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                <title>पानी की निकासी नहीं होने से लोग खासे परेशान </title>
                                    <description><![CDATA[ बारिश और सीवरेज के पानी एकत्र होने से पीडादायक हादसों का भी उल्लेख किया जा रहा है। रमजान जी की हत्थे के आस-पास भी हालात बद से बदतर बताए जा रहे है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/jodhpur-people-are-very-upset-due-to-lack-of-water-drainage/article-21656"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/465454651.jpg" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। बनाड रोड पर बारिश का पानी निकासी नही होने से लोग काफी परेशान है। परेशान लोगो ने कई बार प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को ज्ञापन भी दिए है। अब क्षेत्रीय लोगो ने हाईवे पर प्रदर्शन करने का निर्णय भी लिया है। कल 11 बजे क्षेत्रीय जनता द्वारा हाइवे रोककर प्रदर्शन किया जाएगा। सोशल मीडिया पर प्रदर्शन की सूचना वायरल हो रही है। पिछले 8 साल से यह पीडादायक स्थिति बताई जा रही है। बारिश और सीवरेज के पानी एकत्र होने से पीडादायक हादसों का भी उल्लेख किया जा रहा है। रमजान जी की हत्थे के आस-पास भी हालात बद से बदतर बताए जा रहे है। गौरतलब है कि जोधपुर शहर में बारिश का दौर थमे काफी समय बीत गया है। शहर की सभी सड़कों पर भरा पानी पूरी तरह से सूख चुका है, लेकिन जयपुर रोड पर सारण नगर के निकट अभी तक सड़क का बड़ा हिस्सा पानी में डूबा है।</p>
<p>यहां बिन बारिश ही सड़क पर पानी हिलोरे मार रहा है। इस क्षेत्र में नाला निर्माण बरसों से लंबित चल रहा है। ऐसे में अब नाला बने तो पानी की निकासी हो। फिलहाल नाले का निर्माण अधर में लटका है।इस दौरान सीएम अशोक गहलोत भी जोधपुर आकर चले गए, लेकिन पानी निकासी को जिम्मेदारों की नींद नहीं जागी। अब यह पानी तेज धूप में अपने आप सूखेगा तभी लोगों को निजात मिलेगी। जल भराव के कारण लोगों का पैदल तो दूर वाहन लेकर भी यहां से निकलना काफी परेशानी भरा रहता है। इस समस्या के समाधान करने को जिम्मेदार विभागों ने नाला निर्माण तो नहीं कराया अलबत्ता सीमेंट की सड़क का निर्माण दो वर्ष पूर्व अवश्य करवा दिया, ताकि सड़क पर पानी के कारण गड्‌ढे नहीं पड़े। और पानी में से होकर निकलते समय लोग इनमें नीचे नहीं गिरे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Sep 2022 14:40:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[jodhpur]]></dc:creator>
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                <title>शेखावाटी अंचल में नहीं है खेल प्रतिभाओं का अभाव : जिला कलक्टर चतुर्वेदी</title>
                                    <description><![CDATA[जिला वालीबॉल संघ के कोषाध्यक्ष मदन लाल शर्मा ने बताया कि इससे पहले भी सुनील जाखड़, अशोक विश्नोई, टेकचंद व गौरव शर्मा ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राजस्थान का प्रतिनिधतत्व करते हुए पदक प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sikar/there-is-no-lack-of-sports-talent-in-shekhawati-region/article-20634"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/514.jpg" alt=""></a><br /><p>सीकर। सांवली रोड़ जिला स्टेडियम स्थित वालीबॉल खेल मैदान पर 14वीं एशियन वालीबॉल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधितत्व करने वाले खिलाड़ी सूरज बंजारा का जिला कलेक्टर एवं अध्यक्ष जिला क्रीड़ा परिषद अविचल चतुवेर्दी ने स्वागत करते हुए कहा कि शेखावाटी अंचल में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की बजटीय घोषणा की अनुपालना में पहली बार होने वाले राजीव गांधी ग्रामीण ओलम्पिक खेल के जरिये गांव-गांव, ढ़ाणी-ढ़ाणी में छिपी खेल प्रतिभाओं को तलाशकर उन्हें तराशने की अनूठी पहल की गई है।</p>
