधान पर हमला" करार दिया। उन्होंने लेख के जरिए चेतावनी दी कि जनगणना में देरी और महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना लोकतांत्रिक संतुलन बिगाड़ सकता है। सोनिया ने जातिगत जनगणना और पारदर्शिता की मांग दोहराई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/sonia-gandhis-target-on-the-government-is-that-the-real/article-150190"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/sonia-gandhi-issued-notice.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक निजी अखबार में लिखे अपने लेख के जरिए केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे को लेकर हमला बोला है। सोनिया गांधी ने सोमवार को यहां स्पष्ट तौर पर कहा कि मौजूदा समय में असली चिंता महिला आरक्षण नहीं, बल्कि प्रस्तावित परिसीमन है, जिसे उन्होंने "बेहद खतरनाक" और "संविधान पर हमला" करार दिया। अपने लेख में उन्होंने चेतावनी दी कि संसद के विशेष सत्र में जिस तरह परिसीमन का मुद्दा सामने आ रहा है, वह लोकतांत्रिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जल्दबाजी में इस विषय को आगे बढ़ा रही है, जिसके पीछे राजनीतिक लाभ लेने की मंशा हो सकती है।</p>
<p>उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष से समर्थन तो मांगा जा रहा है लेकिन इस अहम मुद्दे पर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की ओर से सर्वदलीय बैठक की मांग को लगातार नजरअंदाज किया गया है। सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि 2023 में संसद द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन के लिए जनगणना और परिसीमन जरूरी है।</p>
<p>उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार 2029 से महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, तो यह निर्णय पहले क्यों नहीं लिया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का फैसला केवल गणितीय आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर होना चाहिए, ताकि जनसंख्या नियंत्रण में आगे रहे राज्यों को नुकसान न हो। इसके अलावा उन्होंने जातिगत जनगणना में देरी पर भी सरकार की आलोचना की और कहा कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने कम समय में सर्वे कर यह साबित कर दिया है कि यह कार्य संभव है।</p>
<p>अंत में उन्होंने 2021 की जनगणना टालने के फैसले पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे करोड़ों लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह गये। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे महत्वपूर्ण फैसलों पर जल्दबाजी के बजाय विपक्ष के साथ व्यापक चर्चा की जाय और पूरी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बनाया जाया। गौरतलब है कि महिला आरक्षण पर 16-18 अप्रैल तक संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 17:36:37 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: सीएम ममता का चुनाव आयोग पर तीखा हमला, राज्य के खिलाफ अभूतपूर्व हस्तक्षेप और पक्षपात का लगाया आरोप </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला करते हुए 50 से अधिक अधिकारियों के तबादले को 'अघोषित आपातकाल' करार दिया है। उन्होंने आयोग पर भाजपा के पक्ष में काम करने और संविधान के उल्लंघन का आरोप लगाया। ममता ने स्पष्ट किया कि बंगाल धमकियों के आगे नहीं झुकेगा और चुनावी शुचिता के लिए संघर्ष जारी रखेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-cm-mamatas-sharp-attack-on-the/article-147158"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/mamta-banerjee.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को चुनाव आयोग पर तीखा हमला करते हुए आगामी चुनावों से पहले राज्य के खिलाफ अभूतपूर्व हस्तक्षेप और पक्षपात का आरोप लगाया है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट संदेश में बनर्जी ने दावा किया है कि आयोग ने पश्चिम बंगाल को चुन-चुनकर निशाना बनाया है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और कई अन्य उच्च पदस्थ अधिकारियों सहित 50 से अधिक वरिष् अधिकारियों को चुनाव की औपचारिक अधिसूचना जारी होने से पहले ही मनमाने ढंग से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा, यह कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह उच्चतम स्तर का राजनीतिक हस्तक्षेप है। मुख्यमंत्री ने इन घटनाक्रमों को संस्थानों के बढ़ते राजनीतिकरण का हिस्सा बताया। बनर्जी ने कहा, जिन संस्थानों को निष्पक्ष रहना चाहिए, उनका व्यवस्थित राजनीतिकरण करना सीधे तौर पर संविधान पर हमला है। उन्होंने आगे कहा कि आयोग का यह आचरण स्पष्ट पक्षपात और राजनीतिक हितों के सामने आत्मसमर्पण को दर्शाता है। </p>
<p><strong>प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने का आरोप  </strong></p>
<p>उनकी यह टिप्पणी राज्य में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच आयी है, जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस अक्सर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी पर पश्चिम बंगाल की प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने का आरोप लगाती रही है। बनर्जी ने मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर भी चिंता जतायी। उन्होंने इस प्रक्रिया को बेहद त्रुटिपूर्ण बताया और आरोप लगाया कि इससे जनता में घबराहट पैदा हुई है। उन्होंने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना करते हुए अभी तक पूरक मतदाता सूची प्रकाशित नहीं की गयी है, जिससे नागरिक अनिश्चितता की स्थिति में हैं। </p>