<p>इससे युवाओं में स्वास्थ्य एवं खेलों के प्रति जागरूकता पैदा होगी। युवा नशे जैसी बुरी लत से दूर होकर खेल के माध्यम से अपना भविष्य संवारेंगे। जिला वालीबॉल संघ के कोषाध्यक्ष मदन लाल शर्मा ने बताया कि इससे पहले भी सुनील जाखड़, अशोक विश्नोई, टेकचंद व गौरव शर्मा ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राजस्थान का प्रतिनिधतत्व करते हुए पदक प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है। गौरतलब है यह सभी खिलाडी जिला खेलकूद प्रशिक्षण केन्द्र के वालीबॉल प्रशिक्षक प्रकाशराम गोदारा की देखरेख मे जिला स्टेडियम में वालीबॉल का नियमित रूप से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है। इस मौके पर जिला खेल अधिकारी अशोक कुमार, जिला कबड्डी संघ के अध्यक्ष जगदीश फौजी, जिला वालीबॉल संघ के कोषाध्यक्ष मदन लाल शर्मा, एसएमडी ग्रुप के निदेशक सोमेन्द्र यादव, सक्सेस सेंटर के निदेशक रामनिवास सैनी आदि मौजूद थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सीकर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Aug 2022 12:44:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सड़कों पर दौड़ रही, खटारा लो-फ्लोर बसें  </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। जयपुर शहर में संचालित जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड की लो फ्लोर बसें सही तरीके से मेंटिनेंस नहीं होने के कारण आए दिन ब्रेक डाउन हो रही हैं। इसके चलते यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही हादसा होने की संभावना भी बनी रहती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news-khatara-low-floor-buses-running-on-the-roads/article-11981"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/bus2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर शहर में संचालित जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड की लो फ्लोर बसें सही तरीके से मेंटिनेंस नहीं होने के कारण आए दिन ब्रेक डाउन हो रही हैं। इसके चलते यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही हादसा होने की संभावना भी बनी रहती है। जेसीटीएसएल की करीब 305 बसों का संचालन हो रहा है। बगराना डिपो से संचालित बसों की मेंटिनेंस का कार्य पारस ट्रेवल्स कंपनी और विद्याधर नगर व टोडी डिपो की बसों का मेंटिनेंस मातेश्वरी कंपनी कर रही है। बसों का सही मेंटिनेंस नहीं होने से आए दिन ब्रेक डाउन होकर सड़कों पर ही खड़ी हो जाती हैं। जेसीटीएसएल की बीती नौ जून को एमआई रोड पर भी एक बस ब्रेक फेल होकर दीवार में घुस गई थी। इसी बस का रविवार को रामबाग सर्किल चौराहे पर दोबारा से ब्रेक फेल हो गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jun 2022 11:26:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> बजट के अभाव में अटका अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण कार्य</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा के रियासतकालीन चिड़ियाघर के पिंजरों में बरसों से बंद वन्यजीव अपनी आजादी का इंतजार कर रहे हैं। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 25 करोड़ की लागत से कई निर्माण कार्य होने हैं, जो बजट के अभाव में शुरू नहीं हो पाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/construction-work-of-abheda-biological-park-stuck-due-to-lack-of-budget/article-11620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/abheda-biological-park.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के रियासतकालीन चिड़ियाघर के पिंजरों में बरसों से बंद वन्यजीव अपनी आजादी का इंतजार कर रहे हैं, जो सरकारी लेटलतीफी के कारण खत्म होता नजर नहीं आ रहा। भीषण गर्मी के बीच छोटे पिंजरों में दिन काटने को मजबूर हैं। दरअसल, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 25 करोड़ की लागत से कई निर्माण कार्य होने हैं, जो बजट के अभाव में शुरू नहीं हो पाए। जबकि, वन्यजीव विभाग सरकार को कई बार प्रस्ताव भेज चुका है। इसके बावजूद बजट स्वीकृत नहीं हुआ। जिसके चलते एक दर्जन से अधिक वन्यजीव चिड़ियाघर से बायोलॉजिक पार्क में शिफ्ट नहीं हो पा रहे। <br /><br /><strong>25 करोड़ से द्वितीय चरण में यह होने हैं कार्य</strong> <br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 25 करोड़ की लागत से कई निर्माण कार्य होने हैं। जिनमें 31 एनक्लोजर, स्टाफ क्वार्टर, कैफेटेरिया, वेटनरी हॉस्पिटल, इंटरपिटेक्शन सेंटर, पर्यटकों के लिए आॅडिटोरियम, छांव के लिए शेड, कुछ जगहों पर पथ-वे सहित अन्य कार्य शामिल हैं।<br /><br /><strong>संसाधनयुक्त हॉस्पिटल बेहद जरूरी</strong><br />डीएफओ डॉ. आलोक गुप्ता ने बताया कि 2017 में बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, जो नवंबर 2021 में बनकर पूरा हुआ। लेकिन, द्वितीय चरण में बेहद महत्वपूर्ण काम होने थें, जो बजट के अभाव में नहीं हो सके। जब तक साधन-संसाधनयुक्त हॉस्पिटल नहीं होगा तब तक चिड़ियाघर हो या बायलॉजिकल पार्क इनके होने का उददेशय पूर्ण नहीं होगा। वन्यजीवों के इलाज के लिए अभी कामचलाउ व्यवस्था कर रखी है लेकिन इमरजेंसी पड़ने पर परेशानी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 14:29:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> सब्जी मण्डी बाजार में पेयजल की किल्लत, महिलाओं ने SDM को  दिया ज्ञापन  </title>
                                    <description><![CDATA[ टोडारायसिंह। जलदाय विभाग के कार्मिकों की लापरवाही के चलते कस्बे में लगातार पेयजल व्यवस्था चरमरा रही है। कस्बे के  सब्जी मण्डी बाजार में पेयजल की किल्लत को लेकर बड़ी संख्या में महिलाओं ने वार्ड पार्षद मीना जैन की अगुवाई में एसडीएम को ज्ञापन दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/tonk/lack-of-drinking-water-in-vegetable-market-market--women-gave-memorandum/article-11270"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/tt2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> टोडारायसिंह।</strong> जलदाय विभाग के कार्मिकों की लापरवाही के चलते कस्बे में लगातार पेयजल व्यवस्था चरमरा रही है। कस्बे के  सब्जी मण्डी बाजार में पेयजल की किल्लत को लेकर बड़ी संख्या में महिलाओं ने वार्ड पार्षद मीना जैन की अगुवाई में एसडीएम को ज्ञापन दिया।</p>
<p><br />पार्षद सहित महिलाओं ने बताया कि गत एक पखवाड़ा से सब्जी मण्डी बाजार में पानी की सप्लाई नहीं हो रही है, जिससे पेयजल संकट खड़ा हो रहा है। इस सम्बंध में जलदाय विभाग के कार्मिकों को अवगत कराने के बाद भी सुधार नहीं किया जा रहा है। महिलाओं ने प्रशासन को चेताया कि पेयजल नियमित नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा। इसके बाद महिलाएं जलदाय विभाग कार्यालय भी सप्लाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ज्ञापन देने वाली महिलाओं मे घीसी साहू, संतरा, कांता, ममता, कैलाशी, आशा, निरमा, मंजू, पिंकी, पीरी देवी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुई है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>टोंक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jun 2022 12:04:25 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गंभीर जल संकट से दिल्ली के लोग है परेशान </title>
                                    <description><![CDATA[पिछले कई दिनों से गंभीर जल संकट से दिल्ली के लोग परेशान है। परेशानी का सबब यह है कि पानी पहुंचाने वाले टैंकरों को कड़ी सुरक्षा में चलाया जा रहा है, ताकि पानी को लेकर हिंसा ना हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/lack-of-water-in-area-of-delhi/article-10459"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/2-copy4.jpg" alt=""></a><br /><p>पिछले कई दिनों से गंभीर जल संकट से दिल्ली के लोग परेशान है। परेशानी का सबब यह है कि पानी पहुंचाने वाले टैंकरों को कड़ी सुरक्षा में चलाया जा रहा है, ताकि पानी को लेकर हिंसा ना हो। दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र में पानी की कमी से जूझ रहे लोग पानी की टंकियों और हेंडपंपों से बूंद-बूंद पानी इकट्ठा कर रहे हैं और अपने-अपने पानी के डिब्बों को जंजीर से बांधकर रख रहे हैं। ऐसा ही नजारा मंगलवार को वसंत विहार के कुसुमपुर पहाड़ी इलाके में देखने को मिला। यह चिंताजनक इसलिए है कि अगर ऐसे ही हालात बने रहे तो यह जल संकट कभी भी जल संघर्ष एवं हिंसा में बदल सकता है।  भीषण गर्मी और हरियाणा में नदी में कम पानी छोड़े जाने के कारण स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। दिल्ली के जल-संकट को जल्दी-से-जल्दी दूर करना सरकार की प्राथमिकता होनी ही चाहिए। दिल्ली में जल संकट वैसे तो हर वर्ष गर्मी की समस्या है, लेकिन इसका प्रभाव साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि बढ़ती जनसंख्या की वजह से दिल्ली में पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है। अगर हम आंकड़ों पर गौर करें तो यह बात काफी हद तक सच भी है। दिल्ली की जनसंख्या में बीते दो दशकों में अत्यधिक वृद्धि हुई है। केवल जनसंख्या में वृद्धि ही दिल्ली में साल दर साल गहराते जल संकट का कारण नहीं है। विश्व के किसी भी शहर एवं खासकर राजधानी क्षेत्र की जनसंख्या में वृद्धि एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, पर इससे उपजने वाली विभिन्न समस्याओं एवं जल संकट का मूल आबादी की बजाय, आबादी द्वारा चुनी गई सरकार एवं उसके लिए कार्य करने वाली संस्थाएं हैं, जोकि जीवन के मूलभूत तत्वों एवं जीवन निर्वाह की मूल जरूरतों में से एक जल भी उपलब्ध नहीं करवा पाती है। यह सरकार की नाकामी को दर्शाता है।</p>