<p><strong>उन्होंने सवाल किया, भाजपा इतनी बेताब क्यों है? </strong></p>
<p>बंगाल और यहां के लोगों को लगातार निशाना क्यों बनाया जा रहा है? बनर्जी ने पार्टी पर आरोप लगाया कि आजादी के दशकों बाद भी नागरिकों को कतारों में खड़े होने और अपनी नागरिकता साबित करने को मजबूर करने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p><strong>चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में तैनाती</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने आयोग की कार्रवाइयों में विरोधाभासों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों को उनके पदों से हटाया गया था, उन्हें कुछ ही घंटों के भीतर फिर से चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में तैनात कर दिया गया। उन्होंने सिलीगुड़ी और बिधाननगर जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों का उदाहरण दिया, जहां वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को बिना किसी तत्काल विकल्प के पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया गया। उनके अनुसार, इससे महत्वपूर्ण शहरी केंद्र प्रभावी रूप से बिना मुखिया के रह गये हैं। बनर्जी ने कहा, यह शासन नहीं है। यह अराजकता, भ्रम और घोर अक्षमता को सत्ता के रूप में पेश करने जैसा है। बनर्जी ने स्थिति को अघोषित आपातकाल और राष्ट्रपति शासन का अघोषित रूप करार दिया। </p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि यह जबरदस्ती और संस्थानों के दुरुपयोग के जरिए पश्चिम बंगाल पर नियंत्रण करने की सोची-समझी साजिश है। उन्होंने राज्य सरकार के अधिकारियों के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें सिर्फ ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ राज्य की सेवा करने के लिए निशाना बनाया जा रहा है। बंगाल कभी धमकियों के आगे नहीं झुका ममता ने जोर देकर कहा, बंगाल कभी धमकियों के आगे नहीं झुका है और न कभी झुकेगा। बंगाल लड़ेगा, बंगाल प्रतिरोध करेगा और अपनी धरती पर विभाजनकारी तथा विनाशकारी एजेंडा थोपने की हर कोशिश को निर्णायक रूप से शिकस्त देगा। चुनाव आयोग ने अभी तक इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। राज्य जैसे-जैसे अगले चुनावी चक्र की ओर बढ़ रहा है, इस विवाद ने पहले से ही गर्म राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। प्रशासनिक निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े सवाल इस बहस के केंद्र में रहने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 10:59:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ममता बनर्जी बनीं वकील: दीं SIR पर दलीलें; चुनाव आयोग को बताया व्हाट्सएप आयोग, SC ने मांगा चुनाव आयोग से जवाब </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे मतदाताओं के अधिकार छीने जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mamta-banerjee-became-lawyer-in-sc-gave-arguments-on-sir/article-141949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(11)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय में खुद पेश होकर आरोप लगाया कि चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिये उनके राज्य को चयनात्मक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने ईसीआई के खिलाफ सीएम बनर्जी की याचिका पर सुनवाई की। इसमें आरोप लगाया गया है कि मौजूदा एसआईआर कवायद से बड़े पैमाने पर मतदाताओं का हक छीना जायेगा। उन्होंने इसे एक अपारदर्शी, जल्दबाजी वाली, असंवैधानिक और गैरकानूनी प्रक्रिया बताया।</p>
<p>इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली उनकी रिट याचिका पर चुनाव आयोग (ईसीआई) को नोटिस जारी कर उससे सोमवार तक जवाब देने को कहा। मामले की जैसे ही सुनवाई शुरू हुई तो वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने याचिका की गंभीरता का उल्लेख करते हुए बताया कि यह मामला आइटम संख्या 36 और 37 के रूप में सूचीबद्ध नये विषयों से संबंधित है।</p>
<p>जब न्यायालय ने संकेत दिया कि वह जल्द ही इस मामले की सुनवाई करेगा तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं पोडियम तक गयीं और पीठ को सीधे संबोधित करने का आग्रह किया। सीएम ममता बनर्जी ने तर्क दिया, यह एसआईआर प्रक्रिया केवल नाम हटाने के लिए है। उन्होंने दावा किया कि विवाह के बाद उपनाम बदलने वाली महिलाओं या निवास बदलने वाले गरीब प्रवासियों जैसी सामाजिक वास्तविकताओं के कारण होने वाली मामूली विसंगतियों के आधार पर वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने न्यायालय को बताया कि मतदाताओं के नाम तार्किक विसंगति के आधार पर हटा दिये गये, भले ही वह विसंगति केवल उपनाम या वर्तनी की भिन्नता मात्र थी। गरीब लोगों जो बाहर जाते हैं, उनके नाम हटा दिये गये हैं। यह निष्कासन का आधार क्यों होना चाहिए।सीएम बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया के समय और इसके चयनात्मक होने पर सवाल भी उठाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 18:43:44 +0530</pubDate>