<p>यह कैसी सरकार है, जिसके शासन में एक-एक बाल्टी पानी के लिए लोग रात-रात भर जाग रहे हैं। जहां पानी पहुंच रहा है वहां लंबी-लंबी कतारें लगी हैं। जिनके पास पानी खरीदने को पैसे नहीं हैं, वे गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। जो खरीद सकते हैं, वे मुंहमांगा दाम दे रहे हैं। ऐसा नहीं कि ये हाल कुछेक इलाकों का है। आधी से ज्यादा दिल्ली पानी के लिए इसी तरह तरस रही है। यह हर साल का रोना है। लेकिन विडंबना यह है कि जल संकट के स्थायी समाधान के लिए क्या हो, इसकी फिक्र किसी को नहीं दिखती। दिल्ली में जल-संकट का कारण राजनीति भी है। पानी को लेकर विवाद दूसरे राज्यों में भी होते रहते हैं। नदियों के पानी पर किसका और कितना हक हो, यह मुद्दा जटिल तो है ही, राज्यों की राजनीति ने इसे और पेचीदा बना डाला है। दिल्ली को अतिरिक्त पानी देने को लेकर उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के साथ चर्चा करीब तीन साल से चल रही है। हरियाणा सरकार के साथ भी लंबे समय से बात चल रही है। पर अब तीनों राज्यों ने अपनी मजबूरी जता दी है। दिल्ली में पानी का संकट तब खड़ा होता है, जब यमुना में पानी कम हो जाता है। ताजा स्थिति यह है कि यमुना नदी का जलस्तर सामान्य से छह फीट नीचे चला गया है। यहां पानी हरियाणा से आता है। हरियाणा तर्क यह दे रहा है कि पंजाब उसे उसके हिस्से का पानी नहीं दे रहा। यानी जब पंजाब हरियाणा को पानी देगा, तब वह दिल्ली को देगा। अगर वाकई ऐसा है तो यह बेहद गंभीर बात है। इससे तो यही लग रहा है कि पानी को लेकर सरकारें राजनीति कर रही हैं।</p>
<p>दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है, जबकि उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भाजपा की, जबकि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है और उसी की सरकार पंजाब में है तो वह समस्या के समाधान के लिए तत्पर क्यों नहीं होती। पंजाब हरियाणा को पानी दे तो दिल्ली को पानी मिल सकता है, लेकिन इस समस्या के समाधान के लिए गंभीरता क्यों नजर नहीं आ रही है। क्यों जल पर राजनीति की जा रही है। क्यों जनता को पानी के लिए त्राहि-त्राहि करने पर विवश किया जा रहाहै। ऐसा प्रतीत होता है कि हमारे राजनीतिज्ञ, जिन्हें सिर्फ वोट की प्यास है और वे अपनी इस स्वार्थ की प्यास को इस पानी से बुझाना चाहते हैं। पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली का यह जल-विवाद आज हमारे लोकतांत्रिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर दे उससे पूर्व आवश्यकता है, तुच्छ स्वार्थ से ऊपर उठकर व्यापक राष्ट्रीय हित एवं जनता के हित के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए। जीवन में श्रेष्ठ वस्तुएं प्रभु ने मुफ्त दे रखी हैं- पानी, हवा और प्यार। और आज वे ही विवादग्रस्त, दूषित और झूठी हो गर्इं। बहुत हो चुका है। अब बस। 2022 दिल्ली के जन-संकट का समाधान का वर्ष हो। भारत की नदियां शताब्दियों से भारतीय जीवन का एक प्रमुख अंग बनी हुई हैं। इन्हीं के तटों से ऋयों-मुनियों की वाणी मुखरित हुई थी, जहां से सदैव शांति एवं प्रेम का संदेश मिलता था। इसमें तो पूजा के फूल, अर्घ्य और तर्पण गिरता था अब वहां निर्दोषों का खून गिरता है।</p>
<p><strong>- ललित गर्ग </strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 May 2022 11:25:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>प्रदेश में मरीजों के अनुपात में सरकारी अस्पताल में नर्सिंगकर्मियों की कमी </title>
                                    <description><![CDATA[एक ओर जहां राजस्थान चिकित्सा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। वहीं दूसरी ओर प्रदेश के सरकारी अस्पताल नर्सिंगकर्मियों की कमी से जूझ रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-lack-of-nursing-personnel-in-hospital-in-state/article-9594"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/4654654456.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एक ओर जहां राजस्थान चिकित्सा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। वहीं दूसरी ओर प्रदेश के सरकारी अस्पताल नर्सिंगकर्मियों की कमी से जूझ रहे हैं। इसका बड़ा कारण है। इंडियन नर्सिंग काउंसिल के हिसाब से मरीजों के अनुपात में नर्सेज का न होना। इसी का नतीजा है कि प्रदेश के सबसे बड़े सवाईमानसिंह अस्पताल सहित अन्य मेडिकल कॉलेज व अस्पतालों में एक वार्ड में 50-50 मरीजों पर इक्का-दुक्का नर्सिंगकर्मी ही कार्यरत हैं। ऐसे में कम नर्सिंगकर्मियों के भरोसे इलाज किया जा रहा है। डॉक्टर और मरीज के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी नर्सिंग स्टाफ  होता है। इसके बावजूद सरकार नर्सिंगकर्मियों की कमी को नजरअंदाज कर रही है। चिकित्सा विभाग के आंकड़ों की मानें तो प्रदेश में नर्सिंग कैडर के 51 हजार 141 पद स्वीकृत हैं। इनके मुकाबले 41 हजार 955 पदों पर ही नर्सिंगकर्मी कार्यरत हैं। ऐसे में 9 हजार से ज्यादा नर्सेज के पद खाली चल रहे हैं, जिसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ता है।</p>
<p><strong>आईएनसी के अनुसार मरीज-नर्सेज अनुपात</strong><br />इंडियन नर्सिंग काउंसिल के तय मापदंडों के अनुसार आईसीयू में भर्ती तीन मरीजों पर एक नर्स का होना जरूरी है। अगर मरीज ज्यादा गंभीर है, तो एक बैड पर एक नर्स होनी चाहिए। जनरल वार्ड में छह मरीजों पर एक नर्स का होना बेहद जरूरी है।</p>
<p>प्रदेश में नर्सेज की भारी कमी है। ऐसे में मरीजों को उचित देखभाल नहीं मिल पाती है। हम राज्य सरकार से मांग करते हैं कि मरीजों की संख्या को देखते हुए नए नर्सेज की बड़ी तादाद में भर्ती की जाए।<br /><strong>- प्यारेलाल चौधरी, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन</strong></p>
<p>मरीजों के अनुपात में प्रदेश में इंडियन नर्सिंग काउंसिल के मापदंड पूरे नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में नर्सेज की भर्ती  की जाए, नर्सेज को कार्यस्थल पर सुरक्षा मुहैया कराई जाए, डॉक्टर्स की तर्ज पर नॉन प्रैक्टिस अलाउंस दिया जाए, जिससे नर्सेज मरीजों की और बेहतर सेवा कर सकें।।<br /><strong>- सुनील शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 May 2022 10:49:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>प्रदेश में 1500 मेगावाट बिजली की कमी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में बिजली संकट के बीच मांग 14 हजार मेगावाट पार कर गई। उपलब्धता एक से डेढ़ हजार मेगावाट कम है। सोलर और विंड एनर्जी भी पिछले दो दिन में कम मिलने से ऊर्जा विभाग कटौती करने को मजबूर है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/lack-of-1500-megawat-power-in-state/article-9188"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/264646.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में बिजली संकट के बीच मांग 14 हजार मेगावाट पार कर गई। उपलब्धता एक से डेढ़ हजार मेगावाट कम है। सोलर और विंड एनर्जी भी पिछले दो दिन में कम मिलने से ऊर्जा विभाग कटौती करने को मजबूर है। फिलहाल शादियों के चलते कटौती कम है, लेकिन आगामी दिनों में तीन से चार घंटे तक कटौती बढ़ना तय माना जा रहा है। ठप पड़ी उत्पादन इकाइयों को जल्द शुरू करने के लिए ऊर्जा विभाग ने कोटा, सूरतगढ़ और अन्य इकाइयों पर जयपुर से अफसर भेजे हैं। तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए युद्ध स्तर पर जारी काम के बाद भी 10 से 15 दिन सुधार में लगेंगे। छत्तीसगढ़ कोयला खदान से भी कोयला इस महीने के अंत तक मिलेगा। राहत की खबर यह है कि मौसम में बदलाव की वजह से उत्पादन निगम को अभी पावर एक्सचेंज के तहत सात से नौ रुपए प्रति यूनिट में बिजली उपलब्ध हो रही है। संकट का जल्द हल नहीं निकलने पर फिर से महंगी दर पर बिजली खरीदनी पड़ सकती है।</p>
<p><strong>मांग-आपूर्ति पर निर्भर है कटौती</strong><br />एक मई के बाद उपलब्धता के अनुसार घोषित से कुछ कम कटौती की गई है। प्रदेश में बिजली की डिमांड करीब 14 हजार मेगावाट मेगावाट और अधिकतम मांग लगभग 15 हजार मेगावाट रही। औसत उपलब्धता साढेÞ 12 से 13 हजार रही। डिमांड 15 हजार मेगावाट और उपलब्धता 13 हजार मेगावाट से कुछ अधिक रहने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक कटौती को बैलेंस करने के लिए शहरी और जिला-संभाग मुख्यालयों पर भी कटौती का समय बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 May 2022 10:11:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश में डॉक्टरों की कमी होगी दूर</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में जल्द ही डॉक्टरों की कमी दूर होने जा रही है। प्रदेश में वर्तमान में 2500 डॉक्टरों की कमी है। जल्द ही इन सभी पदों को भरा जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/lack-of-2500-doctors-in-state/article-7986"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/doctor-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में जल्द ही डॉक्टरों की कमी दूर होने जा रही है। प्रदेश में वर्तमान में 2500 डॉक्टरों की कमी है। जल्द ही इन सभी पदों को भरा जाएगा। जानकारी के अनुसार प्रदेश में 824 डॉक्टरों की स्थाई भर्ती को वित्त विभाग ने मंजूरी दे दी है। जल्द इनकी भर्ती की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इसके अलावा शेष पदों पर यूटीबी यानी अर्जेन्ट टेम्परेरी बेसिक पर रखने लिए जिला कलेक्टरों को अधिकार दे दिए हैं। वे अपने जिलों में व्याप्त कमी को दूर करने के लिए डॉक्टर रख सकते हैं।</p>