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                <title>एक साल बाद हटा मणिपुर से राष्ट्रपति शासन, केंद्र सरकार ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कब होगा शपथ ग्रहण समारोह</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने मणिपुर से राष्ट्रपति शासन हटाने की घोषणा की। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार यह फैसला चार फरवरी 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/presidents-rule-removed-from-manipur-after-one-year-central-government/article-141950"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(12)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केन्द्र ने बुधवार को मणिपुर से राष्ट्रपति शासन हटाने की घोषणा की। यह निर्णय तत्काल प्रभावी हो गया है। मणिपुर में 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। </p>
<p>गृह मंत्रालय की बुधवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति ने राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाने का फैसला किया है। यह फैसला चार फरवरी 2026 से प्रभावी होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 17:35:11 +0530</pubDate>
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                <title>अखिलेश यादव का यूपी सरकार पर तीखा हमला, बोलें संविधान को अपने से नीचे समझना लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक</title>
                                    <description><![CDATA[अखिलेश यादव ने यूपी सरकार पर संविधान का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्ता के अहंकार में भाजपा लोकतंत्र और धार्मिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/akhilesh-yadavs-sharp-attack-on-up-government-considering-the-constitution/article-140949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/akhilesh.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार संविधान को अपने से नीचे समझने की भूल कर रही है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने कहा कि जनता आज यह सवाल कर रही है कि जब अपने ऊपर दर्ज मुक़दमे हटवाए गए, तब संविधान के किस अनुच्छेद के तहत यह कार्य किया गया। </p>
<p>मंगलवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि कुछ लोग लगातार मंचों से 'सनातनी संतों' का तिरस्कार कर रहे हैं और अपमानजनक उपमाओं का प्रयोग कर समाज में वैमनस्य फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि माघ मेले जैसे पवित्र आयोजन में भी नकारात्मक 'बुलडोजरी सोच' के समर्थन में नारे लगवाकर धार्मिक सौहार्द बिगाडऩे का प्रयास किया गया, जबकि उपद्रव करने वालों के विरुद्ध मुक़दमे दर्ज नहीं किए जा रहे हैं।</p>
<p>सपा अध्यक्ष ने कहा कि सत्ताकामी सरकार का धर्म-विरोधी चेहरा अब पूरी तरह बेनक़ाब हो चुका है। जो नुकसान होना था, वह हो चुका है और अब मजबूरी में मांगी गई माफ़ी का कोई महत्व नहीं रह जाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि माफ़ी वही मायने रखती है, जो दिल से मांगी जाए।</p>
<p>अखिलेश यादव ने शासनाधीशों को आगाह करते हुए कहा कि हठ हमेशा विनाश की ओर ले जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का विचार, वक्तव्य और व्यवहार लगातार असंवैधानिक रहा है। सत्ता के नशे में चूर संविधान-विरोधी भाजपा अब जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 17:07:34 +0530</pubDate>
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                <title>शंकराचार्य विवाद पर रामानुजाचार्य की तीखी प्रतिक्रिया, बोलें-माघ मेला क्षेत्र पवित्र स्थल, राजनीति का अखाड़ा नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[अखिलेश यादव ने यूपी सरकार पर संविधान का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्ता के अहंकार में भाजपा लोकतंत्र और धार्मिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ramanujacharyas-sharp-reaction-on-shankaracharya-controversy-magh-mela-area-is/article-140952"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(7)2.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले को लेकर पिछले करीब दस दिनों से विवाद की स्थिति बनी हुई है। मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान के लिए पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ प्रशासन द्वारा कथित दुर्व्यवहार के बाद साधु-संत दो गुटों में बंट गए हैं।</p>
<p>इस विवाद पर श्रृंगवेरपुर धाम के पीठाधीश्वर श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी शांडिल्य महाराज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि माघ मेला क्षेत्र एक पवित्र तीर्थ स्थल है, न कि राजनीति का अखाड़ा। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि बटुकों के साथ मारपीट निंदनीय है।</p>
<p>स्वामी शांडिल्य महाराज ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले को अब राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई कथित अभद्र टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री लगातार सनातन धर्म को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं और उनके खिलाफ इस प्रकार की अपमानजनक भाषा का प्रयोग अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने कहा कि एक विशेष वर्ग को खुश करने के उद्देश्य से की गई ऐसी टिप्पणियों के लिए संबंधित लोगों को माफी मांगनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:02:02 +0530</pubDate>
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