<p><strong>गांवों में सेवाएं होगी मजबूत, डॉक्टर को मनपंसद जगह मिलेगी</strong> <br />प्रदेश में वर्तमान में चिकित्सा विभाग में 13000 हजार कार्यरत हैं। सरकार सीधी भर्ती भी करती है। लेकिन डॉक्टर आते नहीं है। ऐसे में डॉक्टर यूटीबी आधार पर अपने मनपंसद जिलों में ज्वाइन कर सकेंगे। इनमें जिला स्तर पर डॉक्टरों की ज्वाइनिंग होंगे से क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में चुनौती बनी डॉक्टरों की कमी की पूर्ति हो सकेगी। खाली पद एकबारगी इनसे भरे जा सकेंगे।</p>
<p>मेडिकल कॉलेजों में भी इस तर्ज पर रखेंगे :वहीं दूसरी ओर प्रदेश में बने नए मेडिकल कॉलेजों में भी प्रिसिंपल स्तर पर खाली पदों को भरा जा सकेगा। इससे मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में विषय विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर किया जा सकेगा। वहीं दूसरी ओर सरकार को भी राष्टÑीय मेडिकल कमीशन के दौरे के वक्त कॉलेज की मान्यता के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।</p>
<p>824  डॉक्टरों की भर्ती जल्द होगी। वहीं शेष पदों को भी एक बारगी भरा जाए, इसके लिए जिला कलेक्टरों को यूटीबी आधार पर डॉक्टर रखने की छूट दे दी है। वे आवश्यकता अनुसार डॉक्टर रख सकते हैं। कमी दूर होने से चिकित्सा सेवाएं मजबूत होगी, निरोगी राजस्थान की ओर तेजी से बढ़ सकेंगे।<br /><strong>- परसादी लाल मीणा, चिकित्सा मंत्री  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Apr 2022 12:00:49 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ब्याज दरें यथावत</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय रिजर्व बैंक ने महंगाई और अर्थव्यवस्था में अपेक्षित सुधार न आने पर चिंता जताते हुए लगातार दसवीं बार भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AF%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A4/article-4451"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/shaktikanta-das_rbi_governor.jpeg" alt=""></a><br /><p>भारतीय रिजर्व बैंक ने महंगाई और अर्थव्यवस्था में अपेक्षित सुधार न आने पर चिंता जताते हुए लगातार दसवीं बार भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 4 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। यानी लोन ईएमआई पर राहत के लिए ग्र्राहकों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। रेपो रेट में कटौती के बाद बैंकों पर ब्याज दर में कटौती करते हैं तो ईएमआई भी कम हो जाती है। आरबीआई गर्वनर शक्ति कांत दास ने कहा कि मार्च तक महंगाई के और बढ़ने की संभावना है और सितंबर के बाद धीरे-धीरे राहत की उम्मीद की जा सकती है। बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने नीतिगत दरों में कोई बदलाव न करके साफ कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता विकास को रफ्तार देना है। जबकि इस बार बाजार से लेकर उद्योग जगत तक को नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद थी। फिर, कुछ समय से आरबीआई भी इस तरह के संकेत देते रहा है कि अब अर्थव्यवस्था उबरने लगी है और हालात सामान्य की ओर हैं, ऐसे में नीतिगत दरों को लंबे समय तक न्यूनतम स्तर पर बनाए रखना  न संभव है, न उचित। इस बार नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाना इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि अर्थव्यवस्था अभी अनिश्चितता के माहौल से निकल नहीं पाई है। इसलिए 2022-23 के प्रस्तावित बजट में भी सरकार का जोर उन उपायों पर ही रहा है, जिनसे बुनियादी क्षेत्र में तेजी का माहौल बन सकें और रोजगार के मौके बन सकें। जाहिर है ऐसे में रिजर्व बैंक नीतिगत दरें बढ़ाकर जोखिम मोल लेने की स्थिति में था नहीं। नीतिगत दरों में बदलाव न करने का पीछे का कारण यही रहा है कि वाणिज्यिक बैंक दरें न बढ़ा सकें और कर्ज सस्ता बना रहे। सरकार का जो पहले से ही यही रहा है कि बैंक कर्ज देने में उदार बनें रहें ताकि आर्थिक गतिविधियों में तेजी बनी रहे। लेकिन समस्या तो यह है कि जो लोग या उद्योग अब तक कर्ज लेने से बचते रहे, वे अब इसे प्राथमिकता क्यों देंगे? हालांकि जिसको जरूरत होगी, वह तो मजबूरी में कर्ज लेगा ही। रिजर्व बैंक ने हालांकि कर्ज को सस्ता बनाए रखने का प्रयास तो किया है, लेकिन यह मान लेना कि इससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, सही और व्यावहारिक प्रतीत नहीं होता। निजी निवेश गति नहीं पकड़ रहा है, उत्पादन घट रहा है, क्योंकि बाजार में मांग की कमी है। बेरोजगारी की दर का दायरा काफी बड़ा है। लोगों के पास खर्च करने को पैसा नहीं है। बाजार में मांग बढ़ाना आसान नहीं है, फिर महंगाई ने सब कुछ चौपट कर रखा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Feb 2022 14:25:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हिंदी को लेकर शाह का बड़ा बयान : कहा, मूल भाषा में शिक्षा दी जाती तो देश पिछड़ता नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[''हमारा देश पिछड़ गया, उसका मूल कारण है कि हमने अपनी पढ़ाई अपनी मूल भाषा नहीं की।''-अमित शाह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8---%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE--%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B2-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%9B%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82/article-2349"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/amit-shah-sambodhan.jpg" alt=""></a><br /><p>वाराणसी। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आजादी के बाद देश पर पिछड़े होने का धब्बा लगने के पीछे अपनी मूल भाषा में शिक्षा दीक्षा नहीं होने को मुख्य वजह बताते हुये कहा है कि ''हमारा देश पिछड़ गया, उसका मूल कारण है कि हमने अपनी पढ़ाई अपनी मूल भाषा नहीं की।'' शाह ने शनिवार को यहां राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आजादी के बाद देश को स्वराज तो मिल गया अब इसे 'सुराज' में बदलना है, मगर, स्वदेशी और स्वभाषा, पीछे छूट गये हैं। उन्होंने आह्वान किया कि आजादी के अमृत महोत्सव में हम पीछे छूटे इन लक्ष्यों को पूरा करें। <br />  </p>
<p> शाह ने देश को आजादी मिलने के बाद भी मातृ भाषा सहित अन्य स्थानीय भाषाओं के साथ सौतेला व्यवहार किये जाने को ऐतिहासिक भूल बताते हुये कहा कि अब वह समय चला गया है जब अपनी मूल भाषा जानने वालों को शर्म का अहसास करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि जो देश अपनी भाषाओं को भुला देता है वह देश अपना मौलिक ङ्क्षचतन भी खो देता है। इसीलिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंचों पर अपनी बात अपनी राजभाषा में ही रखी। <br />  </p>
<p>दो दिन के वाराणसी प्रवास पर आये शाह ने यहां स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में आयोजित अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुये यह बात कही। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार बनने के बाद राजभाषा सम्मेलन को दिल्ली से बाहर ले जाने का जब फैसला किया तो यह सौभाग्य की बात है कि यह सम्मेलन अपने पहले पड़ाव के रूप में भाषाओं के गोमुख कहे जाने वाले शहर वाराणसी में पहुंचा।  <br /> <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Nov 2021 16:06:57 +0530</pubDate>
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                <title>CM गहलोत ने PM मोदी को लिखा पत्र... जाने वजह</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यों को मिलने वाले करों के हिस्से में लगातार की जा रही कमी वित्तीय संघवाद की भावना के विपरीत - मुख्यमंत्री]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cm-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%A8%E0%A5%87-pm-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0----%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%9C%E0%A4%B9/article-2198"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/gehlot-modi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया है आमजन को पूर्ण राहत देने के लिए कि केन्द्र सरकार द्वारा पेट्रोल एवं डीजल पर केन्द्रीय पूल की अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी एवं विशेष एक्साइज ड्यूटी को और कम किया जाए, ताकि आमजन को एक्साइज ड्यूटी एवं वैट में कमी का लाभ एक साथ मिल सके। साथ ही, उन्होंने तेल कम्पनियों को पेट्रोल-डीजल के मूल्य में निरन्तर वृद्धि पर रोक लगाने के लिए पाबंद करने का भी आग्रह करते हुए कहा कि तेल कम्पनियों द्वारा रोज-रोज की जा रही बढ़ोतरी से केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा आमजन को दी गई राहत का लाभ शून्य हो जाएगा।<br /> <br />  गहलोत ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि केन्द्र सरकार द्वारा राज्य की बकाया जीएसटी पुनर्भरण राशि का शीघ्र भुगतान किया जाए एवं जीएसटी पुनर्भरण की अवधि वर्ष 2027 तक बढ़ाई जाए। पत्र में उन्होंने लिखा कि हमारी अपेक्षा है कि केन्द्र सरकार एक्साइज ड्यूटी में पेट्रोल पर अतिरिक्त 10 रूपये प्रति लीटर व डीजल पर अतिरिक्त 15 रूपये प्रति लीटर की कमी करे। केन्द्र द्वारा एक्साइज ड्यूटी कम करने पर प्रदेश के वैट में भी 3.4 रूपये प्रति लीटर पेट्रोल पर तथा 3.9 रूपये प्रति लीटर डीजल पर आनुपातिक रूप से स्वतः ही कम हो जाएंगे। इसके परिणामस्वरूप राज्य के राजस्व में 3500 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष की अतिरिक्त हानि होगी जिसे जनहित में राज्य सरकार वहन करने के लिये तैयार है।</p>
<p><br /> गहलोत ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2016 से लगातार पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली बेसिक एक्साइज ड्यूटी को कम कर राज्यों के साथ साझा किये जाने वाले हिस्से को घटा दिया गया तथा विशेष एवं अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी जिसका कोई हिस्सा राज्यों को नहीं मिलता, उसे लगातार बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी में वृद्धि एवं एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट सेस का लाभ केवल केन्द्रीय राजस्व को मिल रहा है, जबकि डिविजीबल पूल में आने वाली बेसिक एक्साइज ड्यूटी में उत्तरोत्तर कमी की गई है, इससे राज्यों को मिलने वाले करों के हिस्से में कमी आई है। उन्होंने कहा कि राज्यों के हिस्से में लगातार की जा रही कमी वित्तीय संघवाद (फिस्कल फेडरेलिज्म) के सिद्धांतों के विपरीत है।</p>
<p><br /> मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में निर्वाचित सरकारों को प्रदेश के विकास एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन जुटाने होते हैं। आमजन तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने में राज्यों की भौगोलिक स्थिति, आर्थिक परिदृश्य एवं स्थानीय परिस्थितियों का भी प्रभाव पड़ता है। इन परिस्थितियों में विभिन्न विकास योजनाओं के लिए आवश्यक राजस्व संग्रहण के लिए करारोपण करना राज्यों को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है। उन्होंने कहा कि केन्द्र द्वारा पेट्रोल-डीजल पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी एवं विशेष एक्साइज ड्यूटी को पहले अत्यधिक बढ़ाना एवं बाद में कम कर राज्यों से वैट कम कराने के लिए परस्पर प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बनाना भी सहकारी संघवाद (कॉपरेटिव फेडरेलिज्म) की भावना के विपरीत है।</p>
<p><br /> गहलोत ने कहा कि कोविड संक्रमण में लॉकडाउन के दौरान 6 मई, 2020 को केन्द्र सरकार ने पेट्रोल पर 10 रुपये एवं डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई थी। 4 नवम्बर, 2021 से पेट्रोल पर 5 रुपये एवं डीजल पर 10 रुपये कम कर जनता को राहत देने की बात की जा रही है। जबकि वास्तविकता यह है कि वर्ष 2021 में ही पेट्रोल की कीमत करीब 27 रुपये एवं डीजल की कीमत करीब 25 रुपये बढ़ी। अत्यधिक बढ़ाई गई अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी में से केवल कुछ छूट दी गई। ऐसे में, केन्द्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती अपर्याप्त प्रतीत होती है।</p>
<p><br /> मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान राज्य के कुल राजस्व का 22 प्रतिशत से अधिक पेट्रोल-डीजल के वैट से आता है। वैट में कमी के रूप में राजस्थान सरकार 29 जनवरी, 2021 से अब तक लगभग 3 रूपये प्रति लीटर पेट्रोल पर तथा 3.8 रूपये प्रति लीटर डीजल पर कम कर चुकी है। इससे राज्य के राजस्व में 2800 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष की हानि हो रही है। कोविड-19 की परिस्थितियों के कारण इस वित्तीय वर्ष में राज्य के राजस्व में माह अक्टूबर तक 20 हज़ार करोड़ रूपये की कमी आई है। केन्द्र द्वारा राज्य को 5963 करोड़ रूपये का जीएसटी पुनर्भरण उपलब्ध नहीं कराना भी इसका एक बड़ा कारण है। ऐसी स्थिति में  भी हमारी सरकार ने कुशल वित्तीय प्रबन्धन से प्रदेश में विकास की गति को कम नहीं होने दिया। राज्य सरकार जन घोषणा तथा बजट में किये वादों को समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिये तत्पर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Nov 2021 11:08:39 +0530</pubDate>
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